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अध्याय- 11

प्रकृति की अमूल्य संपदा

भूमि और सूर्या के लिए विद्यालय की छुट्टियाँ सदैव मनोरजंक होती हैं। इन छुट्टियों में वे अपनी अज्जी (दादी) के घर गये हैं। अज्जी पश्चिमी घाट के जंगल के किनारे एक गाँव में रहती हैं। वहाँ की हवा नगर की अपेक्षा अधिक ताजी और ठंडी होती है। वे अपने आस-पास सुंदर पहाड़ियों, झरनों और कई रोचक पौधों, जंतुओं और पक्षियों को देख सकते हैं।

एक दोपहर, भूमि और सूर्या अज्जी से उस स्थान के विषय में और जानकारी देने का निवेदन करते हैं। अज्जी कहती हैं, "बच्चों, क्या आप जानते हैं कि इस जगह प्रकृति की अनेक संपदाएँ हैं, जो हमारे जीवन को समृद्ध बनाती हैं? यहाँ की हवा शुद्ध, ताजी एवं स्फूर्तिदायक है। यहाँ की मृदा इतनी उपजाऊ है कि यह विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं को जीवन प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त यहाँ अच्छी धूप आती है जो अनेक प्रकार से उपयोगी है। विभिन्न प्रकार के वृक्ष भिन्न-भिन्न पक्षियों और कीटों सहित अनेक जंतुओं को भोजन एवं आश्रय प्रदान करते हैं। क्या आप प्रकृति की ऐसी कुछ और संपदाओं के विषय में सोच सकते हैं?"

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भूमि ने कहा, "अज्जी, हम जल का उपयोग पीने के लिए और साग-भाजी उगाने के लिए करते हैं।" अज्जी ने कहा "हाँ, हमें इन संपदाओं की आवश्यकता उत्तरजीविता और अपने जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए होती है। प्रकृति की इन संपदाओं के बिना पृथ्वी पर किसी भी प्रकार का जीवन संभव नहीं है।" हम सभी इस प्रकृति का ही एक भाग हैं।

अज्जी वायु के महत्त्व को बताती हैं और यह हमारे जीवन के लिए किस प्रकार आवश्यक है यह भी स्पष्ट करती हैं। आइए, हम वायु के विषय में और अधिक जानें।

11.1 वायु

एक सुबह भूमि और सूर्या अज्जी को कुछ श्वास- संबंधी व्यायाम करते हुए देखते हैं। अज्जी उन्हें भी व्यायाम करने के लिए बुलाती हैं। वे कहती हैं, "मैं गहरी श्वास ले रही हूँ और बाहर छोड़ रही हूँ। यह क्रिया फेफड़ों में शुद्ध हवा लेने में सहायक है और हमें स्वस्थ रखती है।" भूमि और सूर्या भी अज्जी के साथ बैठ जाते हैं और गहरी श्वास लेने की क्रिया करते हैं।

आइए, हम भी इस व्यायाम का अभ्यास करें।

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श्वास-संबंधी व्यायाम

क्रियाकलाप 11.1- आइए, अनुभव करें

  • एक गहरी श्वास लीजिए और उसे धीरे-धीरे छोड़िए।
  • फिर एक और अधिक गहरी श्वास लीजिए।
  • जितना संभव हो सके, श्वास को रोक कर रखिए और, फिर धीरे-धीरे छोड़िए।
  • आप कितनी देर तक श्वास रोक सकते हैं?
  • जब आप श्वास रोक कर रखते हैं तो आपको कैसा लगता है?

सावधानी

अपनी श्वास को इतनी देर तक मत रोकिए कि आपको असहज लगने लगे।

इस क्रियाकलाप से, हमने पाया कि श्वास को लंबे समय तक रोकना कठिन है। श्वास द्वारा भीतर ली गई वायु में ऑक्सीजन होती है। हमारे शरीर को कार्य करने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। जब हम लंबे समय तक श्वास रोकते हैं तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती है। अतः हमें जीवित रहने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। अन्य जीवों को भी जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

क्या आप जानते हैं?

हम भोजन अथवा जल के बिना तो कुछ दिनों तक जीवित रह सकते हैं, किंतु ऑक्सीजन के बिना हम कुछ क्षण भी जीवित नहीं रह सकते।

पृथ्वी के चारों ओर उपस्थित वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण है। क्या आप वायु में उपस्थित कुछ गैसों के नाम बता सकते हैं? वायु में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड और सूक्ष्म मात्रा में अन्य गैसें उपस्थित होती हैं। चित्र 11.1 में, वायु के संघटन को प्रतिशत में दिखाया गया है। ध्यान दीजिए कि चित्र 11.1 में 100 वर्ग हैं। इन 100 वर्गों में से 78 वर्ग नाइट्रोजन द्वारा, 21 वर्ग ऑक्सीजन द्वारा तथा । वर्ग अन्य गैसों जैसे आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि द्वारा भरे हुए हैं।

और भी जानें!

'प्रतिशत' प्रत्येक 100 में से अंशों की संख्या है। इसे % संकेत द्वारा दर्शाया जाता है।

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चित्र 11.1- वायु का संघटन

पेड़ों पर पत्तियों की सरसराहट, रस्सी पर लटके कपड़ों के हिलने या पंखे को चलाने पर अथवा किसी खुली पुस्तक के पन्नों की फड़फड़ाहट आदि के द्वारा आपने वायु की उपस्थिति का अनुभव किया होगा।

चलती हुई वायु को पवन कहते हैं। कभी-कभी यह बहुत गति से चलती है जैसे आँधी के समय या कभी-कभी यह धीमी गति से चलती है, जैसे बयार (मंद पवन)। आपने भी अनेक बार फिरकी (कागज से बनी चकरी) के साथ खेला होगा। आइए, क्रियाकलाप 11.2 द्वारा एक फिरकी बनाएँ।

क्रियाकलाप 11.2 आइए, फिरकी बनाएँ और सजाएँ

15 cm x 15 cm का एक वर्गाकार कागज, एक कैंची, एक ऑलपिन और एक मुलायम डंडी लीजिए।

चित्र 11.2 में दर्शाए गये निर्देशानुसार फिरकी बनाइए।

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चित्र 11.2- फिरकी

अब आप अपने हाथ में फिरकी को पकड़कर दौड़िए। आप इसे फूंक मार कर भी चला सकते हैं। आप क्या देखते हैं? क्या फिरकी घूमती है? जब आप इसे थोड़ा आगे और पीछे चलाते हैं तब यह घूमती है। फिरकी को कौन घुमा रहा है? यह पवन है जो इस फिरकी को घुमाती है।

पवनचक्की और फिरकी की कार्यप्रणाली समान है। पवन, पवनचक्की के पंखों को घुमाती है। आटे की चक्की, कुँए से पानी ऊपर खींचने या विद्युत उत्पादन के लिए पवनचक्की का उपयोग किया जा सकता है। भारत में अनेक पवनचक्की फार्म हैं। पवनचक्की फार्म वह क्षेत्र है, जिसमें अनेक पवनचक्कियाँ पवन-ऊर्जा द्वारा विद्युत-उत्पादन करती हैं। (चित्र 11.3)

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चित्र 11.3- पवनचक्की फार्म

और भी जाने

तमिलनाडु का मुपण्डल पवनचक्की फार्म, राजस्थान के जैसलमेर का पवनचक्की पार्क और महाराष्ट्र का ब्रह्मवेल पवन चक्की फार्म हमारे देश के कुछ प्रमुख पवनचक्की फार्म हैं। अपने देश में पाए जाने वाले अन्य पवनचक्की फार्म के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।

हमने सीखा कि वायु हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जल भी हमारे लिए अति आवश्यक और अमूल्य है। यदि आपको पीने के लिए जल न मिले, विशेषतः जब आपको प्यास लगी हो तब आपको कैसा महसूस होगा? आइए, जल के बारे में और अधिक जाने।

11.2 जल

भूमि और सूर्या, अज्जी को गायों के लिए नाँद में पानी भरने, बागीचे में साग-भाजी और औषधीय पौधों को पानी देने में सहायता करते हैं। अज्जी उनको सिखाती हैं कि पौधों को पानी किस प्रकार दिया जाए जिससे पानी की प्रत्येक बूँद का उपयोग हो और उनमें से एक भी बूँद व्यर्थ न जाए।

क्या आप अपने दैनिक जीवन में जल के कुछ अन्य उपयोगों के विषय में सोच सकते हैं? अपने विचार नीचे दिये गये रिक्त स्थान में लिखिए।

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पौधों को पानी देना

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हमें अपने दैनिक जीवन में अनेक कार्यों के लिए जल की आवश्यकता होती है। जैसे पीने के लिए, खाना बनाने के लिए, नहाने के लिए, कपड़े धोने के लिए एवं सफाई के लिए। इसे फसलें उगाने और औद्योगिक कार्यों के लिए भी उपयोग में लाया जाता है। हमें जल कहाँ-कहाँ से प्राप्त होता है? जल के विभिन्न स्रोतों की एक सूची बनाइए।

पृथ्वी की सतह का लगभग दो-तिहाई भाग जल से घिरा हुआ है। अधिकांश जल महासागरों एवं समुद्रों में पाया जाता है। परंतु, यह जल नमकीन (लवणीय) होता है। इसलिए, यह जल घरेलू, कृषि तथा औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं होता है। इन सभी गतिविधियों के लिए हमें मृदु (लवण-रहित या अलवणीय) जल की आवश्यकता होती है, जो पृथ्वी की सतह पर बर्फ की चादरों अथवा हिम, नदियों या झीलों में और पृथ्वी की सतह के नीचे भू-जल के रूप में पाया जाता है। बर्फ की चादरों, हिम या भू-जल से मृद (अलवणीय) जल प्राप्त करना कठिन होता है। मृदु जल कुछ मात्रा में तालाबों, नदियों, झीलों और कुँओं से सहजता से प्राप्त किया जा सकता है। जल अमूल्य है, इसलिए अज्जी उन्हें जल का विवेकपूर्ण उपयोग करना सिखा रही हैं।

क्या आप अनुभव करते हैं कि हमारे दैनिक जीवन की गतिविधियों में जल का उपयोग सही प्रकार से हो रहा है? क्या आपने दैनिक कार्यों मे जल को व्यर्थ होते हुए देखा है? आइए, अब जानें कि कौन-सी गतिविधियों में जल व्यर्थ हो रहा है और इसे व्यर्थ होने से किस प्रकार रोका जा सकता है।

क्रियाकलाप 11.3- आइए, पता लगाएँ

तालिका 11.1 में स्तंभ II एवं स्तंभ III को भरें।

तालिका 11.1- दैनिक गतिविधियों में जल की व्यर्थता

स्तंभ । स्तंभ II स्तंभ III
गतिविधि जल किस प्रकार व्यर्थ हो रहा है? जल व्यर्थ होने से रोकने के लिए सुझाए गये उपाय
1. हाथ धोना
2. कपड़े धोना
3. बर्तन धोना
4. नहाना
5. खाना पकाना
6. बागवानी
7. दाँत साफ करना

इस तालिका से प्राप्त हुई जानकारी से आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं? जल के अपव्यय को रोकने के लिए आप और आपका परिवार क्या कर सकता है? जल की हानि को कम करने की कई विधियाँ हैं। उदाहरण के लिए उपयोग में न होने पर नल को बंद करना एवं जल के रिसाव को सही करवाना। जल का पुनः चक्रण एवं जल संचयन भी जल बचाने में सहायक हैं।

हमारा देश विभिन्न नदियों, झरनों और झीलों से समृद्ध है। क्या आपने प्लास्टिक थैलियों और रैपर्स आदि को जल की सतह पर तैरते हुए देखा है? हम मृदु जल के स्रोतों में कचरा (अपशिष्ट पदार्थों) फेंककर उन्हें प्रदूषित कर देते हैं। घरों और उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जब जल स्रोतों से मिलते हैं तो वे जल को प्रदषित करते हैं। जल को प्रदूषित करने वाली मानवीय गतिविधियों को पहचानिए। कक्षा में मैं अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आप जल प्रदूषण को कम करने के लिए क्या उपाय कर सकते हैं। प्रदूषित जल सजीवों के उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं होता है।

मृदु जल के स्रोत सीमित होने के कारण भारत के अनेक भागों में जल की कमी है। कुछ स्थानों पर लोगों को पीने का पानी लाने के लिए बहुत दूर तक चलना पड़ता है। सभी के पास जल की समान उपलब्धता नहीं है, इसलिए हमारे लिए जल का संरक्षण करना और उसका विवेकपूर्ण उपयोग करना महत्वपूर्ण है। हमें इसे प्रदूषित होने से भी बचाना चाहिए ताकि यह सभी जीवित प्राणियों के उपयोग के लिए उपयुक्त रहे। आप जल संरक्षण की कौन-कौन सी विभिन्न विधियाँ सोच सकते हैं?

जल संरक्षण के लिए जल संचयन एक विधि है। को बाद में उपयोग करने के लिए बड़ी मात्रा में एकत्रित एवं संग्रहित किया जाता है। इसे वर्षा जल संचयन कहा जाता है [चित्र 11.4 (क)]। क्या आप जानते हैं कि वर्षा का जल घरों, आवासीय क्षेत्रों और विद्यालयों में संचयित किया जाता है? भारत में वर्षा जल संचयन की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

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(क) वर्षा जल संचयन

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वित्र 11.4 (ख)- बावड़ी (तूरजी का झालरा, जोधपुर, राजस्थान)

उदाहरण के लिए राजस्थान एवं गुजरात में पानी की कमी के कारण जल संचयन के लिए बावड़ी [चित्र 11.4 (ख)] एवं वाव बनाए गये। इन बावड़ियों में जल संचयन की एक अनूठी व्यवस्था है। इनमें न केवल वर्षा का जल, बल्कि आस-पास की झीलों, तालाबों और नदियों से रिसने वाला जल भी संचयित होता है। इस हेतु धरती में लंबे, गहरे गड्‌ढों (खाइयाँ) के अंदर की दीवारें पत्थर के टुकड़ों से इस प्रकार बनी होती हैं जिससे इन खाइयों में जल का रिसाव हो सके। आप जल संचयन की इन पारंपरिक पद्धतियों को अपने आस-पास खोजें। इसके बारे में और अधिक जानने के लिए अपने शिक्षकों और अभिभावकों से बातचीत करें।

क्या आप जानते हैं?

प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इसका महत्त्व पता लगाइए।

'जल की विविध अवस्थाओं की यात्रा' नामक अध्याय में हमने जल चक्र के बारे में सीखा जहाँ सूर्य जल के वाष्पीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। क्या आपने कभी अपनी माँ या दादी को कई दिनों तक सूर्य की गरमी में कटे हुए कच्चे आमों को सुखाते हुए देखा है? आइए, सूर्य से प्राप्त ऊर्जा के विषय में अन्वेषण करें और जानें।

11.3 सूर्य से ऊर्जा

भूमि और सूर्या दोपहर की कड़ी धूप वाले दिन अज्जी को मिर्च सुखाने में सहायता कर रहे हैं। अज्जी ने कहा "हम इन्हें सुखाने के लिए सूर्य की गरमी का उपयोग करते हैं। जब ताजा मिर्च उपलब्ध न हों तो हम सूखी मिर्च का उपयोग कर सकते हैं। मैं आपको घर ले जाने के लिए भी कुछ सुखाई हुई मिर्चे दूँगी। क्या आप जानते हैं कि पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत सूर्य है? सभी पौधे और जंतु इस पर निर्भर हैं।"

हम विभिन्न कार्यों के लिए सूर्य की ऊष्मा (गरमी) और प्रकाश का उपयोग करते हैं। वे कौन सी गतिविधियाँ है जिनके लिए हमें ऊष्मा और प्रकाश की आवश्यकता होती है? भूमि हमारे जीवन में सूर्य से ऊष्मा और प्रकाश के उपयोग को दिखाने के लिए कुछ चित्र बनाती है। क्या आप कुछ अन्य उदाहरणों के साथ उसकी सहायता कर सकते हैं? चित्र बनाइए और दिए गये स्थान पर उनके नाम लिखिए।

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पौधों द्वारा भोजन बनाना

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कपड़े सूखना

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एक दिन दोपहर में भूमि और सूर्या अज्जी के घर के पास के एक मैदान से गुजरते हैं, जहाँ उन्हें घास चरती हुई एक गाय दिखाई देती है। वे सूर्य को ऊर्जा का मुख्य स्रोत होने की बात कर रहे हैं। आगे दिए गए वार्तालाप को ध्यान से पढ़िए और उत्तर दीजिए।

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इस गाय को देखो। यह घास खा रही है और उससे ऊर्जा प्राप्त कर रही है।

नहीं, मुझे लगता है कि इस गाय को ऊर्जा सूर्य से मिल रही है।

गाय धूप में खड़ी है परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि इसे सूर्य से ऊर्जा मिल रही है।

गाय घास खा रही है। घास को बढ़ने के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है। अतः ऊर्जा का मुख्य स्रोत सूर्य है। इस प्रकार गाय को सूर्य से ऊर्जा प्राप्त होती है।

आपके अनुसार, किसका कथन सही है और क्यों? ?

सूर्य का प्रकाश पौधों को भोजन तैयार करने में सहायता प्रदान करता है। सूर्य पृथ्वी पर सभी सजीवों को ऊष्मा (गरमी) और प्रकाश प्रदान करता है। यह ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।

क्या आप जानते हैं?

भारत में अनेक परिवारों में सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए सुबह-सुबह सूर्य को जल अर्पित किया जाता है।

क्या आपने छतों, विद्युत के खंभों के ऊपर या ट्रैफिक सिग्नल पर सौर पैनल देखे हैं? सौर पैनल सौर-ऊर्जा को एकत्रित कर विद्युत उत्पादन करते हैं। सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग सोलर कुकर में खाना बनाने अथवा सौर जल ऊष्मक में जल गर्म करने के लिए भी किया जा सकता है।

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सौर ऊर्जा के उपयोग

क्या होगा यदि सूर्य कुछ दिनों तक दिखाई न दे?

1. हमें दिन के समय भी कृत्रिम प्रकाश पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

2. _____________

3. _____________

सूर्य के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। पृथ्वी पर सूर्य ही ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। पौधे सूर्य से प्राप्त ऊर्जा द्वारा भोजन बनाते हैं। विभिन्न जीव-जंतु पौधों को खाते हैं और विकसित होते हैं। हम पौधों और जीव-जंतुओं दोनों से भोजन प्राप्त करते हैं। पृथ्वी पर यह चक्र सूर्य के कारण ही संभव है। अतः हम सभी ऊर्जा के मुख्य स्रोत सूर्य पर निर्भर करते हैं। विविध प्रकार के पौधे और जीव-जंतु कहाँ पाए जाते हैं? आइए, खोजें।

11.4 वन

एक सुबह अज्जी सैर के लिए भूमि और सूर्या को जंगल में ले जाती हैं। वहाँ उन्हें विभिन्न प्रकार के पौधे, झाड़ियाँ और वृक्ष मिलते हैं। अज्जी बताती हैं, "वन विभिन्न प्रकार के पौधों की सघन वृद्धि वाले बड़े क्षेत्र होते हैं।" रास्ते में वे भूमि पर गिरे हुए कुछ नेलिकाई (कन्नड़ में आँवले का नाम) इकट्ठा करते हैं। अज्जी उन्हें बताती हैं, "हमारे

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गाँव में पेड़ों से फल न तोड़ने की परंपरा है। उन्हें पशुओं और पक्षियों के खाने के लिए छोड़ दिया जाता है।"

आप अपने मित्रों से चर्चा करें और कम से कम पाँच ऐसे उत्पादों की एक सूची बनाएँ जिन्हें हम वनों से प्राप्त करते है
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पक्षियों और कीटों सहित कई जंगली जंतुओं के लिए वन एक प्राकृतिक आवास भी है। वह उन्हें भोजन और आश्रय भी प्रदान करता है। प्रकृति में प्रत्येक जीव उत्तरजीविता के लिए अन्य जीवों पर निर्भर करता है। जीवों में विविधता प्रत्येक जीवित प्राणी के लिए भोजन सुनिश्चित करती है। पिछले कुछ वर्षों से, बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण वन क्षेत्र लगातार कम हो रहे हैं। एक नये वन को उगाने या किसी लुप्त हुए वन को पुनर्स्थापित करने में कई वर्ष लग जाते हैं। अतः हमें नये वनों को दोबारा उगने के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए और इसके लिए हमें उनका संरक्षण और दायित्वपूर्वक उपयोग करना चाहिए।

वन महोत्सव पूरे देश में जुलाई महीने में मनाया जाता है। यह एक सप्ताह तक चलने वाला कार्यक्रम है। इस उत्सव के दौरान नये पौधे और पेड़ लगाए जाते हैं और वनों का सम्मान करने के लिए जागरूकता पैदा की जाती है।

एक बड़े वन क्षेत्र को काटने के क्या परिणाम होते हैं? एक प्रस्तुति बनाइए या अभिनय (रोल प्ले) कीजिए या एक कहानी या कविता लिखिए जो दर्शाती हो कि यदि हम अपने जंगलों में पेड़ों को निरंतर काटते रहेंगे तो क्या हो सकता है।


क्या आप जानते हैं?

भारत में प्राचीन काल से ही वनों का आदर, रक्षण और संरक्षण करने की परंपरा रही है। पवित्र उपवनों के बारे में आप पहले ही 'सजीव जगत में विविधता' पाठ में पढ़ चुके हैं। पेड़ों की कटाई को रोकने और इस प्रकार वनों को बचाने के लिए सामान्य लोगों द्वारा कई प्रयास किए गये हैं। प्रसिद्ध चिपको आंदोलन एक ऐसा ही प्रयास है। इसकी शुरुआत 1970 के दशक में उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में हुई। इस आंदोलन में स्थानीय महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उन्होंने पेड़ों को घेर लिया और उनसे लिपट गईं।

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इसका उद्देश्य हरित आवरण को बढ़ाना है। आप भी अपने समुदाय में वन महोत्सव की योजना बना सकते हैं।

भूमि और सूर्या ने जंगलों में घूमने के दौरान देखा कि जमीन पर बहुत सारी पत्तियाँ हैं और मृदा में नमी दिखाई दे रही है। अज्जी ने बताया, "पौधों की जड़ें मृदा को जकड़कर रखती हैं और उसे बहने से रोकती हैं। पेड़ों से गिरने वाली पत्तियाँ सड़ जाती हैं और मृदा को पोषक तत्वों से समृद्ध करती हैं। इस मृदा का उपयोग नए पौधों और पेड़ों को उगाने के लिए किया जाता है। प्रकृति में यह पुनर्चक्रण का एक उदाहरण है।" आइए, हम मृदा की अधिक विस्तार से जाँच करें।

11.5 मृदा, चट्टानें और खनिज

भूमि, सूर्या और अज्जी जंगल से घर वापस आते हैं। भूमि और सूर्या कुछ सागों के पौधे लगाने के लिए बगीचे में मृदा तैयार करने में अज्जी की मदद करते हैं (चित्र 11.5)। अज्जी उन्हें धीरे से मिट्टी को खोदने और मिट्टी की गाँठों को ढीला करने के लिए कहती हैं। आप 'सजीव- विशेषताओं का अन्वेषण' अध्याय में पहले ही पढ़ चुके हैं कि पौधों के पर्याप्त विकास के लिए मृदा के कणों के बीच की जगह न केवल पर्याप्त वायु प्रदान करती है बल्कि जड़ों को भी आसानी से बढ़ने देती है। भूमि और सूर्या को मृदा में छोटे-छोटे कंकड़, पौधों की जड़ें और कुछ केंचुए भी दिखाई दिए। क्या आप समझे कि केंचुए मृदा को उलटने-पलटने और ढीला करने में सहायता करते हैं?

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चित्र 11.5- साग बोने के लिए मृदा की तैयारी

जब तक भूमि और सूर्या अज्जी की सहायता करते हैं, आइए, क्रियाकलाप 11.4 करके हम स्वयं एक प्रयोग करें।

सावधानी

विभिन्न स्थानों की मृदा को छूने के उपरांत अपने हाथों को अच्छी तरह से धोना याद रखें। कभी-कभी जिस मृदा में कचरा होता है उसमें ऐसे कीटाणु होते हैं जो हमारे लिए हानिकारक हो सकते हैं।


क्रियाकलाप 11.4- आइए, जाँच करें

• अपने घर और विद्यालय के आस-पास के विभिन्न क्षेत्रों से मृदा के नमूने एकत्रित करें।

• अनुमान लगाइए कि विभिन्न मृदाओं में क्या-क्या हो सकता है।

• मृदा के प्रत्येक नमूने का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें और उसका रंग लिखें।

• मृदा के प्रत्येक नमूने को स्पर्श कर उसकी बनावट को महसूस करें।

• मृदा के नमूने का अपनी नग्न आँखों से अवलोकन करें। यदि आपके पास एक आवर्धक लेन्स है, तो उससे भी मृदा को देखें।

• तालिका 11.2 में अपने अवलोकन को अंकित करें।

तालिका 11.2- मृदा के नमूने

स्थान जहाँ से नमूना एकत्रित किया गया मृदा के बारे में अनुमान नग्न आँखों से मृदा का अवलोकन (रंग एवं संरचना) आवर्धक लेन्स से मृदा का अवलोकन

• नमूनों के बारे में लगाये गये अनुमान और निकट से किए गये अवलोकन में क्या अंतर है?

• क्या आपको विभिन्न स्थानों से लिए गये मृदा के नमूनों में कोई अंतर दिखाई दिया?

• क्या नग्न आँखों से और आवर्धक लेन्स से किए गये अवलोकन में आपको अंतर दिखाई दिया?

मृदा में बहुत सी वस्तुएँ होती हैं, जैसे- रेत, कीड़े और कृमि। इसमें कई छोटे जीव भी हो सकते हैं, जिन्हें हम अपनी नग्न आँखों से नहीं देख सकते। पौधे और जंतु भी विघटन और क्षय के कारण मृदा का हिस्सा बन जाते हैं। विभिन्न स्थानों से एकत्रित किए गये मृदा के नमूने अलग-अलग रंगों के हो सकते हैं क्योंकि उनमें विभिन्न पदार्थ उपस्थित होते है।

क्या आपने कभी सोचा है कि मृदा कैसे बनती है? मृदा का निर्माण लंबे समय (कई हजारों वर्षों) में सूर्य, जल और सजीवों द्वारा चट्टानों के विघटन से होता है। मृदा विभिन्न प्रकार की होती है। कुछ विशेष प्रकार के पौधों को उगाने तथा कुछ भवनों हेतु ईंटें बनाने के लिए अच्छी होती हैं। वनों में अनेक प्रकार की मृदाएँ होती हैं। मृदा एक अमूल्य संपदा है जो जैव-विविधता को आश्रय देती है।

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जुताई

आपने अपने आस-पास चट्टानें देखी होंगी। चट्टानों का उपयोग घर, भवन, मंदिर, सड़क, बाँध और मेज के ऊपरी भाग आदि के निर्माण में किया जाता है। स्लेट जैसी कुछ चट्टानों का उपयोग छत (चित्र 11.6) बनाने के लिए किया जाता है और लेटराइट (चित्र 11.7) का उपयोग ईंट जैसी निर्माण सामग्री के रूप में किया जा सकता है। ग्रेनाइट, बलुआ पत्थर और संगमरमर कुछ महत्वपूर्ण चट्टानें हैं। मानव ने चट्टानों का उपयोग कई हजार वर्ष पहले ही हस्त कुल्हाड़ी [चित्र 11.8 (क)] और तीर शीर्ष [चित्र 11.8 (ख)] जैसे उपकरण बनाने के लिए किया है।

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चित्र 11.6- छत बनाने के लिए चट्टानों का उपयोग

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चित्र 11.7- ईंट बनाने के लिए लेटराइट का उपयोग

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चित्र 11.8 (क)- हस्त कुल्हाड़ी

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चित्र 11.8 (ख) पत्थर से चने तीर शीर्ष

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संगमरमर का खनन

चट्टानें किससे बनी होती हैं? ये खनिजों से बनी होती हैं। ऐलुमिनियम, सोना, तांबा और लोहे जैसी महत्वपूर्ण धातुएँ खनिजों से प्राप्त की जाती हैं। खनिजों का उपयोग वायुयान, कार, आभूषण, प्रसाधन, विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में किया जाता है। उदाहरण के लिए- हम जिस सामान्य मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं, उसके निर्माण में लगभग एक दर्जन खनिजों का उपयोग होता हैं। जैसे सोना, चाँदी, ताँबा, कोबाल्ट आदि।

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प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला सोना

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प्रकृति में पाए जाने वाले कुछ खनिज

चट्टानें मानव जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके पुनर्निर्माण में हजारों से लाखों वर्ष लग जाते हैं इसलिए इनका संरक्षण और उपयोग दायित्वपूर्वक करना आवश्यक है। क्या आप जानते हैं कि चट्टानों और खनिजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे पहुँचाया जाता है? परिवहन के लिए हम जिन वाहनों का उपयोग करते हैं उनमें से अधिकांश वाहन जीवाश्म ईंधन का उपयोग करते हैं। आइए, जीवाश्म ईंधन के बारे में और अधिक जानें।

11.6 जीवाश्म ईंधन

1.3.tif सूर्या, विभिन्न प्रकार के वाहन अलग-अलग ईंधन स्टेशन पर क्यों जाते हैं?

इसका कारण यह है कि वे विभिन्न प्रकार के धिन का उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए- पेट्रोल और डीजला ।

आइए, क्रियाकलाप 11.5 करके इसके बारे में और अधिक खोजें।

क्रियाकलाप 11.5- आइए, सर्वेक्षण करें

• अपने आस-पड़ोस में वाहनों का सर्वेक्षण करें।

• वाहन कितने प्रकार के होते हैं? उनमें किस प्रकार के ईंधन की आवश्यकता होती है?

• आपके द्वारा एकत्रित की गई जानकारी तालिका 11.3 में अंकित करें।

तालिका 11.3- वाहन का प्रकार और उपयोग में आने वाले ईंधन ?

वाहन का प्रकार उपयोग में आने वाले ईंधन

सामान्यतः किस प्रकार के ईंधन का उपयोग अधिक होता है? वाहनों के लिए पेट्रोल और डीजल दो सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले ईंधन हैं। पेट्रोल, डीजल तथा मिट्टी का तेल पेट्रोलियम से प्राप्त होता है। प्राकृतिक गैस, कोयले और पेट्रोलियम को आमतौर पर जीवाश्म ईंधन कहा जाता है। वे मूलतः पृथ्वी के भीतर सूक्ष्म जीवों और पौधों के दब जाने से पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और कोयले में परिवर्तित हो जाते हैं। इन ईंधनों को बनने में लाखों वर्ष लग जाते हैं।

प्राकृतिक गैस का उपयोग भोजन बनाने और विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। आजकल इसका उपयोग वाहनों में संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सी.एन.जी.) के रूप में ईंधन की तरह किया जाता है। यह पेट्रोल या डीजल की तुलना में अधिक स्वच्छ ईंधन है। कोयले का उपयोग मुख्य रूप से विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। यह भारत के कई भागों में पाया जाता है। प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों का पता लगाइए और उन्हें भारत के मानचित्र पर चिह्नित कीजिए।

क्या आप जानते हैं?

कोयले, लकड़ी और गोबर के उपलों का ईंधन के रूप में उपयोग पहले भोजन बनाने के लिए किया जाता था। अब, प्रदूषण कम करने वाली प्राकृतिक गैस एवं द्रवित पेट्रोलियम गैस (एल.पी.जी.) धीरे-धीर इनका स्थान ले रही हैं।
1.3.tif

प्राकृतिक गैस

1.3.tif

पेट्रोल

1.3.tif

कोयला

जीवाश्म ईंधन सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। यदि हम जीवाश्म ईंधन का उपयोग वर्तमान में इसी प्रकार सतत रूप से करते रहे तो शीघ्र ही जीवाश्म ईंधन समाप्त हो जाएँगे। ऐसी स्थिति से बचने के लिए हमें ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत खोजने होंगे। जीवाश्म ईंधन के जलाए जाने पर धुँआ और कार्बन डाईऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है जो वायु को प्रदूषित करती है। परिवहन और घरेलू ईंधन के लिए जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर वायु प्रदूषण हुआ है।

आइए, हम जीवाश्म ईंधन के संरक्षण में अपना कुछ योगदान दें।

• निकट स्थानों तक पैदल या साइकिल जे जाएँ।

• सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करें।

कुछ अन्य विधियाँ सुझाएँ।


111.7 प्राकृतिक संसाधन- नवीकरणीय और अनवीकरणीय

प्रकृति की निधि हमारी आवश्यकताओं को पूरा करती है। वे पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक संसाधन हैं। उदाहरण के लिए हमें सूर्य से ऊष्मा एवं प्रकाश, नदियों से जल तथा पौधों एवं जंतुओं से भोजन प्राप्त होता है। ये संसाधन जिन्हें हम प्रकृति से प्राप्त करते हैं, इन्हें प्राकृतिक संसाधन कहते हैं। हम अपनी सुविधानुसार प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग बहुत-सी उपयोगी वस्तुएँ बनाने के लिए करते हैं। उदाहरण के लिए- विद्युत बल्ब, फर्नीचर, सौर पैनल, साइकिल आदि हमारे जीवन को सुविधाजनक बनाते हैं। इस प्रकार के सभी संसाधन जिन्हें मानव द्वारा निर्मित किया जाता है, उन्हें मानव-निर्मित संसाधन कहते हैं।

आपने विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों जैसे वायु, जल, सौर-ऊर्जा, वन, मृदा, चट्टानें, खनिजों और जीवाश्म ईंधनों के विषय में जानकारी प्राप्त की। समय के साथ इनमें से कई प्राकृतिक संसाधन प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा पुनर्भीरत हो जाते हैं। यदि आपको याद हो, अज्जी ने भूमि और सूर्या को बताया कि वे केवल वही नेलिकाई (आँवले) उठाएँ जो भूमि पर गिरे हुए हैं। यह बात सुनिश्चित करती है कि अन्य जंतुओं और पक्षियों के लिए पर्याप्त फल उपलब्ध हों। जंतुओं और पक्षियों के मल से निकले बीज नये पौधे उगाने में सहायक होते हैं, यद्यपि इस प्रक्रिया में नये पेड़ों से फल मिलने में कुछ वर्षों का समय लगता है। अतः संसाधन जिनका उचित समयावधि के भीतर नवीनीकृत, पुनःपूर्ति अथवा पुनर्स्थापन हो, उन्हें नवीकरणीय संसाधन कहते हैं। वायु, जल और वन नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधनों के कुछ उदाहरण हैं। प्रकृति उनका नवीकरण कर देती है। हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।

दूसरे शब्दों में, जीवाश्म ईंधन निर्मित होने में लाखों वर्ष लगते हैं। ये सीमित मात्रा में पाए जाते है और एक बार उपयोग करने के बाद ये क्षीण हो जाते हैं। ये उचित समयावधि के भीतर उत्पन्न नहीं होते हैं और न ही इनकी पुनः पूर्ति होती है। इन संसाधनों को अनवीकरणीय संसाधन कहते हैं। अनवीकरणीय प्राकृतिक संसाधनों के उदाहरण खनिज, मृदा, चट्टानें, कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैसें हैं।

11.8 हमारे उपयोगी संसाधन

यह भूमि और सूर्या के लिए अपनी अज्जी के घर रोमांचक छुट्टी के बाद घर लौटने का समय है। उनकी अम्मा (माँ) उन्हें लेने आई हैं। भूमि और सूर्या ने अम्मा को बागीचे में उग रहे सागों के पौधे दिखाए और वे सूखी मिर्चें दिखाईं जो अज्जी ने उन्हें घर ले जाने के लिए दी थीं।

जब वे नगर में पहुँचे तो उन्होंने आसमान के रंग और हवा की गंध में बदलाव देखा। यहाँ बहुत कम पेड़ हैं। यहाँ हवा की गंध भी अज्जी के घर की हवा जितनी अच्छी नहीं है। उन्हें वाहनों से निकलने वाले धुएँ की गंध आ रही है। वायु प्रदूषित है। अम्मा कहती हैं, "हाँ हम जब वाहनों में जीवाश्म ईंधन का उपयोग करते हैं तो धुँआ उत्पन्न होता है। आजकल ऐसे वाहन उपलब्ध हैं जो प्रदूषण कम फैलाते हैं। उदाहरण के लिए विद्युत वाहन जो किसी भी प्रकार के धुँए का निष्कासन नहीं करते हैं। अतः लोग इन वैकल्पिक वाहनों को अपनाने का प्रयास कर रहे हैं।"

क्या आप वायु प्रदूषण कम करने के लिए उपलब्ध विकल्पों की सूची बना सकते हैं?

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हम अपने दैनिक जीवन में कई प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हैं। आइए, कुछ संसाधनों को पहचाने जो कि क्रियाकलाप 11.6 को पूरा करने में उपयोग में लाए जा रहे हैं।

क्रियाकलाप 11.6- आइए, उपयोग किए गये प्राकृतिक संसाधनों की एक सूची बनाएँ

अपने दैनिक जीवन में आपके द्वारा किए जाने वाली गतिविधियों की एक सूची बनाएँ और उन प्राकृतिक संसाधनों को लिखें जिनका उस गतिविधि के संचालन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग किया गया था। तालिका 11.4 में कुछ गतिविधियाँ पहले से ही भरी हुई हैं। उनका अनुसरण करके आप रिक्त पंक्तियाँ भर सकते हैं।

तालिका 11.4- उपयोग किए जाने वाले प्राकृतिक संसाधन

गतिविधि प्राकृतिक संसाधन
कपड़े धोना पानी
मिट्टी के खिलौने बनाना
जलाने की लकड़ी एकत्रित करना
पतंग बनाना
जलपान करना

आपने कितने प्राकृतिक संसाधनों की सूची बनाई? अपनी सूची की तुलना अपने किसी मित्र की सूची से करें।

आपने और आपके मित्रों ने प्राकृतिक संसाधनों की सूची बनाई है जिनमें से कई का उपयोग हम प्रतिदिन करते हैं। ये संसाधन जल, वायु, मृदा तथा पौधों और जंतुओं से प्राप्त होने वाले भोजन हैं। हमें ये संसाधन प्रकृति से मिलते हैं और हम अपने उपभोग के लिए इन संसाधनों से वस्तुएँ बनाते हैं। इसलिए हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना चाहिए और उनका अपव्यय न करते हुए दायित्वपूर्वक उपयोग करना चाहिए। इस प्रकार पर्यावरण को हानि पहुँचाए बिना हम अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं और भविष्य के लिए भी इन्हें बचा सकते हैं। मानव सहित सभी सजीव अपने अस्तित्व के लिए इन पर निर्भर रहते हैं।

"पृथ्वी प्रत्येक मनुष्य की आवश्यकता की पूर्ति के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराती है लेकिन प्रत्येक मनुष्य के लालच को पूरा करने के लिए नहीं"

- एम. के. गाँधी

प्रमुख शब्द

वायु पेट्रोलियम वर्गीकृत
कोयला नवीकरणीय संसाधन अनुभव करना
वन संसाधन अन्वेषण करना
जीवाश्म ईंधन चट्टानें जाँच करना
मानव-निर्मित संसाधन मृदा अवलोकन
प्राकृतिक गैस सूर्य सर्वेक्षण
प्राकृतिक संसाधन जल
अनवीकरणीय संसाधन वर्षा जल संचयन

सारांश

मुख्य बिंदु

• अधिकांश संसाधन जो हमारे अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं, वे प्रकृति द्वारा प्रदान किए जाते हैं।

• प्रकृति द्वारा प्रदत्त संसाधनों को प्राकृतिक संसाधन कहते हैं।

• कुछ महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन वन, वायु, जल, मृदा, चट्टानें, खनिज, जीवाश्म ईंधन और सूर्य से ऊर्जा हैं।

• मनुष्य द्वारा अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाए गये संसाधनों को मानव-निर्मित संसाधन कहते हैं।

• प्राकृतिक संसाधनों को नवीकरणीय संसाधनों और अनवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत किया जा सकता है।

• वे संसाधन जिनकी पूर्ति एक उचित अवधि के भीतर प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा हो जाती है, उन्हें नवीकरणीय संसाधन कहते हैं।

• वे संसाधन जिनका भंडार सीमित मात्रा में होता है और जिनकी पूर्ति उचित अवधि के भीतर नहीं होती, उन्हें अनवीकरणीय संसाधन कहते हैं।

• मानव सहित सभी सजीव अपने जीवन के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं इसलिए हमें उनका विवेकपूर्वक उपयोग करना चाहिए।

आइए, और अधिक सीखें

1. चित्र 11.9 में प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित वस्तुओं को दर्शाया गया है। उन्हें उनके अव्यवस्थित नामों से मिलाइए। एक अन्य तालिका बनाइए और इन संसाधनों के नाम लिखिए। इन संसाधनों को नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों के रूप में वर्गीकृत कीजिए।

वस्तु अव्यवस्थित नाम
1.3.tif नटाट्च
1.3.tif नव
1.3.tif नवप
1.3.tif लज

चित्र 11.9- प्राकृतिक संसाधन

2. बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य? यदि असत्य है, तो उन्हें सही कर के पुनः लिखिए-

(क) प्रकृति में मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। [ ]

(ख) मशीन प्रकृति में पाया जाने वाला एक संसाधन है।[ ]

(ग) प्राकृतिक गैस एक अनवीकरणीय संसाधन है। [ ]

(घ) वायु एक नवीकरणीय संसाधन है। [ ]

3. सबसे उपयुक्त विकल्प का उपयोग करके रिक्त स्थान भरें।

3.1 ईंधन जो सामान्यतः स्कूटर या बाइक जैसे दोपहिया वाहनों में उपयोग किया जाता है......

(क) मिट्टी का तेल

(ख) पेट्रोल

(ग) डीजल

(घ) सी.एन.जी.

3.2 नवीकरणीय संसाधन का एक उदाहरण है...

(क) कोयला

(ख) जल

(ग) प्राकृतिक गैस

(घ) पेट्रोल

4. निम्नलिखित को नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों के रूप में वर्गीकृत करें- कोयला, प्राकृतिक गैस, वन और खनिज।

5. हम यह क्यों कहते हैं कि पेट्रोलियम एक अनवीकरणीय संसाधन है?

6. वनों को पुनः उगाना कठिन है। इस कथन की पुष्टि कीजिए।

7. पाँच दैनिक गतिविधियों की सूची बनाइए जहाँ आप प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करते हैं। उनका उपयोग कम करने की विधियाँ सुझाएँ।

8. चार गतिविधियों की सूची बनाइए जो वायु की उपस्थिति में संभव हैं।

9. आप अपने घर के आस-पास को हरित आवरण से समृद्ध बनाने के लिए किस प्रकार योगदान देंगे? ऐसे कार्यों की सूची बनाएँ।

10. दिए गये चित्र में हम देखते हैं कि भोजन बनाया जा रहा है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1.3.tif (क) भोजन बनाने के लिए किस प्रकार की ऊर्जा का उपयोग हो रहा है?

(ख) भोजन बनाने के लिए इस प्रकार की ऊर्जा के उपयोग का एक लाभ और एक हानि लिखिए।

11. बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटने से मृदा की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। आपके अनुसार ऐसा क्यों होता है?

12. दो मानवीय गतिविधियाँ बताइए जिनसे वायु प्रदूषित होती है। एक कार्य सुझाएँ जो वायु प्रदूषण कम करने में सहायक हो।

13. एक परिवार सौर पैनल बिजली उत्पादन के लिए, गैस स्टोव खाना बनाने के लिए और पवनचक्की कुएँ से पानी खींचने के लिए उपयोग करता है। क्या होगा यदि एक सप्ताह तक सूर्य का प्रकाश न हो।

14. निम्नलिखित शब्दों का उपयोग करके रिक्त स्थानों की पूर्ति करें- (जीवाश्म ईंधन, वन, वायु, पेट्रोलियम, कोयला, जल और अनवीकरणीय संसाधन)

1.3.tif

15. उद्योगों और आवास की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पेड़ों की माँग बढ़ रही है। इसलिए लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं। क्या यह उचित है? चर्चा कीजिए और एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार कीजिए।

16. अपने विद्यालय में पानी के उपयोग को कम करने के लिए एक योजना बनाइए। इस योजना को साकार करने के लिए आप क्या कदम उठाएँगे और इससे पर्यावरण को कैसे सहायता मिलेगी?

और भी सीखें

• वर्षा जल संचयन भारत में एक सदियों पुरानी परंपरा है। अपने राज्य या देश के अन्य भागों में उपयोग की जा रही कुछ पारंपरिक वर्षा जल संचयन विधियों का पता लगाइए।

• वायु प्रदूषण आपके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। अपने से बड़े या समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत कर अपने स्थानीय क्षेत्र में वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोतों की पहचान कर जाँच करें। आप निष्कर्षों के आधार पर दो व्यावहारिक उपाय सुझाइए जिनका उपयोग कर आपका विद्यालय या समुदाय वायु प्रदूषण कम कर सकता है।

• उन महत्वपूर्ण खनिजों और चट्टानों का पता लगाइए जिनका उपयोग आपके गाँव/कस्बे या नगर में विभिन्न प्रयोजनों के लिए किया जाता है। उनके नाम और उपयोग सूचीबद्ध कीजिए।

• आप एक इकोक्लब मॉनिटर हैं। अपने शिक्षक की सहायता से अपने विद्यालय में वृक्षारोपण अभियान का आयोजन कीजिए। इस गतिविधि के आयोजन के लिए आवश्यक चरणों की सूची बनाइए। लगाए गये वृक्षों के नाम और उनके महत्त्व को सूचीबद्ध करते हुए एक पृष्ठ की रिपोर्ट तैयार कीजिए।