अध्याय-12
गंगा की कहानी
मेरा जन्म हिमालय की गोद में हुआ था। नन्ही-सी धारा के रूप में मैं उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में
स्थित गंगोत्री हिमनद के उस स्थान से निकली जिसे गोमुख कहते हैं। गोमुख से थोड़ा नीचे गंगोत्री में मेरा भव्य मंदिर है जहाँ देशभर से तीर्थयात्री आते
हैं। राजा भगीरथ ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। इसलिए मेरा नाम भागीरथी भी है। यहाँ से मैं नीचे ढुलकती चली और मेरा रूप और निखरने लगा।
पहाड़ों को चीरती, चट्टानों से टकराती हुई, उछलती-कूदती मैं आगे बढ़ती गई।
देवप्रयाग में मुझसे अलकनंदा आ मिली। ऋषिकेश पहुँचने पर मैं मैदान में उतर आई। यहाँ मेरे किनारों पर साधु-संतों और महात्माओं के आश्रम हैं। बहुत से नगर मेरे तट पर बस गए हैं। कई कारखाने खुल गए हैं। इन सबको मैं ही पानी पहुँचाती हूँ।
ऋषिकेश और हरिद्वार मेरे किनारों पर बसे प्रसिद्ध तीर्थ हैं। यहाँ का प्राकृतिक दृश्य और वातावरण बहुत शांत है। हरिद्वार में हर बारह वर्ष बाद कुंभ का मेला लगता है। हरिद्वार के पास से एक नहर निकाली गई है जिसे गंगानहर कहते हैं। लाखों एकड़ भूमि को सींचती हुई यह नहर उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद पहुँचती है। मैं भी घूमती-घामती कानपुर पहुँच जाती हूँ।
कानपुर भारत का प्रसिद्ध औद्योगिक नगर है। यहाँ कपड़े, चमड़े और लोहे के कारखाने हैं। इन कारखानों को पानी मुझसे ही मिलता है।
कानपुर से चलकर मैं प्रयागराज पहुँचती हूँ। यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है। इस संगम पर भी प्रत्येक बारहवें वर्ष कुंभ का मेला लगता है। इस मेले में देश के कोने-कोने से लाखों लोग आते हैं।
मैं फिर आगे बढ़ती हूँ। चलते रहना, बहते रहना ही मेरा काम है। मैं वाराणसी पहुँचती हूँ। इस नगर का दूसरा नाम काशी है। यह बहुत बड़ा तीर्थ है।
वाराणसी से आगे बढ़ने पर मैं कई नदियों को अपनी गोद में लेती हुई बिहार राज्य में पहुँचती हूँ। यहाँ से पटना, भागलपुर आदि नगरों से होती हुई मैं पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती हूँ।
पश्चिम बंगाल में मेरी दो धाराएँ हो जाती हैं। एक धारा बांग्लादेश को चली जाती है। वहाँ उसका नाम पद्मा पड़ गया है। दूसरी धारा कोलकाता (कलकत्ता) की ओर जाती है। वहाँ मुझे हुगली भी कहते हैं। अंत में मैं बंगाल की खाड़ी में समुद्र से मिल जाती हूँ।
मुझे भारतवासी पवित्र नदी मानते हैं। गंगोत्री से निकलते समय मेरा चाँदी जैसा चमकीला रूप रहता है। किंतु मुझे दुख है कि काशी पहुँचते-पहुँचते मेरा चमकीला रंग मटमैला हो जाता है। कारखानों और शहरों का गंदा पानी मेरे जल को दूषित कर देता है।
लेकिन मुझे अब इस बात की प्रसन्नता है कि इस ओर लोगों का ध्यान गया है। मेरे जल को शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए हैं। मुझे उस दिन की प्रतीक्षा है जब मेरा जल वैसा ही स्वच्छ और निर्मल हो जाएगा जैसा गंगोत्री से निकलते समय रहता है।
बातचीत के लिए
- 1. नीचे दिए गए चित्र को देखिए और इसमें दिखाए गए पानी के स्रोत का नाम बताइए —
- 2. आपके निवास स्थान के आस-पास कौन-सी नदी/नदियाँ बहती है/हैं?
- 3. आपके घर में पानी कहाँ से आता है?
- 4. आप नदियों के जल को प्रदूषित होने से किस प्रकार बचा सकते हैं? इस बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए।
पाठ से
- 1. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर पर जल की बूँद का चित्र () बनाइए। एक से अधिक विकल्प भी सही हो सकते हैं -
- (क) “मेरा जन्म हिमालय की गोद में हुआ था।" इस वाक्य में 'मेरा' शब्द किसके लिए आया है?
- (i) गोमुख ( )
- (iii) पर्वत ( )
- (ii) गंगा नदी ( )
- (iv) नगर ( )
- (ख) “लेकिन मुझे अब इस बात की प्रसन्नता है कि इस ओर लोगों का ध्यान गया है।" यहाँ किस ओर ध्यान जाने की बात कही गई है?
- (i) गंगा में प्रदूषण की ओर ( )
- (ii) गंगा के चमकीले रंग की ओर ( )
- (iii) गंगा जल की पवित्रता की ओर ( )
- (iv) गंगा की धाराओं की ओर ( )
- (ग) जल प्रदूषण किन कारणों से होता है?
- (i) कारखानों और नगरों द्वारा नदियों में डाले जाने वाले अपशिष्ट से ( )
- (ii) कारखानों के धुएँ से ( )
- (iii) नदी तथा तालाब में स्नान करने से ( )
- (iv) तेज आवाज में भोंपू बजाने से ( )
- (घ) “यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है।" इस वाक्य में 'संगम' शब्द का भाव है -
- (i) एक से अधिक नदियों का आपस में मिलना ( )
- (ii) विपरीत दिशा की ओर बहना ( )
- (iii) दो धाराओं में बँट जाना ( )
- (iv) दो धाराओं का मिलकर बहना ( )
- 2. नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए -
- (क) गंगा नदी के किनारे बसे कुछ नगरों के नाम लिखिए।
- (ख) गंगा के तट पर बसे औद्योगिक नगरों से गंगा को क्या हानि हुई है?
- (ग) कुंभ का मेला कब-कब और कहाँ-कहाँ लगता है?
- (घ) “गंगोत्री से निकलते समय मेरा चाँदी जैसा चमकीला रूप रहता है। किंतु मुझे दुख है कि काशी पहुँचते-पहुँचते मेरा चमकीला रंग मटमैला हो जाता है।"
- उपर्युक्त वाक्य से संबंधित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए -
- (i) यहाँ पर चाँदी जैसे चमकीले रूप से क्या तात्पर्य है?
- (ii) काशी पहुँचते-पहुँचते गंगा का चमकीला रंग मटमैला क्यों हो जाता है?
- 3. पाठ के आधार पर सही कथन के आगे (√) का और गलत कथन के आगे (X) का चिह्न लगाइए -
- (क) गंगा के किनारे कई तीर्थ स्थान हैं। ( )
- (ख) गंगा का जन्म अरावली की गोद में हुआ है। ( )
- (ग) कारखानों का गंदा पानी गंगा के जल को दूषित कर रहा है। ( )
- (घ) गंगा का एक नाम भागीरथी है। ( )
- (ङ) पश्चिम बंगाल में गंगा की तीन धाराएँ हो जाती हैं। ( )
मिलान कीजिए
स्तंभ 'क' और स्तंभ 'ख' का आपस में मिलान कीजिए -
| स्तंभ 'क' | स्तंभ 'ख' |
|---|---|
| गंगा का उद्भभव ------------> | गोमुख |
| देवप्रयाग | वाराणसी |
| औद्योगिक नगर | पद्मा नदी |
| बांग्लादेश | अलकनंदा |
| तीर्थ स्थल | कानपुर |
भाषा की बात
- 1. इस वाक्य को पढ़िए -
- “यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है।" इस वाक्य में 'होता' शब्द 'होना' क्रिया का रूप है।
- निम्नलिखित वाक्यों में 'होना' क्रिया के विभिन्न रूपों का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
- (क) आप जब भी आते हैं, मुझे बहुत प्रसन्नता................................ है।
- (ख) कुंभ के मेले में लाखों लोग सम्मिलित................................।
- (ग) आपके माता-पिता आपकी प्रतीक्षा कर रहे...............................।.
- (घ) पहाड़ों का मौसम बड़ा सुहावना है।...............................।.
- (ङ) यह काम कल ही................................ था परंतु किसी कारण से नहीं ................................पाया।
2. पाठ में 'हिमालय' शब्द 'हिम' और 'आलय' शब्दों से मिलकर बना है। इसी प्रकार नीचे लिखे शब्दों को मिलाकर नया शब्द बनाइए -
'आलय'
पुस्तक
पुस्तकालय
देव
.............
विद्या
.............
भोजन
.............
मेघ
.............
अब अपने बनाए हुए शब्दों का अपनी लेखन-पुस्तिका में वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
3. नीचे गंगा नदी के दृश्य में कुछ शब्द लिखे गए हैं। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए -
4. “मैं काम कर रहा हूँ।"
“मेरे कर में लेखनी है।"
यहाँ पहले वाक्य में 'कर' शब्द का प्रयोग क्रिया के रूप में हुआ है तथा दूसरे वाक्य में 'कर' शब्द का अर्थ 'हाथ' है। 'कर' का एक अन्य अर्थ 'टैक्स' भी होता है। इस प्रकार आपने देखा कि अलग-अलग वाक्यों में प्रयोग के कारण एक ही शब्द के भिन्न-भिन्न अर्थ हो सकते हैं।
अब आप भी अपनी पाठ्यपुस्तक और अन्य स्रोतों से ऐसे शब्दों की एक सूची तैयार कीजिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
समझ और अनुभव
- 1. गंगा नदी के साथ तीर्थ स्थलों के जुड़ने के क्या कारण हो सकते हैं?
- 2. यदि नदियाँ दिन-प्रतिदिन प्रदूषित होती रहेंगी तो हम पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- 3. पाठ में 'कानपुर' को भारत का प्रसिद्ध औद्योगिक नगर कहा गया है। यहाँ 'औद्योगिक नगर' से क्या आशय है?
कलाकारी
नीचे 'जल संरक्षण' विषय पर एक चित्र दिया गया है। आप भी दिए गए स्थान पर कोई चित्र बनाकर जल संरक्षण का एक उपाय सुझाइए -
गंगा से बातचीत
गंगा अपने चमकीले रंग को मटमैला होते देखकर दुखी है। यदि आपको कभी गंगा नदी से बात करने का अवसर मिले तो आपकी क्या बातचीत होगी?
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पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
- 1. विद्यालय के पुस्तकालय, अभिभावकों तथा अन्य स्रोतों से गंगा की सहायक नदियों के बारे में पता लगाइए। साथ ही यह भी पता कीजिए कि उनका उद्गम स्थान कौन-सा है और उनके किनारे कौन-कौन से प्रसिद्ध नगर स्थित हैं।
- 2. नदियों को साफ करने के लिए भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में पता कीजिए। इसके लिए आप पुस्तकालय, शिक्षकों-अभिभावकों एवं अन्य स्रोतों की सहायता ले सकते हैं।
गगनयान
(कक्षा में अध्यापिका का प्रवेश और सभी विद्यार्थियों द्वारा अभिवादन)
सभी विद्यार्थी-सुप्रभात अध्यापिका जी!
अध्यापिका सुप्रभात बच्चो ! कक्षा 3 में हमने चंद्रयान को जाना और कक्षा 4 में आदित्य-एल 1 के साथ सूर्य से भी भेंट कर आए। आशा है कि ये दोनों यात्राएँ आप लोगों को आनंदमय लगी होंगी! (अध्यापिका कहते हुए मुस्कुराती हैं।)
शर्मिला- जी, अध्यापिका जी! मैंने तो कल्पना में अपना अंतरिक्ष विमान भी सोच लिया है...
कुछ विद्यार्थी- सच! हमें भी दिखाओ। (कक्षा में बातचीत होने लगती है।)
अध्यापिका- क्या बात है! (अपना टैब चालू करते हुए कहती हैं।) आज भी हम एक अनोखे यान के बारे में जानने वाले हैं... क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि आज हम किस नए यान के बारे में जानेंगे?
साधना -अध्यापिका जी! क्या हम तारायान के बारे में जानेंगे?
राकेश शायद बादलयान?
दीक्षा- मेरा मन तो कहता है कि आप शनियान की बात करने वाली हैं?
सानिया- और मेरा अनुमान है कि मंगलयान की बात होने वाली है।
मनोहर- अध्यापिका जी, मुझे लग रहा है कि हम शुक्रयान की बात करेंगे।
अशरफ़- और मुझे लगता है कि आप आज आकाशयान के बारे में बताएँगी। मैं गरमियों में जब रात को घर की छत पर सोने के लिए लेटता हूँ तो देर
तक आकाश को देखता रहता हूँ। गाँव में तो बहुत-से तारे भी दिखाई देते हैं।
अध्यापिका- बहुत सुंदर बात कही, अशरफ़ !
रत्ना -(उत्साह से) अध्यापिका जी, मैं भी जब बादल देखती हूँ तो मेरा मन करता है कि मैं उन पर चढ़कर पूरे आकाश की यात्रा कर आऊँ !
अध्यापिका -लगता है आप सब बच्चे सभी ग्रहों की यात्रा करना चाहते हैं! पर आज हम जिस यान की बात करने वाले हैं, उसका नाम है- 'गगनयान'। अशरफ़ का अनुमान लगभग सही था। तो बताइए, तैयार हैं आप जानने के लिए?
विद्यार्थी (उत्साह एवं ऊर्जा से) जी हाँ!डोलमा- अध्यापिका जी, मेरा मन तो करता है कि मैं कई प्रकार के यानों के बारे में जानूँ और...
सतविंदर- अध्यापिका जी, इसका मन तो यह भी करता है कि यह सब यानों में बैठकर दूर-दूर तक घूम आए। (कुछ बच्चे हँसते हैं।)
अध्यापिका- (हँसते हुए) अच्छा, यह बात है! हो सकता है आपमें से ही कोई वैज्ञानिक बने और किसी यान में बैठकर जाए।
संदीप- अध्यापिका जी, मैंने गगनयान के बारे में अभी तक कुछ नहीं सुना है?
सभी विद्यार्थी – हमने भी गगनयान के बारे में कभी नहीं सुना?
अध्यापिका- बच्चो, हमारे देश के वैज्ञानिक इस यान के निर्माण कार्य में लगे हुए हैं। आशा है कि यह मिशन शीघ्र ही पूरा हो जाएगा।
साधना- अध्यापिका जी, यह गगनयान क्या करेगा?
विजय- अध्यापिका जी! गगनयान हमें आकाश में घुमाएगा क्या?
अध्यापिका- नहीं बच्चो, गगनयान हमें संपूर्ण अंतरिक्ष की यात्रा कराएगा। इसका उद्देश्य मनुष्य को अंतरिक्ष में भेजना है।
पीटर- अध्यापिका जी, मनुष्य तो पहले भी अंतरिक्ष में जा चुका है और जा रहा है। मेरी माता जी ने मुझे बताया था।
अध्यापिका- हाँ, बिलकुल सही कह रहे हो। किंतु गगनयान मिशन भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजना है। इसमें तीन सदस्यों के चालक दल को तीन दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और उन्हें भारतीय समुद्री जल में उतारकर सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा।
सानिया- अच्छा, यह भारत का पहला यान होगा जो मनुष्य को अंतरिक्ष में लेकर जाएगा।
अध्यापिका- बिलकुल सही। यदि भारत ने सफलतापूर्वक गगनयान तैयार कर लिया तो अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। आप सब भी खुले आकाश में पक्षियों की भाँति विचरण कर पाएँगे। (मुस्कुराती हैं और यह सुनकर बच्चे उत्साहित हो जाते हैं।)
अशरफ़- अध्यापिका जी, गगनयान में सबसे पहले कौन अंतरिक्ष में जाएगा?
अध्यापिका- गगनयान मिशन तीन चरणों में विभाजित है। पहले दो चरण मानवरहित होंगे तथा तीसरे चरण में तीन अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा।
साधना- तो क्या पहले चरण में खाली यान अंतरिक्ष में भेजा जाएगा?
अध्यापिका- नहीं, पहले चरण में व्योममित्र को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
मनोहर- ये व्योममित्र कौन है अध्यापिका जी?
अध्यापिका- इसरो (भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने व्योममित्र नाम का ह्यूमनॉइड रोबोट बनाया है जिसे गगनयान मिशन के अंतर्गत पहले चरण में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। (बच्चे ह्यूमनॉइड रोबोट के बारे में सुनकर चकित हो जाते हैं।)
दीक्षा- अध्यापिका जी! व्योममित्र रोबोट अंतरिक्ष में जाकर क्या करेगा?
अध्यापिका- व्योममित्र अंतरिक्ष से संबंधित जानकारी एकत्रित करेगा, सुरक्षा की जाँच करेगा और अंतरिक्ष यान प्रणाली पर नजर रखेगा ताकि जब अंतरिक्ष यात्री वहाँ जाएँ तो उन्हें अधिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
पीटर- अध्यापिका जी! अंतरिक्ष में तीसरे चरण में कितने यात्री जाएँगे?
अध्यापिका- गगनयान मिशन के तीसरे चरण में तीन अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की योजना है। उन्हें अंतरिक्ष में भेजने से पहले अंतरिक्ष में रहने का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
राकेश- (आश्चर्य से) इस प्रशिक्षण में उन्हें क्या-क्या सिखाया जाएगा? वहाँ तो चलने के लिए भूमि भी नहीं होगी... खाने के लिए घर का भोजन भी नहीं होगा... वे लोग वहाँ कैसे रहेंगे?
अध्यापिका- (हँसती हैं) इस प्रशिक्षण में इन तीनों यात्रियों को अंतरिक्ष के वातावरण में रहने के कौशल सिखाए जाएँगे।
दीक्षा- अध्यापिका जी, गगनयान कब अंतरिक्ष में जाएगा?
अध्यापिका- इसके लिए हमें अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। अगले वर्ष जब आप नई कक्षा में जाने की तैयारी कर रहे होंगे तब गगनयान भी अपनी कक्षा में संभवतः स्थापित हो चुका होगा।
इसे भी जानिए
आजकल आप लोगों ने ए.आई. का नाम बहुत सुना होगा। इसका पूरा नाम 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' है। हिंदी में इसे 'कृत्रिम मेधा' कहा जा सकता है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसके अंतर्गत कंप्यूटर अथवा मशीनों में मानवीय सूझ-बूझ की प्रणाली को डाला जाता है। इसी तकनीक के कारण कोई मशीन किसी मनुष्य की तरह सोच-समझ सकती है। वह आपके द्वारा पूछे गए प्रश्नों अथवा जिज्ञासाओं के उत्तर दे सकती है। इतना ही नहीं, वह विभिन्न समस्याओं को सुलझाने के साथ-साथ किसी रचनाकार की तरह कविता या कहानी भी रच सकती है। है न यह अद्भुत ! आप भी पुस्तकालय, शिक्षक-अभिभावकों एवं अन्य स्रोतों के माध्यम से इसके उपयोग और सीमाओं के बारे में पता कीजिए।
आपकी अभिव्यक्ति
दिए गए चित्र को ध्यानपूर्वक देखिए और इस पर आधारित कोई अनुच्छेद, कहानी अथवा कविता अपने शब्दों में लिखिए - ..........................................................................................................................
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