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                                       अध्याय - 1     वस्तु  चित्रण



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शिक्षकों के लिए


कक्षा एवं संसाधन

1.  विद्यार्थियों को आराम से बैठने और कार्य करने के लिए पर्याप्त स्थान दें|
2.   कक्षा में पर्याप्त प्रकाश एवं वायु का आवागमन सुनिश्चित करें|
3.    यदि मौसम उपयुक्त हो, तो बाहर बैठने का विकल्प प्रदान करें|
4.    सामान्य कला सामाग्री एवं उपकरणों की व्यवस्था करें|
5.   कला सामग्री एवं विद्यार्थियों की कलाकृतियों को व्यवस्थित एवं सुरक्षित ढंग से संग्रहित करें|
6.   कला प्रदर्शन के लिए प्रदर्शन-पट्ट या बोर्ड लगाया जाए जिस पर कलाकृतियाँ नियमित रूप से बदली जा सकें|
7.   कला की समझ बनाने के लिए विद्यार्थियों को विशेष स्थलों तथा संग्रहालयों तक ले जाने की सुविधा प्रदान कीजिए| साथ ही विद्यालय में कला-कार्यशालाभों का भी आयोजनकीजिए| 8.    प्रासंगिक कलाकृतियों, चत्तचित्रों (फिल्मी) एवं अन्य कला स्रोतों को  दिखाने हेतु प्रोजेक्टर, कंप्यूटर, स्पीकर एवं अन्य  सुविधाएँ उपलब्ध कराएँ|

शिक्षण विधि

1.    विद्यार्थियों को अपने विचार, भावना एवं  जिज्ञासा व्यक्त करने हेतु प्रोत्साहित कीजिए| विद्यार्थियों की स्वाभाविक मौलिकता को उनकी कला में प्रतिबिम्बित होने दें|
2.   ऐसी गतिविधियों को प्राथमिकता दें, जो विद्यार्थियों को कक्षा में अन्वेषण, परीक्षण, प्रयोग एवं संवाद करने का अवसर प्रदान करती हों|
3.   विद्यार्थियों को बाहरी गतिविधियों, जैसे संग्रहालय, कला दीर्घाओं, कला स्टूडियो, स्थानीय बाग-बगीचे, मेलो, त्योहारों या पर्वो, बाजारों इत्यादि का भ्रमण करने का अवसर प्रदान                कीजिए| इससे विद्यार्थी अपने आस- पास के जीवन एवं संस्कृति का अनुभव ले पाएँगे|
4.    विद्यार्थियों के कार्य करके सीखने हेतु स्थानीय कलाकारों एवं शिल्पकारों को साक्षात्कार अथवा कार्यशाला (वर्कशॉप) के लिए आमंत्रित करें| 
5.   विद्यार्थियों को कार्य की समाप्ति के पश्चात सफाई करने, उपयोग की गई सामग्री उचित स्थान में वापस रखने, उनकी देखभाल एवं रख-रखाव करने की   सरल आदतें अपनाने के          लिए प्रेरित करें|
6.   बनाई हुई कलाकृतियों के चयन एवं प्रदर्शन में विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करो
7.     विद्यार्थियों की स्वतः अभिव्यक्ति के विकास हेतु   श्याम  पट्ट (ब्लेक बोर्ड) अथवा पुस्तिका में किसी भी आकार को पहले से  चित्रित  ना करें|
8.     चित्रों को बनाते समय विद्यार्थी कला के विभिन्न तत्वों- आकार, स्वरूप, रंग, मूल्य, बनावट, स्थान इत्यादि का निरीक्षण करते हुए संज्ञान लें| 
9.   'अभ्यास करें' शीर्षक के अंतर्गत, जो गतिविधियाँ दी गई हैं वे अभ्यास का ही विस्तृत रूप है और उन्हें विद्यालय के पश्चात   घर   जाकर भी किया जा सकता है|


              

अध्याय 1   वस्तु-चित्रण

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प्रथम अध्याय में आपका स्वागत है, जहाँ आपकी कलात्मक दृष्टि, वस्तुओं एवं वस्तु-चित्रण के माध्यम से एक कहानी व्यक्त करती है| इस अध्याय में आप वस्तु-चित्रण में जीवंतता प्रदान करना सीखेंगे|

कैसे?

  • उनसे जुड़ना सीखकर
  • उनसे संबंधित कहानियों की रचना करके रचनात्मक सृष्टि का अवलोकन करके
  • उन पर पड़ने वाले प्रकाश और उससे उत्पन्न होने वाले रंग और छाया का अवलोकन करके 
  • भले ही वे किसी बिंदु से अलग दिखाई दें, परंतु अन्य दृष्टिकोण से वे कैसे आपस में लीन हो जाते हैं|

प्रत्येक चित्र आपके अवलोकन को अधिक गहन बनाएगा और आप अपने आस-पास की वस्तुओं को जैसा देखते हैं, उन्हें वैसा ही चित्रित कर पाएँगे|  प्रत्येक गतिविधि आपके द्वि-आयामी आकार पहचानने के कौशल को निखारेगी|  आप समझ पाएँगे कि त्रि-आयामी आकृति बनाने के लिए वस्तुओं में किस प्रकार गहराई का आभास उत्पन्न किया जाता है| आपको यहाँ 'फ्लिपबुक' बनाने जैसी रोमांचक  गतिविधियाँ भी मिलेंगी| इसलिए आप अपनी रचनात्मकता को जागृत करने और कलात्मक प्रतिभाओं को निखारने के लिए तैयार हो जाइए|

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विक्रिन्न  वस्तुओं को दर्शाती हुई एक विद्यार्थी की कलाकृति


गतिविधि 1- अपने परिवेश की विभिन्न वस्तुओं का अन्वेषण कर उन्हें चित्रित कीजिए

अपने आस-पास देखकर विभिन्न वस्तुओं का अवलोकन कीजिए| प्रत्येक वस्तु किस सामग्री से बनी है? रुके और विचार कीजिए कि वे एक विशेष आकार की ही क्यों हैं? क्या उनके आकार और रूप के पीछे कोई कारण है? वस्तुओं के आस-पास के स्थान का भी अवलोकन कीजिए| इधर-उधर घूमें और वस्तुओ को अलग-अलग दृष्ट कोणों से देखिए| कुछ समय के अवलोकन के उपरांत दो या तीन वस्तुएँ चुनिए, जिन्हें आप चित्रित करना चाहते हैं|

गतिविधि 2- वस्तुओं को विभिन्न प्रकार से चित्रित कीजिए

प्रत्येक व्यक्ति अलग-अलग ढंग से चित्रण करता है| यह उनके भावों को एक अनोखा स्वरूप देता है| यहाँ कुछ विचार दिए गए हैं, जिनकी सहायता से आप प्रयास कर सकते हैं-

1. एक निरंतर रेखा का उपयोग करके कोई वस्तु बनाएँ| इसका अर्थ है कि आप वस्तु का चित्रण करते समय कागज से अपनी पेंसिल नहीं उठा  सकते| अपने सहपाठियों से पूछें कि क्या वे इस चित्र से वस्तु को पहचान सकते हैं?

2. आप वस्तु के अलग-अलग भागों को चित्रित कर सकते हैं| उदाहरण के लिए, पानी की बोतल बनाते समय प्रत्येक भाग (ढक्कन, बोतल, इत्यादि) को अलग-अलग प्रकार से चित्रित कीजिए| उनके अनुपातों में अंतर पर ध्यान दीजिए|

3. एक ही वस्तु को तीन अलग-अलग कोणों से चित्रित करने का प्रयत्न कीजिए| अपनी जगह बदलें या वस्तु की जगह में बदलाव कीजिए| आप वस्तु को धरातल पर रख सकते हैं या उसे लटका भी सकते हैं| तीनों कोणों से तीन चित्र बनाने के बाद, उन्हें अपने सहपाठियों के साथ साझा कीजिए| उनसे पूछिए कि तीनों कोणों में से उन्हें कौन-सा कोण सबसे रोचक लगता है?

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वस्तुओं  को विभिन्न प्रकार से चित्रित  करते  हुए  विद्यार्थी


पहेली

बताओ में कौन हूँ?

जहाँ तुम जाओ, वहाँ मुझे पाओ|

न मेरा कोई आकार, न ही कोई रूप|

आप मुझे देख तो सकते,   किन्तु छू नहीं सकते|

बताओ मैं कौन हूँ?

पहेली का उत्तर ---  छाया


 अभ्यास करें

अलग-अलग पदार्थों (लकड़ी, धातु, मिट्टी, प्लास्टिक, कपड़ा इत्यादि) से बनी कुछ घरेलू वस्तुओं के चित्र बनाएँ| इन्हें किसी प्रकाशित स्थान में रखें| उनके आकार का बाह्य रेखाचित्र बनाने के पश्चात छाया और प्रकाश वाले क्षेत्रों पर ध्यान दें| छाया के रंग एवं आकार पर ध्यान दीजिए और उन्हें भी अपने चित्र में सम्मिलित कीजिए|

गतिविधि 3- प्रकाश और छाया

अपने सामने भिन्न-भिन्न वस्तुओं को रख लीजिए |

  • प्रत्येक वस्तु के आकार, रंग, छाया और उन पर पड़ने वाले प्रकाश का अवलोकन कीजिए|
  • उनकी छाया की आकृति क्या है?
  • वस्तु के किस ओर छाया दिखाई दे रही है?

आइए, एक पेंसिल से कुछ प्रयोग करके देखिए| अपनी पेंसिल से एक लयबद्ध रेखा खींचे| रेखा बनाते हुए पेंसिल पर दिए गए दबाव को घटा-बढ़ा कर देखिए| क्या आप हल्के और गहरे रंग बना पाते हैं?

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                                                                                 छाया-प्रकाश प्रदर्शित करती हुई विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई कलाकृति

अभ्यास के पश्चात, एक नए कागज पर अपने समक्ष रखी वस्तुओं को चित्रित कीजिए| पेंसिल के माध्यम से वस्तुओं की रूपरेखा के भीतर हल्के से मध्यम और मध्यम से गहरा करते हुए रेखांकन कीजिए| वस्तु की छाया का निरीक्षण करें और इसे अपने चित्र में प्रदर्शित कीजिए |


क्या आप जानते है

   अमृता शेरगिल एक प्रसिद्ध आधुनिक भारतीय महिला कलाकार थी| उनका जन्म 1913 में हुआ था| उनकी माँ हंगरी से थी और उनके पिता भारतीय थे| उन्होंने पेरिस में कला का अध्ययन किया| जब वह 21 वर्ष की थीं, तो वह भारत लौट आई| उन्होंने अपने कैनवस, तेल रंग और ब्रश के साथ छोटे नगरों और गाँवों का भ्रमण किया| उनकी कलाकृतियों में गहरे मटमैले रंग हैं| वह भारतीय लोगों के साधारण जन-जीवन और स्थितियों को देखकर बहुत प्रभावित हुई और इन विषयों पर आधारित कलाकृतियाँ बनाई|b9

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अमृता  शेरगिल  की   चित्रकला   में  वस्तु - चित्रण

                        इन चित्रों में दिखाई देने वाली वस्तु उनकी व्यवस्था उन पड़ रहे प्रकाश और उससे उत्पन्न होने वाले रंग एवं  छाया के बारे में विचार-विमर्श  कीजिए |

गतिविधि -4   एक कलाकार की दृष्टि से

कलाकारों को वस्तुओं का अध्ययन करने का अभ्यास होता है| वे उन्हें एक समूह में व्यवस्थित करके रंग-चित्र, मूर्तियाँ और छाया-चित्रों के माध्यम से स्थिर वस्तु-चित्र (फोटोग्राफ) बनाते हैं| ऐसी कलाकृतियों को  वस्तु - चित्र (स्टिल लाइफ) कहा जाता है| वस्तु- चित्रण में, वस्तुओं के चयन और उन्हें कैसे व्यवस्थित किया जाए, इस पर बहुत विचार किया जाता है|  फूल, पौधे, सब्जियाँ, फल, खाद्य पदार्थ, कपड़े, उपकरण और अन्य घरेलू वस्तुएँ भी वस्तु-चित्रण में सम्मिलित है|

       आप सोचते होंगे कि इसे स्टिल लाइफ' क्यों कहा जाता है? यदि किसी वस्तु में जीवन नहीं है, जो क्या वह 'स्टिल लाइफ' होगी?

        "स्टिल लाइफ' या वस्तु-चित्रण कलाकृतियाँ ऐसी वस्तुओं को दर्शाती है जो स्थिर है और हिलती नहीं है| कलाकृति बनाने की प्रक्रिया में, वस्तुओं को एक नया 'जीवन' मिलता है| सुप्रसिद्ध कलाकारों के बनाए गए 'स्टिल लाइफ' अथवा वस्तु-चित्रण को देखिए और अपनी कक्षा में उन पर चर्चा कीजिए|

                    गतिविधि 5- स्वयं एक वस्तु-चित्र बनाएँ


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चार से पाँच विद्यार्थियों का समूह बनाएँ और एक गोलाई में बैठे| परिधि के केंद्र में दो से तीन  वस्तुएँ रखिए | बोतल, फल, धातु का ज्यामितिय प्रकार (कपास), लकड़ी का फुटा (रूलर), कपड़े का टुकड़ा या कोई भी ऐसी वस्तु जो भी आपको रुचिकर लगे, उन्हें आप चुन सकते हैं| अपने समूह में चर्चा कीजिए कि वस्तुओं को किस तरह भिन्न-भिन्न प्रकार से व्यवस्थित किया जा सकता है| वस्तुएँ एक-दूसरे को स्पर्श कर सकती हैं या आप उन्हें पृथक-पृथक भी रख सकते हैं| सुनिश्चित कीजिए कि धेरे में बैठा प्रत्येक विद्यार्थी वस्तुओं की व्यवस्था को स्पष्ट रूप से देख सके|

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जिन वस्तुओं का आप चित्रण कर रहे हैं उन पर ध्यान दें| उन्हें रेखांकित कर उनका वस्तु-चित्र बनाएँ|


b13गतिविधि 6- फर्नीचर का चित्रांकन


विद्यालय और घर में आप किस प्रकार के फर्नीचर देखते हैं? फर्नीचर की कोई भी दो या तीन वस्तुओं को देखिए और उनका चित्र बनाएँ| अपने चित्रों की तुलना वास्तविक वस्तुओं से कीजिए| आपके द्वारा खींची गई सीधी रेखाओं, कोणों और आकृतियों की तुलना वास्तविक वस्तु में उपस्थित सीधी रेखाओं, कोणों और आकृतियों से कीजिए|

 अपने बनाए वस्तु-चित्र में गहराई और त्रि-आयामी आभास लाने हेतु उनमें आवश्यक परिवर्तन कीजिए| इसे परिप्रेक्ष्य (Perspective) कहा जाता है| परिप्रेक्ष्य से वस्तु-चित्रण में एक  त्रि-आयामी आभास उत्पन्न होता है और वस्तु चित्र ऐसा प्रतीत होता है, जैसे वह हमारे सामने हो|

छोटे-छोटे समूहों में अपने सहपाठियों के कार्यों को देखें और विश्लेषण करें कि किसके कार्य में परिप्रेक्ष्य है| उन रेखाओं, आकृतियों और रूपों की पहचान करें, जो परिप्रेक्ष्य को दशनि में सहायक हों|

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अभ्यास कीजिए 

भवन के विभिन्न भागों, जैसे- दरवाजे, खिड़कियों, पाइप, नलके, पंखे, बत्तियाँ इत्यादि का अवलोकन कीजिए और उनका चित्र बनाएँ|

  गतिविधि 7- फ्लिप-बुक बनाएँ

कितना रोचक होगा, यदि आप अपने चित्रों में वस्तुओं को गतिशीलता प्रदान कर सकें| हम एक  फ्लिप-बुक की सहायता से ऐसा कर सकते हैं| फ्लिप-बुक बनाने के लिए निम्नलिखित निर्देशों का पालन कीजिए-

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चरण 1 एक A4 कागज को समान भागों में बॉट लीजिए| इन सभी को छोटी ओर से स्टेपलर का उपयोग करके एक साथ चिपका दीजिए| अब आपकी  फ्लिप-बुक तैयार हो गई है|

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चरण 2 क्लिप-बुक के अंतिम पृष्ठ के दाहिने किनारे के पास कोई एक वस्तु बनाएँ| पेंसिल की सहायता से अपनी इच्छानुसार उसमें अन्य विवरण  जोडिए जब आप अपने चित्र से संतुष्ट हो, तो उसे कलम से रेखांकित कर लीजिए|

चरण 3-6- अब आपके चित्र को गतिशीलता प्रदान करने का समय आ गया है| अंतिम पृष्ठ छोड़कर पहले वाले पृष्ठों पर रेखाचित्र दोहराएँ और चित्र की स्थिति में  थोड़ा-सा परिवर्तन अवश्य कर लीजिए| इस चरण को तब तक दोहराएँ, जब तक की सभी पन्नों पर  थोड़े से अंतर के साथ चित्र न बन जाए|

चरण 7- अपने अंगूठे की सहायता से फ्लिप-बुक को शीघ्रतापूर्वक पलटें| आप अपनी बनाई वस्तु को हिलते हुए देख पाएँगे|

अधिक गतिशीलता के लिए फ्लिप-बुक के पृष्ठों की संख्या बढ़ाएँ|