Skip to content

                                                                                                                                                                                                                        s6                              

अध्याय  - 11

संगीत  और  समाज



u3


उद्देश्य गीतों में बार-बार प्रयोग किए जाने वाले बोल को सुनें और उनके विकल्प के विषय में सोचें|
    समाज में संगीत के माध्यम से संदेश भी पहुँचाया जा सकता है| स्वतंत्रता संग्राम के समय हमारे नेताओं ने अंग्रेजों के विरूद्ध लोगों को एकजुट करने के लिए संगीत का प्रयोग किया था|


गतिविधि 1- संगीत जो एक सूत्र में बाँधे


हमारा राष्ट्रगान भारत की विविधता का प्रतिबिंब !
    नोबेल पुरस्कार विजेता, राष्ट्रकवि रवींद्रनाथ टैगौर प्रथम भारतीय थे, जिनको 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार मिला| उनका लिखा हुआ राष्ट्रगान संस्कृत-बांग्ला भाषा पर आधारित है| इसमें भारत के विराट और विविध भौगोलिक भूदृश्य को दर्शाया गया है|

  •  गाने के बोल और उनके अर्थ को समझें| यह समझने का प्रयास कीजिए कि किस प्रकार इस गीत में भारत की विविधता का वर्णन हुआ है|
  • इस गीत के बोल से आपको किस प्रकार की भव्यता का आनंद मिलता है, इसकी व्याख्या कीजिए |
  • इस गीत के शब्द और संगीत, आपके मन में कैसी भावना उत्पन्न करते हैं| इस पर प्रकाश डालें  |

 गतिविधि 2- हमारी विरासत की जड़ें


वेद और उपनिषद जैसे ग्रंथों के बारे में आपने सुना होगा| उनसे हमें नम्रता, सत्यवादिता और दयालु होने के गुण मिलते हैं, भले ही हम एक-दूसरे से भिन्न हों|

कठोपनिषद की प्रेरणादायी पंक्तियों को देखकर गाने का प्रयास कीजिए| इसकी प्रेरणादायक पंक्तियाँ स्वामी विवेकानंद को भी प्रिय थीं |
s7

 उत्तिष्ठत जाग्रत 

उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत, क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया दुर्गम पथस्तत्कवयो वदन्ति

सुनकर उत्तर दें

अब इस गीत को सुनें| इससे आपके मन में क्या भाव आ रहे हैं?

गतिविधि 3- परिवर्तन का स्रोत बनें

इस गीत को सुनिए और स्मरण कीजिए| यह सोचिए कि आप किस प्रकार एक वीर योद्धा (सुपर हीरो) बन सकते हैं और सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं|
 
s8

 उठो ! जागो ! और रुको मत जब तक कि लक्ष्य तक ना पहुँचो | स्वामी विवेकानंद

 गतिविधि 4– रूढ़िवादिता (stereotypes)

संगीत के माध्यम से रूढ़िवादिता को भी नए रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है| रूढ़िवादिता से तात्पर्य पहले से निकाले गए निष्कर्ष के माध्यम से, विचार और संस्कृति, जाति, रंग, जेंडर और अन्य कारकों के आधार पर सामान्यीकरण करने से है, लेकिन आप इसे परिष्कृत कर सकते हैं| इस गीत को सुनें-

बबुआ की मुर्गी
बबुआ की मुर्गी बोले ना 
बबुआ का मुर्गा कुकडू कू 
बबुआ की मुर्गी रूठ गई 
न मानू मैं ना मानू

बबुआ का मुर्गा क्यों अकड़े? 
उसके सिर पर कलगी है 
जिसके सिर पर ताज नहीं 
वो बेचारी मुर्गी है

बबुआ की मुर्गी क्यों खुश है, 
क्यों खुश है? क्योंकि अंडा देती है, 
देती है!

संगीत लोगों को एक साथ जोड़ता है तथा परंपरा को भी आगे बढ़ाता है| ऐसा कोई गीत ढूँढ़ो, जो आपके मन का उत्थान करता हो| उसे सीखें और
अपने मित्रों को सिखाएँ| एक ऐसी पुस्तक को लिखने के बारे में सोचें, जिसमें मन को उत्थान प्रदान करने वाले गीत हों|

s9

s10


 विस्तारित गतिविधि

यह गीत किस पारंपरिक धारणा या रूढ़िवादिता को बढ़ावा देता है?

गुड़िया रानी 
बिटिया रानी 
परियों की नगरी से एक दिन
 राजकुंवर जी आएँगे 
महलों में ले जाएँगे

यशोमती मैय्या से बोले नंदलाला 
राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला

क्या आप अपनी मातृभाषा में ऐसा कोई गीत जानते हैं, जिसमें किसी पारंपरिक धारणा या रूढ़िवादिता को दर्शाया गया हो? उन गीतों के मूल बोलों को लिखें और उनको आप कैसे समझाना चाहेंगे, इसे सभी के साथ साझा कीजिए|