04 :
धातुओं और अधातुओं का संसार
यशवंत और आनंदी राजस्थान के एक गाँव में रहते हैं। उनके विद्यालय में उन्हें एक परियोजना कार्य दिया गया है जिसमें उन्हें धातुओं का कार्य करने वाले शिल्पकारों के विषय में जानना है। वे स्थानीय लोहार (लोहे का कार्य करने वाला व्यक्ति) के पास जाने की योजना बनाते हैं। यशवंत और आनंदी अपने दादा जी से भी साथ चलने का आग्रह करते हैं (चित्र 4.1)। वे दोनों यह जानने के लिए बहुत उत्सुक हैं कि लोहार दैनिक जीवन के उपयोग में आने वाली विभिन्न वस्तुओं को कैसे बनाते हैं! वे दोनों एक वृद्ध शिल्पकार सुदर्शन चाचा से वार्तालाप करते हैं।
यशवंत - आप सामान्यतः कौन-सी वस्तुएँ बनाते हैं? सुदर्शन - सामान्यतः हम प्रतिदिन उपयोग में आने वाली वस्तुएँ, जैसे- तवा, बाल्टी, चिमटा एवं कृषि उपकरण यथा फावड़ा, कुल्हाड़ी, खुर्पी, जेली इत्यादि बनाते हैं। आनंदी - ये वस्तुएँ किस सामग्री से बनती हैं?
सुदर्शन - हम इन वस्तुओं को बनाने के लिए लोहे का उपयोग करते हैं। हम हत्था इत्यादि बनाने के लिए आवश्यकतानुसार लकड़ी का भी उपयोग करते हैं। साथ ही हम भट्टियों में लोहे को गरम करने के लिए कोयले का उपयोग करते हैं।
सुदर्शन चाचा भट्टी में लोहे के टुकड़े को गरम कर रहे हैं। लोहा गरम होकर सुर्ख लाल हो गया है। वह इसे हथौड़े से जोर-जोर से पीटना आरंभ करते हैं। आनंदी आश्चर्यचकित होकर पूछती है- आप इसे क्यों पीट रहे हैं? सुदर्शन - मैं इसे कुल्हाड़ी का आकार देने के लिए पीट रहा हूँ। आनंदी - वाह! लोहे के एक टुकड़े को पीटकर चपटा आकार दिया जा सकता है! क्या हम अन्य धातुओं के साथ भी ऐसा कर सकते हैं? आपके पास भी कुछ ऐसे प्रश्न होंगे। आइए, अन्वेषण करें कि धातुओं से हम और क्या-क्या बना सकते हैं।
4.1 सामग्रियों के गुण
4.1.1 आघातवर्धनीयता
क्रियाकलाप 4.1 - आइए, अन्वेषण करें
! सावधानी- यह क्रियाकलाप अपने शिक्षक या किसी वयस्क के निर्देशन में कीजिए।
- कुछ सामग्रियाँ एकत्रित कीजिए, जैसे- ताँबे और ऐलुमिनियम के कुछ अनुपयोगी टुकड़े, लोहे की एक कील, कोयले का एक टुकड़ा, मटर के दाने के आकार का सल्फर का एक टुकड़ा और लकड़ी का एक टुकड़ा।
- कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा में दिए गए अध्याय 'पदार्थ हमारे चारों ओर' का स्मरण कीजिए और एकत्रित की गई वस्तुओं के स्वरूप का अवलोकन कीजिए। क्या वे चमकदार हैं? साथ ही ध्यान दीजिए कि वे कठोर हैं या नरम? अपने अवलोकनों को तालिका 4.1 में अभिलेखित कीजिए।
- अब इनमें से प्रत्येक वस्तु को एक-एक करके किसी कठोर सतह पर रखिए और हथौड़े से पीटिए।
- आपको क्या लगता है कि क्या होगा? क्या वस्तुएँ कुछ चपटी हो जाएँगी अथवा टुकड़ों में टूट जाएँगी?
- अपने अवलोकनों को तालिका 4.1 में अभिलेखित कीजिए।
नोट - बाजार में सल्फर प्रायः गंधक के नाम से मिलता है।
तालिका 4.1 - विभिन्न वस्तुओं अथवा सामग्रियों का स्वरूप, कठोरता एवं उन पर हथौड़े का प्रभाव
| क्र.सं. | वस्तु/सामग्री | प्रगटन (द्युतिमय/द्युतिहीन) | कठोर/नरम | हथौड़े से मारने पर प्रभाव (चपटा होना/टुकड़ों में टूटना) |
|---|---|---|---|---|
| 1. | ताँबे का टुकड़ा | |||
| 2. | ऐलुमिनियम का टुकड़ा | |||
| 3. | लोहे की कील | |||
| 4. | कोयले का टुकड़ा | |||
| 5. | सल्फर का टुकड़ा (मटर के दाने के आकार का) | |||
| 6. | लकड़ी का टुकड़ा |
तालिका 4.1 का विश्लेषण कीजिए। उन वस्तुओं की पहचान कीजिए जो द्युतिमय और कठोर हैं। आप अवलोकन करेंगे कि ताँबे, ऐलुमिनियम और लोहे से बनी वस्तुएँ द्युतिमय और कठोर हैं। धातुओं द्वारा प्रदर्शित द्युति को ही धात्विक द्युति कहा जाता है। ताँबे, ऐलुमीनियम और लोहे जैसी सामग्रियाँ धातु कहलाती हैं जबकि कोयला, सल्फर और लकड़ी द्युतिहीन हैं और धातुओं के समान कठोर नहीं हैं।
क्या सभी धातुएँ कठोर और ठोस होती हैं? वास्तविकता में नहीं। कुछ धातुएँ जैसे कि सोडियम और पोटैशियम इतनी नरम होती हैं कि वे चाकू से काटी जा सकती हैं। पारा एक धातु है जिसे आपने तापमापी में देखा होगा। यह कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में रहता है। कक्षा 6 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय 7 'ताप एवं उसका मापन' का स्मरण कीजिए। हथौड़े से पीटने पर कौन-सी वस्तुएँ सपाट हो गईं हैं?
आपने अवलोकन किया होगा कि कुछ वस्तुएँ जैसे कि ताँबे का टुकड़ा, ऐलुमिनियम का टुकड़ा और लोहे की कील, पीटने पर चपटे हो जाते हैं जबकि अन्य वस्तुएँ व सामग्रियाँ भिन्न व्यवहार करती हैं। सामग्रियों का वह गुण जिसके द्वारा उन्हें पीटकर पतली चादरों में परिवर्तित किया जा सकता है, आघातवर्धनीयता कहलाता है। अधिकांश धातुओं में यह गुण होता है। क्या आप धातुओं से बनी चादरों के कुछ उदाहरण दे सकते हैं? आपने कुछ मिठाइयों पर चाँदी का वर्क और खाद्य वस्तुओं को लपेटने हेतु प्रयुक्त ऐलुमिनियम पत्रक को देखा होगा। ये इन धातुओं में विद्यमान गुण आघातवर्धनीयता के कारण बनाए जाते हैं। सोना और चाँदी सबसे अधिक आघातवर्धनीय धातुएँ होती हैं।
कोयले अथवा सल्फर के टुकड़े ऐसा व्यवहार नहीं दर्शाते हैं। वे छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं और भंगुर कहलाते हैं। इसके विपरीत लकड़ी ना तो चपटी चादर में परिवर्तित होती है और ना ही टुकड़ों में टूटती है। अतः लकड़ी न तो आघातवर्धनीय है और न ही भंगर है।
समग्र दृष्टि
भारत की सभ्यता की उन्नति में लोहे का प्रभाव
कक्षा 6 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक समाज का अध्ययनः भारत और उसके आगे में आपने 'हड़प्पावासियों' के विषय में पढ़ा होगा। वे ताँबे और सोने जैसी धातुओं का उपयोग करना जानते थे। वे इन धातुओं का उपयोग पात्रों की निर्मिति से लेकर आभूषणों तक अनेक प्रकार की वस्तुएँ बनाने हेतु करते थे। वर्तमान समय में लोहा एक महत्वपूर्ण धातु है जिसका उपयोग आप अपने आस-पास बहुतायत में देखते हैं। परंतु हड़प्पावासियों द्वारा लोहे के उपयोग का कोई प्रमाण शायद ही उपलब्ध हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि लोहे को दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों के उपयोग में आने में बहुत समय लगा। तथापि बाद के समय में जब लोहे का उपयोग प्रमुखता से होने लगा तो इसने भारतीय सभ्यता की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उदाहरण के लिए, कृषि उपकरण जैसे लोहे से बने हल अपनी सुदृढ़ता के कारण पहले उपयोग किए जाने वाले उपकरणों से अधिक श्रेष्ठ थे। सामान्यतः यह माना जाता रहा है कि ताँबे की खोज लोहे से पूर्व हुई। इसका संभावित कारण क्या हो सकता है?
4.1.2 तन्यता
आप धातु के तारों का उपयोग कहाँ देखते हैं?
आपने विद्युत परिपथ व्यवस्था (विद्युत फिटिंग) में ताँबे या ऐलुमिनियम जैसी धातुओं के तार देखे होंगे। कुछ आभूषण जैसे चूड़ियाँ, गले का हार, कानों के झुमके इत्यादि भी धातु के तारों द्वारा बनाए जाते हैं। धातु के तार विभिन्न संगीत वाद्ययंत्रों जैसे वीणा, सितार, वायलिन, गिटार इत्यादि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सामग्रियों का वह गुण जिसके द्वारा उन्हें तार में खींचा जा सकता है, तन्यता कहलाता है। तन्यता का यह गुण मुख्य रूप से धातुओं में ही पाया जाता है।
सोना इतना तन्य है कि इसके एक ग्राम से दो किलोमीटर लंबा तार खींचा जा सकता है!
धातुओं की तन्यता के कारण ही धातु के तारों से चाय छानने की छलनी बनाई जाती है।
प्रश्न------------------------------------?
उत्तर - बस थोड़ा दूध डालें। -
प्रश्न------------------------------------?
उत्तर - क्योंकि बिल्ली के दाँत टेढ़े थे।
प्रश्न------------------------------------?
उत्तर - घबराइए मत, मेरे पास तौलिया है।
प्रश्न------------------------------------?
उत्तर- 42
(कृपया अधिक रोचक प्रश्न पूछिए किंतु पूर्वानुमानित प्रश्न न पूछें जैसे `` 32 + 10 कितना होता है?" अथवा "जीवन, ब्रह्मांड इत्यादि का क्या मर्म है?")