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अध्याय 10

आधारभूत लोकतंत्र— भाग 1: शासन

" राजानाम् धर्मगोप्तारम् धर्मो रक्षति रक्षितः "

शासक धर्म की रक्षा करता है और जो धर्म की रक्षा करते हैं, धर्म उनकी रक्षा करता है |

—महाभारत

न्याय के बिना शांति नहीं; समानता के बिना न्याय नहीं; विकास के बिना समानता नहीं; संस्कृति और लोगों की पहचान और सम्मान के बिना लोकतंत्र नहीं |

—रिगोबर्टा मेन्चु तुम

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महत्वपूर्ण प्रश्न ?

  1. ‘शासनʼ का अर्थ क्या है?
  2. हमें सरकार की आवश्यकता क्यों होती है?
  3. ‘लोकतंत्रʼ का अर्थ क्या है? यह क्यों महत्वपूर्ण है?

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परिचय

दीर्घकाल से मनुष्य समाज में रहता आ रहा है | जब बहुत से लोग एक साथ रहते हैं, तब असहमति और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है | ऐसे में, समाज में व्यवस्था और सद्भाव बनाए रखने के लिए नियम अनिवार्य हो जाते हैं |

 संभवतः आपके घर में भी कुछ सामान्य नियम होते होंगे, जिनके पालन की अपेक्षा आप से होती है | आप जिस स्कूल में पढ़ते हैं, वहाँ भी नियम होते होंगे- कुछ विद्यार्थियों के लिए, तो कुछ शिक्षकों के लिए | बड़ी कक्षाओं में परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों को भी कुछ अनिवार्य नियमों का पालन अवश्य करना पड़ता है | सड़क पर वाहन चालकों से भी यातायात के नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है | सभी प्रकार की नौकरियों में कार्यरत लोगों को भी नियोक्ता द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना पड़ता है, जबकि नियोक्ता को भी उन सभी नियमों का पालन करना पड़ता है जो उन्होंने अपने अधीन काम करने वाले लोगों के लिए बनाए हैं |

यदि कोई व्यक्ति नियम का पालन नहीं करता है, तो क्या होगा? इसका सीधा-सा उत्तर है कि समाज अपनी व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हो पाएगा |

आइए पता लगाएँ

  • पृष्ठ 151 पर चित्र 10.1 में दिए गए दो चित्रों के बारे में बताइए | आप उनमें क्या अंतर पाते हैं?
  • नियमों पर हमारी चर्चा से आप इसे कैसे जोड़कर देखते हैं?
  • आपके विद्यालय में कौन-कौन से नियम है? उन्हें किसने बनाया?

नियमों को किसने बनाया और क्यों बनाया? उन्हें किस प्रकार से बनाया गया? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिनके बारे में हम इस अध्याय में पढ़ेंगे | निर्णयों को लेने की प्रक्रिया, नियमों के विभिन्न समूहों से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना और उनका पालन सुनिश्चित करना ही शासन कहलाता है | सरकार उन व्यक्तियों के समूह या तंत्र को कहते हैं जो नियम बनाते और इन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं | कुछ अधिक महत्वपूर्ण नियमों को कानून कहा जाता है |

इसका यह तात्पर्य कदापि नहीं है कि जो नियम और कानून एक बार बन गए, वे सदा के लिए बन गए | जिस प्रकार घर पर आप अपने माता-पिता के साथ किसी विशेष नियम के बारे में चर्चा कर सकते हैं अथवा विद्यार्थी संघ, स्कूल या विश्वविद्यालय प्रबंधन से नियमों में बदलाव के लिए कह सकते हैं, उसी प्रकार समाज को संचालित करने वाले कानूनों और नियमों में नागरिक भी अपनी बात रख सकते हैं | हम जानेंगे कि ऐसा किस प्रकार होता है |

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चित्र 10.1

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चित्र 10.2

आइए पता लगाएँ

  • क्या आप पृष्ठ 152 पर चित्र 10.2 में दिए गए दस चित्रों में दर्शाए लोक सेवाओं के प्रकार अथवा अन्य कार्यकलापों की पहचान कर सकते हैं?
  • आपके विचार से इन कार्यकलापों में सरकार की क्या भूमिका होती है?
  • क्या आप अपने दैनिक जीवन के ऐसे अन्य पहलुओं पर भी विचार कर सकते हैं जहाँ सरकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है?

सरकार के तीन अंग

विश्व भर में समाज जिस प्रकार से कार्य करता है, उसे डिजिटल तकनीक परिवर्तित कर रही है | भारत में 30 वर्ष पहले तक जिन लोगों को अपने से दूर बैठे संबंधियों को पैसे भेजने होते थे, वे डाकघर की पंक्ति में लगकर फॉर्म भरकर मनी आर्डर भिजवाते थे; अथवा यदि उन्हें किसी व्यवसाय के लिए भुगतान करना होता, तो वे पहले बैंक की पंक्ति में लगकर डिमांड ड्राफ्ट बनवाते और फिर उसे डाक द्वारा भिजवाते थे | आपने शायद इन शब्दों ('मनी ऑर्डर' या 'डिमांड ड्राफ्ट') को कभी न भी सुना हो क्योंकि आज हमारे पास तुरंत पैसे भेजने के लिए डिजिटल संसाधन भी उपलब्ध हैं |

डिजिटल तकनीक ने विशेष प्रकार के अपराधियों को भी जन्म दिया है जो अपने स्थान पर बैठे-बैठे डिजिटल माध्यमों से लोगों की धनराशि चुराने के तरीके ढूँढ़ते हैं | ऐसी आपराधिक गतिविधियों (जिसे साइबर क्राइम कहते हैं) को रोकने के लिए अनेक सरकारों ने नए कानून बनाए हैं | ऐसे कुछ साइबर अपराधियों जिन्होंने अपनी तकनीकी दक्षता का उपयोग समाज की भलाई के बजाय भोली-भाली जनता के श्रम से कमाए हुए धन को लूटने के लिए किया को गिरफ्तार भी किया गया है एवं न्यायालय द्वारा उन्हें दोषी ठहराया गया है | सामान्यतः उन्हें आर्थिक दंड के साथ-साथ जेल की सजा भी दी जाती है |

इस उदाहरण से हम देख सकते हैं कि किस प्रकार सरकार के तीनों अंग अथवा शाखाएँ एक साथ कार्य करते हैं-

  • विधायिका वह अंग है जो नए कानून बनाती है और कभी-कभी पुराने कानूनों में संशोधन तथा वर्तमान कानून को निरस्त भी करती है | यह कार्य जनता के प्रतिनिधियों की सभा द्वारा किया जाता है | भारतीय शासन प्रणाली का हम आगे अवलोकन करेंगे |
  • कार्यपालिका वह अंग है जो कानूनों को लागू करती है | इसके अंतर्गत राष्ट्र-राज्य के प्रमुख (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री), मंत्रीगण और ऐसे अभिकरण (एजेंसी) आते हैं जिनका दायित्व कानून को लागू करवाना होता है | (यहाँ दिए गए उदाहरण में साइबर पुलिस ऐसी ही एजेंसी है |)
  • न्यायपालिका न्यायालयों की प्रणाली है जो इस बात का निर्णय करती है कि क्या किसी ने कानून तोड़ा है और यदि तोड़ा है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाए? या फिर, यदि आवश्यक हो, तो उसे क्या दंड दिया जाए? कभी-कभी यह इस बात की भी जाँच करती है कि क्या कार्यपालिका द्वारा लिया गया कोई निर्णय ठीक है या नहीं; अथवा विधायिका द्वारा पारित किया गया कोई कानून भली-भाँति परखा गया है और सभी के हित में है या नहीं |

आइए पता लगाएँ

ऊपर दिए गए साइबर अपराधियों के मामले में सरकार के तीनों अंग किस प्रकार कार्य करते हैं, वर्णन कीजिए | वे हस्तक्षेप कैसे करते हैं?

शासन के किसी भी अच्छे तंत्र में इन तीनों अंगों को निश्चित रूप से पृथक रखा जाता है, जबकि ये तीनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और कार्य भी एक साथ करते हैं | यह विभाजन 'शक्तियों का पृथक्करण' कहलाता है (चित्र 10.3) | इसका उद्देश्य पूरी प्रणाली को नियंत्रित करना एवं संतुलन बनाए रखना है, अर्थात सरकार का प्रत्येक अंग दूसरे अंग के कार्यों की निगरानी कर सकता है तथा यदि कोई अंग अपनी अपेक्षित भूमिका से परे जाकर कार्य कर रहा है, तो उसे नियंत्रित कर पुनः संतुलन स्थापित कर सकता है |

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चित्र 10.3

आइए पता लगाएँ

कक्षा की एक गतिविधि के रूप में क्या आप किसी ऐसी स्थिति की कल्पना कर सकते हैं जहाँ शासन के तीनों अंगों की शक्तियाँ किसी एक ही समूह के नियंत्रण में आ जाएँ, ऐसे में किस प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न होगी? क्या आप वास्तविक जीवन में सुनी हुई किसी ऐसी परिस्थिति का वर्णन कर सकते हैं?

सरकार के तीन स्तर

कोई भी सरकार कम से कम दो स्तरों पर कार्य करती है- स्थानीय स्तर और राष्ट्रीय स्तरा भारत सहित अनेक देशों में यह तीन स्तरों पर कार्य करती है- स्थानीय स्तर, राज्य या प्रादेशिक स्तर और राष्ट्रीय स्तर | प्रत्येक स्तर भिन्न विषयों पर कार्य करता है | इसे तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य से देखें, तो यदि आपके घर का बल्ब नहीं जल रहा है, ऐसे में आप पहले बल्ब, स्विच, फ्यूज आदि जाँचेंगे | यदि वे काम नहीं कर रहे, तो आप बिजली मिस्त्री को बुलाएँगे और यदि यह पता चले कि समस्या घर पर नहीं है, तो आप बिजली विभाग जाकर शिकायत दर्ज कराएँगे | यहाँ भी समस्या के समाधान के तीन स्तर हैं | 

भारत में स्थानीय सरकारें, राज्य सरकारें और केंद्र सरकार या संघ सरकार (चित्र 10.4) है | मान लीजिए कुछ दिनों तक भारी वर्षा के कारण एक जिले के किसी क्षेत्र में बाढ़

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चित्र 10.4

आ गई | यदि वह ज्यादा भीषण नहीं है, तो स्थानीय प्राधिकारी उस स्थिति को संभाल सकते हैं | यदि बाढ़ अनेक नगरों और बहुत से गाँवों को प्रभावित करती है, तो राज्य सरकार आगे आती है और इसकी जिम्मेदारी उठाते हुए प्रभावित लोगों को बचाने के लिए बचाव दल भेजती है | किंतु यदि बाढ़ भयानक रूप ले लेती है और विशाल क्षेत्र को प्रभावित करती है, तो केंद्र सरकार मदद के लिए आगे आती है और राहत सामग्री और सेना इत्यादि भेजती है | इस उदाहरण में आप सरकार के तीनों स्तर के काम देख सकते हैं |

ध्यान रखें

हमारे अनेक संस्थानों के आदर्श वाक्य हमारे प्राचीन ग्रंथों के ज्ञान से प्रेरित हैं | उदाहरण के लिए, भारत सरकार का आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' है, अर्थात "सत्य की ही विजय होती है" | सर्वोच्च न्यायालय का आदर्श वाक्य 'यतो धर्मोस्ततो जयः' है, जिसका अर्थ है "जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है" |

सामने के पृष्ठ पर दी गई तालिका में सरकार के तीनों अंगों के राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर किए जाने वाले मुख्य कार्यों की रूपरेखा दी गई है | इनके बारे में विस्तार से (विधान सभाओं की निश्चित भूमिका) कक्षा 7 में पढ़ाया जाएगा | (स्थानीय सरकारों का यहाँ उल्लेख नहीं किया गया है क्योंकि हम आगे के दो अध्यायों में इसे विस्तार से समझेंगे |)

आइए पता लगाएँ

  • चित्र 10.5 में दी गई सारणी को देखिए | उन कार्यों और दायित्वों पर प्रकाश डालिए जो आपके जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं |
  • दो अथवा तीन वयस्क लोगों से सरकार के साथ उनके कार्य संबंधित संपर्को अथवा अनुभवों के बारे में पूछिए यह संपर्क किन स्तरों पर और किन उद्देश्यों से हुए?

सदन ऐसी सभा जहाँ कानूनों पर चर्चा की जाती है अथवा उन्हें पारित किया जाता है |

औपचारिक हमारे यहाँ राष्ट्रपति और राज्यपाल वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख नहीं होते हैं | विशेष परिस्थितियों में उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, पर वे सामान्यतः केंद्र या राज्य सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते हैं |

अखिल भारत  राज्य स्तर
न्यायपालिका भारत का सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालय

राष्ट्रीय स्तर राज्य स्तर
विधायिका दो सदन- लोकसभा और राज्यसभा जो राष्ट्रीय स्तर पर कानूनों का निर्माण करते हैं | राज्य का एक विधानमंडल अथवा विधान सभा (ध्यान रहे कि अधिकांशतः राज्यों में विधान सभा होती, जबकि कुछ राज्यों में विधान सभा के साथ - साथ एक विधान परिषद भी होती है |)

संघ सरकार राज्य सरकार
कार्यपालिका भारत के राष्ट्रपति (औपचारिक प्रमुख और तीनों सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर) द्वारा संचालित प्रधानमंत्री - कार्यपालिका के प्रमुख राज्यपाल (औपचारिक प्रधान) द्वारा संचालित मुख्यमंत्री - कार्यपालिका के प्रमुख
कार्यपालिका के कार्य और दायित्व (यह विस्तृत सूची नहीं है)
  • रक्षा
  • विदेशी मामले
  • परमाणुऊर्जा
  • संचार
  • मुद्रा
  • अंतर्राज्यीय वाणिज्य
  • शिक्षा
  • राष्ट्रीय नीतियों का प्रतिपाद
  • पुलिस, कानून व्यवस्था
  • राज्य स्तर पर केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों को अपनाना और उनका कार्यान्वयन करना |
  • जन-स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • कृषि
  • सिंचाई
  • स्थानीय सरकार

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

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तमिलनाडु के रामेश्वरम के एक सामान्य परिवार में 1931 में ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म हुआ | सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. कलाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम, मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका के कारण 'मिसाइल मैन' के नाम से भी जाना जाता है |

डॉ. अब्दुल कलाम 2002 से 2007 तक भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में कार्यरत रहे | सर्वोच्च प्रतिष्ठित पद पर रहते हुए भी वे अच्छी शिक्षा और नई खोज के प्रति अपनी गहरी रुचि के कारण जनमानस, विशेषकर युवाओं से बहुत गहराई से जुड़े हुए थे | सामाजिक कार्यों के प्रति लगाव, समर्पण और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता जैसे उनके गुणों ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है | उन्होंने भारत के युवाओं को अपने सपनों को साकार करने के लिए बड़े स्वप्न देखने और कठोर परिश्रम करने के लिए प्रोत्साहित किया |

डॉ. कलाम ने यह दिखाया कि भले ही राष्ट्रपति के रूप में उनकी स्थिति सांकेतिक है, फिर भी वे असंख्य लोगों के जीवन को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं |

आइए, उनके कुछ प्रेरणादायक विचारों पर ध्यान दें -

"आकाश की ओर देखिए | हम अकेले नहीं हैं | संपूर्ण ब्रह्मांड हमारा मित्र है और जो लोग (ऊँचे) सपने देखते और उसके लिए काम करते हैं, वह उन्हें सर्वोत्तम सहायता देने के लिए तत्पर है |"

"अपने लक्ष्य में सफल होने के लिए अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित्त निष्ठा रखिए |"

"यदि आप असफल होते हैं, तो भी हार नहीं मानिए | एफ.ए.आई.एल. का अर्थ है - 'फर्स्ट एटेम्पट इन लर्निंग', यानी सीखने की दिशा में पहला प्रयास | अंत, अंत (द एंड) नहीं है | वास्तव में ई.एन.डी. का अर्थ है - 'एफर्ट नेवर डाइज' अर्थात प्रयास कभी निरर्थक नहीं होते हैं | यदि आपको उत्तर में 'ना' (एन.ओ.) मिलता है, तो इसका अर्थ है - 'नेक्स्ट अपॉरचुनिटी', अर्थात अगले अवसर के लिए तैयार रहें | अतः सकारात्मक रहें |"

"स्वप्न का अर्थ सोते समय स्वप्न देखना नहीं है, बल्कि स्वप्न वे हैं जो आपको सोने न दें |"

“यदि चार बातों का ध्यान रखें - बड़ा लक्ष्य रखना, ज्ञान हासिल करना, कठिन परिश्रम करना और सतत प्रयास करना, तो कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है |"

लोकतंत्र

आपने देखा होगा कि हमने इससे पहले 'जन-प्रतिनिधियों' की बात की थी | विश्व के अधिकांश देशों ने शासन प्रणाली की नींव के रूप में लोकतंत्र को अपनाया है | इसका अंग्रेजी शब्द 'डेमोक्रेसी' है जो ग्रीक भाषा के दो शब्दों 'डेमोस' अर्थात 'लोग' और 'क्रेटोस' अर्थात 'शासन प्रणाली या तंत्र या शक्ति' से बना है, अतः डेमोक्रेसी का शाब्दिक अर्थ हुआ लोक-शासन या गणतंत्र (लोगों का शासन) |

परंतु क्या सभी लोग एक साथ शासन कर सकते हैं? स्पष्ट है कि यह संभव नहीं है | मान लीजिए कि आपकी कक्षा की किसी समस्या को विद्यालय के प्रधानाचार्य के ध्यान में लाना है, जैसे कि आपकी कक्षा में कोई समस्या है अथवा विद्यालय के बुनियादी ढाँचे में कोई समस्या है अथवा संभवतः आप अपने क्षेत्र भ्रमण (फील्ड ट्रिप) की किसी तिथि को प्रस्तावित करना चाहते हैं | इस स्थिति में क्या पूरी कक्षा प्रधानाचार्य के पास जाएगी? स्पष्ट है कि यह व्यावहारिक नहीं होगा | बहुत से विद्यालयों में पूरी कक्षा मिलकर कक्षा के मॉनीटर या कक्षा के प्रतिनिधि का चयन करती है; यदि कोई मॉनीटर नहीं भी है, तो भी किसी विशेष कार्य के लिए किसी एक प्रतिनिधि का चयन किया जा सकता है और उस प्रतिनिधि को प्रधानाचार्य के पास भेजा जा सकता है |

यही सिद्धांत राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी लागू होता है | चुनावों के माध्यम से जनता अपने प्रतिनिधियों का वोट देकर चयन करती है जो संबंधित सभा के चयनित सदस्य होते हैं | उन्हें प्रायः राज्य के स्तर पर विधायक तथा राष्ट्र के स्तर पर सांसद कहा जाता है | ये सभी चयनित सदस्य विधान सभा/लोक सभा में कानूनों पर चर्चा करते हैं | समस्याओं और समाधानों पर विचार-विमर्श करते हैं | मतभेद की स्थिति में एक-दूसरे से संवाद और तर्क-वितर्क द्वारा समस्या का हल करने का प्रयास करते हैं |

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किसी भी आधुनिक लोकतंत्र की तरह भारत में 'जन प्रतिनिधि' आधारित लोकतंत्र है | 2024 के परिप्रेक्ष्य में देखें, तो लगभग 97 करोड़ मतदाताओं के साथ भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी है | भारत में कानून के अनुसार 18 वर्ष से ऊपर की आयु के सभी भारतीय नागरिकों को चुनावों में मतदान करने का अधिकार है |

मान लीजिए कि आपकी कक्षा पिकनिक पर जाने की योजना बना रही है | पिकनिक पर जाने के दो संभावित स्थान हैं- 'क' और 'ख' | इन दोनों स्थानों पर जाने के लाभ-हानि, जैसे- उनकी दूरी, पहुँचने में लगने वाला समय, खर्च, मूलभूत आवश्यकताओं की उपलब्धता आदि पर कक्षा विचार-विमर्श करती है | इन स्थितियों में सभी के लिए किसी एक निर्णय पर आना कठिन हो जाता है | ऐसे में शिक्षक निर्णय लेते हैं कि मतदान से समस्या का समाधान निकल सकता है | 'क' स्थान पर जाने वाले विद्यार्थी अपने हाथ उठाएँ और उसके बाद जो विद्यार्थी 'ख' स्थान पर जाना चाहते हैं, वे भी अपना हाथ उठाएँ | जिस विकल्प के लिए सबसे ज्यादा विद्यार्थियों ने हाथ उठाए, उस विकल्प या स्थान को पिकनिक पर जाने के लिए चुन लिया जाता है | यह प्रक्रिया मतदान (वोटिंग) कहलाती है | यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र का उदाहरण है, जहाँ स्थान निश्चित करने में प्रत्येक विद्यार्थी की राय ली गई |

आधारभूत/धरातलीय लोकतंत्र उस तंत्र की ओर इशारा करता है, जिसमें सामान्य नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित और सुनिश्चित किया जाता है, जैसे कि पृष्ठ 155 पर चित्र 10.4 में दिखाए गए पिरामिड का आधार है | इस प्रकार के तंत्र में नागरिक स्वयं को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर अपनी बात रख सकते हैं |

भारतीय लोकतंत्र की अन्य विशेषताओं का अध्ययन हम आगे के दो अध्यायों और अगली कक्षाओं में भी करेंगे |

आगे बढ़ने से पहले...

  • सरकार और शासन के बिना कोई भी देश नहीं चल सकता |
  • आधुनिक सरकार के तीन अंग है- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका- जिन्हें एक साथ कार्य करने की आवश्यकता होती है |
  • भारत सरकार तीन स्तरों पर कार्य करती है- संघीय अथवा राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर और स्थानीय स्तर |
  • लोकतंत्र इस प्रणाली की पूरी रूपरेखा है | यह राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तर पर चयनित प्रतिनिधियों के माध्यम से कार्य करती है |

प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ

  1. स्वयं परखिए - लोकतंत्र का क्या अर्थ है? प्रत्यक्ष लोकतंत्र और प्रतिनिधि लोकतंत्र के बीच क्या अंतर है?
  2. सरकार के तीन अंग कौन-से हैं? उनकी क्या अलग-अलग भूमिकाएँ हैं?
  3. भारत के परिप्रेक्ष्य में हमें त्रिस्तरीय सरकार की आवश्यकता क्यों है?
  4. परियोजना- 2019 की कोविड महामारी के दौरान लगा लॉकडाउन आपको याद होगा | उस समय उठाए गए सभी कदमों की सूची बनाइए | उस स्थिति को संभालने में सरकार के कौन-कौन से स्तर सम्मिलित थे? उसमें सरकार के प्रत्येक अंग की क्या भूमिका थी?

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