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3 पहली बूँद




वह पावस का प्रथम दिवस जब,

पहली बूँद धरा पर आई।

अंकुर फूट पड़ा धरती से,

नव-जीवन की ले अँगड़ाई।

धरती के सूखे अधरों पर,

गिरी बूँद अमृत-सी आकर।

वसुंधरा की रोमावलि-सी,

हरी दूब पुलकी-मुसकाई।

पहली बूँद धरा पर आई।।

आसमान में उड़ता सागर,

लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर।

बजा नगाड़े जगा रहे हैं,

बादल धरती की तरुणाई।

पहली बूँद धरा पर आई।।


नीले नयनों-सा यह अंबर,

काली पुतली-से ये जलधर।

करुणा-विगलित अश्रु बहाकर,

धरती की चिर-प्यास बुझाई।

बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला

बनने को फिर से ललचाई।

पहली बूँद धरा पर आई।।


— गोपालकृष्ण कौल


कवि से परिचय        

धरती के सूखे अधरों पर पहली बूँद के गिरने का अद््भुत दृश्य रचने वाले बाल साहित्यकार गोपालकृष्ण कौल (1923–2007) ने बच्चों के लिए देश-प्रेम, प्रकृति और जीव-जंतुओं से जुड़ी बहुत-सी मनोरम कविताएँ लिखी हैं। अपनी एक अन्य कविता हम कुछ सीखें में वे कहते हैं— देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।

पाठ से


मेरी समझ से     

(क) नीचे दिए गए प्रश्‍नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए-

1. कविता में ‘नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ किसके लिए प्रयुक्‍त हुआ है?

  • बादल
  • बूँद
  • अंकुर
  • पावस

2. ‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली- से ये जलधर’ में ‘काली पुतली’ है—

  • बारिश की बूँदें
  • वृद्ध धरती
  • नगाड़ा
  • बादल

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर क्यों चुने?


 मिलकर करें मिलान

कविता की कुछ पंक्‍तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्‍तियों में कुछ शब्द रेखांकित हैं। दाहिनी ओर रेखांकित शब्दों के भावार्थ दिए गए हैं। इनका मिलान कीजिए।

कविता की पंक्‍तियाँ

भावार्थ

1.

आसमान में उड़ता सागर,

लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर

1. मेघ-गर्जना

2.

बजा नगाड़े जगा रहे हैं,

बादल धरती की तरुणाई

2. बादल

3.

नीले नयनों सा यह अम्बर,

काली पुतली-से ये जलधर।

3. हरी दूब

4.

वसुंधरा की रोमावलि-सी,

हरी दूब पुलकी-मुसकाई।

4. आकाश


 पंक्तियों पर चर्चा  

कविता में से चुनकर कुछ पंक्‍तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—

  • आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर,

    बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।

  • नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर।

    करुणा-विगलित अश्रु बहाकर, धरती की चिर-प्यास बुझाई।


     सोच-विचार के लिए

कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्‍नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—

  • बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे प्रकट होता है?
  • कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?


    कविता की रचना

‘आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर’ कविता की इस पंक्‍ति का सामान्य अर्थ देखें तो समुद्र का आकाश में उड़ना असंभव होता है। लेकिन जब हम इस पंक्‍ति का भावार्थ समझते हैं तो अर्थ इस प्रकार निकलता है— समुद्र का जल बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है। ऐसे प्रयोग न केवल कविता की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि उसे आनंददायक भी बनाते हैं। इस कविता में ऐसे दृश्यों को पहचानें और उन पर चर्चा करें।


शब्द एक अर्थ अनेक     

‘अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ कविता की इस पंक्‍ति में ‘फूटने’ का अर्थ पौधे का अंकुरण है। ‘फूट’ का प्रयोग अलग-अलग अर्थों में किया जाता है, जैसे— फूट डालना, घड़ा फूटना आदि। अब फूट शब्‍द का प्रयोग ऐसे वाक्‍यों में कीजिए जहाँ इसके भि‍न्न-भि‍न्न अर्थ निकलते हों, जैसे— अंग्रेज़ों की नीति थी फूट डालो और राज करो


अनेक शब्दों के लिए एक शब्द     

‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर’ कविता की इस पंक्‍ति में ‘जलधर’ शब्द आया है। ‘जलधर’ दो शब्दों से बना है, जल और धर। इस प्रकार जलधर का शाब्दिक अर्थ हुआ जल को धारण करने वाला। बादल और समुद्र; दोनों ही जल धारण करते हैं। इसलि‍ए दोनों जलधर हैं। वाक्य के संदर्भ या प्रयोग से हम जान सकेंगे कि जलधर का अर्थ समुद्र है या बादल। शब्दकोश या इंटरनेट की सहायता से ‘धर’ से मिलकर बने कुछ शब्द और उनके अर्थ ढूँढ़कर लिखिए।


शब्द पहेली     

दिए गए शब्द-जाल में प्रश्‍नों के उत्तर खोजें—

गा

दू

अं

ड़ा

श्रु

क. एक प्रकार का वाद्य यंत्र

ख. आँख के लिए एक अन्‍य शब्‍द

ग. जल को धारण करने वाला

घ. एक प्रकार की घास

ङ. आँसू का समानार्थी

च. आसमान का समानार्थी शब्द

पाठ से आगे

आपकी बात     

  • बारिश को लेकर हर व्यक्‍ति का अनुभव भि‍न्न होता है। बारिश आने पर आपको कैसा लगता है? बताइए।
  • आपको कौन-सी ऋतु सबसे अधि‍क प्रिय है और क्यों? बताइए।


    समाचार माध्यमों से

प्रत्येक मौसम समाचार के विभिन्न माध्यमों (इलेक्ट्राॅनिक या प्रिंट या सोशल मीडिया) के प्रमुख समाचारों में रहता है। संवाददाता कभी बाढ़ तो कभी सूखे या भीषण ठंड के समाचार देते दिखाई देते हैं। आप भी बन सकते हैं संवाददाता या लिख सकते हैं समाचार।

  • अत्यधिक गर्मी, सर्दी या बारिश में आपने जो स्थिति देखी है उसका आँखों देखा हाल अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।


    सृजन


नाम देना भी सृजन है। ऊपर दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और इसे एक नाम दीजिए।


इन्हें भी जानें     

इस कविता में नगाड़े की ध्वनि का उल्लेख है— “बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।” नगाड़ा भारत का एक पारंपरिक वाद्ययंत्र है। कुछ वाद्ययंत्रों को उन पर चोट कर बजाया जाता है, जैसे— ढोलक, नगाड़ा, डमरू, डफली आदि। नगाड़ा प्राय: लोक उत्सवों के अवसर पर बजाया जाता है। होली जैसे लोकपर्व के अवसर पर गाए जाने वाले गीतों में इसका प्रयोग होता है। नगाड़ों को जोड़े में भी बजाया जाता है जिसमें एक की ध्वनि पतली तथा दूसरे की मोटी होती है।



खोजबीन     

आपके यहाँ उत्‍सवों में कौन-से वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं? उनके बारे में जानकारी एकत्र करें और अपने समूह में उस पर चर्चा करें।


आइए इंद्रधनुष बनाएँ     

बारिश की बूँदें न केवल जीव-जंतुओं को राहत पहुँचाती हैं बल्कि धरती को हरा-भरा भी बनाती हैं। कभी-कभी ये बूँदें आकाश में बहुरंगी छटा बिखेरती हैं जिसे ‘इंद्रधनुष’ कहा जाता है। आप भी एक सुंदर इंद्रधनुष बनाइए और उस पर एक छोटी-सी कविता लिखि‍ए। इसे कोई प्यारा सा नाम भी दीजिए।


झरोखे से     

एक बूँद

ज्यों निकल कर बादलों की गोद से

थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी

सोचने फिर-फिर यही मन में लगी

आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों बढ़ी।

— अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध