
अध्याय -2 प्रारुपी चित्र में बदलाव

यह अध्याय आपको प्रकृति के चमत्कारों में लीन कर देगा| आप जीवन के विविध रूपों में सुंदर आकार, रूप, रंग, समानाकृति और संरचना के अन्वेषण के लिए घर से बाहर निकलेंगे| आप रेखांकन एवं चित्रों की गतिविधियों के माध्यम से इन विवरणों का अभिलेखन करना सीखेंगे|
आप स्वयं के लिए प्राकृतिक रंग बनाने की आकर्षक प्रक्रिया के साथ-साथ रंग-आभा (Tint) बनाने की तकनीक भी सीखेंगे| यह अध्याय आपको रचनात्मक रूप से सोचने के लिए प्रेरित करेगा और सृष्टि को देखने के दृष्टिकोण में परिवर्तन लाएगा |

गतिविधि 1- प्रकृति भ्रमण
आप जब पेड़ों, पौधों, पहाड़ियों, नदियों, समुद्र और रेत से घिरे होते हैं, तो आपको कैसा लगता है? दो से तीन मिनट तक कल्पना कीजिए कि आप प्रकृति से घिरे हुए हैं| आप क्या-क्या देखते हैं? आप जब विभिन्न वस्तुओं का स्पर्श करते हैं, तो आपको कैसा अनुभव होता है? आप अपने पैरों के नीचे क्या अनुभव करते हैं? आप कितनी दूर तक देख सकते हैं? क्या कहीं कुछ है, जो हिल-डुल रहा है? आप किन ध्वनियों को सुन रहे हैं? चार से पाँच विद्यार्थियों का छोटा-सा एक समूह बना लीजिए| अपनी कल्पनाओं को आपस में साझा कीजिए| अपनी चित्र-पुस्तिका व पेंसिल लेकर आस-पास की वस्तुओं का अवलोकन करने घर से बाहर जाएँ|

1. आकाश की ओर देखें और इसकी विशालता का अनुभव कीजिए| आप जो भी रंग अथवा बादलों का आकार देख पा रहे हों, उन्हें एक जगह नोट कर लीजिए|
2. धरती को देखें| मिट्टी के रंग, विभिन्न प्रकार के पत्थर, कंकड़ और छोटी-बड़ी चट्टानों को देखें| उन्हें स्पर्श कीजिए और उनकी संरचना का अवलोक्न करें| क्या वे चिकने, खुरदरे, ऊबड़-खाबड़, दानेदार या किसी अन्य बनावट के हैं?
3. एक ऐसी जगह खोजें, जहाँ कुछ पेड़-पौधे हों| पौधे को सौम्यता से स्पर्श करें और उसकी पत्तियों, तनों, छालों, फूलों, बीजों की फलियों और जो कुछ भी आप देखते हैं, उसकी संरचना का अनुभव कीजिए | उन संरचनाओं को चित्रित करने का प्रयास कीजिए या शब्दों के माध्यम से उन्हें लिखिए|
4. पत्तियों के आकार और दिखाई देने वाली सभी रेखाओं और समानाकृतियों को ध्यान से देखिए| ऐसी तीन पत्तियों का रेखांकन कीजिए, जिनके भिन्न-भिन्न आकार, रेखाएँ और समानाकृतियाँ हों| उनके रंगों को शब्दों के माध्यम से लिखिए|
5. किसी भी पशु, पक्षी या कीड़े को ध्यानपूर्वक देखिए| क्या वे बैठे हैं, सो रहे हैं, खड़े हैं या हिल-डुल रहे हैं? उनके उस स्वरूप को रेखांकित करने का प्रयास कीजिए| एक समूह में एकत्र हों और अपने रेखांकन तथा अवलोकनों को साझा कीजिए |
अभ्यास कीजिए-
एक पत्रिका (विजुअल जर्नल) आरंभ कीजिए| आप प्रतिदिन देखी जाने वाली विभिन्न वस्तुओं के चित्र बनाएँ|
गतिविधि 2- अध्ययन यात्रा
किसी संग्रहालय, कलाकार की शिल्पशाला या किसी ऐसे स्थान पर जाएँ, जहाँ कलाकार कार्य कर रहे हों| निम्नलिखित प्रश्नों के आधार पर अपनी टिप्पणियाँ लिखिए-

1. आप किस प्रकार की दृश्य -कलाकृतियाँ देखते हैं?
2. कलाकृति निर्माण में किन-किन सामग्रियों का उपयोग किया जाता है?
3. क्या ये कलाकार हैं? वे कौन-से उपकरणों और तकनीकों का प्रयोग करते हैं?
4. कलाकृतियों की रचना और उन्हें प्रदर्शित करने हेतु किसी स्थान की व्यवस्था किस प्रकार की जाती है?
5. आपने कौन-से नए विचार व अनुभव प्राप्त किए?
अपने अनुभवों के आधार पर चित्र बनाएँ| आप इन चित्रों का संदर्भ के रूप में उपयोग कर सकते हैं|

गतिविधि 3--- प्राकृतिक रंग बनाएँ

क्या आपने कभी सोचा है कि रंग कहाँ से मिलते हैं? वे कैसे बनाए जाते हैं? आज हमारे पास तैयार डिब्बों में रंगीन पेंसिल, क्रेयोन और जल-रग उपलब्ध हैं, किंतु पहले कलाकार किन मध्यमों का उपयोग करते होंगे?
आप जो भोजन करते हैं, उस पर विचार कीजिए| जब घर में दाल बनती है, तो उसे अधिक पीला बनाने के लिए कौन-सी सामग्री मिलाई जाती है?
हल्दी !आप घर पर इसे अपनी भाषा में क्या कहते हैं?
अब, उन अन्य खाद्य पदार्थों पर विचार कीजिए, जिन्हें आपने खाया है| उनमें से कुछ का रंग आपकी अंगुलियों, आपकी जीभ और यहाँ तक कि आपके कपड़ों पर भी दाग छोड़ सकता है|
इसी प्रकार फूलों का उपयोग भी रंग निकालने और बनाने के लिए किया जा सकता है|
पौधों के अतिरिक्त मिट्टी, पत्थर और खनिज भंडार से भी रंग बनाए जा सकते हैं| कलाकार रंग बनाने की इन प्रक्रियाओं का उपयोग विभिन्न कलात्मक उद्देश्यों के लिए करते हैं||
अपने भोजन में पाए जाने वाले कुछ ऐसे फलों, सब्जियों, पत्तियों और जड़ों की सूची बनाएँ, जिन्हें पीसने अथवा पकाने से रंग बनाए जा सकते हैं|
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आइए, स्वयं के लिए प्राकृतिक रंग बनाना सीखें

चरण 1-मिट्टी, खनिज, सब्जी, फूल, फल, कोयला इत्यादि से कच्ची सामप्रियाँ प्राप्त कर लीजिए (चित्र में दिए गए कोयले व नीले 'लैपिस लजुली के पत्थर को देखें)
चरण 2- अशुद्धियों को दूर करने के लिए प्राप्त किए गए रंगद्रव्य को बारीकी से पीसकर छान लीजिए|
चरण 3-इसमें सही अनुपात में एक बंधक पदार्थ अथवा बाइंडर मिलाएँ |इससे रंगों को उस सतह पर चिकने में सहयोग मिलाता है, जहाँ चित्रण किया गया है| आरबी गोद (बबूल की छाल का रस), तेल, दूध, अंडे की जर्दी और अंडे की इत्यादि प्राकृतिक बंधक पदार्थ है|
चरण 4-कलाकृति पर तैयार किए गए रंग लगाएँ|
गतिविधि 4- प्राकृतिक रंगों से कलाकृति बनाएँ
चरण 1 - धरती अथवा पौधों से कुछ सामाग्री प्राप्त कर लीजिए|
चरण 2 - अपने शिक्षक और सहपाठियों के संग रंग तैयार करने की विधि पर चर्चा कीजिए तथा मिलकर रंग तैयार कीजिए|
चरण 3 -बनाए गए रंगों के कितने प्रकार हो सकते हैं, इस पर प्रयोग कीजिए|
चरण 4 - किसी एक रंग पर विचार कीजिए, जिसका आपकी कलाकृति में उपयोग किया जा सकता है?
चरण 5 - प्राकृतिक रंगों का उपयोग करके अपनी कलाकृति बनाएँ|
जब प्रत्येक विद्यार्थी की कलाकृति पूर्ण हो जाए, तब उन्हें कक्षा में प्रदर्शित कीजिए| अपनी-अपनी कलाकृतियों को शीर्षक प्रदान कीजिए और आपके द्वारा उपयोग की गई सामग्रियों का विवरण अंकित कीजिए|
आप अपनी कार्य-प्रक्रिया को दशनि वाले कुछ प्रारंभिक रेखाचित्रों या प्रयोगों को प्रदर्शित और साझा कर सकते हैं| प्रत्येक सहपाठी की कलाकृति में दिखाई दे रही प्रक्रिया और रंगों पर एक चर्चा कीजिए|
गतिविधि- 5 --- रंग-आभा अथवा ' टिंट- शेड ' का निर्माण
क्या रंग भी हमारी बदलती मनोदशा की भाँति बदल सकते हैं|
क्या आपने अनुभव किया है कि दिनभर में आपकी मनोदशा किस प्रकार परिवर्तित होती है| आप अपनी मनोदशा का स्मरण करते हुए उस पर पाँच मिनट चर्चा कीजिए ---

1. जब आप विद्यालय के उपरान्त घर जाते हैं तब आपकी मनोदशा कैसी होती है?
2. रात्रि भोजन के समय आपकी मनोदशा कैसी रहती है?
3. सोने से पहले आपकी मनोदशा कैसी रहती है?
4. जब आप सुबह उठते हैं, तब आपकी मनोदशा कैसी रहती है? T
5. अभी इस समय आपकी मनोदशा कैसी है| मनोदशाएँ और अनुभूतियाँ क्षणिक होती है समय के साथ परिवर्तित होती रहती हैं| किसी का अनुभव कठोर, तीव्र या कोमल हो सकता है|
रंग भी ऐसे ही होते हैं| हम उन्हें जीवंत,तीव्र,गहरा,हल्का,मृदु आदि बना सकते है|

विचार कीजिए सूर्यादय व सूर्यास्त के समय आकाश में रंग किस प्रकार बदलते हैं?
धुर एवं नियमित धुलाई के कारण क्या आपने अपने कपड़ों के रंगों को क्षीण होते हुए देखा है| कुछ समय के बाद वे उजले से फीके या फिर गहरे से हल्के रंगों के हो जाते हैं|
चित्रकला में रंगों के इन अंतरों को टिंट और शेड कहा जाता है| हम किसी रंग का टिंट उसमे सफेद रंग मिलाकर बना सकते हैं| उसी प्रकार किसी रंग में काला रंग मिलाकर उसका शेड़ बनाया जा सकता है|
रंग +सफेद = रंग टिंट
रंग +काला = रंग शेड
आइए, अभ्यास कीजिए!
सामग्री- चित्र बनाने और उसे रंगने के लिए सादा कागज, जल-रंग, पोस्टर रंग, चूर्ण या पाउडर रंग काला, सफेद तथा दो-तीन अन्य रंग|
विकल्प- पुराने समाचार पत्रों या पत्रिकाओं से रंगीन पन्ने निकाल लें और पन्ने की पच्चिकारी या मोबाइक बनाने के लिए विभिन्न शेड और टिंट ढूँढ़ें|

रंगो से टिंट या शेड बनाना
प्रकृति की रंग-पट्टिका अथवा पैलेट
प्रकृति में रंगों की विविधता को देखकर क्या आपको कभी आश्चर्य हुआ है?
बाहर निकले और तीन ऐसी पत्तियाँ लाएँ, जो विभिन्न रंगों या शेड्स की हो| आपको, जो भी निकटतम शेड दिखाई दे, उसे प्राप्त करने के लिए विभिन्न रंगों को मिलाने का प्रयास कीजिए|
विस्तार- टिंट और शेड का संयोजन
आपके द्वारा बनाई गई रंग-आभाओं और शेड्स को संदर्भ के रूप में उपयोग कीजिए| किसी संग्रहालय की वेबसाइट या सचित्र पुस्तकों से ऐसी कुछ कलाकृतियों के चित्र ढूँढें जिनमें आपके द्वारा बनाई रंग-आभाएँ अथवा शेड्स उपस्थित हों| अवलोकन करें कि कलाकृतियों की रंग-आभा या शेड्स किस प्रकार हमारी भावनाओं और मनोदशाओं में बदलाव लाती हैं| इस अभ्यास को 4 से 5 भिन्न-भिन्न रंगों और उनकी रंग-आभाओ और शेड्स के साथ दोहराएँ| आपने मनोदशाओं और भावनाओं का अनुभव, रंग-आभाओं और शेड्स के साथ किया है, उनका एक संक्षिप्त विवरण लिखिए|

गतिविधि 6---- कलाकारों के द्वारा उपयोग की जाने वाली सतहें और सामग्रियों
आप जानते हैं कि प्रकृति से रंग बनाए जाते हैं| कागज के आविष्कार से पहले कलाकार प्राकृतिक सतहों, जैसे- चट्टानों, गुफाओं की दीवारों, मिट्टी के पलस्तरों, ताड़ के पत्तों, लकड़ियों और कपड़ों पर चित्र बनाते थे|
विभिन्न त्रि-आयामी वस्तुओं और मूर्तियों को तैयार करने के लिए टेराकोटा, पत्थर, पशु की हड्डी और चमड़ी, लकड़ी, धातु और प्राकृतिक तंतुओं का उपयोग किया जाता था|
प्रत्येक सामग्री और विभिन्न सतहों के साथ कार्य करने के लिए विशेष उपकरणों एवं तकनीकों का विकास किया गया|

यदि आपके पास कागज उपलब्ध न हो, तो आप अपनी कलाकृति बनाने के लिए किस सामग्री और सतह का चयन करेंगे? स्वयं प्रयोग कीजिए और अपनी कलाकृति बनाएँ|
निम्नलिखित उदाहरणों को देखो आप प्रागैतिहासिक काल से कलाकारों के द्वारा उपयोग की जाने वाली विभिन्न प्रकार की सामग्रियों और सतहों के विषय में जान सकते हैं|


गतिविधि 7- प्रकृति से प्रेरणा
आप जानते हैं कि कलाकार अपने परिवेश का सूक्ष्मता से अवलोकन करते हैं और सूक्ष्म विवरणों का अंकन करते हैं| प्रत्येक कलाकार की अपनी एक कल्पना होती है| वे व्यक्तिगत रूप से स्वयं उपयोग की जाने वाली सामग्रियों, उपकरणों और तकनीकों का चयन करते हैं| यही बात उनके कार्य को अनोखा बनाती है|
एक कलाकार के समान आप भी अपनी कल्पना का उपयोग कर कलाकृति बना सकते हैं| आप ऐसी सामग्री और उपकरण चुनें, जो आपके अपने विचारों के लिए उपयुक्त हो| प्रकृति आपकी प्रेरणा है और आप निर्माता हैं| अपनी कलाकृति में स्वयं के अनुभव और अवलोकन सम्मिलित कीजिए|

इनमें पर्वत, नदी या सूर्य होना आवश्यक नहीं है| आप तय कीजिए कि वह क्या है, जो आपके लिए प्रकृति का प्रतिनिधित्व करता है| यह आपके निकटतम परिवेश की वस्तु हो सकती है| याद रखिए, चित्र आपकी दृष्टि और अभिव्यक्ति पर आधारित होना चाहिए|
