Skip to content

                                                                                                                                                                                                                u1 

अध्याय-6                 संगीत एवं  भाव



u2


शिक्षकों के लिए


संगीत में भावनाओं को व्यक्त करने, सहयोग एवं आत्म अभिव्यक्ति के गुण प्रचुर मात्रा में हैं| इस पुस्तक का उद्देश्य विद्यार्थियों में संगीत के प्रति रुचि को बढ़ाना और उनको मौलिक कौशल सिखाना है| पुस्तक में दिए गए गीतों और गतिविधियों को प्रस्तुत करना रोचक होगा, जिससे हमारे विद्यार्थी, विशेष रूप से प्रारंभिक चरणों में, केवल परिणाम पर ध्यान केंद्रित न करके उत्साहपूर्वक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए भी सक्षम होंगे|

1. घर पर अभ्यास करने से गायन, वाद्य बजाने, संगीत सुनने एवं रचना करने आदि की क्षमता का विकास होता है| उनमें तुरंत अनुकरण करने की क्षमता भी विकसित होती है|


2. विद्यार्थियों को संगीत समारोह में ले जाकर अथवा किन्हीं माध्यमों से प्रसारित हो रहे संगीत को सुनाना चाहिए|


3. किसी संगीत कलाकार को विद्यालय में आमंत्रित कीजिए और विद्यार्थियों को  कलाकार से प्रश्न पूछने और चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित कीजिए| 

4. त्योहारों और सांस्कृतिक अनुष्ठानों से बच्चों को विशेष लगाव होता है| इसी  कारण उनको अपने घर-परिवार में गाए जाने वाले किसी भी गीत को प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित कीजिए|

5. हमें अपने दैनिक जीवन में अलग-अलग जगहों से अलग-अलग तरह के संगीत सुनने के अवसर मिलते हैं| विद्यालयों में प्रत्येक कक्षा के समय को विभाजित करने के लिए घंटी बजाने के प्रावधान के विपरीत किसी धुन को बजाकर उनका ध्यान आकर्षित करना चाहिए|

6. इस इकाई में अनेक प्रकार की गतिविधियाँ दी गई हैं| आप अपने अनुसार इनमें विविधताएँ ला सकते हैं और नई चीजें जोड़ सकते हैं|

7. पुस्तक में दिए गए कई गीत और गतिविधियों को पूर्ण रूप से समझने के लिए एक ऑडियो और वीडियो का संसाधन दिया गया है, जिसको आप साथ में दिए गए क्यू.आर. कोड को स्कैन करके देख सकते हैं|


इस संगीत पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य, आप और आपके विद्यार्थियों को संगीत की आनंददायी यात्रा का अनुभव कराना है| हमारा लक्ष्य है कि हम प्रत्येक बच्चे के अंदर संगीत के प्रति आजीवन प्रेम को जगा पाएँ, ताकि भविष्य में वे एक अच्छे श्रोता बन सकें और अच्छे संगीत को सराहने की क्षमता उनमें उत्पन्न हों| इस तरह संगीत के इस प्रयोग को कक्षाओं के बाहर भी किया जा सकता है|

कक्षा के लिए संसाधन

1. कक्षा एक ऐसे स्थान पर होनी चाहिए, जहाँ संगीत शिक्षा मनोरंजक और सुविधाजनक हो| विद्यार्थियों एवं शिक्षक दोनों को ही बैठने और साथ में गाने की सुविधा हो| भूमि पर बैठकर संगीत का अभ्यास करना सबसे श्रेष्ठ होता है| इससे बच्चों में बैठने का सही ढंग विकसित होता है और वे श्वास लेने की प्रक्रिया को समझ पाते हैं, जो योग से जुड़ा महत्वपूर्ण व्यायाम है| शिक्षक इस बैठक प्रक्रिया को किसी गीत के विषय के अनुसार बदल भी सकते हैं| इससे कक्षा में रोमांचकता और रचनात्मकता बढ़ेगी, जिससे विद्यार्थियों में भी विविधता के कौशल का विकास होगा|

2. कंप्यूटर के साथ इंटरनेट की व्यवस्था, ई-तानपूरा और ऑडियो संसाधनों के लिए स्पीकर का प्रावधान होना चाहिए |

3. कक्षा में सरल वाद्ययंत्र बनाने की सामग्री की व्यवस्था होनी चाहिए |

4. विद्यालय में प्रदर्शन के लिए माइक्रोफोन, संगीत प्रस्तुतीकरण के लिए ध्वनि-प्रणाली की व्यवस्था होनी चाहिए|

5. हारमोनियम, ढोलक, मंजीरा, शेकर्स (झुनझुना), तैमबोरीन, माउथ-ऑर्गन, ई-तानपूरा, तबला इत्यादि जैसे वाद्यों का प्रावधान होना चाहिए|

6. भारत का मानचित्र विद्यार्थियों को उन राज्यों का वह स्थान दिखाने के लिए उपयोगी सिद्ध होगा, जहाँ से विभिन्न भाषाओं की विभिन्न रचनाएँ सृजित और प्रचलित हुई हैं|


u3संगीत एवं भाव


उद्देश्य - संगीत के किसी अंश को सुनकर यह समझना कि वे किस प्रकार मनोदशा और भावना को प्रभावित करते हैं और संगीत के माध्यम से अपने विचारों और भावनाओं का प्रकट करना सीखना |


शिक्षकों के लिए
यहाँ दिया गया मलयालम गीत बच्चों को यह समझाने के लिए एक उदाहरण है कि संगीत में भाषा और गीत के बोल को समझे बिना भी उसकी मधुरता और लय से भाव प्रकट किए जा सकते हैं| इस विषय को विस्तार से समझाने के लिए आप ऐसी ही किसी अन्य भाषा के गीत को प्रस्तुत कर सकते हैं|

गतिविधि 1- इस गीत को सुनें

भाषा- मलयालम

कुट्टनंदन पुन्जयीले 

कोचू पेन्ने कुईलाले 

कोड्डू वेनम कुञ्हल वेनम,
 कुरवा वेनम कुट्टनंदन पुन्जयीले, थिथई थाका थेईथेई थोम


u4
कोचूपेन्ने कुईलाले  ,थीथी थारा थेई थोम 
कोडू वेनम कुञ्हल वेनम, कुरवा वेनम 
(ओ.. थीथीथारा थिथिथई थिथई थाका थई थोम) × 4 
वरावेल कनारू वेनम कोड़ी थोरानंगल वेनम 
विजयश्री लाली थरई वरुन्नु न्जंगल
 (ओ... थीथीथारा थिथिथई थिथई थाका थई थोम) × 4 
करुथा चिराकू वाचू थिथई थाका थई थई थोम

अरयन्ना किलिपोले थिथिथारा थेई थोम 
कृता चिराकू वेचोर अरयन्ना किलिपोले 
कुथिचु कुथिचु पायुम कुथिरा पोले 
(ओ... थीथीथारा थिथिथई थिथई थाका थई थई थोम) × 4

गतिविधि 2- संगीत और हमारी स्मृति

संगीत में हमारे विचारों और भावनाओं को बदलने और प्रभावित करने की शक्ति होती है| संगीत सुनने व संगीत की रचना से हमें आनंद की अनुभूति होती है|

  • जो गीत बजाया गया उससे आप किन भावनाओं को जोड़ते हैं?
  • आपके पास कोई ऐसा गीत है, जो पुरानी यादें ताजा कर देता है? उस गीत को गाएँ|
  • उनके बोल अगर याद ना भी हो, क्या आप उनके मधुर स्वर को गुनगुना सकते हैं?



कई बार मनुष्य किसी गीत को सुनकर पुरानी घटनाओं और उनसे जुड़े लोगों की यादों को ताजा कर सकते हैं| इसी को संगीत-प्रेरित स्मृति' कहते हैं|


उन्हें गाएँ!

विज्ञापनों के साथ बजने वाले विभिन्न तरह के संगीत को सुनिए और इस पुस्तक या कंप्यूटर पर उनकी एक तालिका बनाएँ|

अपने माता-पिता या घर के बड़ों से उनके बचपन के किसी प्रिय गीत के बारे में पूछें| वे इन गीतों से किन स्मृतियों को जोड़ते हैं?


निम्नलिखित सारिणी में आपको याद आने वाला कोई ऐसा मधुर गीत लिखिए|

..
एक त्योहार का गीत .
...........................................................................

................................................................................

.......................................................................................




........................................................................

...........................................................................

.............................................................................




गतिविधि 3- सुनिए और अनुभव कीजिए


प्रातः से सांय काल तक हम विभिन्न प्रकार के संगीत से घिरे रहते हैं| प्रिय विद्यार्थियो, जब आप विभिन्न प्रकार की संगीत ध्वनियाँ सुनते हैं, तो आपके मन में क्या भावनाएँ आती हैं? उन पर विचार कीजिए| शहनाई, नागस्वरम्, ढोल, डमरू, इडाइक्का की ध्वनि या किसी मधुर गीत की ध्वनि को याद कीजिए| इनकी मधुरता को सुनते समय आप क्या अनुभव करते हैं? क्या वे आपको प्रसन्न करते हैं, आपको नृत्य करने के लिए प्रेरित करते हैं, शांति की भावना पैदा करते हैं, जिसका आप एकांत में आनंद लेना चाहते हैं, या क्या वे आपको साथ में गाने के लिए विवश करते हैं? इन मधुर ध्वनियों को सुनकर आपके जीवन में भाव आते हैं, उन्हें भावनाएँ कहा जाता है| भावना सभी मनुष्यों में निहित एक प्राकृतिक गुण है| आइए, कुछ वाद्ययंत्र सुनकर भी ऐसा ही अनुभव करें| इन सांगीतिक अंशों को सुनते समय आपको क्या अनुभव हुआ, अपनी भावनाएँ लिखें-

1. .....................................................................

2. .....................................................................

3......................................................................

इन सभी सांगीतिक अंशों को एक ही वाद्ययंत्र से बजाया गया है -- वायलिन

u5
वायलिन



जिस तरह आप अपने कंठ की ध्वनि से किसी भावना को अभिव्यक्त कर सकते हैं- जैसे कि खुशी, उदासी, प्रबल और मृदु, ठीक उसी प्रकार एक वाद्ययंत्र भी किसी भी भाव को अभिव्यक्त करने में सक्षम होता है|

आपने वायलिन की ध्वनि को सुना| अब आप भारत में प्रचलित अन्य वाद्ययंत्रों को भी सुनने का प्रयास कीजिए| उदाहरण के लिए, बाँसुरी, सितार, शहनाई, तबला आदि और इन सभी वाद्ययंत्रों की विशेष ध्वनि को समझने का प्रयास कीजिए और साथ ही यह भी समझे कि किस प्रकार भिन्न-भिन्न ध्वनियों के माध्यम से भिन्न-भिन्न भावनाओं का जन्म होता है|

गतिविधि 4- संगीत का चित्रांकन

अभी तक हम यह पढ़ रहे थे कि संगीत का प्रत्येक अंश एक कहानी बताता है| अभी हम एक दूसरा प्रयोग करते हैं| संगीत के इस अंश को सुनिए और इसे अपनी कला के माध्यम से दर्शाए| आप चित्र बनाने के लिए रंगीन पेंसिल, कलम या रंगों का भी प्रयोग कर सकते हैं| चित्र को एक शीर्षक दीजिए|

u6

.











u7


गतिविधि 5-- संगीत के माध्यम अपनी भावनाओं को व्यक्त करें 


शिक्षकों के लिए

आप कक्षा को समूहों में विभाजित कर सकते हैं और प्रत्येक समूह को किसी भी पाठ्यक्रम से एक विषय या प्रसंग दे सकते हैं| निर्धारित समूहों को लय या स्वरों की मधुरता के माध्यम से अपने विचार संगीतमय ढंग से प्रस्तुत करने होंगे| अगले पृष्ठ की गतिविधि 6 के अंतर्गत बताई गई ध्वनि के उतार-चढ़ाव और गतिशीलता का भी प्रयोग कर सकते हैं| सुझाए गए विवरण का प्रयोग कीजिए या शिक्षार्थी अपने कथानक को भी प्रस्तुत कर सकते हैं|




क्या आप शब्दों के बिना अपने शरीर द्वारा इन भावनाओं को संगीत के माध्यम से व्यक्त कर सकते हैं|

जब आप क्रोधित होते है, तब आप क्या करते हैं? जब आपको खुशी होती है, तब आप क्या करते हैं? जब आप दुखी होते हैं, तब आर क्या करते है?

आप अपने कंठ के स्वर या अपने शारीरिक ताल बाद्य (ताली, पैर के थाप ,चुटकी बजाकर या श्वासा) में इन्हें व्यक्त कर सकते हैं|




दृश्य |

मैं हमारे विद्यालय की आगामी अध्ययन यात्रा के लिए उत्साहित हूँ| बाहर चिड़ियों की चहचहाहट को सुनते हुए मैंने अपने कमरे में खड़े होकर अलमारी में कपड़े टटोले| विभिन्न पोशाकों को पहनकर देखने के पश्चात उपयुक्त पोशाक मिल सकी| "हाँ! वह यही है!" मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा| मैं जंगल को देखने के लिए तैयार हूँ|

दृश्य 2

बस की लंबी यात्रा के बाद हम अंततः अपने गंतव्य पर पहुँच ही गए| जैसे ही हम सफारी जीप पर चढ़ने की तैयारी करते हैं, शीतल पवन चलने लगती है, जिससे पेड़ के पत्ते आपस में फुसफुसाने और नाचने लगते हैं| पेड़ भी होले-होले झूमने लगते हैं|

दृश्य 3

हम जैसे-जैसे जंगल के अंदर पहुँचते गए, विभिन्न प्रकार के जीव और पौधे दिखने लगे| जंगल में जीवन का स्पंदन था, जो कीड़े-मकोड़ों की भिनभिनाहट, चिड़ियों के चहचहाहट और पशुओं की ध्वनि से गतिशील था|




विस्तारित गतिविधि


जातक कथा या पंचतंत्र से किसी क्षेत्रीय लोक कथा का वर्णन करें| कथा को संगीत या गीत का प्रयोग कर रोमांचक बनाएँ, ताकि कहानियों को जीवंत बनाया जा सके|

गतिविधि 6- सांगीतिक तत्वों को जानें


ध्वनि का उतार-चढ़ाव और गतिशीलता

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि आप अपनी प्रसन्नता, क्रोध या दुःख को जताने के लिए कंठ स्वर के अलग-अलग ध्वनि के उतार-चढ़ाव व तीव्रता का प्रयोग करते हैं? ध्वनि के उतार-चढ़ाव और गतिशीलता के माध्यम से हम अपने अंदर की भावनाओं को व्यक्त करते हैं| ध्वनि के उतार-चढ़ाव और गतिशीलता से हमें संगीत में प्रयुक्त हुई तीव्रता या कोमलता के बारे में पता चलता है|

लय

हमारे चारों ओर लय विद्यमान है| क्या आपने कभी देखा है कि आपके चलने की लय आपके दादा-दादी से अलग है? संगीत में लय एक रूपरेखा के समान है, जो गीत के साथ बजने वाले ताल को गति देती है!

स्वर गीत

वीडियो को देखें और स्वर गीत को गाएँ| यह गीत रागम शंकरभरणम अर्थात राग बिलावल पर आधारित है| गीत को गाते समय स्वर के उतार-चढ़ाव की भिन्नता पर ध्यान दीजिए| लय बनाए रखने के लिए अपने हाथों का प्रयोग कीजिए|

u9नक्कारा

                                                                                                     घुमट


ऊपर दिए गए वाद्ययंत्रों की तारता भिन्न है| नक्कारा की ध्वनि तीव्र होती है, वहीं घुमट की प्रतिध्वनि मंद होती है|


क्या आप जानते हैं?

पशुओं में भी हमारी तरह ही भावनाएँ होती हैं| क्या आपने कभी अनुभव किया है कि पशु-पक्षी ध्वनि के माध्यम से एक-दूसरे से संवाद करते हैं| पक्षी अपनी चहचहाहट से आपस में बातचीत करते हैं| गंगा नदी में पाया जाने वाला भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव, सूंस (डॉल्फिन) अंधी होती है और ये आपस में संवाद करने के लिए सीटी और चुटकी बजाने जैसी मिश्रित ध्वनियों का प्रयोग करती हैं| क्या आपने कभी देखा है कि जानवर ध्वनियों के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं? कुछ उदाहरण साझा कीजिए|

u8






क्या आप जानते हैं?


सात स्वरों में केवल पाँच स्वरों का रूपांतर संभव है| सा और प के भिन्न प्रकार न होने के कारण इन्हें अचल स्वर कहा जाता है और शेष पाँच स्वर-रे, ग, म,ध, नि को चल स्वर कहते हैं, जिनके दो-दो प्रकार होते हैं|



हिन्दुस्तानी कर्नाटक
सा
सा
सा
रे रे री
दी
नी नी नी



 आइए, जानते हैं कर्नाटक और हिदुस्तानी संगीत शैलियों में गाए जाने वाले 12 स्वरों के  नाम |
                                                                                                       
   हिंदुस्तानी संगीत

सा-षडज

रे-ऋषभ

कोमल ऋषभ,

शुद्ध ऋषभ

-गंधार

कोमल गंधार,

- मध्यम
शुद्ध मध्यम,
तीव्र  माध्यम

प-पंचम

-धैवत

कोमल धैवत,

शुद्ध धैवत

नी -निषाद

कोमल निषाद,

शुद्ध निषाद
:



कर्नाटक संगीत

सा-षड्जम

री-ऋषभम

शुद्ध ऋषभम,
चतुश्रुति ऋषभम

- गंधारम

सादारण गंधारम,

अंतरा गंधारम

-मध्यमम

शुद्ध मध्यमम ,

प्रति मध्यमम


- पंचामम


- दैवतम


शुद्ध दैवतम,


चतुश्रुति दैवतम



नी- निषाधम

कैसिकी निषाधम

काकली  निषाधम




फिल्म संगीत, भजन, क्षेत्रीय गीत, लोक संगीत, वाद्ययंत्र से निकलने वाली स्वरों की मधुरता, ये सभी संगीत के स्वर सा रे ग म प ध नी के संयोजन से बनते हैं|         भारतीय संगीत में कई शैलियाँ विद्यमान हैं, जिनमें शास्त्रीय संगीत, जैसे- हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत के साथ-साथ लोक, उपशास्त्रीय, भक्ति, देशभक्ति और फिल्म संगीत भी सम्मिलित हैं|

गतिविधि 7- कंठ अभ्यास


नीचे दिए गए स्वरों के प्रतिमान को अलंकार या सरगम कहते हैं|

अलंकार का अर्थ होता है, 'सज्जा या आभूषण'| जिस तरह आभूषणों को सोने या कीमती पत्थरों से बनाया जाता है, ठीक उसी तरह सात स्वरों को बुनकर, श्रुति-मधुर धुन या स्वरों के समूह तैयार किए जाते हैं| सभी प्रकार के संगीत का मूल उद्देश्य श्रुति मधुर होना है, जो कानों को मनोहर लगे|


1.

सारे रेग गम मप पध धनी नीसां सांनी नीध धप पम मग गारे रेसा




2.

सारेग रेगम गमप मपध पधनी धनीसां सांनीध नीधप धपम पमग मगरे गारेसा



3.

सारेगम रेगमप गमपध मपधनी पधनीसां सांनीधप नीधपम धपमग पमगरे मगरेसा



4.

सारे

सारेग

सारेगम

सारेगमप

सारेगमपध

सारेगमपधनी

सारेगमपधनीसां





सांनी

सांनीध

सांनीधप

सांनीधपम

सांनीधपमग

सांनीधपमगरे

सांनीधपमगरेसा




5.

साग रेम गप मध पनी धसां

सांध नीप धम पग मरे गसा





6.

साम रेप गध मनी पसां

सांप नीम धग परे मसा






क्या आप जानते हैं?


u10


एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी एक विख्यात और प्रेरक कालजयी कर्नाटक गायिका रही हैं| वह पहली संगीतकार थीं, जिनको भारत सरकार ने 'भारत रत्न' की उपाधि से सम्मानित किया था| कर्नाटक संगीत के अतिरिक्त उन्होंने कई भजन और संस्कृत श्लोक भी गाए| उनमें से 'हरी तुम हरो' और 'वैष्णव जन तो' गांधीजी के प्रिय भजन थे| वे अपनी मौलिक, सादगी भरी और शुद्ध गायकी के लिए जानी जाती हैं| वे अपने जादुई कंठस्वरों के साथ आजीवन गाती रहीं, जिसमें सदैव भक्ति का स्रोत मिलता था|



गतिविधि 8- मेडले


जब कई गीतों को या उनके स्वर-संयोजन को मिश्रित कर एक गाने के स्वरूप में, मनोरंजन के रूप में गाया जाए, उसे हम मेडले कहते हैं| आइए, हम आंनद लें|

1. प्रत्येक गीत से व्यक्त होने वाले भाव को समझने का प्रयास कीजिए| चाहे आप उनकी भाषा को न समझें किंतु क्या आप उनकी सांगीतिक विशेषताओं के माध्यम से भावों को समझ पा रहे हैं?

2. इन अंशों की लय को सुनकर आपके मन में क्या विचार आते हैं?

3.  इन गीतों की सांगीतिक विशेषताओं को पहचानें |
u12
थविल, पुंगी, चिमटा, गिटार आदि के साथ गाना गाया जा सकता है|

आइए, एक मेडले गाना सीखें

मेडले या उसमें प्रयोग किए गए कुछ गीतों को याद करें| कक्षा को समूहों में विभाजित किया जा सकता है| प्रत्येक समूह इस मेडले का एक अंश प्रस्तुत कर सकता है| भारत के विभिन्न क्षेत्रों के उत्साहपूर्ण गीतों को चुनकर इस मेडले को बुना गया है| खुशी से झूमें और गाते समय लय को दर्शाएँ!

t1
किसी भी मेडले को "कराओके" के साथ गाना सीखें|

क्या आप जानते हैं?


भारतीय सिनेमा जगत में, भारत रत्न लता मंगेशकर, देश की सबसे प्रसिद्ध पार्श्व गायिका थीं| उन्होंने 36 भारतीय भाषाओं में व कुछ विदेशी भाषाओं में भी गाने रिकॉर्ड किए थे| उनके सुरीले कंठ की पहुँच तीनों सप्तकों में थी| 'ऐ मेरे वतन के लोगों' उनका गाया हुआ एक लोकप्रिय देशभक्ति गीत है, जिसे उन्होंने 1962 के युद्ध में शहीद हुए भारतीय सेनानियों को समर्पित किया था |

u11



 गतिविधि 9- आइए, स्वरों की मधुरता और लय का खेल खेलें

उल्लेखित उद्देश्यों की पूर्ति हेतु इन खेलों को बनाया गया है| शिक्षक स्वयं सोच-विचारकर तैयार किए गए खेल भी प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे कि बच्चों को स्थानीय सांगीतिक संस्कृति का बोध कराया जा सके|

गतिविधि 1- कंठ स्वर को पहचानें (सुर, बनावट, शैली)|

कक्षा के किसी एक विद्यार्थी की आँखों पर पट्टी बाँधे और कोई अन्य विद्यार्थी एक गीत प्रस्तुत करे जिसे कक्षा में पहले सिखाया गया हो| आँखों पर पट्टी बाँधने वाले विद्यार्थी को यह पहचानना है कि यह गीत किसने गाया?

u13

शिक्षकों के लिए

  • प्रत्येक विद्यार्थी के बोलने और गाने के सुर, बनावट और शैली में अंतर होता है| इस गतिविधि से विद्यार्थी अपनी कक्षा के अन्य विद्यार्थियों के कंठ स्वर की बनावट, शैली और गतिशीलता को समझने में सक्षम होंगे|
  • विद्यार्थी को परिवार या आस-पड़ोस के लोगों के भी कंठ स्वर की बनावट और गतिशीलतों पहचानने के लिए प्रोत्साहित कीजिए| इससे ध्वनि और उनके स्रोतों को पहचानने की दिशा में उनकी संवेदनशीलता विकसित होगी|
  • किसी भी धुन को भिन्न-भिन्न वाद्ययंत्रों पर बजाएँ और फिर विद्यार्थियों को उनकी ध्वनि और बनावट को सुनकर उन्हें पहचानने को कहें|


 गतिविधि  II- स्वर-माधुर्य को सुनकर गीत को पहचानें|

किसी एक विद्यार्थी को एक गीत गुनगुनाने के लिए चुनें| विद्यार्थी ऐसा कोई गीत गाए, जिसे कक्षा में पहले सिखाया गया हो| गीत के स्वर-माधुर्य को सुनकर कक्षा के अन्य विद्यार्थियों को यह पहचानना है कि यह कौन-सा गीत है|

u14


शिक्षकों के लिए

यह गतिविधि विद्यार्थियों में रुचि और आत्मविश्वास उत्पन्न करेगी| साथ ही साथ, प्रस्तुति को खेल के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा|

गतिविधि III   - लय का खेल

     विद्यार्थी 3, 4, 5, 7 और 9 के समूह में विभाजित हों, वे अपने नाम का नीचे दिए गए ढंग से उच्चारण कर सकते हैं-
     तीन विद्यार्थियों के समूह का नाम होगा 'त्र्यस्त्र', 
और उनका नाम होगा त, कि, ट|
      चार विद्यार्थियों के समूह का नाम होगा 'चतुरास्त्र' 
और उनके नाम होंगे ध, गे, ना, ति|
       पाँच विद्यार्थियों के समूह का नाम होगा 'खंड' 
और उनके नाम होंगे त, क, त, कि, ट|
       सात विद्यार्थियों के समूह का नाम होगा 'मिश्र' 
और उनके नाम होंगे ती, ती, ना, धी, ना, धी, ना|
       नौ विद्यार्थियों के समूह का नाम होगा 'संकीर्ण' 
और उनके नाम होंगे त, क, दि, मि, त, क, त, कि, ट|

e3


शिक्षकों के लिए

इस खेल से विद्यार्थियों के मध्य लय (गति, चक्र, प्रतिमान) का बोध विकसित होगा|

शिक्षकगण स्वयं के बनाए हुए प्रतिमान तैयार कर सकते हैं और विद्यार्थियों के समक्ष कोई भी लय वाला खेल, खेल सकते हैं|




 स्वयं तैयार किए गए खेल बनाएँ, जिसमें स्वर और ताल, कंठ अभ्यास, मेडले या कोई भी सांगीतिक रचना के तत्व सम्मिलित हों|



u16