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विज्ञान का निरंतर बढ़ता संसार
हम आशा करते हैं कि आपने कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के साथ अपने रोमांचक अनुभवों का बहुत आनंद लिया होगा और अब आप विज्ञान के इस अनूठे संसार की अपनी यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए तैयार होंगे। यह केवल तथ्यों से भरी एक पाठ्यपुस्तक नहीं है। यह पुस्तक हमारे सुंदर संसार को समझने, उससे जुड़े प्रश्न पूछने, प्रयोग करने और खोज करने के लिए प्रेरित करती है। विज्ञान के संसार में सब कुछ समाहित है- चाहे वह छोटा हो या बड़ा, पास हो या दूर या फिर हम किसी पत्ती के अंदर सूक्ष्म कोशिकाओं को देख रहे हों या सूर्य और तारों की गति को समझ रहे हों। अपने घर के आस-पास के पदार्थों का परीक्षण कर रहे हों या चर्चा कर रहे हों कि भूमि के नीचे जल किस प्रकार बहता है। आप जैसे-जैसे इस पाठ्यपुस्तक के अध्यायों को पढ़ेंगे वैसे-वैसे आपको नये रोमांचक अनुभव मिलेंगे जो आपकी सोच को चुनौती देंगे, आपका ज्ञान बढ़ाएँगे और आपको एक अन्वेषक बनने की दिशा में सहायता करेंगे जिससे आप छोटी-छोटी नई खोजें अपने आप कर सकेंगे।
इससे पहले कि हम अपनी यह रोमांचकारी यात्रा आरंभ करें, आइए हम इस पुस्तक की एक विशेषता पर ध्यान देते हैं। पुस्तक के पृष्ठों के अंक को देखिए - वे एक तितली की चंचल उड़ान और कागज के हवाई जहाज के उड़ने को दर्शाते हैं! जिस प्रकार एक तितली खुल कर उड़ती है और एक कागज का हवाई जहाज आकाश की ओर उड़ता है, उसी प्रकार जब जिज्ञासा और बढ़ती है तब सीखने की यात्रा को भी उड़ान मिलती है। क्या आप जानते हैं कि वैज्ञानिकों को वास्तविक वायुयान बनाने की प्रेरणा कागज के एक हवाई जहाज जैसी साधारण वस्तु से मिली? सोचिए कि हमारा उड़ान भरने का सपना कैसे साकार हुआ? इस कार्य हेतु आरंभिक शोधकर्ताओं द्वारा पक्षियों के पंखों के अध्ययन से लेकर आधुनिक अभियंताओं द्वारा सरल प्रेक्षणों एवं प्रयोगों से विमान की अभिकल्पना हुई। अतः आप जैसे ही प्रत्येक पृष्ठ को पलटें, अपनी कल्पनाओं को उड़ान भरने दें- जिससे आपको नए विचार मिलें, आप नई खोज करें और आकाश को छू लें !
जैसा कि हमने कक्षा 6 में पढ़ा था कि विज्ञान एक प्रक्रिया है। खोज करना केवल नए तथ्यों को ढूँढ़ना अथवा प्रकृति की विभिन्न वस्तुओं को जानना मात्र नहीं होता है। अतः यह एक प्रकार की सोचने की विधि है जिसमें जिज्ञासा और प्रश्न पूछने को प्रोत्साहित किया जाता है और अज्ञात को जानने का प्रयास किया जाता है। अब कक्षा 7 में हम और गूढ़ प्रश्न पूछने का प्रयास करेंगे जैसे कि यह संसार कैसे चलता है? हमारे आस-पास जो घटनाएँ होती हैं, वे ऐसे ही क्यों होती हैं? और प्रकृति में हम जो प्रतिरूप देखते हैं, उनसे हम क्या सीख सकते हैं?
यह सब करने के लिए हमें इस पुस्तक से बाहर निकलना होगा, संभवतः कक्षा से भी बाहर निकलना होगा और विभिन्न क्रियाकलापों एवं प्रयोगों के माध्यम से संसार का अनुभव करना होगा। हम आशा करते हैं कि आपके ये अनुभव न केवल रोचक और रोमांचक होंगे अपितु इस ग्रह पर हमारे स्थान को और जिस वातावरण में हम रह रहे हैं उसे गहराई से समझने में सहायक सिद्ध होंगे। हमें विश्वास है कि इससे आपको विज्ञान को एक निरंतर खोज की प्रक्रिया के रूप में देखने में सहायता मिलेगी और उत्तरदायित्वों को समझने में भी सहायता प्राप्त होगी। एक युवा जिज्ञासु वैज्ञानिक के रूप में आप शीघ्र ही देख पाएँगे कि मानवीय गतिविधियाँ प्रकृति में होने वाली प्रक्रियाओं से किस प्रकार संबंधित हैं और जिस समाज में हम रहते हैं उससे ये किस प्रकार जुड़े हुए हैं। हमें आशा है कि आप यह भी सीख पाएँगे कि विज्ञान किस प्रकार पर्यावरण-संबंधी चुनौतियों को हल करके एक उपयुक्त संसार बनाने में भूमिका निभाता है।
आइए, अब पुनः इस पुस्तक पर वापस आते है। इस पुस्तक में आप भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान से लेकर जीव विज्ञान तथा भू-विज्ञान तक विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों के विभिन्न विषयों को पढ़ेंगे। हमें ऐसा लग सकता है कि ये भिन्न-भिन्न अध्यायों में प्रस्तुत किए जा रहे हैं परंतु जैसा कि हमने कक्षा 6 में भी कहा था ये सभी परस्पर जुड़े हुए हैं। किसी एक क्षेत्र के वैज्ञानिक-विचार प्रायः अन्य क्षेत्रों में भी खोज को प्रोत्साहित करते हैं। कम से कम दूसरे क्षेत्र में प्रश्न पूछने की अनुमति तो देते ही हैं। अतः आइए, इस वर्ष की अपनी पाठ्यपुस्तक की यात्रा का शुभारंभ करते हैं। हम अपने आस-पास के पदार्थों के गुणधर्मों को देखने से आरंभ करेंगे। हम अधिकांशतः उन वस्तुओं के विषय में जानेंगे जिनका हम अनुभव तो करते हैं परंतु शायद ही उन पर प्रश्न पूछते हैं, जैसे- कुछ फल खट्टे क्यों होते हैं? जब हम अपने विद्यालय के गणवेश (वर्दी) पर लगे हल्दी के दाग धोते हैं तो क्या होता है?
फिर हम आगे बढ़ेंगे और कुछ विद्युत बैटरियों, तारों और बल्बों के साथ प्रयोग करते हुए पदार्थों के कुछ अन्य प्रकार के गुणधर्मों को जानने का प्रयास करेंगे। बल्ब को प्रकाशित करने के लिए हमें किस प्रकार के पदार्थों की आवश्यकता होती है? इससे हमें पदार्थों का उनके गुणधर्मों के आधार पर वर्गीकरण करने में सहायता मिलेगी और हम धातुओं एवं अधातुओं के संसार में प्रवेश करेंगे। हम अपने अनुभवों से जानते हैं कि टॉर्च की बैटरी अंततः समाप्त हो जाती है और पुनः उपयोग में नहीं लाई जा सकती। आगे हम यह जानने का प्रयत्न करेंगे कि हमारे आस-पास किस प्रकार के परिवर्तन होते रहते हैं। कुछ परिवर्तन अस्थाई होते हैं जबकि कुछ स्थाई होते हैं।
हम देखते हैं कि बैटरियाँ समाप्त हो जाती हैं, बर्फ पिघलकर जल बन जाती है, फल पक जाते हैं, चट्टानें टूटकर पत्थरों में परिवर्तित हो जाती हैं आदि-आदि। ये सभी किस प्रकार के परिवर्तन हैं? इनमें से कुछ परिवर्तन या तो पदार्थों को गरम करने पर ही होते हैं या गरम करने पर तीव्र गति से होते हैं। इसके साथ हम देखेंगे कि ऊष्मा किस प्रकार प्रवाहित होती है- चाहे वह गिलास में रखे एक बर्फ के टुकड़े का पिघलना हो अथवा किसी ग्लेशियर का पिघलना। जल सर्वत्र व्याप्त होता है और सूर्य से आ रही गरमी के कारण यह समुद्रों से वाष्पित होकर वर्षा के रूप में नीचे गिरता है और भूमि में रिसता है।
हम देखते हैं कि बैटरियाँ समाप्त हो जाती हैं, बर्फ पिघलकर जल बन जाती है, फल पक जाते हैं, चट्टानें टूटकर पत्थरों में परिवर्तित हो जाती हैं आदि-आदि। ये सभी किस प्रकार के परिवर्तन हैं? इनमें से कुछ परिवर्तन या तो पदार्थों को गरम करने पर ही होते हैं या गरम करने पर तीव्र गति से होते हैं। इसके साथ हम देखेंगे कि ऊष्मा किस प्रकार प्रवाहित होती है- चाहे वह गिलास में रखे एक बर्फ के टुकड़े का पिघलना हो अथवा किसी ग्लेशियर का पिघलना। जल सर्वत्र व्याप्त होता है और सूर्य से आ रही गरमी के कारण यह समुद्रों से वाष्पित होकर वर्षा के रूप में नीचे गिरता है और भूमि में रिसता है।
ये परिवर्तन हमारे आस-पास के केवल उन्हीं पदार्थों में नहीं होते हैं जिन्हें हम देख पाते हैं अपितु ये परिवर्तन जल आदि में भी होते हैं जिन्हें हम स्पष्ट रूप से देख नहीं पाते हैं। जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारे शरीर में भी परिवर्तन होते हैं। विशेषकर विद्यालय के मध्य स्तर की आयु में शरीर में तीव्रता से परिवर्तन होते हैं! ऐसा क्यों? जीवन के लिए मनुष्यों में ही नहीं अपितु जंतुओं में भी जैविक प्रक्रम आवश्यक होते हैं। शारीरिक वृद्धि के लिए हमें श्वसन और भोजन की आवश्यकता होती है। भोजन से पोषक तत्व रक्त द्वारा पूरे शरीर में जाते हैं और इस प्रकार अन्य प्रक्रम भी होते हैं परंतु ऐसा केवल जंतुओं में ही क्यों होता है? क्या पौधों को वृद्धि के लिए भोजन की आवश्यकता नहीं होती है?
वे अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं? क्या वे भी साँस लेते हैं? कैसे? जैसे-जैसे हमारी पृथ्वी पर जीवन का विकास हुआ, हमारे इस ग्रह ने इसे सुंदर और सावधानीपूर्वक संतुलित करना सीख लिया है। अच्छा, समय क्या होता है? दीवार पर टँगी घड़ी अथवा कलाई पर बँधी घड़ी हमें समय बताती है और यह कैसे बीतता है यह भी। हम सुबह विद्यालय जाने के लिए तैयार होते हैं और रात को सोने की तैयारी करते हैं परंतु क्या आपने कभी सोचा है कि हम समय को कैसे मापते हैं? और कोई क्रियाएँ कितनी तीव्रता से होती है?
विद्युत से चलने वाली घड़ियों और डिजिटल घड़ियों के युग से बहुत पहले, प्रारंभ में मनुष्य सूर्य के कारण बनने वाली वस्तुओं की परछाई को देखते थे और परछाई की स्थिति देखकर समय बताते थे। प्रकाश और परछाइयाँ केवल छाया-पुतली अथवा समय बताने के लिए ही उपयोगी नहीं हैं अपितु प्रकाश हमें देखने में भी सहायता करता है। वर्तमान में हमने प्रकाश उत्पन्न करने की अनेक विधियाँ विकसित कर ली हैं (जिससे हम रात में सूर्य के प्रकाश के बिना भी किसी पुस्तक को पढ़ सकते हैं)। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि प्रकाश की प्रकृति के विषय में प्रश्न पूछने से हमें उस ब्रह्मांड की एक गहरी समझ प्राप्त हुई है, जिसमें हम रहते हैं। प्रकाश और परछाइयाँ केवल घर में हमारे आस-पास की वस्तुओं तक ही सीमित नहीं हैं, यद्यपि इसके विषय में हम बाद में पढ़ेंगे।

पृथ्वी और चंद्रमा की भी परछाइयाँ बनती हैं जिससे ग्रहण जैसी रोचक परिघटनाएँ होती रहती हैं। दिन और रात होते हैं जो सूर्य से प्राप्त प्रकाश से निर्धारित होते हैं। इन सभी को समझने के लिए हमें यह जानना होगा कि पृथ्वी अपने अक्ष पर किस प्रकार घूमती है, चंद्रमा किस प्रकार पृथ्वी के चारों ओर घूमता है और पृथ्वी किस प्रकार सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है तथा इन सभी का प्रभाव हमारे जीवन पर किस प्रकार पड़ता है? इन सबसे आपका सिर अवश्य चकरा गया होगा फिर भी आप इनके विषय में विचार कीजिए। क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि जिस अद्भुत संसार में हम रहते हैं, उससे हम अचंभित भी हो सकते हैं?

इसके बाद के अध्यायों में आप सामान्य अवलोकन करेंगे, कुछ रोचक प्रयोग करेंगे और उन विषयों पर गहनता से विचार भी करेंगे जिन पर सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। प्रत्येक अध्याय आपके पहले से ज्ञात ज्ञान पर आधारित है और ये आपको प्रश्न पूछने, खोज करने, व्यावहारिक प्रयोग करने और एक वैज्ञानिक की तरह सोचने के लिए प्रोत्साहित करते हैं! आप पाएँगे कि जो प्रयोग हमारे विचार से होने वाली घटना की पुष्टि करते प्रतीत होते हैं, वे भी कुछ अतिरिक्त प्रश्नों को जन्म दे सकते हैं और उनके लिए अधिक प्रयोगों और अधिक प्रश्नों की आवश्यकता हो सकती है।
1.1 आनंददायक अन्वेषण !
क्रियाकलाप 1.1 - उत्तरों के प्रश्न बनाइए
विद्यालय में अथवा परीक्षाओं में आपको प्रायः प्रश्न दिए जाते हैं और आपसे उनके उत्तर देने की अपेक्षा रखी जाती है। आइए, हम इस प्रक्रिया को उलट देते हैं। वैज्ञानिकों की तरह सोचने के लिए रोचक प्रश्न पूछना भी महत्वपूर्ण है। महान वैज्ञानिक केवल प्रश्नों के उत्तर ही नहीं देते हैं अपितु वे अद्भुत प्रश्न भी पूछते हैं! आपको याद होगा कि गत वर्ष हमने कहा था- "बुद्धिमान होने के लिए आपको प्रश्न पूछने वाला बनना भी आवश्यक है।"
नीचे लिखे गए उत्तरों को देखिए। आपका कार्य ऐसे प्रश्नों का अथवा परिस्थितियों का निर्माण करना है जो अत्यंत जिज्ञासु, रचनात्मक एवं रोचक हों तथा आपको प्रदत्त उत्तरों की ओर ले जा सकें। कोई भी प्रश्न कभी गलत नहीं होता है, अतः अपनी कल्पनाओं को उड़ान भरने दीजिए! इस तरह के अभ्यास से आप बहुत अधिक परिचित नहीं हैं। अतः आपकी सहायता के लिए यहाँ एक उदाहरण भी दिया गया है! मान लीजिए कि आपका उत्तर था "इसे ठीक आधा कर दो।" यह किस प्रश्न का उत्तर हो सकता है? इसके लिए अनेक उत्तर हो सकते हैं। जैसे – “कैसे सुनिश्चित करेंगे कि हमें तरबूज का बराबर भाग प्राप्त हो?” या “मेरा निबंध विस्तृत है, मैं इसे लिफाफे में नहीं रख सकती" अथवा "मैं इतने लंबे गीत पर नृत्य नहीं कर सकती...." ये सभी परिस्थितियाँ एक दूसरे से बहुत भिन्न हैं! तो आइए, देखते हैं आप किस प्रकार के रचनात्मक प्रश्न पूछ सकते हैं!
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उत्तर - बस थोड़ा दूध डालें। -
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उत्तर - क्योंकि बिल्ली के दाँत टेढ़े थे।
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उत्तर - घबराइए मत, मेरे पास तौलिया है।
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उत्तर- 42
(कृपया अधिक रोचक प्रश्न पूछिए किंतु पूर्वानुमानित प्रश्न न पूछें जैसे `` 32 + 10 कितना होता है?" अथवा "जीवन, ब्रह्मांड इत्यादि का क्या मर्म है?")