
अध्याय- 10
सजीव— विशेषताओं का अन्वेषण
अवधि और आयुष अपने माता-पिता के साथ सुबह सैर के लिए जाते हैं। अवधि घोंघे के कुछ खोल देखती है और उन्हें उठाने लगती है। उसकी माताजी उसे ऐसा न करने के लिए कहती हैं और बताती हैं कि यह खोल एक जीवित घोंघे का घर हो सकता है। वास्तव में यह उनके शरीर का एक अंग होता है। अवधि और आयुष को आश्चर्य होता है कि एक खोल जो हिल भी नहीं रहा है, उसके अंदर कोई सजीव प्राणी कैसे हो सकता है! बाद में विद्यालय जाने पर अवधि और आयुष अपने मित्रों के साथ उस घटना को साझा करते हैं। वे अपने शिक्षक के पास जाते हैं और उनसे पूछते हैं कि जो खोल हिल भी नहीं रहा था वह एक सजीव घोंघे के शरीर का एक अंग कैसे हो सकता है। शिक्षक कक्षा में सजीव और निर्जीव पर चर्चा प्रारंभ करते हैं।
क्रियाकलाप 10.1- आइए, अंकित करें
हमारे चारों ओर अनेक प्रकार की वस्तुएँ होती हैं। अपनी कक्षा में चारों ओर देखें, आपको अनेक उदाहरण मिल सकते हैं- पेंसिल जो आपने पकड़ी हुई है, पुस्तक जो आप पढ़ रहे हैं या खिड़की के पास एक कबूतर।
• इन्हें तालिका 10.1 में सूचीबद्ध करें और आप अपनी समझ के आधार पर इन्हें सजीव या निर्जीव के रूप में पहचानें और स्तंभ II में भरें।
• इन्हें सजीव या निर्जीव में विभाजित करने के कारण का आधार स्तंभ III में भरें।
• तालिका 10.1- हमारे आस-पास की सजीव और निर्जीव वस्तुएँ
| I नाम |
II मेरा अनुमान (सजीव या निर्जीव) |
III कारण या टिप्पणी |
IV सही उत्तर |
V सही उत्तर का कारण या टिप्पणी |
| पेंसिल | निर्जीव | |||
| पुस्तक | ||||
| कबूतर | सजीव | |||
| कार | ||||
| पौधे | ||||
| अन्य |
10.1 वह क्या है जो सजीव को निर्जीव से पृथक करता है?
तालिका 10.1 को देखें। आपके विचार से एक पेंसिल निर्जीव और एक कबूतर सजीव क्यों है? आपके अनुसार सजीव प्राणियों और निर्जीव वस्तुओं में क्या अंतर होता है? पहचाने गए सजीवों में क्या समानताएँ हैं?
आपने पहचाना होगा कि गति एक ऐसी समानता हैं जो सभी सजीवों में होती है। आपने कारों को सड़क पर चलते हुए देखा होगा। तो क्या इसका अर्थ यह है कि कार सजीव होती है? ऐसे कार्यों को सूचीबद्ध कीजिए जो आप तो कर सकते हैं लेकिन एक कार नहीं कर सकती। आप भी सजीव होने का एक अद्भुत उदाहरण हैं। जब भी आप अपने आस-पास की वस्तुओं को सजीव या निर्जीव के समूहों में बाँटने का प्रयास करें, आप उन वस्तुओं की तुलना स्वयं से कर सकते हैं। ऐसी कौन-सी विशेषताएँ हैं
जो आपको एक कार से अलग करने में सहायता करती है? उदाहरण के लिए, कार के आमाप (आकार) में अपने आप वृद्धि नहीं होती है। क्या इसका तात्पर्य है कि वह निर्जीव है? अब, कार को निर्जीव के रूप में वर्गीकृत करने के लिए आपने किन विशेषताओं का उपयोग किया? सजीव होने की मूल विशेषताओं को पहचानने के लिए इसी प्रकार अपनी चर्चा को जारी रखिए।
ऐसी कौन-सी सामान्य विशेषताएँ हैं जो सजीवों को निर्जीव वस्तुओं से पृथक करती हैं? आइए, उनके बारे में जानते हैं।
क्या हम सजीव और निर्जीव के बीच अंतर करने के लिए गति को एक विशेषता मान सकते हैं? अपने आस-पास की पाँच ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए जो अपने आप गतिमान हो सकती हैं। क्या आपके अनुसार सूचीबद्ध की गई पाँचों वस्तुएँ केवल इसलिए सजीव हैं क्योंकि वे स्वयं गतिमान हो सकती हैं? अब जंतुओं की भाँति पौधे तो स्वयं एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जा पाते तो क्या आप उन्हें सजीव मानते हैं?
यद्यपि पौधे एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जाते लेकिन वे कुछ निश्चित प्रकार की गतियाँ प्रदर्शित करते हैं। पौधों में गति का एक उदाहरण फूलों का खिलना है। पौधों में गति का अन्य उदाहरण कीटभक्षी पौधों में देखा जा सकता है। कीटभक्षी पौधे अपने पोषण के लिए कीटों पर निर्भर होते हैं। कीटभक्षी पौधों का एक उदाहरण ड्रोसेरा है। ड्रोसेरा की पत्तियाँ तश्तरी (सॉसर) के आकार की होती हैं जिनमें असमान लंबाई वाले बाल जैसे अनेक तंतु होते हैं जिनके छोर पर चिपचिपा पदार्थ होता है। जब भी कोई कीट तश्तरी की सतह को स्पर्श करता है, बाल अंदर की ओर मुड़ जाते हैं और अपने चिपचिपे छोर से कीट को जकड़ लेते हैं। अन्य कीटभक्षी पौधों में गति के प्रक्रम का अवलोकन करने का प्रयास कीजिए। आरोही लताएँ भी अपने समीप रखी किसी वस्तु के चारों ओर लिपट जाती हैं। इसका तात्पर्य है कि भले ही पौधे एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जाते हैं, फिर भी वे गतिशीलता प्रदर्शित करते हैं।
ड्रोसेरा
आप अपनी तुलना अपने बचपन की तस्वीर से करें। क्या आप वह पोशाक पहन सकते हैं जो आप चार वर्ष पहले पहनते थे? नहीं, क्योंकि आपके शरीर का आकार बड़ा हो गया है। इसका कारण आपके शरीर में वृद्धि है। पौधे और अन्य सजीव भी वृद्धि करते है। क्या हम यह मान सकते हैं कि वृद्धि सजीवों की एक विशेषता है?
शिशु में वृद्धि
सजीवों को अपनी वृद्धि और विकास के लिए भोजन (पोषण) की आवश्यकता होती है। ऐसे पाँच सजीवों को सूचीबद्ध कीजिए जिन्हें वृद्धि के लिए भोजन की आवश्यकता होती है।
अब, ऐसी प्रक्रिया के विषय में सोचिए जिसके बिना हम जीवित नहीं रह सकते। सामान्य रूप से चलने के बाद, दौड़ने के बाद और थोड़ा नृत्य करने के बाद आपके द्वारा प्रति मिनट ली जाने वाली श्वासों की संख्या गिनिए। आँकड़ों को अंकित कीजिए। आप क्या पाते हैं? क्या आप प्रत्येक स्थिति के बाद श्वासों की संख्या में कोई अंतर देखते हैं? क्या आपने कुत्ते, बिल्ली, गाय और भैंस जैसे अन्य जंतुओं की श्वसन प्रक्रिया पर ध्यान दिया है? जब वे विश्राम कर रहे हों, उनके पेट की गति को ध्यान से देखिए।
श्वसन प्रक्रिया में जब हम श्वास अंदर की ओर खींचते हैं, वायु बाहर से हमारे शरीर में आती है। जब हम श्वास बाहर निकालते हैं तो वायु हमारे शरीर से बाहर की ओर जाती है। श्वास लेना श्वसन प्रक्रिया का एक भाग है। क्या पौधे भी श्वसन करते हैं? पौधे की पत्तियों की सतह पर छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें रंध्र कहते हैं। ये छिद्र पौधे के शरीर में वायु अंदर लेने और बाहर करने में सहायता करते हैं। अपने विद्यालय की वरिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों के साथ बातचीत कीजिए और उनसे अनुरोध कीजिए कि क्या वे आपकी कक्षा में सूक्ष्मदर्शी के उपयोग से रंध्रों को प्रदर्शित कर सकते हैं? सभी सजीव श्वसन करते हैं।
क्या आपने ग्रीष्मकाल के दौरान धब्बों को देखा है? ये धब्बे पसीने के कारण पड़ते हैं। शरीर से अपशिष्ट पदार्थ के रूप में निकलने वाले पसीने में जल और लवण होते हैं। शरीर से अपशिष्ट उत्पाद के निष्कासन को उत्सर्जन कहते हैं। जंतुओं में उत्सर्जन के एक उत्पाद के रूप में मूत्र भी निर्मित होता है। क्या आप जानते हैं कि पौधे भी उत्सर्जन करते हैं? आपने ध्यान दिया होगा कि पौधे पत्तियों की सतह पर अतिरिक्त जल और खनिजों को सूक्ष्म बूंदों के रूप में उत्सर्जित करते हैं। उदाहरण के लिए, घास और गुलाब। सभी सजीव उत्सर्जन करते हैं।
घास पर पानी की बूँदे
आइए, अब एक अन्य विशेषता पर ध्यान देते हैं। यदि बिना जूते पहने घूमते हुए अप्रत्याशित रूप से आपका पैर काँटे जैसी किसी नुकीली वस्तु पर पड़ जाए या आप गलती से चाय का गरम प्याला छू लें, तो आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी? कॉर्ट पर पैर पड़ना और गरम वस्तु का छूना उद्दीपन पर पानी की बूँदें है। कोई भी वस्तु या कोई घटना जो सजीवों को अनुक्रिया करने के लिए प्रेरित करती हैं, उद्दीपन कहलाती है। आप भी तीन उद्दीपनों और उनके प्रति आपके शरीर में होने वाली अनुक्रियाओं को सूचीबद्ध कीजिए।
क्या पौधे भी उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया करते हैं? जी हाँ, पौधे भी उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया करते हैं। उदाहरणार्थ, छुई मुई (लज्जालु या टच मी नॉट या मिमोसा) पौधे को छूने पर वे अपनी पत्तियाँ बंद कर लेते हैं। क्या आपने ध्यान दिया है कि कुछ पौधे सूर्यास्त के बाद अपनी पत्तियाँ बंद कर लेते हैं? विशेष तौर पर कुछ पौधों की एक-दूसरे के सामने वाली पत्तियाँ आपस में पास आ जाती हैं। यह आँवले के पेड़ की बंद पत्तियों में देखा जा सकता है। समस्त सजीव ,उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया करते हैं। अपने आस-पास कुछ अन्य ऐसे पौधों का पता लगाइए जिनकी पत्तियाँ सूर्यास्त के बाद बंद हो जाती हैं।
आँवला और छुई मुई की पत्तियाँ इस प्रकार की अनुक्रिया क्यों करती हैं? उनके इस प्रकार के व्यवहार के लिए कौन-सा उद्दीपन उत्तरदायी है?
छुई मुई का पौधा
क्या आपने बिल्ली, कुत्ते या अन्य जंतुओं के बच्चों को देखा है? पाँच अलग-अलग जंतुओं के बच्चों को सूचीबद्ध कीजिए। क्या आपने किसी निर्जीव वस्तु जैसे पेंसिल, कुर्सी या बल्ब के बच्चों को देखा है?
सभी सजीव जनन करते हैं। जनन अपनी तरह के नवजातों को जन्म देने की प्रक्रिया है। जनन क्यों अनिवार्य है? यह जीवन की निरंतरता के लिए अनिवार्य है। जब कोई सजीव जीवित रहने के सभी संसाधनों (भोजन, वायु और जल) की उपलब्धता होने पर भी उपर्युक्त सभी लक्षणों को प्रदर्शित करने में सक्षम नहीं होता है, उसे मृत कहते हैं।
उपर्युक्त चर्चा से हम समझ सकते हैं कि सभी सजीवों में कुछ सामान्य विशेषताएँ पाई जाती हैं। उदाहरणार्थ, सभी सजीव गति प्रदर्शित करते हैं, उन्हें भोजन की आवश्यकता होती है, वे वृद्धि करते हैं, श्वसन करते हैं, जनन करते हैं, उत्सर्जन करते हैं, उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया करते हैं और अंततः मर जाते हैं। इनमें से एक भी लक्षण का अभाव यह दर्शाता है कि वे निर्जीव वस्तुएँ हैं।
अब, जबकि आप यह जान गए हैं कि सजीव की पहचान कैसे की जाए, क्रियाकलाप 10.1 को पूरा करने के लिए तालिका 10.1 के शेष दो स्तंभ (IV और V) को भरिए।
आप एक बीज को सजीव या निर्जीव किस श्रेणी में रखेंगे? क्यों?
आइए जानें कि पौधों में इनमें से कुछ आवश्यक विशेषताओं का अन्वेषण करने के लिए एक बीज कैसे अंकुरित होता है।
10.2 बीज के अंकुरण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ
क्या आपने बीज को अंकुरित होते हुए देखा है? आप जानने को उत्सुक होंगे कि बीज के अंकुरण के लिए किन परिस्थितियों की आवश्यकता होती है? क्या आप अंकुरण के लिए आवश्यक किसी स्थिति के बारे में सोच सकते हैं? आप कैसे जाँच करेंगे कि इन परिस्थितियों का बीज के अंकुरण पर क्या प्रभाव होता है?
आइए, क्रियाकलाप 10.2 के द्वारा इसका अन्वेषण करें।
क्रियाकलाप 10.2- आइए, प्रयोग करें
• बगीचे की मिट्टी से भरे एक जैसे चार गमले लीजिए। प्रत्येक गमले में किसी फली (जैसे- सेम, राजमा, लोबिया) के 4-4 बीज बो दीजिए। अब इन गमलों को 15 दिन के लिए निम्नलिखित स्थितियों मे रखिए।
गमला (क)- मिट्टी में जल मत डालिए। इस गमले को सीधा सूर्य के प्रकाश में रखिए।
(क) सीधा सूर्य के प्रकाश में और जलरहित गमला
|
(ख) सीधा सूर्य के प्रकाश में और अत्यधिक जलयुक्त गमला |
(ग) पूर्णतः अँधेरे में और नम मिट्टीयुक्त गमला |
(घ) सीधा सूर्य के प्रकाश में और नम मिट्टीयुक्त गमला
|
चित्र 10.1- विभिन्न परिस्थितियों में उद्भासित फली के बीज
गमला (ख)- मिट्टी में अत्यधिक मात्रा में जल डालिए जिससे कि मिट्टी के ऊपर जल हमेशा उपस्थित रहे। जल के कम होने पर नियमित रूप से इसमें जल डालते रहिए। गमले को सीधा सूर्य के प्रकाश में रखिए।
गमला (ग) - नियमित रूप से गमले में उपयुक्त मात्रा में जल डालिए कि मिट्टी में हल्की नमी बनी रहे और गमले को अँधेरे स्थान पर रखिए।
गमला (घ) गमले में नियमित रूप से उपयुक्त मात्रा में जल डालिए जिससे कि गमले की मिट्टी में हल्की नमी बनी रहे। गमले को सीधा सूर्य के प्रकाश में रखिए।।
तालिका 10.2 में वायु, सूर्य के प्रकाश और जल की उपलब्धता को इंगित कीजिए।
जब किसी बीज में अंकुर निकलता है तो उसे अंकुरित बीज कहते हैं। अनुमान लगाएँ कि क्या प्रत्येक गमले में बीजों का अंकुरण होगा? विभिन्न परिस्थितियों में रखे गए प्रत्येक गमले के विषय में अपने पूर्वानुमान तालिका 10.2 में अंकित कीजिए।
• 7-10 दिनों तक गमलों में बीज अंकुरण की स्थिति का नियमित अवलोकन कीजिए। अपने अवलोकनों को तालिका 10.2 में अंकित कीजिए।
• अपने पूर्वानुमानों की तुलना अपने अवलोकनों से कीजिए।
तालिका 10.2- बीज के अंकुरण पर विभिन्न परिस्थितियों का प्रभाव
| फली के बीज वाले गमले | उपलब्धता | बीज का अंकुरण | अवलोकन का संभावित कारण | |||
| वायु | सूर्य का प्रकाश | जल | पूर्वानुमान | अवलोकन | ||
| क- सीधा सूर्य के प्रकाश में और जलरहित | नहीं | |||||
| ख- सीधा सूर्य के प्रकाश में और अत्यधिक जलयुक्त | ||||||
| ग- पूर्णतः अँधेरे में और नम मिट्टीयुक्त | ||||||
| घ- सीधा सूर्य के प्रकाश में और नम मिट्टीयुक्त | ||||||
क्या आप सोचते हैं कि बीजों के अंकुरण के लिए सूर्य का प्रकाश अनिवार्य है? क्या प्रत्येक गमले में बीज को वायु, जल और सूर्य का प्रकाश मिल रहा है? क्या कोई ऐसा गमला है जिसमें बीजों को वायु नहीं मिल रही है, यदि ऐसा है तो यह क्यों नहीं मिल रही है? उन गमलों के बीजों का क्या हुआ जिनमें अत्यधिक जल डाला गया था? कौन-से बीजों को वायु और जल दोनों प्राप्त हो रहे हैं? उन गमलों को पहचानिए जहाँ आपको बीजों का अंकुरण दिखाई दे रहा है।
क्या आपका अवलोकन आपके पूर्वानुमान से मेल खा रहा है? अपने अवलोकन के पक्ष में संभावित कारणों को तालिका 10.2 में लिखिए। अपने अवलोकनों के आधार पर बीज के अंकुरण के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बताइए।
बीज के अंकुरण के लिए वायु, जल और सूर्य के प्रकाश में से क्या-क्या अनिवार्य है? प्रत्येक गमले में उपलब्ध परिस्थितियों की तुलना कीजिए। फली के बीजों के अंकुरण के लिए जल और वायु की उपयुक्त मात्रा की आवश्यकता होती है। बीजों को अंकुरण के लिए इन परिस्थितियों की आवश्यकता क्यों होती है? क्या आप ऐसा सोचते हैं कि इन परिस्थितियों में से किसी एक या एक से अधिक परिस्थितियों का अभाव बीज के अंकुरण को प्रभावित करेगा?
आइए, हम समझते हैं कि ये परिस्थितियाँ बीज के अंकुरण में किस प्रकार सहायता करती हैं। क्रियाकलाप 10.2 में निम्नलिखित परिस्थितियों के प्रभाव देखे गए हैं।
जल- बीजों को अंकुरण के लिए जल की आवश्यकता होती है। जल बीजों को उनकी वृद्धि के लिए अनिवार्य प्रक्रिया को पूरा करने में सक्षम बनाता है। बीज के बाह्य आवरण को बीजावरण कहा जाता है। जल बीजावरण को मुलायम करता है और इसके अंदर के नन्हें से भ्रूण को पौधे में विकसित होने में सहायता करता है।
फली का अंकुरित बीज
वायु एवं मिट्टी - बीजों को अंकुरण के लिए वायु की आवश्यकता होती है। बीज मिट्टी के कणों के बीच के स्थान में उपस्थित वायु का उपयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त, मिट्टी के कणों के बीच के स्थान के कारण जड़ें आसानी से बढ़ती हैं।
प्रकाश एवं अंधकार की परिस्थितियाँ - हमने सीखा कि फली के बीजों के अंकुरण के लिए प्रकाश अनिवार्य नहीं है। सामान्यतः अधिकांश बीजों को अंकुरण के लिए प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती है। किंतु अंकुरण के पश्चात्, नवोद्भिद की वृद्धि के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है।
अध्याय 'उचित आहार- स्वस्थ शरीर का आधार' में आपने सीखा कि मनुष्य को उत्तम स्वास्थ्य और उचित वृद्धि के लिए संतुलित भोजन की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार, पौधों को भी उचित वृद्धि और विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियों एवं पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। आपके विचार से कौन-सी अन्य परिस्थितियाँ बीज के अंकुरण को प्रभावित करेंगी?
क्या आप जानते हैं?
कॉलियस और पिटूनिया जैसे कुछ पुष्पीय पौधों में बीजांकुरण के लिए प्रकाश की आवश्यकता होती है। इन बीजों को मिट्टी से ढकने पर इनका अंकुरण बाधित होता है। वहीं कैलेंडुला और जीनिया जैसे कुछ पुष्पीय पौधों में बीजांकुरण के लिए अंधकार की आवश्यकता होती है। इन बीजों को पर्याप्त मिट्टी से ढका जाना चाहिए।सजीवों की कौन-सी विशेषताओं के कारण आपने क्रियाकलाप 10.1 में पौधों को सजीवों की श्रेणी में रखा? क्या क्रियाकलाप 10.2 में पौधों में वृद्धि दिखाई देती है? क्या सजीवों की अन्य कोई विशेषता इन पौधों में दिखाई देती है?
आइए, अब हम पौधों में स्पष्ट रूप से दिखने वाली एक अन्य विशेषता वृद्धि एवं गति का अध्ययन करते हैं।
10.3 पौधों में वृद्धि एवं गति
पौधे सूर्य के प्रकाश के प्रति किस प्रकार अनुक्रिया करते हैं? क्या सूर्य का प्रकाश पौधों के विभिन्न भागों की वृद्धि की दिशा को प्रभावित करता है? किसी पौधे को उल्टा रखे जाने पर इसकी जड़ और प्ररोह की वृद्धि किस दिशा में होगी? आप इन प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए एक क्रियाकलाप की योजना कैसे बनाएँगे?
क्रियाकलाप 10.3 आइए, योजना बनाएँ
• कुछ फली अथवा चने के बीज लीजिए और उन्हें नम कपड़े या नम टिशु पेपर में अंकुरित होने दीजिए।
• उन्हें छोटी जड़ और छोटी प्ररोह वाले नवोद्भिद में विकसित होने तक अंकुरित कीजिए।
• अब काँच के तीन बीकर या गिलास लीजिए और उन पर 'क' 'ख' और 'ग' लेबल लगा दीजिए।
• काँच की तीन प्लेट लीजिए और मोटे कोमल सूती धागे की सहायता से प्रत्येक प्लेट की एक ओर सतह से मोटा ब्लॉटिंग पेपर या टिशु पेपर बाँध दीजिए।
• प्रत्येक प्लेट पर एक नवोद्भिद को मोटे कोमल सूती धागे की सहायता से बाँध दीजिए और यह सुनिश्चित कीजिए कि नवोद्भिद क्षतिग्रस्त न हो, जैसा कि चित्र 10.2 में दर्शाया गया है।
• अब बीकर 'क' और बीकर 'ग' में नवोद्भिद युक्त काँच की एक प्लेट को सीधा रखिए, जैसा कि चित्र 10.2 (क) और 10.2 (ग) में दर्शाया गया है।
• बीकर 'ख' में प्लेट को इस प्रकार व्यवस्थित कीजिए कि नवोद्भिद का प्ररोह नीचे की ओर और जड़ ऊपर की ओर रहे, जैसा कि चित्र 10.2 (ख) में दर्शाया गया है।
• यह सुनिश्चित करते हुए कि नवोद्भिद जल की सतह से ऊपर रहे, तीनों बीकर में जल डालिए।
• सभी परिस्थितियों में ब्लॉटिंग पेपर के निचले भाग को जल में पूरी तरह से गीला होने दीजिए। इस प्रकार गीले ब्लॉटिंग पेपर से नवोद्भिद को नमी प्राप्त होगी।
ित्र 10.2— विभिन्न परिस्थितियों में रखे गए पौधे को दर्शाने वाला सेट-अप
चित्र 10.2 (क) और 10.2 (ख) में दर्शाए चित्र के अनुसार बीकर 'क' और बीकर 'ख' को सूर्य के प्रकाश में रखिए।
चित्र 10.2 (ग) में दर्शाए चित्र के अनुसार बीकर 'ग' को एक गत्ते के बॉक्स में इस प्रकार रखिए कि नवोद्भिद को केवल एक छोटे गोल छेद के माध्यम से एक दिशा से ही सूर्य का प्रकाश मिले।
तालिका 10.3 में अपने पूर्वानुमानों एवं अवलोकनों को भरिए।
तालिका 10.3- विभिन्न परिस्थितियों में जड़ और प्ररोह की वृद्धि
| बीकर या गिलास | सूर्य के प्रकाश की दिशा | पौधे की दिशा | जड़ और प्ररोह की वृद्धि की दिशा | ||
| प्ररोह या जड़ | पूर्वानुमान | अवलोकन | |||
| क | सभी दिशाएँ | सीधा ऊपर की ओर | प्ररोह | ||
| जड़ | |||||
| ख | सभी दिशाएँ | उल्टा नीचे की ओर | प्ररोह | ||
| जड़ | |||||
| ग | केवल एक दिशा से | सीधा ऊपर की ओर | प्ररोह | ||
| जड़ | |||||
आपके अवलोकन के अनुसार बीकर 'क', 'ख' और 'ग' में जड़ और प्ररोह की वृद्धि की दिशा क्या है? क्या आपके अवलोकन आपके पूर्वानुमान से मेल खाते हैं? आप इस क्रियाकलाप से क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
चित्र 10.3- विभिन्न परिस्थितियों में जड़ और प्ररोह में वृद्धि की दिशा
इस प्रयोग (तालिका 10.3 और चित्र 10.3) के परिणाम से हमने देखा कि-
1. पौधे को सीधा रखे जाने पर जड़ नीचे की ओर वृद्धि करती है और प्ररोह की वृद्धि ऊपर की दिशा में होती हैं।
2. यदि पौधा उल्टा रखा हो तो जड़ मुड़ जाती है और नीचे की ओर वृद्धि करती है। प्ररोह भी मुड़ जाता है और ऊपर की ओर वृद्धि करता है।
3. यदि पौधे को सूर्य का प्रकाश केवल एक दिशा से मिलता है तो प्ररोह प्रकाश की दिशा में वृद्धि करता है, जबकि जड़ नीचे की ओर वृद्धि करती है।
क्रियाकलाप 10.3 करने के बाद, हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि पौधों के प्ररोह ऊपर की ओर बढ़ते हैं और सूर्य के प्रकाश की ओर गति प्रदर्शित करते हैं, जबकि पौधों की जड़ें नीचे की ओर बढ़ती हैं।
वैज्ञानिक से परिचय
जगदीश चंद्र बोस (1858-1937) एक भारतीय वैज्ञानिक थे जिन्होंने पौधों के साथ कुछ रोचक प्रयोग किए। उन्होंने प्रकाश, ताप, विद्युत और गुरुत्वाकर्षण जैसे उद्दीपनों के प्रति पौधों की अनुक्रियाओं को अंकित करने के लिए क्रेस्कोग्राफ नामक मशीन का निर्माण किया। इस मशीन से उन्होंने मापा कि पौधे कितनी तेजी से बढ़ते हैं। उन्होंने यह भी दर्शाया कि पौधे उद्दीपनों को महसूस कर सकते हैं और उनके प्रति अनुक्रिया करते हैं।
10.4 पौधे का जीवन-चक्र
हमने सीखा कि अंकुरण के लिए अपेक्षित परिस्थितियों और पौधे कैसे बढ़ते हैं तथा गति प्रदर्शित करते हैं। आइए, अब हम पौधे के संपूर्ण जीवन में होने वाले परिवर्तनों के विषय में जानें।
क्रियाकलाप 10.4- आइए, खोज करें
• एक फली का बीज लगाइए और उसकी वृद्धि के लिए उपयुक्त स्थितियाँ उपलब्ध कराइए। लगभग तीन माह तक नियमित रूप से उसका अवलोकन कीजिए।
• जब भी आपको कोई परिवर्तन दिखाई दे, अपने अवलोकन को तालिका 10.4 में अंकित कीजिए।
• जब कोई भी परिवर्तन दिखाई दे तो दिनांक को तालिका में लिखिए। निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अंकित कीजिए-
1. किसी परिवर्तन के होने में कितना समय लगा? आपके द्वारा देखे गए विभिन्न परिवर्तन तालिका 10.4 में चित्रांकित कीजिए।
2. कितने दिनों के बाद पहला फूल दिखाई दिया?
3. फूल के कुछ भागों के सूखने के बाद, क्या आपको आगे कोई अन्य वृद्धि दिखाई दी?
4. फूल के शेष भाग किस प्रकार की संरचना में विकसित हुए?
5. क्या आपने फूल से विकसित किसी बीजयुक्त फली या फल को देखा?
6. बीजयुक्त फलों के बनने के बाद पौधे का क्या हुआ?
तालिका 10.4- पौधों की वृद्धि के दौरान देखे गए परिवर्तन
| दिनांक | अवलोकन | चित्र |
| बीज बोए गए | ||
तालिका 10.4 में फली के पौधे की वृद्धि के संबंध में आपने जो अवलोकन अंकित किए हैं, उन्हें ध्यान से पढ़िए। फलों के बनने के बाद आपने क्या-क्या परिवर्तन देखे? क्या आपके द्वारा इसमें निरंतर पानी डाले जाने के बाद भी पौधा पीला हो कर सूख गया?
अपने फली के पौधे से प्राप्त बीजों को उगाइए। देखिए कि बीज किस प्रकार फली के पौधों की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाता है। तालिका 10.4 में अपने द्वारा बनाए गए चित्र की तुलना चित्र 10.4 से कीजिए।
चित्र 10.4 फली के पौधे का जीवन-चल
बीज एक पौधे के रूप में वृद्धि करता है और परिपक्व होकर फूल और फल उत्पन्न करता है। इस उदाहरण में, नई फलियाँ ही इस पौधे के फल हैं। इनके भीतर बीज होते हैं जो इस पौधे की पीढ़ी को आगे बढ़ाते हैं। बीज से पौधा और फिर बीजों की अगली पीढ़ी तक की संपूर्ण प्रक्रिया को पौधे का जीवन-चक्र (चित्र 10.4) कहा जाता है। जब एक पौधा बढ़ना बंद कर देता है और अनिवार्य सभी परिस्थितियों की उपलब्धता के बाद भी उसमें जीवन की गतिविधियाँ धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं तब उस पौधे को मृत मान लिया जाता है।
10.5 जंतुओं का जीवन-चक्र
हमने एक पौधे के जीवन-चक्र के विषय में जाना। हमने देखा कि पौधों के जीवन-चक्र में अनेक परिवर्तन होते हैं। क्या आपने कभी ध्यान दिया कि समय के साथ जंतु कैसे बड़े होते हैं? विभिन्न जंतुओं के बच्चों के रेखा-चित्र बनाइए और उनके नाम लिखिए।
10.5.1 मच्छर का जीवन-चक्र
अपने आस-पास मच्छरों की भिनभिनाहट की ध्वनि सुनना हम सबके लिए एक सामान्य अनुभव है। मादा मच्छर खून चूसने वाले कीट हैं जिनसे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी अनेक बीमारियों का संचरण हो सकता है। आपने समाचार-पत्रों, स्कूल के सूचना- पट्ट या जागरूकता अभियानों के माध्यम से जाना होगा कि मच्छरों के प्रजनन की रोकथाम की जानी चाहिए। हमें सलाह दी जाती है कि अपने आस-पास कहीं भी जल इकट्ठा न होने दें। ऐसा क्यों है? क्या स्थिर जल का मच्छरों के अंडे देने के साथ कोई संबंध है?
अपने विद्यालय, घर और आस-पास स्थिर जल का पता लगाने के लिए सुरक्षा परीक्षण (सेफ्टी ऑडिट) का आयोजन कीजिए। यदि संभव हो सके, तो किसी छोटे जीवों का अवलोकन करने के लिए एक हैंड लेंस लीजिए। कूलर के अंदर, गमलों और अन्य खुले पात्र ऐसे सामान्य स्थान होते हैं जहाँ स्थिर जल एकत्र होने की संभावना रहती है। आपको दो अलग-अलग प्रकार के कृमि जैसे जीव (चित्र 10.5) मिल सकते हैं। ये लार्वा और प्यूपा हैं, जो मच्छरों के विकास के दौरान उनके जीवन की दो विशिष्ट अवस्थाएँ हैं। यदि आपको लार्वा और प्यूपा दिखाई देते हैं तो इसकी सूचना अपने शिक्षक को दीजिए। मच्छरों के प्रजनन की रोकथाम के लिए किए जाने वाले आवश्यक उपायों के विषय में अपने शिक्षक और सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए। लार्वा और प्युपा के आकर में आपने क्या-क्या अंतर देखे?
वित्र 10.5- स्थिर जल निकाय में मच्छरों के लार्वा और प्यूपा
जल निकायों में देखे गए मच्छरों के लार्वा और प्यूपा बार-बार जल की सतह पर आते हैं। इसका क्या कारण हो सकता है? मच्छर के लार्वा और प्यूपा जल में रहते हैं और उन्हें श्वास लेने के लिए वायु की आवश्यकता होती है। वे श्वास लेने के लिए जल की सतह पर आते हैं।
मच्छरों के जीवन-चक्र को किस प्रकार भंग किया जा सकता हैं? ?
मैंने अपनी माताजी को स्थिर जल पर मिट्टी का तेल छिड़कते हुए देखा है। वो ऐसा क्यों करती हैं?
मिट्टी का तेल जल की सतह पर एक पतली परत बनाता है। यह परत जल को वायु से पृथक कर देती है और लार्वा एवं प्यूपा श्वास द्वारा वायु ग्रहण नहीं कर पाते हैं। परिणामतः वे मर जाते हैं।
क्रियाकलाप 10.5- आइए, विश्लेषण करें
आइए, एक रोचक पहेली सुलझाएँ।
आप कैसे निर्णय करेंगे कि अंडा अवस्था के तुरंत बाद कौन-सी अवस्था (लार्वा या प्यूपा) पहले आती है?
कल्पना कीजिए कि आंपको पोखर के जल से भरा एक पात्र दिया जाता है जिसमें लार्वा और प्यूपा हैं। इनकी अवस्थाओं का सही अनुक्रम पता करने के लिए एक क्रियाकलाप की योजना बनाएँ।
अपना क्रियाकलाप सृजन करने के लिए आप अवधि द्वारा बताई गई निम्नलिखित योजना की सहायता ले सकते हैं-
चरण 1- मेरे पास जल से भरा एक पात्र है जिसमें मच्छर के लार्वा और प्यूपा हैं।
चरण 2- मैं 4-5 लार्वा और प्यूपा को समान जल वाले अलग-अलग पात्रों मे विभक्त करूंगी।
चरण 3- मैं इनका एक अवस्था से अगली अवस्था में परिवर्तन देखने के लिए प्रतिदिन इनका अवलोकन करूँगी।
चरण 4- यदि लार्वा, प्यूपा में परिवर्तित होता है, तो इसका तात्पर्य होगा कि लार्वा की अवस्था प्यूपा से पूर्व की होती है। यदि इसका उल्टा होता है तो प्यूपा की अवस्था लार्वा के पूर्व की होगी।
चरण 5— मैं देखती रहूँगी कि मच्छर पहले किस पात्र में दिखाई देता है।
ये अवलोकन वृद्धि एवं विकास के सही अनुक्रम को जानने में हमारी सहायता करेंगे। अब, कल्पना कीजिए कि आपको पोखर के जल से भरा एक पात्र दिया जाता है जिसमें लार्वा और प्यूपा हैं। उन्हें पात्र से अलग किए बिना यह निश्चित करने के लिए कि दोनों अवस्थाओं में से पहले कौन-सी अवस्था आएगी, आप क्रियाकलाप की किस प्रकार योजना बनाएँगे?
चित्र 10.6- मच्छर का जीवन-चक्र
आइए, मच्छर के जीवन-चक्र की इन अवस्थाओं के विषय में और अधिक जानें। मच्छर अपने जीवन-चक्र में चार अवस्थाओं से गुजरते हैं। ये अंडा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क अवस्था है (चित्र 10.6)।
प्यूपा से निकला वयस्क मच्छर जल की सतह पर थोड़ा विश्राम करता है और फिर उड़ जाता है। वयस्क मच्छर 10 से 15 दिन तक जीवित रह सकता है।
हमने देखा कि एक मच्छर अपना जीवन अंडे (अवस्था 1) के रूप में आरंभ करता है, अंडे का विकास लार्वा (अवस्था II) के रूप में होता है, लार्वा का विकास प्यूपा (अवस्था III) के रूप में होता है और प्यूपा वयस्क मच्छर (अवस्था IV) में परिवर्तित होता है। वयस्क मादा मच्छर सीधे जल पर या जल के समीप अंडे देती है और यह चक्र चलता रहता है।
मच्छर के जीवन-चक्र की विभिन्न अवस्थाओं के दौरान उसकी बाह्य आकृति, शरीर के आकार और संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। अंडे का आकार लार्वा से बहुत भिन्न होता है और लार्वा प्यूपा से बहुत भिन्न दिखाई देता है। प्यूपा वयस्क मच्छर से बहुत भिन्न दिखाई देता है। क्या यह कल्पना करना आसान है कि मच्छर एक प्यूपा से निकलता है?
क्या आप जानते हैं?
रेशम कीट (सिल्क मांथ) भी जीवन की चार अवस्थाओं से गुजरता है- अंडा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क। अंडे लार्वा के रूप में स्फुटित होते हैं और फिर आकार में बढ़ते हैं। प्यूपा में परिवर्तन होने से पहले लार्वा धागे जैसा पदार्थ स्रावित करते हैं जो उनके चारों ओर लिपट जाता है। ये वो रेशे हैं जिनका उपयोग रेशमी वस्त्र बनाने के लिए किया जाता है। भारत में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने रेशम के उत्पादन के लिए अनेक केंद्र स्थापित किए हैं।10.5.2 मेंढक का जीवन-चक्र
क्रियाकलाप 10.6- आइए, विश्लेषण करें
अवधि और आयुष आज पूरी बाँह की शर्ट और फुलपैंट पहने हुए हैं। एक सप्ताह से रुक-रुककर बारिश हो रही है। वे अपने सहपाठियों के साथ एक क्रियाकलाप करने के लिए बाहर जा रहे हैं। अपने विज्ञान शिक्षक के मार्गदर्शन में थोड़ा-सा चलने के बाद वे एक उथले तालाब पर पहुँचते हैं। यह स्थान पेड़ों और लंबी घास से घिरा हुआ है। शिक्षक उन्हें बिना कोई छेड़छाड़ किए थोड़ी दूरी से सब कुछ देखने के लिए सचेत करते हैं। आप सब भी बारिश के मौसम में एक मार्गदर्शक के साथ छोटे जल निकाय पर जा सकते हैं और उपयुक्त सुरक्षा सावधानियों का पालन करते हुए इस संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
आप तालाब के किनारे जल की सतह पर सफेद जेली जैसे किसी पदार्थ का अवलोकन कर सकते हैं (चित्र 10.7)। यह जेली जैसा पदार्थ जल में या उसके आस-पास उगने वाले किसी पौधे के साथ भी संलग्न हो सकता है। यह जेली जैसा पदार्थ मेंढक के अंडे का समूह होता है जिसे जलांडक के रूप में जाना जाता है।
चित्र 10.7 में दर्शाए गए मेंढक के जीवन-चक्र की सभी अवस्थाओं की विशेषताओं का अवलोकन कीजिए। आप दी गई अवस्थाओं (क, ख, ग, घ, ङ, च) का अनुक्रम कैसे सुनिश्चित करेंगे? कुछ अवस्थाएँ अपने आरंभिक और अंतिम आकारों में स्पष्ट परिवर्तन दर्शाती हैं। इन परिवर्तनों को तालिका 10.5 में सूचीबद्ध कीजिए।
चित्र 10.7 तालाब में मेंढक की विभिन्न अवस्थाएँ
तालिका 10.5 में सूचीबद्ध अवलोकनों के आधार पर मेंढक के जीवन-चक्र का चित्र बनाइए। आपके द्वारा बनाए गए चित्र की तुलना चित्र 10.8 से कीजिए।
तालिका 10.5- मेंढक के जीवन की विभिन्न अवस्थाओं में परिवर्तन
| क | ख | ग | घ | ड | च |
| यह 'ग' के समान है, किंतु इसके दो पैर होते हैं। | |||||
कुछ अवस्थाएँ एक साथ रखी गई हैं, जैसे चित्र 10.7 में 'क' और 'च' अवस्थाओं को, अवस्था । में रखा गया है। आपको मेंढक के जीवन-चक्र में चार अवस्थाएँ मिलेंगी- (1) अंडा अवस्था, जो भ्रूण अवस्था में परिवर्तित होती है; (II) टैडपोल अवस्था, जिसमें पहले पूँछयुक्त तथा पैरविहीन प्रारंभिक अवस्था और पीछे के पैरों सहित बाद की अवस्था होती है; (III) मंडूकक (फ्रॉगलेट) अवस्था और (IV) वयस्क मेंढक अवस्था (चित्र 10.8)।
बित्र 10.8 मेंडक का जीवन चक
निम्नलिखित बिंदुओं पर कक्षा में चर्चा कीजिए-
• मेंढक के ये अंडे उन अन्य अंडो से किस प्रकार भिन्न है, जो आपने पहले कभी देखें हैं?
• कौन-सी अवस्था की अवधि सबसे कम होती है?
• क्या मेंढक के जीवन-चक्र की विभिन्न अवस्थाओं के दौरान उनके आवास में कोई परिवर्तन होता है?
• उस अवस्था में विशिष्ट विशेषताएँ किस प्रकार सहायक होती हैं?
चित्र 10.8 का अवलोकन कीजिए। आप देखेंगे कि टैडपोल के पिछले पैर विकसित हो गए हैं किंतु फिर भी उनकी पूँछ है। पूँछ उन्हें जल में तैरने में सहायता करती है। धीरे-धीरे टैडपोल छोटे मेंढक की तरह दिखने लगते हैं जिन्हें मंडूकक कहते हैं। वे अब भी जल में रहते हैं लेकिन कुछ समय थल पर भी बिताना आरंभ कर देते हैं। वे बड़े होते जाते हैं और उनकी पूँछ पूर्णतः लुप्त हो जाती है। उनके पैर बलवान हो जाते हैं जिससे उन्हें कूद कर स्थल पर आने में सहायता मिलती है। पूर्ण विकसित वयस्क मेंढक बनने पर वे जल और थल दोनों में रहने लगते हैं।
आपके विचार से क्या पक्षी भी जीवन-चक्र की विभिन्न अवस्थाओं में महत्वपूर्ण परिवर्तन प्रदर्शित करते हैं?
जंतुओं का जीवन-चक्र पौधों के जीवन-चक्र से किस प्रकार भिन्न होता है?
पौधे और जंतु सजीव जगत का एक भाग हैं। वे अपने जीवन काल में अनेक परिवर्तनों से गुजरते हैं। हमने सीखा कि एक छोटा-सा पौधा वृद्धि करके एक बड़े वृक्ष में, विकसित हो जाता है। हमने यह भी सीखा कि जंतु किस प्रकार वृद्धि करते हैं और बच्चे से वयस्क में परिवर्तित होते हैं। प्रत्येक जंतु की यह यात्रा भिन्न होती है जो उसे अनोखा और विशिष्ट बनाती है। हमने प्यूपा को कीटों में और टैडपोल को मेंढक में परिवर्तित होते हुए देखा है। इस प्रकार के परिवर्तन पौधों और जंतुओं के जीवित रहने और अपनी प्रजाति की निरंतरता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। हमें भी उनका और उनके आवास स्थानों का ध्यान रखना चाहिए। उनके आवास विकसित और सुरक्षित करके हम इस सम्रद्ध सजीव जगत में योगदान दे सकते हैं।
प्रमुख शब्द
| श्वास लेना | गति | निष्कर्ष निकालना |
| मृत | निर्जीव | सृजन करना |
| उत्सर्जन | पोषण | योजना |
| मंडूकक | प्यूपा | प्रयोग |
| अंकुरण | जनन | अन्वेषण करना |
| वृद्धि | श्वसन | पहचान करना |
| लार्वा | अनुक्रिया | अवलोकन |
| जीवन-चक्र | उद्दीपन | पूर्वानुमान |
| सजीव | टैडपोल | जलांडक |
सारांश
मुख्य बिंदु
• हमारे आस-पास की वस्तुओं को सजीव और निर्जीव में श्रेणीकृत किया जा सकता है।
• सजीवों की मूल विशेषताएँ हैं कि वे गति करते हैं, खाते हैं, वृद्धि करते हैं, श्वास लेते हैं, उत्सर्जन करते हैं, उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया करते हैं, जनन करते हैं और मरते हैं। इनमें से किसी भी विशेषता की अनुपस्थिति इंगित करती है कि वे सजीव नहीं हैं।
• प्रत्येक सजीव अपने जीवन-काल में अनेक अवस्थाओं से गुजरता है।
• बीजों का अंकुरण जल, वायु, उपयुक्त प्रकाश और/अथवा अंधकार की परिस्थितियों की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
• बीजों के अंकुरण के समय जड़ें सामान्यतः नीचे की ओर, जबकि प्ररोह ऊपर की ओर वृद्धि करते हैं।
• एक पौधे का जीवन-चक्र बीज के अंकुरण से आरंभ होता है और उसके बाद वह वृद्धि और विकास की अनेक अवस्थाओं से गुजरता है। इनमें पुष्पन और बीज उत्पादन सम्मिलित हैं। उनके जीवन-चक्र के दौरान उत्पन्न बीज नए पौधों में अंकुरित हो जाते हैं और यह चक्र जारी रहता है।
एक जंतु का जीवन-चक्र जनन के फलस्वरूप नवजात के जन्म से आरंभ होकर वृद्धि और विकास की विभिन्न अवस्थाओं से गुजरता है, तत्पश्चात वयस्क अवस्था आती है और अंततः मृत्यु हो जाती है। जनन की प्रक्रिया जीव की निरंतरता को सुनिश्चित करती है।
• मच्छर अपने जीवन-काल में अंडे, लार्वा, प्यूपा और वयस्क अवस्थाओं से गुजरते हैं। मेंढक के जीवन की अवस्थाओं में अंडे, टैडपोल, मंडूकक (फ्रॉगलेट) और वयस्क अवस्थाएँ सम्मिलित हैं।
• कुछ सजीवों जैसे मच्छरों और मेंढकों के जीवन-चक्र की विभिन्न अवस्थाओं मैं महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। ये परिवर्तन उनके शरीर के आकार, संरचना और कभी-कभी आवास में भी देखे जा सकते हैं।
आइए, और अधिक सीखें
1. पौधों और जंतुओं के जीवन-चक्र में समानताओं और भिन्नताओं को सूचीबद्ध कीजिए।
2. नीचे तालिका में कुछ विवरण (डाटा) दिया गया है। तालिका का अध्ययन कीजिए और दूसरे व तीसरे स्तंभ में दी गई स्थितियों के लिए उपयुक्त उदाहरणों का पता लगाने का प्रयास कीजिए। यदि आपको लगता है कि नीचे दी गई किसी भी स्थिति के लिए उदाहरण संभव नहीं है, तो स्पष्ट कीजिए कि ऐसा क्यों है?
| क्रम सं. | क्या इसकी वृद्धि होती है? | क्या यह श्वास लेता है? | उदाहरण | टिप्पणी |
| 1. | नहीं | नहीं | ||
| 2. | नहीं | हाँ | ||
| 3. | हाँ | नहीं | ||
| 4. | हाँ | हाँ |
3. आपने सीखा है कि बीजों के अंकुरण के लिए भिन्न-भिन्न परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। अनाजों और दालों के उपयुक्त भंडारण के लिए हम इस ज्ञान का उपयोग किस प्रकार कर सकते हैं?
4. आपने सीखा है कि टैडपोल की एक पूँछ होती है लेकिन जब वृद्धि के बाद यह मेंढक बनता है तो पूँछ लुप्त हो जाती है। टैडपोल अवस्था में पूँछ होने से क्या लाभ मिलता है?
5. चरण का कहना है लकड़ी का लट्ठा निर्जीव है क्योंकि इसमें गति नहीं होती। इसके विपरीत चारु इसे सजीव मानती हैं, क्योंकि यह वृक्षों से प्राप्त होता है। चरण और चारु के कथनों के पक्ष या विपक्ष में अपने अपने तर्क दीजिए।
6. मच्छर और मेंढक के जीवन-चक्र में क्या समानताएँ और क्या विभेदकारी विशेषताएँ होती हैं?
चित्र 10.9— भमिू पर रखा गमला
चित्र 10.— प्रयोग के लिए सेट-अप
7. एक पौधे को उसकी वृद्धि के लिए उपयुक्त सभी स्थितियाँ उपलब्ध कराई गई हैं (चित्र 10.9)। एक सप्ताह पश्चात आप इस पौधे के प्ररोह और जड़ में क्या देखने की अपेक्षा करते हैं? उसका चित्र बनाइए। इसके कारण भी लिखिए।
8. तारा और विजय ने एक प्रयोग का सेट-अप तैयार किया है जिसे चित्र 10.10 में दर्शाया गया है। आप क्या सोचते हैं कि वे क्या पता करना चाहते हैं? और, उन्हें यह कैसे पता चलेगा कि वे सही हैं?
9. बीज अंकुरण पर तापमान के प्रभाव की जाँच करने के लिए एक प्रयोग की योजना लिखिए।
और भी सीखें
• किसी स्थानीय उद्यान के लिए एक क्षेत्र भ्रमण का आयोजन कीजिए। विविध पौधों की वृद्धि के लिए अपेक्षित परिस्थितियों और समय के विषय में जानने के लिए माली से बातचीत कीजिए।
• क्या हम पौधों को उनके बीजों को अंकुरित किए बिना उगा सकते हैं? पता लगाइए और कुछ उदाहरण दीजिए।
• अपने घर, विद्यालय अथवा आस-पास के किसी उद्यान में उग रहे पाँच पौधों के जीवन-चक्र का अवलोकन कीजिए। उनकी वृद्धि की विभिन्न अवस्थाओं के चित्रों के साथ एक चित्र पुस्तिका (पिक्चर बुक) बनाइए। प्रत्येक पौधे का नाम लिखिए और उसकी प्रत्येक अवस्था की समयावधि को लिखिए।
• एक तितली अथवा एक पतंगा (मॉथ) के जीवन-चक्र की कुछ अवस्थाओं का अवलोकन करने का प्रयास कीजिए। क्या ये अवस्थाएँ मच्छरों के जीवन-चक्र की अवस्थाओं के समान होती हैं?
• आपके विचार में क्या पर्यावरण कीटों के जीवन-चक्र को प्रभावित करता है? कीटों के जीवन-चक्र को प्रभावित करने वाले कारकों का पता लगाइए और उन्हें सूचीबद्ध कीजिए।
आइए, रचना करें
नीचे दी गई अधूरी कविता में कुछ और पंक्तियाँ जोड़िए। इसमें मेंढक के विकास की विभिन्न अवस्थाओं के बारे में सूचनाओं को सम्मिलित कीजिए। आप अपनी कविता में प्रदर्शित प्रत्येक अवस्था का चित्र बनाकर उसमें रंग भी भर सकते हैं।
एक छायादार और तृणमय दलदल के किनारे,
झुंड में रहते थे मेंढक कई सारे,
शाम से सुबह तक गाते थे वो गाना,
पंचम सुर में छेड़कर तराना,
एक दिन बैठकर नरकट के पास,
मेंढकी ने सोची बात यह खास,
प्रजनन का है समय सही, होता मुझे है आभास
....................................
(क) सीधा सूर्य के प्रकाश में और जलरहित गमला
(ख) सीधा सूर्य के प्रकाश में और अत्यधिक जलयुक्त गमला
(ग) पूर्णतः अँधेरे में और नम मिट्टीयुक्त गमला
(घ) सीधा सूर्य के प्रकाश में और नम मिट्टीयुक्त गमला