12 हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान
यात्रा पर मैं दिल्ली से 15 जुलाई को, बंबई (मुंबई) से 16 जुलाई को और नैरोबी से 17 जुलाई को मॉरिशस के लिए रवाना हुआ। इधर से जाते समय नैरोबी (केन्या) की दुनिया में मुझे एक रात और दो दिन ठहरने का मौका मिल गया। अतएव मन में यह लोभ जग गया कि मॉरिशस के भारतीयों और अफ़्रीकियों से मिलने के पूर्व हमें अफ़्रीका के शेरों से मुलाकात कर लेनी चाहिए। जहाज़ (विमान) दूसरे दिन शाम को मिलने वाला था। अतएव, हम जिस दिन नैरोबी पहुँचे, उसी दिन नेशनल पार्क में घूमने को निकल गए।
नैरोबी का नेशनल पार्क चिड़ियाघर नहीं है। शहर से बाहर बहुत बड़ा जंगल है, जिसमें घास अधिक, पेड़ बहुत कम हैं। लेकिन जंगल में सर्वत्र अच्छी सड़कें बिछी हुई हैं और पर्यटकों की गाड़ियाँ उन पर दौड़ती ही रहती हैं। हमारी गाड़ी को भी काफ़ी देर तक दौड़ना पड़ा, मगर सिंह कहीं भी दिखाई नहीं पड़े। एक जगह सड़क पर दो मोटरें खड़ी थीं और उन पर तरह-तरह के बंदर और लंगूर चढ़े हुए थे। पर्यटक लोग इन बंदरों को कभी-कभी फल या बिस्कुट खाने को दे देते हैं। अतएव मोटर के रुकते ही बंदर उसे घेर लेते हैं।
बड़ी दूरी तय करने के बाद या यों कहिए कि दस-बीस मील के भीतर हर सड़क छान लेने के बाद, हम उस जगह जा पहुँचे, जहाँ सिंह उस दिन आराम कर रहे थे। वहाँ जो कुछ देखा, वह जन्मभर कभी नहीं भूलेगा। कोई सात-आठ सिंह लेटे या सोए हुए थे और उन्हें घेरकर आठ-दस मोटरें खड़ी थीं। तुर्रा यह कि सिंहों को यह जानने की कोई इच्छा ही नहीं थी कि हमें देखने को आने वाले लोग कौन हैं? मोटरों और शीशे चढ़ाकर उनके भीतर बैठे लोगों की ओर सिंहों ने कभी भी दृष्टिपात नहीं किया, मानो हम लोग तुच्छातितुच्छ हों और उनकी नज़र में आने के योग्य बिल्कुल नहीं हों। हम लोग वहाँ आधा घंटा ठहरे होंगे। इस बीच एक सिंह ने उठकर जम्हाई ली, दूसरे ने देह को ताना, मगर हमारी ओर किसी भी सिंह ने नज़र नहीं उठाई। हम लोग पेड़-पौधे और खरपात से भी बदतर समझे गए।
इतने में कोई मील-भर की दूरी पर हिरनों का एक झुंड दिखाई पड़ा, जिनके बीच एक जिराफ बिल्कुल बेवकूफ की तरह खड़ा था। अब दो जवान सिंह उठे और दो ओर चल दिए। एक तो थोड़ा-सा आगे बढ़कर एक जगह बैठ गया, लेकिन दूसरा घास के बीच छिपता हुआ मोर्चे पर आगे बढ़ने लगा।
हिरनों के झुंड ने ताड़ लिया कि उन पर सिंहों की नज़र पड़ रही है। अतएव वे चरना भूलकर चौकन्ने हो उठे। फिर ऐसा हुआ कि झुंड से छूटकर कुछ हिरन एक तरफ़ को भाग निकले, मगर बाकी जहाँ-के-तहाँ ठिठके खड़े रहे। बाकी हिरन ठिठके हुए इसलिए खड़े थे कि सिंह उन्हें देख रहे थे और सहज प्रवृत्ति हिरनों को यह समझा रही थी कि खतरा किसी भी तरफ़ भागने में हो सकता है। शिकार सिंह सूर्यास्त के बाद किया करते हैं और शिकार वे झुंड का नहीं करते, बल्कि उस जानवर का करते हैं जो भागते हुए झुंड से पिछड़ जाता है। अब यह बात समझ में आई कि हिरन भागने को निरापद नहीं समझकर एक गोल में क्यों खड़े थे।
मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मेरा रक्तचाप बढ़ रहा है। अतएव मैंने तय कर लिया कि अब घर लौटना चाहिए।
नैरोबी से मॉरिशस तक हम बी.ओ.ए.सी. के जहाज़ में उड़े। जहाज़ नैरोबी से चार बजे शाम को उड़ा और पाँच घंटों की निरंतर उड़ान के बाद जब वह मॉरिशस पहुँचा, तब वहाँ रात के लगभग दस बज रहे थे। रात थी, अँधेरा था, पानी बरस रहा था। मगर तब भी हमारे स्वागत में बहुत लोग खड़े थे। हवाई अड्डे के स्वागत का समाँ देखकर यह भाव जगे बिना नहीं रहा कि हम जहाँ आए हैं, वह छोटे पैमाने पर भारत ही है।
मॉरिशस द्वीप भूमध्य रेखा से कोई बीस डिग्री दक्खिन और देशांतर रेखा 60 के बिल्कुल पास, किंतु उससे पच्छिम की ओर बसा हुआ है। मॉरिशस की लंबाई 29 मील और चौड़ाई कोई 30 मील है। वैसे पूरे मॉरिशस द्वीप का रकबा 720 वर्गमील आँका जाता है। यह द्वीप हिंद महासागर का मोती है, भारत-समुद्र का सबसे खूबसूरत सितारा है।
मॉरिशस वह देश है, जिसका कोई भी हिस्सा समुद्र से पंद्रह मील से ज्यादा दूर नहीं है। मॉरिशस वह देश है, जहाँ की जनसंख्या के 67 प्रतिशत लोग भारतीय खानदान के हैं तथा जहाँ 53 प्रतिशत लोग हिंदू हैं। मॉरिशस वह देश है, जिसकी राजधानी पोर्टलुई की गलियों के नाम कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद और बम्बई हैं तथा जिसके एक पूरे मोहल्ले का नाम काशी है। मॉरिशस वह देश है, जहाँ बनारस भी है, गोकुल भी है और ब्रह्मस्थान भी। मॉरिशस वह देश है, जहाँ माध्यमिक स्कूलों को कॉलेज कहने का रिवाज़ है।
चूँकि मॉरिशस के हिंदुओं में से अधिकांश बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग हैं, इसलिए हिंदी का मॉरिशस में व्यापक प्रचार है। मॉरिशस की राजभाषा अंग्रेजी, किंतु संस्कृति की भाषा फ्रेंच है। मगर जनता वहाँ क्रेयोल बोलती है। क्रेयोल का फ्रेंच से वही संबंध है, जो संबंध भोजपुरी का हिंदी से है। और क्रेयोल के बाद मॉरिशस की दूसरी जनभाषा भोजपुरी को ही मानना पड़ेगा। प्रायः सभी भारतीय भोजपुरी बोलते अथवा उसे समझ लेते हैं। यहाँ तक कि भारतीयों के पड़ोस में रहने वाले चीनी भी भोजपुरी बखूबी बोल लेते हैं। किंतु, मॉरिशस की भोजपुरी शाहाबाद या सारन की भोजपुरी नहीं है। उसमें फ्रेंच के इतने संज्ञापद घुस गए हैं कि आपको बार-बार शब्दों के अर्थ पूछने पड़ेंगे।
मॉरिशस में ऊख की खेती और उसके व्यवसाय को जो सफलता मिली है, भारतीयों के कारण मिली है। मॉरिशस की असली ताकत भारतीय लोग ही हैं। सारा मॉरिशस कृषि-प्रधान द्वीप है, क्योंकि चीनी वहाँ का प्रमुख अथवा एकमात्र उद्योग है। किंतु भारतीय वंश के लोग यदि इस टापू में नहीं गए होते, तो ऊख की खेती असंभव हो जाती और चीनी के कारखाने बढ़ते ही नहीं।
भारत में बैठे-बैठे हम यह नहीं समझ पाते कि भारतीय संस्कृति कितनी प्राणवती और चिरायु है। किंतु, मॉरिशस जाकर हम अपनी संस्कृति की प्राणवत्ता का ज्ञान आसानी से प्राप्त कर लेते हैं। मालिकों की इच्छा तो यही थी कि भारतीय लोग भी क्रिस्तान हो जाएँ किंतु भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेकिन प्रलोभनों को ठुकरा दिया। वे अपने धर्म पर डटे रहे और जिस द्वीप में भगवान ने उन्हें भेज दिया था, उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला। यह ऐसी सफलता की बात है, जिस पर सभी भारतीयों को गर्व होना चाहिए।
मॉरिशस के प्रत्येक प्रमुख ग्राम में शिवालय होता है। मॉरिशस के प्रत्येक प्रमुख ग्राम में हिंदू तुलसीकृत रामायण (रामचरितमानस) का पाठ करते हैं अथवा ढोलक और झाँझ पर उसका गायन करते हैं। मॉरिशस के मंदिरों और शिवालयों को मैंने अत्यन्त स्वच्छ और सुरम्य पाया। कितना अच्छा हो, यदि हम भारत में भी अपने मंदिरों और तीर्थ स्थानों को उतना ही स्वच्छ और सुरम्य बनाना आरंभ कर दें, जितने स्वच्छ वे मॉरिशस में दिखाई देते हैं।
भारत के पर्व-त्योहार मॉरिशस में भी प्रचलित हैं। किंतु वर्ष का सर्वश्रेष्ठ धार्मिक पर्व शिवरात्रि है। मॉरिशस के मध्य में एक झील है, जिसका संबंध हिंदुओं ने परियों से बिठा दिया है और उस झील का नाम अब परी-तालाब हो गया है। परी-तालाब केवल तीर्थ ही नहीं, दृश्य से भी पिकनिक का स्थान है। किंतु, वहाँ पिकनिक पर जाने वाले लोग अपने साथ माँस-मछली नहीं ले जाते, न अपवित्रता का वहाँ कोई व्यापार करते हैं।
शिवरात्रि के समय सारे मॉरिशस के हिंदू श्वेत वस्त्र धारण करके कंधों पर काँवर लिए जुलूस बाँधकर परी तालाब पर आते हैं और परी-तालाब का जल भरकर अपने-अपने गाँव के शिवालय को लौट जाते हैं तथा शिवजी को जल चढ़ाकर अपने घरों में प्रवेश करते हैं। ये सारे कृत्य वे बड़ी ही भक्ति-भावना और पवित्रता से करते हैं। सभी वयस्क लोग उस दिन उजली धोती, उजली कमीज़ और उजली गाँधी टोपी पहनते हैं। हाँ, बच्चे हाफ पैंट पहन सकते हैं, लेकिन गाँधी टोपी उस दिन उन्हें भी पहननी पड़ती है। परी-तालाब पर लगने वाला यह मेला मॉरिशस के प्रमुख आकर्षणों में से एक है और उसे देखने को अन्य धर्मों के लोग भी काफ़ी संख्या में आते हैं।
— रामधारी सिंह ‘दिनकर’
लेखक से परिचय
(1908–1974)
आपने जो रोचक यात्रा-वृत्तांत पढ़ा है, उसे हिंदी के प्रसिद्ध लेखक रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखा है। ‘दिनकर’ की रचनाओं की विशेषता है— भारत और भारत की संस्कृति। उनकी रचनाओं में वीरता, उत्साह और देशप्रेम का भाव अधिक है। स्वतंत्रता मिलने के बाद भी भारत का गौरव-गान उनकी रचनाओं का विषय बना रहा। उन्होंने आप जैसे बच्चों के लिए भी पुस्तकें लिखी हैं, जैसे— मिर्च का मज़ा, पढ़क्कू की सूझ और सूरज का ब्याह आदि।
पाठ से
आइए, अब हम इस पाठ को थोड़ा और निकटता से समझ लेते हैं। आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी। आइए इन गतिविधियों को पूरा करते हैं।
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए—
(1) हिरण समूह में क्यों खड़े थे?
- भागने पर उन्हें सिंह के आक्रमण का डर था।
- वे भाग चुके हिरणों के लौटने की प्रतीक्षा में थे।
- वे बीच खड़े असावधान जिराफ की रक्षा कर रहे थे।
- सिंह उनसे उदासीन थे अत: उन्हें कोई खतरा नहीं था।
(2) मॉरिशस छोटे पैमाने पर भारतवर्ष ही है। कैसे?
- गन्ने की खेती अधिकतर भारतीयों द्वारा की जाती है।
- अधिकतर जनसंख्या भारत से जाने वालों की है।
- सभी भारतवासी परी तालाब पर एकत्रित होते हैं।
- भारत की बहुत-सी विशेषताएँ वहाँ दिखाई देती हैं।
(ख) अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
“भारत में बैठे-बैठे हम यह नहीं समझ पाते कि भारतीय संस्कृति कितनी प्राणवती और चिरायु है। किंतु, मॉरिशस जाकर हम अपनी संस्कृति की प्राणवत्ता का ज्ञान आसानी से प्राप्त कर लेते हैं।”
सोच-विचार के लिए
इस यात्रा-वृत्तांत को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए—
(क) “नैरोबी का नेशनल पार्क चिड़ियाघर नहीं है।”
नेशनल पार्क और चिड़ियाघर में क्या अंतर है?
(ख) “हम लोग पेड़-पौधे और खरपात से भी बदतर समझे गए।”
वे कौन थे जिन्होंने लेखक और अन्य लोगों को पेड़-पौधों और खरपात से भी बदतर समझ लिया था? उन्होंने ऐसा क्यों समझ लिया था?
(ग) “मॉरिशस की असली ताकत भारतीय लोग ही हैं।”
पाठ में इस कथन के समर्थन में कौन-सा तर्क दिया गया है?
(घ) “उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला।”
भारत से गए लोगों ने मॉरिशस को हिंदुस्तान जैसा कैसे बना दिया है?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से कुछ शब्द चुनकर स्तंभ 1 में दिए गए हैं। उनसे संबंधित वाक्य स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर शब्दों का मिलान उपयुक्त वाक्यों से कीजिए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
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स्तंभ 1 |
स्तंभ 2 |
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1. अफ़्रीका |
1. यह अफ़्रीका महाद्वीप के एक देश ‘केन्या’ की राजधानी है। |
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2. नैरोबी |
2. यह श्रीराम के जीवन पर आधारित अमर ग्रंथ ‘रामचरितमानस’ लिखने वाले कवि का नाम है। |
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3. रक्तचाप |
3. यह एशिया के बाद दुनिया का सबसे बड़ा महाद्वीप है। |
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4. बी.ओ.ए.सी. |
4. यह रक्त-वाहिनियों अर्थात नसों में बहते रक्त द्वारा उनकी दीवारों पर डाले गए दबाव का नाम है। |
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5. भूमध्य रेखा |
5. यह दो भाषाओं के मिलने से बनी नई भाषा का नाम है। |
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6. देशान्तर रेखा |
6. यह ‘ब्रिटिश ओवरसीज एयरवेज कॉरपोरेशन’ नाम का छोटा रूप है। यह एक बहुत पुरानी विदेशी विमान कंपनी थी। |
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7. तुलसीदास |
7. यह पृथ्वी के चारों ओर एक काल्पनिक वृत्त है जो पृथ्वी को दो भागों में बाँटता है— उत्तरी भाग और दक्षिणी भाग। |
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8. क्रेयोल |
8. यह बाँस का एक मज़बूत डंडा होता है जिसे काँवड़ या बहंगी भी कहा जाता है, जिसके दोनों सिरों पर बँधी हुई दो टोकरियों या छीकों में यात्री गंगाजल या अन्य वस्तुएँ भरकर ले जाते हैं। |
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9. काँवर |
9. ये ग्लोब पर उत्तर से दक्षिण की ओर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ हैं। ये उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से मिलाती हैं। |
यात्रा-वृत्तांत की रचना
“इतने में कोई मील-भर की दूरी पर हिरनों का एक झुंड दिखाई पड़ा। अब दो जवान सिंह उठे और दो ओर को चल दिए। एक तो थोड़ा-सा आगे बढ़कर एक जगह बैठ गया, लेकिन दूसरा घास के बीच छिपता हुआ मोर्चे पर आगे बढ़ने लगा।”
इन वाक्यों को पढ़कर ऐसा लगता है मानो हम लेखक की आँखों से स्वयं वह दृश्य देख रहे हैं। मानो हम स्वयं भी उस स्थान की यात्रा कर रहे हैं, जहाँ का वर्णन लेखक ने किया है। यह इस यात्रा-वृत्तांत की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। यदि आप इस यात्रा-वृत्तांत को थोड़ा और ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको और भी बहुत-सी विशेषताएँ पता चलेंगी।
इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और इसकी रचना पर ध्यान दीजिए। आपको जो विशेष बातें दिखाई दें, उन्हें आपस में साझा कीजिए और लिख लीजिए। जैसे – लेखक ने बताया है कि वह एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे और कब पहुँचा।
अनुमान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) “मॉरिशस वह देश है, जहाँ बनारस भी है, गोकुल भी है और ब्रह्मस्थान भी।”
मॉरिशस में लोगों ने गली-मोहल्लों के नाम इस तरह के क्यों रखे होंगे?
(ख) “कोई सात-आठ सिंह लेटे या सोए हुए थे और उन्हें घेरकर आठ-दस मोटरें खड़ी थीं।”
आपने पढ़ा कि केन्या का राष्ट्रीय पार्क पर्यटकों से भरा रहता है। पर्यटक जंगली जानवरों को घेरे रहते हैं। क्या इसका उन पशुओं पर कोई प्रभाव पड़ता होगा? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
(संकेत— राष्ट्रीय पार्क के बंदरों, सिंहों का व्यवहार भी बदल गया है।)
(ग) “हिरनों का एक झुंड दिखाई पड़ा, जिनके बीच एक जिराफ बिल्कुल बेवकूफ की तरह खड़ा था।”
सिंहों के आस-पास होने के बाद भी जिराफ क्यों खड़ा रहा होगा?
(घ) “मॉरिशस के मध्य में एक झील है, जिसका संबंध हिंदुओं ने परियों से बिठा दिया है और उस झील का नाम अब परी-तालाब हो गया है।”
उस झील का नाम ‘परी-तालाब’ क्यों पड़ा होगा?
(ङ) आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि लगभग 50 साल पहले ‘परी-तालाब’ का नाम बदलकर ‘गंगा-तालाब’ कर दिया गया है। मॉरिशस के लोगों ने यह नाम क्यों रखा होगा?
शब्दों की बात
नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, पुस्तकालय, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।
संज्ञा के स्थान पर
(क) “हिरनों ने ताड़ लिया कि उन पर सिंहों की नज़र पड़ रही है। अतएव वे चरना भूलकर चौकन्ने हो उठे।”
इन पंक्तियों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। इन वाक्यों में ये शब्द किनके लिए उपयोग किए गए हैं? ये शब्द ‘हिरनों’ के लिए उपयोग में लाए गए हैं। आप जानते ही हैं कि ‘हिरन’ यहाँ एक संज्ञा शब्द है। जो शब्द संज्ञा शब्दों के स्थान पर उपयोग में लाए जाते हैं, उन्हें ‘सर्वनाम’ कहते हैं।
अब नीचे दिए गए वाक्यों में सर्वनाम शब्दों को पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए —
1. “हाँ, बच्चे हाफ पैंट पहन सकते हैं, लेकिन गांधी टोपी उस दिन उन्हें भी पहननी पड़ती है।”
2. “भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेकिन प्रलोभनों को ठुकरा दिया। वे अपने धर्म पर डटे रहे और जिस द्वीप में भगवान ने उन्हें भेज दिया था, उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला।”
(ख) ऊपर दिए गए दोनों वाक्यों को सर्वनाम की जगह संज्ञा शब्द लगाकर लिखिए।
पहचान पाठ के आधार पर
आपने इस यात्रा-वृत्तांत में तीन देशों के नाम पढ़े हैं— भारत, केन्या और मॉरिशस। पुस्तकालय या कक्षा में उपलब्ध मानचित्र पर भारत को तो आप सरलता से पहचान ही लेंगे। पाठ में दी गई जानकारी के आधार पर बाकी दोनों देशों को पहचािनए।
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) “वहाँ जो कुछ देखा, वह जन्मभर कभी नहीं भूलेगा।”
क्या आपने कभी ऐसा कुछ देखा, सुना या पढ़ा है जिसके बारे में आपको लगता है कि आप उसे कभी नहीं भूल सकेंगे? उसके बारे में अपने समूह में बताइए।
(ख) “हमें अफ़्रीका के शेरों से मुलाकात कर लेनी चाहिए।”
‘मुलाकात’ शब्द का अर्थ है ‘मिलना’। लेकिन यहाँ ‘मुलाकात’ शब्द का भाव है— शेरों को पास से देखना। इसके लिए ‘अपनी आँखों से देखना’, ‘सजीव देखना’ ‘भेंट करना’ आदि शब्दों का प्रयोग भी किया जाता है। अपनी बात को और अधिक सुंदर और अनोखा रूप देने के लिए शब्दों के इस प्रकार के प्रयोग किए जाते हैं।
आपने अब तक किन-किन पशु-पक्षियों से ‘मुलाकात’ की है? वह मुलाकात कहाँ हुई थी? बताइए।
(ग) “यह ऐसी सफलता की बात है, जिस पर सभी भारतीयों को गर्व होना चाहिए।” आपको किन-किन बातों पर गर्व होता है? बताइए।
(संकेत— ये बातें आपके बारे में हो सकती हैं, आपके परिवार के बारे में हो सकती हैं और किसी अन्य व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी आदि के बारे में भी हो सकती हैं।)
कक्षा और घर की भाषाएँ
“प्रायः सभी भारतीय भोजपुरी बोलते अथवा उसे समझ लेते हैं। यहाँ तक कि भारतीयों के पड़ोस में रहने वाले चीनी भी भोजपुरी बखूबी बोल लेते हैं।”
भारत एक बहुभाषी देश है। भारत में लगभग सभी व्यक्ति एक से अधिक भाषाएँ बोल या समझ लेते हैं। आप कौन-कौन सी भाषाएँ बोल-समझ लेते हैं? आपके मित्र कौन-कौन सी भाषाएँ बोल-समझ लेते हैं? इसके बारे में यहाँ दी गई तालिका को पूरा कीजिए—
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क्रम संख्या |
मैं जिन भाषाओं को बोल-समझ लेता/लेती हूँ |
मेरे मित्र जिन भाषाओं को |
मेरे परिजन जिन भाषाओं को बोल-समझ लेते हैं |
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| क्रम संख्या | कुल संख्या | ||||||
| मैं जिन भाषाओ को बोल-समझ लेता/ लेती हूँ | |||||||
| मेरे मित्र जिन भाषाओं को बोल-समझलेते है. | |||||||
| मेरे परिजन जिन भाषाओं को बोल-समझ लेते हैं |
(संकेत— इस तालिका को पूरा करने के लिए आपको अपने मित्रों और परिजनों से पूछताछ करनी होगी। पहले भाषाओं के नाम लिखने हैं, बाद में उन नामों को गिनकर उनकी कुल संख्या लिखनी है।)
प्रशंसा या सराहना विभिन्न प्रकार से
“यह द्वीप हिंद महासागर का मोती है, भारत-समुद्र का सबसे खूबसूरत सितारा है।” इस पाठ में लेखक ने मॉरिशस की सराहना में यह वाक्य लिखा है। सराहना करने के लिए ‘दिनकर’ ने द्वीप की तुलना मोती और तारे से की है।
किसी की सराहना अनेक प्रकार से की जा सकती है। आप आगे दी गई तालिका को पूरा कीजिए। पहले नाम लिखिए, फिर इनकी प्रशंसा में एक-एक वाक्य लिखिए। शर्त यह है कि प्रत्येक बार अलग तरह से प्रशंसा करनी है—
सराहना की तालिका
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नाम |
प्रशंसा या सराहना का वाक्य |
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स्वयं |
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परिजन |
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शिक्षक |
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मित्र |
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पशु |
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स्थान |
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सब्ज़ी |
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पेड़ |
(चित्रात्मक सूचना (इंफोग्राफिक्स
नीचे दिए गए चित्र को देखिए। इसमें चित्रों के साथ-साथ बहुत कम शब्दों में कुछ जानकारी दी गई है। इसे ‘चित्रात्मक सूचना’ कहते हैं।
(क) इस ‘चित्रात्मक सूचना’ के आधार पर मॉरिशस के बारे में एक अनुच्छेद लिखिए।
(ख) अपनी पसंद के किसी विषय पर इसी प्रकार की ‘चित्रात्मक सूचना’ की रचना कीजिए, जैसे— आपका विद्यालय, कोई विशेष दिवस, आपके जीवन की कोई विशेष घटना आदि।
(संकेत— यह कार्य आप अपने समूह में मिलकर कर सकते हैं। इसके लिए आप किसी कागज़ पर चित्र चिपका सकते हैं और सूचना को कलात्मक रूप से कम शब्दों में लिख सकते हैं। चित्र बनाए भी जा सकते हैं। आप यह कार्य कंप्यूटर या मोबाइल फोन की सहायता से भी कर सकते हैं।)
हस्ताक्षर
आप जानते ही हैं कि यह पाठ हिंदी के प्रसिद्ध लेखक रामधारी सिंह ‘दिनकर' ने लिखा है। वे अपने नाम को कुछ इस प्रकार लिखते थे—
अपनी पहचान प्रकट करने के लिए अपने नाम को किसी विशेष प्रकार से लिखने को हस्ताक्षर कहते हैं। हस्ताक्षर का प्रयोग व्यक्ति को जीवनभर अनेक कार्यों के लिए करना होता है। आपके विद्यालय में भी आपसे हस्ताक्षर करवाए जाते होंगे। आप प्रार्थना-पत्रों के अंत में भी अपने हस्ताक्षर करते होंगे।
हो सकता है अभी आपने अपने हस्ताक्षर निर्धारित न किए हों। यदि नहीं भी किए हैं तो कोई बात नहीं। आप चाहें तो आज भी अपने हस्ताक्षर निर्धारित कर सकते हैं।
नीचे दिए गए स्थान पर अपने हस्ताक्षर पाँच बार कीजिए। ध्यान रखें कि आपके हस्ताक्षर एक जैसे हों, अलग-अलग न हों।
पत्र
यहाँ‘दिनकर’ का लिखा एक पत्र दिया जा रहा है। इसे पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर लिखिए। पत्र पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने समूह में मिलकर खोजिए—
नई दिल्ली
8-7-67
मान्यवर चतुर्वेदी जी,
आपका कृपा-पत्र मिला। मेरा स्वास्थ्य इधर बहुत गिर गया है और संयम के बावजूद तेज़ी से सुधर नहीं रहा है। मेरा चित्त अभी भी दबा हुआ है। ऐसी अवस्था में मैंने दो सप्ताह के लिए मॉरिशस जाना स्वीकार कर लिया है। 15 जुलाई को प्रस्थान करना है। लौटना शायद 5 अगस्त तक हो।
आपके आशीर्वाद की कामना करता हूँ।
आपका दिनकर
सफ़दरजंग लेन, नई दिल्ली
(क) पत्र किसने लिखा है?
(ख) पत्र किसे लिखा गया है?
(ग) पत्र किस तिथि को लिखा गया है?
(घ) पत्र किस स्थान से लिखा गया है?
(ङ) पत्र पाने वाले के नाम से पहले किस शब्द का प्रयोग किया गया है?
(च) पत्र-लेखक ने अपने नाम से पहले अपने लिए क्या शब्द लिखा है?
उलझन सुलझाओ
(क) “जहाज़ नैरोबी से चार बजे शाम को उड़ा और पाँच घंटों की निरंतर उड़ान के बाद जब वह मॉरिशस पहुँचा, तब वहाँ रात के लगभग दस बज रहे थे।”
जहाज़ नैरोबी से शाम 4 बजे उड़ा तो उसे 5 घंटों की उड़ान के बाद रात 9 बजे मॉरिशस पहुँचना चाहिए था। लेकिन वह पहुँचा लगभग दस बजे। क्यों?आप इसका कारण पता करने के लिए अपने शिक्षकों या इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।
(ख) नीचे दो घड़ियों के चित्र दिए गए हैं। एक घड़ी भारत के समय को दिखा रही है। दूसरी घड़ी दिखा रही है कि उसी समय मॉरिशस में कितने घंटे और मिनट हुए हैं।
इन घड़ियों के अनुसार नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
भारत में घड़ी
मॉरिशस में घड़ी
- भारत में क्या समय हुआ है?
- मॉरिशस में क्या समय हुआ है?
- मॉरिशस और भारत के समय में कितने घंटे और मिनट का अंतर है?
- सूर्योदय भारत में पहले होगा या मॉरिशस में?
- जिस समय भारत में दोपहर के 12 बजे होंगे, उस समय मॉरिशस की घड़ियाँ कितना समय दिखा रही होंगी?
आज की पहेली
आज हम आपके लिए एक अनोखी पहेली लाए हैं। यहाँ एक वाक्य दिया गया है। आपको पता करना है कि इसका क्या अर्थ है—
येला मालथ येला घौलश।
मेरा ![]()
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई रचनाओं को पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें—
- चाँद का कुर्ता
- मिर्च का मज़ा
- राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जीवनी
- हिमालय के पर्वतीय प्रदेश की मनोरम यात्रा