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अध्याय -22

कला रूपों का एकीकरण

s2


मूल्यांकन
कला शिक्षा में मूल्यांकन, विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमताओं और कलात्मक विकास को समझने और पोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| पारंपरिक विषयों के विपरीत, कला शिक्षा मूल्यांकन रचनात्मक एवं आलोचनात्मक सोच, तकनीकी दक्षता और अभिव्यक्ति क्षमताओं सहित कौशल की एक विस्तृत श्रृंखला के मूल्यांकन पर ध्यान केंद्रित करता है| ये मूल्यांकन न केवल प्रगति और निपुणता को मापने के लिए है, बल्कि अन्वेषण, आत्माभिव्यक्ति और कला के प्रति गहन प्रशंसा को प्रोत्साहित करने के लिए भी तैयार किया गया है|



मूल्यांकन पद्धति

मूल्यांकन प्रक्रिया मुख्य रूप से कौशल-आधारित होती है| यह बच्चे के 'सही या गलत उत्तर' पर निर्भर नहीं होती है| इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि 'परीक्षण' प्रश्न पत्र और लिखित उत्तरों पर आधारित न बनाया जाए| इससे कला शिक्षा पाठ्यक्रम में प्रयुक्त दृष्टिकोण का उद्देश्य पूरी तरह से विफल हो जाएगा|

 पोर्टफोलियो, प्रदर्शन समीक्षा, परियोजना आधारित मूल्यांकन और चिंतनशील आत्म-मूल्यांकन जैसी विभिन्न मूल्यांकन पद्धतियाँ प्रत्येक विद्यार्थी को अद्वितीय कलात्मक यात्रा में एक अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकती है|

निम्नलिखित पृष्ठ पर रचनात्मक और संकलनात्मक मूल्यांकन, दोनों के लिए संरचना का सुझाव दिया गया है| प्रत्येक क्षेत्र के मापदंड के लिए पाँच बिंदुओं का सुझाव दिया गया है| इससे शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को यह ज्ञात होगा कि विद्यार्थी किस प्रकार की प्रगति कर रहा है| नीचे दी  गई  तालिका में पाँच बिंदु दिए गए हैं, जिसका उपयोग संदर्भ के रूप में किया जा सकता है| प्रत्येक गतिविधि के लिए रूब्रिक मूल्यांकन का विस्तार किया जा सकता है|

मात्रात्मक मूल्यांकन (रूब्रिक पर आधारित अंक या श्रेणी) और गुणात्मक मूल्यांकन (विद्यार्थियों के आचरण, रुझान, प्रगति और अन्य ऐसे पक्ष जो रुब्रिक के अंतर्गत ना दिए गए हों उनके संबंध में शिक्षकों का  अवलोकन) का संयोजन महत्वपूर्ण है |

| जहाँ रचनात्मक मूल्यांकन प्रत्येक कक्षा में  अवलोकन पर आधारित होता है वहीं, संकलनात्मक  मूल्यांकन के लिए एक पूरा दिन आवंटित किया जाता है| मूल्यांकन की तैयारियों में स्थान की व्यवस्था व यंत्र, उपकरण और अन्य संबंधित सामग्रियों को संकलित किया जाता है| विद्यार्थी निर्देशानुसार सहजता से उसी समय कुछ सुजित करें|


विद्यार्थियों के सीखने का स्तर


   संख्यात्मक माप      श्रेणी

प्रारंभिक

1

  विकासशील                               

 2                                                                                                                      डी                            

आशाजनक

3 सी

कुशल

4 बी

उत्कृष्ट

5

मूल्यांकन के मापदंड पाठ्यचर्या    लक्ष्य (सी . जी.) पर आधारित है और   दक्षताएँ  राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 पर आधारित है| संदर्भ के लिए क्यूआर कोड का उपयोग कीजिए|

 रचनात्मक मूल्यांकन



सी .जी.

सी
सामान्य मानदंड
दृश्य कला  में विशिष्ट अधिगम परिणाम अध्याय शिक्षक स्वयं
सी.जी. 1 सी- 1.1
प्रतिदिन के अनुभवों की 
अभिव्यक्ति |

1. अपने प्रतिदिन के अवलोकन के आधार पर कलाकृतियाँ बनाते  हैं |


1,2,3

2. रंगों और भावनाओं के बीच के संबंधों पर चर्चा करते हैं|
2

3. रंगों को  मन   की  स्थिति और भावनाओं में जोड़ते है| 
2

सी - 1.2
सहभागिता और सामूहिक कार्य
4. चित्र   बनाते समय साथियों के साथ सहयोग करते हैं|
3

5. कलाकृति बनाते और प्रदर्शित करते समय एक-दूसरे की सहायता करते हैं|


सभी


सी.जी. 2  सी- 2.1
 लकीर के फकीर को जानना  
6. प्रकृति  चित्रण  के लिए प्रयुक्त  रूढिबद  रूपों   को पहचानते हैं|
2,3

7. लोगों  का  चित्रण  करते समय जेंडर   रूढ़िवादिता  को पहचानते हैं|
3

सी- 2.2
कलपना और रचनातमकता  
 8.  वस्तुओ   प्रकृति  और लोगों की  सूक्ष्मताओ का  सूक्ष्म  अवलोकन करते हैं   
1,2,3

9. विभिन्न   जेंडर के लोगों और भूमिकाओं में वेशभूषा को  दर्शाते है |
3

10.  कागज , शिल्प और मुहरों  से स्वयं के लिए समानाकृति और विन्यास बनाते हैं|

4,5


सी.जी.3      सी -3.1



सामग्री, उपकरण और तकनीक का उपयोग
11. पेंसिल से प्रकाश और छाया बनाते हैं|
1,2

12. प्रतिदिन की वस्तुओं का चित्र बनाते समय परिप्रेक्ष्य का प्रयोग करते हैं|

1

13. किसी भी चुने गए माध्यम से रंग आभा और छाया बनाते हैं|


2

14. कलाकृति के लिए विभिन्न सामग्रियों और सतहों का प्रयोग करते हैं|

2


15 . स्वयं के टिकटों और मुहरों का उपयोग करके  चित्राकृति  बनाते  है |
5

सी-3.2

तैयारी से लेकर प्रस्तुतीकरण तक की कार्य प्रक्रिया


 16.   फ्लिप्बुक, पेपर  शिल्प या प्राकृतिक रंग तैयार करते समय अनुक्रमिक चरणों का पालन करते हैं| 
1,2,4

17.मुहरें  बनाते  समय  विचारो  को
संशोधित कर प्रयोग  करते  है |
5

सी.जी . 4 सी-4.1
और
सी-4.2
स्थानीय और क्षेत्रीय कला रूप और
कलाकारों का ज्ञान
18. विभिन्न शैलियों में बुद्ध के चेहरे की विशेषताओं की तुलना करते हैं|
3

19. परंपरागत रूप से   प्रयुक्त   सामग्री   उपकरण  और सतहों का वर्णन करते हैं|
2

20. कलाकारों और कला परम्पराओ का नाम  स्मरण  रखते  हुएl, उनके कार्यों का वर्णन करते हैं|


सभी


दृश्य कला में मध्यावधि रचनात्मक मूल्यांकन समुच्चय

दृश्य कला में वार्षिक रचनात्मक मूल्यांकन समुच्चय



सी. जी.


सी सामान्य  मानदंड

संगीत कला में विशिष्ट अधिगम परिणाम

अधयाय शिक्षक स्वयं
सी.जी.1 सी-1.1 प्रतिदिन के अनुभवों की अभिव्यक्ति

1. ध्वनि और शरीर की थाप का उपयोग करके भावनाओं (जैसे- चिंता, भय, आश्चर्य, प्रसन्नता, क्रोध आदि से संबंधित भावनाओं का वर्णन करते हैं|


6

2. विभिन्न भावनाओं को व्यक्त करने वाले गीतों को पहचानते है|

6

3. ध्वनि का उतार-चढ़ाव, गतिशीलता, लय और भावनाओं के बीच संबंध पर चर्चा करते हैं|
6


सी-1.2 सहभागिता और दल भावना
4. परिस्थिति को व्यक्त करने के लिए सीखे गए गीतों और संगीत तत्वों का उपयोग कर सरल कथानक   बनाने के लिए  साथियों  के साथ सहयोग करते हैं| 
6

5.विभिन्न भावनाओ  के  लिए गीतों  के  साथ  एक  विषय  आधारित गीत  श्रृंखला  बनाते है |
6,7

सी.जी. 2 सी-2.1 रूढ़िबदता  को  पहचानना 6.संगीत  में  रुढिबदता  के  उदाहरण  देते  है 10

7 देश की सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाने वाले सीधे और सुने हुए गीतों पर चर्चा करते और गाते हैं|
10

8  व्यक्तिगत  रूप से प्रेरित करने वाले गीतों पर चर्चा करते हैं|
11

सी-2.2 कल्पना  और रचनात्मकता 9. एक विषय पर आधारित  सरल  गीत लिखने  का  प्रयास करते  है  |
10

10. किसी भी गीत में प्रमुख भाव की  पहचानकर  उनके कारणों   पर चर्चा करते हैं|


10

11  सरल  उपकरण बनाने के लिए साथियों के साथ कार्य करते है और इसकी सामूहिक प्रस्तुति देते हैं|
7




सी.जी. सी समान्य  मानदंड संगीत कला में विशिष्ट अधिगम  परिणाम
अध्याय शिक्षक स्वंय
से.जी.  3 सी-3.1 सामग्री , उपकरण
और  तकनीक का  उपयोग
12. लकड़ी, धातु, तार, मिट्टी के बर्तर जैसी सामग्रियों पर आधारित संगीत वाद्ययंत्रो की पहचान करते है और जब संभव हो, तो बनाते हैं|
7

13. कक्षा में निर्मित या उपस्थित उपकरणों को उपयोगिता (लय या संगीत माधुर्य) के आधार पर वर्गीकृत करते हैं|
7

14. उपलब्ध बैंकिंग ट्रैक का उपयोग करने और सीखे हुए  गीत  गाने का प्रयास करते हैं|

9

सी-3.2 तैयारी से लेकर प्रस्तुतीकरण तक की कार्य प्रक्रिया
15. विभिन्न धार्मिक परंपराओं  से    सीखे गए गीत प्रस्तुत करते हैं|
9

16. स्थानीय गीत या पूरे भारत से गीत चुनने के लिए साथियों के साथ कार्य करते हैं|
9

17. दर्शकों के समक्ष  गीत प्रस्तुत करते हुए अपनी रुचि की व्याख्या करते हुए परिचय देते हैं|
9

सी.जी.4 सी-4.1
और
सी-4.2

स्थानीय और क्षेत्रीय

कला रूप और

कलाकारों    का
ज्ञान
18. उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय संगीत में विभिन्नताओं की पहचान करते हैं|
8

19. कर्नाटक और हिंदुस्तानी परंपराओ  के गीत गाने का प्रयास करते हैं| 
8

20 स्थानीय वा राष्ट्रीय कलाकारों के नाम स्मरण करते हुए, उनके कार्यों का वर्णन करते हैं|
8


संगीत में मध्यावधि    रचनात्मक    मूल्यांकन  समुच्चय

संगीत में वार्षिक  रचनात्मक   मूल्यांकन  समुच्चय





सी. जी. सी समान्य  मानदंड नृत्य  और चाल  में  विशिष्ट  अधिगम  परिणाम अध्याय शिक्षक स्वंय
सी.ज़ी 1 सी-1.1 साधारण  दैनिक  अनुभवों  की   अभिव्यक्ति 1.दैनिक दिनचर्या की क्रियाओं को शारीरिक संचलनो  से   दर्शाते   हैं|
12

2. दैनिक गतिविधियों को दशनि के लिए लय और मुद्राओं का संयोजन करते हैं|
12

3.अपने  परिवेश में   नृत्य  रूपों की 
पहचान  करते  है |
14

सी -1.2 सहयोग   और सामुहिक   गतिविधि
4.कोरियोग्राफ संचालन  क्रम को संचित  करने के  लिए साथियों के साथ सहयोग करते  है  |

12

5. गति और लय के साथ विभिन्न ज्यामितीय आकृतियाँ बनाते हैं|
13

सी.जी.2 सी-2.1 रूढिबदता  की  पहचान  करना 6.नृत्य  में जेंडर रुढिबदता  का वर्णन करते हैं|
13

7. सभी नृत्यों और संचालनो को करने में खुलापन दशति हैं| 

13

8. नृत्य बाधाओं को तोड़ने पर आधारित एक  परियोजना प्रस्तुत कते हैं|
13

सी-2.2 कल्पना  और  रचनात्मकता 9 .   सरल  सन्देश  देने के लिए हाथों का उपयोग करते हैं|
12

10.  नृत्य  मुद्राओ  में  विभिन्न  ज्यामितीय आकृतियों  की  कल्पना  करते है |   13

11.  नृत्य  के  लिए  सामग्री  और  आभूषण बनाते 
और  डिजाइन  करते  है  |

14






सी.जी सी

नृत्य और  चाल में विशिष्ट अधिगम परिणाम


अधयाय शिक्षक स्वयं
सी.जी.3 सी-3.1 सामग्री ,उपकरण और
तकनीकी का  उपयोग
12.  रीढ की हड्‌डी के झुकाव इत्यादि शारीरिक मुद्रा का प्रदर्शन करते हैं|
12

13. नवरस के आधार पर चेहरे के भावों के लिए भावनाओं को दर्शाते हैं|
12

14. सामग्री के प्रवेश और निकास के लिए प्रदर्शन स्थान की पहचान करते हैं|
13

15. विभिन्न नृत्य   शैलियों में संचलन, मुद्राओं और संकेतों में समानता की पहचान करते हैं|
14





सी-3.2 तेयारी से  लेकर  प्रस्तुतीकरण

तक  की  कार्य  प्रक्रिया
16. नृत्य प्रदर्शन के लिए सांगीतिक उपकरणों, संचलन और सामग्री को एक साथ लाते हैं|
14

17. दिए  गए  प्रसंग  के लिए
एक  सरल  नाट्य  तैयार करते  है
14

18. संगीत के साथ मुद्राओं, संचलन और चेहरे के भावों का अभ्यास करते हैं|
14

सी.जी.4 सी-4.1
और
सी-4.2

स्थानीय या क्षेत्रीय कलारूपों और

कलाकारों का  ज्ञान


19 .  भारत के कुछ शास्त्रीय नृत्य शैलियों के नाम बताते हैं|

12

20. विभिन्न लोक नृत्यों में जेंडर मानदंडो  का विश्लेषण करते हैं| 
13

21. विभिन्न भारतीय राज्यों के नृत्य रूपों की चर्चा करते हैं|


15

















 नृत्य में मध्यावधि    रचनात्मक    मूल्यांकन  समुच्चय

नृत्य में वार्षिक  रचनात्मक   मूल्यांकन  समुच्चय



सी.जी. सी सामान्य मानदंड रंगमंच में विशिष्ट अधिगम परिणाम
अधयाय शिक्षक स्वयं
सी.जी  1 सी-1.1 दाैनिक   अनुभवों  की   अभिव्यक्ति 1. अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए नए शब्द खोजने का प्रयास करते हैं|
16,17

2. दैनिक जीवन के  द्वंद की स्थितियों को पहचानते हैं|
16,17

3.  नवरसों  को उनके दैनिक अनुभवों से जोड़ते हैं|
16

सी-1.2 सहयोग  और  सामूहिक  गतिविधि 4. प्रस्तुति देने के लिए साथियों के साथ सहयोग करते हैं|
17,19

5. दो या दो से अधिक पात्रों का कठपुतली प्रदर्शन बनाते हैं|
19,20

सी.जी. 2 सी-2.3 रुढिबदता  की  पहचान  करना 6. किसी कहानी में  पात्रो  की विशिष्ट विशेषताओं की पहचान कराते हैं|
17

7. सभी  जेंडर के  पात्रो  के  लिए  पोशाक और  श्रृंगार

की  कल्पना  करते  है |


17

सी-2.4 कल्पना  और  रचनात्मक
8.स्थितियों, दृश्यों  और पात्रों का  सूक्ष्म विवरण की कल्पना करते हैं
17

9. स्थितियों और सरल कहानियों की कल्पना करते हैं और उन पर प्रतिक्रिया देते हैं|
16

10. स्थानीय संस्कृति और अपनी भावनाओं के आधार पर मुखौटे बनाते हैं|
16



सी.जी सी सामान्य  मानदंड रंगमंच  में  विशिष्ट  अधिगम्य  परिणाम अधयाय शिक्षक स्वयं
सी.जी.3 सी-3.1 सामग्री,उपकरण  और  तकनीकी  
का   उपयोग
11 विभिन्न प्रकार की कठपुतलियों (अँगुली, जुर्राब, छड़ी और छाया) बनाते हैं|
19

12. पोशाक, श्रृंगार और मंच सज्जा तैयार करते हैं और उन्हें एक प्रस्तुति के लिए जोड़ते हैं|
17,19,20

13. कागज और गत्ते का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के मुखौटे बनाते है|
16

14. पात्रों  के लिए आवाज को बदलकर प्रयोग करते हैं|
19

15. चेहरे के भाव, आवाज और क्रिया के माध्यम से भावनाओं को व्यक्त करते हैं|
16

सी-3.2 तैयारी से  प्रस्तुति  तक   कार्य   प्रक्रिया 16   कहानियों को संवादों और वार्तालापों में संशोधित करते हैं|
17,19,20

17. एक कहानी को आरंभ, मध्य और अंत के रूप में संरचित करते हैं|
17,19,20

18. संचलनों और संवाद बोलने का पूर्वाभ्यास करते हैं|
19,20

19. दर्शकों के लिए एक संपूर्ण प्रस्तुतीकरण करते हैं|
19,20


सी-4.1
और
सी-4.2
स्थानीय या  क्षेत्रीय  कला  रूपों  और
कलाकारों  का  ज्ञान
20 कहानियों और वेशभूषा के प्रकारों में अंतर की पहचान
18,19

21. लोकप्रिय रंगमंच   कंपनियों के नाम स्मरण रखते हैं|
18

22. आज के रंगमंच की   तुलना  कंपनी रंगमंच या पारंपरिक कठपुतली से करते हैं|
18,19




 रंगमंच  में मध्यावधि    रचनात्मक    मूल्यांकन  समुच्चय

रंगमंच में वार्षिक  रचनात्मक   मूल्यांकन  समुच्चय

 संकलनात्मक मूल्यांकन

दृश्य  कला

संकलनात्मक मूल्यांकन के उदाहरण


मूल्यांकन   के  लिए  मापदंड

  • आपके लिए  पतंग का क्या अर्थ है|
प्रतिदिन के अनुभव की व्यक्तिगत रूप से अभिव्यक्ति |कल्पनाशीलता और रचनात्मकत  |
  • अपनी पसंद के किसी भी आकार में एक   पतंग  की  रचना  कीजिए (नियमित
या  अनियमित) |
किसी अवधारणा के लिए उपयुक्त   सामग्रियों का चयन करना  |

  • पतंग  को बनाने के लिए अपने  आस  -पास   उपलब्ध   सामग्री का प्रयोग कीजिए|


 उपयुक्त तकनीकों का प्रयोग कर समस्याओं का समाधान |
प्रस्तुतीकरण
  • इसे अपनी पसंद के चित्रों, रगों  या कोलाज से सजाएँ |

  • इसे लटकाने  या हवा में उड़ाने के लिए एक धागे से बाँधे|

समुह(3-4)
  • अपनी सभी  पतंगों  को प्रदर्शित करने के लिए किसी उपयुक्त स्थान का चयन कीजिए |
सहभागिता और समूह कार्य |
  • अपने मित्रों से कहिए कि वे   प्रदर्शित  पतंगों  में   से  अपनी  पतंग  पहचाने और  उस पर चर्चा कीजिए|


आलोचनात्मक चिंतन|



 संक्ल्नात्म्क  मुल्यांकन  के  उदाहरण मुल्यांकन के लिए मानदंड
वैयक्तिक
  • जब कोई गाना बजाया जाता है, तो विद्यार्थी मुख्य भाव की पहचान करते हैं|
विभिन्न रसों या भावों का ज्ञाना |
  • बजार जा रहे गीत में नाद, गतिशीलता स्वर बोल और   वाधयंत्र  किस प्रकार   मुख्य    भाव को व्यक्त करने में   सहायता करते हैं  चर्चा  कीजिए |
संगीत के तत्वों एवं भावो के बीच का संबंध| 
  •  गीत में लय   चक्र  को पहचानिए और शरीर के अंगों से   ताल  देते  हुए   एक सरल लय  बनाने का प्रयास कीजिए|


पैरों की  थाप या ताली  से लय का निर्माण करना |
सरल   लय  पैटर्न बनाना|
समूह (3-4)
विद्यार्थी एक  कहानी  चुनते हैं और उसे   जीवंत  रूप  में  प्रस्तुत करने के लिए गीतों का उपयोग करते हैं|
संगीत के  चयन  में  सक्रिय  रूप  से  भाग  लेना |

अंततः  दर्शको  के  सामने   प्रदर्शन प्रस्तुति   देना |



नृत्य
संकलनात्मक  मुल्यांकन  के  उदाहरण
मुल्यांकन  के  लिए  मानदंड
वैयक्तिक
  • कोई   एक  भाव  दिखाओ और  उससे  संबंधित  रस  का  नाम  बताओ |  
संचलन   के  शरीर  का  कल्पनाशील  प्रयोग  |
  • दिए  गए  दो  तीन  हस्त  मुद्रा  का  प्रदर्शन  कीजिए  |
रीढ  की  हडडी  में  मोड़  का  उपयोग |

  • किसी  एक कल्पनाशील  हस्त  मुद्रा   का  निर्माण  कीजिए  |
पैर  की  लयबद्ध  थाप  देना  |

  • परियोजना  कार्य  |
भुजाओ  और  पैरो  का  समन्वय |
समूह(3-4)

  •   नृत्य  और  लय  के  तारतम्य |
समुह  के साथ  लय  स्थापित  करना  |
  •  हस्त के  साथ  संवाद  या   वार्तालाप  कीजिए |
कोरियोग्राफी  में  सहभागिता  का  प्रयास |
रंगमंच संकलनात्मक  मूल्यांकन   के  उदाहरण मूल्यांकन  के लिए  मानदंड
वैयक्तिक
  • शिक्षक  द्वारा  एक  भाव  या  रस  दिया  जाता है |
भाव  और रस  का  ज्ञान  |
  • बच्चे  नाम  के  साथ  एक  पात्र का  निर्माण  करते है |
जीवन  से  इसका  सम्बन्ध  और  इसके  अनुप्रयोग  को   समझाते  है  |
  • सम्बंधित भाव  में दो  परिस्थियों  का  वर्णन  कीजिए |
इसे  प्रस्तुत  करने  का  आत्मविश्वास (मौखिक  या  लिखित) |
  •  उस  पात्र  के  लिए  वस्त्र -विन्यास   व  रूप  सज्जा कीजिए |
सहजता    समस्या समाधान  |
समूह(3-4)_
  • संवाद  के साथ एक  साधारण  कहानी  का  निर्माण  कीजिए  जिसमे  आरंभ  -मध्य -अंत  स्पष्ट  हो  |
समूह  कार्य  और  नेतृत्व   कौशल |
  • कहानी  में  दो  पात्रो  को  प्रतिनिधित्व  करने   वाले दो  मुखौटे  का निर्माण कीजिए  |
कथानक  और  मुखौटो  की  समझ  |




मध्यावधि  अंक रचनात्मक   समुच्चय   अंक योगात्मक  समुच्चय अंक कुल
दृश्य  कला


संगीत


नृत्य


रंगमंच


कला  शिक्षा  में  कुल


विधार्थी  की  शक्तियों  पर   टिप्पणियॉ


सुधार  के  क्षेत्रों  पर   टिप्पणियॉ






वार्षिक  अंक रचनात्मक   समुच्चय   अंक
योगात्मक  समुच्चय अंक कुल
दृश्य  कला



संगीत



नृत्य



रंगमंच


कला  शिक्षा  में  कुल



विधार्थी  की  शक्तियों  पर   टिप्पणियॉ



सुधार  के  क्षेत्रों  पर   टिप्पणियॉ





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