Skip to content

                                                                                                                                                                                                    f456                                            

अध्याय -16

 भावों का अनावरण!




s2



v657


रंगमंच 


"एतद्रसेषु भावेषु 

सर्वकर्मक्रियासु च| 

सर्वोपदेशजननं 

नाट्यमेतद्भ‌विष्यति||"||११४||||

अर्थ

यह नाट्य रसों, भावों तथा इन 

सभी (रसभाव आदि) के  कार्य और 

 क्रियाओं के द्वारा उपदेश प्रदान करने 

वाला होगा | ११४|

स्रोत- नाट्यशास्त्र, अध्याय-1





दृश्य एक - भावों को समझना

रंगमंच की कक्षा शुरू करने से पहले आप कैसा महसूर कर रहे हैं यह दर्शाने के लिए एक शब्द लिखें|


अब हम लोग भावों को खोजेंगे, अनुभव करेंगे और प्रयोग में लाएँगे| क्या आपको यह एक खेल की तरह लगता है? आइए, अब हॉट सीट पर बैठते हैं|

निर्देश- दी गई परिस्थिति  -सिर नीचे, आँखे बंद, ध्यान से सुनें|

आपको एक कहानी सुनाई जाएगी, जिसे ध्यान से सुनना है और उसके दृश्यों की कल्पना करते हुए, उसमें डूब जाना है| कहानी अचानक रुकेगी और आपको एक शब्द सुनाई देगा 'देखो'| आपको जल्दी से ऊपर देखना है और उस स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया देनी है जहाँ कहानी रुकी थी|

सामान्य स्तर- एक सरल स्थिति जो नाटकीय प्रतिक्रिया पर समाप्त होती है|

प्रस्तुत अवधारणाएँ

  • जीवन में भाव, नाटक में भाव
  • भारतीय एवं पाश्चात्य दृष्टिकोण 
  • मुखौटा बनाना



उदाहरण 1


शुरुआती स्थिति में

 आप अपनी माँ को यह बताने के लिए उत्सुक हैं कि स्कूल यात्रा की घोषणा हो गई है| आप सड़क पर चल रहे हैं| बारिश होने लगती है| आप दौड़ना शुरू कर देते हैं|

h887


चूँकि आप ठीक से नहीं देख पाते, आपके कदम लड़खड़ा जाते हैं और आप नाले में गिर जाते हैं| अब 'देखो'!


bn


उच्च स्तर- कहानी पहली प्रतिक्रिया के बाद भी चलती रहती है| सब अंतिम प्रतिक्रिया में रुक जाते है, और सुनना चलता रहता है, और 'देखो' पर प्रतिक्रिया देते हैं| कहानी में कई मोड़ लाए जा सकते हैं और कहानी में प्रत्येक मोड़ पर प्रतिक्रिया अभिव्यक्त करने के लिए कहा जा सकता है|


उदाहरण 2

शुरुआती स्थिति में

आप राजकुमारी हैं और घोड़े पर सवार होकर जंगल जा रही हैं| आपको पीछे से एक स्वर सुनाई देता है, जो परिचित सा लगता है| आप पीछे मुड़ती हैं और देखती हैं कि आपको वह चेहरा जाना-पहचाना सा लगता है|


h887



आप याद करने का प्रयास करती हैं और आपको याद आ जाता है| यह वही व्यक्ति है, जो हमारे पूर्वजों के फोटो में है, जो 500 साल पुरानी है| अब 'देखो'!


xc



मूर्तिवत ठहरिए

आप फिर उस व्यक्ति से बचने का प्रयास करती हैं, लेकिन वह आपका पीछा कर रहा है| आप तेजी से आगे बढ़ रही हैं, वह व्यक्ति चट्टान से टकराता है और उसकी जेब से कुछ गिर जाता है| यह वही खिलौना है, जिससे कल आप खेल रहे थे| अब सोचो...!


as



मूर्तिवत ठहरिए

आपका कल वाला खिलौना उस तक कैसे पहुँचा? ओह!! याद आया... आपने उसे महल के बाहर झाड़ियों में कहीं खो दिया था| आपका चचेरा भाई, जो इससे खेल रहा था, उसी ने इसे छुपाया होगा| आप हिम्मत करते हुए कोट खींचकर उसका असली चेहरा सामने ले आते हैं| यह तो आपका शरारती चचेरा भाई है|


df



विस्तारण - अब एक बच्चा स्वयं अपनी कहानी रचता है और 'शुरुआती स्थिति', 'मूर्तिवत ठहरिए' और 'सोचिए' का प्रयोग कर अपनी कहानी सुनाता है| अन्य बच्चे उस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं|


bj

आइए, घेरा बनाएँ

  • आज की गतिविधि से हमने, जो अनुभव प्राप्त किया, उन सभी भावों की एक सूची बनाएँ|
  • आपके अनुसार इनमें से सबसे जटिल भाव कौन-सा था? क्यों?
  • ऐसी कोई अनुभूति या भाव जिसे आप नाम नहीं दे सकते, क्या आप उसका वर्णन कर सकते हैं?


क्या आप जानते हैं कि ऐसी भी कुछ परिस्थितियाँ होती हैं, जब आप एक ही समय में दो भावों को महसूस   करते हैं| उदाहरण के लिए आप अपने दोस्तों के साथ खेल रहे हैं और आप हार जाते हैं| क्योंकि उनमें से किसी एक ने खेल में आपके साथ धोखा किया था| क्या आपको पता है कि वे दोनों भाव क्या हैं?

दुख (खेल हारने के कारण) और गुस्सा (दोस्त ने धोखा दिया) |

    आपके अंदर कौन-सा भाव उत्पन्न होगा, जब आप बारिश में किसी कुत्ते के बच्चे को भीगते हुए देखते हैं, लेकिन आप उसकी सहायता करने के लिए नहीं जा सकते, क्योंकि आपको जुकाम है और बाहर मूसलाधार बारिश भी हो रही है|

NJ

और

बहुत अच्छे... हम सभी ऐसे भावों से गुजरते हैं| कभी-कभी इन भावों की संख्या तीन भी हो सकती है, लेकिन यह तब तक ही ठीक है, जब तक आपको पता चले कि आप किन भावों से गुजर रहे हैं| अब, आप न केवल अपने भावों को पहचान सकते हैं, बल्कि उन्हें आप नाम भी दे सकते हैं| विभिन्न परिस्थितियों में अपने भीतर देखना और पहचानना बहुत महत्वपूर्ण है कि आप किस तरह के मनोभावों से गुजर रहे हैं|

 हम सभी अपनी दैनिक दिनचर्या में अनेक भावों को अनुभव करते हैं| इन भावों के संदर्भ में विद्वानों ने वर्षों से  चिंतन किया है| आइए, हम खेल-खेल में विभिन्न भावों के नाम सूचीबद्ध करते हैं| ठहरो, अब सोचो इस विषय पर वर्षों से काम करने वाले विद्वानों ने कितने भावों को सूचीबद्ध किया होगा? क्या लगता है! कितना होगा? 50? 100? या इससे भी अधिक? वास्तव में ये... नौ हैं! केवल नौ? कैसे? क्या आप अन्य के बारे में जानते हैं? वे लोग कौन थे?


वर्षों तक अध्ययन, अवलोकन और विश्लेषण करने के बाद प्राचीन काल में हमारे ऋषियों ने भावों को कुल 'नवरसों' में वर्गीकृत किया| हमने जिन सभी भावों को समझा, अनुभव किया, क्या उन्हें 'नव रसों' में विभाजित किया जा सकता है?

   इसका विभाजन मुख्य रूप से दो मूल तत्व - रस  और भाव' के आधार पर किया गया है|



भाव

मन का स्थायी भाव|

धारणा, विचार और प्रवृत्ति पर आधारित इसकी परिणति, यह आसानी से नहीं बदलता |



स्थापित करने के लिए

I

                                              I                                              

I

                                                           V                                                          

रस

संवेगात्मक सार |

किसी परिस्थिति, अनुभूति और मनोभाव के परिणामस्वरूप होने वाला अनुभव |




क्या आपने कभी ध्यान दिया है? एक ही परिस्थिति में आपकी और आपके मित्र की अनुभूति भिन्न-भिन्न होती है, ऐसा क्यों? इसका मुख्य कारण दोनों के भावों में अंतर का होना है| क्योंकि आपके पास एक भिन्न भाव है (अलग दृष्टिकोण या विचार)| जिससे एक भिन्न रस (अनुभव जो आपने महसूस किया) की उत्पत्ति होती है |

उदाहरण

1. आप अपने मित्र के साथ अपना पसंदीदा खेल देख रहे हैं| आपकी टीम जीत जाती है| आप रोमांचित हो जाते हैं, आपका मित्र खुश तो है, लेकिन उतना उत्साहित नहीं होता है| क्योंकि उसके पसंदीदा खिलाड़ी ने अच्छा स्कोर नहीं किया|


2. आप अपने मित्र के साथ खाना खा रहे हैं| कक्षा में एक शरारती बच्चा आता है और आप दोनों का मजाक उड़ाता है, हँसता है, हँसकर चला जाता है| आप चिढ़ जाते हैं, लेकिन स्वयं को नियंत्रित रखते हुए कहते हैं, 'कौन परवाह करता है', और दूसरी ओर आप देखते हैं कि आपका मित्र आहत होकर एक कोने में बैठा रो रहा है| इन दोनों घटित स्थितियों में विचार और परिस्थिति दोनों एक समान है| कौन-सा भाव और अनुभव (रस)


RE


CG


 उत्पन्न होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका मूल दृष्टिकोण या मूलविचार (भाव) क्या है? भारत के महान ऋषि-मुनियों ने अपने अध्ययन में भाव और मानव मस्तिष्क के संदर्भ में अपने अनेक विचार दिए हैं| अपने अध्ययन के आधार पर उन्होंने रसों को (हमारे अनुभव) 'नव रस' में वर्गीकृत किया है|



vv

श्रृंगार

प्यार ,खूबसूरती,

rr
हास्य

विनोद,  खुशी,
hh
वीर

वीरता, साहस,

jj

भयानक

भय ,डर ,


            ll


करुणा

सहानुभूति, दुख ,

mn
वीभत्स

घृणा,  धिनौना,



bb

रौद्र

गुस्सा ,  क्रोध

                drt
अद्भभुत

आश्चर्य ,  विस्मय 


st
शांत

शांति , परमानन्द,




अब आप उस सभी भावों को 'नव रसों' में रख सकते हैं, जिसकी हमने ऊपर चर्चा की है| अब आप इसे अनुभव करने की कोशिश कीजिए|


खेल-खेल में नवरस

इन 'नवरसों' को समझने के लिए हम इस दिलचस्प खेल को खेलते हैं| सबसे पहले किसी कमरे में नवरसों को एक वृत्ताकार घेरे में अलग-अलग दर्शाएँ| जब संगीत बजना शुरू हो, तो सभी विद्यार्थी उस वृत के चारों ओर घूमना शुरू कीजिए| जैसे ही संगीत बंद हो, जो विद्यार्थी जिस रस के पास खड़ा हो उसे उसी रस को अपने हाव-भाव और क्रियाओं के माध्यम से व्यक्त करें| जो विद्यार्थी ऐसा नहीं कर पाएगा, वह घेरे से बाहर हो जाएगा|

lk



संगीत फिर से बजना शुरू होगा और यह खेल इसी क्रम में लगातार चलता रहेगा| वैकल्पिक रूप से एक वृत्त के बजाय फर्श पर ही नौ वर्ग या आयत बनाए जा सकते हैं|

रस की ये अवधारणाएँ प्रदर्शन कला (नाट्य कला) पर बड़े काम का एक छोटा-सा भाग हैं| इनमें कहानी को पढ़ने के सबसे मूलभूत विचार से लेकर  कला के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने की संभावनाओं तक सब कुछ है| जहाँ  रूप-सज्जा, वेशभूषा, प्रकाश, संगीत, नृत्य, पूर्वाभ्यास, अनुशासन, सुरक्षा और समाज के प्रति कला की जवाबदेही सहित विभिन्न पहलुओं के बारे में बात की गई है| इन प्रदर्शन कलाओं पर आधारित महान ग्रंथ को आचार्य भरतमुनि द्वारा लिखा गया है जिसे 'नाट्यशास्त्र' ग्रंथ के नाम से जाना जाता है|



इसकी शुरुआत कैसे हुई? इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है, जिसे नाट्‌योत्पत्ति (प्रदर्शन कला का जन्म) कहा जाता है|


cbcb

                      (1)   देवों के देवता ब्रह्मा जी   ने देखा कि सभी देवता बहुत हतोत्साहित और आलसी हो गए हैं| वे कुछ भी न करके समय बर्बाद करते हैं|


xfy

(2)   फिर ब्रह्मा ने  ऋगवेद से पाठ, यजुर्वेद से अभिनय, सामवेद से संगीत और अर्थवेद से  रस लिया |



zdsdrt

(3 )  उन्होंने एक अद्वितीय ग्रंथ नाट्य वेद की रचना की, उन्हें लगा कि देवता इसे पसंद करेंगे और इसका उपयोग करेंगे|





tyrtr

   (4)  लेकिन देवता गण नाट्य  वेद  में कुछ भी समझ नहीं पाए और वे भ्रमित होने लगे |




kgy

(5)   इसलिए ब्रह्मा, एक बुद्धिमान ऋषि भरत मुनि को बुलाते है और उनसे नाट्य वेद को सरल करने के लिए अनुरोध करते हैं, ताकि कोई भी इसे आसानी से समझ सके |




xfgh

(6 )  तब भरत मुनि नाट्‌यशास्त्र  लिखते हैं| वो अपने  सौ  पुत्रों को नाट्‌यशास्त्र के लिए   चुनते हैं और एक प्रस्तुति तैयार करते हैं |




cft

(7)   देवता प्रर्दशन कला को देखकर रोमांचित होते है| उन्होंने इसे सराहा और इसकी प्रशंसा की और इसे अपने जीवन में अपनाया | 




यह कहानी हमें बताती है कि नाट्‌यशास्त्र प्रदर्शन कला पर लिखी गई एक पुस्तक है| जिसमें चारों वेद और बहुत से अन्य प्रसंग सम्मिलित है| इसे  पाँचवा वेद (पंचम वेद) भी कहा जाता है| नाट्‌योत्पत्ति की इस कहानी से  नाट्‌यशास्त्र      ग्रंथ का आरंभ होता है. यदि आपने यह कहानी पढ़ी है तो इसका अर्थ यह है कि आपने नाट्यशास्त्र पढ़ना शुरू कर दिया है| हम आगामी कक्षा में इसके बारे में और भी प्रसंग जानेंगे|



 दृश्य दो - भावों का अन्वेषण

अब तक हमने चेहरे के हाव-भाव और उसकी अभिव्यक्ति को देखा| इस बात को आप समझ गए होंगे कि आपके चेहरे का प्रत्येक अंग यह दिखाने में सहायक होता है कि आप अंदर से कैसा अनुभव कर रहे हैं| लेकिन केवल चेहरा ही क्यों? दो अन्य भी महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो हमें अभिव्यक्ति में मदद करते हैं| वे हैं स्वर और शारीरिक भाषा या देहभाषा |

आइए, स्वर और शारीरिक भाषा के माध्यम से इन सभी 'नवरस' का पता लगाने का प्रयास करते हैं|
 अब, चलिए इसी तरह एक खेल खेलते हैं हॉट-सीट| लेकिन इस बार जब आप 'देखो' शब्द सुनें, तो आपको प्रतिक्रिया देने के लिए अपने स्वर और शारीरिक भाषा का उपयोग करना होगा| क्या यह आनंददायी है?

निर्देश- शुरुआती स्थिति है - सिर नीचे, आँखें बंद, ध्यान मग्न |

कहानी को ध्यान से सुनें, कहानी में पूरी तरह रम जाएँ| कहानी अचानक से रुक जाएगी और आपको 'देखो' शब्द सुनाई देता है, आपको तुरंत

lopu

an

 उदाहरण                                                                                              किसी अन्य रस के लिए सरल चित्र बनाएँ
  रौद्र- गुस्सा, क्रोध                                                                                    उसका नाम ......................................................



चेहर की अभिव्यक्ति


शारीरिक भाषा संयुक्त रूप चेहर की अभिव्यक्ति शारीरिक भाषा संयुक्त रूप

bhu
fgj nmb


 ऊपर देखना है और उस स्थिति पर स्वर और क्रिया से प्रतिक्रिया देनी हैं|

आधारभूत - एक सरल परिस्थिति, जो एक नाटकीय प्रतिक्रिया में समाप्त होती है|

अग्रिम- कहानी पहली प्रतिक्रिया के बाद भी आगे बढ़ती रहती है, वे अंतिम प्रतिक्रिया में रुक जाते हैं और सुनना जारी रखते हैं और 'देखो' पर प्रतिक्रिया देते हैं| कहानी में कई मोड़ लाए जा सकते हैं| कहानी में प्रत्येक मोड़ पर क्रिया-प्रतिक्रिया हो सकती है|
 
विस्तार - 'शुरुआती स्थिति' 'मूर्तिवत ठहरिए' और 'सोचिए' के साथ बच्चे स्वयं अपनी कहानियाँ सुनाएँ| जबकि अन्य बच्चे प्रतिक्रिया दें |

यह देखना अदभुत है कि कैसे आप न केवल अनेक स्थितियों में भावों को पहचानने में सक्षम हैं, अपितु अपने चेहरे, शरीर और स्वर का उपयोग करने में भी सक्षम हैं| ठीक वैसे ही, जैसे हम सोच रहे थे कि सदियों पहले लोगों ने भावों को कैसे देखा होगा और उसका विश्लेषण किया होगा तभी तो भारत में नवरस की खोज हुई होगी| अब हम देखेंगे कि अन्य देशों में होने वाले प्रदर्शनों में भावों को किस प्रकार देखा जाता था |



                                                                          jkhfdf


 आइए, घेरा बनाएँ

  • उन भावों की सूची बनाएँ, जिन्हें हमने आज अनुभव किया|
  • जब आपने स्वर और क्रिया को जोड़ा, तो क्या यह करना आसान था? या केवल चेहरे के भाव प्रकट करना आसान था?
  • क्या ऐसा कोई अनुभव है, जिसे आप नाम नहीं दे सकते? क्या आप इसे ध्वनि, क्रिया या अभिव्यक्ति के साथ निभा सकते हैं?
  • एक ही दिन में आप जो भाव बार-बार अनुभव करते हैं उसका अवलोकन कीजिए?




 भारत के बाहर प्रदर्शनकलाओं का सर्वाधिक प्राचीन ज्ञात स्त्रोत ग्रीक रंगमंच है, जिसका काल पाँचवीं शताब्दी ई. पू. माना जाता है|

'उर्वरकता' और 'उल्लास' के ग्रीक देवता "डायनोसियस”, का पोषक अंगूर माना जाता था| उस समय ग्रीक के लोग अपने देवता को खुश करने के लिए 'डायनोसियन' त्योहार मनाते थे| इस दौरान वे डायनोसिस की प्रशंसा में भजन गाते थे, जिसे 'डिथिरैम्ब' कहा जाता था| गीत गाना और बकरे की बलि देना अनुष्ठान की एक परंपरा थी|

बकरे की बलि अनुष्ठान के दौरान गाया जाने वाले गीत जिससे 'ट्रैगोडीया' (टैग -ऑडिया) शब्द का जन्म हुआ| जिसका अर्थ है, "बकरों का गीत" जिससे 'ट्रेजिडी' शब्द का जन्म हुआ|

इस शैली का पहला नाटक इन्हीं घटनाओं और कहानियों पर आधारित था| वे सब त्रासदी के नाटक थे| वे सब गंभीर और दुखद अंत वाले नाटक होते थे| जिसमें नाटक के मुख्य पात्र को या तो दंडित किया जाता था या मृत्यु दण्ड दिया जाता था|
6rgfd
 मानचित्र पैमाने पर नहीं कलाकार प्रतिनिधित्व

7tgfgh

डायनोसिस -ग्रीक मनोरंजन का देवता


                                          'ओड' एक प्रकार का गीति काव्य है, जिसमें किसी घटना या व्यक्ति का महिमामंडन किया जाता है|




ऐसी और भी कहानियाँ कई वर्षों तक प्रस्तुत  की जाती रहीं | चौथी शताब्दी ई. पू. से कहानियों में   बदलाव आना शुरू हुआ| जहाँ कहानी के अंत सुखद  और कहानी में आनंद होता था| यहीं से 'कॉमेडी' की शुरुआत मानी जाती है| 'ट्रेजिडी' के समान ही 'कॉमेडी' शब्द की उत्पति ग्रीक शब्द कोमोस (आनंद) और ऑडिया गीत से है| हास्य नाटक में अंत सुखद होता है| इन नाटकों में मनुष्यों, जानवरों और देवताओं ने के तत्व सम्मिलित होते हैं| इनमें नृत्य श्रृंखला, सीधा दर्शकों या नाटककार के साथ संवाद भी सम्मिलित है| 'ग्रीक रंगमंच' प्रदर्शन की इस तस्वीर को देखें| को आपने क्या देखा? तीनों कलाकारों ने मास्क पहन रखा है|

मुखौटा ग्रीक रंगमंच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था| वे त्रासदी नाटक को प्राथमिकता क्यों देते थे, यह  भी इसी कारण से जुड़ा हुआ है|

5rety

यूनानी नाट्य का अभिनय


 त्रासदी वास्तव में गंभीर और दुखद है| क्या यूनानियों को हमेशा दुखी रहना और रोना पसंद था? नहीं, इससे उन्हें अपनी दबी हुई भावनाओं और दर्द को दूर करने में सहायता मिली होगी| इसे 'केथार्सिस' (विरेचन) कहा जाता है| आप उच्च कक्षा में इसके बारे में और जानेंगे| मुखौटा चरित्र को चित्रित करने में सहायता करता है, न कि अभिनय करने वाले व्यक्ति को|

ये मुखौटे तो आपने कई बार देखे होंगे? लेकिन आपको क्या लगता है वह क्या दर्शाते हैं? हमने जो अध्ययन किया है, आप उससे इसका अनुमान लगा सकते हैं|

8fgdg


त्रासदी और हास्य

अगली बार जब आप यह मुखौटा देखेंगे, तो आपको इसके पीछे की कहानी पता चल जाएगी|









9fghf


 आइए, घेरा बनाएँ


1.  किसी स्थिति को समझने के लिए आपने अपने भाव और रस के विचार का कैसे अवलोकन किया?

         इसका एक उदाहरण दीजिए|

2.    नवरस (प्राचीन भारत से) और त्रासदी  - हास्य (प्राचीन ग्रीक से) को जोड़ने का प्रयास कीजिए|

  •  किस रस को त्रासदी और हास्य में समावेश किया जा सकता है|
  •   क्या और भी भाव हैं? जिन्हें इनके अंतर्गत वर्गीकृत नहीं किया जा सकता?

3.     उन सभी भावों की एक सूची बनाएँ, जिससे आप एक दिन में गुजरे थे| प्रत्येक को रस के समान नाम दीजिए|

4       जब आप कोई कहानी पढ़ते हैं, तो उन सभी भावनात्मक क्षणों को नाम के साथ चिह्नित कीजिए, जिस पर चर्चा की गई है|




 गतिविधि - मुखौटे और भाव


आइए, हम मुखौटों के माध्यम से भावों को समझें| मुखौटे चेहरे को ढक लेते हैं और चेहरा भावों को दिखाने का एक माध्यम होता है| फिर मुखौटे भावों को कैसे दिखा सकते हैं?
    मुखौटों में भाव और चरित्र दोनों निहित होते हैं, जिन्हें आप पहन सकते हैं और अभिनय कर सकते हैं!
वैसे तो मुखौटे कई प्रकार के होते हैं, लेकिन हम उनमें से दो के बारे में चर्चा करेंगे|

कैंची और गोंद का प्रयोग करते समय सावधानी रखिए, उनका प्रयोग अपने अध्यापक के पर्यवेक्षण में ही कीजिए!


addd

आधा मुखौटा





bcfvr

पूरा मुखौटा



गत्ते का मुखौटा (आधा मुखौटा)- (गत्ता, कैंची, गोंद और रंग)


  • सबसे पहले चेहरे का एक खाका बनाएँ, साथ में इस बात का भी ध्यान रखिए कि रेखांकित किए जा रहे चेहरे के दोनों ओर एक संतुलन बना रहे| इसका एक सरल तरीका यह है कि कागज को ठीक बीच से मोड़ दिया जाए (चित्र देखिए)|
  •  आँख और नाक को चिह्नित कीजिए, इस तरह से चेहरे के दोनों ओर के आकार संतुलित हो जाएँगे| आँख, नाक और कान या अपनी इच्छानुसार किसी अन्य विशेषता को जोड़ने के लिए भिन्न- भिन्न आकृति और डिजाइन का प्रयोग कीजिए|
  • रंगीन कागज और गोंद की सहायता से अनेकों रचनात्मक विशेषताओं को जोड़ा जा सकता है|
  • गत्ते को चेहरे के अनुसार आकार देने के लिए पहले इसे मोड़ लीजिए एवं एक कोण से काटिए और फिर चिपकाइए|
  • मुखौटे में रिबन या इलास्टिक बाँधने के लिए कान के पास छेद कीजिए|





fdgd

चित्र और कागज को आधा मोड़ लीजिए|




sfd
कैंची से रेखाओं को किनारे से काटिए




asdsd
             गत्ते को हल्का-सा मोड़ने के लिए टेबल के किनारे का प्रयोग कीजिए                           
                                                                       





vsdg
अपने मुखौटे को रंगों, सीप, शंख, पंख या अपनी पसंद की किसी भी वस्तु से सजाएँ





कागज का मुखौटा (पूरा मुखौटा) 

- (पुराना अखबार, एक गुब्बारा, गोंद, कैंची और रंग)|

  • कागज को टुकड़ों (अखबार या सामान्य कागज) को फाड़ लीजिए, उसे पानी में गीला कीजिए और गुब्बारे की सतह पर धीरे-धीरे लगाएँ|
  • गुब्बारे के आधे हिस्से को दिए गए चित्र की तरह ढकिए| कागज के किनारों को एक-दूसरे के ऊपर चढ़ाकर लगाएँ| चेहरे की आकृति के उभर आने तक गीले कागज की परत को बार-बार लगाएँ|
  • इसे पूरी तरह सूखने दीजिए, कागज की गीली परत लगाने, उसके सूखने, दोबारा परत लगाने और इच्छित आकार प्राप्त करने की इस प्रक्रिया में लगभग तीन दिन लग सकते हैं|
  • गुब्बारे को फोड़ लीजिए और निश्चित आकार के लिए कागज को काट लीजिए|
  •  पात्रों के अनुसार मुखौटों में रंग भरिए, विभिन्न भावों और चेहरे की मुद्राओं के लिए भिन्न-भिन्न रंगों का प्रयोग कीजिए |
CFTS
सामान्य रूप से एक मुखौटा विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति करता है| प्रदर्शन कलाओं में मुखौटों का कई तरह से प्रयोग किया जाता है तथा इसे भिन्न-भिन्न सांस्कृतिक उत्सवों और नाट्य परंपराओं में देखा जा सकता है| चाहे किसी पात्र, सांस्कृतिक प्रतीक या किसी गहरे अर्थ को व्यक्त करना हो, मुखौटे प्रदर्शन कला की दुनिया में एक शक्तिशाली और बहुमुखी उपकरण होते हैं| भारत में 50 से अधिक प्रकार के मुखौटों की पहचान की गई है|


EEE

 गुब्बारे पर गीले कागज के टुकड़े  | 5-6   परत आखिरी पात गोंद के साथ



AAA

अच्छे से सूख जाने के बाद गुब्बारे को फोड़कर बाहर निकाल लीजिए|



SSSS

आकार को स्पष्ट करने लिए बाह्य रेखा को काटिए (बड़ों की सहायता लीजिए|




NNNN

अब मुखौटे को रंगों व अन्य सामग्रियों से सजाएँ|




                                         सामूहिक गतिविधि

  •  3-4 विद्यार्थियों का एक समूह बनाएँ|
  • नवरस से किसी एक रस का चयन कीजिए|
  • अपनी स्थानीय संस्कृति से किसी डिजाइन की पहचान कीजिए|
  • उस स्थानीय संस्कृति के आधार पर संबंधित रस (भाव) में एक मुखौटे का निर्माण कीजिए|
टिप्पणी- निर्माण के लिए चुन सकते
  •  गत्ते वाला पूरा मुखौटा|
  • गुब्बारे के साथ कागज वाला मुखौटा|

उदाहरण

सांस्कृतिक इसमें महाराष्ट्र की जनजातीय डिजाइन और वर्ली कला है|

भाव  भौंह- और आँखें क्रोध का भाव प्रदर्शित कर रही हैं (रौद्र)|

TTT



                                        CGHUII

हास्य, हर्ष

क्रोध






                                        CVGHH

पुरुलिया छऊ (पश्चिम बंगाल)

चाम (लद्दाख)




YFFH