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 अध्याय -7     वाद्ययंत्र

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उद्देश्य किसी भी सांगीतिक रचना में वाद्ययंत्र के महत्व को समझना और बाद्ययंत्र के संप्रदाय ( घरानो) के विषय में जानना आवश्यक है|

वाधों  के प्रयोग से स्वर और लय की ध्वनि को बहुस्तरीय और परिपूर्ण बनाया जाता है|


गतिविधि 1- सांगीतिक रचना में वाद्ययंत्र का योगदान

 "प्रत्तेक संगीतकार एक कथाकार है, जो स्वर की मधुरता और तय के माध्यम से हृदय की कहानियाँ सुनाते है | "

-पंडित  रवि शंकर

भारत रत्न

सितार वादक

श्यामले मीनाक्षी गीत को सुनें | आप स्वयं गाने का प्रयास कीजिए|


गीत के बोल- श्यामले मीनाक्षी 

रचनाकार- मुत्थुस्वामी दीक्षितार

श्यामले मीनाक्षी

सुन्दरेश्वरा साक्षी

शंकरी गुरुगुहा

सम्बुदभावे शिवेवा

पामर मोचानी

पंकज लोचानी

पद्मासन वाणी हरी

लक्ष्मी  विनुते शाम्भवी

 श्यामले मीनाक्षी

गतिविधि कक्षा के साथ   चर्चा

इस  गीत को अपनी कक्षा में

 उपलब्ध किसी भी संगीत 

वाद्ययंत्र के साथ गाएँ| या गीत को लय के साथ गाने के लिए ताली आदि शरीर के अंगों का उपयोग कीजिए|


शरीर के अंगों के प्रयोग से आपको गीत गाने में कैसा सहयोग मिला? क्या आपको यह अच्छा लगा?
अब ऑडियो के साथ गाएँ,  गीत के साथ बजाए जाने बाले वाद्ययंत्र है वायलिन  और मृदंगम| 
एक वाद्ययंत्र किस तरह रचना सुनने के अनुभव को प्रभावित करता है?
अब ऐसी ऑडियो के साथ  गाएँ जिसमें नए वाधयंत्र  हो  एक  पियानो और  ड्रम्म |
दूसरे नए वाद्यों के साथ गाने का अनुभव कैसा  रहा ? आपको क्या अच्छा लगा और क्यो?



क्या आप जानते हैं|

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भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ भारत के एक प्रसिद्ध शहनाई वादक थे| शहनाई एक सुषिर वाद्य है, जिसका ढाँचा लकड़ी का होता है और इसे मुँह से फूंक कर बजाया जाता है| इसको पहले अधिकांशतया लोक गीतों में बजाया जाता था, किंतु खाँ साहब ने इस वाद्य को "हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत" में प्रचलित किया| उन्हें धार्मिक   सदभाव   का प्रतीक माना जाता था| 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ उस दिन उन्हें लाल किले पर शहनाई प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया गया था|




गतिविधि -2 सुनना और   प्रतिक्रिया देना

किसी  वाद्ययंत्र के साथ कहानी को सुनिए |  वाद्ययंत्र किस तरह कथा की गहराई को बढ़ाता है, इसका वर्णन कीजिए| इस  वाद्ययंत्र को बनाते समय एक कहानी सुनने का प्रयास कीजिए और अपनी भावनाओं को व्यक्त  कीजिए |

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गतिविधि 3 वाद्ययंत्रों के परिवार

स्वर की मधुरता और गति संगीत के दो मुख्य तत्व है| उनके आधार  पर  ,  वाद्ययंत्र  को विभाजित किया गया है 

  • स्वर की मधुरता उत्पन्न करने वाले   वाद्य
  •  लय प्रदर्शित करने वाले वाध

वाद्ययंत्रों  को बजाने के  ढंग  के अनुसार भी उनका विभाजन किया गया है|   वाद्यो   के विभाजन को  भली-भांति समझने के लिए अगले पृष्ठ पर दिए गए  चित्रों को देखे |

तालिका में दिए गए वाद्ययंत्रों के अतिरिक्त, लय उत्पन्न करने वाले दो और वाद्यों के नाम बताएँ?

1.  ........................................................ 

2.  .....................................................


क्या आप दो ऐसे वाद्ययंत्रों के नाम बता सकते है, जिनसे मधुर स्वर उत्पन्न होता है| 

1. ......................................................

2. ....................................................


क्या आप दो तंत्री  वाद्यो के नाम बता सकते हैं, जिनसे मधुर स्वर उत्पन्न होता है|

1.  .................................................

2.  ...............................................


क्या आप लय प्रदर्शित करने वाले, धातु के बने दो वाद्ययंत्रों के नाम बता सकते है

1. ...................................................

2.  ....................................................


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         क्यू  आर  कोड को स्कैन  कीजिए  और उपकरण  के  नाम  से  उसका  मिलान  कीजिये

  क्यू  आर  कोड
  वाद्ययंत्र
              c1  
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          c3  
c4
           c13
c14
       c5
c6
        c7
c8
      c15
c16
        c9
c10
       c21
c23
       c11
c12
       c18
c20

गतिविधि 4- अपना स्वयं का वाद्ययंत्र बनाएँ

जलतरंग एक रोचक वाद्ययंत्र है, जिसमें काँच, धातु या मिट्टी के अलग-अलग आकार के प्याले होते हैं| जिनमें राग की आवश्यकतानुसार पानी भरा जाता है| कलाकार प्रत्येक प्याले के किनारे पर लकड़ी की छड़ी से  आघात करता है, जिससे संगीत उत्पन्न होता है| यह एक मधुर स्वर वाद्य है| इसे हम घन वाद्ययंत्र की श्रेणी में रख सकते है, क्योंकि प्रत्येक प्याले में जलस्तर के ऊपर उपस्थित वायु, ध्वनि उत्पन्न करने के लिए कंपन करती है| यह ध्वनि एक सतह से टकराकर उत्पन्न होती है, जो प्याले का किनारा होता है|

आइए, अब हम अपनी रसोई में उपलब्ध प्याले से जलतरंग बनाएँ|

इसके लिए आपको चाहिए होगा

पाँच ठोस प्याले, पानी की एक कैन और दो पेंसिल या लकड़ी की डंडियाँ, अब हम-

  • प्याले को एक मेज पर एक पंक्ति में व्यवस्थित करेंगे|
  • सभी प्यालों में अलग-अलग मात्रा में पानी भरें| आप पहले प्याले को एक कप पानी से भर सकते हैं| दूसरे कप में तीन चौथाई पानी भरिए, तीसरे प्याले में आधा कप पानी भरिए और चौथे प्याले में एक चौथाई पानी भरिए| आपका अपना जलतरंग उपयोग के लिए तैयार है|

  • प्रत्येक प्याले के किनारे पर पेंसिल या छड़ी से धीर से प्रहार कीजिए और अपना स्वयं का संगीत बनाएँ और देखें कि जब आप अलग-अलग प्याले पर आघात करते हैं, तब ध्वनि का ऊँचा-नीचा स्तर किस प्रकार एक-दूसरे से भिन्न प्रतीत होता है?


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गतिविधि -5    सुनें और सीखें

'इडियन म्यूजिक एक्सपीरियंस म्यूजियम बेंगलुरु का ऑडियो सुनें और वीडियो देखें | आपको इनमें से कौन-सा वाद्य रुचिकर लगता है और क्यों? इस बात पर ध्यान दें कि वाद्यों को किस प्रकार विभाजित किया जा सकता है?


शिक्षकों  के लिए

विद्यालय में स्थानीय  कलाकार को कार्यशाला और प्रदर्शन के लिए  आमंत्रित  किया जाना चाहिए | इसके साथ ही बच्चों को कलाकारों से बातचीत करने के  लिए   प्रोसाहित  किया  जाए  , ताकि वे  जान सके कि कैसे एक  उत्तम  कलाकार अपने  गुरुओ  से संगीत की शिक्षा प्राप्त करते है? वे किस   प्रकार  का   जीवन   जीते हैं और साथ ही अपना कोई अन्य अनुभव भी बच्चों के साथ साझा करना चाहते है| विद्यार्थियों को   विशिष्ट  वाद्ययंत्र  को  बजाने   की विधि को सीखने के लिए भी प्रोत्साहित करें| ( शिक्षक की उपलब्धता के अनुसार )



गतिविधि 6- आइए, इसके बारे में एक परियोजना बनाएं

  • संगीत और विज्ञान |

  • किसी भी स्थानीय संगीतकार का रेखाचित्र और उनका योगदान|


संगीत वाद्ययंत्रों की जादुई दुनिया

वाद्ययंत्र एक समृद्ध सांगीतिक अनुभव बनाते हैं| वाद्ययंत्रों  को उनकी उपयोगिता और जिस सामग्री से वे बनाएँ, गए है, उन्हें उसी आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है| विद्यार्थी ऐसा गीत सुनें, जिससे उन्हें आनंद मिलता हो| उसमें प्रयुक्त वाद्य की पहचान कीजिए और उन्हें विभिन्न श्रेणियों में विभाजित कीजिए|


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पंडित  रवि शंकर

(भारत   रत्त्न पुरस्कार  से  समानित)