
अध्याय -9
सममिति
आप अपने चारों ओर देखिए, आपको ऐसी कई वस्तुएँ मिल सकती हैं, जो आपका ध्यान आकर्षित करती हैं| उनमें से कुछ नीचे दी गई हैं|

ऊपर दिए गए चित्रों में सुंदरता प्रतीत होती है |
फूल को हम किसी भी तरफ से देखें वह हर तरफ से सुंदर, आकर्षक एवं जैसा है वैसा ही दिखाई देता है| तितली के विषय में आपका क्या विचार है? तितली के रंग बहुत आर्कषक हैं|क्या आपको तितली के विषय में कुछ और आकर्षक लगता है?
ऊपर की सभी आकृतियों को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि आकृति के कुछ भाग दोहराए गए हैं और ये दोहराव एक निश्चित पैटर्न में घटित होते दिख रहे हैं|क्या आप देख सकते हैं कि रंगोली की आकृति में क्या दोहराया गया है? फूल को केंद्र के चारों ओर 90 अंश तक घुमाया जाता है तो उसकी लाल पंखुडियाँ अपने आप वापस आ जाती हैं| इसके साथ ही रंगोली के अन्य भागों के साथ भी ऐसा ही होता है|
फिरकी के विषय में आप क्या सोचते है? क्या आप देख सकते हैं कि फिरकी के संदर्भ में कौन-सा पैटर्न दोहराया जा रहा है?
(संकेत - पहले षटभुज को देखें)
क्या आप बता सकते हैं कि षटभुज की प्रत्येक भुजा पर कौन-सी आकृति दोहराई जाती है? प्रत्येक भुजा पर चिपकाई गई आकृति का आकार क्या है? क्या आप इसे पहचानते हैं? जब आप षटभुज की सीमा रेखाओं के साथ आगे की ओर बढ़ते हैं तब आकृतियाँ कैसे बनती हैं? अन्य चित्रों के विषय में आप क्या कह सकते हैं? विशेष रूप से उन संरचनाओं के विषय में क्या कह सकते हैं जो आपको आकर्षित करती हैं इसके साथ ही आप बताइए कि इन संरचनाओं में कौन-से पैटर्न दोहराए जा रहे हैं?

दूसरी ओर बादलों की इस आकृति को देखिए| यहाँ पर कोई दोहराव वाला पैटर्न नहीं है| हम यह भी कह सकते हैं कि पहली चार आकृतियाँ सममित (symmetrical) हैं और अंतिम एक सममित नहीं है| सममिति (symmetry) का अर्थ है जो किसी आकृति के भाग या भागों में किसी निश्चित पैटर्न में दोहराई जाए |

आप इन सुंदर संरचनाओं में कौन-सी सममितियाँ देखते हैं?
9.1 सममिति की रेखा
नीचे दी गई आकृति (a) में नीले रंग का त्रिभुज है जिसमें एक बिंदुकित रेखा बनी हुई है | यदि आप त्रिभुज को बिंदुकित रेखा के अनुदिश मोड़ते हैं तो क्या होगा? रेखा के अनुदिश मोड़ने पर त्रिभुज का एक आधा भाग दूसरे आधे भाग को पूर्णतया आच्छादित लेता है| इन्हें दर्पण के आधे भाग कहा जाता है !

आकृति (b) में पहेली के 4 टुकड़ों और उनके बीच से होकर जाती हुई एक बिंदुकित रेखा के विषय में आपका क्या विचार है? क्या ये दर्पण के आधे भाग हैं? नहीं, जब हम रेखा के अनुदिश मोड़ते हैं तो आधा बायाँ भाग, आधे दाएँ भाग पर पूर्णतया आच्छादित नहीं है|
जब एक रेखा, आकृति को दो भागों में बाँटती है, जो कि मोड़ने पर एक दूसरे को पूर्णतया ढक लेते हैं, वह आकृति की सममिति की रेखा कहलाती है |
- आइए, पता लगाएँ
1. क्या आप इस अध्याय के प्रारंभ में दी गई आकृतियों में सममिति की रेखा देख पाए हैं? बादलों की आकृति के विषय में आपका क्या विचार है?
2. निम्न आकृतियों में यदि सममिति की रेखाएँ हैं, तो उन्हें पहचानिए |

एक से अधिक सममिति की रेखाओं की आकृतियाँ
क्या एक वर्ग में सममिति की केवल एक ही रेखा होती है?
एक कागज का चौकोर टुकड़ा लीजिए| इसे मोड़कर, इसकी सभी सममिति की रेखाएँ ज्ञात कीजिए?

यहाँ कागज को विभिन्न तरीकों से मोड़ा गया है जो कई सममिति की रेखाएँ बनाती हैं|
- कागज को आधा उर्ध्वाधर मोड़िए|
- कागज को फिर आधा क्षैतिज मोड़िए (अर्थात् आपने इसे दो बार मोड़ा) अब, मोड़ों को खोलिए|

पुनः वर्ग को विकर्ण के अनुदिश आधा मोड़िए (यह तीसरा मोड़ है), जैसा चित्र में दर्शाया गया है| पुनः मोड़ को खोलिए |
अब इसे दूसरे विकर्ण के अनुदिश आधा मोड़िए (यह चौथा मोड़ है), जैसा चित्र में दर्शाया गया है| पुनः मोड़ को खोलिए |
- क्या वर्ग को मोड़ने का कोई अन्य तरीका है जिससे कि दोनों आधे हिस्से एक दूसरे को आच्छादित करें? वर्ग जैसी आकृति में कितनी सममिति की रेखाएँ हैं?
अतः हम यह कह सकते हैं कि चित्रों में अनेक सममिति की रेखाएँ हो सकती हैं | नीचे दिए गए चित्रों में अनेक सममिति की रेखाएँ हैं | क्या आप इन सभी को ढूँढ़ सकते हैं?

- हमने देखा कि एक वर्ग का विकर्ण भी सममिति की रेखा है | आइए, उदाहरण के रूप में एक आयत को लेते हैं जोकि एक वर्ग नहीं है | क्या इसका विकर्ण सममिति की रेखा है?
सर्वप्रथम, आयत को देखिए और इन प्रश्नों का उत्तर दीजिए | अब कागज का एक आयताकार टुकड़ा लेते हैं और इसे विकर्ण के अनुदिश मोड़कर देखते हैं कि दोनों हिस्से पूर्णतया आच्छादित हैं या नहीं | आप क्या देखते हैं?

प्रतिबिंब
अभी तक हम यही कहते आए हैं कि जब हम किसी आकृति को सममिति की रेखा के अनुदिश मोड़ते हैं तो दोनों भाग पूर्णतया एक दूसरे को ढक लेते हैं | हम यह भी कह सकते हैं कि आकृति की सममिति की रेखा के एक ओर का भाग रेखा द्वारा दूसरी ओर परावर्तित होता है | इसी प्रकार, आकृति का सममिति रेखा के दूसरी ओर का भाग पहली ओर परावर्तित होता है | आइए, आकृति पर कुछ बिंदुओं को अंकित करके इसे समझते हैं |
आगे दी गई आकृति एक वर्ग दर्शाती है जिसके कोनों को A, B, C और D से अंकित किया गया है | आइए, इसकी उर्ध्वाधर सममित रेखा को लें | जब हम इस वर्ग को इस रेखा के अनुदिश परावर्तित करते हैं, तब दाईं ओर के बिंदु B और C बाईं ओर परावर्तित होकर क्रमशः बिंदुओं A और D का स्थान ले लेते हैं | बिंदु A और बिंदु D का क्या होता है? बिंदु A, बिंदु B का स्थान ग्रहण कर लेता है तथा बिंदु D, बिंदु C का स्थान ग्रहण कर लेता है |

- यदि हम इस आकृति को A और C से होकर जाने वाले विकर्ण के अनुदिश परावर्तित करें, तोक्या होगा? बिंदु A, B, C और D किन स्थानों पर जाएँगे? यदि हम इसे क्षैतिज सममित रेखा के अनुदिश परावर्तित करें, तो क्या होगा?
इस प्रकार एक आकृति जिसमें सममिति की एक रेखा या रेखाएँ होती हैं, उसे परावर्तीय सममिति भी कहा जाता है |
सममिति की रेखाओं वाले आकार बनाना
अभी तक हमने सममिति की आकृतियों तथा असममिति की आकृतियों को देखा है | ऐसी सममिति की आकृतियों को किस प्रकार बनाया जाता है? आइए, इसकी खोज करें |
इंक-ब्लॉट डेविल्स
आपने इसे कक्षा 5 में पहले भी ऐसा किया है | कागज का एक टुकड़ा लीजिए | उसे आधा मोड़िए | एक आधे भाग पर स्याही (या पेंट) की कुछ बूँदें छिड़किए |
अब इन दोनों आधे भागों को एक दूसरे पर दबाइए तथा पुनः कागज को खोलिए |
- आप क्या देखते हैं?
- क्या परिणामी आकृति सममित है?
- यदि हाँ, तो सममिति की रेखा कहाँ है?
- क्या कोई अन्य सममिति की रेखा भी है, जिसके अनुदिश मोड़ने पर एक जैसे (identical) दो भाग प्राप्त होंगे?
- ऐसे और अधिक पैटर्नी को प्राप्त करने का प्रयास कीजिए |


- आइए, पता लगाएँ

1. दी गई प्रत्येक आकृति में कागज की मुड़ी हुई चौकोर शीट में एक छेद किया गया है और फिर कागज को खोल दिया गया है | उस रेखा की पहचान कीजिए जिसके साथ कागज को मोड़ा गया था |
चित्र (d) एक छेद करके बनाया गया है | ज्ञात कीजिए कागज को कैसे मोड़ा गया था |

2. सममिति रेखाएँ दी गई हैं, अन्य छेदों को ज्ञात कीजिए-

3. नीचे कागज काटने से संबंधित कुछ प्रश्न दिए गए हैं |
एक ऊर्ध्वाधर मोड़ पर विचार कीजिए | उसे हम निम्न प्रकार से दर्शाते हैं-

इसी प्रकार, क्षैतिज मोड़ को निम्न प्रकार से दर्शाते हैं-

4.नीचे दी गई प्रत्येक स्थिति में काटने के पश्चात् जब कागज को खोला जाए तब छेद के आकार का अनुमान लगाकर उसे सत्यापित कीजिए |

5. मान लीजिए कि आपको इनमें से प्रत्येक आकार को कुछ मोड़ों और एक सीधे कट के साथ प्राप्त करना है | आप ऐसा किस प्रकार करेंगे?
a. केंद्र में स्थित छेद एक वर्ग है |

b. केंद्र में स्थित छेद एक वर्ग है |

नोट - उपरोक्त दोनों प्रश्नों के लिए, इसकी जाँच कीजिए कि क्या केंद्र में चार-भुजीय आकृति एक वर्ग के दोनों गुणों की विशेषताओं को इंगित करती है |
6. इन आकृतियों में कितनी सममिति की रेखाएँ हैं?
a.

b. समान भुजाओं और समान कोणों वाला एक त्रिभुज

c. समान भुजाओं और समान कोणों वाला एक षट्भुज

7. प्रत्येक आकृति का अक्स बनाइए तथा सममिति की रेखाएँ खींचिए, यदि कोई है तो --

8. नीचे दिए गए कोलम में सममिति की रेखाएँ ज्ञात कीजिए-

9. निम्नलिखित का चित्र बनाइए-
a. एक त्रिभुज जिसमें सममिति की केवल एक रेखा हो |
b. एक त्रिभुज जिसमें सममिति की केवल तीन रेखाएँ हों |
c. एक त्रिभुज जिसमें सममिति की कोई रेखा ना हो |
क्या ठीक दो सममित रेखाओं का त्रिभुज बनाना संभव है?
10. निम्नलिखित का चित्र बनाइए | प्रत्येक स्थिति में, आकृति में कम से कम एक घुमावदार सीमा अवश्य हो |
a. ठीक एक सममिति की रेखा वाला चित्र
b. ठीक दो सममिति की रेखाओं वाला चित्र
c. ठीक चार सममिति की रेखाओं वाला चित्र
11. निम्नलिखित आकृतियों को एक वर्गाकार कागज पर बनाइए | उन्हें इस प्रकार पूरा कीजिए कि नीले रंग की रेखा सममिति की रेखा हो | समस्या (a) को आपके लिए पूरा किया गया है |


संकेत -- (c) और (f) के लिए देखिए कि क्या पुस्तक को घुमाने से कुछ सहायता प्राप्त होती है!
12. निम्नलिखित आकृतियों को एक वर्गाकार कागज पर बनाइए | उनमें से प्रत्येक को इस प्रकार पूरा कीजिए कि परिणामी आकृति में सममिति की रेखाओं के रूप में दो नीली रेखाएँ हो |

13. निम्नलिखित रेखा आकृतियों को डॉट ग्रिड पर बनाइए | प्रत्येक आकृति के लिए दो और रेखाएँ खींचिए ताकि ऐसी एक आकृति बन सके, जिसमें सममिति की एक रेखा हो |

9.2 घूर्णन सममिति
चित्र में दर्शाई गई कागज की पवन चक्की (windmill) सममित जैसी दिखाई देती प्रतीत होती है, परंतु यहाँ कोई सममिति की रेखा नहीं है | यदि आप इसे मोड़ेंगे, तो दोनों आधे भाग एक दूसरे को पूर्णतः नहीं ढकेंगे | दूसरी ओर, यदि आप इसे केंद्र पर लाल बिंदु के परित 90° पर घुमाएँगे, तो यह पवन चक्की ठीक पहले जैसी दिखाई देगी |

हम कहते हैं कि इस पवन चक्की में घूर्णन सममिति (rotational symmetry) है |
जब भी घूर्णन सममिति की बात की जाती है, तब वहाँ एक निश्चित बिंदु होता है, जिसके परित वस्तु को घुमाया जाता है (का घूर्णन किया जाता है) | यह निश्चित बिंदु घूर्णन का केंद्र (centre of rotation) कहलाता है |
क्या उपरोक्त पवन-चक्की ठीक पहले जैसी ही दिखाई देगी, जब उसे 90° से छोटे किसी कोण पर घुमाया जाता है?
नहीं !
वह कोण, जिस पर किसी आकृति को ठीक पहले जैसा ही दिखने के लिए घुमाया जा सकता है, घूर्णन सममिति का कोण या केवल सममिति का कोण (संक्षेप में) कहलाता है|
पवन-चक्की के लिए सममिति के कोण 90° (चौथाई चक्कर), 180° (आधा चक्कर), 270° (तीन चौथाई चक्कर) और 360° (पूरा चक्कर) है | ध्यान दीजिए कि जब किसी भी आकृति को 360° घुमाया जाता है, तब वह अपनी प्रारंभिक स्थिति पर वापस आ जाती है | अतः 360° सदैव सममिति का एक कोण होता है |
इस प्रकार, हम देखते हैं कि पवन चक्की के सममिति के 4 कोण हैं | क्या आप किसी एक अन्य आकृति के विषय में जानते हैं, जिसके सममिति के ठीक 4 कोण होते हैं?
एक वर्ग के कितने सममिति कोण हैं? प्रारंभिक वर्ग प्राप्त करने के लिए, उसे कितने घूर्णन की आवश्यकता है?
90° के घूर्णन के बाद, हमें एक अतिव्यापी (overlapping) वर्ग प्राप्त होता है | यह घूर्णन बिंदु A को बिंदु B की स्थिति पर, बिंदु B को बिंदु C की स्थिति पर, बिंदु C को बिंदु D की स्थिति पर तथा बिंदु D को फिर से बिंदु A की स्थिति पर पहुँचा देता है | क्या आप जानते हैं कि घूर्णन के केंद्र को कहाँ चिह्नित करना है

इसकी सममिति के अन्य कोण क्या हैं?

उदाहरण - नीचे दी गई पट्टी के लिए, सममिति के कोण ज्ञात कीजिए -

हल - आइए, इस पट्टी को इसके केंद्र के परित घड़ी की दिशा में (Clockwise) घुमाए|

क्या हमें 180° का एक अन्य घूर्णन करने से प्रारंभिक स्थिति प्राप्त हो जाती है | नहीं | क्यों?
प्राप्त स्थिति को एक और बार 180° का घूर्णन करने से प्रारंभिक स्थिति प्राप्त होती है |
यह आकृति केवल एक संपूर्ण घूर्णन के पश्चात्, अर्थात् 360° के घूर्णन के बाद, अपनी प्रारंभिक स्थिति पर वापस आ जाती है | अतः हम कहते हैं कि इस आकृति में घूर्णन सममिति नहीं है |
किरण-संबंधी भुजाओं (radial arm) वाली आकृतियों में घूर्णन सममिति
दी गई आकृति को देखिए, इसमें 4 किरण-संबंधी भुजाएँ हैं | इसकी सममिति के कितने कोण हैं? वे कौन-से हैं?

ध्यान दीजिए कि प्रत्येक दो आसन्न केंद्रीय बिंदुकित रेखाओं के बीच का कोण 90° है |
क्या आप इन किरण-संबंधी भुजाओं के बीच के कोणों को बदल सकते हैं, ताकि प्राप्त आकृति के अभी भी सममिति के 4 कोण हों? इसे खींचने का प्रयास कीजिए |
यह जाँच करने के लिए कि खींची गई आकृति के वास्तव में सममिति के 4 कोण हैं, आप दो अलग-अलग कागजों पर आकृति को खींच सकते हैं | इनमें से एक कागज में किरण-संबंधी भुजाओं को काट लीजिए | दूसरे कागज पर आकृति को स्थिर रखते हुए, घूर्णन सममिति की जाँच के लिए कट-आउट आकृति को उस पर घुमाइए |
आप इस आकृति को किस प्रकार संशोधित करेंगे कि इसके केवल सममिति के 2 कोण हों?
एक विधि यह है-

हम 4 और 2 सममिति के कोणों वाली आकृतियों को देख चुके हैं | क्या हम एक ऐसी आकृति प्राप्त कर सकते हैं, जिसके ठीक 3 सममिति के कोण हों? क्या आप इसके लिए किरण-संबंधी भुजाओं का उपयोग कर सकते हैं?
आइए, नीचे दी आकृति के अनुसार 3 किरण-संबंधी भुजाओं को लेकर प्रयास करें | इसके कितने सममिति के कोण हैं तथा ये कौन-से हैं?
नीचे तीन किरण-संबंधी भुजाओं वाली एक आकृति दी गई है

इस आकृति की एक प्रति बनाइए और काट लीजिए | इस आकृति पर कट-आउट को घुमाकर इसके घूर्णन कोण निर्धारित कीजिए |
हम देखते हैं कि केवल एक संपूर्ण चक्कर, अर्थात 360° के घूर्णन से यह आकृति अपनी प्रारंभिक स्थिति पर वापस आ जाएगी | इसलिए, इस आकृति में कोई घूर्णन सममिति नहीं है, क्योंकि इसका सममिति का कोण केवल 360° ही है |
यद्यपि, क्या इस आकृति में कोई ऐसा परिवर्तन किया जा सकता है जिससे इसके 3 सममिति के कोण हो जाएँ?
क्या बिंदुकित रेखाओं के बीच के कोणों में परिवर्तन करके ऐसा किया जा सकता है?
यदि किसी तीन किरण संबंधी भुजाओं वाली आकृति में घूर्णन सममिति हो, तब घूर्णित संस्करण मूल के साथ अतिव्यापी होना चाहिए | यहाँ इन दोनों स्थितियों के कच्चे रफ आरेख दिए गए हैं-
यदि इन दोनों आकृतियों को अतिव्यापी होना है, तो आप इनके कोणों के बारे में क्या कह सकते हैं?

ध्यान दीजिए कि ∠A को ∠B के साथ अतिव्यापी होना चाहिए, ∠B को∠C के साथ अतिव्यापी होना चाहिए तथा ∠C, ∠A के साथ अतिव्यापी होना चाहिए |
इसलिए ∠A = ∠B=∠C है | यह कोण क्या होना चाहिए?
हम जानते हैं कि एक पूरे चक्कर का कोण 360º होता है | यह तीनों कोणों के बीच समान रूप से वितरित हैं | अतः इनमें से प्रत्येक कोण (360º )/3 = 120º का होना चाहिए |
इस प्रकार, किरण-संबंधी भुजाओं वाली 3 भुजाओं की आकृति घूर्णन सममिति तब दर्शाती है, जब आसन्न बिंदुकित रेखाओं के बीच का कोण 120º होता है | इस प्रेक्षण का सत्यापन करने के लिए कागज के कट-आऊटों का उपयोग कीजिए |
अब इस आकृति के कितने घूर्णन के कोण हैं तथा ये कौन-से हैं?

नोट- घूर्णनों को दर्शाने के लिए रंग जोड़े गए हैं |
आइए, हम और आकृतियाँ ढूँढ़े
- क्या आप किरण-संबंधी भुजाओं को लेकर ऐसी आकृति बना सकते हैं जिसमें -
a. ठीक 5 सममिति के कोण हों?
b. 6 सममिति के कोण हों? प्रत्येक आकृति का सममिति का कोण भी ज्ञात करें |
संकेत - पहली स्थिति के लिए 5 किरण-संबंधी भुजाएँ लिखिए? दो आसन्न किरण-संबंधी भुजाओं के बीच क्या कोण होना चाहिए?
- एक ऐसी किरण-संबंधी भुजाओं से बनी आकृति लीजिए जिसमें ठीक 7 सममिति के कोण हों? इसका न्यूनतम सममिति कोण कितना होगा? क्या इस स्थिति में कोण की माप एक पूर्ण संख्या होगी? यदि नहीं, तो उसे मिश्रित भिन्न में व्यक्त कीजिए |
आइए, कुछ अन्य प्रकार की आकृतियों में सममिति के कोणों को ज्ञात करें |
- आइए, पता लगाएँ
1. दी गई आकृतियों में दिए गए चिह्न के परित सममिति के कोण ज्ञात कीजिए |

2. निम्नलिखित में से किस आकृति में एक से अधिक सममिति के कोण हैं?

3. प्रत्येक आकृति के लिए घूर्णन सममिति का क्रम बताइए-

आइए, उपरोक्त सभी स्थितियों के लिए सममिति के कोणों की सूची बनाइए |
- सममिति के कोण जब उनमें से ठीक 2 सममिति के कोण हों- 180°, 360°
- सममिति के कोण जब उनमें से ठीक 3 सममिति के कोण हों- 120°, 240°, 360°
- सममिति के कोण जब उनमें से ठीक 4 सममिति के कोण हों- 90°, 180°, 270°, 360°
क्या आप इन सभी स्थितियों में सममिति के कोणों के विषय में, क्या आप कोई उभयनिष्ठ (common) तथ्य देखते हैं? सबसे पहली पंक्ति की संख्याएँ 180 का गुणज हैं | दूसरी पंक्ति की संख्याएँ 120 का गुणज हैं तथा तीसरी पंक्ति की संख्याएँ 90 का गुणज हैं |
- प्रत्येक स्थिति में कोण, न्यूनतम कोण के गुणज हैं | आप उत्साहपूर्वक पूछ सकते हैं कि क्या ऐसा सदैव होता है? आप क्या सोचते हैं?
- सत्य या असत्य
-> यदि एक आकृति की सममिति का न्यूनतम कोण एक प्राकृत संख्या है, तो वह 360° का एक गुणनखंड होगी|
क्या सभी आकृतियों के लिए सममिति का एक न्यूनतम कोण होता है? ऐसा ज्ञात हुआ है कि सबसे अधिक सममित आकार, जैसे वृत्त को छोड़कर सभी आकृतियों में यह स्थिति या न्यूनतम कोण होता है | आइए अब वृत्त की चर्चा करते हैं |
एक वृत्त की सममितियाँ
वृत्त एक मनमोहक आकृति है | तब क्या होता है, जब आप एक वृत्त को उसके केंद्र के परित घड़ी की दिशा में घुमाते हैं? वह स्वयं के साथ संपाती हो जाता है | इससे कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है कि आप उसे किस कोण पर घुमा रहे हैं | अतः एक वृत्त के लिए प्रत्येक कोण सममिति का कोण होता है |

अब, एक वृत्त की परिसीमा पर एक बिंदु लीजिए और इसे केंद्र से मिलाइए | इसे बढ़ा कर वृत्त का एक व्यास बनाइए | क्या यह व्यास इस वृत्त की परावर्तन सममिति की एक रेखा है? हाँ | प्रत्येक व्यास वृत्त की एक सममित रेखा है |
पहियों की ही तरह हम अपने परिवेश में ऐसी अनेक वस्तुएँ प्राप्त कर सकते हैं जिनमें घूर्णन सममिति होती है | उन्हें ज्ञात कीजिए | इनमें से कुछ नीचे दर्शाई गई हैं-

- आइए, पता लगाएँ
1. नीचे दिए गए वृत्त के त्रिज्याखंडों में इस प्रकार रंग भरिए कि आकृति में (i) 3 सममिति के कोण हों | (ii) 4 सममिति के कोण हों | (iii) सममिति के संभव कोणों की संख्या क्या होगी? यदि इन त्रिज्याखंडों को अलग-अलग रंगों से अलग-अलग विधियों द्वारा भरा जाए तो,

2. वृत्त और वर्ग को छोड़कर, ऐसी अन्य दो आकृतियाँ बनाइए, जिनमें परावर्तीय सममिति और घूर्णन सममिति दोनों हों |
3. जहाँ भी संभव हो, निम्नलिखित का एक कच्चा स्कैच खींचिए-
a. एक त्रिभुज, जिसमें न्यूनतम दो सममिति की रेखाएँ हों तथा न्यूनतम दो सममिति के कोण हों |
b. एक त्रिभुज, जिसमें केवल एक सममिति की रेखा हो लेकिन कोई घूर्णन सममिति न हो |
c. घूर्णन सममिति वाला ऐसा चतुर्भुज, जिसमें कोई परावर्तीय सममिति न हो |
d. एक परावर्तीय सममिति वाला चतुर्भुज, जिसमें कोई घूर्णन सममिति न हो |
4. एक आकृति में सममिति का न्यूनतम कोण 60° है | इस आकृति के अन्य सममिति के कोण क्या हैं?
5. एक आकृति में एक सममिति का कोण 60° है | इस आकृति के दो सममिति के कोण 60° से कम हैं | सममिति का न्यूनतम कोण क्या होगा?
6. क्या हम घूर्णन सममिति के साथ एक ऐसी आकृति प्राप्त कर सकते हैं, जिसमें सममिति का न्यूनतम कोण
(a) 45° है?
(b) 17° है?
7. यह दिल्ली में स्थित नए संसद भवन का चित्र है-

a. क्या इस चित्र की बाहरी परिसीमा (boundary) में परावर्तन सममिति है? यदि ऐसा है, तो सममिति की रेखाएँ खींचिए | वे कितनी हैं?
b. क्या इसकी अपने केंद्र के परित घूर्णन सममिति है? यदि ऐसा है, तो घूर्णन सममिति के कोण ज्ञात कीजिए |
8. अध्याय 1, सारणी 3 में पहले आकृति अनुक्रम नियमित बहुभुज आकार अनुक्रम आकृतियों में सममिति की कितनी रेखाएँ हैं? आपको कौन-सा संख्या अनुक्रम मिलता है |
9. अध्याय 1 की सारणी 3 में पहले आकृति अनुक्रम नियमित बहुभुज के आकार अनुक्रम की आकृतियों में सममिति के कितने कोण हैं? आपको कौन-सा संख्या अनुक्रम प्राप्त होता है?
10. अध्याय 1 की सारणी 3 में अंतिम आकृति अनुक्रम कोच स्नोफ्लेक के आकार अनुक्रम में आकृतियों में सममिति की कितनी रेखाएँ है? सममिति के कितने कोण हैं?
11. अशोक चक्र में कितनी सममिति की रेखाएँ और सममिति के कोण होते हैं?

टाइल्स के साथ खेलिए
a. पुस्तक के अंत में दी गई रंगीन टाइल्स
का उपयोग करके इस आकृति को पूरा कीजिए जिससे इसकी केवल दो सममिति की रेखाएँ हों |
b. 16 ऐसी ही टाइल्स का प्रयोग करके ऐसी आकृति बनाइए जिसमें ठीक
1. एक सममिति की रेखा हो |
2. दो सममिति की रेखाएँ हो |
c. इन टाइल्स का प्रयोग करके रचनात्मक सममित डिजाइन बनाइए |

- खेल
एक 6×6 का ग्रिड (grid) खींचिए | दो खिलाड़ी दो आसन्न वर्गों को भरते हुए, बारी-बारी से एक रेखा खींचते हैं | यह रेखा क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर किसी भी रूप में खींची जा सकती है | ये रेखाएँ अतिआच्छदित नहीं हो सकती हैं | यह खेल तब तक जारी रहता है, जब तक कि कोई खिलाड़ी कोई और रेखा नहीं खींच पाता है | वह खिलाड़ी जो आगे रेखा नहीं खींच पाता, खेल में हार जाता है |

इस खेल को जीतने की क्या रणनीति होनी चाहिए?
सारांश
- जब कोई आकृति ऐसे भागों से बनी प्रतीत होती है, जिसमें एक निश्चित पैटर्न को दोहराया जाता है, तब हम कहते हैं कि उस आकृति में सममिति है | ऐसी आकृतियों को हम सममित आकृतियाँ कहते हैं |
- एक रेखा जो किसी समतल आकृति को दो भागों में इस प्रकार काटती है कि उस रेखा के अनुदिश मोड़ने पर दोनों भाग परस्पर अतिव्यापी हो जाएँ, आकृति की सममिति की रेखा या सममिति की अक्ष कहलाती है |
- एक आकृति की एक से अधिक (multiple) सममिति की रेखाएँ हो सकती हैं |
- कुछ आकृतियों को जब एक निश्चित बिंदु के परित किसी कोण पर घुमाया जाता है, तब वे मूल रूप से एक समान लगती हैं | ऐसा कोण उस आकृति की सममिति का कोण कहलाता है | ऐसी आकृति जिसमें घूर्णन कोण हमेशा 0° से 360° के बीच होता है, तो कहा जा सकता है कि इनमें घूर्णन सममिति है | आकृति का वह निश्चित बिंदु, जिसके परित आकृति को घुमाया जाता है, घूर्णन का केंद्र कहलाता है |
- एक आकृति के कई सममिति के कोण हो सकते हैं |
- कुछ आकृतियों की सममिति रेखा हो सकती है, परंतु ऐसा भी हो सकता है उनमें कोई सममिति का कोण न हों | जबकि यह भी संभव है कि कोण की सममिति हो लेकिन सममिति की रेखाएँ न हो | कुछ आकृतियों में सममिति कोण व सममिति रेखा दोनों हो सकते हैं |