अध्याय -16
भावों का अनावरण!


रंगमंच
"एतद्रसेषु भावेषु
सर्वकर्मक्रियासु च|
सर्वोपदेशजननं
नाट्यमेतद्भविष्यति||"||११४||||
अर्थ
यह नाट्य रसों, भावों तथा इन
सभी (रसभाव आदि) के कार्य और
क्रियाओं के द्वारा उपदेश प्रदान करने
वाला होगा | ११४|
स्रोत- नाट्यशास्त्र, अध्याय-1
दृश्य एक - भावों को समझना
रंगमंच की कक्षा शुरू करने से पहले आप कैसा महसूर कर रहे हैं यह दर्शाने के लिए एक शब्द लिखें|
अब हम लोग भावों को खोजेंगे, अनुभव करेंगे और प्रयोग में लाएँगे| क्या आपको यह एक खेल की तरह लगता है? आइए, अब हॉट सीट पर बैठते हैं|
निर्देश- दी गई परिस्थिति -सिर नीचे, आँखे बंद, ध्यान से सुनें|
आपको एक कहानी सुनाई जाएगी, जिसे ध्यान से सुनना है और उसके दृश्यों की कल्पना करते हुए, उसमें डूब जाना है| कहानी अचानक रुकेगी और आपको एक शब्द सुनाई देगा 'देखो'| आपको जल्दी से ऊपर देखना है और उस स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया देनी है जहाँ कहानी रुकी थी|
सामान्य स्तर- एक सरल स्थिति जो नाटकीय प्रतिक्रिया पर समाप्त होती है|
प्रस्तुत अवधारणाएँ
- जीवन में भाव, नाटक में भाव
- भारतीय एवं पाश्चात्य दृष्टिकोण
- मुखौटा बनाना
उदाहरण 1
शुरुआती स्थिति में
आप अपनी माँ को यह बताने के लिए उत्सुक हैं कि स्कूल यात्रा की घोषणा हो गई है| आप सड़क पर चल रहे हैं| बारिश होने लगती है| आप दौड़ना शुरू कर देते हैं|

चूँकि आप ठीक से नहीं देख पाते, आपके कदम लड़खड़ा जाते हैं और आप नाले में गिर जाते हैं| अब 'देखो'!

उच्च स्तर- कहानी पहली प्रतिक्रिया के बाद भी चलती रहती है| सब अंतिम प्रतिक्रिया में रुक जाते है, और सुनना चलता रहता है, और 'देखो' पर प्रतिक्रिया देते हैं| कहानी में कई मोड़ लाए जा सकते हैं और कहानी में प्रत्येक मोड़ पर प्रतिक्रिया अभिव्यक्त करने के लिए कहा जा सकता है|
उदाहरण 2
शुरुआती स्थिति में
आप राजकुमारी हैं और घोड़े पर सवार होकर जंगल जा रही हैं| आपको पीछे से एक स्वर सुनाई देता है, जो परिचित सा लगता है| आप पीछे मुड़ती हैं और देखती हैं कि आपको वह चेहरा जाना-पहचाना सा लगता है|

आप याद करने का प्रयास करती हैं और आपको याद आ जाता है| यह वही व्यक्ति है, जो हमारे पूर्वजों के फोटो में है, जो 500 साल पुरानी है| अब 'देखो'!

मूर्तिवत ठहरिए
आप फिर उस व्यक्ति से बचने का प्रयास करती हैं, लेकिन वह आपका पीछा कर रहा है| आप तेजी से आगे बढ़ रही हैं, वह व्यक्ति चट्टान से टकराता है और उसकी जेब से कुछ गिर जाता है| यह वही खिलौना है, जिससे कल आप खेल रहे थे| अब सोचो...!

मूर्तिवत ठहरिए
आपका कल वाला खिलौना उस तक कैसे पहुँचा? ओह!! याद आया... आपने उसे महल के बाहर झाड़ियों में कहीं खो दिया था| आपका चचेरा भाई, जो इससे खेल रहा था, उसी ने इसे छुपाया होगा| आप हिम्मत करते हुए कोट खींचकर उसका असली चेहरा सामने ले आते हैं| यह तो आपका शरारती चचेरा भाई है|

विस्तारण - अब एक बच्चा स्वयं अपनी कहानी रचता है और 'शुरुआती स्थिति', 'मूर्तिवत ठहरिए' और 'सोचिए' का प्रयोग कर अपनी कहानी सुनाता है| अन्य बच्चे उस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं|

आइए, घेरा बनाएँ
- आज की गतिविधि से हमने, जो अनुभव प्राप्त किया, उन सभी भावों की एक सूची बनाएँ|
- आपके अनुसार इनमें से सबसे जटिल भाव कौन-सा था? क्यों?
- ऐसी कोई अनुभूति या भाव जिसे आप नाम नहीं दे सकते, क्या आप उसका वर्णन कर सकते हैं?
क्या आप जानते हैं कि ऐसी भी कुछ परिस्थितियाँ होती हैं, जब आप एक ही समय में दो भावों को महसूस करते हैं| उदाहरण के लिए आप अपने दोस्तों के साथ खेल रहे हैं और आप हार जाते हैं| क्योंकि उनमें से किसी एक ने खेल में आपके साथ धोखा किया था| क्या आपको पता है कि वे दोनों भाव क्या हैं?
दुख (खेल हारने के कारण) और गुस्सा (दोस्त ने धोखा दिया) |
आपके अंदर कौन-सा भाव उत्पन्न होगा, जब आप बारिश में किसी कुत्ते के बच्चे को भीगते हुए देखते हैं, लेकिन आप उसकी सहायता करने के लिए नहीं जा सकते, क्योंकि आपको जुकाम है और बाहर मूसलाधार बारिश भी हो रही है|

और
बहुत अच्छे... हम सभी ऐसे भावों से गुजरते हैं| कभी-कभी इन भावों की संख्या तीन भी हो सकती है, लेकिन यह तब तक ही ठीक है, जब तक आपको पता चले कि आप किन भावों से गुजर रहे हैं| अब, आप न केवल अपने भावों को पहचान सकते हैं, बल्कि उन्हें आप नाम भी दे सकते हैं| विभिन्न परिस्थितियों में अपने भीतर देखना और पहचानना बहुत महत्वपूर्ण है कि आप किस तरह के मनोभावों से गुजर रहे हैं|
हम सभी अपनी दैनिक दिनचर्या में अनेक भावों को अनुभव करते हैं| इन भावों के संदर्भ में विद्वानों ने वर्षों से चिंतन किया है| आइए, हम खेल-खेल में विभिन्न भावों के नाम सूचीबद्ध करते हैं| ठहरो, अब सोचो इस विषय पर वर्षों से काम करने वाले विद्वानों ने कितने भावों को सूचीबद्ध किया होगा? क्या लगता है! कितना होगा? 50? 100? या इससे भी अधिक? वास्तव में ये... नौ हैं! केवल नौ? कैसे? क्या आप अन्य के बारे में जानते हैं? वे लोग कौन थे?
वर्षों तक अध्ययन, अवलोकन और विश्लेषण करने के बाद प्राचीन काल में हमारे ऋषियों ने भावों को कुल 'नवरसों' में वर्गीकृत किया| हमने जिन सभी भावों को समझा, अनुभव किया, क्या उन्हें 'नव रसों' में विभाजित किया जा सकता है?
इसका विभाजन मुख्य रूप से दो मूल तत्व - रस और भाव' के आधार पर किया गया है|
भाव
मन का स्थायी भाव|
धारणा, विचार और प्रवृत्ति पर आधारित इसकी परिणति, यह आसानी से नहीं बदलता |
स्थापित करने के लिए
I
I
I
I
V
रस
संवेगात्मक सार |
किसी परिस्थिति, अनुभूति और मनोभाव के परिणामस्वरूप होने वाला अनुभव |
क्या आपने कभी ध्यान दिया है? एक ही परिस्थिति में आपकी और आपके मित्र की अनुभूति भिन्न-भिन्न होती है, ऐसा क्यों? इसका मुख्य कारण दोनों के भावों में अंतर का होना है| क्योंकि आपके पास एक भिन्न भाव है (अलग दृष्टिकोण या विचार)| जिससे एक भिन्न रस (अनुभव जो आपने महसूस किया) की उत्पत्ति होती है |
उदाहरण
1. आप अपने मित्र के साथ अपना पसंदीदा खेल देख रहे हैं| आपकी टीम जीत जाती है| आप रोमांचित हो जाते हैं, आपका मित्र खुश तो है, लेकिन उतना उत्साहित नहीं होता है| क्योंकि उसके पसंदीदा खिलाड़ी ने अच्छा स्कोर नहीं किया|
2. आप अपने मित्र के साथ खाना खा रहे हैं| कक्षा में एक शरारती बच्चा आता है और आप दोनों का मजाक उड़ाता है, हँसता है, हँसकर चला जाता है| आप चिढ़ जाते हैं, लेकिन स्वयं को नियंत्रित रखते हुए कहते हैं, 'कौन परवाह करता है', और दूसरी ओर आप देखते हैं कि आपका मित्र आहत होकर एक कोने में बैठा रो रहा है| इन दोनों घटित स्थितियों में विचार और परिस्थिति दोनों एक समान है| कौन-सा भाव और अनुभव (रस)


उत्पन्न होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका मूल दृष्टिकोण या मूलविचार (भाव) क्या है? भारत के महान ऋषि-मुनियों ने अपने अध्ययन में भाव और मानव मस्तिष्क के संदर्भ में अपने अनेक विचार दिए हैं| अपने अध्ययन के आधार पर उन्होंने रसों को (हमारे अनुभव) 'नव रस' में वर्गीकृत किया है|
श्रृंगार प्यार ,खूबसूरती, |
![]() हास्य
विनोद, खुशी,
|
![]() वीर
वीरता, साहस,
|
भयानक भय ,डर , |
![]() करुणा
सहानुभूति, दुख ,
|
![]() वीभत्स घृणा, धिनौना, |
रौद्र गुस्सा , क्रोध |
![]() अद्भभुत
आश्चर्य , विस्मय
|
![]() शांत शांति , परमानन्द, |
खेल-खेल में नवरस
इन 'नवरसों' को समझने के लिए हम इस दिलचस्प खेल को खेलते हैं| सबसे पहले किसी कमरे में नवरसों को एक वृत्ताकार घेरे में अलग-अलग दर्शाएँ| जब संगीत बजना शुरू हो, तो सभी विद्यार्थी उस वृत के चारों ओर घूमना शुरू कीजिए| जैसे ही संगीत बंद हो, जो विद्यार्थी जिस रस के पास खड़ा हो उसे उसी रस को अपने हाव-भाव और क्रियाओं के माध्यम से व्यक्त करें| जो विद्यार्थी ऐसा नहीं कर पाएगा, वह घेरे से बाहर हो जाएगा|


(1) देवों के देवता ब्रह्मा जी ने देखा कि सभी देवता बहुत हतोत्साहित और आलसी हो गए हैं| वे कुछ भी न करके समय बर्बाद करते हैं|


(3 ) उन्होंने एक अद्वितीय ग्रंथ नाट्य वेद की रचना की, उन्हें लगा कि देवता इसे पसंद करेंगे और इसका उपयोग करेंगे|




दृश्य दो - भावों का अन्वेषण


चेहर की अभिव्यक्ति
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शारीरिक भाषा | संयुक्त रूप | चेहर की अभिव्यक्ति | शारीरिक भाषा | संयुक्त रूप |
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![]() |
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आइए, घेरा बनाएँ
- उन भावों की सूची बनाएँ, जिन्हें हमने आज अनुभव किया|
- जब आपने स्वर और क्रिया को जोड़ा, तो क्या यह करना आसान था? या केवल चेहरे के भाव प्रकट करना आसान था?
- क्या ऐसा कोई अनुभव है, जिसे आप नाम नहीं दे सकते? क्या आप इसे ध्वनि, क्रिया या अभिव्यक्ति के साथ निभा सकते हैं?
- एक ही दिन में आप जो भाव बार-बार अनुभव करते हैं उसका अवलोकन कीजिए?




त्रासदी और हास्य

आइए, घेरा बनाएँ
- किस रस को त्रासदी और हास्य में समावेश किया जा सकता है|
- क्या और भी भाव हैं? जिन्हें इनके अंतर्गत वर्गीकृत नहीं किया जा सकता?
गतिविधि - मुखौटे और भाव

आधा मुखौटा

गत्ते का मुखौटा (आधा मुखौटा)- (गत्ता, कैंची, गोंद और रंग)
- सबसे पहले चेहरे का एक खाका बनाएँ, साथ में इस बात का भी ध्यान रखिए कि रेखांकित किए जा रहे चेहरे के दोनों ओर एक संतुलन बना रहे| इसका एक सरल तरीका यह है कि कागज को ठीक बीच से मोड़ दिया जाए (चित्र देखिए)|
- आँख और नाक को चिह्नित कीजिए, इस तरह से चेहरे के दोनों ओर के आकार संतुलित हो जाएँगे| आँख, नाक और कान या अपनी इच्छानुसार किसी अन्य विशेषता को जोड़ने के लिए भिन्न- भिन्न आकृति और डिजाइन का प्रयोग कीजिए|
- रंगीन कागज और गोंद की सहायता से अनेकों रचनात्मक विशेषताओं को जोड़ा जा सकता है|
- गत्ते को चेहरे के अनुसार आकार देने के लिए पहले इसे मोड़ लीजिए एवं एक कोण से काटिए और फिर चिपकाइए|
- मुखौटे में रिबन या इलास्टिक बाँधने के लिए कान के पास छेद कीजिए|




कागज का मुखौटा (पूरा मुखौटा)
- (पुराना अखबार, एक गुब्बारा, गोंद, कैंची और रंग)|
- कागज को टुकड़ों (अखबार या सामान्य कागज) को फाड़ लीजिए, उसे पानी में गीला कीजिए और गुब्बारे की सतह पर धीरे-धीरे लगाएँ|
- गुब्बारे के आधे हिस्से को दिए गए चित्र की तरह ढकिए| कागज के किनारों को एक-दूसरे के ऊपर चढ़ाकर लगाएँ| चेहरे की आकृति के उभर आने तक गीले कागज की परत को बार-बार लगाएँ|
- इसे पूरी तरह सूखने दीजिए, कागज की गीली परत लगाने, उसके सूखने, दोबारा परत लगाने और इच्छित आकार प्राप्त करने की इस प्रक्रिया में लगभग तीन दिन लग सकते हैं|
- गुब्बारे को फोड़ लीजिए और निश्चित आकार के लिए कागज को काट लीजिए|
- पात्रों के अनुसार मुखौटों में रंग भरिए, विभिन्न भावों और चेहरे की मुद्राओं के लिए भिन्न-भिन्न रंगों का प्रयोग कीजिए |


गुब्बारे पर गीले कागज के टुकड़े | 5-6 परत आखिरी पात गोंद के साथ

अच्छे से सूख जाने के बाद गुब्बारे को फोड़कर बाहर निकाल लीजिए|


- 3-4 विद्यार्थियों का एक समूह बनाएँ|
- नवरस से किसी एक रस का चयन कीजिए|
- अपनी स्थानीय संस्कृति से किसी डिजाइन की पहचान कीजिए|
- उस स्थानीय संस्कृति के आधार पर संबंधित रस (भाव) में एक मुखौटे का निर्माण कीजिए|
- गत्ते वाला पूरा मुखौटा|
- गुब्बारे के साथ कागज वाला मुखौटा|















