अध्याय-8
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा
यह पत्र मैं तुम्हें काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लिख रहा हूँ।
काजीरंगा उद्यान असम में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित है। यहाँ विभिन्न प्रकार के पशु व पक्षी हैं। आज सुबह ही हम हाथियों पर चढ़कर उद्यान देखने गए। इसके लिए हमें बहुत सवेरे उठना पड़ा – तब सूरज भी नहीं निकला था।
उद्यान में सैकड़ों पशु थे। हिरण और जंगली भैंसों के कई झुंड आराम से घास चर रहे थे। उनमें कुछ एक सींग वाले गैंडे भी थे। इसी पशु के कारण काजीरंगा पूरे संसार में प्रसिद्ध हो गया है।
हिरणों और भैंसों ने हमें संदेह की दृष्टि से देखा और अलग हट गए। पर गैंडे वहीं जमे रहे। हमने एक सींग वाला गैंडा पहली बार देखा। यह हाथी के बाद भारत का सबसे बड़ा पशु है। इसको इंडियन राइनो (भारतीय गैंडा) भी कहते हैं। यह केवल भारत और नेपाल के जंगलों में पाया जाता है।
इंडियन राइनो (भारतीय गैंडे) के शरीर पर मोटी तह होती है, जैसे वह कवच पहने हो। इस पर हमारे महावत ने एक रुचिकर कथा सुनाई।
भगवान कृष्ण ने एक बार सोचा कि हाथी के बदले गैंडे को रणक्षेत्र में भेजा जाए। उन्होंने उसे कवच पहनाकर अभ्यास कराया। पर गैंडा निर्देशों का पालन न कर सका। बस भगवान कृष्ण ने कवच सहित ही उसे वापस वन में भेज दिया।
सैकड़ों वर्ष पहले इंडियन राइनो (भारतीय गैंडे) पश्चिम में पेशावर से लेकर पूर्व में असम तक पाए जाते थे। पर लोगों ने राइनो के सींग पाने के लिए उनका शिकार किया। लोग यह मानते थे कि सींग में औषधि-संबंधी गुण हैं। बाद में वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया कि सींग में ऐसा कुछ नहीं है। इंडियन राइनो (भारतीय गैंडों) का शिकार इतनी अधिक संख्या में हुआ है कि अब उनकी संख्या कम हो गई है। इनमें आधे से अधिक काजीरंगा में रहते हैं। इसीलिए पूरे संसार से पशु-प्रेमी इसे देखने काजीरंगा आते हैं।
हमारा हाथी आगे बढ़ा तो एक मादा राइनो (गैंडा) अपने बच्चे के साथ दिखाई दी। महावत हमें पास नहीं ले गए। उन्होंने कहा कि शिशु साथ में हो तो मादा राइनो (गैंडा) हिंसक हो जाती है। हाथी के पास आने पर वह हमला कर सकती है।
सुबह की यात्रा में हमने हिरणों के अनेक झुंड देखे। काजीरंगा में चार प्रकार के हिरण हैं – भौंकने वाले हिरण, बौने सूअर हिरण, दलदली हिरण और साँभर हिरण। हमें वहाँ जंगली सूअर भी दिखाई दिए।
हमारी यात्रा शीघ्र समाप्त हो गई। मेरा मन अभी भरा नहीं था। अगले दिन सुबह का नाश्ता करके हम फिर निकल पड़े। इस बार हम जीप में गए। साथ में वन संरक्षक भी था।
ड्राइवर हमें एक बील यानी झील की ओर ले गया। बील पर सैकड़ों पक्षियों के झुंड थे – पेलिकन (एक जल पक्षी), सारस, बगुला और कलहोन इत्यादि। एक ही स्थान पर इतने सारे पक्षी मैंने कभी नहीं देखे थे। बील के पानी में कुछ ऊदबिलाव भी उछल-कूद कर रहे थे।
लौटते समय तो हमारे भाग्य ही खुल गए। सामने जंगली हाथियों का एक झुंड दिखा। हमें बहुत प्रसन्नता हुई। झुंड में पाँच-छह बच्चे थे। जब तक पूरे झुंड ने रास्ता पार नहीं कर लिया, तब तक एक विशाल हाथी खड़ा निगरानी करता रहा।
काजीरंगा में मांसाहारी रॉयल बंगाल टाइगर भी हैं पर हमें दिखे नहीं। गाइड ने बताया कि उन्हें देखना कठिन है क्योंकि वे रात में ही निकलते हैं।
कुल मिलाकर यह एक अद्भुत अनुभव रहा। काजीरंगा में अलग-अलग प्रजाति के पशु शांति और भाईचारे से संग-संग रहते हैं। मेरे मन में यह बात बार-बार उठ रही थी कि क्यों नहीं मानव भी इनकी तरह ही शांतिपूर्वक मिल-जुलकर रहता! हम अपने वन्य-साथियों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। है न!
तुम्हारे चाचा
अरूप
- अरूप कुमार दत्ता
(रत्न सागर प्रकाशन से साभार)
बातचीत के लिए
- 1. नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए। इसमें कौन-से पशु-पक्षी दिखाए गए हैं?
- 2. आपने इन पशु-पक्षियों को कहाँ-कहाँ देखा है?
- 3. इस पाठ में पशुओं के स्वभाव के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
- 4. आप कहाँ-कहाँ की यात्रा पर जाना चाहेंगे और क्यों?
पाठ से
- निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर पर तारे का चित्र (*) बनाइए। यहाँ एक से अधिक उत्तर भी सही हो सकते हैं।
- 1. चाचा अरूप को यात्रा के समय किसने संदेह की दृष्टि से देखा?
- (क) गैंडों ने ( )
- (ख) हिरणों ने ( )
- (ग) भैंसों ने ( )
- (घ) हाथियों ने ( )
- 2. काजीरंगा में रॉयल बंगाल टाइगर भी हैं पर उन्हें देखना कठिन है, क्योंकि -
- (क) वे कभी दिखाई नहीं देते। ( )
- (ख) वे बड़े हिंसक होते हैं। ( )
- (ग) वे रात में ही निकलते हैं। ( )
- (घ) वे कभी बाहर नहीं निकलते।
- 3. एक विशाल हाथी तब तक निगरानी करता रहा जब तक –
- (क) लेखक और उसके मित्र निकल नहीं गए। ( )
- (ख) जीप वहीं खड़ी रही। ( )
- (ग) पूरे झुंड ने रास्ता पार नहीं कर लिया। ( )
- (घ) वहाँ से बाघ चला नहीं गया। ( )
सोचिए और लिखिए
- 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए -—
- (क) यह पाठ एक पत्र है। यह पत्र किसने, किसे और क्यों लिखा है?
- (ख) मादा गैंडा कब और क्यों हिंसक हो जाती है?
- (ग) भारतीय गैंडों की संख्या क्यों घट रही है?
- (घ) भगवान कृष्ण ने हाथी के स्थान पर गैंडे को रणक्षेत्र में भेजने का विचार क्यों छोड़ दिया?
- (ङ) प्रथम दिन की यात्रा के बाद लेखक का मन क्यों नहीं भरा?
-
2. दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए। यहाँ पक्षी से संबंधित एक प्रश्न दिया गया है। अब आप भी अपनी लेखन-पुस्तिका में इस पक्षी से संबंधित तीन और प्रश्नों का निर्माण कीजिए - - उदाहरण -
- यह चित्र किस पक्षी का है?
भाषा की बात
- 1. कोष्ठक में से उचित शब्द का चयन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
- (क) आज ..............ही हम हाथियों पर चढ़कर उद्यान देखने गए। (भोर, सुबह)
- (ख) हमने एक सींग वाला गैंडा ..........बार देखा। (पहले, पहली)
- (ग) हमारी यात्रा कुछ ...............ही समाप्त हो गई। (धीरे, जल्दी)
- (घ) ड्राइवर हमें एक बील यानी झील की................... ले गया। (और, ओर)
- (ङ) मार्गदर्शक (गाइड) ने बताया ...................उन्हें देखना कठिन है। (कि, की)
- 2. "सामने जंगली हाथियों का एक झुंड दिखा।”
- यहाँ 'झुंड' शब्द का प्रयोग हाथियों के समूह के लिए किया गया है। भिन्न-भिन्न समूहों के लिए ऐसे ही कुछ अन्य शब्दों का प्रयोग किया जाता है, जैसे- अंगूरों का गुच्छा, जूतों की जोड़ी आदि।
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छत्ता |
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गुच्छा |
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भीड़ |
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गटठर |
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झंड |
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रेवड़ |
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कक्षा |
(ख) अब मिलान किए गए समूह वाले शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए। जैसे – मेले में लोगों की बहुत भीड़ थी।
- 3. घोड़ा घास खाता है। घोड़ा शाकाहारी है।
ऊपर दिए गए वाक्यों में एक ही बात दो प्रकार से व्यक्त की गई है, जैसे– 'घोड़ा घास खाता है' वाक्य में 'घास खाने वाला' वाक्यांश के लिए एक शब्द 'शाकाहारी' का प्रयोग किया गया है। अनेक शब्दों के लिए इस प्रकार के एक शब्द के प्रयोग से वाक्य के अर्थ में कोई अंतर नहीं आता।
- अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित वाक्यांशों के स्थान पर तालिका में से एक शब्द चुनकर वाक्यों को पुनः लिखिए -
- (क) काजीरंगा का सौंदर्य देखने योग्य है।
- (ख) रश्मि का कार्य प्रशंसा के योग्य है।
- (ग) गौरव को उसके सहपाठी मधुर बोलने वाला लड़का मानते हैं।
- अग्रज
- (घ) विद्यालय में सप्ताह में एक बार श्रमदान किया जाता है।
- (ङ) मेरा बड़ा भाई सैनिक है।
पाठ से आगे
- 1. इस पत्र में बहुत-से प्राणियों के नाम आए हैं। आप उन प्राणियों को किस नाम से पुकारते हैं? अपने अभिभावकों की सहायता से कुछ पशु-पक्षियों के नाम यहाँ लिखिए -
- .................
- .................
- .................
- .................
- .................
- .................
- 2. नीचे भारत के मानचित्र में कुछ प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान दर्शाए गए हैं। इसमें दी गई सूचनाओं को समझते हुए दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

- (क) हाथियों के लिए प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान कौन-से राज्य में स्थित है?
- (ख) सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में स्थित है और यह किसलिए प्रसिद्ध है?
- (ग) भारत का सबसे पुराना और प्रथम राष्ट्रीय उद्यान कौन-सा है और यह किस राज्य में स्थित है?
- (घ) स्तंभ 'क' और स्तंभ 'ख' का उचित मिलान कीजिए -
.........................
..........................
..........................
| स्तंभ 'क' | स्तंभ 'ख' |
|---|---|
| i. पेरियार राष्ट्रीय उद्यान | i. दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों का घर |
| ii. एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध | ii. केरल |
| iii. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान | iii.सिमलिपाल राष्ट्रीय उद्यान |
| iv. ओडिशा | iv. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान |
| V. कान्हा राष्ट्रीय उद्यान | V. मध्यप्रदेश |
यह भी जानें
राष्ट्रीय उद्यान एक ऐसा क्षेत्र है जिसे सरकार द्वारा प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण के लिए सुरक्षित रखा जाता है। यहाँ उपस्थित पेड़-पौधे, पशु-पक्षी अपनी प्राकृतिक अवस्था में संरक्षित रहते हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान के अनुसार वर्तमान में भारत में 106 राष्ट्रीय उद्यान हैं।
पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
- 1. विद्यालय के पुस्तकालय में जाकर भारत के किसी एक पक्षी अभयारण्य के बारे में पढ़िए। अपने समूह में मिलकर वहाँ पाए जाने वाले पशु-पक्षियों के चित्र एकत्रित कर या बनाकर उन्हें अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। आप अपनी प्रस्तुति में निम्नलिखित जानकारी सम्मिलित कर सकते हैं -
- (क) पक्षी अभयारण्य क्या है?
- (ख) इनकी स्थापना करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- (ग) वर्तमान में भारत में कुल कितने राष्ट्रीय पक्षी अभयारण्य हैं?
- (घ) भारत के पाँच प्रसिद्ध राष्ट्रीय पक्षी अभयारण्य कौन-से हैं?
- (ङ) इनमें कौन-से पशु-पक्षी पाए जाते हैं?
- इस जानकारी को ढूँढ़ने तथा लिखने के लिए आप पुस्तकालय, अभिभावक या किसी अन्य स्रोत की सहायता भी ले सकते हैं।
- 2. नीचे दिए गए बादलों में मछली और बंदर का चित्र बनाया गया है। अब आप भी दिए गए बिंदुओं को मिलाकर चित्र पूरा कीजिए और उसमें रंग भरिए -
घूमो-देखो
लोकतक झील - मणिपुर
मणिपुर राज्य की लोकतक झील भारत की ऐसी एकमात्र ताजा पानी की झील है जो तैरती हुई दिखाई देती है। इस सुंदर झील में घनी जलीय घास के बड़े-बड़े हिस्से तैरते रहते हैं जिन्हें 'फुमदी' कहते हैं। सोचिए ! इन फुमदियों पर मछुआरे अपनी झोंपड़ी बनाकर रहते हैं। 'फुमदी' का सबसे बड़ा द्वीप 40 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का है। इस द्वीप पर भारत तथा विश्व का एकमात्र तैरता हुआ नेशनल पार्क स्थित है जो 'केईबुल लामजाओ' नाम से जाना जाता है। भारतीय वैज्ञानिकों के अनुसार 'फुमदी' में बहु-एंजाइम उत्पादक जीवाणु और पौधों की वृद्धि के लिए उपयोगी रसायन भी मौजूद होते हैं। यहाँ अनेक जलीय पौधे और जानवर बिना संरक्षण के फल-फूल रहे हैं। मणिपुर का राज्य पशु 'संगई हिरण' भी इस क्षेत्र में घूमता हुआ दिख जाता है।
हरे-भरे पहाड़ों की नगरी - कूर्ग (कर्नाटक)
कूर्ग या कोडागु, एक बहुत सुंदर पर्यटन स्थल है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह कर्नाटक का एक प्रशासनिक ज़िला है। यहाँ के हरे-भरे पहाड़, घने जंगलों, मसालों और चाय-कॉफी के बागानों से भरे पड़े हैं। इस कारण इसकी सुंदरता अद्भुत है। कूर्ग तीन तालुकों (क्षेत्रों) से मिलकर बना है- मदिकेरी, सोमवारपेट और विराजपेट। कूर्ग अपने शांत वातावरण तथा सुंदरता के लिए पर्यटकों के मनपसंद स्थलों में से एक है। यहाँ का मौसम अधिकतर सौम्य ही रहता है। गरमी के मौसम में भी यहाँ का तापमान अधिक नहीं रहता। कूर्ग की मंडलपट्टी पहाड़ी की ऊँचाई से आप आकाश में घूमते बादलों को समीप से देखने का आनंद उठा सकते हैं।
कूर्ग कावेरी नदी का उद्गम स्थान भी है। यहाँ के ब्रह्मगिरि तथा पुष्पगिरि अभयारण्य अनेक दुर्लभ पशु-पक्षियों के घर हैं, जैसे- एशियाई हाथी, चित्तीदार हिरण, सांभर हिरण, गौर (भारतीय बाइसन) आदि पशु तथा ग्रे होर्नबिल, नीलगिरि फ्लाईकैचर, पन्ना कबूतर आदि पक्षी।






