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 अध्याय - 13

नृत्य के माध्यम से अवरोधकों को तोड़ना


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नृत्य में पात्र कभी-कभी जेंडर भेदभाव से परे दूसरे जेंडर की नृत्य प्रस्तुति देता हैं| नृत्य के कई पारंपरिक प्रदर्शनों में प्रायः पुरुष महिला पात्र का भी अभिनय करते हैं|


भक्ति आंदोलन

छठवीं या सातवीं शताब्दी के आस-पास आरंभ हुए, भक्ति आंदोलन ने हमारे वर्तमान शास्त्रीय नृत्यों की जड़ों का विस्तार किया और क्षेत्रीय शास्त्रीय नृत्य रूपों के विकास को प्रभावित किया|

भक्ति काल में, नर्तक मंदिर के अंदर पूजन अनुष्ठानों का एक भाग बन गए| दक्षिणी भारत की देवदासियाँ और तेवादिचि और ओडिशा के महारी सीधे मंदिर के अंदर देवता की सेवा करते थे| असम के मत्र और दक्षिण के भागवतारों में नृत्य के माध्यम से 64 क्रियाएँ की जाती थी| उत्तर के कथाकारों ने जनसामान्य में नैतिक मूल्यों को बढ़ाने के लिए भगवान शिव की स्तुति में गीत गाए और तांडव का अभिनय प्रस्तुत किया|

w1ओडिशा के गोटीपुआ नृत्य का एक दृश्य



w2     ओडिशा के गोटीपुआ नृत्य  सीखते   विधार्थी

उदाहारण

गोटीपुआ नृत्य


गोटीपुआ नृत्य की एक बीडियो (यूट्यूब) देखें जिसकी उत्पत्ति ओडिशा में हुई थी |


भगवान जगन्नाथ और गोटीपुआ की स्तुति में मंदिर के अंदर माहारि द्वारा यह प्रदर्शन किया जाता था, युवा लड़के जनता के लिए यह नृत्य करते थे| यहाँ युवक, लड़के-लड़कियों के स्वरूप में तैयार होते हैं और कलाबाजी के साथ नृत्य करते हैं|

अर्धनारीश्वर नृत्य

चित्र में आप भगवान शिव और देवी पार्वती को एक ही चेहरे पर नृत्य श्रृंगार में देख सकते हैं|


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गतिविधि 1- अद्वितीय लोक नृत्य के वीडियो देखें


विभिन्न लोक नृत्यों के वीडियो देखिए जो अद्वितीय मुद्राओं, हाव-भाव, चलने के प्रकारों, चरणों, वेशभूषा और संगीत के साथ किए जाते हैं|

अब आप सभी बच्चे लावणी और छऊ दोनों नृत्यों के चरणों की भगिमाएँ कर सकते हैं|

आधुनिक युग में जेंडर संबंधी बाधाओं या प्रतिबंधों को हटाकर मोहिनीअट्टम (पहले केवल महिलाओं द्वारा किया जाता था), कथकली, यक्षगान

(पहले केवल पुरुषों द्वारा किया जाता था) जैसे नृत्यों में बड़ा परिवर्तन आया है | 

यहाँ यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण हैं कि विभिन्न नृत्य की शैलियों में, मुद्राएँ और चालों में कट्टर लैगिक धारणाएँ बदल गई हैं| पारंपरिक जेंडर मानदंडों को तोड़ते हुए, नर्तक मुख्य रूप से अपनी अनूठी अभिव्यक्ति बनाने के लिए विभिन्न शैलियों के तत्वों का मिश्रण करते हैं|

अब आप उस स्तर पर आ गए हैं, जहाँ आपको  अपने क्षेत्र के नृत्यों की विधाएँ सीखनी होंगी|

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महाराष्ट्र का लावणी नृत्य मुख्यतया स्त्रियों द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला नृत्य है|


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पश्चिम बंगाल का पुरुलिया छऊ मूल रूप से केवल पुरुषों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है|



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कर्नाटक से यक्षगान


गतिविधि 2- लोक नृत्य के लिए निर्देश

अब ऊपर उपयोग किए गए चरणों की आवश्यक क्रियाओं को शीघ्रता या सौम्यता से करने का अभ्यास कीजिए| 

  लावणी और भांगड़ा दोनों नृत्यों का अभ्यास लड़के और लड़कियाँ कर सकते हैं|

 इन नृत्य शैलियों में प्रयुक्त भुजाओं और हाथों की मुद्राओं के बारे में अन्वेषण करें और नवनिर्माण भी प्रयोग में लाएँ |

 गतिविधि 3- परियोजना कार्य

जोगती मंजम्मा एक अग्रणी नृत्य कलाकार है, जिन्होंने जेंडर की बाधाओं को तोड़ते हुए कर्नाटक में जोगती नृत्य के विकास में योगदान दिया है| उनके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कीजिए और उनके चित्रों के साथ अपना परियोजना कार्य प्रस्तुत कीजिए |

परियोजना का ढाँचा बचपन की प्रेरक कहानी (यदि कोई हो), सीखने के अनुभव, उपलब्धियों और   जुडाव |



 नृत्य, आकृतियों और ताल

गणित और नृत्य एक-दूसरे के पूरक हैं| हम नृत्य के माध्यम से ज्यामितीय आकृतियों का प्रदर्शन कर सकते हैं| नृत्य करते समय, इसमें ज्यामितीय आकार, अंकगणितीय लय और संचालन सम्मिलित होता है| हम नृत्य में संरचनाओं के लिए विभिन्न ज्यामितीय पैटर्न का उपयोग कर सकते हैं| लय और ताल केवल आधार है| अगली गतिविधि में इनका प्रयोग करें|

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गतिविधि 4----- नृत्य और ज्यामितीय

आकृतियाँ

नृत्य में कितनी अलग-अलग ज्यामितीय आकृतियाँ बनाई जा सकती हैं?

अपने हाथों, भुजाओं और पैरों का उपयोग करके त्रिभुज, वृत्त, वर्ग बनाएँ |

कक्षा में चर्चा कीजिए और कुछ ज्यामितीय संचालनों का अभ्यास कीजिए |


 गतिविधि 5- ---लयबद्ध ज्यामिति

आइए, गतिविधि चार के सभी तत्वों (भुजा, हाथ, पैर) को मिलाएँ और लय  के तत्व जोड़ते हुए विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों को बनाएँ|

लयबद्ध इकाइयों के विभिन्न क्रम परिवर्तन और संयोजन ताल कहलाता है|

अपने आप को समूहों में विभाजित कीजिए और अपने समूह कार्य में विभिन्न ज्यामिति पैटर्न या संरचनाओं के लिए विभिन्न अंकगणितीय लयबद्ध संयोजनों का प्रयास कीजिए|


उदाहरण

2मात्रा+  2मात्रा   = 4 मात्रा   2 थाप   + 4थाप

 2 मात्रा  + 3 मात्रा =  5  मात्रा

2 मात्रा   +  4 मात्रा  = 6 मात्रा

3 मात्रा  + 3 मात्रा  = 6  मात्रा

 3 मात्रा +3 मात्रा  = 6  मात्रा

3 मात्रा + 4 मात्रा =7 मात्रा


ऐसे संचलनों को पहचाने और कक्षा में चर्चा कीजिए कि ये ऊपर दिए गए लय क्रम से कैसे संबंधित हैं|


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