
अध्याय -14
संचलन में सामंजस्य

भारत में पारंपरिक नृत्यों की एक समृद्ध परंपरा है| इसमें प्रत्येक प्रदेश की विविध सांस्कृतिक धरोहर की जड़े अत्यंत गहरी हैं| ये नृत्य केवल संचलन की अभिव्यक्ति नहीं हैं| ये नृत्य कहानियों, भावनाओं और आध्यात्मिकता को व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम हैं|
एक पारंपरिक नृत्य, शास्त्रीय नृत्य या लोक नृत्य हो सकता है| हमारी संस्कृति में विभिन्न प्रकार के नृत्य अलग-अलग सुगंध फैलाते हैं और ये सभी अनूठे हैं|
हमारे पास असंख्य वाद्ययंत्र, संपदाएँ, वेशभूषाएँ, भाषाएँ और सांस्कृतिक मान्यताएँ हैं, जो लोगों के अनेक समूहों द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं| ऐसे पारंपरिक नृत्य हमारे राष्ट्र, सामाजिक और नैतिक अखंडता को ऊपर उठाते हैं|
अब, नृत्य की समृद्ध संस्कृति को सुरक्षित और संरक्षित करना आपका दायित्व है|
गतिविधि 1- हमारे पारंपरिक नृत्य
अपने क्षेत्र का कोई भी पारंपरिक नृत्य और उससे संबंधित गीत चुनें|
अपने क्षेत्र में प्रयुक्त मुख्य वाद्ययंत्रों के साथ एक लय में नृत्य कीजिए|
उदाहरण 1- असम के बिहू नृत्य में ढोल नामक एक वाद्ययंत्र और भैंस के सींग से बना एक अनोखा सुषिर वाद्ययंत्र 'पेपा' का उपयोग किया जाता है|
उदाहरण 2- गुजरात के सिदी धमाल नृत्य में अवनद्ध वाद्यों का प्रयोग किया जाता है|
क्या आप प्रदर्शन के लिए तैयार हैं? बस कुछ क्षण की प्रतीक्षा और करें| क्या आपने इस बात पर चर्चा की है कि आपके नृत्य में कौन-सी सामग्री (यदि कोई हो जैसे बर्तन, छड़ी, अँगूठियाँ आदि ....) का उपयोग किया जाना चाहिए?
क्या आपके पास उस विशेष नृत्य की वेशभूषा के बारे में कोई विचार है, जिसकी आप प्रस्तुति करने जा रहे हैं?
भारत के सभी नृत्य हमारी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हुए हैं| नृत्य में केवल गति, ताल और संगीत सम्मिलित नहीं है, अपितु इसमें वेशभूषा, सहायक सामग्री, सौंदर्य प्रसाधन और मंच सज्जा भी सम्मिलित होती है|
गतिविधि 2- नृत्य हेतु आभूषण और सामग्री बनाना
नृत्य के लिए आवश्यक वेशभूषा के विषय में अपने संबंधित समूह से चर्चा कीजिए| इसे गत्ता, रंगीन कागज, सजावटी रिबन आदि का उपयोग करके स्वयं बनाने का प्रयास कीजिए|
उदाहरण - नृत्य आभूषण, जैसे गले का हार, सिर पर मुकुट या पगड़ी, हनुमान का मुख-मुखौटा, रानी का मुकुट आदि|
- कान की बाली
- हार
- घुननघरु
- मांगटीका
गतिविधि 3 - यहाँ अपनी रुचि के आभूषण या सहायक सामग्री का चित्र बनाएँ या इसके मॉडल बनाएँ|
इन्हें कागज, कार्डबोर्ड, कपड़े आदि का उपयोग करके बनाने का प्रयास कीजिए|
गतिविधि 4- प्रदर्शन स्थल का ज्ञान
कक्षा में निम्नलिखित विषय पर चर्चा कीजिए-
- प्रदर्शन में बिना बाधा डाले मंच पर आवश्यक साज-सामान रखना|
- ऐसे परिधान की संरचना (design) करना, जो नृत्य करने (हाथ और पैर उठाने, कूदने, उछलने, आदि) में सुविधाजनक हो|
- मंच के दोनों ओर से प्रवेश और निकास| (रंगमंच अनुभाग में मंच संरचना देखें)
विभिन्न नृत्य शैलियों में भिन्न-भिन्न सामग्रियों से मंच को अलंकृत किया जाता है|
अद्भुत ! बहुत सुंदर| आशा करते हैं, अब आप सभी को नृत्य के प्रत्येक तत्व से संबंधित सभी जानकारियाँ प्राप्त हो गई हैं|
अभी तक आपने छोटे-छोटे समूहों में काम किया है| आगे चलकर, कक्षा के सभी सदस्य एक साथ मिलकर एक बड़े समूह के रूप में काम करेंगे| अब आप कुछ नया अन्वेषित करने जा रहे हैं|
नृत्य नाट्य
चूँकि हम न केवल नृत्य शब्द से अपितु नाटक से भी परिचित हैं|
यदि हम नृत्य और नाटक दोनों का संयोजन करें तो यह किस प्रकार होगा?
नृत्य-नाटक या नाट्य रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक रूप है, जहाँ प्रतिभागी नृत्य को एक माध्यम के रूप में उपयोग करके एक कहानी कहते हैं या एक संदेश देते हैं, जिसमें गाने और संगीत के साथ सामान्यतया पैरों, शरीर और हस्त मुद्राओं का उपयोग होता है|
नृत्य-नाटक में समन्वय, अभिव्यक्ति और कलाकारों के बीच सहयोग की आवश्यकता होती है|
समन्वय

अभिव्यक्ति

कलाकारों के बीच सहयोग

नृत्य-नाटक संचलन और अभिनय कला के माध्यम से एक कथा प्रस्तुत करता है| नृत्य-नाटक विभिन्न विषयों, संस्कृतियों या ऐतिहासिक घटनाओं से प्रेरित हो सकते हैं, जो कलात्मक अन्वेषण के लिए एक समृद्ध और विधिक मंच प्रदान करते हैं|
गतिविधि 5- प्रकृति की कहानी साझा करना
प्रकृति, पर्यावरण या स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित कोई ऐसी कहानी ढूँढ़े, जो समाज को नैतिकता का संदेश देती हो और उस पर परिचर्चा कीजिए|
उदाहरण
संबंधित कहानियों के शीर्षक
- प्लास्टिक के उपयोग से बचना|
- जल स्रोतों की रक्षा|
- मोबाइल का अत्यधिक प्रयोग|
- रसायन मुक्त अनाज उगाना|
- शिक्षा में समानता|
टिप्पणी - अंग्रेजी या किसी भी भाषा की पाठ्यपुस्तक से एक कहानी चुनिए|
उपयुक्त कहानी को चुनिए और कक्षा में साझा कीजिए, जिसे आप अपने आस-पास की स्थिति और क्षेत्र से जोड़ सकें| किसी लिखित प्रामाणिक कथा को पटकथा कहते हैं जिसमें नृत्य-नाटक, नाट्य के प्रदर्शन या प्रस्तुति के लिए संवाद, गीत वाक्यांश, क्रियाएँ और निर्देश सम्मिलित होते हैं| नृत्य में संवाद अधिकतर हस्त मुद्राओं और मुखाभिन्य के माध्यम से होता है, यद्यपि शब्दों का भी प्रयोग किया जा सकता है|
सोचिए
चर्चा कीजिए ...
लिखिए
किसी चयनित कहानी या कविता के लिए पटकथा लिखने का प्रयास कीजिए और नाट्य बनाने के लिए एक-दूसरे के साथ विचार साझा कीजिए|
पटकथा लिखते समय हस्त मुद्राओं, पात्रों, वेशभूषा, रंगमंच की सामग्री और मंच की आवश्यकताओं और संवाद पर ध्यान दें|
इस गतिविधि में, आप कहानी के सभी पात्रों को जीवन दे रहे हैं|
नाट्य प्रदर्शन के लिए हाथ और शरीर की मुद्राओं का अभ्यास कीजिए|
मुख, चरण, चाल, हस्तमुद्रा के तत्वों का कविता में संकलन करें और इनका अभ्यास करें|
बोल या सोल्लु केटू (जैसे-त-क-धी-मी) और सरगम (संगीत कक्षा में सीखा गया) का उपयोग करके लयबद्ध प्रारूप के साथ नृत्य की पहचान कीजिए, जो नाट्य में सम्मिलित हैं| मुख के भावों का अभ्यास कीजिए, जो नाट्य का प्रमुख तत्व है| नाट्य के व्यवस्थित परिणाम के लिए आप सभी को मिलकर काम करना होगा|
गतिविधि 6– नृत्य संरचना और नाट्य प्रदर्शन
कक्षा में सभी एकत्र होकर एक समूह में मनन चिंतन करके नाट्य की संरचना कीजिए, जिसमें संवाद, लयबद्ध संगीत, नृत्य की लय और संचलन सम्मिलित हों|
नृत्य कोरिओग्राफी के इस चरण में हमें सामग्री, वेशभूषा, आभूषण, मंच सजावट आदि पर ध्यान देने की आवश्यकता है|
मंच पर प्रदर्शन करते समय सामग्रियों के साथ अभ्यास कीजिए, आप यह सहजता के साथ कर सकते हैं|
एक बार संरचना पूरी हो जाने के बाद, अब अभ्यास करने का समय आ गया है|
अभ्यास ! अभ्यास ! अभ्यास !
अभ्यास सफलता की कुंजी है|
नाट्य के अभ्यास के बाद अब बारी है मंच पर पूर्व अभ्यास करने की|
बहुत अच्छा !
अपना नाटक अपनी कक्षा या दूसरे स्थानों पर जाकर दर्शकों के सामने प्रस्तुत कीजिए|







