10 :
पादपों में जैव प्रक्रम
कक्षा 6 में हमने सीखा कि सभी सजीवों में वृद्धि होती है और उन्हें वृद्धि के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। साथ ही पिछले अध्याय में हमने उस प्रक्रिया के विषय में भी चर्चा की जिसके द्वारा जंतु पोषण प्राप्त करते हैं।
हम जानते हैं कि जंतु वृद्धि के लिए भोजन ग्रहण करते हैं परंतु पादपों में वृद्धि कैसे होती है? क्या आपने कभी जंतुओं की भाँति पादपों को भोजन ग्रहण करते देखा है? जंतुओं में वृद्धि होने पर सामान्यतः उनके आकार और भार में वृद्धि होती है तथा उनके शरीर में विविध परिवर्तन होते हैं। पादपों में वृद्धि होने पर आपको उनमें क्या परिवर्तन दिखाई देते हैं?
हमने सीखा कि भोजन से हमें महत्त्वपूर्ण पोषक, जैसे- कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन और खनिज प्राप्त होते हैं। जल के साथ-साथ ये सब भी हमारी वृद्धि के लिए अनिवार्य होते हैं। आइए, अन्वेषण करें कि पादप अपनी वृद्धि के लिए किस प्रकार पोषक प्राप्त करते हैं?
10.1 पादपों में वृद्धि कैसे होती है?
अपने आस-पास देखिए। क्या आपने पौधे के जीवनकाल में उसमें कुछ परिवर्तन देखे हैं? उदाहरणार्थ जब पौधे में वृद्धि होती है तो उसमें नवीन पत्तियाँ और शाखाएँ निकलती हैं तथा पौधे की लंबाई बढ़ती है और तना मोटा हो जाता है। आपके विचार से इन परिवर्तनों के क्या कारण हैं? इस विषय पर अपने मित्रों से चर्चा कीजिए और इन कारणों के स्पष्टीकरण भी दीजिए।
जब हम पौधे को नियमित रूप से सींचते हैं तो उसकी अच्छी वृद्धि होती है। अतः मुझे लगता है कि जल भी पौधे की वृद्धि में योगदान देता है।
मेरे विचार से पौधों की वृद्धि में सूर्य के प्रकाश की कुछ भूमिका होती है।
हो सकता है कि पौधे अपनी जड़ों के माध्यम से मिट्टी से भोजन ग्रहण करते हों।
मेरे विचार से ...........की कुछ भूमिका हो सकती है।
आइए, इनमें से कुछ कारणों की जाँच के लिए एक प्रयोग करें।
क्रियाकलाप 10.1 - आइए, कुछ कारणों की जाँच के लिए परीक्षण करें
- उद्यान की मिट्टी से भरे हुए एक जैसे तीन गमले लीजिए। आप गमलों के स्थान पर प्रयोग की गई बोतलें अथवा खाली डिब्बे भी ले सकते हैं। प्रत्येक गमले में एक ही पौधे के समान आमाप के तीव्र गति से वृद्धि करने वाले नवोद्भिद रोपिए, जैसे- टमाटर, मिर्च इत्यादि (चित्र 10.1)|
- गमलों को 'क', 'ख' और 'ग' से नामांकित कीजिए।
- प्रत्येक नवोद्भिद की पत्तियों की संख्या गिनिए और अपने अवलोकनों को अभिलेखित कीजिए।
- गमला 'क' को सूर्य के प्रकाश में रखिए। इस गमले की मिट्टी में प्रतिदिन उपयुक्त जल डालकर इसमें हल्की नमी बनाए रखिए [चित्र 10.1(क) ] |
- गमला 'ख' को सूर्य के प्रकाश में रखिए परंतु इस गमले की मिट्टी में जल मत डालिए [चित्र 10.1 (ख)]।
- गमला 'ग' को अँधेरे स्थान में रखिए। इस गमले की मिट्टी में प्रतिदिन उपयुक्त मात्रा में जल डालकर इसमें हल्की नमी बनाए रखिए [चित्र 10.1(ग) ] |
- दो सप्ताह' तक पौधों का अवलोकन कीजिए और उनकी ऊँचाई, पत्तियों की संख्या, पत्तियों के रंग और पौधों में दिखने वाले अन्य परिवर्तनों को भी अभिलेखित कीजिए।
- अपने अवलोकनों को तालिका 10.1 में अभिलेखित कीजिए।
तालिका 10.1 - पौधों की वृद्धि पर सूर्य के प्रकाश और जल का प्रभाव
| विभिन्न स्थितियों में रखे गमले | उपलब्धता | पौधों की ऊँचाई (cm) | पत्तियों की संख्या | पत्तियों का रंग (हरा/पीला) | |||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सूर्य का प्रकाश | जल | प्रथम दिन | दो सप्ताह पश्चात | प्रथम दिन | दो सप्ताह पश्चात | ||
| गमला ‘क’ — सीधा सूर्य के प्रकाश में रखा हुआ और जलयुक्त | |||||||
| गमला ‘ख’ — सीधा सूर्य के प्रकाश में रखा हुआ और जलरहित | |||||||
| गमला ‘ग’ — अँधेरे में रखा हुआ और जलयुक्त | |||||||
* तीनों गमलों के पौधों में आपने क्या अंतर देखे?
* किस गमले के पौधे में अधिकतम वृद्धि हुई है?
* किस गमले के पौधे में सबसे कम वृद्धि हुई है?
तालिका 10.1 में अभिलेखित अवलोकनों का विश्लेषण कीजिए और अपने शिक्षक और मित्रों के साथ इस विषय पर चर्चा कीजिए।
संभवतः आप पाएँगे कि उपयुक्त मात्रा में जलयुक्त किंतु अँधेरे में रखा गया गमला 'ग' की तुलना में सूर्य के प्रकाश में रखा गया उपयुक्त मात्रा में जलयुक्त गमला 'क' के पौधे में अधिक वृद्धि हुई। गमला 'ख' में लगाया गया पौधा संभवतः नष्ट हो गया होगा जिसे सूर्य का पर्याप्त प्रकाश तो मिला किंतु जल नहीं मिला।
इस क्रियाकलाप में किए गए अवलोकनों से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? इस क्रियाकलाप के परिणाम से यह प्रतीत होता है कि पौधों को अपनी वृद्धि के लिए जल एवं सूर्य के प्रकाश दोनों की आवश्यकता होती है।
फलकुसुमसंपदुचिता रोपणतो भवति केवलान्न यतः। '
वृक्ष फलों और फूलों का उत्पादन मात्र इसलिए नहीं करते हैं कि उन्हें रोपा गया है'
यह उक्ति वृक्षायुर्वेद नामक प्राचीन भारतीय मूल ग्रंथ की है। इसमें पौधों की वृद्धि, मृदा और कृषि-पद्धतियों के विषय में उन उपयोगी अवलोकनों को अभिलेखित किया गया है जिनसे फसल-उत्पादन को उन्नत करने में सहायता मिलती है। इस ग्रंथ में उपलब्ध जानकारी प्रायोगिक अनुभवों और लंबे समय में देखे गए प्रतिरूपों (पैटर्न) पर आधारित प्रतीत होती है। इन विचारों को कृषि-पद्धतियों के संबंध में मार्गदर्शन के लिए व्यवस्थित रूप से प्रलेखित किया गया था। उदाहरण के लिए इसमें जल, जौ, मूंग, उड़द और कुल्थी जैसे बीजों के मिश्रण से जैविक खाद तैयार करने के अनेक संदर्भ उपलब्ध हैं।10.2 पादप अपनी वृद्धि हेतु भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?
हम जानते हैं कि जंतु अपने पोषण और वृद्धि के लिए प्रत्यक्ष रूप से पादपों को खाकर अथवा परोक्ष रूप से पौधे खाने वाले जंतुओं को खाकर पौधों पर निर्भर होते हैं। इसके साथ ही पादप अपनी वृद्धि के लिए आवश्यक भोजन कैसे प्राप्त करते हैं? जंतुओं की भाँति पौधे भोजन नहीं खाते हैं।
10.2.1 पत्तियाँ - पौधों की 'भोजन निर्माणशाला'
पौधे भोजन का भंडारण मंड (स्टार्च) के रूप में करते हैं जो एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है। मंड का उत्पादन पौधों की पत्तियों में होता है जिनकी संरचना सामान्यतः चौड़ी और चपटी होती है। पत्तियाँ पर्णहरित (क्लोरोफिल) नामक हरित वर्णक की उपस्थिति के कारण अधिकांशतः हरी होती हैं। पर्णहरित की उपस्थिति सूर्य के प्रकाश को प्रभावी रूप से प्रग्रहण करने में सहायता करती है।
आइए, पता लगाएँ कि मंड के रूप में भोजन निर्मित करने में पर्णहरित की क्या भूमिका है?क्रियाकलाप 10.2 - आइए, जाँच करें (निदर्शन क्रियाकलाप)
इस क्रियाकलाप का निदर्शन शिक्षक के द्वारा किया जा सकता है।*एक पत्ती को नरम करने के लिए 5 मिनट तक पानी में उबालिए।
* एक परखनली में एल्कोहॉल लें और उसमें पत्ती को डुबाइए।
*उबलते हुए जल वाले बीकर में परखनली को रखिए। पत्ती के वर्ण-विहीन होने तक प्रतीक्षा कीजिए [चित्र 10.2 (क)]।
*पत्ती को बाहर निकाल लीजिए और उसे एक प्लेट पर रख दीजिए।
*अब एक बिंदुपाती (ड्रॉपर) की सहायता से वर्णविहीन पत्ती पर आयोडीन के तनुकृत विलयन की कुछ बूँदें डालिए [चित्र 10.2 (ख)]। कुछ मिनट प्रतीक्षा कीजिए और अवलोकन करिए।
*यदि पत्ती का वर्ण परिवर्तित होकर नीला-काला हो जाता है तो यह पत्ती में मंड की उपस्थिति को इंगित करता है।
!सावधानी - एल्कोहॉल को कदापि ऊष्मा के स्रोत के पास नहीं रखें क्योंकि यह अत्यधिक 'ज्वलनशील द्रव पदार्थ होता है और सरलता से आग पकड़ सकता है और जला सकता है।
क्या आपको आश्चर्य हुआ कि इस क्रियाकलाप के आरंभ में हमने पत्ती को वर्णविहीन क्यों किया ?पत्ती के वर्णविहीन होने पर उसमें वर्ण-परिवर्तन तथा मंड की उपस्थिति का अवलोकन स्पष्ट रूप से किया जा सकता है।
क्रियाकलाप 10.1 में हमने सीखा कि पौधों की वृद्धि के लिए जल और सूर्य का प्रकाश अनिवार्य है। क्रियाकलाप 10.2 के द्वारा हमने पता लगाया कि हरी पत्तियाँ भोजन के रूप में मंड का भंडारण करती हैं।
भास्कर अपने अवकाश के समय में बागवानी करना पसंद करता है। एक जिज्ञासु विद्यार्थी होने के कारण वह अपने उद्यान में चारों ओर देख कर प्रायः चकित होता है कि पौधे भोजन का उत्पादन कैसे करते हैं। भास्कर अपने अनुभव से जानता है कि पौधे की वृद्धि के लिए जल और सूर्य का प्रकाश अनिवार्य है परंतु वह यह जानने के लिए उत्सुक है कि क्या सूर्य का प्रकाश पौधों में भोजन (मंड) के उत्पादन में योगदान देता है?
सूर्य का प्रकाश पौधों में मंड के उत्पादन में किस प्रकार योगदान देता है?
क्रियाकलाप 10.3 - आइए, जाँच करें
भास्कर ने अलग-अलग गमलों में लगे दो एक जैसे पौधों की हरित और अहरित धब्बों वाली एक-एक पत्ती ली। दोनों गमलों में से एक गमले को सूर्य के प्रकाश में रखा गया था और दूसरे गमले को अँधेरे स्थान पर 36 घंटों तक रखा गया था। वह मंड-परीक्षण से पहले और बाद में पत्तियों की तुलना करना चाहता था।
उसने ट्रेसिंग पेपर की सहायता से पत्तियों के हरित और अहरित भागों के स्थान को अभिलेखित करने के लिए चित्र बनाए। इसके बाद उसने पत्तियों पर आयोडीन परीक्षण किया
(क्रियाकलाप 10.2 में दर्शाए अनुसार)। भास्कर ने अपने अवलोकनों को तालिका 10.2 में अभिलेखित किया।
तालिका 10.2 - पौधों की पत्तियों के हरित और अहरित भागों में मंड की उपस्थिति
| क्र.सं. | गमले के पौधे के लिए प्रकाश की स्थितियाँ | आयोडीन परीक्षण से पहले का रंग | आयोडीन परीक्षण के बाद का रंग |
|---|---|---|---|
| 1. | सूर्य के प्रकाश में रखा पौधा
|
पत्ती पर हरित और अहरित रंग के धब्बे हैं
|
पत्ती के हरित धब्बे नीले-काले रंग के हो गए
|
| 2. | अँधेरे में रखा पौधा
|
पत्ती पर हरित और अहरित रंग के धब्बे हैं
|
रंग में कोई परिवर्तन नहीं हुआ
|
तालिका 10.2 में भास्कर ने अभिलेखित किया कि सूर्य के प्रकाश में रखे पौधे से प्राप्त पत्ती के हरित धब्बे नीले-काले रंग के हो गए जो मंड की उपस्थिति का संकेत देते हैं। भास्कर ने यह भी अभिलेखित किया कि अँधेरे स्थान में रखे पौधे की पत्ती के हरित धब्बों पर नीला-काला रंग दिखाई नहीं दिया जो इंगित करता है कि इसमें मंड नहीं बना है। सूर्य के प्रकाश में रखे गए पौधे से ली गई पत्ती के अहरित धब्बे नीले-काले रंग के नहीं हुए। क्या यह इंगित करता है कि उन धब्बों में पर्णहरित उपस्थित नहीं है? संभवतः इन अहरित धब्बों में आयोडीन परीक्षण के द्वारा पता लगाए जाने के लिए पर्याप्त मंड तैयार करने हेतु उचित मात्रा में पर्णहरित नहीं है।
कुछ पौधों की पत्तियाँ लाल, बैंगनी अथवा भूरी दिखाई देती हैं क्योंकि उनमें हरे रंग के पर्णहरित की अपेक्षा इन रंगों के वर्णक अधिक होते हैं। ये हरे रंग को दबा देते हैं। इनमें से कुछ वर्णक प्रकाश संश्लेषण में भी सहायक होते हैं। आप इन पत्तियों में मंड की उपस्थिति का पता लगाने के लिए आयोडीन परीक्षण कर सकते हैं जो इंगित करता है कि वास्तव में प्रकाश संश्लेषण हुआ है।
तालिका 10.2 में सूचीबद्ध अवलोकनों से हम क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं? जैसा कि हम जानते हैं पर्णहरित की उपस्थिति के कारण अधिकतर पत्तियाँ हरी होती हैं। हमने यह भी देखा कि पत्तियों के हरे भाग में मंड का उत्पादन होता है। हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में पर्णहरित मंड निर्मित होता है। वास्तव में मंड के निर्माण के लिए यह अनिवार्य है इसीलिए पत्तियों को पौधों की 'भोजन-निर्माण-शाला' (फूड फैक्ट्री) भी कहा जाता है।
पौधों द्वारा भोजन निर्मित करने के लिए और क्या अनिवार्य है? आइए, पता लगाते हैं।
10.2.2 भोजन निर्मित करने में वायु की भूमिका
पौधों के पोषण में वैज्ञानिकों के योगदान के विषय में पढ़ते हुए मेरी बहन ने बताया कि पौधों में भोजन निर्माण की प्रक्रिया में वायु की भूमिका रहती है।
क्रियाकलाप 10.4 - आइए, जाँच करें (निदर्शन क्रियाकलाप)
इस क्रियाकलाप का निदर्शन शिक्षक द्वारा किया जा सकता है।
*गमले में लगा एक हरा पौधा लीजिए और उसे दो से तीन दिन के लिए अँधेरे में रखिए जिससे वह मंड रहित हो जाए (अर्थात यदि भंडारित मंड हो तो वह पौधे द्वारा उपयोग के पश्चात समाप्त हो जाए)। तत्पश्चात यह प्रयोग करने के लिए इस पौधे की एक पत्ती लीजिए।
*एक चौड़े मुँह वाली बोतल लीजिए और उसमें थोड़ा कास्टिक सोडा (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) डालिए (यह वायु से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर लेता है)।
! सावधानी- कास्टिक सोडा एक प्रबल रसायन है जिससे त्वचा जल सकती है। इस रसायन का प्रयोग केवल शिक्षकों द्वारा ही किया जाए।
* विपाटित कॉर्क के माध्यम से मंडरहित पत्ती का आधा भाग बोतल के अंदर और शेष आधा भाग बोतल के बाहर रखिए और बोतल को चित्र 10.3 ( क ) में दर्शाए अनुसार रखिए।
* इस व्यवस्थापन को कुछ घंटों के लिए सूर्य के प्रकाश में रखिए।
* अवलोकन कीजिए और तालिका 10.3 में जल, सूर्य के प्रकाश, पर्णहरित और कार्बन डाइऑक्साइड की उपलब्धता को अभिलेखित कीजिए।
* पत्ती को तोड़ लीजिए और क्रियाकलाप 10.2 में किए गए अनुसार आयोडीन परीक्षण का उपयोग करके मंड की उपस्थिति की जाँच कीजिए।
* अपने अवलोकन तालिका 10.3 में अभिलेखित कीजिए।
तालिका 10.3 - पादपों द्वारा मंड बनाने में वायु की भूमिका
| पत्ती का भाग | उपलब्धता | क्या मंड उपस्थित है? (हाँ/नहीं) | |||
|---|---|---|---|---|---|
| जल | सूर्य का प्रकाश | पर्णहरित | कार्बन डाइऑक्साइड | ||
| पत्ती का वह भाग जो बोतल के अंदर है | |||||
| पत्ती का वह भाग जो बोतल के बाहर है | |||||
हमने देखा कि पत्ती का जो भाग बोतल के बाहर है वह नीला-काला हो गया है। यह मंड की उपस्थिति को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त पत्ती का जो भाग बोतल के अंदर है उसका रंग नीला-काला नहीं होता है। यह दर्शाता है कि पत्ती के उस भाग में भोजन नहीं बना है। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि बोतल के अंदर रखा कास्टिक सोडा विलयन वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर लेता है। यह प्रयोग क्या दर्शाता है?
यह प्रयोग दर्शाता है कि मंड बनाने के लिए वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड पौधों के लिए अनिवार्य है।
क्रियाकलाप 10.3 और 10.4 के आधार पर आप क्या निष्कर्ष निकालेंगे? पौधे का कौन-सा भाग मंड के संश्लेषण में सम्मिलित है?
अब तक हमने जो सीखा है उसके आधार पर हमने पाया है कि पौधों में भोजन के संश्लेषण के लिए सूर्य का प्रकाश, जल, पर्णहरित और कार्बन डाइऑक्साइड अनिवार्य हैं। यह प्रक्रिया जिसके द्वारा पौधे सूर्य के प्रकाश और पर्णहरित की उपस्थिति में भोजन निर्मित करते हैं, वह प्रकाश संश्लेषण कहलाती है। पत्ती प्रकाश संश्लेषण का प्रमुख स्थान है। क्या पौधे के अन्य हरे भाग भी प्रकाश संश्लेषण करते हैं? हाँ, पौधे के अन्य भाग जिनमें पर्णहरित होता है, वे भी प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
यहाँ हमने यह सीखा है कि पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा अपना भोजन निर्मित करने के लिए जल, सूर्य का प्रकाश और वायु से कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं। परंतु क्या आपने कभी सोचा है कि इस प्रक्रिया के दौरान और क्या होता है? क्या पौधे अपने परिवेश से पदार्थों को केवल ग्रहण करते हैं अथवा वे कुछ निर्मुक्त भी करते हैं। आइए, बरखा दीदी द्वारा किए गए एक क्रियाकलाप के द्वारा इसका पता लगाएँ।
क्रियाकलाप 10.5 - आइए, पता लगाएँ* चित्र 10.4 को देखिए। 'क' और 'ख' के रूप में नामांकित दोनों व्यवस्थापनों की तुलना कीजिए और विश्लेषण कीजिए।
* चित्र 10.4 में व्यवस्थापन 'क' सूर्य के प्रकाश में रखा गया है और व्यवस्थापन 'ख' अँधेरे में रखा गया है। इन दोनों व्यवस्थापनों में आप क्या अंतर देखते हैं? क्या आप सूर्य के प्रकाश में रखे गए व्यवस्थापन 'क' में उलट कर रखी परखनली से निकलते हुए वायु के बुलबुले देखते हैं? इस व्यवस्थापन में उत्पन्न गैस के कारण बुलबुले निकले और उलट कर रखी गई परखनली में एकत्रित हो गए। यह कौन-सी गैस है
अरे हाँ! मुझे याद है मैंने विज्ञान प्रयोगशाला में खिड़की के पास सूर्य के प्रकाश में रखा हुआ ऐसा व्यवस्थापन देखा है।
जब उलट कर रखी गई परखनली में गैस एकत्रित हो गई तो बर दीदी ने परखनली के मुँह पर अपना अँगूठा रख कर उसे बंद दिया और परखनली को व्यवस्थापन से बाहर निकाल दि उन्होंने अपना अँगूठा हटा कर तत्काल एक जलती हुई ती परखनली में डाली और तीली से तीव्र ज्वाला उत्पन्न हुई।
तब उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि परखनली में एकत्रित गैस ऑक्सीजन से समृद्ध है। यह इंगित करता है कि प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान ऑक्सीजन निर्मुक्त होती है। यह इसे भी इंगित करता है कि प्रकाश संश्लेषण सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में संपन्न होता है।बरखा दीदी के प्रयोग के आधार पर हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि प्रकाश संश दौरान ऑक्सीजन निर्मुक्त होती है।
10.2.3 प्रकाश संश्लेषण - संक्षेप में
हम जानते हैं कि प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के लिए जल, सूर्य का प्रकाश, पर्णहरित और वायु से कार्बन डाइऑक्साइड अनिवार्य हैं (चित्र 10.5)। प्रकाश संश्लेषण के दौरान भोजन एक सरल कार्बोहाइड्रेट यानी ग्लूकोस के रूप में उत्पादित होता है। यह ग्लूकोस न केवल ऊर्जा के तात्कालिक स्रोत के रूप में कार्य करता है अपितु बाद में भंडारण हेतु मंड में रूपांतरित हो जाता है। प्रकाश संश्लेषण के लिए शब्द समीकरण नीचे दिया गया है।
विश्वभर में अनेक वैज्ञानिकों ने प्रकाश संश्लेषण को समझने में योगदान दिया है। भारत में रुस्तम होरमुसजी दस्तूर (1896-1961) ने प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया का अध्ययन किया था। वे एक पादप विज्ञानी थे और उन्होंने 1921 से 1935 तक रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बॉम्बे (अब विज्ञान संस्थान, मुंबई) के वनस्पति विज्ञान विभाग में विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्होंने प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया पर जल की मात्रा और तापमान के प्रभाव का अध्ययन किया। उन्होंने प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में जल, तापमान और प्रकाश के रंग के महत्त्व की भी जाँच की।
10.2.4 प्रकाश संश्लेषण के समय पत्तियाँ किस प्रकार गैसों का विनिमय करती हैं?
अब हम यह जानते हैं कि प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड की आवश्यकता होती है और इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन निर्मुक्त होती है। पौधे का कौन-सा भाग कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन के विनिमय (आदान-प्रदान) में सहायता करता है? आइए, एक क्रियाकलाप का संचालन करके यह समझें कि गैसों का विनिमय कहाँ पर होता है।क्रियाकलाप 10.6 - आइए, जाँच करें (निदर्शन क्रियाकलाप)
इस क्रियाकलाप का निदर्शन शिक्षक द्वारा किया जा सकता है।
- रोइओ, मनी प्लांट, प्याज, गुड़हल, कोलियस जैसे किसी पौधे की अथवा किसी घास की एक पत्ती लीजिए।
- जल से भरे एक बीकर में इसे रखिए।
- सावधानी से पत्ती की निचली सतह से एक पतली परत को निकालिए।
- वॉच ग्लास में जल लें और उसमें इस परत को रखिए।
- अब एक काँच की स्लाइड लीजिए और उसपर सावधानी से पानी की एक बूँद डालिए।
- पत्ती की परत को चिमटी की सहायता से वॉच ग्लास से निकाल कर स्लाइड पर रखिए।
- पत्ती की पतली परत पर बिंदुपाती (ड्रॉपर) की सहायता से स्याही की एक बूँद डालिए।
- परत को कवर स्लिप से ढक कर सूक्ष्मदर्शी में स्लाइड का अवलोकन कीजिए।
- आपने क्या देखा? क्या आपको इस पतली परत पर सूक्ष्म छिद्र दिखाई दिए जैसा कि चित्र 10.6 में दर्शाया गया है? इन छिद्रों को रंध्र कहते हैं। पत्ती की सतह पर उपस्थित रंध्र गैसों के विनिमय में सहायता करते हैं।
10.3 पादपों में परिवहन
10.3.1 जल और खनिजों का परिवहन
सभी सजीवों को वृद्धि के लिए जल की आवश्यकता होती है। पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में जल का उपयोग करते हैं। पौधे अपनी जड़ों से जल के साथ-साथ मृदा में उपस्थित खनिजों को भी ग्रहण करते हैं। खनिज पौधों की वृद्धि के लिए प्रमुख पोषक हैं। जड़ों द्वारा ग्रहण किए जाने वाले जल और खनिज पौधे के सभी भागों में कैसे परिवहन करते हैं?
हम एक क्रियाकलाप द्वारा पौधे में जल के परिवहन का अध्ययन कर सकते हैं। इस क्रियाकलाप के लिए हमें दो काँच के गिलास, थोड़ा सा जल, लाल स्याही और एक जैसे कोमल पौधों की ऐसी दो टहनियों की आवश्यकता होगी जिनमें सफेद रंग के फूल हों (जैसे - सफेद सदाबहार, गुलमेंहदी इत्यादि) जैसा कि चित्र 10.7 में दर्शाया गया है।
क्रियाकलाप 10.7 - आइए, प्रयोग करें
* दो गिलास लीजिए और उन्हें 'क' और 'ख' से नामांकित कीजिए।* प्रत्येक गिलास को पानी से एक तिहाई भर लीजिए।
* गिलास 'ख' में लाल स्याही की कुछ बूंदें डालिए।
* पौधों के तनों को उनके आधार से तिर्यक रूप से काटिए और तत्काल प्रत्येक गिलास में एक-एक पौधा रख दीजिए जैसा कि चित्र 10.7 (क) और चित्र 10.7 (ख) में दर्शाया गया है।
* अगले दिन इन पौधों का अवलोकन कीजिए।
आपने क्या देखा? दोनों गिलासों में रखे पौधों की तुलना कीजिए। क्या आपको गिलास 'ख' में रखे पौधे के तने, पत्तियों और फूल में लाल रंग दिखाई दिया? चित्र 10.7 (ग) और चित्र 10.7 (घ) में एक दिन के बाद के पौधों को दर्शाया गया है। चित्र 10.7 (ग) के पौधे की चित्र 10.7 (घ) के पौधे से तुलना कीजिए। चित्र 10.7 (घ) में पौधे के तने, पत्तियों और फूलों में लाल रंग दिखाई देता है। पौधे के विभिन्न भागों ने किस प्रकार इस लाल रंग को अर्जित किया?
पौधे के तने के ऊपरी भाग को काटिए जो लाल रंग के पानी में डूबा हुआ नहीं है। कटे हुए तने को आवर्धक लेंस से देखिए। क्या आपको तने में लाल रंग दिखाई दिया [चित्र 10.7 (ङ)]? लाल रंग की स्याही कैसे ऊपर की ओर परिवहन करती है? ऐसा तने, शाखाओं और पत्तियों में उपस्थित दारु (जाइलम) नामक पतली नलियों के कारण होता है। लाल स्याही की तरह ही जल में घुले हुए खनिज भी जल के साथ दारु द्वारा तने में ऊपर की ओर परिवहन करते हैं।
आइए, अब हम जानते हैं कि जल और खनिज, पत्तियों तथा अन्य भागों में दारु द्वारा जाते हैं (चित्र 10.8)। दारु द्वारा परिवहन करने वाले जल का उपयोग अनेक प्रकार्यों को संपन्न करने में किया जाता है। पौधे के अन्य भागों में भोजन का परिवहन कैसे होता है ?
10.3.2 भोजन का परिवहन
हम जानते हैं कि प्रकाश संश्लेषण का प्रमुख स्थल पत्तियाँ हैं। पौधों द्वारा पत्तियों में निर्मित भोजन को पौधे के सभी भागों में ले जाया जाता है। इस भोजन का परिवहन पतली नली जैसी संरचनाओं के एक अन्य समूह द्वारा होता है, जिन्हें पोषवाह (फ्लोएम) कहते हैं (चित्र 10.8)। परिवहित भोजन पौधे के अन्य भागों जैसे बीज और जड़ों में भी भंडारित हो सकता है।
10.4 क्या पौधे श्वसन करते हैं?
कक्षा 6 विज्ञान की पुस्तक जिज्ञासा के अध्याय 'सजीव - विशेषताओं का अन्वेषण' में आपने पढ़ा कि सभी सजीव श्वसन करते हैं। क्या पौधे भी हमारी तरह श्वसन करते हैं?
क्रियाकलाप 10.8 - आइए, पता लगाएँ (निदर्शन क्रियाकलाप)*मूंग के कुछ दानों को रातभर के लिए पानी में भिगोइए।
*एक शंकु (कॉनिकल) फ्लास्क में रुई की एक परत बिछाइए (चित्र 10.9) और रुई को नम रखने के लिए उस पर थोड़ा सा पानी छिड़किए।
*भीगे हुए बीजों को शंकु फ्लास्क में रखी नम रूई पर रखिए।
*शंकु फ्लास्क के मुख को एक ऐसे कॉर्क से बंद कर दीजिए जिसमें दो छिद्र हों।*कॉर्क के दोनों छिद्रों में दो नलियाँ 'क' और 'ख' लगा दीजिए जैसा कि चित्र 10.9 में दर्शाया गया है।
*इसे 24 घंटे के लिए अंधेरे में ऐसे ही रखा रहने दीजिए।
*दो परखनलियाँ लीजिए और उनमें चूने का पानी भर दीजिए।
* एक परखनली के मुँह को एक छिद्र वाले कॉर्क से ढक दीजिए।
* कॉर्क के छिद्र के माध्यम से परखनली में एक काँच की नली डुबाइए।
* एक रबड़ की नली से फ्लास्क को और परखनली को जोड़ दीजिए जैसा कि चित्र 10.9 में दर्शाया गया है।
दोनों परखनलियों की तुलना कीजिए और देखिए कि क्या रंग में कोई परिवर्तन हुआ है? क्या दोनों परखनलियों में चूने का पानी दूधिया हो गया है? फ्लास्क से जुड़ी परखनली में चूने का पानी दूधिया हो गया? चूने का पानी फ्लास्क में कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति के कारण दूधिया हो गया है। परंतु यह कार्बन डाइऑक्साइड कहाँ से आई है? जैसा कि हम जानते हैं कि वायु में कार्बन डाइऑक्साइड प्राकृतिक रूप से बहुत कम मात्रा में उपस्थित है। फ्लास्क में अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड बीजों द्वारा उत्पन्न की गई है क्योंकि वे श्वसन करते हैं।
श्वसन के समय ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोस का विघटन होता है जिससे कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा निर्मुक्त होते हैं। श्वसन की प्रक्रिया के लिए शब्द समीकरण नीचे दिया गया है -
ग्लूकोस + ऑक्सीजन ——————>कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा
श्वसन के दौरान उत्पन्न ऊर्जा का उपयोग पौधे अपनी वृद्धि और विकास के लिए करते हैं। पौधे के हरित और अहरित सभी भाग श्वसन करते हैं।
अतः पौधों में ऊर्जा प्राप्ति हेतु भोजन के संश्लेषण, परिवहन और उपयोग के लिए विभिन्न क्रियाविधियाँ होती हैं।
संक्षेप में
- सभी सजीवों को भोजन की आवश्यकता होती है जो वृद्धि और विकास के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
- पादप सूर्य के प्रकाश और पर्णहरित की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और जल का उपयोग करके ग्लूकोस और ऑक्सीजन बनाते हैं। भोजन के संश्लेषण की यह प्रक्रिया प्रकाश संश्लेषण कहलाती है।
- पत्तियाँ पौधे की 'भोजन निर्माणशाला' हैं।
- पत्ती की सतह पर उपस्थित सूक्ष्म छिद्रों को रंध्र कहते हैं जो प्रकाश संश्लेषण और श्वसन के दौरान ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के विनिमय में सहायक होते हैं।
- दारु (जाइलम) जड़ों से जल और खनिजों को पौधे के ऊपरी भागों में ले जाता है जबकि पोषवाह (फ्लोएम) भोजन को पत्तियों से पौधे के सभी भागों में पहुँचाता है।
- पौधे श्वसन नामक प्रक्रिया द्वारा ग्लूकोस का विघटन करके ऊर्जा निर्मुक्त करते हैं। इस प्रक्रिया में वे ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड निर्मुक्त करते हैं।
आइए, और अधिक सीखें
1. निम्नलिखित तालिका को पूरा कीजिए -
| क्र.सं. | विशेषता | प्रकाश संश्लेषण | श्वसन |
|---|---|---|---|
| 1. | कच्चा माल | ||
| 2. | उत्पाद | ||
| 3. | शब्द समीकरण | ||
| 4. | महत्त्व |
- 2. ऐसी परिस्थिति की कल्पना कीजिए जहाँ पृथ्वी पर प्रकाश संश्लेषण करने वाले सभी जीव विलुप्त हो गए हैं। सजीवों पर इसका क्या प्रभाव होगा?
- 3. आलू का एक टुकड़ा आयोडीन विलयन से परीक्षण करने पर मंड की उपस्थिति दर्शाता है। आलू में मंड कहाँ से आता है? पौधे में भोजन का संश्लेषण कहाँ पर होता है और यह आलू तक कैसे पहुँचता है?
- 4. क्या पत्ती की चौड़ी और सपाट संरचना पौधों को प्रकाश संश्लेषण के लिए अधिक सक्षम बनाती है? इसका औचित्य बताइए।
- 5. X, Y के उपयोग द्वारा विघटित होकर कार्बन डाइऑक्साइड Z और ऊर्जा निर्मुक्त करती है।
X + Y → कार्बन डाइऑक्साइड +Z + ऊर्जा - X, Y और Z प्रक्रिया के तीन भिन्न घटक हैं। X, Y और Z किन्हें प्रदर्शित करते हैं?
6. कृष्णा ने दो गमलों में लगे समान आमाप के दो पौधों से एक प्रयोग का व्यवस्थापन किया। उसने उनमें से एक गमले को सूर्य के प्रकाश में रखा और दूसरे को एक अँधेरे कमरे में रखा जैसा कि चित्र 10.10 में दर्शाया गया है।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
- (i) इस प्रयोग के द्वारा वह किसकी जाँच कर रही है?
- (ii) दोनों स्थितियों में पौधों में क्या अंतर दिखाई दे रहे हैं?
- (iii) आपके अनुसार किस पौधे की पत्तियाँ मंड की उपस्थिति के लिए आयोडीन परीक्षण की पुष्टि करेंगी?
7. वाणी का मानना है कि कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण के लिए अनिवार्य है। उसने अपने विचार के स्वीकृति या अस्वीकृति के लिए चित्र 10.11 में दर्शाए गए अनुसार एक प्रयोग का व्यवस्थापन किया।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
- (i) उपर्युक्त व्यवस्थापनों के किन पौधों में मंड बनेगा?
- (ii) उपर्युक्त व्यवस्थापनों के किन पौधों में मंड नहीं बनेगा?
- (iii) उपर्युक्त व्यवस्थापनों के किन पौधों में ऑक्सीजन उत्पन्न होगी?
- (iv) उपर्युक्त व्यवस्थापन के किस पौधे में ऑक्सीजन उत्पन्न नहीं होगी?
- 9. पौधों में जल परिवहन गरम स्थिति में अधिक तीव्र गति से होता है या ठंडी स्थिति में? इसके अवलोकन के लिए एक प्रयोग अभिकल्पित कीजिए।
- 10. प्रकाश संश्लेषण और श्वसन प्रकृति में संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं। चर्चा कीजिए।
- ?
अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ
- बड़ी पारदर्शी बोतल में स्पाइडर प्लांट अथवा जेड प्लांट जैसा एक पौधा रोप कर एक बोतल बगीचा विकसित कीजिए (चित्र 10.13)। पौधे के कुछ समय तक सुचारु रूप से वृद्धि करने के पश्चात बोतल के मुख को बंद कर दीजिए। पौधे की वृद्धि का अवलोकन
कीजिए। यदि पौधा सुचारु रूप से वृद्धि कर रहा है इसका अर्थ है कि पौधा गैसों का विनिमय बनाए हुए है अर्थात पौधे के श्वसन की प्रक्रिया में उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग प्रकाश संश्लेषण में हो रहा है और प्रकाश संश्लेषण में उत्पन्न ऑक्सीजन का उपयोग बोतल के अंदर रखे पौधे द्वारा श्वसन में हो रहा है।
- प्रकाश संश्लेषण, श्वसन और जल तथा भोजन के परिवहन जैसी प्रक्रियाएँ फसल उत्पादन के लिए कैसे अनिवार्य हैं?
- यदि आपके घर के आस-पास कोई 'पौधा घर' (ग्रीन हाउस) हो तो वहाँ जाइए। अवलोकन कीजिए कि लोग ग्रीन हाउस में पौधों को कैसे उगाते हैं। पता लगाइए कि वे किस प्रकार पौधों को उगाने के लिए प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को नियंत्रित
- करते हैं।
कमला सोहोनी (1911-1998) एक भारतीय महिला वैज्ञानिक थी। उन्होंने पादपों में श्वसन के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए केम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। वह भारत लौट आईं और उन्होंने नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में और तत्पश्चात कुन्नूर में पोषण अनुसंधान प्रयोगशाला में कार्य किया। उसके बाद वह तत्कालीन रॉयल इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बॉम्बे चली गई जहाँ उन्हें बाद में निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया। उनके अधिकांश शोधकार्यों ने पौधों के खाद्य पदार्थों के पोषक मूल्यों में सुधार किए जाने में सहायता की। उन्होंने नारियल के रस (coconut palm sap) पर भी कार्य किया जिसे नीरा नामक एक पौष्टिक पेय के रूप में प्रयोग किया जाता है।