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5 रहीम के दोहे*


रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि ।

जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि ।।

तरुवर फल नहिं खात हैं सरवर पियहिं न पान ।

कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान ।।

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय ।

टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय ।।

रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून ।

पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून ।।

रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय ।

हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय ।।

रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल ।

आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल ।।

कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत ।

बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत ।।

— अब्दुर्रहीम खानखाना



*संदर्भ— रहीम ग्रंथावली (सं.) विद्यानिवास मिश्र

कवि से परिचय    


रहीम भक्‍तिकाल के एक प्रसिद्ध कवि थे। ऐसा माना जाता है कि उनका जन्म 16वीं शताब्दी में हुआ था। उन्होंने नीति, भक्‍ति और प्रेम संबंधी रचनाएँ कीं। उन्होंने अवधी और ब्रजभाषा दोनों में कविताएँ लिखी हैं। रहीम रामायण, महाभारत आदि प्रसिद्ध ग्रंथों के अच्छे जानकार थे। उनकी मृत्यु 17वीं शताब्दी में हुई थी। आज भी आम जन-जीवन में उनके दोहे बहुत लोकप्रिय हैं। 


पाठ से


मेरी समझ से     

(क) नीचे दिए गए प्रश्‍नों का सबसे सही (सटीक) उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए—

(1) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।” दोहे का भाव है—

  • सोच-समझकर बोलना चाहिए।
  • मधुर वाणी में बोलना चाहिए।
  • धीरे -धीरे बोलना चाहिए।
  • सदा सच बोलना चाहिए।

(2) “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।” इस दोहे का भाव क्या है?

  • तलवार सुई से बड़ी होती है।
  • सुई का काम तलवार नहीं कर सकती।
  • तलवार का महत्व सुई से ज्यादा है।
  • हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने यही उत्तर क्यों चुने?


मिलकर करें मिलान     

पाठ में से कुछ दोहे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके भाव स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही भाव से मिलान कीजिए।

स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय

टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय। 

1. सज्जन परहित के लिए ही संपत्त‍ि संचित करते हैं

2. कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत

बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत। 

2. सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं

3. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान

कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान। 

3. प्रेम या रिश्‍तों को सहेजकर रखना चाहिए


 पंक्तियों पर चर्चा

नीच दिए गए दोहों पर समूह में चर्चा कीजिए और उनके अर्थ या भावार्थ अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—

(क) रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय।

हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।।

(ख) रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।

आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।।


सोच-विचार के लिए     

दोहों को एक बार फिर से पढ़िए और निम्‍नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—

1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।

टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।।

(क) इस दोहे में ‘मिले’ के स्थान पर ‘जुड़े’ और ‘छिटकाय’ के स्थान पर ‘चटकाय’ शब्द का प्रयोग भी लोक में प्रचलित है। जैसे—

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।

टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।।

इसी प्रकार पहले दोहे में ‘डारि’ के स्थान पर ‘डार’, ‘तलवारि’ के स्थान पर ‘तरवार’ और चौथे दोहे में ‘मा‍नुष’ के स्थान पर ‘मानस’ का उपयोग भी प्रचलित हैं। ऐसा क्यों होता है?

(ख) इस दोहे में प्रेम के उदाहरण में धागे का प्रयोग ही क्यों किया गया है? क्या आप धागे के स्थान पर कोई अन्य उदाहरण सुझा सकते हैं? अपने सुझाव का कारण भी बताइए।

2. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिँ न पान।

कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।।

इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के किस मानवीय गुण की बात की गई है? प्रकृति से हम और क्या-क्या सीख सकते हैं?


शब्दों की बात     

हमने शब्दों के नए-नए रूप जाने और समझे। अब कुछ करके देखें—

  • शब्द-संपदा

कविता में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखि‍ए।

कविता में आए शब्द

मातृभाषा में समानार्थक शब्द

तरुवर

बिपति

छिटकाय

सुजान

सरवर

साँचे

कपाल

  • शब्द एक अर्थ अनेक

रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।।

इस दोहे में ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ हैं— सम्मान, जल, चमक।

इसी प्रकार कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आप भी इन शब्दों के तीन-तीन अर्थ लिखिए। आप इस कार्य में शब्दकोश, इंटरनेट, शिक्षक या अभिभावकों की सहायता भी ले सकते हैं।

कल – , ,

पत्र – , ,

कर – , ,

फल – , ,

पाठ से आगे


आपकी बात     

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।

जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।।

इस दोहे का भाव है— न कोई बड़ा है और न ही कोई छोटा है। सबके अपने-अपने काम हैं, सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता और महत्ता है। चाहे हाथी हो या चींटी, तलवार हो या सुई, सबके अपने-अपने आकार-प्रकार हैं और सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता और महत्व है। सिलाई का काम सुई से ही किया जा सकता है, तलवार से नहीं। सुई जोड़ने का काम करती है जबकि तलवार काटने का। कोई वस्‍तु हो या व्‍यक्‍ति, छोटा हो या बड़ा, सबका सम्मान करना चाहिए।

अपने मनपसंद दोहे को इस तरह की शैली में अपने शब्दों में लिखिए। दोहा पाठ से या पाठ से बाहर का हो सकता है।


सरगम     

  • रहीम, कबीर, तुलसी, वृंद आदि के दोहे आपने दृश्य-श्रव्य (टी.वी.-रेडियो) माध्यमों से कई बार सुने होंगे। कक्षा में आपने दोहे भी बड़े मनोयोग से गाए होंगे। अब बारी है इन दोहों की रिकॉर्डिंग (ऑडियो या विजुअल) की। रिकॉर्डिंग सामान्य मोबाइल से की जा सकती है। इन्हें अपने दोस्तों के साथ समूह में या अकेले गा सकते हैं। यदि संभव हो तो वाद्ययंत्रों के साथ भी गायन करें। रिकॉर्डिंग के बाद दोहे स्वयं भी सुनें और लोगों को भी सुनाएँ।
  • रहीम, वृन्द, कबीर, तुलसी, बिहारी .आदि के दोहे आज भी जनजीवन में लोकप्रिय हैं। दोहे का प्रयोग लोग अपनी बात पर विशेष ध्यान दिलाने के लिए करते हैं। जब दोहे समाज में इतने लोकप्रिय हैं तो क्यों न इन दोहों को एकत्र करें और अंत्याक्षरी खेलें। अपने समूह में मिलकर दोहे एकत्र कीजिए। इस कार्य में आप इंटरनेट, पुस्तकालय और अपने शि‍क्ष‍कों या अभि‍भावकों की सहायता भी ले सकते हैं।


     आज की पहेली

    1. दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ खाने के काम

    उल्‍टा होकर नाच दिखाऊँ, मैं क्‍यों अपना नाम बताऊँ।

    2. एक किले के दो ही द्वार, उनमें सैनिक लकड़ीदार

    टकराएँ जब दीवारों से, जल उठे सारा संसार।


    खोजबीन के लिए

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