अध्याय -19
छाया और कठपुतलियों की कहानियाँ

हम सभी ने गुड़ियों, गाड़ियाँ और रॉकेटों के साथ खेलते हुए अनेकों कहानियाँ और पात्र गढ़े हैं| याद है? किस प्रकार हमने अपने छोटे से खिलौने से संकट में फंसे उस व्यक्ति को बचाने का कार्य किया है या उसे चॉकलेट से बने काल्पनिक संसार में रोमांचक सैर कराई है| पुतली का खेल भी बिल्कुल यही है|
पुतली कला, निर्जीव आकृतियों या चित्रों का उपयोग कर प्रदर्शन तैयार करने की प्रचलित कला है| पुतली कलाकार अपने हाथों की चलन से, डोरी या छड़, जैसी अनेक तकनीकों के माध्यम से इन आकृतियों को नियंत्रित कर दर्शकों का मनोरंजन करना, कहानियाँ सुनाने या संदेश देने का कार्य करते हैं|
प्रस्तुत अवधारणाएँ
- हाथ की पुतली
- छड़ी और छाया पुतली
- भारत में पुतली
- वाणी का उतार-चढ़ाव
दृश्य पाँच - हाथ की पुतली – अँगुली, मोजे और दस्ताने
पुतलियाँ अनेक प्रकार की आकृतियों में पाई जाती हैं| पुतली कैसी होनी चाहिए, इसके बारे में कोई विशेष नियम वर्णित नहीं है| यह आपकी रचनात्मक व कल्पना
जैसी अनोखी हो सकती है| आइए, सबसे सरल कदम से शुरुआत करते हैं – ये आपका हाथ! जो चरित्र आप बनाना चाहते हैं (अपने परिवार या दोस्तों का) उनके सरल से चेहरे बनाएँ और उनसे संवाद स्थापित कीजिए|
वैकल्पिक रूप से आप कागज पर अपने हाथ से अनेक पात्र भी बना सकते हैं|

आइए, एक कदम आगे बढ़ते हैं और अँगुली के पोरों पर सामान्य-सी पुतलियाँ (फिंगर पपेट) बनाते हैं|

अँगुली वाली सरल पुतलियाँ
कागज को मोड़कर, कैची और गोंद की सहायता से एक साधारण कप बनाएँ| उसे अपनी अंगुली पर पहनें एवं चेहरे, हाथ और पैर की आकृति बनाएँ| अब आप इन काल्पनिक पात्रों को नाम दे सकते हैं और इस प्रकार अपनी प्रारंभिक कहानी की रचना कर सकते हैं!

जानवरों के पात्र

पुराण और इतिहास के पात्र
चूंकि पुतली बनाने के लिए कोई तय सीमा या नियम नहीं हैं| अपनी पुतली रचना को जीवंत बनाने के लिए और अन्य युक्तियाँ भी उपयोग में लाई जा सकती हैं|

विशेष पात्र

अपनी अंगुलियों का उपयोग पैरों की तरह करे
मोजे और दस्तानों की कठपुतलियाँ
पुतली के निर्माण का एक अन्य उपाय है, जो आपकी कल्पना के अनुसार पात्रों को दर्शाता है, वो है- मोजे या दस्तानों की पुतलियाँ|
आइए, यहाँ हम मोजे से सरल पुतलियों को स्वयं बनाने हेतु चरणबद्ध मार्गदर्शन का अनुसरण करें!
इन निर्मित पुतलियों को एक नाम दें और अब इनके बीच (काल्पनिक) संवाद करवाएँ!
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घर पर पड़ा कोई भी मोजा ले| |
तब तक उसे हाथ में पहनते रहें, जब तक यह पूर्ण रूप से अंगुली में आ जाए| |
चारों अंगुलियों को चारों ओर से एक लचीली वस्तु या रबर बैंड से बांध लें और अंगूठे को अलग रखे| |
वैकल्पिक रूप से, आप मुँह वाले क्षेत्र को काटकर खोल सकते हैं और गत्तों को भी चिपका सकते हैं| |
आप अपने अनुसार इसमें आँख, जीभ, बाल, नाक और अन्य दूसरा विशेष कल्पना चित्र भी जोड़ सकते हैं| |

दस्तानों वाली पुतलियों में संवाद

अंगुलियों वाली पुतलियों में संवाद
गतिविधि
दो चरित्रों का निर्माण
आप अपनी कल्पना शक्ति का प्रयोग कर दो चरित्र बनाएँ| ये चरित्र व्यक्ति, जानवर या एलियंस, जैसे काल्पनिक पात्र भी हो सकते हैं| आप कुछ पात्रों को जोड़कर नई कहानी की रचना कर सकते हैं, जैसे एक बाघ और एक भूत या एक बूढ़ा आदमी और एक कुत्ता|
पात्र की विशेषताओं की सूची बनाएँ-
प्रत्येक पात्र का नाम और भाव तय कर बताएँ क्या वे आनंदपूर्ण हैं, क्रोधित हैं या दुखी हैं? प्रत्येक पात्र के बात करने की अनूठी शैली बनाइए और पात्रों के मध्य एक सरल संवाद को निर्मित कीजिए| इस रचना में आलेख के तीन भागों का अवश्य ध्यान रखें साथ ही एक सरल संवाद रखें| याद रखें की आलेख (स्क्रिप्ट) के तीन भाग हैं? आप यह सुनिश्चित कीजिए कि आपके आलेख में एक ऐसी परिस्थिति और द्वंद्व की संभावना हो, जहाँ ये दोनों पात्र आपस में संवाद स्थापित कर सकें|

मोजे वाली पुतलियाओं में संवाद
प्रदर्शन का समय !
आप अपनी कक्षा में या अपने परिवार के अन्य सदस्यों के सामने इसकी प्रस्तुति कर सकते हैं| अब आप एक कुशल पुतली संचालक बन गए हैं|
भारत में हाथों की पुतलियाँ
आप आगामी पुतली प्रदर्शन के लिए नई योजनाओं पर विचार कर रहे हो इस बीच आइए, हमारे देश के कुछ राज्यों के बारे में जानते हैं, जहाँ पुतलियों का प्रयोग किया जाता है|
1. सखी कुन्ढेई और सखी नाच— ओडिशा |
2. पावकथकली पाचकूथू- केरल |
3. पुत्तुल नाच- बंगाल | |
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पुतली सामान्य ज्ञान
- भारत में तीन हजार वर्ष में भी अधिक पहले से कहानियाँ सुनाने के लिए पुतलियों का प्रयोग किया जाता रहा है| भागवत पुराण में ऋषि व्यास की एक रोचक कहानी है और इसमें लकड़ी की पुतलियों को डोरियों से नियंत्रित करने की बात कही गई है|
- किसान पूरे दिन काम करने के बाद, पुतली प्रर्दशन कर और देखकर आरामदायक अनुभ करते हैं|
दृश्य 6- छड़ और छाया पुतली
यह पुतली का एक ऐसा रूप है, जिसके लिए किसी मूलभूत ढांचे की आवश्यकता होती है| इसे आप कक्षा में या घर पर कर सकते हैं| आपको कुछ मूलभूत सामग्री की आवश्यकता होगी, जो आप अपने आस-पास प्राप्त कर सकते हैं|
यद्यपि आप हाथ की पुतलियाँ और मोजे (सॉक) की पुतलियाँ स्वयं ही बना सकते हैं, तथापि इन दोनों रूपों में आपको समूह में काम करना पड़ता है| इसलिए पुतली चलाने वालों का अपना समूह ढूँढए
कक्षा के सभी बच्चों को पाँच या छह बच्चों के छोटे-छोटे समूह में विभाजित करना है| प्रत्येक समूह एक अवधारणा या एक कहानी तय करता है, जिसे वे सुनाना चाहते हैं| प्रत्येक समूह 3 से 4 पात्रों के साथ एक सरल कथानक (स्क्रिप्ट) बनाएगा| फिर समूह पुतलियों को बनाने के लिए एक साथ काम करेगा|
छड़ पुतलियाँ
इन पुतलियों को बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल एवं मस्ती से भरी हुई है|
- अपनी कहानी के सभी पात्रों के चित्र बनाएँ, उनमें रंग भरिए तथा उन्हें आकार में काटिए|
- ऐसी छड़ियों ढूँढ़े, जो कम से कम छह इंच या उससे अधिक लंबी हो| यह पेड़ की टहनियाँ, आइसक्रीम की छड़े या फिर सख्त गत्ते (कार्डबोर्ड) की पट्टियाँ भी हो सकती हैं|
- आपने जो पात्र बनाए हैं, उनके चित्रों को छड़ी के एक सिरे पर इस तरह चिपकाएँ कि आप एक सिरे को पकड़े और पुतली दूसरे सिरे पर हो (चित्र देखिए)|
आपकी छड़ पुतलियाँ तैयार हैं !


पुतली प्रदर्शन चौखट (शो फ्रेम)
एक गत्ते को एक साधारण आयात के आकार में काटिए, जो इतना बड़ा हो कि उसमें आपके द्वारा बनाए गए सभी पात्र समा सके|
वैकल्पिक
आप अपनी कथानक (स्क्रिप्ट) के अनुसार चौखट (फ्रेम) को उपयुक्त चित्रों से सजा सकते हैं|
आप पृष्ठभूमि में कथा के अनुरूप सड़क, जंगल आदि चित्र भी प्रयोग कर सकते हैं|
आप प्रस्तुति के लिए तैयार हैं !
समूह का प्रत्येक सदस्य एक पात्र का संचालन करेगा और फिर वह समूह, पुतली की प्रस्तुति देता है|
अब, जब आपके पास छड़ (स्टिक) पुतली प्रस्तुति तैयार है, तो छाया पुतली बस एक कदम दूर है|

छाया पुतलियाँ
आप गत्ते के ढाँचे (कार्डबोर्ड फ्रेम) पर एक सफेद कपड़ा जोड़ सकते हैं और किसी प्रकाशीय उपकरण (टॉर्च) से प्रकाश के एक तीक्ष्ण एकल स्रोत का उपयोग कर सकते हैं| छाया पुतली के लिए ध्यान रखने योग्य कुछ बातें -
- यह सुनिश्चित कीजिए कि प्रकाश बहुत अधिक न फैले, क्योंकि छाया की तीव्रता इस पर निर्भर करती है| प्रकाश खोत को एक स्थिर सतह पर रखा जाना चाहिए, ताकि वह
- पात्रों की बाहरी रूपरेखा या आकृति सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि रंग, चेहरे की विशेषताएँ आदि छाया में दृष्टिगत नहीं होते हैं| पुतली की छाया पात्र की पहचान कराने में सक्षम होनी चाहिए|
जैसा कि आप छाया पुतली के माध्यम से कहानियों बनाने का प्रयास कर रहे हैं| आइए, जानें कि छाया पुतली की कला में अपने देश में हमने कितनी प्रगति की है|

भारत में छड़ और छाया कठपुतलियाँ
भारत में छाया पुतली 2000 से भी अधिक वर्षों से अस्तित्व में है| राम और कृष्ण की कहानियाँ सर्वाधिक लोकप्रिय रही हैं निम्नलिखित चित्रों में, प्रत्येक पुतली के विवरण के स्तर और जटिल रूपरेखा का अवलोकन कीजिए| इतने प्रतिभाशाली थे हमारे कारीगर !
| 1. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का तोलू बोम्मालट्टा | 2. कर्नाटक का तोगलु गोम्बयेट्टा | 3. ओडिशा का रावण छाया | |
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गतिविधि- अपनी खुद की पुतली प्रस्तुति बनाइए

पुतलियाँ- तैयार ☑
रूपरेखा (चौखट मंच)---- तैयार ☑
पृष्ठभूमि - तैयार ☑
कथानक (स्क्रिप्ट)- तैयार ☑
लेकिन संवाद (डायलॉग) कौन बोलेगा? क्या पुतलियाँ बात करती हैं? नहीं! आप बात कर सकते हैं? हाँ| लेकिन यह आपके जैसा लगेगा... आप अपने पात्र की तरह कैसे लगेंगे ?
उत्तर- (वॉयस मॉड्यूलेशन) स्वर लय का उतार-चढ़ाव
पुतली कला के प्रदर्शन में आपका संवाद उच्चारण अभिनीत किए जा रहे पात्र की भावनाओं या उसके द्वारा बताई जा रही कहानी के अनुकूल स्वर व लय के उतार-चढ़ाव से युक्त होना चाहिए| जैसे आपके पुतली पात्र के खुश होने पर आप अपने को हर्षित वाणी एवं उच्च स्वर में उच्चारित कर सकते हैं| यदि यह कोई डरावनी कहानी बता रहा है, तो आप इसे रहस्यमय बनाने के लिए अपने उच्चारण का स्वर धीमा कर सकते हैं| ठीक वैसे ही, जैसे जब आप भिन्न-भिन्न पात्र होने का दिखावा करते हैं, तो आप भिन्न-भिन्न ध्वनियों के साथ कैसे खेलते हैं| प्रस्तुति को अधिक रोमांचक और मनोरंजक बनाने के लिए आप अपनी पुतली के साथ भी ऐसा ही कर सकते हैं !
यह तब बहुत महत्वपूर्ण है, जब आप स्वयं दो पात्र निभा रहे हों| क्या दो पात्रों की एक ही ध्वनि सुनना उबाऊ नहीं होगा, जो आपकी नियमित ध्वनि की तरह भी लगती है? इसलिए दोनों पात्र एक-दूसरे से और आपसे भिन्न लगने चाहिए|
यह किसी भी प्रकार की पुतली के लिए महत्वपूर्ण है| चाहे आप मोजे पुतली, छड़ी पुठली या छाया पुतली प्रदर्शित कीजिए| आपको अपनी ध्वनि पर काम करना ही होगा| याद रखिए, यह उस पात्र के अनुरूप होना चाहिए, जिसका प्रतिनिधित्व पुतली कर रही है| उदाहरण- एक बूढ़े आदमी का स्वर ऊँचा, दमदार नहीं हो सकता!
अब पुतली प्रस्तुति के लिए अपनी कथानक (स्क्रिप्ट) की पंक्तियों का स्वयं निर्मित पुतलियों के साथ अभ्यास कीजिए| अब आप पुतली की प्रस्तुति के लिए तैयार हैं| अपने दर्शक तैयार करें.... शुरू कीजिए|
पुतली से संबंधित कुछ
रोचक तथ्य
- कृष्णदेवराय और विक्रमादित्य जैसे भारतीय राजा पुतली के इतने अनुरागी थे कि उनके पास इन अद्भुत प्रस्तुतियों के लिए अपने विशेष रंगमंच (थिएटर) थे|
- जेंडर संवेदनशीलता, जैसे मूल्यों के साथ-साथ सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श पर विद्यार्थियों के मध्य जागरुकता पैदा करने में पुतली एक प्रभावी माध्यम हो सकता है|
- आज, भारतीय पुतलियों इसे और भी रोमांचक बनाने के लिए नई तकनीकों और प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर इस परंपरा को जीवंत और अधिक रुचिपूर्ण बना रही है|
निम्नलिखित के लिए एक स्वर खोजिए| नीचे दी गई पंक्ति को उसी स्वर में बोलिए|
"आपने भोजन कर लिया ?" |
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"मैं पार्क में खेलना चाहता हूँ..!." |
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" हैलो ! क्या आप मेरे साथ दौड़ने के लिए जाना चाहते है" |
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"क्या तुम मेरे साथ खेलना चाहोगे?... |
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