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                                     अध्याय  -9


                           भारतीय  संगीत  में  विवधता

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 उद्देश्य- भारतीय संगीत की विभिन्न शैलियों के गीत सुनें और सीखें|

आइए, एक मणिपुरी गीत सीखें हा उरीत नपन्धी

भाषा- मणिपुरी

 हा उरीत नपन्भवी, नमाना कोउवी तदाबी 

नपाना कोउवी कुम्भदाबी या होइ होइ या होइ होइ 

या या ताहोइ होइ 

उरीत नंग्गनी कुहुनु चाइजोन

 नपन्यी फोउका अएम्बा 

या होइ होइ या होइ होइ या या ताहोइ होइ


अर्थ  -'उरीत' पक्षी ने न अपनी माता की पुकार सुनी, न ही अपने पिता की पुकार सुनी| आप अपने हाथों से ताली बजाओ और पक्षी को बुलाओ| लाल रंग का 'उरीत'  पक्षी कबूतर के समान होता है, जिसका पेट बड़ा होता है और, जो आकाश में ऊँची उड़ान भरता है| आप अपने हाथों से ताली बजाओ और पक्षी को बुलाओ|

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शिक्षकों के लिए

यहां भारत के विभिन्न क्षेत्रों से कुछ गीत सुझाए गए हैं| शिक्षकों से अनुरोध करते हैं कि वे इस सूची में से कम से कम पाँच गीत सिखाएँ| आप वे क्षेत्रीय गीत भी सिखा सकते हैं, जिन्हें सीखकर आपके विचार से बच्चे प्रसन्न होंगे |


आइए, केरल का नाव गीत वन्चिपट्टू सीखें 

आइए,     पंचिपट्टू   गीत सीखें|     वन्चिपट्टू एक पारंपरिक नौका दौड़ से जुड़ा है, जो कि केरल के बैकवॉटर में होती है| यह नीका दौड़ राज्य में सांस्कृतिक उत्सवों का एक अभिन्न अंग है| वे उत्साहपूर्वक लयबद्ध रूप में इसे गाते हैं|

                               

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केरल की  सर्प   नौका  दौड़                         

कुट्टानंदन पुनजाइयले   भाषा मलयालम

कुट्टानंदन पुनजाइयले

 कोचु पेनने कुइलाले

 कोडू बेनम कुजाल वेनम, कुरावा वेनम 

कुरानंदन पुनजाइयले, थौथाइ थाका थइयइ थोम 

कोचुपेने कुइलाले, थीती थारा थई थोम

 कोटु वेनम कुजल वेनम, कुरावा वे नम I

 (ओ... थीथीतारा    थीथीथई थीथाइ थाका थई थोम) × 4


वारावेल कनारू वेनम कोडी थोरानंगल वेनम

 विजयश्री लाली थाराइ वारुन्नु नजंगल

 (ओ... थीथीतारा   थीथीथई थीथाइ थाका थइ थोम) × 4


करूथा चीराकु वाचु  थीथाई  थाका थइ  थइ थोम


 अरयाना किलीपोल थीथीथारा थइ थोम 

करूथा चीराकु वेचोर अरयाना किलीपोल 

कुथीचु  कुथीचु पेयुम कुक्षीरा पोल 

(ओ... थीथीतारा थीथीथई थीथाइ थाका थइ थोम) × 4


अर्थ - इस गीत में केरल राज्य के कुट्टनाड क्षेत्र की सुंदरता का वर्णन हुआ है| इसके साथ ही यह गाना गाने की इच्छा और प्राकृतिक परिवेश का आनंद लेने को भी व्यक्त करता है|


 पूर्वोत्तर, असम में ई मातीरे मोरे मोटे जैसी धुनें हैं|

आइए, एक असम का गीत सीखें

भाषा - असमिया


ई मातीरे मोरो मोटे

माटीके सुमीलो

ई मातीते जीबोन सोबी

आनाकी आनकी मोसीलो


दोर आखार रोहोन

कियोनो लागे लागे

हागोर तोलीर मानीक

कियोनो लागे लागे

आन्हा आन्हा

मातीर भूकुट मोनोर मालोती भूतोलोन


मोनोर कोरोनीरे 

होरोर पापोरीरे आजी 

हुकुमार थापोना होजुवा 

हुन्डोर हुडीनोर 

नोतोन दृष्टिकोना नोमुवा


अर्थ - इसमें गायक पृथ्वी के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त कर रहा है| आकाश के रंगों तथा समुद्र के मोतियों के बजाय धरती पर प्रसन्नता ढूँढ़ने की बात करता है| गायक को लग रहा है कि प्रकृति के सभी पक्ष जैसे सूरज की रोशनी या जंगल आदि पृथ्वी पर हैं और अत्यंत मूल्यवान हैं|

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क्या आप  जानते  है

असम के सदिया में वर्ष 1926 को एक उत्कृष्ट संगीतकार का जन्म हुआ, जिनका नाम भूपेन हजारिका था| वे असम के पार्श्व गायक, गीतकार, संगीतकार, अभिनेता, कलाकार, संपादक, फिल्म निर्माता और शिक्षाविद आदि थे, जिन्हें व्यापक रूप में 'सुधा कोंथो' के नाम से जाना जाता था| उन्होंने संगीत को 'सामाजिक परिवर्तन के साधन ' के रूप में प्रयोग किया और कई प्रेरणादायक गीतों की रचना की| उन्हें भारत रत्न, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और संगीत नाटक अकादमी सहित कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है| उनका निधन 5 नवंबर 2011 को हुआ था|

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आइए, पश्चिम में गुजरात की धरती पर चलें और पोटाना जे दरिया गीत सीखें

 भाषा - गुजराती

पोटना जे दरिया मां

पोतानी जा डुबकी थी

जात नू अमूल मोती लो

इवो कोन छे खलासी

मने कही दो ने

एना थाम ने ठेकाना

मने दई दो ने

इवो कोन छे खलासी

 मने कही दो ने गोती लो, तामे गोती लो गोती लो


अर्थ - यह गीत जीवन को सागर यात्रा की उपमा देते हुए उस यात्रा को दर्शाता है| नाविक सागर में अपनी नाव की दिशा निर्धारित करते हुए आगे बढ़ाता है| इस यात्रा में प्राप्त मोती जीवन के उन मूल्यवान क्षणों और उपलब्धियों को प्रतिबिंबित करते हैं, जो सागर में यात्रा के दौरान प्राप्त अनुभवों से मिलते हैं|

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 आइए, सीखें, गुजरात का गरबा

गरबा गुजरात राज्य की एक पारंपरिक गायन विधा और लोक नृत्य है| यह नृत्य मुख्य रूप से नवरात्रि के अवसर पर किया जाता है| इस प्रमुख अवसर पर पारंपरिक वाद्ययंत्र, जैसे-ढोल, तबला, ढोलक और मधुर वाद्ययंत्र जैसे हारमोनियम और बाँसुरी आदि का वादन होता है| हाथ से ताली देना और डांडिया की छड़ियों को एक-दूसरे से मिलाकर बजाना भी लय प्रदर्शन का कार्य करता है| मधुर स्वर समुदायों की इस प्रकार पुनरावृत्ति की जाती है, जो कि आकर्षक प्रतीत होती है और हर्ष तथा उल्लास की भावना को प्रकट करती है| नृत्यांगना भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपने अनुराग को इस गीत के माध्यम से प्रकट कर रही है| नृत्यांगना कृष्णा (कनुड़ा) के प्रति अपने प्रेम के बारे में गा रही है|


गीत के बोल - थारी बनकी रे

थारी बांकी रे पगलाड़ी नु 

फमतू रे मने, घमतू रे आतो

 कंचूरे कनोडा ताने अमतु

 थारी पगनू रे पगरखु चम 

फमतु रे माने, घमतु रे आतो 

कंचूरे कनोडा ताने अमतु 

फमतु रे मने धमतु रे आतो 

कंचूरे कनोडा ताने अमतु

थारी बांकी रे पगलाड़ी नु 

फमतू रे  माने, घमतू रे आतो

 कंचूरे कनोडा ताने अमतु



आइए, तमिल गीत सीखें अतिन्तोम 

अतिन्तोम, तिन्दियुम तोमतना 

तिन्दाति तिन्तोम, 

तकधिना तिन्दुयुम तोमतना,

 तिन्दाति तिन्तोम


आडादु जव्वादु मनम आडिडुम बोम्मी, 

आन्डवनै पाराटुम इसै केलडि बोम्मी, 

एन पाटु वन्दालुम मनम तुल्लिडुम बोम्मी, 

अवन पाटु इल्लादु इडम एंगेडि बोम्मी,

 मुकन्नन मुत्ताका तन्द पाटु पडिच्चेन, 

पाटिले पलाकोडि नेन्जम नानुम पुडिच्चेन,


अतिन्तोम, तिन्दियुम तोमतना 

तिन्दाति तिन्तोम, 

तकधिना तिन्दुयुम तोमतना, 

तिन्दाति तिन्तोम


अर्थ- इस गीत में गायन के आनंद को दर्शाया गया है| इस गीत में लयबद्ध तत्व हैं, जो इसे आकर्षक बनाते हैं|

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 कन्नड़ गीत

चेलुवय्या

चेलुवय्या चेलुवो थानी थन्दाना 

चिन्मया रूपे कोलन्ना कोले 

चेलुवय्या चेलुवो तानी तन्दाना

चिन्मया रूपे कोलन्ना कोले


अथा नोडु इथा नोडु

 चित्रदुर्गा कोटे नोडु 

हाथी नोडु नन्ना तावोरना


चेलुवय्या चेलुवो थानी थन्दाना

 चिन्मया रूपे कोलन्ना कोले

 चेलुवय्या चेलुवो तानी तन्दाना 

चिन्मया रूपे कोलन्ना कोले


अर्थ - यह कर्नाटक का आनंद से भरा लोकगीत है, जिसमें लोगों को नृत्य करने और कर्नाटक के चित्रदुर्गा किला सहित आस-पास की सुंदरता को देखने के लिए आमंत्रित किया गया है|


हमारे देश भारत के प्रत्येक क्षेत्र के विभिन्न प्रकार के गीतों को सीखते समय आपको इस अध्याय के शीर्षक 'विविधता की धुन' की महत्ता का अनुभव हुआ होगा|



 ओ जिंद माही बाजरे

भाषा- पंजाबी

ओ जिदं माही बाजरे... 

ओ जिदं माही बाजरे कुमलाइया

 वे तेरिया लाडलियाँ... 

वे तेरिया लाडलियाँ परजाइयाँ 

के बाजी फेर कदे...

 के बाजी फेर कदे न आइया

(उमम... उमम... उममम... उममम... उमम... उममम... उमम) × 2


के इक पल बेही जाना 

के इक पल बेही जाना मेरे मक्खना 

वे तेरे बाजू ओए 

वे तेरे बाजू वेडा सखना 

के इक पल बेही जाना 

के इक पल भई जाना मेरे कोल...

(उमम... उमम... उमम उममा...उममा...उममा... उमम) × 2

अर्थ - यह गाना प्रेम और प्रियजनों के लौटने की इच्छा और साथ में व्यतीत किए गए मधुर क्षणों को व्यक्त कर रहा है|

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s1पुंगी



 क्षत्रिय कुलवत्सना

भाषा- मराठी


क्षत्रिय कुलवत्सन सिन्हासनाधिश्वर

श्रीमतं छत्रपति शिवाजी महाराज की जय

अरे आले रे आले रे (आले आले रे)

आर मराठे आले रे (आर मराठा आले रे)

शान राजनची घेउण (शान राजनची घेउण) 

आता रानी निघाले रे (जय भवानी)

आर तूफान पेटल (तूफान पेटल)

आन गनीम खेतल (गनीम खेतल)

तार येकच नाव रे

आमच्या शिवबांच घेतल (आमच्या शिवबांच घेतल)


श्वासत राजा र ध्यासत राजा

घावत राजा र भावत राजा

जगन्यात राजा र मरणयात राजा

वह... शिवबा रे रे...


अर्थ यह गीत छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करता है| उनकी वंशावली, वीरता और उपलब्धियों की प्रशंसा करता है| इसमें उनके नेतृत्व और साहस के प्रति श्रद्धा और प्रशंसा के भाव को भी व्यक्त किया गया है|


 ईश्वर की ओर भक्ति का मार्ग

सभी बच्चों ने लोगों को विभिन्न प्रकार की भक्तिपरक रचनाएँ गाते और पूजा करते देखा होगा| आइए, उनमें से कुछ को सीखें|


कीर्तन (गीत)

इसे भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी ने गाया है|

भाषा- मराठी


जे का रंझाले त्यासी होन जो आपूले, 

तोची साधु ओडे खावा देव तेथेची जनावा

 तुकमाने सांगु किती तोची भगवंतत्याचा मूरति|


अर्थ - संत तुकाराम की यह रचना अभंग कीर्तन है| यह गीत यह संदेश देता है कि एक सच्चे मनुष्य को इस रूप में पहचानें कि जो दूसरों के संकट और पीड़ा को गहराई से अनुभव करता है और उसके प्रति सहानुभूति रखता है| ऐसे दयालु व्यक्तियों के हृदय में भगवान का वास होता है|

शबद (गीत)

नानक चिंता मत करो, चिंता तिस ही है 

जल मे जंत उपाइया, तीना भी रोजी दे !

 नानक चिंता मत करो, चिंता तिस ही है 

ओतइ हट ना चलैइ, ना को किरस करै 

सौदा मूल ना होवै, ना को लाये ना देये

 जिया का आहार जिया, खाना इहु करे 

विच उपाय साएरा, तीना भी सार करै

 नानक चिंता मत करो, चिंता तिस ही है|


अर्थ- 'शबद' ऐसे गीत हैं, जो गुरुद्वारे में गाए जाते हैं| यह गीत अत्यधिक चिंता करने से मुक्त होने का परामर्श देता है| क्योंकि सब कुछ   अंततः   ईश्वरीय इच्छा से निर्धारित होता है| भगवान ने पानी में जीव- जंतु बनाए हैं, वह उनका भरण-पोषण भी करता है| गुरु नानक देव जी अपने शिष्यों से चिंता को छोड़कर विश्वास रखने को कहते हैं| चाहे नदी हो या महासागर, इसमें रहने वाले जीव-जंतु जीवित रहने में सक्षम हैं, क्योंकि वे प्रकृति के नियमों के अनुसार रहते हैं| ईश्वर सभी प्राणियों का ध्यान रखता है|


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क्या आप  जानते  है

भारतीय संगीत को समाज की परंपराओं और प्रथाओं से लिया गया है| जिसमें भारतीय संगीत की अभिव्यक्ति के लिए प्राथमिक रूपांकन के रूप में भक्ति या 

समर्पण सबसे पहले आता है| कीर्तन, शबद, भजन और कव्वाली-संगीत में  भक्ति पक्ष के उदाहरण हैं|


 गिरिजाघरों में गाए जाने वाले भजन

मुझे मेरे दीपक में तेल दो, मुझे जलाते रहो 

मेरे दीपक में तेल दो, मैं प्रार्थना करता हूँ

 मेरे दीपक में तेल देकर मुझे जलाते रहो 

मुझे दिन के अंत तक जलाते रहो 

आइए, और होसाना गाओ होसाना गाओ 

होसाना गाओ

 राजाओं के राजा के लिए

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अर्थ - यह गीत एक ईसाई भजन है| यह सर्वशक्तिमान परमपिता परमेश्वर में आस्था और भक्ति को बनाए रखने के लिए अपने शरीर रूपी दीपक में विश्वास रूपी ईंधन अर्थात् तेल को माँगता है| यह राजाओं के राजा के रूप में ईसामसीह को चित्रित करता है|



आइए, एक सूफी गीत सीखें

मो मीना मा

भाषा- फारसी


मो मीना मा दुध लेके इमा याके

 जिसमिशा मा दुध लेकिन जा याके 

जामा गुफ्तमा जान हां ये शान


अर्थ- यह सूफी गीत जलाल-उद-दीन मोहम्मद बल्खी जो रूमी नाम से विख्यात थे, उन्होंने फारसी भाषा में लिखा था| 'मसनवी' एक ऐसा काव्य संग्रह है, जो कुरान से संबंधित उपाख्यानों तथा कहानियों से प्रेरित है| मसनवी में उल्लेखित यह सूफी गीत सभी के अंदर एक ही दिव्यता की बात करता है और कहता है  कि जब हम अपने शारीरिक आवरण के बंधनों से मुक्त हो जाते हैं, तब हमें अनुभव होता है कि हम सबको चलाने वाली जीवनशक्ति, आत्मा एक ही है|

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भारतीय संगीत की शैलियाँ


भारतीय संगीत कई शैलियों का सम्मिश्रण है| इसमें शास्त्रीय संगीत - हिंदुस्तानी और कर्नाटक के

 साथ-साथ, लोक, उपशास्त्रीय, भक्ति, देशभक्ति और फिल्म संगीत भी सम्मिलित है| अलग-अलग शैलियों का संगीत सीखना केवल आनंददायक ही नहीं होता, अपितु स्थानीय संस्कृति और परंपरा की समझ को भी विकसित करता है| संगीत की कुछ शैलियों को चुनिए, उन सभी को सीखिए और अपने मित्रों-परिजनों के समक्ष प्रस्तुत कीजिए|

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