Chapter 3
उचित आहार— स्वस्थ शरीर का आधार
कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?
हितभुक मितभुक ऋतुभुक
(सुभाषित)
कौन निरोगी है? कौन निरोगी है? कौन निरोगी है? वह व्यक्ति जो समय और स्थान के
अनकल, पौष्टिक और उचित मात्रा में आहार लेता है, निरोगी है|

मेदू और मिष्टी प्रतिदिन विद्यालय
के नोटिस बोर्ड पर लिखे ‘आज
का विचार’ पढ़ते हैं | आज का
विचार—‘अन्नेन जातानि जीवन्ति’,
पढ़कर उन्हें उत्सुकता होती है मिष्टी मेदू को बताती है कि यह संस्कृत
की एक सूक्ति है, जिसका अर्थ है,
‘आहार जीवित प्राणियों को जीवन
देता है’|
आइए, हम इस सूक्ति का महत्व
समझने का प्रयास करते हैं|
3.1 हम क्या खाते हैं?
क्रियाकलाप 3.1— आइए, अंकित करे
हम सभी प्रतिदिन आहार लेते हैं| आहार हमारे दैनिक जीवन का एक अनिवार्य घटक
है| आपके द्वारा एक सप्ताह में प्रतिदिन खाए गए खाद्य पदार्थों के नाम को तालिका 3.1
में सचूीबद्ध कीजिए|
तालिका 3.1— सप्ताह में खाए गए खाद्य पदार्थ
3.1.1 विभिन्न क्षेत्रों के आहार
क्रियाकलाप 3.2— आइए, खोज करे
- भारत के विभिन्न राज्यों में पारंपरिक रूप से खाए जाने वाले आहार और उगाई जाने
वाली फसलों के प्रकारों का पता लगाइए | इस संबंध में जानकारी एकत्रित करने
के लिए आप अपने विद्यालय के पुस्तकालय की पुस्तके पढ़ सकते हैं, इटंरनेट पर
ढूँढ़ सकते हैं और साथ ही अपने मित्रों, परिवारजनों और पड़ोसियों से बातचीत
कर सकते हैं|
- अन्य राज्यों के बारे में जानकारी एकत्रित करें और उसे तालिका 3.2 में भरें| कुछ
उदाहरण अग्रलिखित हैं|
तालिका 3.2— भारत के विभिन्न राज्यों के कुछ परंपरागत खाद्य पदार्थ
क्या हमें देश के विभिन्न राज्यों में खाए जाने वाले पारंपरिक आहार में विविधता दिखाई
देती है? ऐसा क्यों है?
तालिका 3.2 में आपके द्वारा एकत्रित की गई जानकारी का विश्लेषण कीजिए | क्या इसमें ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जो कई राज्यों में खाए जाते हैं? उन खाद्य पदार्थों की एक
सचूी बनाइए | आप पाएँगे कि कुछ खाद्य पदार्थ अनेक राज्यों में खाए जाते हैं, वहीं कुछ
ऐसे भी हैं जो केवल किसी राज्य विशेष में ही खाए जाते हैं | आप पारंपरिक खाद्य पदार्थों और स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली फसलों के मध्य क्या संबंध पाते हैं? आपने अवलोकन किया होगा कि किसी राज्य का पारंपरिक
आहार वहाँ उगाई जाने वाली स्थानीय फसलों पर आधारित होता है| भारत एक कृषि
प्रधान देश है, जहाँ विविध प्रकार की मृदा और जलवायु होती है | इसके विभिन्न क्षेत्रों
में मृदा के प्रकार और जलवायु परिस्थितियों के आधार पर भिन्न-भिन्न फसलें उगाई
जाती हैं| भारत के विभिन्न क्षेत्रों में आहारीय प्रवृत्तियाँ उस विशेष क्षेत्र में की जाने वाली खाद्य
फसलों की खेती, स्वाद प्राथमिकताओ, संस्कृति और परंपराओ के अनसुार भिन्न हो
सकती हैं|
3.1.2 समय के साथ भोजन पकाने की पद्धतियाँ कैसे परिवर्तित हुई हैं?
आपने सीखा कि विभिन्न राज्यों में खान-पान की आदतें भिन्न-भिन्न हैं| हमारे भोजन
के विकल्प और भोजन बनाने की पद्धतियाँ एक-दूसरे से भिन्न होती हैं| क्या समय के
साथ खान-पान की आदतें और भोजन पकाने की पद्धतियाँ परिवर्तित हो गई हैं?
क्रियाकलाप 3.3— आइए, पारस्परिक चर्चा करे
- अपने वयोवद्ध जनों से उनके खान-पान की आदतों और भोजन बनाने की पद्धतियों के बारे में जानकारी एकत्रित करने के लिए प्रश्नों की सचूी तैयार कीजिए| नमूना हेतु कुछ प्रश्न निम्नलिखित हैं—
- किस प्रकार का खाना आप अभी भी खाते हैं और क्या नया खाने लगे हैं?
- पिछले कुछ वर्षों में खाना पकाने की पद्धतियाँ किस प्रकार परिवर्तित हो
गई हैं?
- खान-पान संबंधी ये बदलाव किस कारण हुए हैं?

(क) पारंपरिक चूल्हा

(ख) आधुनिक गैस चूल्हा

(ग) सिल-बट्टा

(घ) इलेक्ट्रिक ग्रार्इंडर
चित्र 3.1— समय के साथ पाक पद्धतियों में परिवर्तन
आपके द्वारा लिए गए साक्षात्कारों से क्या ज्ञात हुआ? भोजन पकाने की पद्धतियाँ, जिन्हें
पाक पद्धतियाँ भी कहते हैं, समय के साथ परिवर्तित हो गई हैं| पारंपरिक व आधुनिक
पाक पद्धतियों में बहुत अंतर है पहले के समय में भोजन पकाने के लिए अधिकतर
पारंपरिक चूल्हों का उपयोग किया जाता था [चित्र 3.1(क)]| अब भोजन पकाने के
लिए अधिकांश लोग आधुनिक गैस चूल्हों का उपयोग करते हैं [चित्र 3.1(ख)]| पहले
के समय में पत्थर के सिल-बट्टे का उपयोग कर हाथों से पीसने का कार्य किया जाता था
[चित्र 3.1(ग)]| इन दिनों हम खाद्य पदार्थों को आसानी से पीसने के लिए इलेक्ट्रिक ग्रार्इंडर (विधुत चालित पिसाई मशीन) का उपयोग करते हैं [चित्र 3.1(घ)]| भोजन
पकाने और पीसने की अन्य विधियों का पता लगाइए| समय के साथ पाक पद्धतियों में ये
परिवर्तन क्यों हुए हैं? इन परिवर्तनों के प्रमुख कारण तकनीकी विकास, बेहतर परिवहन
और बेहतर संचार साधन हो सकते हैं|
3.2 भोजन के घटक क्या हैं?
मेदू और मिष्टी अपने स्कूल द्वारा आयोजित ‘पारंपरिक खाद्य महोत्सव’ देखने जाते हैं |महोत्सव का विषय है ‘स्वस्थ आहार, स्वस्थ जीवन’|

इस महोत्सव में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों को प्रदर्शित करते हुए भिन्न-भिन्न
स्टॉल हैं| पोषण विशेषज्ञ डॉ. पोषिता, विद्यार्थियो को बताती हैं कि स्वास्थ्य ही परम
धन है|
आइए, जानते हैं डॉ. पोषिता के इस कथन का अभिप्राय
क्या है | क्या आप कभी बिना खाना खाए रहे हैं? जब आप
खाना नहीं खाते हैं तो आपको कैसा अनुभव होता है?
जब हम कुछ समय तक भोजन नहीं करते हैं तो हम थका
हुआ और कम ऊर्जावान अनुभव करते हैं| आपके अनुसार
एक मैराथन धावक दौड़ के समय और उसके पश्चात ग्लूकोस युक्त पानी क्यों पीता है?

ग्लूकोस शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान
करता है | ग्लूकोस कार्बोहाइड्रेट का
एक उदाहरण है| कार्बोहाइड्रेट हमारे
आहार में ऊर्जा के प्राथमिक स्रोतों में
से एक हैं| विभिन्न प्रकार के अनाज
जैसे— गेहूँ, चावल और मक्का, सागभाजी, जैसे— आलू और शकरकंद तथा अनेक फल, जैसे— केला,
अनानास और आम में कार्बोहाइड्रेट
प्रचुर मात्रा में होते हैं (चित्र 3.2)|

चित्र 3.2— कुछ कार्बोहाइड्रेट समुद्र आहार

क्या आप जानते हैं कि सामान्य चीनी भी एक प्रकार का
कार्बोहाइड्रेट है?
आपके विचार से सर्दियो में पारंपरिक आहार के रूप
में हम लड्डू खानाक्यों पसंद करते हैं? लड़डू की मुख्य सामग्री बेसन,
आटा, घी, गुड या चीनी,
गोंद और अनेक प्रकार के मेवे हैं | घी और विभिन्न प्रकार के तेलों को एक
अन्य प्रकार के खाद्य घटक के समूह में रखा जाता है, जिसे वसा कहते हैं|
वसा के स्रोत पादप आधारित या जंतु आधारित हो सकते हैं
(चित्र 3.3) , मूंगफली ,अखरोट और बादाम जैसे मेवे तथा कददु , सूरजमूखी और सरसों
के बीज वसा के कुछ अच्छे स्रोत हैं|

चित्र 3.3— कुछ वसा समुद्ध खाद्य पदार्थ
कार्बोहाइड्रेट और वसा हमें विभिन्न गतिविधियाँ करने के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं| इस कारण से इन्हें ऊर्जा प्रदायी भोजन का नाम दिया गया है| हमारे शरीर में वसा ऊर्जा
का एक संग्रहित स्रोत है|
और भी
जानें!
ध्रुवीय भालू की त्वचा के नीचे बहुत अधिक वसा एकत्रित होती
हैं| यह वसा ऊर्जा स्रोत के रूप में कार्य करती है| यह उनकी महीनों
लंबी सर्दियो की नींद की अवधि (शीत निष्क्रियता) के समय बिना खाए
जीवित रहने में सहायता करती है

ध्रुवीय भालू
प्रोटीन भी हमारे आहार का एक महत्वपूर्ण भाग है| दूध उत्पाद और दालेंप्रोटीन के
अच्छे स्रोत हैं| खिलाड़ियों को अपनी मांसपेशियाँ बनाने के लिए अधिक मात्रा में प्रोटीन
की आवश्यकता होती है| कई लोग प्रोटीन पौधों के साथ-साथ जंतुओु से भी प्राप्त करते
हैं | प्रोटीन के कुछ उत्कृष्ट पादप स्रोत दालें, फलियाँ, मटर और मेवे हैं [चित्र 3.4 (क)]| प्रोटीन के कुछ जंतु स्रोत दूध, पनीर, अंडा, मछली और मांस हैं [चित्र 3.4 (ख)] | प्रोटीन
समुद्ध खाद्य पदार्थ हमारे शरीर की वृद्धि और मरम्मत में सहायता करते हैं| इसी कारण
इन्हें शरीर वर्धक भोजन कहा जाता है|

(क) पादप स्रोत (ख) जं तु स्रोत
चित्र 3.4— कुछ प्रोटीन समूद्ध खाद्य पदार्थ
बढ़ते बच्चों के उचित विकास और वृद्धि के लिए उनके आहार में सही मात्रा में
प्रोटीन सम्मिलित किया जाना चाहिए |इनमें से काैन-सा खाद्य पदार्थ आपके दैनिक
आहार का भाग है?
और भी
जानें !
क्या आपने कभी छत्रक (मशरूम) देखे हैं? ये अधिकतर अंधेरे और नमी
वाले स्थानों पर उगते हैं| खाद्य मशरूम प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत हैं| और भी
जानें !

आपको क्या लगता है कि हमें अपने दैनिक आहार में फल, साग-भाजी और
पादप आधारित खाद्य पदार्थों को सम्मिलित करने की सलाह क्यों दी जाती है? आइए,
निम्नलिखित दो अध्ययनो को पढ़कर हम कुछ खाद्य घटकों के महत्व को समझें—
अध्ययन 1
पुराने समय में लंबी यात्राओ के दौरान नाविक अक्सर मसूड़ों में रक्त स्राव और सूजन से पीड़ित
हो जाते थे| 1746 की लंबी यात्रा के दौरान स्कॉटलैंड के चिकित्सक जेम्स लिंड ने देखा कि
जिन नाविकों ने नींबू और संतरों का सेवन किया वे इस रोग से मुक्त हो गए | मसड़ूों से रक्त आना और उनमें सूजन होना स्कर्वी रोग के लक्षण हैं|
अध्ययन 1 को पढ़कर आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? स्कर्वी रोग कैसे ठीक हुआ?
नींबू और संतरे स्कर्वी के उपचार में सहायक हैं | स्कर्वी रोग विटामिन C की कमी के
कारण होता है| विटामिन C खट्टे फलों जैसे नींबू और संतरे में पाया जाता हैं, जो इस
रोग को दूर करने में सहायता करता है|
अध्ययन 2 1960 के दशक में भारतीय वैज्ञानिकों ने पाया कि हिमालय क्षेत्र और भारत
के उत्तरी मैदानी इलाकों में मानव आबादी में गर्दन के अगले भाग में सूजन के लक्षण व्यापक थे| गर्दन के अगले भाग में सूजन घेंघा नामक रोग का लक्षण
है| ये लक्षण इस क्षेत्र की मृदा में आयोडीन की कमी के कारण थे, जिसके
परिणामस्वरूप स्थानीय भोजन और जल में आयोडीन की कमी हो गई| भारत सरकार के मानदंडो के अनसुार सामान्य नमक में आयोडीन की पूर्ति करने का प्रयास किया गया, जिसे आयोडीनयुक्त नमक भी कहा जाता है| आयोडीनयुक्त नमक के सेवन से उपर्युक्त लक्षण स्पष्ट रूप से कम हो गए|

अध्ययन 2 से आपने क्या निष्कर्ष निकाला?
आपने समाचार-पत्रों और विज्ञापनों के द्वारा आयोडीनयुक्त नमक के बारे में जाना
होगा अथवा आपने नमक के पैकेट पर भी ‘आयोडीनयुक्त नमक’ लिखा हुआ पढ़ा
होगा| इसका अर्थक्या है? वास्तव में आयोडीनयुक्त नमक साधारण नमक ही है, जिसमें वांछित मात्रा में आयोडीन के लवण मिलाए जाते हैं|
और भी
जानें !
नमक की खेती अगरिया नामक जनजाति समदुाय की एक
पारंपरिक प्रथा है| वे कच्छ के छोटे रण तथा गुजरात के अन्य
भागों में नमक की खेती करते हैं| नमक की खेती के लिए ये आठ
महीने तक रेगिस्तान की भीषण गर्मी में रहते हैं और समुद्र के पानी से नमक प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं |

हमारे शरीर को विभिन्न रोगों से बचाने वाले अन्य खाद्य घटकों के बारे में और
अधिक जानकारी आप कैसे प्राप्त करेंगे?
क्रियाकलाप 3.4— आइए, सर्वेक्षण करें
- विभिन्न खाद्य घटकों के स्रोतों और कार्यों का पता लगाने केलिए चित्र 3.5 में
दिए गए चार्ट का अध्ययन करें| विटामिन एवं
खनिज के और अन्य स्रोतों का
पता लगाइए| साथ ही इन खाद्य घटकों की कमी से होने वाले रोगों के लक्षणों
को भी समझें|
- अपने पड़ोस में जाइए और लोगों से बातचीत कीजिए तथा पता लगाइए कि क्या किसी व्यक्ति में चित्र में सूचीबद्ध लक्षण दिखाई देते हैं? (शिक्षक के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों द्वारा इस प्रकार की एक जाँच परियोजना की जा सकती है)|
- इन लक्षणों को उनके आहार के साथ सह-संबंधित कीजिए और पोषण की कमी के कारण होने वाले रोग या विकार की पहचान कीजिए|
- देखे गए लक्षणों के संभावित कारण और सुधार के लिए आहार में आवश्यक परिवर्तन के बारे में सझाव दीजिए|
- उन्हें चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए कहिए|
चित्र 3.5— विटामिन और खनिज, उनके कार्य, उनके कुछ खाद्य स्रोत तथा उनकी
कमी से होने वाले रोग या विकार एवं
लक्षण का चार्ट
चित्र 3.5 से आपने यह सीखा कि विटामिन (A, B1, C और D) और खनिज
(कैल्सियम, आयोडीन और आयरन) खाद्य घटकों के दो समूह हैं जो हमारे शरीर की
विभिन्न रोगों से रक्षा करते हैं| लेकिन हम विटामिन और खनिजो की कमी के कारण
हाेने वाले रोगों या विकारों को कैसे ठीक कर सकते हैं?
(क) विटामिन A के कुछ स्रोत

(ख) विटामिन B1 के कुछ स्रोत

(ग) विटामिन C के कुछ स्रोत

(घ) विटामिन D के कुछ स्रोत
चित्र 3.6— कुछ विभिन्न विटामिन समुद्ध खाद्य पदार्थ
जो खाद्य घटक ऊर्जा प्रदान करते हैं, शारीरिक वृद्धि में सहायता तथा रोगों से सुरक्षा एवं रोगों को ठीक करने में सहायता करते हैं और विभिन्न शारीरिक क्रियाओं
को सुचारू बनाते है, उन्हें पोषक तत्व कहते हैं| हमारे आहार के प्रमुख पोषक तत्वों में
कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज सम्मिलित हैं|
विटामिन और खनिजों को सुरक्षात्मक पोषक तत्व भी कहा जाता है| ये पोषक तत्व हमारे शरीर को रोगों से बचाते हैं और हमें स्वस्थ रखते हैं| आपके माता-पिता ने
आपको नियमित रूप से दूध, हरे साग, फल और साबतु अनाज खाने की सलाह दी
होगी| ये खाद्य पदार्थ विटामिन और खनिजों से भरपूर हैं ( चित्र 3.6)| यद्यपि विटामिन और खनिजों की आवश्यकता अल्प मात्रा में ही होती है लेकिन वे हमारे शरीर को
स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक हैं|
कच्ची और पकी हुई साग-भाजी में आप क्या अंतर देखते हैं? क्या आपने कभी
देखा है कि पकाए जाने पर साग-भाजी कभी-कभी अपना चटख रंग खो देती हैं या नरम
और कम कुरकुरी हो जाती हैं? खाना पकाते समय उच्च ताप के कारण उनमें से विटामिन
C जैसे कुछ पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं| क्या हमारे आहार में कुछ फलों और
कच्ची साग-भाजी को सम्मिलित करना बुद्धिमानी नहीं होगी? कटी हुई या छिली हुई
साग-भाजी और फलों को धोने से भी कुछ विटामिन नष्ट हो सकते हैं| फिर भी उपभोग
से पहले सभी फलों और साग-भाजी को अच्छे से धोया जाना आवश्यक है|

फल और साग आहारीय रेशे (फाइबर) से भरपूर होते हैं| आइए, देखते हैं कि आहारीय
रेशे हमारे लिए किस प्रकार लाभदायक हैं|
आवश्यक पोषक तत्वों के अतिरिक्त हमारे शरीर को आहारीय रेशों और जल की आवश्कता होती है| अहारीय रेशे, जिन्हें रुक्षांश कहा जाता है, हमारे शरीर को
कोई पोषक तत्व प्रदान नहीं करते हैं| फिर भी
यह हमारे आहार का एक आवश्यक घटक है| यह हमारे शरीर को अनपचे आहार से छुटकारा दिलाने में मदद
करता है और मल के सुचारू निकास को सुनिशचित करता है| हमारे
आहार में रुक्षांश मुख्य रूप से पादप उत्पादों द्वारा प्रदान किया जाता है| हरे पत्तेदार साग, ताजे फल, साबुत अनाज, दालें और मेवे रुक्षांश के अच्छे स्रोत हैं|

वे कौन से खाद्य स्त्रोत हैं, जो हमारे शरीर को जल प्रदान
करते हैं? उनमे से कुछ की
एक सूची बनाए|
जहां तक संभव हो, स्थानिय स्तर पर
उगाया हुआ तथा पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थो का सेवन किया जाना चाहिए क्योंकि
यह न केवल हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि हमारे पर्यावरण और हमारे ग्रह (पृथ्वी)
के लिए भी अच्छा है|
जल भी हमारे भोजन का एक अनिवार्य अंश है| यह भोजन से पोषक तत्वों को अवशोषित करने में शरीर की सहायता करता है| यह पसीने और मूत्र के माध्यम से शरीर
से अपशिष्ट पदार्थो को बाहर निकालता है| हमें स्वस्थ रहने के लिए नियमित रूप पर्याप्त जल पीना चाहिए|
वैज्ञानिक से परिचय
कोलूथुर गोपालन (1918–2019) ने भारत में पोषण अनुसंधान की शुरुआत की| उनहोंने 500 से अधिक भारतीय खाद्य पदार्थो का उनके पोषण मूल्यों के आधार पर विश्लेषण किया और भारतीय सन्दर्भ में एक उपयुक्त आहार की संस्तुति की| उन्होंने भारतीय आबादी की पोषण स्थिति पर किए गए सर्वेक्षण का नेतृत्व किया जिसमें प्रोटीन, ऊर्जा और अन्य पदार्थ घटकों में व्यापक स्तर पर कमियों की पहचान की गई| जिसके परिणामस्वरूप 2002 में मध्मयाह्न भोजन योजना लागू की गई जिसे ‘प्रधानमंत्री पोषण' शक्ति निर्माण योजना (पीएम पोषण)’ कहा जाता है| इस योजना का उदेश्य भारत के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त सकूलों में संतुलित आहार उपलब्ध कराना है| इस योजना ने देशभर में करोड़ों बच्चों के स्वास्थ और पोषण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है|

3.3 भोजन के विभिन्न घटकों का परिक्षण कैसे करें?
आइए जानें कि विभिन्न खाद्य पदाथों में कौन-से पोषक तत्वों होते हैं? मंड (एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट), वसा और प्रोटीन जैसे कुछ पोषक तत्वों का पता सरल परीक्षणों से लगाया जा सकता है| जबकि कुछ अन्य का पता केवल प्रयोगशाला में
ही लगाया जा सकता है| आइए जानें कि हम कुछ खाद्य पदार्थो में मंड (स्टार्च), प्रोटीन की उपस्थित का पता कैसे लगा सकते हैं|
3.3.1 मंड(स्टार्च) के लिय परीक्षण
क्रियाकलाप 3.5— आइए, जांच करें
कुछ मात्रा में खाद्य पदार्थ जैसे— आलू का एक टुकड़ा ,खीरा, रोटी या ,ब्रेड उबले चावल, उबले चने, कुटी हुई ,मुगफली , तेल, मकखन और कुटा हुआ नारियल
(नारियल का बुरादा) लें| आप परिक्षण के लिए अन्य खाद्य पदार्थ भी ले सकते हैं|

चित्र 3.7— विभिन्न खाद्य पदार्थो में मंड की परिस्थिति के लिए परीक्षण
- प्रत्तेक पदार्थ के छोटे टुकड़े अलग-अलग पलेट में रखें|
- ड्रापर की सहायता से किसी एक खाद्य पदार्थ पर तनु आयोडीन विलयन की 2–3 बुँदें डालें (चित्र 3.7)|
- देखें कि क्या खाद्य पदार्थ के रंग में कोई परिवर्तन आया है| क्या यह नीला-काला हो गया है? अपने अवलोकन को तालिका 3.3 में अंकित करें|
3.3.2 वसा के लिए परीक्षण
क्रियाकलाप 3.6- आइए, जाँच करें
• क्रियाकलाप 3.5 में मंड की उपस्थिति का पता लगाने के लिए आपने जिन खाद्य पदार्थों का परीक्षण किया था, उन्हीं की छोटी-सी मात्रा लें|
- प्रत्येक खाद्य पदार्थ के एक छोटे भाग को कागज के अलग-अलग टुकड़ों पर रखें|
• खाद्य पदार्थ पर कागज को लपेटें और उसे दबाएँ| ध्यान रखें कि कागज फटे नहीं|
• यदि खाद्य पदार्थ में कुछ पानी है, तो कागज को सूखने दें|
क्या कागज पर किसी प्रकार का तैलीय धब्बा बन जाता है? आपके अनुसार इस तैलीय धब्बे के आने का कारण क्या है? यदि खाद्य पदार्थ में तेल या मक्खन उपस्थित है तो यह कागज पर एक तैलीय धब्बा छोड़ देगा| अब कागज को प्रकाश के सामने लाइए| क्या आपको इस धब्बे से होकर आने वाला प्रकाश धुंधला दिखाई देता है? कागज पर तैलीय धब्बा खाद्य पदार्थ में वसा की उपस्थिति दर्शाता है| इनमें से किन पदार्थों में वसा होती है?
अपने अवलोकनों को तालिका 3.3 में अंकित करें|
3.3.3 प्रोटीन के लिए परीक्षण
क्रियाकलाप 3.7- आइए, जाँच करें
इस क्रियाकलाप को शिक्षक द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है|
- पिछले क्रियाकलापों में परीक्षण किए गए खाद्य पदार्थों को लें|
- यदि खाद्य पदार्थ ठोस है तो खरल और मूसल का उपयोग करके उसका पेस्ट या चूर्ण बना लें (चित्र 3.8)|
सावधानी
- ये रसायन हानिकारक हैं और इनका उपयोग सावधानी से किया जाना आवश्यक है| इनमें से किसी भी रसायन को तब तक न छुएँ जब तक ऐसा करने के लिए आपसे कहा न जाए|
- अगर आपके शरीर पर कोई रसायन गिर जाए तो उस स्थान को तुरंत पानी से धो लें|
- इनमें से कोई भी रसायन अपने मुँह में न डालें और न ही इनको सूँघने का प्रयास करें|
- प्रत्येक खाद्य पदार्थ का लगभग आधा चम्मच एक अलग साफ परखनली में डालें|
- प्रत्येक परखनली में 2-3 चम्मच पानी डालें और अच्छी तरह हिलाएँ|
- ड्रॉपर का उपयोग करके प्रत्येक परखनली में कॉपर सल्फेट विलयन की दो बूँदें डालें|
- अब एक और ड्रॉपर लें और प्रत्येक परखनली में कास्टिक सोडा विलयन की 10 बूँदें डालें (चित्र 3.8)1
- परखनलियों को अच्छी तरह हिलाएँ और उसके बाद उन्हें कुछ मिनट तक ऐसे ही रखे रहने दें|

चित्र 3.8— खाद्य पदार्थो में प्रोटीन की उपस्थिति के लिए परीक्षण
आपने क्या देखा? क्या कुछ परखनलियों के पदार्थ बैंगनी रंग के हो गए हैं? बैंगनी रंग खाद्य पदार्थो में प्रोटीन की उपस्थिति दर्शाता है| अपने अवलोकनों को तालिका 3.3 में लिखें|
आप तालिका 3.3 से क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं? कौन-से खाद्य पदार्थ एक से अधिक पोषक तत्वों की उपस्थिति दर्शाते हैं? कौन-से खाद्य पदार्थ प्रोटीन और वसा दोनों की उपस्थिति दर्शाते हैं? मूँगफली में प्रोटीन और वसा दोनों की उपस्थिति देखी जाती है| यह इंगित करता है कि हम जो आहार खाते हैं उसमें कई पोषक तत्व उपस्थित हो सकते हैं| क्या कोई ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसमें इनमें से कोई भी पोषक तत्व नहीं होता हो? इनमें से किन खाद्य पदार्थों का आप प्रतिदिन सेवन करते हैं? ऐसे अन्य खाद्य पदार्थों का पता लगाने का प्रयास करें जो स्टार्च, वसा और प्रोटीन के अच्छे स्रोत हों|
तालिका 3.3- पदार्थों में पोषक तत्वों की उपस्थिति का पता लगाना
3.4 संतुलित आहार
क्या सभी व्यक्तियों की पोषण संबंधी आवश्यकताएँ समान होती हैं? क्या आपको और आपके दादा-दादी या नाना-नानी को एक ही प्रकार के या समान मात्रा में पोषक तत्त्वों की आवश्यकता होती है? आहार में पोषक तत्वों के प्रकार और मात्रा की आवश्यकता आयु, लिंग, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य स्थिति, जीवनशैली इत्यादि के अनुसार अलग-अलग हो सकती है|
क्रियाकलाप 3.8- आइए, पता करें
आपने क्रियाकलाप 3.1 में एक सप्ताह में आपके द्वारा उपभोग किए गए खाद्य पदार्थों की एक तालिका तैयार की है| यह जाँचें कि आपके आहार में वृद्धि और विकास के लिए अनिवार्य सभी पोषक और अन्य आवश्यक घटक सम्मिलित हैं या नहीं| यदि नहीं, तो जाँचें कि कौन से पोषक तत्वों अथवा अन्य घटकों को इसमें सम्मिलित करने की आवश्यकता है|
ऐसा आहार जिसमें शरीर की समुचित वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्त्व, रूक्षांश और जल सही मात्रा में हों, उसे संतुलित आहार कहते हैं| अपने आहार को संतुलित आहार बनाने के लिए आप उसमें क्या परिवर्तन करेंगे?
क्रियाकलाप 3.9- आइए, तुलना करें
नीचे दिखाए गए आलू के चिप्स और भुने हुए चने के पैकेट पर जो पोषण संबंधी जानकारी लिखी है उसे पढ़ें|

(क) आलू के चिप्स

(ख) भुने हुए चने
आहार के पैकेट पर पोषण संबंधी जानकारी के आधार पर आप इनमें से कौन-सा आहार चुनेंगे? और क्यों?
कुछ खाद्य पदार्थों में उच्च शर्करा और वसा की मात्रा के कारण अधिक कैलोरी होती हैं| साथ ही, उनमें बहुत कम मात्रा में प्रोटीन, खनिज, विटामिन और आहारीय रेशे होते हैं| इन खाद्य पदार्थों को अस्वास्थ्य-प्रद खाद्य (जंक फूड) कहा जाता है| इन खाद्य पदार्थों में आलू के चिप्स, टॉफी और कार्बोनेटेड पेय शामिल हैं| इन खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करना हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है, इनके अधिक सेवन से व्यक्ति में मोटापा हो सकता है| ऐसा व्यक्ति अन्य स्वास्थ्य संबंधी रोगों से भी पीड़ित हो सकता है| आपको डॉ. पोषिता का कथन हमेशा याद रखना चाहिए कि 'स्वास्थ्य ही परम धन है'| हमें स्वस्थ रहने के लिए अपने शरीर का ध्यान रखना चाहिए| स्वस्थ शरीर के लिए संतुलित आहार लेना और जंक फूड से परहेज करना आवश्यक है| खुशहाल व सुखी जीवन जीने के लिए अच्छा स्वास्थ्य अनिवार्य है|
क्रियाकलाप 3.9 में जिन दो खाद्य पदार्थों का अध्ययन किया है उनमें से किसको जंक फूड के रूप में नामांकित किया जा सकता है?
और भी जानें!
पैकेट बंद खाद्य पदार्थों के पैकेट पर पोषक तत्वों के बारे में जानकारी होनी चाहिए| जानकारी में प्रत्येक पोषक तत्व की मात्रा सूचीबद्ध होनी चाहिए| कभी-कभी प्रबलीकरण (फोर्टीफिकेशन) के दौरान आहार की पोषण गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए उसमें अधिक पोषक तत्व मिलाए जाते हैं| आयोडीनयुक्त नमक और शिशु आहार फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के उदाहरण हैं| भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) एक सरकारी एजेंसी है, जो भारत में खाद्य गुणवत्ता को नियंत्रित करती है|

3.5 मिलेट (मोटा अनाज) - पोषक अनाज
संभवतः आपने ज्वार, बाजरा, रागी और सांवा जैसे अनाजों के बारे में सुना होगा| ये भारत की देशज फसलें हैं (चित्र 3.9)| इन्हें अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में सहजता से उगाया जा सकता है| इन अत्यधिक पौष्टिक अनाजों को कदन्न (मिलेट) भी कहा जाता है| क्या आपने कभी कदन्न से बने खाद्य पदार्थ खाए हैं?

चित्र. 3.9— सांवा (बार्नयार्ड मिलेट)
कदन्न छोटे आकार के अनाज होते हैं और सदियों से भारतीय आहार का अभिन्न अंग रहे हैं| ये अपने अनगिनत स्वास्थ्य लाभों के कारण फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं| ये विटामिन, आयरन और कैल्सियम जैसे खनिजों और आहारीय रेशों के अच्छे स्रोत हैं| यही कारण है कि इन्हें पोषक अनाज भी कहा जाता है| ये हमारे शरीर के सामान्य कामकाज के लिए आवश्यक संतुलित आहार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं|
3.6 खाद्य मील (फूड माइल)- खेत से हमारी थाली तक
खेत से भोजन हमारी थाली तक कैसे पहुँचता है? इस प्रक्रिया के क्या चरण हैं? इस प्रक्रिया में कौन-कौन से लोग सम्मिलित होते हैं? क्या आप जानते हैं कि अनाज के अंकुरित होने के बाद उसका आटा बनने तक कितना समय और कितनी मेहनत लगती है? आइए, हम जो रोटी खाते हैं, उसे बनाने की पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए चित्र 3.10 का अवलोकन करें|

चित्र 3.10— खेत से थाली तक
गेहूँ या किसी अन्य खाद्य पदार्थ के थैले द्वारा उत्पादक से उपभोक्ता तक तय की गई कुल दूरी को उसका खाद्य मील (फूड माइल) कहा जाता है| खाद्य मील को कम करना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे परिवहन के दौरान लागत और प्रदूषण को कम करने में सहायता मिलती है| इससे स्थानीय किसानों के व्यवसायों को सहायता मिलती है और यह हमारे भोजन को अधिक ताजा और स्वास्थ्यवर्धक रखता है|
बहुत से लोग भोजन को अपनी थाली में बिना खाए छोड़ कर उसे बर्बाद करते हैं| हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारे किसान और समुदाय के अन्य सदस्य खेत से हमारी थाली तक भोजन पहुँचाने में कितना समय लगाते हैं और कितना श्रम करते हैं| हमें उतना ही भोजन अपनी थाली में लेना चाहिए जितना हम खा सकें| इससे भोजन की बर्बादी कम होगी| भोजन को खेत से थाली तक पहुँचाने में सम्मिलित विभिन्न प्रक्रियाओं की समय सीमा (टाइमलाइन) का पता लगाने का प्रयास करें (चित्र 3.10)|
स्थानीय भोजन खाने से किस प्रकार खाद्य मील को कम किया जा सकता है?
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प्रमुख शब्द
सारांश
मुख्य बिंदु
* संपूर्ण भारत में लोग विविध प्रकार का आहार लेते हैं, जिसमें विभिन्न खाद्य घटक उपस्थित होते हैं|
* किसी क्षेत्र में की जाने वाली खाद्य फसलों की खेती, भिन्न-भिन्न प्रकार के आहार की उपलब्धता, स्वाद प्राथमिकताओं, संस्कृति और परंपराओं आदि के अनुसार खान-पान की आदतें भिन्न हो सकती हैं|
• समय के साथ पाक पद्धतियाँ परिवर्तित हो गई हैं| खाना पकाने के पारंपरिक और आधुनिक तरीकों में बहुत अंतर है|
* आहार हमें ऊर्जा प्रदान करता है और हमारे शरीर की वृद्धि और विकास में सहायक है| यह हमें स्वस्थ रहने में मदद करता है और रोगों से बचाता है|
* हमारे आहार में प्रमुख पोषक तत्व कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन और खनिज हैं| इसके अतिरिक्त, आहारीय रेशे और जल भी भोजन आवश्यक घटक हैं|
* कार्बोहाइड्रेट और वसा प्राथमिक ऊर्जा स्रोत हैं, जबकि प्रोटीन शरीर-वर्धक पोषक तत्व हैं|
* विटामिन और खनिज हमारे शरीर को मजबूत बनाते हैं, हमें संक्रमण से बचाते हैं और स्वस्थ रखते हैं|
* संतुलित आहार उचित मात्रा में सभी अनिवार्य पोषक तत्व प्रदान करता है तथा इसमें पर्याप्त मात्रा में आहारीय रेशे और जल उपलब्ध होता है|
* लंबे समय तक हमारे आहार में एक या अधिक पोषकों की कमी से रोग या विकार हो सकते हैं|
* जंक फूड अस्वास्थ्यकर होते हैं क्योंकि उनमें शर्करा और वसा की मात्रा अधिक होती है परंतु प्रोटीन, खनिज, विटामिन और आहारीय रेशे कम होते हैं|
* मिलेट को मोटा अनाज (पोषक अनाज) भी कहते हैं क्योंकि ये हमारे शरीर को सामान्य कार्य करने के लिए आवश्यक मात्रा में पोषक तत्व प्रदान करते हैं| इनकी खेती विभिन्न जलवायु, परिस्थितियों में आसानी से की जा सकती है|
*स्थानीय स्तर पर उगाया हुआ तथा पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न केवल हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि हमारे पर्यावरण और हमारे ग्रह (पृथ्वी)
के लिए भी अच्छा है|
* किसी खाद्य पदार्थ द्वारा उसके उत्पादन के स्थान से उपभोक्ता तक तय की गई कुल दूरी को उसका खाद्य मील कहते हैं|
*हमें कभी भी भोजन बर्बाद नहीं करना चाहिए| हमें भोजन उतना ही लेना चाहिए जितना हम खा सकें|
आइए, और अधिक सीखें
1. निम्नलिखित में से असंगत को चुनें और कारण बताएँ-
(क) ज्वार, बाजरा, रागी, चना
(ख) राजमा, मूंग, सोयाबीन, चावल
2. भारत में पारंपरिक और आधुनिक पाक पद्धतियों की तुलना करते हुए चर्चा करें|
3. शिक्षक का कहना है कि अच्छा आहार औषधि के रूप में कार्य कर सकता है| रवि इस कथन को लेकर उत्सुक है और वह अपने शिक्षक से कुछ प्रश्न पूछना चाहता है| कम से, कम ऐसे दो प्रश्न सूचीबद्ध करें, जो वह पूछ सकता है|
4. सभी स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ आवश्यक रूप से स्वास्थ्यप्रद नहीं होते, और सभी पौष्टिक खाद्य पदार्थ सदैव आनंददायक नहीं होते| कुछ उदाहरणों के साथ अपने विचार साझा करें|
5. मेदू सब्जियाँ नहीं खाता लेकिन बिस्कुट, नूडल्स और डबल रोटी (सफेद ब्रेड) का आनंद लेता है| उसे अक्सर पेट में दर्द और कब्ज की शिकायत रहती है| इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए उसे अपने आहार में क्या बदलाव करना चाहिए? अपने उत्तर को विस्तार से समझाइए|
6. रेशमा को कम रोशनी में देखने में कठिनाई हो रही थी| चिकित्सक ने उसकी दृष्टि का परीक्षण किया और एक विशेष विटामिन पूरक (सप्लीमेंट) लेने की सलाह दी| उन्होंने उसे अपने आहार में कुछ खाद्य पदार्थों को सम्मिलित करने की भी सलाह दी|
(क) वह किस अभावजन्य रोग से पीड़ित है?
(ख) उसके आहार में किस खाद्य घटक की कमी हो सकती है?
(ग) कुछ खाद्य पदार्थों (किन्हीं चार) का सुझाव दें, जिन्हें इस समस्या को दूर करने के लिए उसे अपने आहार में सम्मिलित करना चाहिए|
7. आपको निम्नलिखित पदार्थ उपलब्ध कराए जाते हैं-
(क) डिब्बाबंद फलों का रस
(ख) ताजे फलों का रस
(ग) ताजे फल
पोषण की दृष्टि से आप किसे लेना पसंद करेंगे और क्यों?
8. गौरव के पैर की हड्डी टूट गई| उसके चिकित्सक ने हड्डियों को सीधा (सरेखित) किया और प्लास्टर लगा दिया| चिकित्सक ने उसे कैल्सियम की गोली भी दी| जब वह दूसरी बार दिखाने गया तब चिकित्सक ने उसे कैल्सियम की गोली के साथ विटामिन D युक्त सिरप भी पीने के लिए दिया| चित्र 3.5 का संदर्भ लें और अग्रलिखित प्रश्नों के उत्तर दें-
(क) चिकित्सक ने गौरव को कैल्सियम की गोली क्यों दी?
(ख) दूसरी बार देखने पर चिकित्सक ने उसे कैल्सियम की गोली के साथ विटामिन D सिरप भी क्यों दिया?
(ग) चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली दवाओं के चयन के बारे में आपके मन में क्या सवाल उठता है?
9. चीनी कार्बोहाइड्रेट का एक उदाहरण है| चीनी का परीक्षण जब आयोडीन विलयन से किया जाता है लेकिन इसका रंग नीला-काला नहीं होता है| इसका संभावित कारण क्या हो सकता है?
10. आप रमन के इस कथन के बारे में क्या सोचते हैं, "सभी मंड (स्टार्च) कार्बोहाइड्रेट हैं लेकिन सभी कार्बोहाइड्रेट मंड नहीं हैं|" अपने उत्तर की जाँच करने के लिए किसी क्रियाकलाप की योजना का वर्णन करें|
11. प्रयोगशाला में आयोडीन का प्रयोग करते समय आयोडीन की कुछ बूँदें मिष्टी के मोजे पर तथा उसकी शिक्षिका की साड़ी पर गिरीं| साड़ी पर आयोडीन की बूंदें नीली-काली हो गईं जबकि मोजे पर आयोडीन का रंग नहीं बदला| इसका संभावित कारण क्या हो सकता है?
12. कदन्न को एक स्वास्थ्यप्रद आहार क्यों माना जाता है? क्या केवल कदन्न खाने से शरीर की पोषण संबंधी सभी आवश्यकताएँ पूरी हो सकती हैं? चर्चा करें|
13. आपको विलयन का एक नमूना दिया गया है| आप इसके आयोडीन विलयन होने की संभावना की जाँच किस प्रकार करेंगे?
और भी सीखें
* किराने की खरीदारी के बाद विभिन्न खाद्य पदार्थों के पैकेट खोलने में अगली बार अपनी माता जी की मदद करें| कम से कम तीन फोंटीफाइड (प्रबलीकृत) खाद्य पदार्थों की पोषण संबंधी जानकारी को पढ़ें और उनका विश्लेषण करें|
*अरुणाचल प्रदेश की अपातानी जनजाति अपनी आहार संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए टैप्यो नामक नमक का उत्पादन करती है| इंटरनेट से उनकी नमक बनाने की प्रक्रिया और स्वयं नमक बनाने की आवश्यकता के बारे में अधिक जानकारी एकत्र करें| इसके चित्र एकत्रित करें और उन्हें एक चार्ट पेपर पर चिपकाएँ| साथ ही इस नमक को बनाने की प्रक्रिया और इसकी उपयोगिता के बारे में एक अनुच्छेद लिखें|
*वे साग या फल जो किसानों द्वारा खेती किए बिना जंगल या आस-पास के खेतों में प्राकृतिक रूप से उगते हैं, जंगली प्रजाति के माने जाते हैं| परंपरागत रूप से, भारत में कई आदिवासी समूह साग की इन जंगली प्रजातियों पर निर्भर हैं, जो उनके आहार का भाग हैं| महाराष्ट्र की रानभाजी और हिमाचल प्रदेश के खाद्य मशरूम के बारे में पढ़ें| क्या आप अपने क्षेत्र में आहार की ऐसी किसी जंगली प्रजाति के बारे में जानते हैं? कक्षा में चर्चा करें|
* उन जंक फूड की सूची बनाएँ जिन्हें आप प्रायः खाते हैं| अपने मित्रों से भी ऐसी सूची बनाने के लिए कहें| इन सूचियों के आधार पर अपने प्रधानाध्यापक को एक पत्र लिखकर स्कूल परिसर में जंक फूड पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध करें तथा स्वस्थ विकल्प सुझाएँ|
*आयु, शारीरिक क्रिया और स्वास्थ्य स्थितियों के आधार पर विभिन्न व्यक्तियों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं में विभिन्नता का पता लगाएँ| अपने अवलोकन अंकित करें| चर्चा और विश्लेषण करें|
*आपके पड़ोस में रहने वाले बारह वर्ष के बच्चे को संतुलित आहार देने के लिए एक आहार तालिका (डाइट चार्ट) बनाएँ| आहार तालिका में ऐसे खाद्य पदार्थ सम्मिलित होने चाहिए जो सस्ते हों और आपके क्षेत्र में सहजता से उपलब्ध हों|
