Skip to content

3 :
विद्युत परिपथ एवं उनके घटक

निहाल और उसके सहपाठी अपने विद्यालय के भाखड़ा नंगल बाँध भ्रमण कार्यक्रम को लेकर बहुत उत्साहित थे। वे वहाँ के जल-विद्युत संयंत्र को देखने जाने वाले थे जहाँ गिरते हुए जल के बल का उपयोग करके विद्युत उत्पादन किया जाता है। उन्हें रेलगाड़ी द्वारा पंजाब के नंगल से हिमाचल प्रदेश के भाखड़ा तक की 13 किलोमीटर लंबी उस निःशुल्क यात्रा के आनंद की भी प्रतीक्षा थी जिसमें रेलगाड़ी सतलुज नदी के सुंदर तटों और मोहक शिवालिक पर्वत श्रृंखला से होकर गुजरती है।

यात्रा से पहले निहाल और उसके सहपाठियों को एक सामूहिक कार्य करने के लिए दिया गया जिसमें उन्हें विद्युत के उपयोगों पर एक प्रस्तुति देनी थी। उन्होंने सबसे पहले इससे संबंधित जानकारी अपने-अपने घर में एकत्रित की और इसके पश्चात क्रमशः अपने विद्यालय में, अपने आस-पास में तथा अपने नगर में विद्युत के उपयोग ढूँढ़ें और अंत में इंटरनेट से भी सूचना संकलित की। उन्हें यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि उनकी सूची तो बढ़ती ही जा रही थी। उन्होंने निश्चय किया कि वे इन उपयोगों को विभिन्न शीर्षकों के अंतर्गत वर्गीकृत करेंगे।

पाक-क्रिया में
विद्युत केतली, मिक्सर ग्राइंडर, टोस्टर, अवन, माइक्रोवेव...

प्रकाश-व्यवस्था में
घरों, कार्यालयों, सड़कों, बाजारों, फैक्ट्रियों में प्रयुक्त विद्युत बल्ब, एल.ई.डी......................

परिवहन में
रेलगाड़ी, बस, कार, स्कूटर, लिफ्ट, चलसोपान
.......................................

ऊष्मन एवं शीतलन में
पंखा, कक्ष-ऊष्मक, इमरशन रॉड, गीजर, रेफ्रिजरेटर, वातानुकूलक
...............................

मनोरंजन के लिए
दूरदर्शन, रेडियो
...............................

संचार के लिए
मोबाइल फोन, इंटरनेट
...............................

अन्य उपयोग
जल-पंप, क्रेन, संगणक
...............................
Screenshot 2025-09-16 103041

क्या आप इस सूची में विद्युत के कुछ अन्य उपयोग अंकित कर निहाल और उसके सहपाठियों की सहायता कर सकते हैं? विद्युत के उपयोगों के वर्गीकरण की किसी अन्य विधि का सुझाव भी दीजिए।

विद्युत का उपयोग तो हम करते ही रहते हैं अतः आइए, विद्युत के विषय में और अधिक जानें। आपने पहले सीखा है कि विद्युत अनेक विधियों से उत्पन्न की जाती है, जैसे - पवन चक्कियों में पवन ऊर्जा का उपयोग करके, सौर-पैनलों में सौर ऊर्जा का उपयोग करके, गिरते जल द्वारा, प्राकृतिक गैस और कोयले का उपयोग करके आदि। कक्षा 6 विज्ञान की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय 'प्रकृति की अमूल्य संपदा' में आप यह पढ़ चुके हैं। हमारे घरों और फैक्ट्रियों में इन स्रोतों द्वारा उत्पन्न ऊर्जा की आपूर्ति तारों के माध्यम से होती है। उदाहरण के लिए, अपने घरों में हम विभिन्न विद्युत उपकरणों के प्लगों को दीवार में लगे विद्युत सॉकेट में लगाते हैं। तथापि विद्युत-संबंधी ज्ञान प्राप्त करने के लिए हम विद्युत के एक सुवाह्य स्रोत पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे जिसका उपयोग संभवतः हम में से अधिकांश व्यक्तियों ने किया होगा। आइए, हम टॉर्च-लाइट जैसे एक सामान्य उपकरण में इसके उपयोग से प्रारंभ करते हैं।

सावधानी विद्युत के खंभों एवं अन्य विद्युत उपकरणों पर लगा संकट सूचक चिह्न लोगों को यह चेतावनी देता है कि यदि सावधानी से व्यवहार न किया जाए तो विद्युत क्षति भी पहुँचा सकती है। अपने घर अथवा विद्यालय के विद्युत-प्रदाय के साथ कभी भी किसी भी प्रकार के प्रयोग न करें। यहाँ तक कि सुवाह्य जनित्रों से प्राप्त होने वाली विद्युत ऊर्जा भी भयावह परिणामकारी हो सकती है। विद्युत संबंधी प्रयोगों में सदैव केवल वैसी ही बैटरियों या सेलों का उपयोग कीजिए जैसी आप टॉर्च-लाइटों, दीवार घड़ियों, रेडियो तथा सुदूर नियंत्रकों आदि में करते हैं।

Screenshot 2025-09-16 103111

3.1 टॉर्च-लाइट

आपने टॉर्च-लाइट का उपयोग किया होगा जिसे टॉर्च अथवा फ्लैश लाइट भी कहते हैं।

क्रियाकलाप 3.1 – आइए, अन्वेषण करें
  • चित्र 3.1 में दर्शाई गई जैसी एक टॉर्च लीजिए।
  • Screenshot 2025-09-19 114610
    चित्र 3.1 - टॉर्च-लाइट
  • सावधानीपूर्वक इसका अवलोकन कीजिए। क्या आपको इसमें कोई लैंप और एक स्विच दिखाई देता है?
  • इसके स्विच को खिसकाइए और अवलोकन कीजिए। क्या टॉर्च का लैंप दीप्त होता है?
  • अब स्विच को खिसका कर उसकी पूर्वस्थिति में लाइए और टॉर्च लैंप का अवलोकन कीजिए।

आपने ध्यान दिया होगा कि स्विच की एक स्थिति में टॉर्च लैंप दीप्त होता है और दूसरी स्थिति में दीप्त नहीं होता है। स्विच की जिस स्थिति में लैंप दीप्त होता है वह उसकी 'ऑन' स्थिति कहलाती है और दसरी स्थिति जिसमें लैंप दीप्त नहीं होता 'ऑफ' स्थिति कहलाती है।

  • अब टॉर्च को खोलिए। इसके अंदर आपको क्या दिखाई दिया?

टॉर्च के अंदर आपको दो या दो से अधिक विद्युत सेल दिखाई देंगे।

3.2 एक सरल विद्युत परिपथ

टॉर्च कैसे कार्य करती है यह समझने के लिए आइए, पहले हम इसके अवयवों के विषय में जानकारी प्राप्त करते हैं।

स्विच की एक स्थिति (ऑन स्थिति) में टॉर्च का लैंप दीप्तिमान क्यों हो जाता है?
Screenshot 2025-09-16 104027

3.2.1 विद्युत सेल

क्रियाकलाप 3.2- 3.2 - आइए, अवलोकन करें

    * एक विद्युत सेल लीजिए। इसे सभी तरफ से ध्यानपूर्वक देखिए (चित्र 3.2)। क्या आप विद्युत सेल पर धन (+) चिह्न और ऋण (-) चिह्न अंकित देखते हैं? क्या आप यह भी देखते हैं कि इसके एक सिरे पर एक उभरी हुई धातु की टोपी है और दूसरे सिरे पर धातु की डिस्क है?

Screenshot 2025-09-16 104038
चित्र 3.2 - विद्युत सेल

सभी विद्युत सेलों में दो सिरे होते हैं; एक को धनात्मक अथवा धन (+) सिरा कहा जाता है जबकि दूसरा सिरा ऋणात्मक अथवा ऋण (-) सिरा कहलाता है। धातु की टोपी वाला सिरा विद्युत सेल का धनात्मक सिरा होता है। जबकि धातु की चकती वाला सिरा ऋणात्मक सिरा होता है। विद्युत सेल विद्युत ऊर्जा का सुवाह्य स्रोत होता है।

3.2.2 बैटरी

क्रियाकलाप 3.3 - आइए, प्रयोग करें

टॉर्च में हम सामान्यतः एक से अधिक सेलों का उपयोग करते हैं। क्या वे इसमें किसी विशेष क्रम में लगे होते हैं?
Screenshot 2025-09-16 104047
  • एक टॉर्च लीजिए जिसमें दो सेलों का प्रयोग होता है। इसके सेल वाले प्रकोष्ठ को खोलिए और सेलों को बाहर निकालिए।
  • उनके क्रम बदल कर वापस प्रकोष्ठ में रखिए। एक सेल की दिशा उलट करके भी प्रयोग दोहराइए। स्विच को खिसकाइए और जाँचिए कि क्या प्रत्येक प्रकरण में इसका लैंप दीप्त होता है।
  • ध्यान दीजिए कि जब लैंप दीप्त होता है तो टॉर्च में सेल किस क्रम में लगाए गए थे।
जब सेल चित्र 3.3 में दर्शाए गए क्रम में लगाए गए तो लैंप दीप्त होता है। ध्यान दीजिए कि यहाँ इन सेलों के सिरों को किस प्रकार संयोजित किया गया है। यहाँ एक सेल का धनात्मक सिरा अगले सेल के ऋणात्मक सिरे से जुड़ा है। दो या दो से अधिक सेलों का इस प्रकार का संयोजन बैटरी कहलाता है। Screenshot 2025-09-16 104104

अनेक विद्युत उपकरणों के लिए हमें एक से अधिक सेलों की आवश्यकता हो सकती है। अतः हम दो या दो से अधिक सेलों को चित्र 3.3 में दर्शाए अनुसार जोड़ते हैं। एक से अधिक सेलों को जोड़ने से परिपथ में ऊर्जा अधिक लंबे समय तक तथा/अथवा अधिक परिमाण में प्राप्त की जा सकती है।

रोचक तथ्य
Screenshot 2025-09-16 135922 'बैटरी' शब्द का उपयोग एकल सेल के लिए भी किया जाता है। हमारे मोबाइल फोन को ऊर्जा प्रदान करने वाले एकल सेल को भी हम बैटरी ही कहते हैं।

3.2.3 विद्युत लैंप

तापदीप्त लैंप

क्रियाकलाप 3.4 - आइए, अवलोकन करें

इस क्रियाकलाप के लिए आपको एक तापदीप्त लैंप (अथवा प्रकाश बल्ब) युक्त टॉर्च-लाइट की आवश्यकता होगी। अनेक पुरानी टॉर्च-लाइटों में अभी भी इस प्रकार के लैंपों का उपयोग होता है। अपने शिक्षक की सहायता से सुनिश्चित कीजिए कि आपकी टॉर्च में तापदीप्त प्रकार का लैंप लगा है।

Screenshot 2025-09-16 135848
  • टॉर्च लीजिए और इसके लैंप का ध्यान से निरीक्षण कीजिए। आप क्या देखते हैं? क्या आपको काँच के बल्ब के मध्य में लगा एक पतला तार दिखाई देता है?
  • अब टॉर्च का स्विच ऑन कीजिए। लैंप का कौन-सा भाग दीप्त होता है? लैंप के काँच के बल्ब के अंदर लगा पतला तार दीप्त होता है। यह दीप्तिमान पतला तार बल्ब का तंतु कहलाता है।
  • अपने शिक्षक की सहायता से लैंप को टॉर्च से बाहर निकालिए और इसका सभी तरफ से निरीक्षण कीजिए। तंतु को बल्ब में किस प्रकार लगाया गया है?
Screenshot 2025-09-16 135909

तंतु दो अपेक्षाकृत मोटे तारों से जुड़ा है जो इसे आधार प्रदान करते हैं जैसा कि चित्र 3.4 (क) में दर्शाया गया है। एक मोटा तार लैंप के आधार पर लगे धातु के आवरण से जुड़ा है जबकि दूसरा तार आधार के केंद्र पर लगी धातु की नोक से जुड़ा है (चित्र 3.4 ख)। ये तार लैंप के दो टर्मिनल बनाते हैं और ये इस प्रकार लगाए गए हैं कि एक दूसरे के संपर्क में ना आएँ। इस प्रकार के तापदीप्त लैंपों में तंतु गर्म हो जाता है और प्रकाश उत्सर्जित करने लगता है।

किंतु मेरी टॉर्च में एक भिन्न प्रकार का लैंप लगा है। वास्तव में इसको टॉर्च से बाहर नहीं निकाला जा सकता क्योंकि यह इसमें स्थिर कर दिया गया है।
Screenshot 2025-09-16 135936

एल.ई.डी. लैंप

आजकल उपयोग की जा रही अनेक टॉर्चों में तापदीप्त लैंप के स्थान पर प्रकाश उत्सर्जक डायोड (लाईट एमिटिंग डायोड-एल.ई.डी.) लैंपों को लगाया जा रहा है, जैसा कि चित्र 3.5 में दर्शाया गया है।

Screenshot 2025-09-16 140807
चित्र 3.5 - टॉर्च के लिए एल.ई.डी. लैंप

क्रियाकलाप 3.5 - आइए, अवलोकन करें
  • किसी भी रंग का एक एल.ई.डी. लीजिए (चित्र 3.6) और उसका निरीक्षण कीजिए। क्या आप इसके भीतर कोई तंतु देखते हैं?
  • एल.ई.डी. से जुड़े दो तारों को ध्यान से देखिए। क्या आप इनमें से एक को दूसरे से अधिक लंबा पाते हैं?
Screenshot 2025-09-16 140820
चित्र 3.6- विभिन्न रंगों के एल.ई.डी.

तापदीप्त लैंपों के विपरीत एल.ई.डी. में तंतु नहीं होते हैं (चित्र 3.6)। इनके भी दो टर्मिनल होते हैं जिनमें लंबे तार वाला टर्मिनल धनात्मक होता है और छोटे तार वाला टर्मिनल ऋणात्मक होता है। किसी-किसी टॉर्च के लैंप में एक से अधिक एल.ई.डी. का भी प्रयोग हो सकता है तथा कभी-कभी ये अलग-अलग आकृतियों के भी हो सकते हैं।

विद्युत सेल, बैटरी एवं लैंपों के विषय में जानकारी प्राप्त कर लेने के पश्चात अब हम किसी सेल या बैटरी का उपयोग करके टॉर्च के लैंप को दीप्तिमान करने के लिए तैयार हैं।

3.2.4 विद्युत सेल अथवा बैटरी का उपयोग करके किसी विद्युत लैंप को दीप्तिमान करना

क्रियाकलाप 3.6 - आइए, निर्माण करें
  • एक विद्युत सेल, टॉर्च के लिए एक तापदीप्त लैंप, एक सेल-धारक, एक लैंप-धारक और विद्युत-तार के चार टुकड़े लीजिए।
  • प्रत्येक तार के टुकड़े के दोनों सिरों से लगभग 1cm प्लास्टिक का आवरण हटा दीजिए जिससे धातु का तार दिखाई देने लगे।
  • चित्र 3.7 (क) में दर्शाए अनुसार सेल-धारक के दो सिरों से दो तार के टुकड़े जोड़िए।
Screenshot 2025-09-16 141759
चित्र 3.7 - (क) एक विद्युत-सेल धारक जिससे दो तार जुड़े हैं (ख) सेल धारक के अंदर लगा विद्युत-सेल (ग) विद्युत टेप की सहायता से विद्युत सेल से जोड़े गए तार
  • सेल को इसके धारक में इस प्रकार लगाइए कि इसका ऋणात्मक टर्मिनल धारक के स्प्रिंग वाले सिरे की ओर रहे (चित्र 3.7 ख)। यदि सेल-धारक उपलब्ध न हो तो दो तारों के सिरों को सेल के दोनों टर्मिनलों पर विद्युत टेप की सहायता से जोड़ दीजिए (चित्र 3.7 ग)।
  • चित्र 3.8 (क) में दर्शाए अनुसार दो तारों को लैंप धारक के पेचों से जोड़िए। लैंप को घुमा-घुमा कर धारक में बैठा दीजिए (चित्र 3.8 ख)। यदि लैंप धारक उपलब्ध न हो तो इन दो तारों को लैंप के सिरों से जोड़ने के लिए विद्युत टेप का उपयोग कीजिए (चित्र 3.8 ग)।
  • Screenshot 2025-09-16 161658
    चित्र 3.8 - (क) एक विद्युत लैंप धारक जिससे तार जुड़े हैं (ख) लैंप धारक में लगा तापदीप्त लैंप (ग) तापदीप्त लैंप से विद्युत टेप की सहायता से जुड़े तार

    अब हम लैंप को दीप्तिमान करने के लिए इसे सेल के साथ संयोजित करने के लिए तैयार हैं।

  • अब हम इस क्रियाकलाप को दो चरणों में करेंगे - पूर्वानुमान लगाना और अवलोकन करना। सेल और लैंप को जोड़ने के कुछ तरीके तालिका 3.1 में दर्शाए गए हैं।
    • प्रत्येक संयोजन व्यवस्था के लिए पूर्वानुमान लगाइए कि लैंप दीप्तिमान होगा या नहीं। अपने पूर्वानुमान तालिका 3.1 में लिखिए।
    • अब लैंप और सेल को आपस में जोड़िए और अवलोकन कीजिए कि लैंप दीप्तिमान होता है या नहीं। अपने अवलोकनों को तालिका 3.1 में लिखिए। जो लैंप दीप्तिमान होते हैं, तालिका में उनके काँच के बल्बों पर पीला रंग लगाइए।
तालिका 3.1 - लैंप को दीप्तिमान करने के प्रयास -

टिप्पणी- किसी भी परिपथ में लैंप को दीप्तिमान नहीं दर्शाया गया है

क्र.सं. सेल एवं लैंपों की व्यवस्था लैंप के दीप्तिमान होने संबंधी पूर्वानुमान वास्तविक प्रयोग में अवलोकन
1. Screenshot 2025-09-17 092414
2. Screenshot 2025-09-17 092424
3. Screenshot 2025-09-17 092435
4. Screenshot 2025-09-17 092445
5. Screenshot 2025-09-17 092456
6. Screenshot 2025-09-17 092506

क्र.सं. 1 और 6 पर दी गई व्यवस्थाओं में तो लैंप दीप्तिमान होता है और शेष व्यवस्थाओं में यह दीप्तिमान नहीं होता। जिन व्यवस्थाओं में लैंप दीप्तिमान होता है उन्हें ध्यानपूर्वक देखिए। इनकी तुलना उन व्यवस्थाओं से कीजिए जिनमें लैंप दीप्तिमान नहीं होता। क्या आप इस अंतर के कारण का पता लगा सकते हैं?

3.2.5 विद्युत परिपथ

लैंप तभी दीप्तिमान होता है जब इसका एक सिरा विद्युत सेल के एक टर्मिनल से और दूसरा सिरा सेल के दूसरे टर्मिनल से जोड़ा जाता है जैसा कि चित्र 3.9 में दर्शाया गया है। यह व्यवस्था विद्युत परिपथ निर्मित करती है जो लैंप से होकर विद्युत-धारा के प्रवाह के लिए एक संपूरित पथ प्रदान करती है। लैंप तभी दीप्तिमान होता है जब परिपथ में धारा प्रवाहित होती है।

किसी विद्युत परिपथ में विद्युत-धारा की दिशा सदैव विद्युत सेल के धनात्मक टर्मिनल से ऋणात्मक टर्मिनल की ओर होती है। जब लैंप के टर्मिनलों को तार द्वारा विद्युत सेल के टर्मिनलों से जोड़ा जाता है तो तापदीप्त लैंप के तंतु में से होकर धारा प्रवाहित होती है। इस कारण लैंप दीप्तिमान हो जाता है। तापदीप्त लैंप के प्रकरण में इससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि इसका कौन-सा टर्मिनल सेल के धन या ऋण टर्मिनल से जोड़ा जाता है। जब तक परिपथ संपूरित रहता है और इसके तंतु में से धारा प्रवाहित होती रहती है लैंप दीप्तिमान रहता है।

Screenshot 2025-09-17 093434
चित्र 3.9 - विद्युत परिपथ
रोचक तथ्य
कभी-कभी सेल से जुड़ा होने पर भी कोई लैंप दीप्तिमान नहीं होता है। तब हम कहते हैं कि यह लैंप फ्यूज हो गया है जो कि प्रायः तंतु के टूट जाने के कारण होता है। टूटा हुआ तंतु धारा के प्रवाह को रोक देता है और लैंप को दीप्तिमान नहीं होने देता। Screenshot 2025-09-17 093531

आइए, अब हम किसी एल.ई.डी. को दीप्तिमान करने का प्रयास करते हैं।

क्रियाकलाप 3.7 - आइए, प्रयोग करें
  • दो विद्युत-सेल, किसी भी रंग का एक एल.ई.डी., दो सेलों का एक सेल-धारक (चित्र 3.8 क) तथा विद्युत-तार के दो टुकड़े लीजिए।
  • विद्युत-तार के प्रत्येक टुकड़े के दोनों सिरों से लगभग 1cm तक प्लास्टिक के आवरण को हटा दीजिए जिससे कि धातु का तार बाहर दिखने लगे।
  • इन दो तारों को सेल-धारक से चित्र 3.10 (क) में दर्शाए अनुसार जोड़िए।
  • धारक में दो सेल इस प्रकार लगाइए कि प्रत्येक सेल का ऋण टर्मिनल धारक में लगे स्प्रिंग की ओर रहे (चित्र 3.10 ख)। अब आपकी बैटरी प्रयोग के लिए तैयार है। आप यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि इस बैटरी का धन टर्मिनल कौन-सा है?
  • धारक का वह सिरा जो पहले सेल के धनात्मक टर्मिनल से जुड़ा है वह धन टर्मिनल है और इसका वह सिरा जो दूसरे सेल के ऋणात्मक टर्मिनल से जुड़ा है वह ऋण टर्मिनल है।

  • अब बैटरी के धन टर्मिनल से जुड़े तार के मुक्त सिरे को एल.ई.डी. के लंबे तार से तथा दूसरे तार को एल.ई.डी. के छोटे तार से जोड़िए (चित्र 3.10 ग)। क्या एल.ई.डी. दीप्तिमान होती है?
  • अब एल.ई.डी. से जुड़े तारों को परस्पर बदल कर उपर्युक्त चरण दोहराइए (चित्र 3.10 घ)। क्या इस बार भी एल.ई.डी. दीप्तिमान होती है?
Screenshot 2025-09-17 093627
(क)
Screenshot 2025-09-17 093637
(ख)
Screenshot 2025-09-17 093645
(ग)
Screenshot 2025-09-17 093654
(घ)
चित्र 3.10- किसी एल.ई.डी. को दीप्तिमान करना

आपने अवलोकन किया होगा कि पहले प्रकरण में (चित्र 3.10 ग) एल.ई.डी दीप्तिमान होती है और दूसरे प्रकरण में (चित्र 3.10 घ) दीप्तिमान नहीं होती। ऐसा इसलिए है क्योंकि एल.ई.डी. में धारा एक ही दिशा में प्रवाहित हो सकती है। एल.ई.डी. में धारा केवल तभी प्रवाहित होती है जब इसका धन टर्मिनल (लंबा तार) बैटरी के धन टर्मिनल से और ऋण टर्मिनल (छोटा तार) बैटरी के ऋण टर्मिनल से जोड़ा जाता है। जब एल.ई.डी. में धारा प्रवाहित होती है तो यह दीप्तिमान हो जाती है। अतः एल.ई.डी. को दीप्तिमान करने के लिए यह ध्यान रखना चाहिए कि इसे परिपथ में सही प्रकार से जोड़ा जाए।

कभी-कभी आपको कोई ऐसी युक्ति मिल सकती है जिसमें सेल एक दूसरे के समांतर रखे हों। तब देखें कि सेलों के टर्मिनल किस प्रकार जुड़े हैं?

Screenshot 2025-09-17 093722

गहन चिंतन
यदि आप ध्यानपूर्वक बैटरी-कोष्ठ में देखें तो आप प्रायः एक मोटा तार अथवा धातु की पट्टी पाएँगे जो एक सेल के धन टर्मिनल को दूसरे सेल के ऋण टर्मिनल से जोड़ती है। सेलों को उपयुक्त प्रकार से कोष्ठ में रखने में सहायता के लिए सामान्यतः इनमें (+) एवं (-) चिह्न मुद्रित होते हैं।

3.2.6 विद्युत स्विच

आइए, हम अपना स्वयं का एक सरल स्विच बनाएँ।

स्विच टॉर्च-लाइट को किस प्रकार ऑन या ऑफ करता है?

क्रियाकलाप 3.8 - आइए, निर्माण करें -
  • दो ड्राइंग-पिनों, एक सेफ्टी-पिन अथवा पेपर क्लिप, तार के दो टुकड़े और गत्ते का एक टुकड़ा लीजिए।
  • ड्राइंग-पिन को सेफ्टी-पिन के वलय में प्रविष्ट करके गत्ते के टुकड़े पर जड़ दीजिए। यह सुनिश्चित कीजिए कि सेफ्टी पिन मुक्त रूप से घूम सके (चित्र 3.11 क)।
  • अब दूसरे ड्राइंग-पिन को गत्ते के टुकड़े पर इस प्रकार लगाइए कि सेफ्टी-पिन का मुक्त सिरा इसको स्पर्श कर सके (चित्र 3.11 ख)।
  • प्रत्येक ड्राइंग-पिन से एक-एक तार को जोड़िए। अब हमारा स्विच तैयार है। आइए, अब जाँच करें कि हमारा स्विच कार्य करता है या नहीं।
Screenshot 2025-09-17 101740
चित्र 3.11- (क) एक स्विच 'ऑफ' स्थिति में
Screenshot 2025-09-17 101831
चित्र 3.11 - (ख) एक स्विच -'ऑन' स्थिति में
क्रियाकलाप 3.9 - आइए, परीक्षण करें
  • विद्युत सेल, लैंप और स्विच को चित्र 3.12 (क) में दर्शाए अनुसार जोड़िए। क्या लैंप दीप्तिमान होता है?
  • सेफ्टी-पिन के मुक्त सिरे को इतना घुमाइए कि यह दूसरी ड्राइंग-पिन को स्पर्श करने लगे, जैसा चित्र 3.12 (ख) में दर्शाया गया है। क्या अब लैंप दीप्तिमान होता है?
Screenshot 2025-09-17 101857
-चित्र 3.12 - (क) एक स्विच युक्त विद्युत परिपथ 'ऑफ' स्थिति में
Screenshot 2025-09-17 101915
चित्र 3.12 - (ख) एक स्विच युक्त विद्युत परिपथ 'ऑन' स्थिति में

जब सेफ्टी-पिन दोनों ड्राइंग-पिनों को स्पर्श करती है तो यह उन दोनों के मध्य के अंतराल को भर देती है और परिपथ पूरा हो जाता है जिससे इसमें धारा प्रवाहित होने लगती है। इस स्थिति को हम ऑन स्थिति कहते हैं (चित्र 3.12 ख), जिसमें परिपथ बंद होता है। बंद परिपथ में धारा सेल के धन टर्मिनल से ऋण टर्मिनल की ओर प्रवाहित होने लगती है और लैंप दीप्तिमान हो जाता है। जब सेफ्टी-पिन दूसरी ड्राइंग-पिन को स्पर्श नहीं करती है तो परिपथ में इनके बीच का अंतराल धारा-प्रवाह को रोक देता है और लैंप दीप्तिमान नहीं होता। इस स्थिति को हम ऑफ स्थिति कहते हैं (चित्र 3.12 क) जिसमें परिपथ खुला होता है।

ध्यान दीजिए कि स्विच को आप परिपथ में कहीं भी लगा सकते हैं। स्विच एक ऐसी सरल युक्ति है जो या तो परिपथ को पूर्ण करती है या फिर भंग करती है। घर में प्रकाश-व्यवस्था अथवा अन्य युक्तियों के लिए उपयोग में आने वाले स्विच भी इसी ढंग से कार्य करते हैं। यद्यपि उनको अलग प्रकार से डिजाइन किया जाता है।

3.3 परिपथ आरेख

विद्युत परिपथ के विभिन्न घटकों को तालिका 3.2 में दर्शाए गए प्रतीकों द्वारा निरूपित किया जा सकता है -

क्या हम परिपथ को अपेक्षाकृत अधिक सरल ढंग से निरूपित कर सकते हैं?
Screenshot 2025-09-18 160344
तालिका 3.2 – विद्युत परिपथ के घटक एवं उनके प्रतीक

क्र.सं. विद्युत परिपथ के घटकों के नाम एवं उनके वास्तविक चित्र प्रतीक
1. विद्युत सेलScreenshot 2025-09-18 160151 Screenshot 2025-09-18 155651
2. बैटरी Screenshot 2025-09-18 155559 Screenshot 2025-09-18 155715
3. विद्युत लैंप Screenshot 2025-09-18 155606 Screenshot 2025-09-18 155723
4. प्रकाश उत्सर्जक डायोड (एल.ई.डी.) Screenshot 2025-09-18 155614 Screenshot 2025-09-18 155732
5. ऑन' स्थिति में स्विच Screenshot 2025-09-18 155622 Screenshot 2025-09-18 155743
6. ऑफ' स्थिति में स्विच Screenshot 2025-09-18 155631 Screenshot 2025-09-18 155749
7. तार Screenshot 2025-09-18 155640 Screenshot 2025-09-18 155755

विद्युत सेल के प्रतीक में लंबा रेखाखंड धनात्मक टर्मिनल को जबकि छोटा रेखाखंड ऋणात्मक टर्मिनल को निरूपित करता है (चित्र 3.13 क)।

एल.ई.डी. के प्रतीक में त्रिभुज उस दिशा की ओर इंगित करता है जिस ओर धारा प्रवाहित हो सकती है। तीर के दो चिह्न एल.ई.डी. से प्रकाश-उत्सर्जन के द्योतक हैं (चित्र 3.13 ख)।

Screenshot 2025-09-18 160242
चित्र 3.13- (क) सेल एवं (ख) एल.ई.डी. के प्रतीकों में धन और ऋण टर्मिनल

विद्युत घटकों को निरूपित करने के लिए प्रतीकों का उपयोग करने से विद्युत परिपथों के आरेख बनाना और उनको समझना सरल हो जाता है। प्रतीकों का उपयोग करके बनाए गए किसी विद्युत परिपथ के चित्र को इसका परिपथ आरेख कहते हैं।

गहन चिंतन
इंटरनेशनल इलेक्ट्रोटेक्निकल कमीशन (आई.ई.सी.), अमेरीकन नेशनल स्टैंडर्ड इंस्टीट्यूट (ए.एन.एस.आई.) एवं इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर्स (आई.ई.ई.ई.) जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन विद्युत एवं विद्युत उपकरणों के लिए मानक प्रतीक निर्धारित करते हैं। समस्त विश्व में समान प्रतीकों का उपयोग होने से विभिन्न देशों और उद्योगों के व्यक्तियों को एक-दूसरे की बात सरलता से समझने में सहायता मिलती है।

क्रियाकलाप 3.10 - आइए, आरेख बनाएँ

  • तालिका 3.2 में दर्शाए गए प्रतीकों का उपयोग करके चित्र 3.12 (क) एवं चित्र 3.10 (ग) में दिए गए विद्युत परिपथों के परिपथ आरेख बनाइए। क्या आपके द्वारा बनाए गए परिपथ आरेख क्रमशः चित्र 3.14 (क) एवं चित्र 3.14 (ख)

क्या आपके द्वारा बनाए गए परिपथ आरेख क्रमशः चित्र 3.14 (क) एवं चित्र 3.14 (ख) में दर्शाए गए आरेखों के समान हैं?

Screenshot 2025-09-18 160252
(क)
Screenshot 2025-09-18 160304
(ख)
चित्र 3.14 - (क) एक तापदीप्त लैंप को लेकर निर्मित परिपथ आरेख (ख) एक एल.ई.डी. को लेकर निर्मित परिपथ आरेख

3.4 विद्युत चालक एवं विद्युतरोधी

विद्युत परिपथ बनाने में हमने धातु के तारों का ही उपयोग क्यों किया? क्या हम संयोजी तारों के लिए कुछ अन्य पदार्थों का उपयोग भी कर सकते हैं?
Screenshot 2025-09-18 160329
और विद्युत तारों पर प्लास्टिक अथवा रबर का ही आवरण क्यों चढ़ाया जाता है?
Screenshot 2025-09-18 160344

मान लीजिए कि हम धातु के अतिरिक्त किसी अन्य पदार्थ के विद्युत तार बनाते हैं और उनका उपयोग विद्युत परिपथ बनाने के लिए करते हैं। आपके विचार से क्या ऐसे परिपथ में उन पदार्थों से होकर विद्युत-धारा प्रवाहित होगी?

क्रियाकलाप 3.11 - आइए, पहचानें

  • एक विद्युत सेल और एक लैंप को चित्र 3.15 (क) में दर्शाए अनुसार इस प्रकार जोड़िए कि तार के दो सिरे मुक्त रहें।
  • तारों के दोनों मुक्त सिरों को क्षण भर के लिए परस्पर स्पर्श कराइए। क्या लैंप दीप्तिमान होता है? यदि हाँ, तो हमारा परीक्षण-यंत्र उपयोग के लिए तैयार है। हम इस परीक्षण-यंत्र का उपयोग उन पदार्थों को पहचानने के लिए कर सकते हैं जिनमें से होकर विद्युत-धारा प्रवाहित हो सकती है।
  • विभिन्न पदार्थों की बनी वस्तुएँ एकत्रित कीजिए, जैसे- धातु की चम्मचें, सिक्के, कॉर्क, रबर, काँच, चाबियाँ, पिन, प्लास्टिक का मापक, लकड़ी का टुकड़ा, एलुमिनियम पर्णिका, मोमबत्ती, सिलाई की सुई, गत्ता, कागज तथा पेंसिल की लीड।
  • अपने परीक्षण-यंत्र के मुक्त तारों के दोनों सिरों को आपके द्वारा एकत्रित की गई प्रत्येक वस्तु के दो सिरों से स्पर्श कराइए (3.15 ख)। यह सुनिश्चित कीजिए कि तार परस्पर संपर्क में न आएँ। क्या लैंप प्रत्येक प्रकरण में दीप्तिमान होता है?
  • अपने अवलोकनों को तालिका 3.3 में लिखिए।
Screenshot 2025-09-19 101932
चित्र 3.15 - (क) विद्युत चालन -परीक्षण-यंत्र
Screenshot 2025-09-19 101949
चित्र 3.15 - (ख) विद्युत चालन परीक्षण-यंत्र का उपयोग करके पदार्थ की पहचान

तालिका 3.3 - विद्युत-चालकों एवं विद्युतरोधियों को पहचानना

क्र.सं. वस्तु पदार्थ का नाम जिससे वस्तु बनी है लैंप दीप्तिमान है (हाँ/नहीं) निष्कर्ष (विद्युत-चालक/विद्युतरोधी)
1. छड़ी लकड़ी नहीं
2. पैमाना प्लास्टिक
3. चूड़ी काँच
4. कागज की पट्टी कागज
5. मोमबत्ती मोम
6. चाबी धातु
7. इरेज़र रबर
8.
9.
  • अपने अवलोकनों का विश्लेषण कीजिए। क्या लैंप सभी पदार्थों के लिए दीप्तिमान होता है?

लैंप केवल कुछ ही पदार्थों के लिए दीप्तिमान होता है। इसका तात्पर्य यह है कि विद्युत-धारा कुछ पदार्थों में से सरलता से प्रवाहित हो जाती है किंतु कुछ अन्य पदार्थों में से होकर प्रवाहित नहीं होती है। जिन पदार्थों में से विद्युत-धारा सरलता से प्रवाहित होती है, वे विद्युत के चालक अथवा सुचालक कहलाते हैं। जिन पदार्थों में से विद्युत-धारा प्रवाहित नहीं हो सकती वे विद्युतरोधी अथवा विद्युत के कुचालक कहलाते हैं।

  • तालिका 3.3 में आपके द्वारा अभिलेखित अवलोकनों के आधार पर निष्कर्ष निकालिए कि कौन-से पदार्थ विद्युत के चालक हैं तथा कौन-से पदार्थ विद्युतरोधी हैं। तालिका 3.3 में इन्हें लिखिए।

तालिका 3.3 के अपने निष्कर्षों से आपने यह स्पष्ट अनुभव किया होगा कि धातु विद्युत के चालक होते हैं और इसलिए इनका उपयोग विद्युत-तार बनाने के लिए किया जाता है।

गहन चिंतन
चाँदी, ताँबा और सोना विद्युत के सर्वोत्तम चालक हैं। तथापि विद्युत-तार बनाने के लिए मुख्यतः ताँबे का उपयोग इसकी कम लागत और प्रचुर मात्रा में उपलब्धता के कारण किया जाता है। विभिन्न उपयोगों के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के विद्युत तार प्रयोग में लाए जाते हैं।

तालिका 3.3 से आपने यह भी जान लिया होगा कि प्लास्टिक और रबर विद्युतरोधी पदार्थ हैं। क्या अब आप यह समझ गए हैं कि धातु के तारों पर इन पदार्थों के आवरण क्यों चढ़ाए जाते हैं?

चालकों और विद्युतरोधियों, दोनों का अपना-अपना महत्त्व है। विद्युत-तार, स्विच, प्लगों एवं सॉकेटों के संयोजी भाग चालकों के बने होते हैं। रबर, प्लास्टिक एवं चीनी मिट्टी जैसे विद्युतरोधी पदार्थों का उपयोग व्यक्तियों को विद्युत-आघात से बचाने के लिए तारों, प्लगों एवं स्विचों के आवरण बनाने में किया जाता है।

सावधानी- हमारा शरीर विद्युत का चालक है। हमारे शरीर में से प्रवाहित होने वाली विद्युत-धारा गंभीर क्षति का, यहाँ तक कि मृत्यु का भी कारण बन सकती है। विद्युत उपकरणों का उपयोग सदैव सावधानीपूर्वक कीजिए। किसी भी प्लग या स्विच को गीले हाथों से न छुएँ, विद्युत उपकरणों का उपयोग गीले स्थानों पर न करें और जिन उपकरणों का विद्युतरोधन क्षतिग्रस्त हो गया हो या वे प्लग जो टूटे हुए हों उनको उपयोग में न लाएँ।

गहन चिंतन
क्या आपने कभी यह विचार किया है कि सेल या बैटरी से प्राप्त होने वाली विद्युत दीवार में लगे सॉकेट से प्राप्त होने वाली विद्युत से किस प्रकार भिन्न है? बैटरी से प्राप्त विद्युत प्रायः छोटी युक्तियों को शक्ति प्रदान करती है और यह एक विशेष प्रकार की होती है जिसे दिष्ट धारा (डायरेक्ट करंट-डी.सी.) कहते हैं। इसके विपरीत शक्ति संयंत्रों से आने वाली और दीवार पर लगे सॉकेटों तक पहुँचने वाली विद्युत-धारा को प्रत्यावर्ती धारा (अल्टरनेटिंग करंट-ए.सी.) कहा जाता है और यह बड़े उपकरणों को चला सकती है।

संक्षेप में

  • विद्युत सेल विद्युत ऊर्जा का एक सुवाह्य स्रोत है।
  • विद्युत सेल के दो टर्मिनल होते हैं- एक को धनात्मक अथवा धन (+) टर्मिनल जबकि दूसरे को ऋणात्मक या ऋण (-) टर्मिनल कहा जाता है।
  • किसी तापदीप्त विद्युत लैंप में एक पतला तार होता है जिसे तंतु कहते हैं। तंतु में विद्युत-धारा प्रवाहित होती है तो यह गरम हो जाता है और प्रकाश उत्सर्जित करने लगता है।
  • एल.ई.डी. में दो टर्मिनल होते हैं, एक धन (जिसके साथ लंबा तार जुड़ा होता है) और दूसरा ऋण (जिसके साथ जुड़ा तार छोटा होता है)।
  • एल.ई.डी. में धारा केवल एक ही दिशा में प्रवाहित हो सकती है।
  • कोई एल.ई.डी. केवल तभी दीप्तिमान होती है जब इसका धन टर्मिनल (लंबा तार) बैटरी के धन टर्मिनल से और ऋण टर्मिनल (छोटा तार) बैटरी के ऋण टर्मिनल से जोड़ा जाता है।
  • स्विच एक ऐसी सरल युक्ति होती है जिसके द्वारा परिपथ को पूरा किया जा सकता है या भंग किया जा सकता है।
  • किसी बंद विद्युत परिपथ में विद्युत-धारा सेल के धन टर्मिनल से ऋण टर्मिनल की ओर प्रवाहित होती है।
  • किसी विद्युत परिपथ का प्रतीकों के उपयोग से बनाया गया चित्र परिपथ आरेख कहलाता है।
  • वे पदार्थ जिनमें से होकर विद्युत-धारा सरलता से प्रवाहित हो जाती है, वे विद्युत के चालक अथवा सुचालक कहलाते हैं।
  • वे पदार्थ जिनमें से होकर विद्युत-धारा प्रवाहित नहीं हो सकती है वे विद्युत के कुचालक अथवा विद्युतरोधी कहलाते हैं।
Screenshot 2025-09-19 104904 Screenshot 2025-09-19 104939

आइए, और अधिक सीखें

  1. असत्य कथन का चयन कीजिए।
    1. विद्युत परिपथ में स्विच धारा का स्रोत होता है।
    2. परिपथ को पूरा करने अथवा भंग करने में स्विच सहायता करता है।
    3. विद्युत के आवश्यकतानुसार उपयोग में स्विच सहायता करता है।
    4. जब स्विच 'ऑफ' स्थिति में होता है तो इसके टर्मिनलों के मध्य वायु अंतराल रहता है।
  2. चित्र 3.16 में सिरों 'क' एवं 'ख' के मध्य कौन-सा पदार्थ जोड़ने पर लैंप दीप्तिमान नहीं होगा?
  3. Screenshot 2025-09-19 105031
    चित्र 3.16

  4. चित्र 3.17 में यदि एक लैंप का तंतु विखंडित हो जाए तो क्या दूसरा लैंप दीप्तिमान होगा? अपने उत्तर का औचित्य बताइए।
  5. Screenshot 2025-09-19 111805
    चित्र 3.17
  6. विद्युत परिपथ बनाते समय कोई विद्यार्थी संयोजी तारों से विद्युतरोधी आवरण हटाना भूल गया। यदि लैंप और सेल ठीक कार्य कर रहे हों तब भी क्या लैंप दीप्तिमान होगा?
  7. विद्युत परिपथ के घटकों के प्रतीकों का उपयोग करके एक साधारण टॉर्च का परिपथ आरेख बनाइए।
  8. चित्र 3.18 में -
    1. यदि S2 'ऑन' स्थिति में और S1'ऑफ' स्थिति में हो तो कौन-कौन से लैंप दीप्त होंगे?
    2. यदि S2 'ऑफ' स्थिति में और S1'ऑन' स्थिति में हो तो कौन-कौन से लैंप दीप्त होंगे?
    3. यदि S एवं S2दोनों 'ऑन' स्थिति में हो तो कौन-कौन से लैंप दीप्त होंगे?
    4. यदि S एवं S2दोनों 'ऑफ' स्थिति में हो तो कौन-कौन से लैंप दीप्त होंगे?
  9. Screenshot 2025-09-19 111904
    चित्र 3.18
  10. एक विद्यार्थी ने चित्र 3.19 में दर्शाए अनुसार विद्युत परिपथ संयोजित किया। परिपथ को बंद करने के बाद भी लैंप दीप्तिमान नहीं हुआ। इसके क्या संभावित कारण हो सकते हैं? इस दोषपूर्ण प्रचालन के लिए अधिक-से-अधिक कारणों की सूची बनाइए। लैंप के दीप्तिमान न होने के कारण का पता लगाने के लिए आप क्या करेंगे? Screenshot 2025-09-19 111918
    चित्र 3.19
  11. Screenshot 2025-09-19 111828
  12. चित्र 3.20 में दर्शाई गई किस व्यवस्था में स्विच 'ऑन' करने पर भी बल्ब दीप्तिमान नहीं होगा?
  13. Screenshot 2025-09-19 112944
    चित्र 3.20
  14. यदि किसी बैटरी पर '+' एवं '-' चिह्न पढ़े नहीं जा रहे हैं तो इस बैटरी के टर्मिनलों को पहचानने की कोई एक विधि सुझाइए।
  15. आपको छः सेल दिए गए हैं जिन पर क, ख, ग, घ, ङ और च अंकित हैं। इनमें से कुछ कार्य कर रहे हैं और कुछ कार्य नहीं कर रहे हैं। एक क्रियाकलाप सुझाइए जिससे आप यह पहचान सकें कि कौन-कौन से सेल कार्य कर रहे हैं।
    1. आपको जो वस्तुएँ चाहिए उनकी एक सूची बनाइए।
    2. वह कार्यविधि लिखिए जिसका अनुसरण आप करेंगे।
    3. चरण (i) में सूचीबद्ध वस्तुओं का उपयोग करके पहचानिए कि कौन-कौन से सेल काम कर रहे हैं?
  16. . किसी एल.ई.डी. को दीप्तिमान करने के लिए आपको श्रेणी-क्रम में लगे दो सेलों की आवश्यकता होगी। तान्या ने चित्र 3.21 में दर्शाए अनुसार परिपथ बनाया। क्या लैंप दीप्तिमान होगा? यदि नहीं तो संयोजी तारों को सही विन्यास के लिए आरेखित कीजिए।
Screenshot 2025-09-19 112953
चित्र 3.21
Screenshot 2025-09-19 113009

अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ

  • कल्पना कीजिए कि किसी समस्या के कारण आपके क्षेत्र में दो दिनों के लिए विद्युत की आपूर्ति बाधित हो जाती है। अपने दैनिक जीवन की किन-किन क्रियाओं को आप कर पाने में असमर्थ होंगे, उनकी सूची बनाइए।
  • एक सौर-पैनल (चित्र 3.22 क) को विद्युत ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग करते हुए एक खिलौने वाले पंखे (चित्र 3.22 ख) को चलाने के लिए चित्र 3.22 (ग) में दर्शाए अनुसार एक परिपथ बनाइए।
  • Screenshot 2025-09-19 114136
    (क)
    Screenshot 2025-09-19 114147
    (ख)
    Screenshot 2025-09-19 114159
    (ग)
    चित्र 3.22
  • किसी विद्युत-उपकरणों की दुकान पर जाइए। दुकानदार की सहायता से दुकान में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के सेलों की पहचान कीजिए। प्रत्येक सेल के लिए पता लगाइए कि यह किस युक्ति (युक्तियों) में प्रयुक्त होता है (होते हैं)? इस पर एक रिपोर्ट बनाइए।
  • अपने घर में पाई जाने वाली वस्तुओं की सूची तीन शीर्षकों के अंतर्गत बनाइए -
    1. ऐसी वस्तुएँ जो केवल विद्युतरोधी हैं।
    2. ऐसी वस्तुएँ जो केवल विद्युत की चालक हैं।
    3. ऐसी वस्तुएँ जिनके कुछ भाग विद्युतरोधी हैं और कुछ भाग विद्युत के चालक हैं।
विज्ञान एवं समाज
विद्युत-सेल अथवा बैटरी विद्युत ऊर्जा के छोटे सुवाह्य स्रोत हैं जो कुछ विद्युत युक्तियों के उपयोग को अधिक सुविधाजनक बना देते हैं। विभिन्न उद्देश्यों के लिए ये सेल अथवा बैटरियाँ विविध आकृतियों और आमापों में मिलती हैं, जैसे- टॉर्च लाइट, दीवार घड़ी, रिमोट, खिलौनों आदि के लिए बेलनाकार सेल तथा कलाई-घड़ियों, श्रवण सहायक यंत्रों आदि के लिए बटन सेल एवं मोबाइल फोन, लैपटॉप, विद्युत वाहनों आदि के लिए पुनरावेशीय सेल। Screenshot 2025-09-19 114212
Screenshot 2025-09-19 114218