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अध्याय 4

चुंबकों को जानें


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रेशमा केरल के एक तटवर्ती नगर में रहती है और लघु कहानियाँ लिखने में उसकी बहुत रुचि है| उसकी दादी को उसके द्वारा लिखी कहानियाँ सुनना बहुत पसंद है| इसलिए, वह अपनी दादी के साठवें जन्मदिन पर उन्हें सुनाने के लिए एक नई कहानी लिख रही थी|

रेशमा की लिखी यह कहानी पुराने दिनों में व्यापार के लिए केरल से मसाले ले जाने वाले एक जहाज पर आधारित थी| उसे इस बात की जानकारी थी कि उन दिनों नाविक रात में रास्ता जानने के लिए तारों की स्थिति का उपयोग करते थे| लेकिन उसकी कहानी में  एक ऐसी स्थिति आई जिसमें नाविक एक रात तूफान में फंस गए| उसी तूफानी रात आकाश में बादल छाए हुए थे और कोई तारा दिख नहीं रहा था| रेशमा अपनी कहानी को आगे नहीं बढ़ा सकी क्योंकि उसे नाविकों के लिए दिशा पता करने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था|


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   उसने इंटरनेट और अपने विद्यालय के पुस्तकालय से इस विषय में जानकारी खोजी और उसने पाया कि यात्री दिशा जानने के लिए चुंबकीय दिक्सूचक (कंपास) नामक यंत्र का उपयोग करते थे|

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यद्यपि रेशमा ने ऐसे पेंसिल बॉक्स और पर्स देखे हुए थे जो चुंबक का उपयोग करके बंद होते थे| इसके साथ ही उसके विद्यालय में भी एक ऐसा लेखन बोर्ड था जिसके साथ चुंबक वाला डस्टर चिपका रहता था, लेकिन उसने कभी इन वस्तुओं पर बहुत ध्यान नहीं दिया था| इस खोजबीन के पश्चात उसमें चुंबक व चुंबकीय दिक्सूचक के बारे में और अधिक जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई|


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चित्र. 4.1- कुछ सामान्य वस्तुएँ, जिनमें चुंबक लगे होते हैं

पुराने समय में नाविकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले चुंबक प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले चुंबक थे| इन्हें चुंबक पत्थर के नाम से जाना जाता था और जिसकी खोज प्राचीन काल में हुई थी| समय बीतने के साथ लोगों को पता चला कि लोहे के टुकड़ों से भी चुंबक बनाए जा सकते हैं| आजकल हमारे पास विभिन्न पदार्थों से बने चुंबक उपलब्ध हैं| जो चुंबक आप विद्यालय की प्रयोगशाला में देखते हैं और जो पेंसिल बॉक्स, स्टिकर व खिलौनों में उपयोग किए जाते हैं, वे सभी कृत्रिम चुंबक हैं| चुंबक विभिन्न आकार के हो सकते हैं जिनमें से कुछ चित्र 4.2 में दर्शाए गए हैं|

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छड़  चंचक

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U-आकार चुंबक

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वलय चुंबक

चित्र. 4.2- विभिन्न आकार के चुबक


                                                                क्या   चं  केवल कुछ विशेष पदार्थों से बनी वस्तुओं पर ही चिपकते हैं?


4.1 चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थ



क्रियाकलाप 4.1- आइए, खोज करें


  • विभिन्न पदार्थों से बनी कुछ वस्तुएँ तथा एक चुंबक लें|
  • पूर्वानुमान लगाएँ कि कौन-सी वस्तुएँ चुंबक से चिपक जाएँगी| अपना पूर्वानुमान
              तालिका 4.1 में अंकित करें|
  • अब अपने हाथ में एक चुंबक पकड़ें और उसे एक-एक करके सभी वस्तुओं के पास ले जाएँ (चित्र 4.3)| अवलोकन करें कि कौन-कौन सी वस्तुएँ चुंबक से
             चिपकती हैं| 
  • अपने अवलोकनों को तालिका 4.1 में अंकित करें|


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चित्र. 4.3 चुंबक द्वारा आकर्षित होने वाली वस्तुओं का पता लगाना

तालिका 4.1- चुंबक द्वारा आकर्षित होने वाले पदार्थों का पता लगाना

वस्तु का नाम

पदार्थ जिससे वह वस्तु बनी है (प्लास्टिक/लकड़ी/काँच/लोहा/ अन्य)

चुंबक द्वारा आकर्षित होती है? (हाँ/नहीं)

पूर्वानुमान

अवलोकन

पेंसिल


लकड़ी



(इरेजर ) रबर

रबर




























क्या आपका पूर्वानुमान सभी वस्तुओं के लिए सही था? कौन-सी वस्तुएँ चुंबक से चिपक जाती हैं? आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
इस क्रियाकलाप से हमें पता चलता है कि कुछ वस्तुएँ चुंबक की ओर आकर्षित हुईं और उससे चिपक गई, जबकि अन्य वस्तुएँ आकर्षित नहीं हुईं| वे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं, चुंबकीय पदार्थ कहलाते हैं| लोहा एक चुंबकीय धातु है| इसके अलावा निकेल और कोबाल्ट भी चुंबकीय धातुएँ हैं| अन्य धातुओं के साथ इनके कुछ संयोजन भी चुंबकों की ओर आकर्षित होते हैं| जो पदार्थ चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होते, अचुंबकीय पदार्थ कहलाते हैं| 
आपके द्वारा तालिका 4.1 में सूचीबद्ध कौन-सी वस्तुएँ अचुंबकीय पाई गई?

                                                            क्या चुंबक के सभी भाग चुंबकीय पदार्थों को समान रूप से आकर्षित करते हैं?



4.2 चुंबक के ध्रुव


क्रियाकलाप 4.2- आइए, जाँच करें


* कागज की एक शीट पर थोड़ा-सा लोहरेतन (लोहे के बहुत छोटे टुकड़े) फैलाएँ|
* लोहरेतन के ऊपर एक छड़ चुंबक रखें| कागज को थपथपाएँ और ध्यान से देखें कि लोहरेतन का क्या होता है|

क्या आप लोहरेतन के चुंबक से चिपकने के तरीके में कोई विशेष बात देखते हैं?  क्या लोहरेतन पूरे चुंबक पर समान रूप से चिपक जाता है? या फिर यह कुछ जगहों पर अधिक चिपकता है?
हम देख सकते हैं कि लोहरेतन सबसे अधिक चुंबक के सिरों पर चिपकता है (जैसा कि चित्र 4.4 में दिखाया गया है) और यह चुंबक के शेष भाग पर कम चिपकता है|

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  चित्र 4.4 एक छड़ चुंबक से चिपका हुआ लोहरेतन


                                                                                        j16
चुंबक के इन सिरों को चुंबक के दो ध्रुव उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव कहा जाता है| लोहरेतन का अधिकांश भाग किसी भी आकार के चुंबक के ध्रुवों पर चिपक जाता है|
    एक ध्रुव वाला चुंबक प्राप्त करना संभव नहीं है| भले ही किसी चुंबक को कितने भी छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाए, छोटे से छोटे टुकड़े में भी उत्तरी और दक्षिणी दोनों ध्रुव हमेशा विद्यमान रहते हैं| चुंबकीय ध्रुव हमेशा जोड़े में होते हैं, एक उत्तरी ध्रुव और एक दक्षिणी ध्रुव| एकल उत्तरी ध्रुव या एकल दक्षिणी ध्रुव का अस्तित्व नहीं होता|

                                                                                          क्या हम एक ध्रुव वाला चुंबक प्राप्त कर सकते हैं?

4.3 दिशाएँ ज्ञात करना


क्रियाकलाप 4.3- आइए, प्रयोग करें


 • चित्र 4.5 में दर्शाए अनुसार एक छड़ चुंबक के मध्य में एक धागा बाँधकर इसे लटकाएँ| जब तक चुंबक क्षैतिज रूप से संतुलित न हो जाए तब तक आप डोरी की स्थिति को समायोजित करें|
* अब चुंबक को क्षैतिज दिशा में धीरे से घुमाएँ और इसे विश्राम की स्थिति में आने दें|
* फर्श (या फर्श से चिपके कागज के टुकड़े) पर चुंबक के सिरों के अनुरूप स्थिति को चिह्नित करें| फर्श पर इन दोनों बिंदुओं को एक रेखा से जोड़े| यह रेखा उस दिशा को दर्शाती है जिस दिशा  में चुंबक विश्राम की स्थिति में था|
* अब फिर से चुंबक के एक सिरे पर हल्का-सा धक्का देकर उसे घुमाएँ और उसके विश्राम की स्थिति में आने तक प्रतीक्षा करें| अब यह देखें कि क्या चुंबक उसी रेखा के अनुदिश विरामावस्था में ठहरता है?
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चित्र.4.5— स्व्तंत्र  रूप से लटका  हुआ   चुम्बक



   यदि हम सूर्य के उदित होने या अस्त होने की दिशा पर ध्यान देते हैं तो हमें लगभग अनुमान हो जाता है कि पूर्व या पश्चिम दिशा किधर है| इसलिए, हम उस रेखा की दिशा का पता लगा सकते हैं जिसके अनुदिश चुंबक ठहरता है|
                                                                                 

स्वतंत्र रूप से लटका हुआ चुंबक उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है| चुंबक का वह सिरा जो उत्तर की ओर इंगित करता है, उसे चुंबक यक का उत्तरोन्मुखी ध्रुव या उत्तरी ध्रुव कहा जाता है| दूसरा सिरा जो दक्षिण की ओर इंगित करता| है, उसे चुंबक का दक्षिणोन्मुखी ध्रुव या दक्षिणी ध्रुव कहा जाता है| स्वतंत्र रूप से लटका हुआ चुंबक उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है क्योंकि हमारी पृथ्वी स्वयं एक विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है|

इस क्रियाकलाप को छड़ चुंबक के स्थान पर लोहे की एक छोटी छड़ के साथ दोहराएँ| आप क्या देखते हैं? क्या यह छड़ हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है? ऐसा नहीं है| यह किसी भी दिशा में ठहर सकती है| इसका तात्पर्य यह है कि केवल चुंबक हो हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरते हैं| यह क्रियाकलाप हमें यह आँचने का एक तरीका प्रदान करता है कि धातु का कोई टुकड़ा चुंबक है या नहीं|

स्वतंत्र रूप से लटके चुंबक का हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकने के गुण का उपयोग दिशाएँ जानने के लिए किया जाता है| इसी आधार पर पुराने समय में दिशाएँ जानने के लिए चुंबकीय दिक्सूचक नामक एक छोटा यंत्र विकसित किया गया था| इसमें सुई के आकार (चित्र 4.6) का एक चुंबक होता है जो स्वतंत्र रूप से घूम सकता है| चुंबकीय दिक्सूचक की सुई उत्तर-दक्षिण दिशा को इंगित करती है|

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 चित्र 4.6— चुंबकीय   दिक्सूचक (कंपास)  

दिक्सूचक को उस स्थान पर रखा जाता है जहाँ हम दिशाएँ जानना चाहते हैं| कुछ समय पश्चात् इसकी सुई उत्तर-दक्षिण दिशा के अनुदिश रुक जाती है| इसके बाद दिक्सूचक बॉक्स को धरि-धीर तब तक घुमाया जाता है, जब तक डावल पर अंकित उत्तर और दक्षिण सुई के साथ संरेखित नहीं हो जाते| अब उस स्थान पर सभी दिशाएँ डायल पर दर्शाई दिशाओं के अनुसार होती हैं|

                                                                    हम अपना चुंबकीय दिक्सूचक कैसे बना सकते हैं?



                                                                                                 और अधिक  जाने  !

चुंबकीय दिक्सूचक सामान्यतः एक छोटा वृत्ताकार बौक्स होता है जिस पर काँच का आवरण होता है, जैसा कि चित्र 4.6 में दिखाया गया है| सुई के आकार का एक चुंबक बॉक्स के तल पर खड़ी एक पिन पर लगा होता है| यह चंबकीय सुई पिन पर इस तरह से संतुलित होती है कि यह इस बिंदू के चारों ओर आसानी से गति कर सके अर्थात् स्वतंत्र रूप से घूम सके| सुई का यह सिरा जो उत्तर दिशा में रहता है, सामान्यतः लाल रंग से रंगा जाता है| सुई के नीचे एक डायल होता है जिस पर दिशाएँ अंकित होती हैं|


क्रियाकलाप 4.4 आइए, निर्माण करें


  • कुछ वस्तुएँ, जैसे- कॉर्क का टुकड़ा, सिलाई के काम आने वाली लोहे की सुई, एक स्थायी छड़ चुंबक, एक काँच का कटोरा और पानी लीजिए|
  • सिलाई के काम आने वाली लोहे की सुई लकड़ी की मेज पर रखें| सुई के एक सिरे पर छड़ चुंबक का कोई एक ध्रुव रखें| चित्र 4.7 (क) में दिखाए अनुसार चुंबक को सुई पर उसकी लंबाई के अनुदिश खीचें| जब यह दूसरे सिरे पर पहुँच जाए तो उसे ऊपर उठाएँ| 
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चित्र 4.7 (क) लोहे की सुई को चुंबक बनाना

  •  बिना चुंबक के ध्रुव बदले उसे सुई के उसी सिरे पर लाएँ जहाँ से शुरूआत की थी| इस प्रक्रिया को कम से कम 30 से 40 बार दोहराएँ|
  • सुई के पास थोड़ा-सा लोहरेतन या स्टील की पिन लाएँ| अगर पिन या लोहरेतन सुई की ओर आकर्षित हो जाए तो इसका अर्थ है कि सुई चुंबक बन गई है|
  • इस सुई को कॉर्क में क्षैतिज रूप से घुसाएँ| पानी से भरे काँच के कटोरे में कॉर्क इस तरह से तैराएँ कि सुई हमेशा पानी के स्तर से ऊपर रहे, जैसा कि चित्र 4.7 (ख) में दिखाया गया है|
  • जब सुई रुक जाती है तो आपका चुंबकीय दिक्सूचक उपयोग के लिए तैयार है| ध्यान दें कि सुई के दोनों सिरे कौन-कौन सी दिशा इंगित करते हैं|
कॉर्क धीरे से घुमाएँ और इसके रूकने तक प्रतीक्षा करें| इसे कई बार दोहराएँ| क्या सुई के सिरे हमेशा एक ही दिशा में इंगित करते हैं?

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चित्र 4.7 (ख) पानी से भरे कटोरे में एक दिक्सूवक सुई

 4.4 चुंबकों के बीच  आकर्षण और  प्रतिकर्षण


                                                                  
क्या आप जानते हैं?

आधुनिक दिक्सूचक (बित्र 4.6) के व्यापक उपयोग से बहुत पहले, आपके द्वारा बनाई गई दिक्सूचक सुई (चित्र 4.7 (ख)) जैसा एक उपकरण भारतीयों द्वारा समुद्र में नौसंचालन के लिए उपयोग में लाया जाता था| इसमें मछली के आकार का एक चुंबकीकृत लोहे का टुकड़ा होता था, जिसे तेल के बर्तन में रखा जाता था| इसे मत्स्य यंत्र (या मच्छ-मंत्र) कहा जाता था|


                                                   
जब हम दो चुंबक एक-दूसरे के पास लाते हैं तो क्या होता है?


क्रियाकलाप 4.5- आइए, प्रयोग करें


* दो ऐसे छड़ चुंबक लें जिन पर उत्तरी (N) और दक्षिणी (S) ध्रुव अंकित हों| इन्हें चुंबक I व चुंबक II के रूप में चिह्नित करें|

* चुंबक I के लंबे भाग को 5-6 गोल आकार की पेंसिलों के ऊपर रखें जैसे चित्र 4.8 (क) में दिखाया गया है|

* अब चुंबक II का एक सिरा पेंसिलों पर रखे चुंबक | के सिरे के पास लाएँ| सुनिश्चित करें कि दोनों चुंबक एक-दूसरे को स्पर्श न करें| अब देखें कि क्या होता है|

* इसके बाद, चुंबक II का दूसरा सिरा को चुंबक | के उसी सिरे के पास लाएँ जैसे चित्र 4.8 (ख) में दिखाया गया है| क्या पेंसिलों पर रखा चुंबक | गतिमान हो जाता है? क्या यह हमेशा पास आने वाले चुंबक की दिशा में गति करता है? इन अवलोकनों से क्या निष्कर्ष निकलता है?

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चित्र 4.8- दो छड़ चुंबकों के बीच परस्पर क्रिया

आप देखेंगे कि दो चुंबकों के असमान ध्रुव अर्थात् एक चुंबक का उत्तरी ध्रुव और दूसरे चुंबक का दक्षिणी ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं| दोनों चुंबकों के समान ध्रुव अर्थात् दोनों चुबंकों के उत्तरी ध्रुव या दोनों के दक्षिणी ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं|

*किसी एक चुंबक के स्थान पर लोहे की छड़ से इसी क्रियाकलाप को दोहराएँ| इस बार आप क्या देखते हैं?
* आप पाएँगे कि लोहे की छड़ के दोनों सिरे चुंबक के उत्तरी और दक्षिणी दोनों ध्रुवों द्वारा आकर्षित होंगे|
 इस क्रियाकलाप से हमें पता लगता है कि किसी चुंबक को उसके प्रतिकर्षण के गुण से पहचाना जा सकता है|

क्रियाकलाप 4.6- आइए, प्रयोग करें


* एक चुंबकीय दिक्सूचक और एक छड़ चुंबक लें|
*एक क्षैतिज सतह पर चुंबकीय दिक्सूचक रखें और इसकी सुई के विरामावस्था में आने की प्रतीक्षा करें| दिक्सूचक की सुई भी एक चुंबक है| यदि कोई चुबक इसके       समीप लाया जाए तो क्या वह भी यही व्यवहार दिखाएगी?
*अब धीरे-धीरे छड़ चुंबक का उत्तरी ध्रुव दिक्सूचक सुई के उत्तरी ध्रुव के पास लाएँ, जैसा कि चित्र 4.9 (क) में दिखाया गया है| दिक्सूचक सुई का अवलोकन करें| आप क्या देखते हैं? क्या सुई विक्षेपित होती है? यदि हाँ तो किस दिशा में विक्षेपित हुई? 
*अब छड़ चुंबक के दक्षिणी ध्रुव के साथ उपरोक्त चरण दोहराएँ| क्या आप इस बार कोई अंतर देखते हैं?


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img23 (ख)
चित्र 4.9--- दिक्सूचक सुई और  एक  छड़ चुंबक

जब चुंबक का उत्तरी ध्रुव दिक्सूचक सुई के उत्तरी ध्रुव के पास लाया जाता है तो यह दूर चला जाता है [चित्र 4.9 (क)]| जब चुंबक का दक्षिणी ध्रुव दिक्सूचक सुई के उत्तरी ध्रुव के पास लाया जाता है तो यह पास आ जाता है [चित्र 4.9 (ख)]|

  मान लीजिए हम दिक्सूचक सुई और चुंबक के बीच लकड़ी का एक टुकड़ा रखते हैं| क्या इससे दिक्सूचक सुई के विक्षेपण पर कोई प्रभाव पड़ेगा?   

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क्रियाकलाप 4.7- आइए, जाँच करें


*क्रियाकलाप 4.6 के पहले या दूसरे भाग को दोहराएँ|

* छड़ चुंबक और चुंबकीय दिक्सूचक को छेड़े बिना, उनके मध्य लकड़ी का एक टुकड़ा चित्र 4.10 में दर्शाए चित्र के अनुसार रखें| अब दिक्सूचक सुई को ध्यान से देखें|

*क्या लकड़ी का टुकड़ा मध्य में रखने से दिक्सूचक सुई के विक्षेपण पर कोई प्रभाव हुआ? अपने अवलोकन inतालिका 4.2 में अंकित करें|

*लकड़ी के टुकड़े के स्थान पर कार्डबोर्ड शीट, पतली प्लास्टिक शीट और पतली काँच की शीट रखकर 'उपरोक्त प्रक्रिया दोहराएँ|

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 चित्र 4.10—दिक्सूचक  और एक  चुंबक  जिसके मध्य में एक लकड़ी का टुकड़ा रखा है 


तालिका 4.2- अवलोकन करना कि क्या चुंबक का प्रभाव अचुंबकीय पदार्थों के भीतर से होकर उनके पार जा सकता है
 
क्र. सं.

चुंबक और दिक्सूचक सुई के मध्य रखी गई सामग्री

 अवलोकन

1.

लकड़ी


2.

कार्डबोर्ड


3.

प्लास्टिक


4.

काँच




जब चुंबक और दिक्सूचक सुई के मध्य उपर्युक्त उल्लिखित किसी भी सामग्री की शीट रखी जाती है तो आप सुई के विक्षेपण में कोई विशेष परिवर्तन नहीं देखेंगे| इसलिए हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि चुंबकीय प्रभाव अचुंबकीय पदार्थों के भीतर से होकर उनके पार जा सकता है|

4.5 चुंबकों के साथ मनोरंजन


चुंबकों के बारे में जानने के बाद रेशमा बहुत उत्साहित थी और उसने अपने विद्यालय के मेले में चुंबकों का उपयोग करके कुछ रोचक क्रियाकलाप आयोजित करने का निर्णय लिया| आप भी इन्हें अपने लिए बनाने की कोशिश कर सकते हैं और कुछ अन्य रोचक वस्तुएँ बनाने पर भी विचार कर सकते हैं| 
   क्या हम चुंबकों का प्रयोग करके एक माला (चित्र 4.11) बना सकते हैं?

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      चित्र 4.11   चुंबकीय   माला

                                                  
चुंबक कुछ वस्तुओं को बिना छुए भी हिला सकता है  | क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है?

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क्या   हम गत्ते  की  ट्रे  के नीचे चुंबक को चलाकर स्टील की गेंदें भूलभुलैया से बाहर निकाल सकते हैं? (चित्र 4.12)

क्या पानी में गिरे हुए स्टील के पेपर क्लिप को चुंबक का उपयोग करके हम अपनी अँगुलियों या चुंबक को गीला किए बिना बाहर निकाल सकते हैं? (चित्र 4.13)


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चित्र 4.12- भूलभुलैया में स्टील की गेंदें


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चित्र 4.13- पानी में स्टील पेपर क्लिप


चित्र 4.14 में दर्शाई गई दोनों कारों को पास में लाने पर क्या वे एक-दूसरे की ओर तेजी से बढ़ेंगी या एक-दूसरे से दूर जाएँगी?
                                                                                                         
                                                                                         
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चित्र 4.14 माचिस की डिब्बियों से बनी दो कारें जिनके ऊपर उड़ चुंबक रखे गए हैं

    
और अधिक जानें!
           
                                  
कुछ चुंबकों में उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों को N और S से चिह्नित किया जाता हैं| कुछ अन्य चुनकों में उत्तरी ध्रुव सफेद बिंदु से दर्शाया जाता है| कभी-कभी, चुबक के उत्तरी ध्रुव लाल रंग से और दक्षिणी ध्रुव नीले रंग से भी दर्शाए जाते हैं|


 
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चुंबकों को सुरक्षित कैसे रखें? 
चुंबक कहता है,

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"मुझे ध्यान से रखो| मुझे जोड़ों में इस प्रकार रखो कि दोनों चुंबकों   के विपरीत ध्रुव एक ही तरफ हों| दो चुंबकों के मध्य एक लकड़ी का टुकड़ा हो तथा सिरों पर नर्म लोहे के टुकड़े हों|"
"मुझे गरम मत करो और गिराओ मत  |  मुझे हथौड़े से मत पीटो| मुझे मोबाइल फोन या रिमोट के पास मत रखो|"

                                                                                                     j11



सावधानी 
मनोरंजन करो, 
लेकिन चुंबकों का ध्यान रखो
 
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प्रमुख शब्द

आकर्षण

निष्कर्ष निकालना

छड़ चुंबक

निर्माण करना

                                         चुंबकीय दिक्सूचक

प्रयोग करना

चुंबकीय पदार्थ

खोज करना

अचुंबकीय पदार्थ

जाँच करना

चुंबक का उत्तरी ध्रुव

अवलोकन करना

प्रतिकर्षण

पूर्वानुमान लगाना

वलय चुंबक

अंकित करना

चुंबक का दक्षिणी ध्रुष




                                              U  आकार  युवक



 
 सारांश

मुख्य बिंदु

* चुंबक के दो ध्रुव होते हैं- उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुवा

* चुंबकीय ध्रुव हमेशा उत्तरी ध्रुवऔर दक्षिणी ध्रुव के जोड़ों में ही र ध्रुव या एकल दक्षिणी ध्रुव का अस्तित्व नहीं होता है| रहते हैं| एकल उत्तरी

* चुंबकीय पदार्थ वे पदार्थ होते हैं, जो चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं|

* अचुंबकीय पदार्थ वे पदार्थ होते हैं, जो चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होते हैं|

* स्वतंत्र रूप से लटका हुआ चुंबक उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है|

* चुंबकीय दिक्सूचक की सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है|

* जब दो चुंबकों को एक-दूसरे के समीप लाया जाता है, तो समान ध्रुव (उत्तर-उत्तर, दक्षिण-दक्षिण) एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, जबकि विपरीत ध्रुव (उत्तर-दक्षिण) एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं|

 
आइए, और अधिक सीखें



1. निम्नलिखित में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(क) दो चुंबकों के विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को ......................करते हैं, जबकि  समान ध्रुव एक-दूसरे को   ..........................करते हैं|

(ख) वे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं, उन्हें. .............................. कहते हैं|

(ग) चुंबकीय दिक्सूचक की सुई.  ............................ दिशा में ही ठहरती है|

(घ) चुंबक में सर्वदा......................ध्रुव होते हैं

2. निम्नलिखित कथन सत्य (✔) हैं या असत्य (✗ ) ---

(क) किसी चुंबक को टुकड़ों में तोड़कर एक ध्रुव प्राप्त किया जा सकता है  |   (   )

 (ख) चुंबक के समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं  |     
  (   )

(ग) जब किसी छड़ चुंबक को लोहरेतन के पास लाया जाता है. तो अधिकांश लोहरेतन उसके बीच में चिपक जाता है |    
  (   )

(घ) स्वतंत्र रूप से लटका हुआ छड़ चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा  की ओर इंगित करता है |     
  (   )

3. स्तंभ  I में विभिन्न स्थितियाँ दर्शाई गई हैं, जिनमें एक चुंबक का कोई एक ध्रुव दूसरे चुंबक के किसी ध्रुव के निकट स्थित होता है  | स्तंभ  II  में विभिन्न स्थितियों के लिए उनके बीच होने वाली अंतः क्रिया दर्शाई गई है| रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए  |


स्तंभ  I 

स्तंभ  II 

N – N 

........................

N –.................

आकर्षण

S – N

......................

................... – S

प्रतिकर्षण





4.  अथर्व ने एक प्रयोग किया जिसमें उसने एक छड़ चुंबक लिया और उसे स्टील की पिनों के ढेर पर घुमाया (चित्र 4.15)|

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चित्र 4.15 एक छड चुंबक और स्टील पिनों का   ढेर

आपके अनुसार तालिका 4.3 में दिए गए अवलोकनों के समुच्चय में से कौन-सा विकल्प संभवतः उसका वास्तविक अवलोकन है?

तालिका 4.3 चुंबक द्वारा उसके विभिन्न स्थानों पर आकर्षित पिनों की संख्या

स्थिति 'क'

स्थिति ख

स्थिति ग

10 

2

10

10 

10 

2

2

10 

10 

10 

10 

10 




5. रेशमा ने बाजार से तीन एकसमान धातु की छड़ें खरीदी| इनमें से दो छड़े   चुम्बक थी और एक लोहे का टुकड़ा था| बिना किसी अन्य सामग्री का उपयोग किए, वह कैसे पहचानेगी कि तीनों में से कौन-सी दो छड़े चुंबक हो सकती है|

6. आपको एक चुंबक दिया गया है जिस पर ध्रुवों की पहचान अंकित नहीं है| आप एक अन्य चुंबक जिस पर ध्रुव अंकित हैं की सहायता से दिए गए चुंबक के  ध्रुवो  पता कैसे लगा सकते है|
7. एक छड़ चुंबक पर उसके ध्रुवों को दशनि के लिए कोई चिह्न अंकित नहीं है| आप किसी अन्य चुंबक का उपयोग किए बिना यह कैसे पता लगाएँगे कि उसका उत्तरी ध्रुव किस छोर पर स्थित है?

8. यदि पृथ्वी स्वयं एक चुंबक है तो क्या आप चुंबकीय दिक्सूचक से दिशा देखकर पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों का अनुमान लगा सकते हैं?

9. एक मिस्त्री पेंचकस की सहायता से एक यंत्र की मरम्मत कर रहा था लेकिन स्टील के पेंच बार-बार नीचे गिर रहे थे| इस अध्याय में आपने जो सीखा है, उसके आधार पर मिस्त्री की समस्या को हल करने का उपाय सुझाइए|

10. दो वलय चुंबक, 'क' और 'ख', चित्र 4.16 में दर्शाए अनुसार व्यवस्थित हैं| यह देखा गया है कि चुंबक 'क' नीचे की ओर नहीं जाता है| इसका संभावित कारण क्या हो सकता है? किसी भी चुंबक को बिना धकेले चुंबक 'क' को चुंबक 'ख' के संपर्क में लाने का उपाय सुझाइए|

11. तीन छड़ चुंबकों को चित्र 4.17 में दर्शाए अनुसार एक मेज पर व्यवस्थित किया गया है| एक सिरे (5) की ध्रुवता आपको दी गई है| अब आप बताइए कि चुंबकों के सिरों 1, 2, 3, 4 और 6 पर ध्रुवता Nया S में से क्या-क्या है?

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चित्र 4.16-
दो वलय चुंबक


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चित्र 4.17- तीन छड़ चुंबक


 
और भी सीखें



  • 3-4 भिन्न-भिन्न चुंबकों का उपयोग करके कुछ स्टील पिन या   U-क्लिप को उठाने का प्रयास करें और पता लगाएँ कि कौन-सा चुंबक अधिकतम संख्या में पिन या क्लिप उठाता है| अपने मित्रों के साथ चर्चा करें कि भिन्न-भिन्न  
    चुंबकों
     ने अलग-अलग संख्या में पिन क्यों उठाए होंगे? 

  • अपने शिक्षक की सहायता से एक संयुक्त  कक्षा क्रियाकलाप के रूप में एक खिलोैना फु्दकता हुआ मैढक बनाएँ| इसके लिए एक स्केल ले और गोंद का उपयोग करके,
     स्केल की लंबाई के अनुदिश वलय चुंबकों को क्रमिक रूप से उनके उत्तर तथा दक्षिण ध्रुव ऊपर रखते हुए चित्र 4.18 (क) की तरह चिपकाएँ  | मेंढक में रंग भरें |उसे रूपरेखा के साथ काटें और उसके नीचे की ओर एक वलय चुंबक चिपकाएँ| चित्र 4.18 (क) में दर्शाई गई एक छोटे आकार की पारदर्शी, लचीली प्लास्टिक की पट्टी लें और इसे मेंढक से जुड़े वलय चुंबक पर चिपकाएँ  |

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(क)

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(ख)

चित्र 4.18- मेरा फुदकता हुआ मॅडक


जब आप प्लास्टिक की पट्टी को मेंढक के साथ स्केल पर सरकाएँगे तो आप देखेंगे कि मेंढक उछल रहा है (चित्र 4.18 (ख)]|

  • मैग्लेव ट्रेन के बारे में पता लगाएँ और उसका मॉडल बनाने का प्रयास करें|


  • यह जानने का प्रयास करें कि अलग-अलग आकार के चुंबक बनाने की आवश्यकता  क्यों है?

  •  चिकित्सा के क्षेत्र में चुंबकों के उपयोग से संबंधित जानकारी एकत्रित करें|

 
और अधिक जानें !  
चुंबक 
 कहता है— “मनुषयों ने मुझे अपनी आवशयकता के अनुरूप अलग-अलग आकार और आमाप में बनाया है| तथापि मेरे ध्रुव सदैव जोड़े में होते हैं, चाहे मेरा आकार और आमाप कुछ भी हो|”  

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