1 :
पदार्थों का अन्वेषण अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन
दिनांक 28 फरवरी को विद्यालय ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाने हेतु विज्ञान मेले का आयोजन किया। प्रवेश द्वार पर स्वागत करते समय भाई-बहन अश्विन और कीर्ति को एक श्वेत कागज दिया गया। वे यह जानने के लिए उत्सुक थे कि उन्हें यह श्वेत कागज क्यों दिया गया है!
कुछ कदम आगे एक कार्यकर्त्ता इन कागजों पर एक द्रव पदार्थ छिड़क रही थी। भाई-बहन ने भी अपने श्वेत कागजों पर छिड़काव करवाया। द्रव पदार्थ के छिड़कते ही उनके कागजों पर 'विज्ञान के अदभुत जगत में आपका स्वागत है' वाक्य दिखाई दिया। यह देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ (चित्र 2.1)। वे यह जानने के लिए अत्यंत उत्सुक एवं उत्साहित थे कि यह कैसे हुआ और इसके पीछे का कारण क्या है।
उनकी जिज्ञासा आंशिक रूप से तब संतुष्ट हुई जब वे 'पदार्थों के रंगीन संसार' नामक स्टॉल पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने विभिन्न पदार्थों को मिश्रित करने पर रंगों में परिवर्तन होने वाली अनेक गतिविधियाँ देखी। उन्होंने इन परिवर्तनों के विषय में और अधिक खोजने का निर्णय लिया। आइए, हम भी सीखने के इस रोमांच में उनके साथ सम्मिलित होते हैं।
2.1 प्रकृति - हमारी विज्ञान प्रयोगशाला
2.1.1 लिटमस एक सूचक के रूप में
- विभिन्न प्रतिदर्श यथा नींबू का रस, साबुन का विलयन, आँवले का रस, इमली का पानी, सिरका, बेकिंग सोडा (खाने का सोडा) का विलयन, चूने का पानी, नल का पानी, कपड़े धोने के पाउडर (वाशिंग पाउडर) का विलयन, शक्कर का विलयन और नमक का विलयन एकत्रित कीजिए।
- नीले लिटमस पत्र की एक पट्टी लें और उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लीजिए।
- - इन टुकड़ों को एक स्वच्छ व शुष्क सफेद पट्टिका (टाइल) पर फैला लीजिए।
- बिंदुपाती की सहायता से प्रत्येक प्रतिदर्श की एक-एक बूंद इन टुकड़ों पर डालिए, जैसा कि चित्र 2.2 (क) में दर्शाया गया है।
- क्या आपने नीले लिटमस के टुकड़ों के रंग में किसी परिवर्तन का अवलोकन किया?
- तालिका 2.1 में अपने अवलोकनों को अभिलेखित कीजिए।
- यही क्रियाकलाप चित्र 2.2 (ख) में दर्शाए अनुसार लाल लिटमस पत्र के टुकड़ों के साथ दोहराइए और अपने अवलोकनों को तालिका 2.1 में अभिलेखित कीजिए।


चूने का पानी कैसे तैयार करें?
चूने के पानी को अंग्रेजी में 'लाइम वाटर' कहा जाता है। यहाँ 'लाइम' शब्द से नींबू का अर्थ न लें। चूने का पानी, पानी में कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन है। इसे लाइम (चूना या कैल्शियम ऑक्साइड) को जल में मिलाकर लगभग एक घंटे के लिए अबाधित रख कर सरलता से तैयार किया जा सकता है। इस द्रव को दूसरे पात्र में छान कर चूने के पानी के रूप में इसका उपयोग कीजिए।
तालिका 2.1 - नीले और लाल लिटमस पत्र से प्रतिदर्शों की प्रकृति का परीक्षण
| क्र.सं. | प्रतिदर्श का नाम | प्रतिदर्श की एक बूँद डालने के पश्चात नीले लिटमस पत्र का रंग | प्रतिदर्श की एक बूँद डालने के पश्चात लाल लिटमस पत्र का रंग |
|---|---|---|---|
| 1. | नींबू का रस | ||
| 2. | साबुन का विलयन | ||
| 3. | आँवले का रस | ||
| 4. | इमली का पानी | ||
| 5. | सिरका | ||
| 6. | बेकिंग सोडा का विलयन | ||
| 7. | चूने का पानी | ||
| 8. | नल का पानी | ||
| 9. | कपड़े धोने के पाउडर का विलयन | ||
| 10. | शक्कर का विलयन | ||
| 11. | नमक का विलयन | ||
| 12. | अन्य |
आइए, अब तालिका 2.1 का विश्लेषण करें और प्रतिदर्शों को तीन समूहों में निम्नानुसार वर्गीकृत करें -
- समूह 'क' में वे प्रतिदर्श हैं जो नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं।
- समूह 'ख' में वे प्रतिदर्श हैं जो लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं।
- समूह 'ग' में वे प्रतिदर्श हैं जो दोनों ही प्रकार के लिटमस पत्र को प्रभावित नहीं करते हैं। अवलोकनों को तालिका 2.2 में अभिलेखित कीजिए।
अवलोकनों को तालिका 2.2 में अभिलेखित कीजिए।
तालिका 2.2 - परीक्षण किए गए उपर्युक्त प्रतिदर्शों का समूहन
| समूह 'क' | समूह 'ख' | समूह 'ग' |
|---|---|---|

आइए, पता लगाएँ!
लिटमस लाइकेन से प्राप्त एक प्राकृतिक पदार्थ है। लिटमस दो रूपों में उपलब्ध होता है, विलयन के रूप में एवं कागज की पट्टियों के रूप में। इन पट्टियों को लिटमस पत्र कहा जाता है। लिटमस पत्र दो रंगों के होते हैं- नीला और लाल जैसा कि चित्र 2.3 में दर्शाया गया है।
ऐसे पदार्थ जो नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं वे अम्लीय प्रकृति के होते हैं जबकि ऐसे पदार्थ जो लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं क्षारीय प्रकृति के होते हैं। चूँकि लिटमस अम्लीय और क्षारीय विलयन में भिन्न-भिन्न रंग दर्शाता है, अतः यह अम्ल-क्षार सूचक कहलाता है।
कुछ अन्य पदार्थ जो प्राकृतिक और मानव-निर्मित हैं उनका उपयोग भी सूचक के रूप में किया जा सकता है। मानव-निर्मित सूचकों का निर्माण प्रयोगशालाओं में किया जाता है। आप उच्च कक्षाओं में इनके विषय में और अधिक जानेंगे।

समग्र दृष्टि
लाइकेन दो जीवों की सहजीविता से बनते हैं जिनमें एक कवक होता है और दूसरा शैवाल होता है। ये उन क्षेत्रों की चट्टानों और पेड़ों पर उगते हैं जहाँ प्रचुर मात्रा में वर्षा होती है और वायु स्वच्छ होती है। क्या आपको अपने आस-पास के पेड़ों पर लाइकेन मिलते हैं?
आइए, अब तालिका 2.2 में समूह 'क', 'ख' एवं 'ग' में क्रमबद्ध पदार्थों को वर्गीकृत करते हैं।
- समूह 'क' के पदार्थों जैसे नींबू का रस, आँवले का रस, इमली का पानी और सिरका ने नीले लिटमस पत्र को लाल कर दिया। इसका अर्थ है कि ये पदार्थ अम्लीय प्रकृति के होते हैं।
- समूह 'ख' के पदार्थों जैसे साबुन का विलयन, बेकिंग सोडा का विलयन, चूने का पानी और कपड़े धोने के पाउडर का विलयन लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं। अतः ये पदार्थ क्षारीय प्रकति के होते हैं।
- समूह 'ग' के पदार्थों जैसे नल का पानी, शक्कर का विलयन और नमक का विलयन इत्यादि से दोनों प्रकार के लिटमस पत्रों का रंग नहीं बदलता है। क्या आप इनकी प्रकृति के विषय में पूर्वानुमान लगा सकते हैं?
क्रियाकलाप 2.2 - आइए, संबंध ढूँढ़ें और अन्वेषण करें
क्या तालिका 2.2 के समूह 'क' में सभी पदार्थ खाने योग्य हैं? क्या आपने कभी इन खाद्य पदार्थों का स्वाद चखा है? क्या आपको उनके स्वाद का स्मरण है? आप पाएँगे कि ये सभी पदार्थ स्वाद में खट्टे हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि खट्टे स्वाद वाले पदार्थों में अम्ल होता है और वे अम्लीय प्रकति के होते हैं।
सावधानी - जब तक कहा न जाए तब तक कुछ भी न चखें। किसी भी अज्ञात पदार्थ का स्वाद न चखें।
कुछ सामान्य खाद्य पदार्थ और उनमें उपस्थित सामान्य अम्लों के नाम चित्र 2.4 में दिए गए हैं।

निम्नलिखित पदार्थों में उपस्थित सामान्य अम्लों के नाम पता कीजिए और लिखिए - नींबू______________________, दही______________________, इमली______________________, सिरका______________________,
आइए, अब समूह 'ख' से एक पदार्थ का विलयन लेते हैं, जैसे- बेकिंग सोडा। बेकिंग सोडा के विलयन को अपनी उंगलियों के बीच रगड़ें। आपने क्या अनुभव किया? यह साबुन जैसा चिकना लगता है। क्षारीय पदार्थ सामान्यतया छने पर चिकने होते हैं।
इसके अतिरिक्त क्षार साधारणतः स्वाद में कड़वे होते है परंतु यह आवश्यक नहीं है कि जिस पदार्थ का स्वाद कड़वा है उसमें क्षार की उपस्थिति हो ही। उदाहरण के लिए, करेले का स्वाद कड़वा होता है परंतु यह क्षारीय प्रकृति का नहीं है।
2.1.2 लाल गुलाब एक सूचक के रूप में
आपने अपने आस-पास अनेक रंग-बिरंगे पुष्प देखे होंगे। इन पुष्पों का उपयोग करके सूचक बनाने का प्रयास कीजिए।
क्रियाकलाप 2.3 - आइए, तैयार करें
- अपने आस-पास से लाल गुलाब के पुष्पों से झड़ी हुई पंखुड़ियाँ एकत्रित कीजिए (चित्र 2.5)। इसके लिए कृपया पुष्पों को तोड़े नहीं अपितु आप भूमि पर गिरी हुई पंखुड़ियाँ अथवा पुष्प उठा सकते हैं।
- एक मुट्ठी भर लाल गुलाब की पंखुडियाँ लीजिए और उन्हें पानी से धो लीजिए।
- खरल और मूसल का उपयोग करके पंखुड़ियों को कुचलिए।
- इन्हें एक काँच के गिलास में रखिए।
- इस काँच के गिलास में थोड़ा गरम पानी डालिए और यह सुनिश्चित कीजिए कि कुचली हुई पुष्प की पंखुड़ियाँ पूर्णतः पानी में डूब गई हैं।
- काँच के गिलास को ढक्कन से ढक दीजिए। इसके पश्चात 5-10 मिनट तक प्रतीक्षा कीजिए जब तक कि पानी रंगीन न हो जाए (चित्र 2.6)। अब इसे छान लीजिए।
- निस्यंद (निस्यंदन के पश्चात प्राप्त द्रव) वांछित अम्ल-क्षार सूचक के रूप में उपयोग किए जाने वाला पष्प-अर्क (चित्र 2.7) है।


सावधानी- यह कार्य किसी वयस्क के निर्देशन में ही कीजिए।

क्रियाकलाप 2.4 - आइए, पता लगाएँ
- तैयार किए गए लाल गुलाब के अर्क की 10-20 बूँदों को दो छोटी पारदर्शी बोतलों अथवा परखनलियों में डालिए। उन्हें 'क' और 'ख' से चिह्नित कीजिए।
- बिंदुपाती (ड्रॉपर) की सहायता से परखनली 'क' में नींबू के रस की 20-30 बूँदें डालिए और परखनली 'ख' में साबुन के विलयन की 20-30 बूँदें डालिए।
- दिए गए अर्क में किसी भी प्रकार के रंग-परिवर्तन (चित्र 2.8) को देखिए और उन्हें तालिका 2.3 में अभिलेखित कीजिए।
- क्रियाकलाप 2.1 में प्रयुक्त अन्य प्रतिदर्शों के साथ भी यही प्रक्रिया दोहराएँ और अपने अवलोकनों को तालिका 2.3 में अभिलेखित कीजिए।

तालिका 2.3 - लाल गुलाब के अर्क से प्रतिदर्शों की प्रकृति का परीक्षण
| क्र.सं. | प्रतिदर्श का नाम | प्रतिदर्श मिलाने पर गुलाब के अर्क का रंग परिवर्तन | पदार्थ की प्रकृति |
|---|---|---|---|
| 1. | नींबू का रस | ||
| 2. | साबुन का विलयन | ||
| 3. | आँवले का रस | ||
| 4. |
इन अवलोकनों पर अपने सहपाठियों से चर्चा कीजिए।
- जो प्रतिदर्श पुष्प के अर्क का रंग परिवर्तित कर उसे लाल कर देते हैं, क्या ये वही प्रतिदर्श हैं जो नीले लिटमस पत्र का रंग लाल कर देते हैं? समूह 'क', तालिका 2.21
- जो प्रतिदर्श पुष्प के अर्क का रंग परिवर्तित कर उसे हरा कर देते हैं, क्या ये वही प्रतिदर्श हैं जो लाल लिटमस पत्र का रंग नीला कर देते हैं? [समूह 'ख', तालिका 2.2]
- जो प्रतिदर्श पुष्प के अर्क का रंग परिवर्तित नहीं करते हैं, क्या ये वही प्रतिदर्श हैं जिनसे लाल और नीले लिटमस पत्र का रंग परिवर्तित नहीं होता है? [समूह 'ग', तालिका 2.2]
उपरोक्त क्रियाकलाप से हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि लाल गुलाब के अर्क का उपयोग भी पदार्थों की प्रकृति का परीक्षण करने के लिए किया जा सकता है। अतः यह म्ल-क्षार सूचक का एक अन्य उदाहरण है। हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि लाल लाब का अर्क अम्लीय विलयन को लाल वर्ण का और क्षारीय विलयन को हरे वर्ण का कर देता है।
क्या अब आप तालिका 2.3 में पदार्थों की प्रकृति लिख सकते हैं?
हमें विश्वास है कि आप प्राप्त परिणामों से उत्साहित होंगे। आप कुछ सब्जियों, फूलों एवं फलों, जैसे चुकंदर, लाल एवं बैंगनी पत्तागोभी, हल्दी, जामुन और लाल गुड़हल (हिबिस्कस) के पुष्प का अर्क तैयार करने और उससे पदार्थों का परीक्षण करने की प्रक्रिया को दोहरा सकते हैं। वे भी अम्ल-क्षार सूचक के रूप में कार्य कर सकते हैं।
रोचक तथ्य
हाइड्रेजिया एक पौधा है जो हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर राज्यों में ठंडी जलवायु में उगता है। इसमें मृदा की प्रकृति के आधार पर भिन्न-भिन्न रंगों के पुष्प खिलते हैं। अम्लीय मृदा में नीले रंग के पुष्प खिलते हैं जबकि क्षारीय मृदा में गुलाबी या लाल रंग के पुष्प खिलते हैं। क्या माली मृदा की अम्लीय अथवा क्षारीय प्रकृति को समायोजित कर हाइड्रेट्रेंजिया के भिन्न-भिन्न रंगों के पुष्पों को उगा सकते हैं?

2.1.3 हल्दी एक सूचक के रूप में
हमने क्रियाकलाप 2.1 में नीले और लाल लिटमस पत्र का उपयोग किया है। क्या आप कुछ अन्य प्राकृतिक सूचकों के द्वारा भी कागज की पट्टियाँ बना सकते हैं? निम्नलिखित क्रियाकलाप कर जानने का प्रयास कीजिए।
क्रियाकलाप 2.5 - आइए, बनाएँ
- किसी पात्र अथवा पेट्री डिश में एक चम्मच हल्दी लीजिए और उसमें थोड़ा पानी मिलाकर लेप बना लीजिए। [चित्र 2.9 (क)] आप चाहें तो कच्ची हल्दी का एक टुकड़ा पीसकर भी प्रयोग कर सकते हैं।
- हल्दी के लेप में फिल्टर पत्र का एक टुकड़ा सावधानीपूर्वक डुबाइए जब तक कि यह पीले रंग का न हो जाए।
- इसे बाहर निकालिए और सूखने दीजिए।
- इस पीले कागज को पतली पट्टियों में काटिए जिनका 'हल्दी-पत्र' के रूप में उपयोग किया जाता है। चित्र ? १ (ख) 1
सावधानी- यह कार्य किसी वयस्क के निर्देशन में कीजिए।
- बिंदुपाती की सहायता से क्रियाकलाप 2.1 में उपयोग किए गए प्रत्येक प्रतिदर्श की एक-एक बूँद को हल्दी-पत्र की भिन्न-भिन्न पट्टियों पर डालिए।
- अपने अवलोकनों को तालिका 2.4 में अभिलेखित कीजिए।
तालिका 2.4 - हल्दी-पत्र से प्रतिदर्शों की प्रकृति का परीक्षण
| क्र.सं. | प्रतिदर्श का नाम | प्रतिदर्श की एक बूँद डालने पर हल्दी-पत्र का रंग |
|---|---|---|
| 1. | नींबू का रस | |
| 2. | साबुन का विलयन | |
| 3. | आँवले का रस | |
| 4. |
आपने क्या अवलोकन किया?
- क्या सभी प्रतिदर्शों से हल्दी-पत्र का रंग परिवर्तित हो जाता है?
- उन प्रतिदर्शों को समूहीकृत कीजिए जो हल्दी-पत्र का रंग परिवर्तित नहीं करते हैं।
तालिका 2.2 में दिए गए समूह 'क', 'ख' और 'ग' के प्रतिदर्शों के साथ इनकी तुलना कीजिए।
क्या अम्लीय पदार्थों की जाँच के लिए हल्दी-पत्र को सूचक के रूप में उपयोग किया जा सकता है? अपने अवलोकनों पर सहपाठियों से चर्चा कीजिए।

अवलोकनों के आधार पर हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि हल्दी-पत्र का उपयोग क्षारीय प्रकृति के पदार्थों के परीक्षण के लिए किया जा सकता है। तथापि इससे अम्लीय पदार्थों और उदासीन पदार्थों के मध्य भेद नहीं किया जा सकता।
रोचक तथ्य
हल्दी को 'स्वर्णिम' मसाला क्यों कहा जाता है?
हल्दी अदरक कुल की एक सदस्य है जिसे भारत और अन्य देशों में उगाया जाता है। दैनिक जीवन में एक सामान्य मसाले के रूप में भोजन को स्वाद व रंग प्रदान करने के अतिरिक्त इसके अन्य लाभों पर शोध किया जा रहा है। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में हल्दी को अनेक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने वाला माना जाता है एवं इसका उपयोग सामान्यतः अनेक पारंपरिक घरेलू उपचारों में किया जाता है।
अश्विन ने गुरु पूर्णिमा के दिन अपने शिक्षक के प्रति आभार प्रकट करने के लिए एक शुभकामना पत्र बनाया। उसने श्वेत कागज पर हल्दी का लेप लगाकर उसे सुखाया। तालिका 2.4 में परीक्षण किए गए विलयनों में से उसने एक विलयन का उपयोग करके अपनी शुभकामनाएँ शिक्षक की मातृभाषा (ओडिया भाषा) में उस शुष्क कागज पर लिखीं। संदेश लिखने के लिए किस विलयन का उपयोग किया जा सकता है? शिक्षक ने इस अवधारणा पर आधारित रचनात्मक प्रयोग के लिए अश्विन की सराहना की।
कुछ पदार्थ ऐसे भी हैं जिनकी गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम में परिवर्तित हो जाती है। इन्हें घ्राण सूचक कहा जाता है।
आइए, और अधिक जानें!
- एक पात्र में कुछ बारीक कटे हुए प्याज लीजिए। साथ ही इसमें साफ सूती वस्त्र की अथवा निस्यन्दक पत्र की कुछ पट्टियाँ भी डालिए।
- पात्र को कसकर बंद कीजिए और रात भर के लिए छोड़ दीजिए।
- पात्र से सूती वस्त्र या निस्यंदक पत्र की दो पट्टियाँ निकालिए और उनकी गंध की जाँच कीजिए।
- इन्हें स्वच्छ सतह पर रखिए और एक पट्टी पर इमली के पानी की कुछ बूंदें डालिए। दूसरी पट्टी पर बेकिंग सोडा के विलयन की कुछ बूंदें डालिए। बूँदों को पट्टियों पर फैलने दीजिए।
- गंध की पुनः जाँच कीजिए।
- क्या आपने प्याज के टुकड़ों में तैयार की गई पट्टियों पर इमली का पानी और बेकिंग सोडा का विलयन डालने से पूर्व एवं पश्चात आने वाली गंध में किसी परिवर्तन का अनुभव किया?
- अपने अवलोकनों को अभिलेखित कीजिए।
- इसी प्रकार अन्य अम्लीय और क्षारीय पदाथों के साथ गध में परिवर्तन का परीक्षण कीजिए और अपने अवलोकनों को अभिलेखित कीजिए।
आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे (पी.सी.रे) को 'आधुनिक भारतीय रसायन विज्ञान के जनक' के रूप में जाना जाता है। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और भारत लौट आए। उन्होंने भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान को अग्रसर करने में योगदान दिया। उन्होंने सामान्य संवत् 1901 में भारत की पहली फार्मास्युटिकल कंपनी (दवाओं के क्षेत्र में एक कंपनी) की स्थापना भी की। वे भारतीय संस्कृति और ज्ञानपरंपराओं में निहित व्यक्ति थे। भारत में रसायन विज्ञान के इतिहास पर अपने लेखन के माध्यम से उन्होंने आधुनिक जगत में प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों और विशेषज्ञताओं पर भी प्रकाश डाला। समाज सुधारक 'रे' ने शैक्षणिक संस्थाओं में शिक्षा के माध्यम के रूप में मातृभाषा के उपयोग का समर्थन भी किया था।
2.2 क्या होता है जब अम्लीय पदार्थों को क्षारीय पदार्थों के साथ मिश्रित किया जाता है?
आइए, निम्नलिखित प्रयोग द्वारा इसकी जाँच करें।
- एक परखनली में नींबू के रस की एक बूँद लीजिए और उसमें पानी की लगभग 20 बूँदें डालिए। इसके रंग का अवलोकन कीजिए।
- इसमें नीले लिटमस विलयन की एक बूँद डालिए।
- क्या आपको कोई रंग-परिवर्तन दिखाई देता है? [चित्र 2.10 (क)]
- इस परखनली में सावधानीपूर्वक बिंदुपाती की सहायता से चूने के पानी को बंद-बंद कर डालिए और इसे भली-भाँति हिलाइए।
- आप क्या अवलोकन करते हैं? क्या विलयन के रंग में कोई परिवर्तन होता है?
- एक अवस्था आती है जब विलयन का रंग लाल से नीला हो जाता है [चित्र 2.10 (ख)]।
- अब उपरोक्त विलयन में पुनः नींबू के रस की एक बूँद डालिए।
क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि रंग में परिवर्तन क्यों होता है?
प्रारंभ में जब नींबू के रस के विलयन में नीले लिटमस विलयन की एक बूँद डाली जाती है तो विलयन का रंग लाल हो जाता है। जब इस परखनली में चूने का पानी मिलाया जाता है तो विलयन का रंग अंततः लाल से नीला हो जाता है। इससे ज्ञात होता है कि परखनली में उपस्थित विलयन अब अम्लीय नहीं रहा। चूने के पानी ने अम्ल के प्रभाव को उदासीन कर दिया।
जब किसी अम्ल के विलयन को किसी क्षार के विलयन में पर्याप्त मात्रा में मिलाया जाता है तो हम देखते हैं कि परिणामी विलयन न तो अम्लीय है और न ही क्षारीय। ऐसी अभिक्रियाओं को उदासीनीकरण अभिक्रियाएँ कहते हैं। उदासीनीकरण अभिक्रिया में ऊष्मा के उत्सर्जन होने के साथ-साथ लवण और जल का भी उत्पादन होता है।
अम्ल + क्षार लवण जल + ऊष्मा
दैनिक जीवन में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहाँ आप उदासीनीकरण प्रक्रिया के उपयोग को देख सकते हैं। आइए, पता करें।
2.3 दैनिक जीवन में उदासीनीकरण प्रक्रिया
स्थिति 1 - कीर्ति उद्यान में एक तितली को देख रही थी। उसका हाथ पेड़ के तने पर टिका हुआ था। अचानक एक लाल चींटी ने उसे काट लिया। इससे उसकी त्वचा लाल हो गई और उसे बहुत दर्द हुआ (चित्र 2.11)। उसके भाई ने प्रभावित क्षेत्र पर नम बेकिंग सोडा लगाकर उसकी सहायता की जिससे उसे दर्द से आराम मिला। आपको क्या लगता है कि इसका क्या कारण हो सकता है?
जब चींटी काटती है तो वह त्वचा में एक अम्लीय द्रव (फॉर्मिक अम्ल) स्त्रावित करती है। अम्ल के प्रभाव को नम बेकिंग सोडा से रगड़कर अप्रभावी किया जा सकता है क्योंकि बेकिंग सोडा क्षारीय होता है। आपके क्षेत्र में चींटियों के काटने पर उपचार के लिए कौन-कौन से उपाय किए जाते हैं?

स्थिति 2- कृषक पोर्टल (कृषि, सहकारिता एवं कृषक कल्याण विभाग का एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म) पर एक कृषक ने पूछा, "मेरे पौधे कुछ दिनों से भली-भाँति वृद्धि नहीं कर रहे हैं।" विस्तृत चर्चा के पश्चात यह पाया गया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा अम्लीय हो गई है। रासायनिक उर्वरक पौधों को उन्नत प्रकार से विकसित करने के लिए मृदा में मिलाए जाने वाले पदार्थ होते हैं। मृदा के उपचार हेतु कृषक को क्या सुझाव दिया जा सकता है?
जब मृदा अत्यधिक अम्लीय होती है तो पौधे भली-भाँति विकसित नहीं होते हैं। इसे चूने से उपचारित किया जा सकता है जो कि क्षारीय प्रकृति का होता है। (चित्र 2.12)

यदि मृदा क्षारीय है तो उसमें जैविक खाद और कम्पोस्ट की गई पत्तियाँ जैसे कार्बनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं। कार्बनिक पदार्थ अम्ल छोड़ते हैं जो मृदा की क्षारीय प्रकृति को उदासीन कर देते हैं।
कभी-कभी मृदा उदासीन हो सकती है परन्तु उसमे उगने वाले पौधों का विकास उचित प्रकार से नहीं होता है। यह मृदा में पोषक तत्वों की कमी के कारण हो सकता है।
स्थिति 3 - अश्विन का मित्र गुरबीर एक औद्योगिक क्षेत्र के समीप रहता है। उसने अश्विन को बताया कि उसके पड़ोस की झील में मछलियों की संख्या दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है! आपको क्या लगता है इसका क्या कारण हो सकता है? हो सकता है कि झील में कारखानों का अपशिष्ट छोड़ा जा रहा हो।
यदि कारखानों का अपशिष्ट अम्लीय प्रकृति का है तो झील में मछलियों को बचाने के लिए क्या किया जा सकता है? कारखानों के अपशिष्ट को झील में छोड़ने से पहले उसमें क्षारीय पदार्थ मिलाकर उसे उदासीन किया जा सकता है। आइए, निष्कर्ष निकालें !
अब क्या आप बता सकते हैं कि जब अश्विन और कीर्ति के श्वेत कागज पर द्रव छिड़का गया तो उन पर 'विज्ञान के अद्भुत जगत में आपका स्वागत है' ऐसा लिखा हुआ क्यों दिखाई दिया?
क्या आपको एक संभावना यह भी लगती है कि छिड़काव के लिए हल्दी के विलयन का और कागज पर लिखने के लिए साबुन के विलयन का प्रयोग किया गया होगा?
संक्षेप में
- हमारे आस-पास के पदार्थों को उनकी प्रकृति के आधार पर अम्लीय, क्षारीय और उदासीन में वर्गीकृत किया जा सकता है।
- लाइकेन, लाल गुलाब, लाल गुड़हल, लाल एवं बैंगनी पत्तागोभी, हल्दी आदि के अर्क का उपयोग पदार्थों की प्रकृति की जाँच करने के लिए किया जा सकता है।
- जो पदार्थ अम्लीय और क्षारीय विलयनों में भिन्न-भिन्न रंग दर्शाते हैं, वे अम्ल-क्षार सूचक कहलाते हैं।
- अम्ल नीले लिटमस सूचक का रंग लाल कर देते हैं। क्षार लाल लिटमस सूचक का रंग नीला कर देते हैं।
- लाल गुलाब का अर्क अम्लीय विलयन में लाल वर्ण का तथा क्षारीय विलयन में हरे वर्ण का हो जाता है।
- हल्दी का पीला रंग क्षारीय विलयन में लाल हो जाता है परंतु अम्लीय और उदासीन विलयनों में अपरिवर्तित रहता है।
- अम्ल एवं क्षार एक दूसरे को उदासीन करके ऊष्मा के उत्सर्जन के साथ लवण व जल बनाते हैं।
- लाल चींटी का काटना, मृदा की अम्लीय अथवा क्षारीय प्रकृति का होना और औद्योगिक अपशिष्ट जैसी अनेक दैनिक समस्याओं को उदासीनीकरण की प्रक्रिया द्वारा प्रबंधित करने का प्रयास किया जा सकता है।
आइए, और अधिक सीखें
-
एक विलयन लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है। निम्नलिखित में से कौन-सा विलयन अत्यधिक मात्रा में मिलाने पर परिवर्तन को उत्क्रमित कर देगा?
- चूने का पानी
- बेकिंग सोडा
- सिरका (iv) साधारण नमक का विलयन
- आपको 'क', 'ख' और 'ग' नामांकित तीन अज्ञात विलयन दिए गए हैं परंतु आप नहीं जानते हैं कि इनमें से कौन-सा विलयन अम्लीय, क्षारीय या उदासीन है। विलयन 'क' में लाल लिटमस विलयन की कुछ बूँदें डालने पर वह नीला हो जाता है। जब हल्दी के विलयन की कुछ बूँदें विलयन 'ख' में डाली जाती हैं तो वह लाल हो जाता है। अंत में विलयन 'ग' में गुलाब के अर्क की कुछ बूँदें डालने पर वह हरा हो जाता है।
प्रेक्षणों के आधार पर 'क', 'ख' और 'ग' की प्रकृति के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा सही क्रम है?
- अम्लीय, अम्लीय और अम्लीय
- उदासीन, क्षारीय और क्षारीय
- क्षारीय, अम्लीय और क्षारीय
- क्षारीय, क्षारीय और क्षारीय
- चित्र 2.13, चित्र 2.14 और चित्र 2.15 का अवलोकन कर उनका विश्लेषण कीजिए। इनमें लाल गुलाब के अर्क में भिगोई हुई कागज की पट्टियों का उपयोग किया गया है। प्रत्येक पात्र में उपस्थित विलयन की प्रकृति को नामांकित कीजिए।
- प्रयोगशाला में एक द्रव प्रतिदर्श का परीक्षण विभिन्न सूचकों का उपयोग करके किया गया -



| सूचक | लाल लिटमस | नीला लिटमस | हल्दी |
|---|---|---|---|
| परिवर्तन | कोई परिवर्तन नहीं | लाल में परिवर्तित | रंग में कोई परिवर्तन नहीं |
परीक्षणों के आधार पर द्रव की अम्लीय अथवा क्षारीय प्रकृति की पहचान कीजिए और अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
- मान्या की आँखों पर पट्टी बँधी है। उसे दो अज्ञात विलयन दिए गए हैं ताकि वह जाँच कर सके कि वे अम्लीय हैं या क्षारीय। मान्या को विलयनों का परीक्षण करने के लिए किस सूचक का उपयोग करना चाहिए और क्यों?
- क्या आप विभिन्न सामग्रियों का सुझाव दे सकते हैं जिनका उपयोग श्वेत कागज (अध्याय के आरम्भ में दिया गया) पर संदेश लिखने के लिए किया जा सकता है और छिड़काव वाली बोतल में क्या लिया जा सकता है? विभिन्न संभावित संयोजनों के प्रयोग से प्राप्त लेखन के रंगों को एक तालिका में लिखिए।
- अँगूर के रस को लाल गुलाब के अर्क के साथ मिलाया गया। मिश्रण का रंग लाल हो गया। यदि इस मिश्रण में बेकिंग सोडा मिला दिया जाए तो क्या होगा? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
- अश्विन ने अपनी दादी के जन्मदिन पर संतरे के रस का उपयोग करके उन्हें एक गुप्त संदेश लिखा। क्या आप संदेश को दृश्यमान करने में दादी की सहायता कर सकते हैं? इसे दृश्यमान करने के लिए आप किस सूचक का प्रयोग करेंगे?
- प्राकृतिक सूचक कैसे तैयार किया जा सकता है? उदाहरण देकर समझाइए।
- आपको तीन द्रव पदार्थ दिए गए हैं। एक सिरका, दूसरा बेकिंग सोडा का विलयन और तीसरा शक्कर का विलयन। क्या आप मात्र हल्दी-पत्र का उपयोग करके उन्हें पहचान सकते हैं? व्याख्या कीजिए।
- लाल गुलाब का अर्क द्रव X को हरा कर देता है। द्रव X की प्रकृति क्या होगी? जब द्रव X में आँवले का रस अधिक मात्रा में मिश्रित किया जाता है तो क्या होगा?
- निम्नलिखित प्रवाह चित्र में दी गई सूचनाओं का अवलोकन कीजिए और उनका विश्लेषण कीजिए। अधूरी जानकारी को पूरा कीजिए।
अमन ने भूल से अंडे के छिलकों पर तथा संगमरमर के कुछ टुकड़ों पर सिरका गिरा दिया और उसने वहाँ बुलबुले उठते देखे। फिर उसने अंडे के छिलकों को तथा संगमरमर के अन्य टुकड़ों पर साबुन का विलयन डाला परंतु तब बुलबुले नहीं निकले। सिरके के साथ बुलबुले बने परंतु साबुन के विलयन के साथ नहीं, ऐसा क्यों ?
अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ
- अम्लीय या क्षारीय पदार्थों और प्राकृतिक सूचकों का उपयोग करके रंगोली बनाइए।
- आप विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जल की अम्लीय, क्षारीय अथवा उदासीन प्रकृति के विषय पर अपनी कक्षा में चर्चा कर सकते हैं। आप वर्षा, नल, नदियों आदि स्रोतों से प्राप्त जल के प्रतिदर्शों का परीक्षण कर सकते हैं।
- अपने क्षेत्र की मृदा का प्रतिदर्श एकत्रित कीजिए और यह पता लगाइए कि इसकी प्रकृति अम्लीय है, क्षारीय है अथवा उदासीन है।