अध्याय -21
कला रूपों का एकीकरण

कला रूपों का एकीकरण
हम सब जानते हैं कि हम पुस्तक के अंतिम भाग में आ गए हैं| हम सब ने चार कला रूपों के विभिन्न पहलुओं को जाना है| अब समय आ गया है कि हम उन सभी कला रूपों का एकीकरण करें| चलो जानें कि हम उन सभी को कैसे एक ही गतिविधि में एकीकृत कर सकते हैं|
सबसे पहले एक कहानी सुनते हैं| फिर हम उस कहानी के विभिन्न भागों का चयन करेंगे, जहाँ किसी कला रूप के विभिन्न तत्वों का उपयोग किया जा सकता है|
सुनकर आनंद आया? क्या आपको यह स्पष्ट हुआ कि आप इस एक छोटी-सी कहानी से सभी कला रूपों को एक साथ बुन सकते हैं?
आइए, इसे समझते हैं! हमने दृश्य कला के अध्याय में गतिविधियों के माध्यम से मुहरों के बारे में जाना |
उसी प्रकार हमने संगीत और नृत्य की कक्षाओं में स्थानीय और क्षेत्रीय संगीत व नृत्य को जाना|
आपने रंगमंच की कक्षा में संवाद सीखा| आपने विभिन्न भावों, जैसे आनंद, आश्चर्य और भय की अभिव्यक्ति सीखी|

कहानी का उदाहरण
एक दिन दो मित्र जंगल के किनारे खेल रहे थे कि अचानक उन्हें एक रहस्यमयी मुहर मिलती है| उस मुहर में वह एक गुप्त पहेली पाते हैं, जिसे हल करने के लिए वे एक रोमांचक यात्रा पर निकल जाते हैं| लेकिन उन्हें कोई भी हल प्राप्त नहीं होता और वे जंगल में खो जाते हैं| उनका हौसला टूटने को ही था कि तभी, एक मित्र को वहाँ पर कुछ स्थानीय जनजाती के लोग, अपने देवता के समक्ष नाचते हुए दिखाई देते हैं| जल्द ही वे पकड़ लिए जाते हैं और उन्हें गाँव में ले जाया जाता है| दोनों बालक अत्यंत भयभीत हो जाते हैं और वहाँ से छूटकर बच निकलने का तरीका सोचने लगते हैं| जैसे ही वे भागने वाले होते हैं कि तभी वे देखते हैं कि उस गाँव की सभी झोपड़ियों की बनावट बिल्कुल उस मुहर के ही जैसी थी, जो उन्होंने खेलते हुए पाई थी| तब वे अपनी मुहर उन जनजातीय लोगों को दिखाते हैं और उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि उन्होंने खेलते समय उस मुहर को पाया और उस पर दी हुई पहेली को हल करते हुए जंगल में भटक गए| बच्चों के हाथ में अपनी पवित्र मुहर को देख जंगल के सभी गाँव वाले रोमांचित हो उठे और उनसे मित्रता करने के लिए आतुर हो गए| उन्होंने बच्चों को अपना गाँव दिखाया और बताया कि वे धरती को ईश्वर के रूप में पूजते हैं|
क्या आप जानते हैं?
पंचतत्व या पंचभूत (पाँच) मूल तत्व होते हैं| ये हैं पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और क्षितिज |
क्या अब आप यह देख पा रहे हैं कि किस प्रकार हम एक कहानी सुनाने के लिए सभी कला रूपों का सुंदरता से समाकलन कर सकते हैं? अब आप अपनी स्वयं की कहानी कहिए|
सुझाव के रूप में आप निम्नलिखित विषय पर कार्य कर सकते हैं - पंचतत्व के दो तत्व – 'धरती और जल'|
व्यक्तिगत गतिविधि
आइए, पंचतत्वों में से दो तत्व-पृथ्वी और जल के ऊपर वार्ता कीजिए|
सबसे पहले, उस जगह, समस्या, क्षेत्र या विषय का चयन कर लीजिए, जिसे हम विभिन्न कलाकृतियों के माध्यम से प्रदर्शित करना चाहते हैं| उदाहरण के लिए, यदि हम मिट्टी प्रदूषण का विषय चुनते हैं, तो फोटोग्राफी या पोस्टर (दृश्यकला) के माध्यम से एक
अभियान चलाया जा सकता है| हम एक ऐसे गीत की रचना भी कर सकते हैं, जिसके बोल प्रेरणादायक हों और धुन ऊर्जावान हो| इस गीत पर नृत्य की परिकल्पना कर नृत्य संरचना तैयार की जा सकती है| यहाँ तक कि आप इस विषय पर एक छोटा नाटक बनाकर सभी ऊपर लिखित कला रूपों के विभिन्न तत्वों का एकीकरण कर सकते हैं|
धरती और जल से जुड़े विषयों पर अपने विचार, भाव और चिंता को व्यक्त करने के लिए अपने संगीत, नाट्य, नृत्य एवं दृश्य कला के ज्ञान और कौशल का प्रयोग करते हुए एक परियोजना बनाएँ|
एक कला शैली को प्रकृति के पंचतत्वों से जोड़ने का कोई नया ढंग मिलने पर इस गतिविधि को आगे बढ़ाइए| आप जब इन संबंधों के बारे में और भी विस्तार से सोचेंगे, तब हम एक समूह में मनोरंजक गतिविधियों में भाग लेंगे|
| तत्व | रंगमंच के तत्व (भाव, शब्द, लय और क्रिया) |
संगीत के तत्व (ध्वनि, लय, भाव, शब्द) |
नृत्य के तत्व (लय, संचलन, भाव) | दृश्य कला के तत्व (रेखा, आकार, रंग, बनावट) |
| धरती और जल |

स्मरण रहे कि जिस प्रकार से आप विभिन्न तत्वों को जोड़ रहे हैं, वह आपके मित्रों द्वारा प्रयुक्त रीतियों से भिन्न हो सकता है| इस तालिका को अपने विचारों के अनुसार भरिए| यदि आपको लिखने या चित्रण करने के लिए अतिरिक्त स्थान की आवश्यकता हो, तो अपनी पुस्तिका या एक अलग कागज का उपयोग कीजिए|
सामूहिक गतिविधि
व्यक्तिगत गतिविधि की तरह एक ऐसा विषय चुनिए, जो धरती या जल की किसी समस्या से जुड़ा हुआ हो| आपके युवा विचारों के लिए, यहाँ कुछ उत्प्रेरक सुझाव दिए गए हैं| क्या आपने कभी अपने परिवेश में मिट्टी की गुणवत्ता, पेयजल का स्रोत और प्राकृतिक संसाधन का संज्ञान लिया है? क्या आप किसी तालाब, झील या नदी और उनके पारिस्थितिकी तंत्रों या किसी पर्वत श्रृंखला या कोई झरना, जिसे आपने इन्हीं दिनों में देखा हो, उनका वर्णन कर सकते हैं?
क्या आप बिना स्वच्छ जल के या प्रदूषित धरती पर एक दिन भी जीने की कल्पना कर सकते हैं? हम सदैव प्रयास कर सकते हैं और कला के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं| कला केवल एक तराशने की शैली नहीं है, अपितु सामाजिक परिवर्तनों एवं सुधार का एक वाहक है| कला का बोध हमें संवेदनशील और जागरूक बनाता है, क्योंकि हम आरंभ से ही छोटी- छोटी वस्तुओं में सौंदर्य को सराहना सीख जाते हैं|
क्या अब आप विचार मंथन की गतिविधियों के लिए तैयार हैं?
निर्देश
1. कागज के पर्चों से पाँच श्रेणियाँ बनाएँ| प्रत्येक श्रेणी में एक निश्चित कला रूप से संबंधित गतिविधि लिखिए| (नीचे लिखी गतिविधियों का प्रयोग कीजिए)
2. कक्षा को 10-12 विद्यार्थियों के दो या तीन समूहों में बाँट लीजिए| प्रत्येक समूह 'पृथ्वी' या 'जल' का चयन अपने कार्यक्षेत्र के रूप में कर ले|
3. प्रत्येक समूह का एक प्रतिनिधि सामने आए और प्रत्येक श्रेणी के पर्चों में से एक का चयन कर लीजिए| अब प्रत्येक समूह के पास नाट्य, दृश्यकला, संगीत और नृत्य की एक-एक गतिविधि आ गई हैं| 'मूल्य' श्रेणी के अंतर्गत जो पर्चे हैं, उनका उपयोग एक संग्रहित विषय के रूप में सभी कला रूपों का एकीकरण करने हेतु किया जा सकता है|
4. अब अपने समूह के साथ बैठें और एक एकीकृत परियोजना बनाएँ, जिसमें सभी कलारूपों का समावेश हो| अपनी स्वयं की प्रस्तुति बनाएँ और उसे अपनी कक्षा के समक्ष प्रदर्शित करें|
गतिविधि
रंगमंच |
संगीत | दृश्यकला | नृत्य | मुल्य |
मुखौटा निर्माण |
गीत लेखन और संगीतबद्ध करना |
तत्वों से कलाकृति का निर्माण मिट्टी, गीली मिट्टी या पानी के रंग से| | केवल कदमों का उपयोग और भाव अभिव्यक्ति | वहनीयता |
कठपुतली का खेल |
अपने आस-पास की वस्तुओं से ध्वनि बनाएँ | प्राकृतिक रंगों का उपयोग कीजिए | धरती या जल से संबंधित कोई लोक नृत्य खोजें | सांस्कृतिक संवेदना |
वस्त्र एवं रूप सज्जा के प्रारूप बनाएँ |
किसी वाद्ययंत्र का प्रयोग कर तत्वों से जुड़े भाव उत्पन्न कीजिए | तत्वों से जुड़ी सत्तह या सामग्री से कलाकृति का निर्माण कीजिए |
केवल हाथ के संकेत |
निःस्वार्थ कार्य |
पात्रों एवं संवाद के संग एक नाट्यलेख का निर्माण कीजिए |
जिन प्रसिद्ध संगीतकारों के विषय में आपने जाना है उनका एक गीत ढूँढिए |
बोतल अथवा पाइप, जैसे रही सामग्री जो, तत्वों से संदर्भ रखते हों उन्हें पुनः उपयोग में लाएँ |
गीत या संगीत से एक नृत्य की रचना कीजिए | स्वच्छता |