अध्याय-10
तीन मछलियाँ
बहुत समय पहले की बात है। उत्तर भारत के एक सुंदर सरोवर में तीन मछलियाँ रहती थीं जिनमें गाढ़ी मित्रता थी। तीनों मछलियाँ सरोवर की अन्य मछलियों के साथ मिल-जुलकर विनोद और सैर करती रहती थीं। इनमें से पहली मछली का नाम था अनागतविधाता। वह बहुत बुद्धिमती थी और अपने नाम के अनुसार भविष्य की संभावित समस्याओं का हल पहले से ही निकालकर रखती थी। दूसरी मछली का नाम था प्रत्युत्पन्नमति। जैसा उसका नाम था वैसी ही तीक्ष्ण और तीव्र उसकी बुद्धि थी। वह भविष्य की किसी भी आशंकित समस्या का पहले से समाधान करने की आवश्यकता नहीं समझती थी क्योंकि उसकी सूझ-बूझ इतनी पैनी थी कि वह समय पड़ने पर किसी भी उलझन का हल क्षण भर में निकाल लेती थी। तीसरी मछली का नाम था यद्भविष्य। अपने नाम के अर्थ को वह भी सार्थक करती थी। वह किसी भी संकट की संभावना पर ध्यान नहीं देती थी तथा श्रम और चिंतन से बचती थी। उसका मत था कि 'यत्न करने और सोचने-विचारने से कोई लाभ नहीं क्योंकि 'जो होना होगा सो तो होगा ही' इसलिए सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड़ देना चाहिए और निश्चिंत होकर आनंद से रहना चाहिए।
एक दिन शाम के समय उस सरोवर के किनारे से अकस्मात् दो मछुआरे निकल रहे थे। उन मछुआरों ने यह सरोवर पहले कभी नहीं देखा था। इतना रमणीय स्थान देखकर वे सरोवर के किनारे विश्राम करने बैठ गए। क्षण भर में उनका ध्यान पानी में सैर करती हुई मछलियों पर गया। "अरे! देखो इस सरोवर में कितनी ड़ी-बड़ी मछलियाँ हैं" पहला मछुआरा बोला। “हाँ, हाँ, और इतनी सारी मछलियाँ एक ही जगह हमने पहले कभी नहीं देखीं" दूसरा मछुआरा बोला। पहले मछुआरे ने फिर कहा, "भाई कल सवेरे हम यहाँ बड़ा जाल लेकर आएँगे और इन सब मछलियों को पकड़ेंगे।" "ठीक है" दूसरे मछुआरे ने सहर्ष सम्मति दिखाई और दोनों मछुआरे उत्साह से उठकर घर की ओर चल दिए।
मछुआरों की बातें तीनों मछलियों ने सुन लीं। उन्होंने तुरंत सरोवर की सभी मछलियों को बुलाकर एक सभा की। अनागतविधाता ने सब मछलियों को संबोधित करके बताया
कि दो मछुआरे अगले दिन सवेरे सरोवर पर जाल डालकर सब मछलियों को पकड़ने की योजना बना रहे हैं। यह सुनकर सब मछलियाँ भयभीत हो गईं और पूछने लगीं कि क्या करना चाहिए। अनागतविधाता ने कहा कि इस संकट से बचने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि सवेरा होने से पहले हम सब यह सरोवर छोड़कर पास के
दूसरे सरोवर में चले जाएँ। इस पर प्रत्युत्पन्नमति ने कहा कि मैं तो यहीं रहूँगी और यदि मछुआरे आएँगे तो उस समय की परिस्थिति देखकर कुछ उपाय ढूँढ़ लूँगी। यद्भविष्य तो स्वभाव से ही आलस्यमयी थी। वह कहने लगी कि मैं तो अपने इस पुराने निवास स्थान को छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगी। भाग्य में जो लिखा होगा वही होगा, मुझे कुछ
करने की आवश्यकता नहीं है। यदि भाग्य में बचना लिखा होगा तो हम सब बच ही जाएँगे। हो सकता है मछुआरे आएँ ही नहीं। इसके पश्चात अनागतविधाता और बहुत-सी मछलियाँ घर छोड़कर पास के दूसरे सरोवर में चली गईं। प्रत्युत्पन्नमति, यद्भविष्य और कुछ अन्य मछलियाँ जो यद्भविष्य की राय से सहमत थीं, वहीं रहीं।जब सवेरा हुआ तो सरोवर की मछलियाँ मना रहीं थीं कि कदाचित् मछुआरे नहीं आएँगे। परंतु थोड़ी ही देर में मछुआरों की ध्वनियाँ सुनाई पड़ीं और उन्होंने आकर जाल डाल दिया और सभी मछलियों को पकड़ लिया। प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य भी जाल में फँस गई थीं। मछुआरे बड़े प्रसन्न थे कि इतनी स्वस्थ और बड़ी-बड़ी मछलियाँ उन्होंने पकड़ ली हैं।
अब प्रत्युत्पन्नमति अपने बचने का उपाय बड़ी तीव्रता से सोचने लगी और उसे तुरंत सूझ गया कि क्या करना चाहिए। मछुआरों की बातचीत से वह समझ गई कि उन्हें स्वस्थ और जीवित मछलियाँ ही चाहिए। उसने उसी क्षण अपना शरीर सिकोड़ लिया और आँखें बंद करके निर्जीव सी बनकर पड़ गई। मछुआरे मछलियों को सँभालने लगे तो देखा कि एक मरी हुई मछली है। उन्होंने तुरंत प्रत्युत्पन्नमति को जाल से निकालकर सरोवर में फेंक दिया और अपनी प्रत्युत्पन्न बुद्धि के कारण उसकी जान बच गई। पर यद्भविष्य की जान नहीं बच सकी और मछुआरे उसे और उसकी साथी मछलियों को लेकर चलते बने।
मालती देवी
(पंचतंत्र पर आधारित)
पंचतंत्र नीति साहित्य का एक विशिष्ट ग्रंथ है जिसे लगभग 2500 से 3000 वर्ष पूर्व भारत में रचा गया था। इसके लेखक प्रसिद्ध आचार्य विष्णु शर्मा माने जाते हैं। पंचतंत्र का निर्माण एक शिक्षण सामग्री के रूप में किया गया था जिसका उद्देश्य बच्चों को रोचक कथाओं के माध्यम से जीवन-मूल्य सिखाना था। इस ग्रंथ में नैतिक शिक्षा देने के उद्देश्य से लिखी कहानियाँ हैं जो विभिन्न पशु-पक्षियों के
माध्यम से प्रस्तुत की गई हैं। ये कहानियाँ न केवल बच्चों अपितु वयस्कों के लिए भी जीवन के विभिन्न पहलुओं का बोध कराने में सार्थक हैं और आज के युग में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी प्राचीन समय में थीं।
बातचीत के लिए
- 1. क्या आपने कभी नदी, पोखर या समुद्र तट का भ्रमण किया है? आपने वहाँ क्या-क्या देखा?
- 2. क्या किसी कार्य को भाग्य के भरोसे छोड़ना चाहिए? अपने उत्तर का कारण दीजिए।
- 3. यद्भविष्य मछुआरों से अपने प्राण नहीं बचा पाई। यदि उसके स्थान पर आप होते तो मछुआरों से अपने प्राण कैसे बचाते?
- 4. आपको कौन-सी मछली सबसे अच्छी लगी और क्यों?
पाठ से
- 1. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर पर मछली का चित्र ( से अधिक विकल्प भी सही हो सकते हैं। ) बनाइए। एक
- (क) अनागतविधाता को बहुत बुद्धिमती किस कारण से बताया गया है?
- (i) नाम के अनुरूप स्वभाव होने के कारण ( )
- (ii) सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड़ देने और चिंता न करने के कारण ( )
- (iii)भविष्य की संभावित समस्याओं का हल पहले से ही निकाल लेने के कारण ( )
- (iv) श्रम और चिंतन से बचने की प्रवृत्ति के कारण ( )
- (ख) मछुआरों की बातें सुनकर सभी मछलियों ने सभा क्यों की?
- (i) गप-शप के लिए ( )
- (ii) अपने प्राण बचाने हेतु कोई उपाय ढूँढ़ने के लिए ( )
- (iii)मछुआरों को अपने जाल में फँसाने के लिए ( )
- (iv) पास के दूसरे सरोवर में जाने के लिए ( )
(ग) मछुआरों ने प्रत्युत्पन्नमति को जाल में से बाहर क्यों फेंक दिया?
- (i) उन्हें जीवित मछलियाँ चाहिए थीं। ( )
- (ii) उन्हें प्रत्युत्पन्नमति सुंदर नहीं लगी। ( )
- (iii) जाल में बहुत अधिक मछलियाँ थीं। ( )
- (iv) उनसे जाल उठाया नहीं जा रहा था। ( )
- (i) अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति और अन्य सभी बड़ी-बड़ी मछलियाँ ( )
- (ii) प्रत्युत्पन्नमति, यद्भविष्य और अन्य सभी बड़ी-बड़ी मछलियाँ ( )
- (iii) अनागतविधाता और अन्य सभी बड़ी-बड़ी मछलियाँ ( )
- (iv) प्रत्युत्पन्नमति, यद्भविष्य और अनागतविधाता ( )
2. स्तंभ 'क' और स्तंभ 'ख' में आपस में संबंध रखने वाले शब्दों व कथनों का मिलान कीजिए -
| स्तंभ 'क' | स्तंभ 'ख' |
|---|---|
| सुंदर -------> | सरोवर |
| अनागतविधाता | आलसी |
| प्रत्युत्पन्नमति | मछलियाँ |
| बड़ी-बड़ी | तीक्ष्ण और तीव्र बुद्धि |
| यद्भविष्य | बुद्धिमती |
सोचिए और लिखिए
- 1. प्रत्युत्पन्नमति पहले से ही समस्या का समाधान करने की आवश्यकता क्यों नहीं समझती थी?
- 2. सभी मछलियों के भयभीत होने का क्या कारण था?
- 3. 'जो होना होगा सो तो होगा ही', यह किस मछली का मानना या और वह ऐसा क्यों मानती थी?
- 4. अनागतविधाता ने मछुआरों की योजना से बचने के लिए क्या उपाय सुझाया?
- 5. प्रत्युत्पन्नमति ने मछुआरों से बचने के लिए क्या उपाय किया?
भाषा की बात
1. कहानी में आए कुछ संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण तथा क्रिया शब्द नीचे शब्द सरोवर में दिए गए हैं। इनकी पहचान करते हुए उन्हें उनके संबंधित परिवार के स्थान पर लिखिए -
| शब्द सरोवर | ||||
|---|---|---|---|---|
| कुछ | सभा | वह | बचना | सुंदर |
| तीन | सरोवर | पहली | रहना | हमने |
| मछली | सोचना | अच्छा | उन्होंने | मछुआरा |
| यद्भविष्य | दो | लिखना | जाना | मैं |
| संज्ञा | सर्वनाम | विशेषण | क्रिया |
|---|---|---|---|
| .............. | .............. | .............. | .............. |
| .............. | .............. | .............. | .............. |
| .............. | .............. | .............. | .............. |
| .............. | .............. | .............. | .............. |
2. कहानी में आए एकवचन और बहुवचन शब्दों की खोज करते हुए निम्न तालिका को दिए गए उदाहरण के अनुसार पूर्ण कीजिए -
| एकवचन शब्द | बहुवचन शब्द |
|---|---|
| मछली | मछलियाँ |
| .......... | ध्वनियाँ |
| मैं | ............ |
| ............ | ............ |
| ............ | ............ |
3. नीचे दिए गए उपयुक्त शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
- (क) मछुआरों का ध्यान पानी में सैर करती हुई मछलियों .................गया।
- (ख) मछुआरों ..................बातें तीनों मछलियों.............. सुन लीं।
- (ग) वह कहने लगी कि मैं तो अपने इस पुराने निवास स्थान................ छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगी।
- (घ) उत्तर भारत.............. एक सुंदर सरोवर तीन................ मछलियाँ रहती थीं।
4. दिए गए विराम चिह्नों में से उचित विराम चिह्न का प्रयोग करते हुए नीचे दिए गए वाक्यों को पुनः अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए -
,
!
Ι
“”
-
- (क) एक समय की बात है
- (ख) पहला मछुआरा बोला अरे देखो इस सरोवर में कितनी बड़ी बड़ी मछलियाँ हैं
- (ग) मछुआरों ने सरोवर में अनागतविधाता प्रत्युत्पन्नमति यद्भविष्य और बड़ी बड़ी स्वस्थ मछलियाँ देखीं
- (घ) हाँ हाँ और इतनी सारी मछलियाँ एक ही जगह हमने पहले कभी नहीं देखीं दूसरा मछुआरा बोला
- (ङ) मछुआरों की बातें तीनों मछलियों ने सुन लीं
अनुमान और कल्पना
- 1. प्रत्युत्पन्नमति ने मछुआरों से बचने की जो योजना बनाई, यदि वह उसमें सफल न होती तो उसकी अन्य योजना क्या हो सकती थी?
- 2. क्या आपने समुद्र देखा है? अनुमान लगाकर बताइए कि समुद्र में इतना अधिक जल कहाँ से आता है।
- 3. अपनी सूझ-बूझ के कारण प्रत्युत्पन्नमति मछुआरों से बच गई। मान लीजिए कि वह तैरकर पास के सरोवर में अपनी मित्र अनागतविधाता के पास पहुँच गई। दोनों में आपस में क्या-क्या बातचीत हुई होगी? अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
बूझो तो जानें
1. नीचे पानी में तैरती हुई मछलियों को ध्यान से देखिए और बताइए कि इनमें से बिलकुल एक जैसी दो मछलियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर - अंक 2 और 4 की मछलियाँ
पुस्तकालय से
विद्यालय के पुस्तकालय में जाकर कहानी में आए निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश की सहायता से लिखिए -
1.शब्द : गाढ़ी
अर्थ : घनिष्ठ, गहरी
2.शब्द : विनोद
अर्थ :.....................
3.शब्द : तीक्ष्ण
अर्थ : :............................
4.शब्द : चिंतन
अर्थ : ............................
5.शब्द : विश्राम
अर्थ : ............................
6.शब्द : श्रम
अर्थ :............................
खड्ढे हैं अंगूर
आपकी अभिव्यक्ति
जैसा कि आपने इस पाठ के परिचय में पढ़ा, पंचतंत्र की रचना प्राचीन काल में की गई थी। समय के साथ पंचतंत्र का प्रसार अरब देशों एवं यूरोप समेत विश्व के अनेक भागों में हुआ। प्राचीन यूनान (वर्तमान ग्रीस) में रचित और संपूर्ण यूरोप में प्रचलित ईसप की दंतकथाएँ भी पंचतंत्र की प्रेरणा से ही रची गईं और कालांतर में संपूर्ण विश्व में प्रसारित हुईं। आपने इन्हीं दंतकथाओं में से एक कहानी 'लोमड़ी और अंगूर' या 'खट्टे हैं अंगूर' के नाम से पढ़ी या सुनी होगी।
दिए गए चित्र की सहायता से 'खट्टे हैं अंगूर' कहानी को अपने शब्दों में कविता या कहानी के रूप में लिखिए। इस गतिविधि में आप अपने शिक्षक या अभिभावक की सहायता भी ले सकते हैं।