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हमारे आस-पास के परिवर्तन भौतिक एवं रासायनिक

img आधे घंटे पूर्व मैंने यहाँ बर्फ का एक टुकड़ा रखा था। अब यह जल बन गया है।

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मैंने कल इस गुलाब के पौधे पर जो कली देखी थी आज वह फूल बन गई है।

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इस बोतल में रखा ठंडा जल अब ठंडा नहीं रहा।

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कल मैंने इस केले पर कुछ भूरे रंग के धब्बे देखे थे। आज वे और अधिक हो गए हैं तथा केले में से तीव्र गंध भी आ रही है।

सभी विद्यार्थी कुछ परिवर्तनों का वर्णन कर रहे हैं। वे किस प्रकार के परिवर्तनों के विषय में वार्तालाप कर रहे हैं?

क्रियाकलाप 5.1 - आइए, सोचें और विचार करें

आपने अपने आस-पास अनेक परिवर्तनों का अवलोकन किया होगा। इनमें से कुछ परिवर्तन तालिका 5.1 में सूचीबद्ध किए गए हैं। आप यह देख सकते हैं कि प्रत्येक स्थिति में कुछ परिवर्तन हो रहे हैं। प्रत्येक स्थिति के इन परिवर्तनों पर कुछ क्षणों के लिए विचार कीजिए और तालिका 5.1 में अपने अवलोकन अभिलेखित कीजिए।


क्र.सं. परिवर्तन अवलोकन
1. बर्फ का पिघलना
2. सब्जियों का कटना
3. जल का उबलना
4. मक्का से पॉपकॉर्न बनना
5. कागज का टुकड़ों में कटना
6. चुकंदर के रस का जल में मिलना
7. लकड़ी का जलना
8. गीले वस्त्रों का सूखना
9. गूंथे हुए आटे से छोटी-छोटी लोइयाँ बनना
10. आटे की लोइयों से रोटियाँ बेलना
11. कुछ अन्य

आपने ध्यान दिया होगा कि ये परिवर्तन पदार्थ या वस्तु के आकार, आकृति, गंध, रंग या इनके अन्य गुणों में हो सकते हैं। क्या आप अपने आस-पास होने वाले अन्य परिवर्तनों के विषय में विचार कर सकते हैं? उन परिवर्तनों की एक सूची भी बनाइए।

हम अपने आस-पास हो रहे परिवर्तनों को दृष्टि, श्रवण, स्पर्श, गंध व स्वाद जैसी संवेदनाओं की सहायता से अनुभव करते हैं।

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क्या हम इन परिवर्तनों को विभिन्न श्रेणियों में व्यवस्थित कर सकते हैं?

आइए, इस प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास करें।

5.1 किसी पदार्थ के स्वरूप में परिवर्तन हो सकता है परंतु मूल रूप समान रहता है !

क्रियाकलाप 5.2 - आइए, बनाएँ और चर्चा करें

क. कागज से कुछ वस्तुएँ बनाना

* कागज के कुछ पृष्ठ लीजिए तथा उन्हें मोड़कर विभिन्न वस्तुएँ बनाइए (चित्र 5.1)।

* क्या कागज की बनी वस्तुओं की तहों को खोलकर आप पुनः पहले जैसा कागज प्राप्त कर सकते हैं?

ख. गुब्बारे से खेलना

* एक गुब्बारा लीजिए और उसे फुलाइए। अब अपनी पकड़ ढीली करते हुए गुब्बारे में से वायु बाहर निकलने दीजिए। img
चित्र 5.1 - कागज से बनी हुई वस्तुएँ

* क्या आपको गुब्बारा पुनः मूल स्थिति में प्राप्त होता है?

* एक अन्य गुब्बारा लेकर उसे फुलाइए और उसके मुँह को मजबूती से पकड़े रहिए। अब इसमें एक सुई चुभाइए।

सावधानी- पिन का प्रयोग करते समय सावधान रहिए।

* क्या होता है? क्या आप गुब्बारे को पुनः उसकी मूल स्थिति में प्राप्त कर सकेंगे?

ग. चॉक के टुकड़े का चूरा करना

* चॉक के एक छोटे टुकड़े को पीसकर चूरा कीजिए।

* क्या आप इस चूरे से पुनः चॉक प्राप्त कर सकते हैं?

क, ख और ग में सूचीबद्ध किए गए परिवर्तनों में क्या कोई समानता है?

इन परिवर्तनों के दौरान सामग्रियाँ, जैसे- कागज, गुब्बारे की रबर एवं चॉक अपने मूल रूप में रहते हैं। तथापि उनका स्वरूप जैसे कि उनका माप अथवा उनकी आकृति परिवर्तित हो सकती हैं। कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा में दिए गए तथ्य का स्मरण कीजिए जिसमें व्याख्या की गई है कि जल विभिन्न अवस्थाओं यथा ठोस, द्रव और गैस के रूप में विद्यमान हो सकता है। यह एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तित भी हो सकता है।

उपरोक्त सभी स्थितियों में यद्यपि हम वस्तुओं के स्वरूप में परिवर्तन का अवलोकन करते हैं परंतु किसी नए पदार्थ का निर्माण नहीं होता है। ऐसे परिवर्तन जिनमें केवल भौतिक गुण, जैसे- आकार, आमाप और पदार्थ की अवस्थाओं में परिवर्तन होता है वे भौतिक परिवर्तन कहलाते हैं।

आइए, विभिन्न प्रकार के परिवर्तनों के विषय में अन्वेषण करें।

5.2 जब पदार्थ के स्वरूप में परिवर्तन होता है तथा वह अपने मूल रूप में नहीं रहता !

क्रियाकलाप 5.3- आइए, अन्वेषण करें

  • काँच के दो गिलास या दो छोटी पारदर्शी बोतलें लीजिए। उन्हें 'क' एवं 'ख' से चिह्नित कीजिए।
  • चिह्नित गिलास 'क' का एक-चौथाई भाग नल के जल से भरिए और चिह्नित गिलास 'ख' का एक-चौथाई भाग चूने के पानी से भरिए।
  • अब भिन्न-भिन्न नलियों की सहायता से एक-एक करके प्रत्येक गिलास में वायु फूंकते हुए अवलोकन कीजिए।
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! सावधानी - ध्यान रखिए कि ऐसा करते समय जल या चूने का पानी आपके मुँह में न जाए।

क्या आप कोई परिवर्तन देखते हैं?

गिलास 'क' में वायु फूंकने पर बुलबुले बनते हैं और जल में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन दिखाई नहीं देता है। गिलास 'ख' में वायु फैंकने पर चूने के पानी में बुलबुले बनते हैं और चूने का पानी दूधिया हो जाता है। यदि हम कुछ समय के लिए इसे स्थिर छोड़ दें तो श्वेत पदार्थ गिलास की तली में बैठने लगता है जो किसी नए पदार्थ के बनने को दर्शाता है। ऐसे परिवर्तन जिनमें एक अथवा एक से अधिक नए पदार्थों का निर्माण होता है, वे रासायनिक परिवर्तन कहलाते हैं। रासायनिक परिवर्तन द्वारा नए पदार्थ बनने की प्रक्रिया को रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं। इस परिस्थिति में गिलास में वायु फूंकने पर उसमें उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड चूने के पानी के साथ अभिक्रिया कर नया श्वेत अघुलनशील पदार्थ (कैल्सियम कार्बोनेट) बनाती है जिसके कारण चूने का पानी दूधिया दिखाई देता है। इस अभिक्रिया में थोड़ा जल भी बनता है। इस प्रकार से नए पदार्थ का बनना रासायनिक परिवर्तन को दर्शाता है। रासायनिक अभिक्रियाओं को संक्षिप्त रूप में रासायनिक समीकरण के द्वारा दर्शाया जाता है।

कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड +कार्बन डाइऑक्साइड-> कैल्सियम कार्बोनेट + जल

कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड ->(चूने का पानी)

कैल्सियम कार्बोनेट->(श्वेत अघुलनशील पदार्थ)

चूने के पानी के दूधिया होने की अभिक्रिया को कार्बन डाइऑक्साइड के परीक्षण के लिए उपयोग में लाया जाता है।

आइए, हम अपने रसोईघर में उपस्थित कुछ पदार्थों का उपयोग कर एक अन्य क्रियाकलाप करके देखते हैं।

क्रियाकलाप 5.4- आइए, प्रयोग करें

* एक परखनली में एक चम्मच सिरका या नींबू का रस लीजिए।

* उसमें एक चुटकी बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) मिलाइए।

* आपने क्या अवलोकन किया?

* आप बुदबुदाहट की ध्वनि के साथ गैस के बुलबुले बनते देखेंगे।

* चित्र 5.3 (क) में दर्शाए अनुसार इस गैस को एक अन्य परखनली में लिए गए ताजा चूने के पानी में प्रवाहित कीजिए।

* आपने क्या अवलोकन किया?

* चूने का पानी दूधिया हो जाता है। सिरका और बेकिंग सोडा मिश्रित करने पर बनने वाली गैस के विषय में आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?

उपरोक्त क्रियाकलाप कार्बन डाइऑक्साइड गैस के बनने की प्रक्रिया को प्रदर्शित करता है।

इस क्रियाकलाप को आप चित्र 5.3 (ख) में दर्शाए अनुसार परखनली के स्थान पर उपयोग की गई दो छोटी बोतलों एवं एक नम्य नली की सहायता से भी कर सकते हैं।

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चित्र 5.3
चूँकि इस क्रियाकलाप में नए पदार्थ कार्बन डाइऑक्साइड का निर्माण होता है। अतः हम कह सकते हैं कि यहाँ रासायनिक परिवर्तन होता है जिसे हम निम्न प्रकार से भी प्रदर्शित कर सकते हैं-

सिरका +बेकिंग सोडा -> कार्बन डाइऑक्साइड + अन्य पदार्थ

इस क्रियाकलाप को बेकिंग सोडा तथा जल के साथ दोहराइए। क्या आप गैस के बुलबुले बनते हुए देखते हैं? क्या यह एक भौतिक परिवर्तन है या रासायनिक परिवर्तन है?

5.3 रासायनिक परिवर्तनों को प्रदर्शित करती कुछ अन्य प्रक्रियाएँ

5.3.1 जंग लगना

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चित्र 5.4
आपने पूर्व अध्याय 'धातुओं और अधातुओं का संसार' में पढ़ा था कि लोहे में जंग लगने की प्रक्रिया के दौरान लोहे पर भूरे रंग का निक्षेप बनता है जिसे जंग कहा जाता है। इस प्रकार जंग लगना भी एक रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि इसमें एक नए पदार्थ आयरन ऑक्साइड का निर्माण होता है (चित्र 5.4)

5.3.2 दहन

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चित्र 5.5- जलती हुई मैग्नीशियम रिबन
पूर्व अध्याय 'धातुओं और अधातुओं का संसार' में मैग्नीशियम रिबन के जलने वाले क्रियाकलाप का स्मरण कीजिए (चित्र 5.5)। क्या आप पूर्वानुमान लगा सकते हैं कि यह परिवर्तन भौतिक है या रासायनिक?

जब मैग्नीशियम रिबन को जलाया जाता है तो एक नया पदार्थ मैग्नीशियम ऑक्साइड बनता है। अतः मैग्नीशियम रिबन का जलना भी एक रासायनिक परिवर्तन है। हम अवलोकन करते हैं कि इस प्रक्रिया में नए पदार्थ के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा और प्रकाश भी उत्पन्न होता है।

मैग्नीशियम रिबन के जलने की प्रक्रिया को निम्नलिखित समीकरण द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है- मैग्नीशियम + ऑक्सीजन मैग्नीशियम ऑक्साइड + ऊष्मा + प्रकाश

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर ऊष्मा एवं प्रकाश उत्पन्न करता है, दहन कहलाती है। जिन पदार्थों का दहन होता है वे दहनशील पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरण के लिए लकड़ी, कागज, कपास, मिट्टी का तेल इत्यादि दहनशील पदार्थ हैं।

आइए, पता लगाएँ कि क्या दहन के लिए ऑक्सीजन की उपस्थिति अनिवार्य है?

क्रियाकलाप 5.5- आइए, अन्वेषण करें

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5.6
  • दो भिन्न-भिन्न पेट्री डिशों पर सावधानीपूर्वक दो समान मोमबत्तियाँ जलाइए।
  • इनमें से किसी एक को चित्र 5.6 में दर्शाए अनुसार काँच के गिलास से ढकिए।
  • दोनों स्थितियों में मोमबत्ती की लौ के साथ क्या होता है?
हम अवलोकन करते हैं कि जिस मोमबत्ती को ढका नहीं गया [चित्र 5.6 (क)], वह जलती रहती है जबकि जिस मोमबत्ती को काँच के गिलास से ढका गया [चित्र 5.6 (ख)] वह कुछ समय बाद जलना बंद कर देती है। ऐसा क्यों होता है?

चूँकि गिलास से ढकी मोमबत्ती में वायु की निरंतर आपूर्ति नहीं होती है, अतः लौ जल्दी बुझ जाती है। वायु का घटक ऑक्सीजन दहन में सहायक होता है। मोमबत्ती पर पलट कर रखे गए काँच के गिलास के अंदर कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति से इसकी पुष्टि की जा सकती है। आप कार्बन डाइऑक्साइड गैस की उपस्थिति का परीक्षण कैसे कर सकते हैं?

आप पेट्री डिश में थोड़ी मात्रा में चूने का पानी डालकर कार्बन डाइऑक्साइड गैस का परीक्षण कर सकते हैं। आप अवलोकन करेंगे कि यह दूधिया हो जाता है। कार्बन डाइऑक्साइड गैस मोम से प्राप्त कार्बन और वायु में उपस्थित ऑक्सीजन की अभिक्रिया द्वारा बनती है। अन्य शब्दों में कहें तो दहन के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

विज्ञान एवं समाज

यदि किसी व्यक्ति के वस्त्रों में आग लग जाए तो आग बुझाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? व्यक्ति के चारों ओर एक कंबल या कोई वस्त्र लपेट दीजिए। इससे वायु की आपूर्ति बंद हो जाती है और आग बुझ जाती है।

सावधानी- संश्लेषित रेशों से बने कंबल अथवा ऐसे किसी वस्त्र का उपयोग आग बुझाने के लिए कदापि नहीं करना चाहिए क्योंकि ये पिघल सकते हैं और त्वचा से चिपक सकते हैं।

🔬 विज्ञान एवं समाज

यदि किसी व्यक्ति के वस्त्रों में आग लग जाए तो आग बुझाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
व्यक्ति के चारों ओर एक कंबल या कोई वस्त्र लपेट दीजिए। इससे वायु की आपूर्ति बंद हो जाती है और आग बुझ जाती है।

⚠️ सावधानी — सिंथेटिक रेशों से बने कंबल अथवा ऐसे किसी वस्त्र का उपयोग आग बुझाने के लिए कदापि नहीं करना चाहिए क्योंकि ये पिघल सकते हैं और त्वचा से चिपक सकते हैं।


रोचक तथ्य

प्रकृति के आश्चर्य- आपने संध्याकाल में प्रकाश उत्सर्जित करते हुए कुछ कीटों को बगीचे या खेत में देखा होगा। इन कीटों को जुगनू कहा जाता है और इनका प्रकाश रासायनिक परिवर्तन द्वारा उत्पन्न होता है। जीवों में इस प्रकार की ऊष्मारहित प्रकाश-उत्पत्ति को जीवसंदीप्ति (बायोलुमिनेसेंस) कहा जाता है। img

क्या वायु की उपस्थिति दहन के लिए अनिवार्य है?

हमने ऊपर सीखा कि दहन के लिए दहनशील पदार्थ और ऑक्सीजन आवश्यक है। हम यह भी जानते हैं कि कागज एक दहनशील पदार्थ है परंतु इसे वायु में कितनी भी देर रखा जाए पर फिर भी इसका दहन नहीं होता है। दहन प्रारंभ करने के लिए और क्या आवश्यक है?

आइए, इसके विषय में जानें!

क्रियाकलाप 5.6- आइए, जाँच करें

सावधानी - यह क्रियाकलाप शिक्षक अथवा किसी वयस्क के निर्देशन में कीजिए। img
5.7 (क)
  • चिमटे से कागज के एक टुकड़े को पकड़िए और इसके पास जलती हुई माचिस की तीली लाइए। यह तेजी से आग पकड़ लेता है। क्या हम यह कह सकते हैं कि दहन-प्रक्रिया प्रारंभकरने के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है?
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    5.7 (क)
  • कागज का दूसरा टुकड़ा लीजिए। सूर्य की किरणों को आवर्धक लेंस की सहायता से कागज पर केंद्रित कर एक छोटा और चमकीला बिंदु बनाइए जैसा कि चित्र 5.7 (क) में दर्शाया गया है। इसे कुछ समय के लिए वहीं रखा रहने दीजिए।

आपने क्या अवलोकन किया?

हम अवलोकन करते हैं कि कागज से धुआँ निकलना आरंभहो जाता है और यह जलने लगता है [चित्र 5.7 (ख)]। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि किसी पदार्थ का आग के बिना भी दहन हो सकता है। हम इस परिवर्तन की व्याख्या कैसे कर सकते हैं?

कागज पर सूर्य की किरणों को केंद्रित करने से यह गरम हो जाता है। समय के साथ कागज का तापमान बढ़ने लगता है। कुछ समय पश्चात कागज इतना गरम हो जाता है कि वह जलने लगता है। वह न्यूनतम तापमान जिस पर कोई पदार्थ आग पकड़ता है उसे प्रज्वलन तापमान कहा जाता है। चूँकि जलती हुई माचिस की तीली का तापमान कागज के प्रज्वलन तापमान से अधिक है अतः वह तत्काल आग पकड़ लेता है।

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चित्र 5.8
अतः हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि दहन प्रक्रिया के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना अनिवार्य है (चित्र 5.8)
  1. एक दहनशील पदार्थ (जिसे ईंधन भी कहा जाता है)
  2. ऑक्सीजन
  3. ऊष्मा

5.4 क्या भौतिक और रासायनिक परिवर्तन एक ही प्रक्रिया में हो सकते हैं?

मोमबत्ती जलाने पर क्या परिवर्तन होते हैं? आइए, जानें!

क्रियाकलाप 5.7- सोचिए, चर्चा कीजिए और साझा कीजिए

चित्र 5.9 को देखिए। इसके साथ ही विश्लेषण कीजिए कि विद्यार्थी जलती हुई मोमबत्ती के विषय में क्या चर्चा कर रहे हैं।

आप क्या सोचते हैं?

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चित्र 5.9

मोम पिघलता है और वाष्पीकृत होता है...

मुझे लगता है कि मोम के जलने से नए पदार्थ बनते हैं...

संभावना है कि मोमबत्ती की बत्ती/धागा तरल मोम को उपर खींच लेती है....

मोम पिघलता है, बहता है और फिर भिन्न-भिन्न आकार में जम जाता है.....

हो सकता है....

मोमबत्ती का मोम पिघलकर बत्ती में ऊपर चढ़ने लगता है और लौ की ऊष्मा के कारण यह वाष्पित हो जाता है। मोम की वाष्प जलकर मोमबत्ती की लौ उत्पन्न करती है। मोम का पिघलना, जमना और वाष्पीकृत होना ये सभी भौतिक परिवर्तन हैं। वहीं वाष्प का जलना एक रासायनिक परिवर्तन है। इससे पता चलता है कि मोमबत्ती के जलने पर भौतिक परिवर्तन और रासायनिक परिवर्तन दोनों एक साथ होते हैं।

वैज्ञानिक से परिचय

img मोमबत्ती लंबे समय से अनेक वैज्ञानिकों के लिए जिज्ञासा का विषय रही है। इनमें माइकल फैराडे भी सम्मिलित हैं। इन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं।
19वीं शताब्दी के मध्य फैराडे ने मोमबत्ती का रासायनिक इतिहास पर अपने व्याख्यानों की एक श्रृंखला प्रस्तुत की। फैराडे का मानना था कि वैज्ञानिक अध्ययन के लिए मोमबत्ती एक उपयुक्त वस्तु है। इसके द्वारा ही उन्होंने पिघलने, वाष्पीकरण और दहन जैसी विभिन्न भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं के मध्य होने वाले अंतर पर चर्चा की। माइकल फैराडे

5.5 क्या परिवर्तन स्थायी हैं?

जब किसी वस्तु में परिवर्तन हो जाता है तो क्या हम उसे पुनः उसके मूल स्वरूप में ला सकते हैं?
क्रियाकलाप 5.8 - आइए, सोचें

अब तक हमने जिन परिवर्तनों पर चर्चा की है या जिनके विषय में वार्तालाप किया है उन पर पुनः विचार कीजिए। इनमें से हम किस वस्तु या पदार्थ को पुनः उसी स्वरूप में वापस ला सकते हैं जिस रूप से हमने क्रियाकलाप आरंभ किया था? अपने अवलोकनों को तालिका 5.2 में अभिलेखित कीजिए।
तालिका 5.2- क्या परिवर्तनों को उत्क्रमित किया जा सकता है?

क्र.सं. परिवर्तन क्या पदार्थ को मूल स्थिति में पुनः लाया जा सकता है (हाँ/नहीं)
1. बर्फ के टुकड़ों का पिघलना हाँ
2. सब्जियों का कटना नहीं
3. जल का उबलना हाँ
4. मक्का से पॉपकॉर्न बनना नहीं
5.
...
12.

जिस वस्तु या पदार्थ से हमने क्रियाकलाप आरंभ किया था उसका पुनः उसके मूल स्वरूप में आना यह दर्शाता है कि हमारे द्वारा किए गए परिवर्तनों को उत्क्रमित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, जब बर्फ पिघल जाती है तो इसे पुनः बर्फ में परिवर्तित किया जा सकता है। इसी प्रकार जब जल वाष्पित हो जाता है तो इस वाष्प को संघनित कर इसे पुनः जल में परिवर्तित किया जा सकता है। तथापि कुछ परिवर्तनों को उत्क्रमित नहीं किया जा सकता है क्योंकि परिवर्तन के बाद हम पुनः मूल वस्तु या पदार्थ प्राप्त नहीं कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कटी हुई सब्जियाँ अपने मूल स्वरूप में नहीं लौट सकती हैं। इसी प्रकार पॉपकॉर्न बनाने के पश्चात इसे पुनः मूल अवस्था में नहीं लाया जा सकता है। इस प्रकार हम आस-पास के परिवर्तनों का समूहीकरण इस आधार पर कर सकते हैं ऐसे परिवर्तन जो उत्क्रमित हो सकते हैं तथा ऐसे परिवर्तन जो उत्क्रमित नहीं हो सकते हैं।

5.6 क्या सभी परिवर्तन वांछनीय होते हैं?

हमारे दैनिक जीवन में अनेक उपयोगी परिवर्तन होते हैं। उदाहरण के लिए दूध का दही बनना, फलों का पकना, फलों को काटना और भोजन पकाना। ये सभी वांछनीय परिवर्तन हैं। क्या आप अपने चारों ओर होने वाले कुछ अन्य वांछनीय परिवर्तनों के विषय में सोच सकते हैं? इसके विपरीत कुछ परिवर्तन अवांछनीय भी होते हैं। उदाहरणतः लोहे में जंग लगना या भंडारण के दौरान खाद्य पदार्थ का क्षय होना। एक अवांछनीय परिवर्तन कुछ अन्य परिस्थितियों में वांछनीय भी हो सकता है। उदाहरणतः भोजन का अपघटन जो खाद्य अपशिष्ट को खाद में परिवर्तित करने में बहुत लाभदायक होता है। मानवीय क्रियाकलापों के कारण वर्षों से हो रहे कुछ परिवर्तनों का पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है। उदाहरण के लिए कारों, रेलों, हवाई जहाजों आदि में ईंधन की बढ़ती खपत वातावरण में दिन-प्रतिदिन कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ा रही है। दीवारों, दरवाजों, उपस्कर (फर्नीचर) आदि पर रंग-रोगन सूखने के दौरान वाष्पीकरण की प्रक्रिया से अनेक पदार्थ निकलते हैं जिससे वायुमंडलीय प्रदूषण होता है।

5.7 धीमी गति से होने वाले कुछ प्राकृतिक परिवर्तन

5.7.1 चट्टानों का अपक्षय

क्या आपने चित्र 5.10 (क) में दर्शाए अनुसार पहाड़ों के धरातल पर रेत, मृदा और पत्थरों के ढेर देखे हैं। इन्हें तलछट कहा जाता है। ये कैसे बने हैं? ये उन भौतिक परिवर्तनों द्वारा बनते हैं जो बड़ी चट्टानों को छोटे टुकड़ों में तोड़ देते हैं। जलवायुगत परिस्थितियों के कारण तापमान में परिवर्तन, पेड़ों की बढ़ती जड़ें और चट्टानों की दरारों के भीतर जल के जमने से भी वे चट्टानें छोटे टुकड़ों में टूट सकती हैं।

जल और जल में उपस्थित रसायन भी चट्टानों के साथ अभिक्रिया कर सकते हैं और उनकी संरचना में रासायनिक परिवर्तन कर सकते हैं। रासायनिक परिवर्तन का ऐसा एक उदाहरण चित्र 5.10 (ख) में दर्शाया गया है। यहाँ बेसाल्ट में लोहा पाया जाता है। यह मूल रूप से काले रंग की चट्टान होती है। इस पर रासायनिक परिवर्तनों के कारण लाल रंग की परत जम जाती है। यह लाल रंग आयरन ऑक्साइड के कारण होता है जो चट्टानों के लंबे समय तक जल अथवा जल-वाष्पयुक्त वायु के संपर्क में आने से बनता है। चट्टानों में होने वाले इन भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों को सामूहिक रूप से अपक्षय कहा जाता है जिससे अंततः मृदा का निर्माण होता है।

चित्र 5.10- (क) चट्टान के धरातल पर तलछट चित्र 5.10 (ख) तलछट की लाल परत img

5.7.2 अपरदन

क्या आपने नदी के तल पर अथवा झीलों में महीन रेत को एकत्रित होते हुए देखा है? यह रेत तब बनती है जब चट्टान, मृदा, कंकड़ और तलछट टूटकर वायु और बहते जल जैसी प्राकृतिक शक्तियों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले जाते हैं। इस प्रक्रिया को अपरदन कहते हैं।

भूस्खलन के दौरान होने वाला अपरदन एक भौतिक परिवर्तन का उदाहरण है। नदी में स्थित चट्टानें और कंकड़ प्रायः बहते जल से लगातार होने वाले कटाव के कारण चिकने दिखाई देते हैं। जब जल अथवा वायु की गति कम हो जाती है तो अपरदन के द्वारा ले जाए गए पदार्थ नीचे बैठ जाते हैं जैसा कि झीलों एवं महासागरों में होता है। ये तलछट समय के साथ कठोर हो जाते हैं और इनमें नई चट्टानें बन जाती हैं। इनमें से अधिकतर परिवर्तन हजारों वर्षों में होते हैं और ये उत्क्रमित नहीं किए जा सकते हैं।

संक्षेप में

  • जब किसी पदार्थ या वस्तु के भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है परंतु कोई नया पदार्थ नहीं बनता है तो ऐसे परिवर्तन भौतिक परिवर्तन कहलाते हैं।
  • जिन परिवर्तनों में रासायनिक अभिक्रिया द्वारा एक अथवा एक से अधिक नए पदार्थ बनते हैं उन्हें रासायनिक परिवर्तन कहते हैं। रासायनिक अभिक्रियाओं को रासायनिक समीकरण द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
  • दहन, खाना पकाना और जंग लगना रासायनिक परिवर्तनों के उदाहरण हैं।
  • पदार्थ जिनका दहन किया जा सकता है, वे दहनशील पदार्थ होते हैं। दहन के समय ऊष्मा अथवा प्रकाश उत्सर्जित होता है।
  • वह न्यूनतम तापमान जिस पर कोई पदार्थ आग पकड़ सकता है, उसे उसका प्रज्वलन तापमान कहते हैं।
  • कुछ परिवर्तन उत्क्रमणीय होते हैं और कुछ नहीं होते।
  • कुछ परिवर्तन वांछनीय होते हैं और कुछ नहीं होते।
  • विभिन्न भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तनों के द्वारा चट्टानों का अपक्षय होता है जिससे मृदा बनती है।
  • बहते जल और वायु के कारण होने वाला अपरदन एक भौतिक परिवर्तन है।

आइए, और अधिक सीखें

  1. निम्नलिखित में से कौन-से कथन भौतिक परिवर्तन की विशेषताएँ हैं? (i) पदार्थ की अवस्था परिवर्तित हो सकती है अथवा नहीं हो सकती है। (ii) विभिन्न गुणों वाला पदार्थ बनता है। (iii) कोई नया पदार्थ नहीं बनता है। (iv) पदार्थ में रासायनिक अभिक्रिया होती है। (क) (i) और (ii) (ग) (i) और (iii) (ख) (ii) और (iii) (घ) (iii) और (iv)
  2. पूर्वानुमान लगाइए कि निम्नलिखित परिवर्तनों में से कौन-से परिवर्तन उत्क्रमित किए जा सकते हैं और कौन-से नहीं। यदि किसी परिवर्तन के विषय में आप आश्वस्त नहीं हैं तो उसका कारण लिखिए कि क्यों नहीं हैं?
    1. वस्त्र सिलकर कमीज बनाना
    2. सीधी डोरी को ऐंठना
    3. इडली के घोल से इडली बनाना
    4. जल में शक्कर घोलना
    5. कुएँ से जल निकालना
    6. फलों का पकना
    7. खुले पात्र में जल उबालना
    8. चटाई समेटना
    9. गेहूं के दानों को पीसकर आटा बनाना
    10. चट्टानों से मृदा का बनना
  3. बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य। यदि कोई कथन असत्य है तो सही कथन लिखिए।
    1. मोमबत्ती जलाने के लिए मोम का पिघलना आवश्यक है।
    2. संघनन द्वारा जलवाष्प को एकत्रित करने में रासायनिक परिवर्तन होता है। [ ]
    3. पत्तियों को खाद में बदलने की प्रक्रिया एक रासायनिक परिवर्तन है।
    4. बेकिंग सोडा को नींबू के रस के साथ मिश्रित करना एक रासायनिक परिवर्तन है। []
  4. निम्नलिखित कथनों के रिक्त स्थान भरिए
    1. नलिनी ने देखा कि उसकी साइकिल के हत्थे पर भूरे रंग का निक्षेप हो गया है। भूरे रंग का यह निक्षेप __________ के कारण होता है और यह एक परिवर्तन है।
    2. रूमाल की तह लगाना एक ______ परिवर्तन है और यह _______हो सकता है।
    3. वह रासायनिक प्रक्रिया जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके ऊष्मा उत्सर्जित करता है, उसे ______ कहते हैं और यह परिवर्तन होता है।
    4. मैग्नीशियम जब वायु में जलाया जाता है तो यह एक पदार्थ बनाता है जिसे _______कहा जाता है। बनने वाला पदार्थ __________प्रकृति का होता है। मैग्नीशियम का जलना एक ___________परिवर्तन है।
  5. जल का बर्फ या वाष्प में परिवर्तित होना भौतिक परिवर्तन है अथवा रासायनिक परिवर्तन? व्याख्या कीजिए।
  6. क्या दूध का फटना एक भौतिक परिवर्तन है अथवा रासायनिक परिवर्तन? अपने कथन की पुष्टि कीजिए।
  7. img
  8. वायु, वर्षा आदि जैसे प्राकृतिक कारक चट्टानों से मृदा का निर्माण करते हैं। क्या यह परिवर्तन भौतिक है अथवा रासायनिक और क्यों? जिज्ञासा
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  10. 'पर्यावरण-हितैषी - पृथु' शीर्षक वाली निम्नलिखित कहानी पढ़िए और कोष्ठक में दिए गए सबसे उपयुक्त विकल्प पर चिह्न लगाइए। कहानी के लिए अपनी रुचि का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।

    पृथु रसोई में भोजन तैयार कर रहा है। वह सब्जियाँ काटता है, आलू छीलता है और फल काटता है (भौतिक परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन)। वह बीजों को, फलों और सब्जियों के छिलकों को मिट्टी के एक पात्र में एकत्रित करता है (भौतिक परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन)। जीवाणु और कवक की क्रिया के कारण फलों व सब्जियों के छिलके और अन्य सामग्रियाँ सड़ने लगती हैं जिससे खाद बनती है (भौतिक परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन)। पृथु बीज बोने के समय गमलों में खाद डालने एवं उनमें नियमित रूप से जल देने का निश्चय करता है। कुछ दिनों पश्चात वह देखता है कि बीज अंकुरित होने लगे हैं और छोटे-छोटे पौधे उगने लगे हैं जिनमें अंततः रंग-बिरंगे पुष्प खिल जाते हैं (भौतिक परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन)। परिवार के सभी सदस्य पृथु के प्रयासों की प्रशंसा करते हैं।

  11. अगले पृष्ठ पर कुछ परिवर्तन दिए गए हैं। चिह्नित क्षेत्र 'क' में भौतिक परिवर्तन और चिह्नित क्षेत्र 'ख' में रासायनिक परिवर्तनों को लिखिए। चिह्नित क्षेत्र 'ग' में भौतिक और रासायनिक दोनों प्रकार के परिवर्तनों को लिखिए।img मोमबत्ती जलने की प्रक्रिया; कागज का फटना; जंग का लगना; दूध का फटना, फलों का पकना, बर्फ का पिघलना, वस्त्रों की तह लगाना, मैग्नीशियम का जलना और बेकिंग सोडा को सिरके में मिश्रित करना।
  12. चित्र 5.11 (क), (ख), (ग), और (घ) में दर्शाए गए प्रयोग किए गए। पता लगाइए कि किस प्रयोग में चूने का पानी दूधिया हो गया और क्यों?
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अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ

* नींबू के रस का स्याही की तरह उपयोग करके कागज के टुकड़े पर एक संदेश लिखिए और उसे सूखने दीजिए। संदेश अदृश्य हो जाएगा। अब कागज पर गरम इस्त्री करें अथवा कागज को मोमबत्ती की लौ पर इस प्रकार से रखें कि यह आग न पकड़ ले। कागज के गरम होने पर अदृश्य अक्षर गहरे भूरे रंग के हो जाते हैं। क्या इनमें से किसी भी परिवर्तन को उत्क्रमित किया जा सकता है?

! सावधानी - इस क्रियाकलाप को किसी वयस्क के निर्देशन में कीजिए।

  • इन दिनों हम पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टानों के टूटने के बहुत से समाचार सुनते हैं जिससे जान-माल की हानि होती है। भूस्खलन और चट्टानों के अपघटन को कम करने के लिए सावधानी के रूप में क्या प्रक्रम किए जा सकते हैं। चर्चा कीजिए। रसोईघर में हो रहे क्रियाकलापों का अवलोकन कीजिए और उन परिवर्तनों को अभिलेखित कीजिए जिन्हें उत्क्रमित किया जा सकता है। क्या ये परिवर्तन भौतिक हैं अथवा रासायनिक हैं?
  • डबल रोटी को मुलायम और फूला हुआ बनाने के लिए पकाते समय उसमें खमीर मिश्रित किया जाता है। खमीर किस प्रकार कार्य करता है? पता लगाने का प्रयास कीजिए।
  • एक छोटी बोतल, थोड़ी शक्कर, ताजा खमीर, जल और एक गुब्बारा लीजिए। बोतल में दो चम्मच शक्कर और थोड़ा जल मिश्रित कर शक्कर का विलयन बनाइए। अब इसमें एक चम्मच खमीर डालिए और बोतल के मुँह पर गुब्बारा लगाइए। इसे लगभग एक घंटे तक अबाधित रहने दीजिए।
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  • आप क्या अवलोकन करते हैं?
  • गुब्बारे को सावधानी से हटाइए। अब गुब्बारे का मुँह कसकर बंद रखिए और उसे ताजा चूने के पानी वाली दूसरी छोटी बोतल के मुँह पर लगा दीजिए। बोतल को हिलाइए ताकि गुब्बारे की सामग्री चूने के पानी में मिल जाए।
  • आप क्या अवलोकन करते हैं?
  • गुब्बारे को सावधानी से हटाइए। अब गुब्बारे का मुँह कसकर बंद रखिए और उसे ताजा चूने के पानी वाली दूसरी छोटी बोतल के मुँह पर लगा दीजिए। बोतल को हिलाइए ताकि गुब्बारे की सामग्री चूने के पानी में मिल जाए।
  • आप क्या अवलोकन करते हैं?
  • आप इस प्रयोग से क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
  • इस प्रयोग में होने वाले सभी परिवर्तनों को पहचानिए और बताइए कि कौन-से परिवर्तन भौतिक हैं और कौन-से रासायनिक ।
  • गिरगिट अपने आस-पास के वातावरण के अनुरूप अपना रंग बदलते हैं और जब वे क्रोधित होते हैं या संकट का अनुभव करते हैं तो भी अपना रंग बदलते हैं। क्या यह ऐसा परिवर्तन है जिसे उत्क्रमित किया जा सकता है? इंटरनेट से अथवा अपने विद्यालय के पुस्तकालय से इसके संबंध में सूचना एकत्रित कीजिए।
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