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 9 मैया मैं नहिं माखन खायो

मैया मैं नहिं माखन खायो।

भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।


  

चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥
मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥ 
तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।
जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो॥
ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।
सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥

— सूरदास


कवि से पर‍चिय       


आपने जो रचना अभी पढ़ी है, वह सूरदास द्वारा रचित है। माना जाता है क‍ उनका जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ था। सूरदास ने अपना अधि‍कांश जीवन मथुरा, गोवर्धन सहित ब्रज के क्षेत्रों में श्रीकृष्ण के गुणगान में भजन गाते हुए बिताया। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में उपलब्ध हैं। ये रचनाएँ इतनी सुंदर हैं कि आज भी लोगों के बीच बहुत प्रचलित हैं। उनकी अध‍िकतर कविताओं में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का मनोहारी वर्णन है। ये कविताएँ अत्‍यंत लोकप्रिय हैं और देशभर में प्रेम से गायी जाती हैं। अपनी उत्कृष्‍ट रचनाओं के लिए वे महाकवि सूरदास कहलाते हैं। उनकी मृत्यु 16वीं शताब्दी में हुई थी।


पाठ से


मेरी समझ से     

(क) नीचे दिए गए प्रश्‍नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए—

(1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?

  • मुझे तुम पराया समझती हो।
  • मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।
  • मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए।
  • मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?

(2) श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?

  • गाय चरा रहे थे।
  • माखन खा रहे थे।
  • मधुबन में भटक रहे थे।
  • मित्रों के संग खेल रहे थे।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?


मिलकर करें मिलान     

पाठ में से चुनकर यहाँ कुछ शब्द दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

शब्द

अर्थ या संदर्भ

1. जसोदा

1. समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है। एक दिवस में आठ पहर होते हैं)

2. पहर

2. एक वट वृक्ष (मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृक्ष के ऊपर चढ़कर वंशी की ध्‍वनि से गायों को पुकारकर उन्हें एकत्रित करते)

3. लकुटि कमरिया

3. गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना हुआ जाल जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी हुई खाने-पीने की चीज़ों (जैसे— दूध, दही आदि) को कुत्ते, बिल्ली आदि न पा सकें

4. बंसीवट

4. यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था

5. मधुबन

5. जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ

6. छीको

6. गाय पालने वालों के बच्‍चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी

7. माता

7. मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन

8. ग्वाल-बाल

8. लाठी और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है कि श्रीकृष्ण लकुटि-कमरिया लेकर गाय चराने जाया करते थे)


 पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

(क) भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो

(ख) सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो


सोच-विचार के लिए     

पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिख‍ित प्रश्‍नों के उत्तर ढूँढ़कर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—

(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?

(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया? 


कविता की रचना     

भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो

चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो

इन पंक्‍त‍ियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए। ‘पठायो’ और ‘आयो’ दोनों शब्दों की अंतिम ध्वनि एक जैसी है। इस विशेषता को ‘तुक’ कहते हैं। इस पूरे पद में प्रत्येक पंक्तिके अंतिम शब्द का तुक मिलता है। अनेक कवि अपनी रचना को प्रभावशाली बनाने के लिए तुक का उपयोग करते हैं।

(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस पद की अंतिम पंक्‍त‍ि में कवि ने अपना नाम भी दिया है आदि।

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।


 अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—

(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?

(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?


शब्दों के रूप     

नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।

(क) “भोर भयो गैयन के पाछे

इस पंक्‍त‍ि में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए।

  • परे
  • छोटो
  • बिधि
  • भोरी
  • कछु
  • लै
  • नहिं

(ख) पद में से कुछ शब्द चुनकर नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और स्तंभ 2 में उनके अर्थ दिए गए हैं। शब्दों का उनके सही अर्थों से मिलान कीजिए—

स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. उपजि

2. जानि

3. जायो

4. जिय

5. पठायो

6. पतियायो

7. बहियन

8. बिधि

9. बिहँसि

10. भटक्यो

11. लपटायो

1. मुसकाई, हँसी

2. उपजना, उत्पन्न होना

3. जानकर, समझकर

4. विश्‍वास किया, सच माना

5. बाँह, हाथ, भुजा

6. प्रकार, भाँति, रीति

7. मन, जी

8. जन्मा

9. मला, लगाया, पोता

10. इधर-उधर घूमा या भटका

11. भेज दिया


वर्ण-परिवर्तन

“तू माता मन की अति भोरी

‘भोरी’ का अर्थ है ‘भोली’। यहाँ ‘ल’ और ‘र’ वर्ण परस्पर बदल गए हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि इस पद में कुछ और शब्दों में भी ‘ल’ या ‘ड़’ और ‘र’ में वर्ण-परिवर्तन हुआ है। ऐसे शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।


 पंक्ति से पंक्ति

नीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गयी हैं और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए गए हैं। रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए।

स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो

1. मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?

2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो

2. तेरे हृदय में अवश्‍य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया

3. मैं बालक बहिंयन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो

3. माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो

4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो

4. सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया

5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो

5. चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया

6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो

6. ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया

पाठ से आगे

आपकी बात

“मैया मैं नहिं माखन खायो”

यहाँ श्रीकृष्ण अपनी माँ के सामने सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। कभी-कभी हमें दूसरों के सामने सिद्ध करना पड़ जाता है कि यह कार्य हमने नहीं किया। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कब? किसके सामने? आपने अपनी बात सिद्ध करने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? उस घटना के बारे में बताइए।


घर की वस्‍तुएँ     

“मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।”

‘छीका’ घर की एक ऐसी वस्‍तु है जिसे सैकड़ों-वर्ष से भारत में उपयोग में लाया जा रहा है।


नीचे कुछ और घरेलू वस्‍तुओं के चित्र दिए गए हैं। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? चित्रों के नीचे लिखिए। यदि किसी चित्र को पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।

  
   

आप जानते ही हैं कि श्रीकृष्‍ण को मक्‍खन बहुत पसंद था। दूध से दही, मक्‍खन बनाया जाता है और मक्‍खन से घी बनाया जाता है। नीचे दूध से घी बनाने की प्रक्रिया संबंधी कुछ चित्र दिए गए हैं। अपने परिवार के सदस्यों, शि‍क्षकों या इंटरनेट आदि की सहायता से दूध से घी बनाने की प्रक्र‍िया लिखि‍ए।

   
  


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समय का माप     

“चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥”

(क) ‘पहर’ और ‘साँझ’ शब्दों का प्रयोग समय बताने के लिए किया जाता है। समय बताने के लिए और कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग किया जाता है? अपने समूह में मिलकर सूची बनाइए और कक्षा में साझा कीजिए।

(संकेत— कल, ॠतु, वर्ष, अब, पखवाड़ा, दशक, वेला, अवधि आदि)

(ख) श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?

(ग) मान लीजिए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे। वे सुबह कितने बजे गाय चराने के लिए घर से निकले होंगे?

(घ) ‘दोपहर’ का अर्थ है ‘दो पहर’ का समय। जब दूसरे पहर की समाप्‍त‍ि होती है और तीसरे पहर का प्रारंभ होता है। यह लगभग 12 बजे का समय होता है, जब सूर्य सिर पर आ जाता है। बताइए दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा?


हम सब विशेष हैं     

(क) महाकवि सूरदास दृष्‍ट‍िबाधि‍त थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्‍त‍ि और कविता रचने की कुशलता।

हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्‍न बनाता है। नीचे दिए गए व्यक्‍त‍ियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए—

आपकी

आपके किसी परिजन की

आपके शिक्षक की

आपके मित्र की

(ख) एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना। तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे—

  • एक सहपाठी पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ में नहीं आ रहा है।
  • एक सहपाठी को पढ़ना अच्छा लगता है और वह देख नहीं सकता।
  • एक सहपाठी बहुत जल्दी-जल्दी बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
  • एक सहपाठी बहुत अटक-अटक कर बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
  • एक सहपाठी को चलने में कठिनाई है और वह सबके साथ दौड़ना चाहता है।
  • एक सहपाठी प्रतिदिन विद्यालय आता है और उसे सुनने में कठिनाई है।


    आज की पहेली

दूध से मक्खन ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ बनाया जाता है। नीचे दूध से बनने वाली कुछ वस्‍तुओं के चित्र दिए गए हैं। दी गई शब्द-पहेली में उनके नाम के पहले अक्षर दे दिए गए हैं। नाम पूरे कीजिए—

     
    

खो

छा

मि

घी


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