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                          अध्याय - 9          दैनिक जीवन में पृथक्क़रण विधियां   

साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय   | 
सार सार को गहि रहै थोथा दई उड़ाय ||
                                                                                                                                                           - कबीर

                                      जिस प्रकार से सूप द्वारा अनाज रख भूसे को उड़ा दिया जाता है, उसी प्रकार सज्जन व्यक्ति गुणों को धारण कर दोषों का परित्याग करते हैं|

                                                                                                                                                                                                                                      - कबीर 



मल्ली और उसकी बहन वल्ली अपनी गरमी की छुट्टियों को लेकर उत्साहित हैं| उनके माता-पिता ने भारत के विभिन्न भागों में रह रहे अपने मित्रों और रिश्तेदारों से मिलने की योजना बनाई है| वे सदैव अपने मित्रों एवं रिश्तेदारों के संपर्क में रहते हैं| क्या आप भी अपने प्रियजनों के संपर्क में रहते हैं?

उनका पहला पड़ाव हरियाणा है जहाँ मल्ली और वल्ली की नानी जी का घर है| उनका घर बड़े-बड़े खेतों से घिरा हुआ है| वे आँगन में जमा विभिन्न प्रकार के अनाजों की ढेरियाँ देखकर खुश हो जाते हैं| उनकी मामी जी और मामा जी समुदाय के अन्य सदस्यों के साथ अपने हाथों से चावल और गेहूं जैसे अनाजों से छोटे कंकड़ और भूसी अलग करने में व्यस्त हैं|

मल्ली और वल्ली यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि ऐसा क्यों किया जा रहा है| उनकी नानी जी उनकी जिज्ञासा देखकर समझाती हैं, निकाल रहे हैं कि यह अनाज पकाने योग्य हो सके|" 
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वे घर के आस-पास के क्षेत्र में घूमते हैं और खेतों तथा मवेशियों को देखते हैं| उन्हें व्यस्त रखने के लिए नानी जी उन्हें आँखें बंद करके अनाज से छोटे कंकड़ चुनने की चुनौती देती हैं|
 किसी ठोस मिश्रण (यह पदार्थ जिसमें दो या अधिक पदार्थ मिले होते हैं, जैसे कि गेहूँ और चावल) में से हाथ द्वारा छोटे कंकड़ और भूसी अलग करने की प्रक्रिया हस्त चयन कहलाती है| यह कणों के आकार, रंग और आकृति के अंतर के आधार पर किया जाता है| यदि पृथक किए जाने वाले कण कम मात्रा में हो और सहजता से उठाए जा सकते हो तो हाथ से   छाँटना  एक सुविधाजनक विधि सिद्ध हो सकती है|

दोपहर के खाने में मल्ली और वल्ली को गरमागरम पुलाव परोसा जाता है| पुलाव खाते समय, नानी जी देखती हैं कि मल्ली पुलाव में से साबुत काली मिर्च निकाल कर प्लेट के किनारे रख रहा है (चित्र 9.1)| वल्ली मजाक में कहती है, " वाह!  यही हाथ से चयन करने की विधि है, अच्छी है ना नानी जी उन्हें काली मिर्च के लाभ बताती हैं और मल्ली को इसे भी खाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं|
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चित्र 9.1 -- हस्त चयन
कुछ समय पश्चात्, उनके मामा जी उन्हें खेतों में ले जाते हैं जहाँ वे काटे गए गेहूँ की पूलों के   गट्ठरो  का अवलोकन करते हैं| कुछ  पूलों को धूप में सुखाने के लिए फैलाया गया है| दोनों एक-एक पूला उठाते हैं और उसमें लगे अनगिनत दाने देखते है कुछ किसान पूलों को एक बड़े लकड़ी के लट्‌ठे पर पीट रहे हैं| जिज्ञासावश  वल्ली मामा जी से पूछती है, "वे ऐसा क्यों कर रहे हैं?

मामा भी समझाते हैं, "वे दाने पृथक करने के लिए पूलों को पीट रहे हैं (चित्र 9.2)| पूलों से दाने पृथक करने की यह प्रक्रिया  थ्रेशिंग कहलाती है| किसान कड़ी मेहनत करते हुए अपने काम का आनंद लेते हैं| समय-समय पर, वे अपने काम के साथ लय में लोकगीत भी गाते हैं|"
अनाज के अलग किए गए दाने भूसे की  ढेरियों में मिल  जाते हैं|
वल्ली  फूसफुसाते हुए मल्ली से कहती है, "क्या किसान इतनी  सारी भूसी में से अनाज निकालने के लिए उसे हाथ से  छाँटेगे " वह सोचाती है, किसानों को इन्हें अलग करने में कितना समय लगेगा? आइए, वल्ली द्वारा उठाए गए प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए एक क्रियाकलाप करें|

सीखे  और  आनंद  ले

 अपने   क्षेत्र के  लोकगीत  खोजें और अपने  मित्रो  के  साथ   गाकर आनंद  ले  | 


 क्रियाकलाप 9.1- आइए खोजें





 चने की दाल में मुरमुरों की थोडी  मात्रा   मिल   गई  है|  क्या   आप  हस्त  चयन  के अलावा  किसी   विधि  से   इस   मिश्रण को पृथक     करने  के  विषय   में सोच  सकते  है |  


  •  मुट्ठीभर भुनी हुई मूँगफली के दाने लें और उन्हें अपनी हथेलियों के बीच रगड़ें| क्या होता है?
  •  क्या मूँगफली के दानों से छिलके पृथक करना संभव है?
  • अब इसमें फूंक मारे| आप क्या देखते हैं?

हटाए गए मूंगफली के छिलके और मूंगफली के दानों में से कौन-सा भाग उड़ जाता है?  आपने देखा होगा कि    फूॅक   मारने से भारी भाग से हल्के भाग अलग हो जाते हैं|
आपके विचार में किसान इतनी सारी भूसी से अनाज कैसे अलग करते हैं?
   पारंपरिक रूप से किसी मिश्रण के भारी और हल्के अवयवों को अलग-अलग करने के लिए सूप (बाँस से निर्मित एक पात्र) का उपयोग किया जाता है (चित्र 9.3)|
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चित्र 9.3    सूप
अगले दिन, उनके नाना जी उन्हें यह प्रक्रिया दिखाने के लिए खेतों में ले जाते हैं| मल्ली और वल्ली देखते हैं कि खेत में एक किसान जैसे चबूतरे पर खड़ा है| किसान उस सूप  को, जिसमें  थे्श किए गए गेहूँ के दाने हैं, वायु की दिशा में हिला रहा है (चित्र 9.4)| चित्र 9.4 से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? क्या गेहूँ के दाने और भूसी, दोनों अवयव एक ही स्थान पर गिरते हैं? गेहूँ के दाने और भूसी  में से कौन-सा अवयव उड़कर दूर चला जाता है? क्या पवन दो अवयवों को पृथक कर सकती है?
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चित्र  9.4  ओसाई (विनोइंग)

 मिश्रण में से भारी और हल्के अवयवों को हवा या फूंक मारकर पृथक करने की यह विधि ओसाई (विनोइंग) कहलाती है|
क्या आपने अपने घर पर इस प्रकार की प्रक्रिया होते हुए देखी है?

और भी  जाने

तकनीकी विकास के परिणामस्वरूप  थ्रेशर नामक  थे्शंग मशीनें निर्मित की गई हैं| इन मशीनों का उपयोग पूलों से भूसी और अनाज के दानों को अलग करने के लिए किया जाता है| ये मशीनें  थ्रेशिंग और ओसाई दोनों कार्य एक साथ   करती है|
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अगले दिन, मल्ली और वल्ली अपने पिता जी के मित्र घनश्याम भाई से मिलने के लिए अहमदाबाद के लिए ट्रेन पकड़ते हैं| वल्ली अपनी मामी जी से यात्रा के लिए मीठी पूरी बनाने का अनुरोध करती है|

                                                       वल्ली बंद कमरे में चावल से  भूसी  अलग नहीं कर पा रही है| आप उसकी सहायता कैसे कर सकते हैं? ?




वल्ली "क्या मैं गेहूँ का आटा गूंथने में आपकी सहायता करूॅ?"

मामी जी "आटे से कोई भी व्यंजन तैयार करने के लिए पहले हमें आटे में विद्यमान  चोकर निकालना होता है|" 
वल्ली --"हम इसे कैसे करते हैं?"
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चित्र 9.5    चालन
मामी जी--- हम इसके लिए चालनी का प्रयोग करते हैं|" चालन से आटे के बारीक कण चालनी के छिद्रों से निकल जाते हैं जैसा कि चित्र 9.5 में दिखाया गया है| बड़े कण जैसे  चोकर
और छोटे कंकड़   चालनी में रह  जाते हैं|  
ध्यान  से  चालनी का अवलोकन करें| क्या चालनी के सभी छिद्र एक ही आकार  के  हैं| यदि चालनी में छिद्र पदार्थों से बड़े हो तो क्या छानना प्रक्रिया काम करेगी? चालनी से गुजरने वाले कणों  और  चालनी पर रहने वाले कणों के आकार में क्या अंतर होता है? जब दो या दो से अधिक ठोसों के मिश्रण के अवयवो के कणों के आकार भिन्न होते हैं, तब चालन की विधि का उपयोग किया जाता है|

                                                      
क्या आपने कभी निर्माण    स्थलों  पर रेत से कंकड़ और  पत्थर अलग करने के लिए  चालनी   का उपयोग होते देखा है




अहमदाबाद पहुँचने पर, वे घनश्याम भाई के साथ साबरमती आश्रम जाते हैं, जहाँ वे नमक सत्याग्रह (दांडी यात्रा) के बारे में जानते हैं|
                        करने के लिए कुछ और

साबरमती   आश्रम   किस लिए प्रसिद्ध है?

दांडी   यात्रा का एक पोस्टर बनाएँ और चर्चा करें कि इस यात्रा का आयोजन क्यों किया गया था|
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मल्ली   पूछता है ----"नमक कहाँ से प्राप्त होता है?"
"समुद्र-जल से", घनश्याम भाई उत्तर देते हैं|
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समुद्री जल पानी में घुले विभिन्न लवणों एवं अन्य पदार्थों का मिश्रण है| नमक प्राप्त करने के लिए समुद्र का जल उथले गड्‌ढ़ों में रखा जाता है जहाँ यह धूप और हवा के संपर्क में  आता है| कुछ दिनों में, जल पूरी तरह से वाष्पित हो जाता है और ठोस नमक शेष रह जाता है (चित्र 9.6) | फिर लवण के इस मिश्रण को शोधित कर साधारण नमक प्राप्त किया जाता है|

 करने के लिए  कुछ और
भारत में  उन    जलाशयों के विषय में   पता  लगाएॅ   जिनमे  साधारण  नमक  पाया  जाता है | इसका  एक स्रोत  राजस्थान  में   सांभर झील  है |


आइए, हम स्वयं क्रियाकलाप करके पता लगाएँ कि नमक के विलयन से नमक को कैसे अलग कर सकते हैं|

क्रियाकलाप 9.2- आइए, अवलोकन और रचनात्मक बने


  • एक कटोरी या कोई भी पात्र ले और उसे जल से आधा भरें|
  • उसने दो से तीन चम्मच नमक डालें और तब तक हिलाते रहें जब तक वह   घुलकर विलयन न बना ले| 
  • एक काले या गहरे रंग का मोटा कागज का टुकड़ा लें और   उस  पर नमक के इस विलयन की कुछ  बूंद डालें (चित्र   9.7 क)|
  • आप इस नमक के विलयन से कागज पर अपने पसंद की कोई भी कलाकृति बना सकते हैं|
  • इसे सूखने दें और अवलोकन करें| (चित्र 9.7 ख और चित्र 9.7 ग
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   (क)     सूखने से पहले    (ख)  सूखने  के  बाद  
(ग) कलाकृति



 
क्या आपने कभी गर्मियों के समय गहरे रंग के कपड़ों पर सफेद धब्बे देखें है ये   धब्बे  कैसे  बनते हैं ?

क्या आपको कागज पर कुछ  धब्बे   दिखाई देते हैं? आपको क्या लगता है कि कागज पर क्या बचा है? कागज छूकर आप नमक की उपस्थिति महसूस कर सकते हैं| पानी कहाँ लुप्त हो गया? 'जल की विविध अवस्थाओं की यात्रा' नामक अध्याय का स्मरण करेंरो आइए, उत्तर प्राप्त करने के लिए आगे जाँच करें|

क्या  आप  जानते है 
समग्र   स्वास्थ्य और   चिकत्सा  की   पारंपरिक   भारतीय  प्रणाली   आयुर्वेद  में   उपचार  के  लिये    जड़ी -बूटियों    या  पौधों के   भागों  का  उपयोग करने  की  सलाह  दी  जाती  है|  प्रात:  इन   सामाग्रियों (जैसे  विभिन्न  औषधीय पौधों की जड़ों,  पतियों,  फूलो  या  बीजों) को  छाया में सुखाते हैं | इस  प्रक्रिया  में    अतिरिक्त  जल  का वाष्पीयकरण   हो  जाता है   जिससे  औषधि का  महत्वपूर्ण  भाग बचा  रहता है



क्रियाकलाप  9.3 --- आइए, जाँच करें


यह  क्रियाकलाप शिक्षक द्वारा प्रदर्शित किया  जा सकता है|

  • एक चीनी मिट्टी की डिश में कुछ नमक का विलयन (क्रियाकलाप 9.2 में तैयार किया गया) ले यदि चीनी मिट्टी की   डिश  उपलब्ध नहीं है तो किसी अन्य उपयुक्त पात्र का उपयोग किया जा सकता है|
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सावधान
चीनी   मिट्टी   की  डिश  को गरम करते समय सावधान रहें |


  •  इसे गरम करें और जल उबलकर उड़ जाने दें जैसा कि चित्र 9.8 में दर्शाया गया है|
  • चीनी मिट्टी की दिशा को ठंडा होने दें|
  • आप क्या देखते हैं| चीनी मिट्टी की डिश में क्या बचा है?
            क्या आपको नमक  वापस  प्राप्त हुआ| आप चीनी मिट्टी की डिश में नमक की उपस्थिति को अपनी अंगुलियों से रगड़कर महसूस कर सकते हैं|

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क्या कोई एसी विधि है
जिससे  मै नमक  और  पानी दोनों  प्राप्त  कर सकता  हूॅ |




 
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चित्र  का  अवलोकन  करे   क्या  यह  प्रश्न का उत्तर देता  है ?  क्या  आप  इससे सम्बंधित  प्रक्रिया का  नाम  बता सकते  है ?



अब समय आ गया है कि वे दक्षिण भारत के पुडुचेरी में रहने वाले अपने दादा जी और दादी जी से मिलने जाएँ  मल्ली और वल्ली अपने   पुराने  पड़ोसी  मित्र   बालन  से मिलने के लिए उत्साहित हैं| पुडुचेरी पहुँचने के बाद, वे पुराने समय की बातें याद करने लगते हैं और उन्हें पता ही नहीं चलता कि शाम हो गई है और दादी जी की चाय का समय हो गया है|
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दादा  जी  ---" मैं आपके लिए  चाय बनाता हूँ| "
बच्चे    ----  "हम भी आपकी सहायता करेंगे  |"
चाय बनाते समय दादा जी ने एक कप चाय बनाने के तरीके के बारे में कुछ सुझाव दिए|
बालन  --- "चाय बनाने के बाद आप  चाय  की पतियों को कैसे अलग करते हैं?"


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अच्छा !   निस्तारण  प्रक्रिया  का  उपयोग चावल  और   दालों    को   धोने  और साफ  करने में भी किया जाता है



दादा जी--- स्पष्ट है, चालनी के द्वारा आप जानते हैं कि यदि हमारे पास चालनी नहीं है तो भी हम अधिकांश चाय की पतियों को  अलग कर सकते हैं|
वल्ली ---  "वह कैसे ?"
दादा जी ---" चाय वाले  बर्तन  (पात्र)  को  कुछ समय के लिए  स्थिर छोड़ दें और  फिर  चाय को    धीरे धीरे  कप में उडे़लें( चित्र  9.9)"
वल्ली— “अरे हाँ! और तब  चाय  की  पत्तियाँ   नीचे  रह  जाएंगी|” ठोस और द्वव के मिश्रण में   भारी  अवयव  नीचे  बैठ  जाता  है | इस  प्रक्रिया  को अवसादन (सेडीमेंटेशन) कहते हैं|जब  बर्तन को तिरछा कर  जल ( द्रव) को हटाया जाता है, तो यह प्रक्रिया   निस्तारण  (डीकेंटेशन) कहलाती है |



'हमारे आस-पास की सामग्री' अध्याय में आपने पढ़ा कि तेल जल में मिश्रित नहीं और कुछ समय तक बिना हिलाए रखने  पर एक अलग परत बना लेता है| तेल और जल को पृथक करने के लिए आप किस विधि का उपयोग करेंगे? 


दादा जी--- "लेकिन फिर भी मेरे मुँह में चाय की कुछ पत्तियाँ आ सकती हैं क्योंकि निस्तारण की प्रक्रिया से पूरी तरह चाय की पत्तियाँ चाय से अलग नहीं होती हैं|"
बालन----- "अच्छा! इसका अर्थ यह है कि इसको अलग करने के लिए यह उपयुक्त विधि नहीं है|"
दादा जी---- "बिल्कुल, सही!  तुम ठीक कह रहे हो| अच्छा बच्चों अब चाय तैयार है|" मल्ली ताक से चाय की चालनी उठाता है और अपने दादा जी को देता है|दादा जी ---आइए अब मैं चाय को इस चालनी से छानता हूँ| तुम देख सकते हैं कि सारी चाय की पत्तियाँ चालनी में रह जाती हैं| चाय से चाय की पत्तियाँ पृथक करने की इस प्रक्रिया को निस्यंदन (फिल्टर करना) कहते हैं|
    बालन मल्ली से पूछता है कि क्या वह मटमैले जल के निस्यंदन के लिए चाय की चालनी का उपयोग कर सकता है| आओ, क्यों न हम स्वयं करके इसका पता लगाएँ|
 दादा जी--- "साथ ही मटमैले जल को कपड़े के एक टुकड़े से भी छानने का प्रयास कीजिए और अंतर देखिए|"


 स्वच्छ जल पाने के लिए मुझे कपड़े की कितनी परतों का उपयोग करना होगा?
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मल्ली "हमें कपड़े का टुकड़ा क्यों उपयोग करना चाहिए?"

दादा जी "कपड़े के टुकड़े की बुनाई में धागों के बीच छोटे-छोटे रंघ्र या छिद्र होते हैं| कपड़ों के इन छिद्रों का उपयोग छानने के लिए किया जा सकता है| प्राचीन काल में भी लोगों ने इस पद्धति को अपनाया|"
यदि जल एक बार छानने के बाद भी गंदा है, तो अशुद्धियाँ फिल्टर-पत्र का उपयोग करके अलग की जा सकती हैं, जिसमें और भी छोटे रंध्र या छिद्र होते हैं| फिल्टर-पत्र एक ऐसा निस्यंदक होता है, जिसमें अत्यंत सूक्ष्म छिद्र होते हैं|

 क्रियाकलाप 9,4 आइए, प्रयोग करें

चित्र 9.10 में दिखाए अनुसार आप स्वयं फिल्टर-पत्र मोड़कर उसका एक शंकु (कोन) बनाने का प्रयास करें|
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एक  फ़िल्टर-पत्र

एक   तह (फोल्ड)
दो तह (फोल्ड)
शंकु कोन

चित्र9.10 --  शंकु (कोन) बनाने के लिए फिल्टर-पत्र मोडना


  • इसे एक  शंकवाकार  फ्लास्क पर रखी कीप (फनल) के अंदर रखें और इसमें मटमैला पानी डालें| (चित्र 9.11)
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  • आपने क्या अवलोकन किया? क्या मिट्टी के कण फिल्टर-पत्र से होकर निकल जाते है?
  • कीप से निकलने वाला  जल शंक्वाकार  फ्लास्क  में एकत्रित हो जाएगा|
  •   आपको फिल्टर-पत्र पर अवशेष के रूप में मिट्टी और    शंकवाकार  फ्लास्क   में निस्यंद के रूप में स्वच्छ जल मिलेगा

और  भी जाने
 फिल्टर-पत्र के अतिरिक्त कपास, चारकोल, रेत इत्यादि अनेक सामग्रियों का उपयोग निस्यदंक के रूप में किया जा सकता है| निस्यर्दक का चुनाव पृथक की जाने वाली सामग्रियों के कणों के आकार पर निर्भर करता है|





 क्रियाकलाप 9.5-आइए, डिजाइन करें और बनाएँ


वल्ली अपनी दादी जी के साथ प्रकृति की सैर पर जाती है और एक तालाब से थोड़ा जल एकत्रित करती है| उसे जल में कुछ अवांछित पदार्थ दिखाई देते हैं| कम लागत की सामग्रियों का उपयोग करके जल के निस्यंदन के लिए एक कार्यकारी मॉडल की योजना बनाएँ और इसका निर्माण करें|

क्या आप जानते हैं?

टी-बैग (चाय की पत्ती की थैली) पहले रेशम जैसे मुलायम कपड़ों से बनाई जाती थीं क्योंकि ये चाय की पत्ती को रोक लेती थीं और जल इनके आर-पार निकल सकता था| रेशम मजबूत होने के कारण गरम जल के संपर्क में आने पर फटता नहीं था| बाद में लोग जाली या मलमल के कपड़े का उपयोग करने लगे| अंततः उन्होंने फिल्टर-पत्र का उपयोग करना आरंभ किया जिससे आजकल अधिकांश टी-बैग बनाए जाते हैं|


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मल्ली और वल्ली अपने दादा जी और उनके मित्र ओटुक्कम के साथ पास की नदी में नौका विहार के लिए जाते हैं| ओटुक्कम एक मछुआरे हैं| जैसे ही वे मछली पकड़ने का जाल डालते हैं तो पानी जाल से बाहर बह जाता है| वल्ली को पहले सीखी हुई निस्यंदन की विधि का स्मरण हो आता है और वह समझती है कि मछली पकड़ने की यह विधि बहुत कुछ उसी के समान है| मल्ली जाल में फैसी मछलियों के साथ प्लास्टिक की थैलियाँ, टूटी बोतलें, खाद्य सामग्रियों के पैकेट और एक बड़ी मछली के मुँह में फैसी   प्लास्टिक की नली देखकर स्तब्ध हो जाता है|

आइए नदी और महासागरों में प्रदूषण के मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए एक कविता की रचना करें|
यहाँ कुछ पंक्तियों लिखी गई है. इनमें कुछ और पक्तियाँ जोड़ें-

समुद्र में तैरती थी, छोटी मछली कोइलास 
नन्ही-सी, प्यारी-सी, भी वो सबकी खास 


एक दिन प्लास्टिक का बड़ा टुकड़ा बहता हुआ आया
 गर्दन कोइलास की फंस गई, दर्द ने उसे तड़पाया
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मम्मी मछली रोए और पापा पुकारे कोइलास 
पर धौरे-धीरे बंद हो गई उसकी आँखें आज
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प्रदूषण से भरे महासागर, मछलियाँ दम तोड़ रहीं  
 हमारे गलत कार्यों के कारण, अब नन्ही कोइलास नहीं रही 

जल है जीवन का आधार, प्रदूषण से न करो इसे बेकार
 इसको बचाना है सबकी जिम्मेदारी, 
यही तो है सबसे बड़ी समझदारी
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 अपने अभिभावकों के साथ चर्चा करें 
अपने  घर में कटोरे में रखा हुआ  दूध  फट गया है  अपने  अभिवावकों  के  साथ  चर्चा  करे कि आप इसे किस प्रकार उपयोग कर सकते है? इस प्रक्रिया में आप पृथक्करण की किस विधि का प्रयोग करेंगे|


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मल्ली और वल्ली अपने दादा-दादी जी का आशीर्वाद लेते हैं और बालन को शुभकामनाएँ देकर मध्यप्रदेश के नगर भोपाल की यात्रा पर निकल पड़ते हैं|
रेलगाड़ी जब भोपाल पहुंचती है उस समय तीव्र धूप के कारण गर्मी बढ़ रही है| ये मौसी के घर की ओर जाते समय एक  ढाबे  में छाछ पीते हैं| मल्ली  ढाबे  की दीवार पर लटकी बड़ी-सी पेंटिंग के बारे में दुकानदार से पूछता है| दुकानदार बताता है कि चित्र में घरों में एक बड़ी मथनी से ही मथकर  मक्खन प्राप्त करने की प्रक्रिया को दर्शाया गया है, जिसे मथना कहते हैं| इस प्रक्रिया में हल्का होने के कारण मक्खन ऊपर तैरता है जबकि छाछ  नीचे रह जाती है|


 
क्या आप रसोई घर में पाए जाने वाले एक उपकरण का नाम बता सकते हैं जो बिजली से चलता है और छाछ तैयार करने के लिए उपयोग में लाया जाता है?
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मौसी के घर पर उनका प्रवास आनंदमय रहा और वे घर लौटने पर अपनी सभी यादें अपने मित्रों के साथ साझा करने के लिए उत्सुक हैं| अब उनका अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव मेघालय की राजधानी शिलांग पहुँचने का समय आ गया है|

शिलांग में अपनी बुआ के घर पहुँचते ही वे एक बढ़ई को लकड़ी का द्वार बनाते देखते हैं| काम करते समय उससे अचानक कुछ लोहे की कीलें लकड़ी के बुरादे में गिर जाती हैं|
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चित्र 9.12- चुबकीय पृथक्करण

बढ़ई हाथ से लोहे की कीलों को निकालने लगता है| बच्चे बढ़ई से रुकने के लिए कहते हैं| वे अपनी बुआ से चुंबक लेते हैं| वे बढ़ई से कहते हैं कि इस चुंबक को लकड़ी के बुरादे पर  घुमाइए  | सारी कीलें चुंबक से आकर्षित होकर उस पर चिपक जाती हैं (चित्र 9.12)| बढ़ई ने पृथक्करण की किस विधि का उपयोग किया? ' चुम्बको  को जानें' अध्याय का स्मरण करें|
   वे पदार्थ जो चुंबक के प्रति आकर्षित होते हैं, उन्हें चुंबकीय पदार्थ कहा जाता है| लोहा चुंबकीय पदार्थ का एक सामान्य उदाहरण है|  चुम्बक का उपयोग करके चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थों को पृथक करने को चुंबकीय पृथक्करण कहते हैं|


और  भी  जाने


आजकल, पुनर्चक्रणकर्ता (रिसाइक्लर) अपशिष्ट के ढेर से लोहे  की वस्तुओं को अलग करने के लिए   विधुत चुंबक का उपयोग करते हैं|

कई उद्योगों के अपशिष्ट में प्रायः अनुपयोगी लोहे की कतरने (स्क्रैप आयरन )होती हैं| इसे क्रेन में लगे चुंबक का उपयोग करके अपशिष्ट सामाग्री के ढेर से अलग किया जाता है|

अनुपयोगी लोहे की कतरनों का पुनर्यक्रम करके उन्हें पुनः उपयोग में लाया जा सकता है|

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चुंबकीय पृथक्करण  




मल्ली और वल्ली की छुट्टियों आनंदमय रहीं| उनकी यह मनोरंजक 'भारत की यात्रा' उनकी स्मृतियों में स्थायी रूप से रहेगी|

उन्होंने न केवल भारत के विभिन्न क्षेत्रों को जानने का आनंद लिया बल्कि पदार्थों को पृथक करने की विभिन्न विधियों का भी ज्ञान प्राप्त किया|

क्रियाकलाप 9.6 आइए, खेल खेलें


निम्नलिखित वाक्यांशों को कागज की छोटी पर्चियों पर लिखे

1. दालों से छोटे कंकड़ पृथक करना|
2. दही मथकर मक्खन प्राप्त करना|
3. पके हुए दलिये या पोहे से हरी मिर्च निकालना|
4. तरबूज से बीज निकालना|
5. निर्माण सामग्री के मिश्रित ढेर से लकड़ी के  बुरादे और लोहे की कीलों को पृथक करना|
6. माला बनाने के लिए विभिन्न फूलों के ढेर में से गेंदे के फूल चुनना| 
7. रेत से कंकड़ पृथक करना|
8. चावल के आटे में से नारियल के टुकड़े पृथक करना|
9. पानी से तेल पुथक करना|
10. नमक के विलयन से नमक पृथक करना|
 
दो टोकरियाँ लें, इनमें से प्रत्येक उन दो प्रयोजनों में से एक को प्रदर्शित करती है, जिनके लिए हम पदार्थों का पृथक्करण करते हैं| दो दल बनाएँ और देखें कि कौन-सा दल अधिकतम सही प्रविष्टियाँ प्रस्तुत कर पाता है|

सोचे और आरंभ करें
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यह क्रियाकलाप आपके इम बोध का आकलन करने में सहायता करेगा कि हम पदार्थों को पृथक क्यों करते हैं?


प्रमुख शब्द

मथना
मिश्रण
सृजन करना
निस्तारण

अवसादन

योजना बनाना
निस्यन्दन छानना
प्रयोग करना
हस्त  चयन थ्रेशिंग
अन्वेषण करना

  चुंबकीय पृथक्करण

ओसाई
निष्कर्ष निकालना

वाष्पीकरण/वाष्पन

जाँच करना


अवलोकन



सारांश



* हस्त चवन (हाथ से चुनने) प्रक्रिया का उपयोग मिश्रण में से ठोस पदार्थों को उनके आमाप, रंग और आकृति के आधार पर पृथक करने के लिए किया जाता है|
* यह प्रक्रिया जिसमें अनाज के पूलों को पीटकर उनमें से अनाज पृथक किया जाता है,  थ्रेशिंग कहलाती है|
* बहती हवा या पवन का उपयोग करके हल्के भूसे को भारी अनाज से पृथक करने की विधि ओसाई (विनोइंग) कहलाती है|
* एक चालनी का उपयोग करके कणों के आमाप में भिन्नताओं के आधार पर मिश्रण से ठोस पदार्थों को पृथक करने की प्रक्रिया छानना कहलाती है|
*वाष्पीकरण या वाष्पन वह प्रक्रिया है, जिसमें एक द्रव अपने वाष्प में परिवर्तित हो जाता है| इसका प्रयोग एक द्रव में  घुले ठोस को पृथक करने के लिए किया जा सकता है|
*किसी द्रव के तल पर भारी अघुलनशील अवयव के जमा हो जाने की प्रक्रिया अवसादन (सेडीमेंटेशन) कहलाती है| जब बर्तन को तिरछा कर द्रव को निकाल दिया जाता है तो इस प्रक्रिया को निस्तारण (डीकेंटेशन) कहते हैं|
* निस्यंदन (फिल्टरेशन) का उपयोग अघुलनशील ठोस अवयवों को द्रव से पृथक करने के लिए किया जाता है| 
* मथनी का उपयोग दही से मक्खन निकालने के लिए किया जाता है| 
* चुंबक का उपयोग करके चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थों का पृथक्करण करने की प्रक्रिया चुंबकीय पृथक्करण कहलाती है|

एक खेल खेलिए- बुद्धिमान मछली

स्थानीय रूप से उपलब्ध पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों से अपनी मछली पकड़ने की छड़ी तैयार करें| छड़ी के एक सिरे पर धागा बाँधे और धागे के मुक्त सिरे पर चुंबक बाँधे|  टैंक1 में लाल गत्ते की मछलियाँ और टैंक 2 में नीले गत्ते की पर्चियाँ हैं जिन पर लोहे के क्लिप लगे हैं| छड़ी द्वारा पहले एक लाल मछली निकाले जो किसी पृथक्करण विधि का प्रतिनिधित्व करती है, फिर इससे संबंधित नीली पर्ची निकालें| अपने मित्रों पर ध्यान दें| क्या वे इसे सही ढंग से खेल रहे हैं?

पहले मुझे पकड़ें!  
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 और धिर मुझे!  
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 आइए, और अधिक सीखें


1.    पृधक विधि के कहर का क्या प्रयोजन है|

       (क)  निस्यन्दन
       (ख)  छँटाई
        (ग) वाष्पन 
        (घ) निस्तारण

2.    निम्नलिखित में से किन   पदार्थो  का  पृथक्करण   मथना  विधि से किया जाता है?

       (क) तेल का पानी से
       (ख) रेत  का पानी से
        (ग)  मक्खन  का दूध में
       (घ) ऑक्सीजन का वायु से

3    निस्यंदन  के लिए  निम्नलिखित में से  कौन - सा  कारक  प्राय: अनिवार्य होता  है?
         (क)  उपकरण  का  आकार 
           (ख)  वायु  की  उपस्थिति
            (ग) छिद्रों  का आकार
            (घ) मिश्रण का तापमान

4.     कारण देते हुए बताएँ कि निम्नलिखित कथनों में सही  और गलत    कौन - कौन   से  है  ?  असत्य कथनों को सही करके लिखें  |

(क) नमक के विलयन को सूर्य के प्रकाश में या धूप में रखकर नमक को इससे पृथक किया जा सकता है|               [     ]
(ख) जब एक अवयव कम मात्रा में हो तभी हस्त चयन का उपयोग होता है|                                                             [     ]
(ग) मुरमुरे और चावल के दानों के मिश्रण को   थ्रेशिंग द्वारा पृथक कर सकते हैं|                                                      [     ]
(घ) सरसों के तेल और नींबू पानी के मिश्रण को निस्तारण द्वारा पृथक कर सकते हैं|                                                 [     ]
(ङ) छानने की विधि का उपयोग चावल के आटे और पानी को पृथक करने में होता है|                                              [     ]

5. स्तंभ | में दिए गए प्रत्येक मिश्रण को स्तंभ || में उपयुक्त पृथक्करण विधि से मिलान करें|

स्तंभ I
स्तंभ II

(क) बेसन और काले चने का मिश्रण
(1) हस्त चयन
(ख) चॉक पाउडर और पानी का मिश्रण

(ii) चुंबकीय पृथक्करण
(ग) भुट्टे और आलू का मिश्रण
(iii) निस्तारण
(प) लोहे के चूरे और बुरादे का मिश्रण
(iv) छानना
(ङ) तेल और पानी का मिश्रण
(v) निस्यंदन





 6. किस परिस्थिति में आप ठोस और द्रव के मिश्रण को पृथक करने में    निस्यन्दन के स्थान पर निस्तारण विधि का उपयोग करेंगे?

7. नासिका में बालों की उपस्थिति को आप किस पृथक्करण प्रक्रिया से जोड़कर देखते हैं?

8. कोविड-19 (कोरोना वायरस महामारी) के समय, हम सभी ने मास्क पहने थे| सामान्यतया वे किस सामग्री से बने होते हैं? आपके मुँह और नधुनों (नाक) को  ढ़ँकने  में मास्क की क्या भूमिका है? 
9. आपको आलू, नमक और लकड़ी के बुरादे का मिश्रण दिया गया है| इस मिश्रण के प्रत्येक अवयव को पृथक करने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार कीजिए|

10. अग्रलिखित 'बुद्धिमान लीला' शीर्षक कहानी पढ़ें| इसमें यत्र-तत्र आए दो वैकल्पिक शब्दों में से सबसे उचित विकल्प पर सही (✔) का निशान लगाएँ| अपनी पसंद से अनुच्छेद का कोई अन्य उपयुक्त शीर्षक दें|   लीला अपने पिता के साथ खेत में काम कर रही थी| जब उसे ध्यान आया कि वे पीने का पानी घर पर ही छोड़ आए हैं| इससे पहले कि उसके पिता को प्यास/भूख लगे, वह पास के तालाब से पानी  /आनाज लेने गई| डिब्बे में पानी लेने के बाद उसने ध्यान दिया कि पानी मटमैला है और पीने के लिए योग्य/अयोग्य है| पानी शुद्ध करने के लिए, उसने पानी को कुछ समय के लिए रख दिया और उसके बाद मटमैले पानी को कागज/मलमल के कपड़े से निस्यंदित  किया/मथा| तब लीला ने पानी को दस मिनट तक ढके बर्तन में ठंडा  किया/उबाला  |  ठन्डे  उबले पानी को  उसने दोबारा से   निस्यंदित   किया/मथा और उसने पानी पीने योग्य/अयोग्य बनाया| यह पानी उसने अपने पिताजी को दिया| उन्होंने लीला को आशीर्वाद दिया और उसके इस प्रयास की सराहना की|


आगे  भी  सीखे

  • अभिभावकों के साथ मनोरंजन - हमें अपनी भारतीय विरासत पर गर्व है| अपने बड़ों की देख-रेख में पौधों के विभिन्न भागों का उपयोग कर घर पर कुछ हर्बल उपचार तैयार करने का प्रयास करें, जैसे- तुलसी  का काढ़ा हर्बल काढ़ा बनाने में आप किस पृथक्करण विधि का उपयोग करेगे
  • रंगमंचीय नाटक -कल्पना करें कि मल्ली आप है और आपकी  मित्र वल्ली है| पदार्थों के पृथक्करण की विभिन्न विधियों पर प्रकाश डालते हुए संपूर्ण भारत के भ्रमण को प्रस्तुत करने के लिए संवाद लिखें| अपने विद्यालय की सभा में नाटक प्रस्तुत करें|
  • सामूहिक क्रियाकलाप- एक सप्ताह के अंतर्गत आपके द्वारा अपनाई गई और अपने परिवेश में देखी गई पृथक्करण की विधियों की सूची बनाएँ इन विधियों का उपयोग करने के पीछे का कारण बताएँ और जिस विधि का आपने सबसे अधिक उपयोग किया है या देखा है, उसे अभिलेखित करें] अपने और अपने समूह के सदस्यों के अवलोकनों की तुलना करें|
  • अपने समुदाय के  दिग्गज  बने- कूड़ा बीनने वाले का साक्षात्कार तो उसके द्वारा उसके दैनिक  जीवन  में उपयोग किए जाने वाली पृथक्करण की विधियों का अध्ययन करें| अपने समुदाय के 14 साल से छोटी उम्र के बच्यों को आस-पास के विद्यालय जाने के लिए प्रेरित करें|
  • रिपोर्टर बने - (क) आपके समुदाय में उपयोग की जाने वाली विभिन्न पृथक्करण की विधियों (जैसे खेतों में या निर्माण स्थलों में) के समाचारों की  कतरने और लेखों को एकत्रित करें (ख) किसी स्थानीय किसान द्वारा उपयोग की जाने वाली   नवीनतम   कृषि पृथक्करण विधियों के विषय में जानने के  लिए    साक्षात्कार  ले |


  •  वैज्ञानिक की तरह सोचें -आपको एक मिश्रण दिया गया है जिसमें लोहे की कीले, रेत, काली मिर्च, कंकड़, सादा नमक और पानी है| मिश्रण के प्रत्येक अवयव को पृथक करने के लिए आप किन-किन चरणों का पालन करेंगे? दिए गए चरण आपको वैज्ञानिक की तरह सोचने में सहायता करेंगे|
  चिंतन  प्रक्रिया  के चरण  

मै.................................अवलोकन करता/करती   हूँ|   मै    विस्मित    हूँ    कि. ...............................!   आप संभवतः इस प्रकार के कुछ प्रश्नों के विषय में सोच रहे होंगें, जैसे- 
  • मैं पहले किस  अवयव को पृथक करूँ ?  
  • मैं पहले किस पृथक्करण विधि का उपयोग करूँ?
  • हम इन अवयवों को प्रभावी रूप से कैसे पृथक कर सकते हैं?
  • क्या कुछ अवयव पानी में घुलनशील होंगे?
  •  अवयव के कौन-से गुण हमें उनके पृथक्करण में सहायक होंगे?
  • सबसे उपयुक्त क्रम क्या है?

क्रियाकलाप के चरण


* मेरे मन में उठे प्रश्नों के संभावित उत्तर हैं...................................................................... |

* मैने पृथक्करण की निम्नलिखित विधियों को प्रदर्शित किया-

..................................................................................................................................|

* मेरे निष्कर्ष हैं  ........................................................................................................|

संकेत- दो से अधिक अवयवों के मिश्रण में अवययों को पृथक करने के लिए पृथक्करण की कई विधियों का संयोजन करने की आवश्यकता होती है|




 टिप्पणीयाँ

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