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                                   अध्याय  -12

मेरा  शारीरिक  संचलन





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"यतो हस्त ततो दृष्टिः;

 यतो दृष्टिः ततो मनः

 यतो मनः ततो भावो;

 यतो भावः ततो रसः ||"


अर्थ  -    जिस दिशा में हाथ है वहीं दृष्टि होगी, जहाँ दृष्टि है वहीं मन होगा और जहाँ मन होगा वहीं भाव उत्पन्न होंगे और जहाँ भाव उत्पन्न होंगे वहीं रस की सृष्टि होगी|


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 शिक्षकों के लिए

बच्चों को गतिविधि के लिए ऐसे स्थान या हॉल उपलब्ध कराए जाएँ, जहाँ वे सहजता से कार्य कर सकें, जहाँ समुचित प्रकाश और हवा के आने जाने की व्यवस्था हो| आवश्यकतानुसार समूह में कार्य करने की प्रक्रिया को भी साझा कीजिए|

शिक्षणशास्त्र सिद्धांत

1. शरीर के विभिन्न अंगों की पर्याप्त जानकारी देते हुए बच्चों को अवगत कराएँ कि ये अंग किस प्रकार से जोड़ों के माध्यम से संचलित होते हैं|

2  सांस लेने की प्रक्रिया में शरीर का संचालन अनुलोम-विलोम से संपादित होता है, जिसका महत्व नृत्य और अंग संचालन के लिए अति आवश्यक है| शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नृत्य एक उत्तम माध्यम है|

3. शास्त्रीय तथा अन्य पारंपरिक भारतीय नृत्य की विविध शैलियों का परिचय|

4. भावनाओं को व्यक्त करना - बच्चों को उनकी भावनाओं का अनुभव कराने और उन्हें व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित कीजिए| यह भावनात्मक प्रवाह के लिए एक महत्वपूर्ण साधन हो सकता है|

5 हाथों के माध्यम से भावना को व्यक्त करना सांकेतिक भाषा के महत्व और समावेशी कक्षा में व्यावहारिक आचरण पर चर्चा करना|

6. जेंडर संवेदना और जेंडर बाधाओं से निदान |

7. सहयोग का महत्व - किसी विषय या विचार को समृद्ध रूप से संचालित करने के लिए सहयोग और योगदान का महत्व|

8. भारत की सांस्कृतिक विविधता|

9. भारत के प्रसिद्ध नर्तकों से परिचय|

10. नृत्य और उनकी मुद्राओं की समग्रता से सराहना|



नृत्य कक्षा में जाने से पहले आप सभी क्या कर रहे थे?

  • अपने मित्रों से बातें कर रहे थे?
  • अपनी अँगुलियों का प्रयोग करके संख्या का खेल, खेल रहे थे?
  • पुस्तक पढ़ रहे थे?
  • स्वयं गाना गा रहे थे?

... इसके अतिरिक्त आप क्या कर रहे थे?


आप जो भी कार्य कीजिए, उसमें कुछ छोटे या बड़े अंगों का संचालन सम्मिलित हो सकता है|

इस पूरे संसार में, सभी प्राणी अपने अनोखे ढंग से संचलन करते हैं| प्रत्येक की अपनी स्थिति, ढंग, हाव-भाव और संचलन होती है|

संचलन से अर्थ है स्थिति, स्थान या दशा में परिवर्तन| उदाहरण के लिए व्यायाम करना, पालतू पशु के साथ खेलना, साइकिल चलाना या कोई अन्य क्रिया करना, जिसमे शारीरिक संचलन सम्मिलित हो|

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 गतिविधि 1- नियमित शारीरिक संचलन

स्वयं अवलोकन कीजिए कि आप घर और विद्यालय में किस प्रकार विभिन्न शारीरिक संचालन करते हैं| एक दिन में आप अनेक संचलनों में सम्मिलित होते हैं|

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 अब समय आ गया है कि आप अपनी दिनचर्या की सभी गतिविधियों को स्मरण करें और अपने शरीर के संचालन से कक्षा में शारीरिक गतिविधियाँ कीजिए|


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नृत्य शैलियाँ- उत्पत्ति का स्थान

विभिन्न आकृतियाँ और मुद्राएँ

हमारे देश में शास्त्रीय नृत्य के 8 प्रकार हैं, जिनमें शरीर की सभी भंगों का उपयोग किया जाता है, इन्हें भंगिमा कहा जाता है| वे हैं-

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नृत्य शैली- कथकली 

उद्‌गम स्थान- केरल

आसन- समभंग

नृत्य शैली -ओडिसी 

उद्‌गम स्थान-उड़ीसा

आसन त्रिभंग

नृत्य शैली- भरतनाट्यम

उद्गम स्थान- तमिलनाडु

आसन- द्विभंग

नृत्य शैली-कथक

उद्गम स्थान- उत्तर  प्रदेश

आसन- समभंग


 नृत्य शैलियाँ - उत्पत्ति का स्थान विभिन्न आकृतियाँ और मुद्राएँ

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नृत्य शैली- मोहिनीयाट्टम

उद्‌गम स्थान- केरल

आसन- अतिभंग

नृत्य शैली -सत्रिया 

उद्‌गम स्थान-असम

आसन -अभंग

नृत्य शैली- कुचिपुड़ी

उद्गम स्थान- आधप्रदेश और तेलंगाना

आसन- नर्तक समभंग में   और  नर्तकी   त्रिभंग में है|

नृत्य शैली- मणिपुरी

उद्गम स्थान-  मणिपुरी

आसन- अभंग


भारतीय  नृत्य  अवधारणा  में  शरीर     की   मध्य    ऊधर्व    रेखा  महत्वपूर्ण है |


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 समभंग


अभंग


  द्रिभंग

त्रिभंग



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अतिभंग


विभिन्न  प्रकार   एवम्   मुद्राएँ


हाँ ..... ये वो मुद्राएँ हैं, जो आपने नृत्य में देखी हैं|


गतिविधि 2- रीढ़ की हड्डी के झुकाव और पदगतियों को सम्मिलित करना

अब आपको अपनी रुचि का कोई आसन जैसे- त्रिभंग, द्विभंग आदि प्रदर्शित करना है|

आप अपने आसन का आरंभ समभंग से कर सकते हैं| अपनी साँस पर ध्यान लगाते हुए अपनी रीढ़ की हड्डी को झुकाना आरंभ कीजिए, शरीर को फैलाते और खींचते समय साँस अंदर लें तथा शरीर को सिकोड़ते और झुकाते हुए साँस को छोड़ें|

अपनी दिनचर्या में से कुछ ऐसे कार्य सोचें, जिनमें रीढ़ की हड्डी का झुकाव और पदगतियाँ उपस्थित हों|

अब प्रत्येक कार्य में आपके द्वारा किए गए रीढ़ की विभिन्न हड्डी के कार्यान्वित होने का अवलोकन कीजिए|

इन कार्यों के साथ आपको 1-2, 1-2, या 1-2-3-4 जैसे सरल प्राथमिक गिनती करते हुए लयबद्ध चरण करने होंगे|

विभिन्न नियमित कार्यों को याद करें और अपने अनुभव या दूसरों के अवलोकन के आधार पर चरणों को संयोजन के साथ एक श्रृंखला में रखिए|


उदाहरण के लिए सीधे खड़े हो जाएँ और टैप - टो - टैप - टैप, जैसे- चार की गिनती से पदसंचालन करें| दाएँ पैर दाई ओर ले जाएँ और लयबद्ध ढंग से टैप – ऐड़ी प्रदर्शित कीजिए|

(आप इस गतिविधि के लिए वाद्य संगीत बजा सकते हैं या सरगम का प्रयोग कर सकते हैं|)

अपने मित्रों के साथ इस विषय में बात कीजिए कि रीढ़ की विभिन्न हड्डियों के विभिन्न मोड़, धड़कनों और संचलनों (त क धी मी अथवा ता धिन धिन्न) को आपस में कैसे संचालित किया जा सकता है|

चार अथवा पाँच विद्यार्थियों का समूह बनाएँ| निर्णय लें कि आप किस प्रकार से शरीर के अंगों का संचालन श्रृंखला में संयोजित कर सकते हैं| पहले सीखे हुए मूल पद संचालन का उपयोग करके संचलन श्रृंखला को अभिनय के रूप में प्रस्तुत कीजिए|

उदाहरण

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 विद्यालय  के  लिए   
तैयार  होना


अपना बस्ता  तैयार करना


  पढ़ने  के लिए  बैठना

 एक लहराता  पेड़



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एक  बहती  हुई  नदी


उदाहरण

1. भारी-भारी थैले उठाएँ हुए हैं?

2. ऊँचे-ऊँचे पेड़ लहरा रहे हैं?

3. हवा तेज है या धीमी है?

4. बारिश में खेल रहे हो?

यह सभी गतिविधियाँ आपको आगामी नृत्यों और संचलनों का संज्ञान कराएँगी|



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अभिनय

नत्य के दूसरे तत्व की बात कीजिए, तो वह होगा अभिव्यक्ति या भाव|

अभिव्यक्ति या भाव अपनी-अपनी भावनाएँ हैं या आपके द्वारा देखी गई दूसरों की भावनाएँ हैं, जो नवरस जैसे- श्रृंगार - रति, हास्य – हास, करुण – शोक, रौद्र-क्रोध, वीर-उत्साह, भयानक-भय, वीभत्स घृणा, अद्भुत – आश्चर्य, शांत – निर्वेद के रूप में जाने जाते हैं|


गतिविधि 3- चेहरे पर विभिन्न भावों का अभ्यास

अपने मित्रों, परिजनों, शिक्षकों और माता-पिता को देखें...प्रत्येक के मुख पर कोई न कोई भाव अवश्य होगा, क्या ऐसा नहीं है?

 इन भावों को लिखें और भावों के नाम से परिचित होने का प्रयास कीजिए| उदाहरण के लिए चिंता, भय, आश्चर्य, प्रसन्नता, अपराधबोध, क्रोध, हास्य, दुख, घृणा आदि ...

जैसे ही आप नृत्य कक्ष में जाते हैं, एक-दूसरे के मुख पर पहले देखे गए भावों पर एक साथ विचार करें और उसे लिख लें|

आप कितने भावों को पहचान सकते हैं? क्या आप भावों को नवरस से जोड़ सकते हैं?

बहुत अच्छा! क्या आपने पहले भी ऐसी गतिविधि की है?

आपको अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कैसा अनुभव हुआ?


गतिविधि 4- हस्त मुद्रा का अभ्यास

भरतमुनि द्वारा लिखित नाटयशास्त्र के अनुसार, हस्त अर्थात हाथ की मुद्राओं का उपयोग नृत्य को सुशोभित करने के लिए किया जाता है, लेकिन इसमें भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अभिनय के लिए नृत्य के विशेष संकेतों के साथ-साथ कहानियों का भी वर्णन किया जाता है| कुछ हस्त मुद्राएँ शास्त्र सम्मत ग्रंथ अभिनय दर्पण से ली गई हैं|


असंयुक्त हस्त मुद्राएँ- एकल हाथ के संकेत

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 . पताका

त्रिताका


अर्द्धपताका


 
कर्तरीमुख
 मयूर

अर्द्धचन्द्र


अराल






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 शुकतुंड


मुष्टि


शिखर

 कपित्थ

 कटकामुख

सूचि


चंद्रकला






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 पद्दमकोश


सर्पशीर्ष


मृगशीर्ष

 
सिन्हामुख
 कान्गूल


अलपध


चतुर





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 भ्रमर


हंसास्य


हंसपक्ष

 
संदंश
 मुकुल


ताम्रचूड


त्रिशूल





संयुक्त हस्त मुद्राएँ - संयुक्त हाथ के संकेत

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  अंजलि


कपोत


कर्कट

 
स्वस्तिक
 डोला


पुष्पपुट





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 उत्संग


शिवलिंग


कटकावर्धन

 
कर्तरीस्वस्तिक
 शकट


शंख







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        चक्र


संपुट


पाश

 कीलक

 मत्स्य


कूर्म










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      वराह


गरुण


नागबंध

 
खटवा
 भेरुंड


अवहित्त







 नृत्य में कुछ हस्त मुद्राओं का उपयोग

r11. पताका - वरदान, रुकना, दोनों हाथों से ताली बजाना, इंकार करना, काटना|
v1  2. त्रिपताका - राजा अथवा सुर (देव)   के पात्र को दर्शाना, तिलक लगाना, दोनों हाथों को पेड़ की तरह फैलाना|
                                                                      
 t1 3. शुकतुंड- बिजली गरजना, अस्त्र या शस्त्र बनाना, तीर चलाना|
                             

r3      4. शिखर- प्रश्न करना, पानी पीना, छड़ी पकड़ना, शिवलिंग|
r5 5. कटकामुख- फूल तोड़ना, भोजन करना, माला पकड़ना, बोलना, दोनों हाथों से फूलों की माला पिरोना, भजन के लिए मंजीरा बजाना|
                                     क्या यह सांकेतिक भाषा का  उपयोग करने जैसा नहीं है|    अब अपनी कल्पना के अनुसार कुछ हस्त मुद्राओं का प्रयोग करके देखिए|


q1   6. सूचि - दूसरों की ओर संकेत करना, एक अंक दर्शाना, मना करना, तुरही (हार्न), बुलाना आदि तथा दोनों हाथों से सिंग बनाना, ठोड़ी पर रखकर याद करना|
         q2       7. सर्पशीर्ष- सांप, (भगवान को जल अर्पित करना) कुछ पकड़ना|

q3  8. हंस पक्ष - निमंत्रण देना, दूसरों के कानों में रहस्य बताना|

q7  9. अलपदम - प्रश्न पूछना, खिलता  हुआ फूल दिखाना, दोनों हाथों से गमला या पूर्ण सूर्य आदि बनाना|

q8  10. त्रिशूल - अस्त्र या शस्त्र, त्रिशूल, तीन अंक तथा माथे पर क्षैतिज तिलक लगाना| 


दी  गई   हस्त  मुद्राओ   को  देखकर  हाथ   के  संकेतो   का  उपयोग  करते  हुए   बिना  ध्वनि  के बातचीत  करने  का प्रयास   कीजिए |


1. आइए, दी गई सूची में से हाथ के संकेतों से वाक्यों को बनाएँ|

2. अपने आपको समूहों में विभक्त कर लें और एक-दूसरे से वार्तालाप कीजिए|






उदाहारण

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मैं                         घर I जा रहा हूँ|



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आप               कहाँ जा रहे हैं?



d1

आप           पानी    पीते हैं|




 गतिविधि 5– किसी गाने पर नृत्य कीजिए

अंग संचालन, सीखे गए पदचाप और हाथ के संकेतों का उपयोग करके चुने गए गीत या संगीत की पंक्तियों के लिए छोटे नृत्य वाक्यांश बनाएँ| 

क्या आपको गतिविधि में आनंद प्राप्त हुआ?


शिक्षकों के लिए


इस गतिविधि को संचालित करने के लिए 4-5 विद्यार्थियों का एक समूह बनाएँ और संगीत की कक्षा में सीखा हुआ गाना या कोई अन्य गाना बजाएँ|




गतिविधि 6– एक गीत पर नृत्य का अनुक्रम

  • किसी भी समूह गीत की दो पंक्तियाँ चुनें, जो आपने संगीत की कक्षा में सीखी हैं|

  • समूह में चर्चा कीजिए और चुने गए गीत के चरणों और क्रियाओं को व्यवस्थित कीजिए|

  • गीत के चरणों को बनाए गए समूहों में बाँट दें|

  • नृत्य के वाक्यांशों को एक साथ जोड़कर संपूर्ण नृत्य बनाना कोरिओग्राफी या नृत्य संरचना कहलाता है|

  • एक समूह को दूसरे समूह के साथ मिलाकर पूरा गाना प्रस्तुत करने वाली अपनी नृत्य कोरिओग्राफी की प्रस्तुति दें|


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