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1 मातृभूमि 



ऊँचा खड़ा हिमालय

आकाश चूमता है,

नीचे चरण तले झुक,

नित सिंधु झूमता है।

गंगा यमुन त्रिवेणी

नदियाँ लहर रही हैं,

जगमग छटा निराली,

पग पग छहर रही हैं।

वह पुण्य-भूमि मेरी,

वह स्वर्ण-भूमि मेरी।

वह जन्मभूमि मेरी

वह मातृभूमि मेरी।

झरने अनेक झरते

जिसकी पहाड़ियों में,

चिड़ियाँ चहक रही हैं,

हो मस्त झाड़ियों में।

अमराइयाँ घनी हैं

कोयल पुकारती है,

बहती मलय पवन है,

तन-मन सँवारती है।



वह धर्मभूमि मेरी,

वह कर्मभूमि मेरी।

वह जन्मभूमि मेरी

वह मातृभूमि मेरी।

जन्मे जहाँ थे रघुपति,

जन्मी जहाँ थी सीता,

श्रीकृष्ण ने सुनाई,

वंशी पुनीत गीता।

गौतम ने जन्म लेकर,

जिसका सुयश बढ़ाया,

जग को दया सिखाई,

जग को दिया दिखाया।

वह युद्ध-भूमि मेरी,

वह बुद्ध-भूमि मेरी।

वह मातृभूमि मेरी,

वह जन्मभूमि मेरी।

— सोहनलाल द्विवेदी





कवि से परिचय


इस कविता को हिंदी के प्रसिद्ध कवियों में से एक सोहनलाल द्विवेदी जी ने लिखा है। उनका जन्म आज से लगभग सवा सौ साल पहले हुआ था। उस समय अंग्रेजों का भारत पर आधि‍पत्य था। उन्होंने अपनी लेखनी से अंग्रेज़ों का विरोध किया। उनकी लेखनी का सबसे प्रिय विषय था ‘देशभक्‍ति’। भारत के गौरव का गान करना उन्हें बहुत प्रिय था। उनकी कुछ और चर्चित रचनाएँ हैं— ‘बढ़े चलो, बढ़े चलो’, ‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’ आदि। (1906–1988)


पाठ से

आइए, अब हम इस कविता पर विस्‍तार से चर्चा करें। आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।


मेरी समझ से     

(क) नीचे दिए गए प्रश्‍नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए—

(1) हिंद महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है?

  • चरण
  • हिमालय
  • वंशी
  • सिंधु

(2) मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से—

  • भारत की प्रशंसा की गई है।
  • भारत के महापुरूषों की जय की गई है।
  • भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है।
  • भारतवासियों की वीरता का बखान किया गया है।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही
क्यों चुने?


 मिलकर करें मिलान     

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

शब्द

अर्थ या संदर्भ

  1. हिमालय
  2. त्रिवेणी
  3. मलय पवन
  4. सिंधु
  5. गंगा-यमुना
  6. रघुपति
  1. श्रीकृष्ण
  1. सीता
  2. गीता
  3. गौतम बुद्ध
  1. एक प्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक 
  2. वसुदेव के पुत्र वासुदेव
  3. भारत की प्रसिद्ध नदियाँ
  4. तीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम
  5. श्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र
  6. दक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु
  7. एक प्रसिद्ध और प्राचीन ग्रंथ ‘श्रीमद््भगवदगीता’, इसमें वे प्रश्‍न-उत्तर और संवाद हैं जो महाभारत में श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच हुए थे
  8. समुद्र, एक नदी का नाम
  9. जनक की पुत्री जानकी
  10. भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला


पंक्तियों पर चर्चा     

कविता में से चुनकर कुछ पंक्‍तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—

“वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।

वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।”


सोच-विचार के लिए     

(क) कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्‍नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

1. कोयल कहाँ रहती है?

2. तन-मन कौन सँवारती है?

3. झरने कहाँ से झरते हैं?

4. श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?

5. गौतम ने किसका यश बढ़ाया?


(ख) नदियाँ लहर रही हैं

पग पग छहर रही हैं

‘लहर’ का अर्थ होता है— पानी का हिलोरा, मौज, उमंग, वेग, जोश

‘छहर’ का अर्थ होता है— बिखरना, छितराना, छिटकना, फैलना

कविता पढ़कर पता लगाइए और लिखिए—

  • कहाँ-कहाँ छटा छहर रही हैं?
  • किसका पानी लहर रहा है?


    कविता की रचना

“गंगा यमुन त्रिवेणी

नदियाँ लहर रही हैं”

‘यमुन’ शब्द यहाँ ‘यमुना’ नदी के लिए आया है। कभी-कभी कवि कविता की लय और सौंदर्य को बढ़ाने के लिए इस प्रकार से शब्दों को थोड़ा बदल देते हैं। यदि आप कविता को थोड़ा और ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको और भी बहुत-सी विशेषताएँ पता चलेंगी। आपको जो विशेष बातें दिखाई दें, उन्हें आपस में साझा कीजिए और लिखि‍ए। जैसे सबसे ऊपर इस कविता का एक शीर्षक है।


 मिलान

स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्‍तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्‍तियों को रेखा खींचकर जोड़िए—

स्तंभ 1

स्तंभ 2

  1. वह जन्मभूमि मेरी
    वह मातृभूमि मेरी।        
  2. चिड़ियाँ चहक रही हैं,
    हो मस्त झाड़ियों में
  3. अमराइयाँ घनी हैं
    कोयल पुकारती है 
  1. यहाँ आम के घने उद्यान हैं जिनमें कोयल आदि पक्षी चहचहा रहे हैं
  2. मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है वह भूमि मेरी माँ समान है
  3. वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है कि पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं


 अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—

(क) “अमराइयाँ घनी हैं

कोयल पुकारती है”

कोयल क्यों पुकार रही होगी? किसे पुकार रही होगी? कैसे पुकार रही होगी?

(ख) “बहती मलय पवन है,

तन मन सँवारती है”

पवन किसका तन-मन सँवारती है? वह यह कैसे करती है?


शब्दों के रूप     

नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।

(क) नीचे दी गई पंक्‍तियों को पढ़िए—

“जगमग छटा निराली,

पग पग छहर रही हैं”

इन पंक्‍तियों में ‘पग’ शब्द दो बार आया है। इसका अर्थ है ‘हर पग’ या ‘हर कदम’ पर।

शब्दों के ऐसे ही कुछ जोड़े नीचे दिए गए हैं। इनके अर्थ लिखिए—

घर-घर

बाल-बाल

साँस-साँस

देश-देश

पर्वत-पर्वत

(ख) “वह युद्ध-भूमि मेरी

वह बुद्ध-भूमि मेरी”

कविता में ‘भूमि’ शब्द में अलग-अलग शब्द जोड़कर नए-नए शब्द बनाए गए हैं। आप भी कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ पता कीजिए—

(संकेत— तप, देव, भारत, जन्म, कर्म, कर्तव्य, मरु, मलय, मल्ल, यज्ञ, रंग, रण, सिद्ध आदि)

g1


 थोड़ा भि‍न्न, थोड़ा समान


नीचे दी गई पंक्‍तियों को पढ़िए—

जग को दया सिखाई,

जग को दिया दिखाया।”

‘दया’ और ‘दिया’ में केवल एक मात्रा का अंतर है, लेकिन इस एक मात्रा के कारण शब्द का अर्थ पूरी तरह बदल गया है। आप भी अपने समूह में मिलकर ऐसे शब्दों की सूची बनाइए जिनमें केवल एक मात्रा का अंतर हो, जैसे घड़ा-घड़ी।


पाठ से आगे

आपकी बात     

(क) इस कविता में भारत का सुंदर वर्णन किया गया है। आप भारत के किस स्थान पर रहते हैं? वह स्थान आपको कैसा लगता है? उस स्थान की विशेषताएँ बताइए।

(संकेत— प्रकृति, खान-पान, जलवायु, प्रसिद्ध स्थान आदि)

(ख) अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र के बारे में लिखिए। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको अच्छी लगती हैं?


वंशी-से     

“श्रीकृष्ण ने सुनाई,

वंशी पुनीत गीता”

‘वंशी’ बाँसुरी को कहते हैं। यह मुँह से फूँक कर बजाया जाने वाला एक ‘वाद्य’ यानी बाजा है। नीचे फूँक कर बजाए जाने वाले कुछ वाद्यों के चित्र दिए गए हैं। इनके नाम शब्द-जाल से खोजिए और सही चित्र के नीचे लिखिए।

वाद्यों के नामों का शब्द-जाल

ना

बाँ

भं

शं

सु

को

स्व

री

गो

रा

बी

जा

सीं

गी






   सीं
    बाँ 
  बी   अ




  शं    भं
  ना
  श


आज की पहेली     

आज हम आपके लिए एक अनोखी पहेली लाए हैं। नीचे कुछ अक्षर दिए गए हैं। आप इन्हें मिलाकर कोई सार्थक शब्द बनाइए। अक्षरों को आगे-पीछे किया जा सकता है यानी उनका क्रम बदला जा सकता है। आप अपने मन से किसी भी अक्षर के साथ कोई मात्रा भी लगा सकते हैं। पहला शब्द हमने आपके लिए पहले ही बना दिया है।

क्रम संख्या

अक्षर

शब्द

1

2

3

4

5

6

स म ह ग र

ह म य ल

ग ग

भ त र

ल क य

व न प

महासागर


झरोखे से     

आप अपने विद्यालय में ‘वंदे मातरम्’ गाते होंगे। ‘वंदे मातरम्’ बंकिम चन्‍द्र चट्टोपाध्‍याय द्वारा रचा गया था। यह गीत स्‍वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत था। भारत में इसका स्‍थान ‘जन गण मन’ के समान है। क्या आप इसका अर्थ जानते-समझते हैं? आइए, आज हम पहले इसका अर्थ समझ लेते हैं, फिर समूह में चर्चा करेंगे–

वंदे मातरम्

भावार्थ

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!

सुजलाम्, सुफलाम्,

मलयज शीतलाम्,

शस्यश्यामलाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्!

शुभ्रज्योत्सना पुलकित यामिनीम्,

फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,

सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,

सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!



हे माता, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ!

तुम जल से भरी हुई हो,
फलों से परिपूर्ण हो,

तुम्हें मलय से आती हुई पवन शीतलता
प्रदान करती है,

तुम अन्न के खेतों से परिपूर्ण वंदनीय माता हो!

हे माँ मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ!

जिसकी रमणीय रात्रि को चंद्रमा का प्रकाश
शोभायमान करता है,

जो खिले हुए फूलों के पेड़ों से सुसज्जित है,

सदैव हँसने वाली, मधुर भाषा बोलने वाली,

सुख देने वाली, वरदान-देने वाली माँ,

मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ!

आप नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी पर इसे संगीत के साथ सुन भी सकते हैं—

https://knowindia.india.gov.in/hindi/national-identity-elements/national-song.php


साझी समझ     

आपने ‘मातृभूमि’ कविता को भी पढ़ा और ‘वंदे मातरम्’ को भी। अब कक्षा में चर्चा कीजिए और पता लगाइए कि इन दोनों में कौन-कौन सी बातें एक जैसी हैं और कौन-कौन सी बातें कुछ अलग हैं।


खोजबीन के लिए     


नीचे पाठ से संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई हैं, इन्‍हें पुस्‍तक में दिए गए क्‍यू.आर.कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।

• स्वाधीनता की सरगम— वंदना के इन स्वरों में

• ना हाथ एक शस्‍त्र हो

• पुष्प की अभिलाषा

• यह महिमामय अपना भारत


पढ़ने के लिए

पुष्प की अभिलाषा

चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,

चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ,

चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,

चाह नहीं, देवों के सिर पर चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ,

मुझे तोड़ देना वनमाली!

उस पथ में देना तुम फेंक।

मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने,

जिस पथ जावें वीर अनेक।

— माखनलाल चतुर्वेदी