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11 :
प्रकाश छाया एवं परावर्तन

केशव अपने ग्रीष्मावकाश का कुछ समय अपने मित्र जतिन के साथ उसके नाना जी के गाँव में व्यतीत करता है जो महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट क्षेत्र में अवस्थित है। बड़े शहर में रहते आने के कारण यहाँ के हरे-भरे वन, ताजी हवाएँ, वेगवान जलप्रवाहों की ध्वनियाँ और पक्षियों की चहचहाहट उसके लिए एक नूतन अनुभव है।

तथापि केशव के लिए तो रात्रि में चमकते सैकड़ों जुगनुओं द्वारा नृत्य का अद्भुत प्रदर्शन सर्वाधिक आकर्षक दृश्य है। जुगनुओं के विषय में पूछने पर जतिन के नाना-नानी केशव को बताते हैं कि जुगनू मौसमी कीट हैं और ये प्रकाश का प्रयोग परस्पर संप्रेषण हेतु करते हैं। केशव के संज्ञान में यह भी आता है कि दुर्भाग्य से प्रकाश-प्रदूषण, कम होते हुए वनावरण और अत्यधिक पर्यटन के कारण जुगनुओं की संख्या दिन-प्रतिदिन घट रही है।

अवकाश के समाप्त होने पर केशव और जतिन अपने शहर वापस लौटने के लिए सायंकालीन एक बस में बैठ जाते हैं। जैसे-जैसे बस घुमावदार पहाड़ी सड़कों से गुजरती है वैसे-वैसे केशव चाँदनी में नहाए प्राकृतिक दृश्यों का और समीप से गुजरते हुए वाहनों के अग्रदीपों से निकलने वाली चमकीली किरणों के पुंज का अवलोकन करता है। इससे उसे चंद्रमा से संबंधित अनेक कविताओं और गीतों की याद आने लगती है और वह सोचने लगता है कि क्या चंद्रमा वास्तव में स्वयं अपना प्रकाश उत्पन्न करता है? क्या हमने कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय 'पृथ्वी से परे' में नहीं सीखा था कि हमारे सौर-परिवार में सूर्य के अतिरिक्त अन्य सभी पिंड सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके ही चमकते हैं? क्या चंद्रमा का प्रकाश सूर्य का परावर्तित प्रकाश ही है? कौन-से पिंड स्वयं अपना प्रकाश उत्सर्जित करते हैं? यह सब विचार करते हुए उसके ध्यान में एक नया तथ्य आया कि प्रकाश एक सरल रेखा में गमन करता हुआ प्रतीत होता है।

11.1 प्रकाश के स्रोत

सूर्य स्वयं अपना प्रकाश उत्सर्जित करता है और यह पृथ्वी पर प्राकृतिक प्रकाश का मुख्य स्रोत है। तारे, तड़ित, अग्नि और कुछ जन्तु भी स्वयं अपना प्रकाश उत्सर्जित करते हैं (चित्र 11.1)।

प्राचीन काल में मानव ने आग जलाना सीखा था- जो कृत्रिम प्रकाश का सबसे प्रारंभिक रूप था। बीतते समय के साथ उन्होंने पशु-वसा, तेल, मोम और गैस जैसे भिन्न-भिन्न ईंधनों से अग्नि उत्पन्न करना सीखा (चित्र 11.2)।

विद्युत और विभिन्न प्रकार के विद्युत प्रकाश-स्रोतों के आविष्कार के साथ अब मानव की प्रकाश-संबंधी अधिकांश आवश्यकताओं की पूर्ति विद्युत-प्रकाश से हो जाती है (चित्र 11.3)। img
चित्र 11.1 - प्रकाश के कुछ प्राकृतिक स्रोत
ऐसे पिंड जो स्वयं अपना प्रकाश उत्सर्जित करते हैं, वे दीप्त पिंड कहलाते हैं। जो पिंड स्वयं अपना प्रकाश उत्सर्जित नहीं करते हैं, वे अदीप्त पिंड कहलाते हैं। चंद्रमा एक अदीप्त पिंड है। यह स्वयं अपना प्रकाश उत्सर्जित नहीं करता है अपितु यह अपने ऊपर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश को ही परावर्तित करता है। img
चित्र 11.2- कृत्रिम प्रकाश के स्रोत के रूप में अग्नि
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चित्र 11.3 - विद्युत प्रकाश के कुछ स्रोत

विज्ञान एवं समाज

img प्रकाश उत्सर्जक डायोड (एल.ई.डी.) युक्त लैंप ऐसे आधुनिक प्रकाश स्रोत हैं जो बहुत कम विद्युत शक्ति का उपभोग करते हैं। ये परंपरागत विद्युत बल्बों से अधिक द्युतिमान होते हैं और अधिक लंबे समय तक चलते हैं। इनसे न केवल विद्युत का उपभोग कम होता है अपितु ये पर्यावरण के लिए भी अनुकूल रहते हैं। इनके अधिलाभों को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर एल.ई.डी. दीपों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण प्रभावी प्रयास किए हैं। एल.ई.डी. दीप जब कार्य करना बंद कर दें तो इन्हें सामान्य कचरे में न फेंक कर इनका उचित निपटान अथवा पुनर्चक्रण किया जाना चाहिए।

11.2 क्या प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है?

आइए, इसे ज्ञात करने हेतु एक क्रियाकलाप करते हैं।

क्रियाकलाप 11.1 - आइए, जाँच करें
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चित्र 11.4- माचिस की डिब्बियों से किया गया
क्रियाकलाप - छिद्रों से प्रकाश गमन
  • माचिस की तीन डिब्बियाँ लीजिए और प्रत्येक डिब्बी की आंतरिक ट्रे की तली में एक समान स्थिति पर एक-एक छोटा छिद्र बनाइए।
  • माचिस की तीनों डिब्बियों को खड़ा कीजिए और इनकी ट्रे इस प्रकार व्यवस्थित कीजिए कि इनके छिद्र सामान ऊँचाई पर रहें (चित्र 11.4)।
  • माचिस की डिब्बियों के एक ओर टॉर्च इस प्रकार रखिए कि इसका दीप छिद्रों की समान ऊँचाई पर उनके साथ एक सीध में हो।
  • माचिस की डिब्बियों के दूसरी ओर एक गत्ता (पर्दा) रखिए और टॉर्च के प्रकाश का चमकदार बिंदु इस गत्ते पर प्राप्त कीजिए। (ध्यान दीजिए कि इसे प्राप्त करने हेतु आपको थोड़ा सा डिब्बियों की ऊँचाई को समायोजित करना पड़ सकता है)।
  • माचिस की किसी एक डिब्बी को थोड़ा-सा एक ओर अथवा ऊपर या नीचे की ओर विस्थापित कीजिए। क्या आप अब भी प्रकाश के चमकदार बिंदु को पर्दे पर प्राप्त कर पाते हैं?

जब तीनों डिब्बियों के छिद्र एक सीधी रेखा में नहीं होते हैं तब हम पर्दे पर प्रकाश का चमकदार बिंदु प्राप्त नहीं कर सकते हैं। इसके साथ ही ये प्रेक्षण सुझाते हैं कि प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है।

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क्या हम इस तथ्य की जाँच किसी अन्य विधि से भी कर सकते हैं?

मुझे एक विधि सूझी है। हमें मुड़े हुए पाइप से मोमबत्ती की लौ को देखने का प्रयास करना चाहिए !

आइए, हम इस अवधारणा को भी जाँचने का प्रयास करें।

क्रियाकलाप 11.2- आइए, अन्वेषण करें

! सावधानी - जलती हुई मोमबत्ती का प्रयोग केवल किसी वयस्क के निर्देशन में ही कीजिए।

  • किसी लचीले पदार्थ (जैसे रबर अथवा प्लास्टिक) का एक लंबा व खोखला पाइप लीजिए और इसे सीधा रखते हुए इस प्रकार पकड़िए कि आप चित्र 11.5 (क) में दर्शाए अनुसार मोमबत्ती की लौ को देख सकें।
  • अब पाइप को मोड़ दीजिए और मोमबत्ती की लौ को देखने का प्रयास कीजिए (चित्र 11.5 ख)। क्या आप अब भी मोमबत्ती की लौ को देख पाते हैं?
आप सीधे पाइप से मोमबत्ती की लौ को देख सकते हैं परंतु मुड़े हुए पाइप से नहीं देख पाते हैं। यह दर्शाता है कि प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है। img
चित्र 11.5 (क) – मोमबत्ती की लौ को एक सीधे पाइप से देखना
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चित्र 11.5 (ख)- मोमबत्ती की लौ को एक मुड़े हुए पाइप से देखना
! सावधानी- लेसर का प्रयोग केवल शिक्षकों के निर्देशन में ही कीजिए। इस क्रियाकलाप हेतु उच्च-क्षमता लेसर का उपयोग नहीं करें। इस क्रियाकलाप के लिए एक निम्न-क्षमता लेसर संकेतक ही पर्याप्त है। कभी भी लेसर-पुंज सीधे किसी की आँखों पर न डालें क्योंकि यह आँख को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है।

लेसर पुंज को दृश्यमान बनाने के लिए एक बीकर अथवा काँच के गिलास में जल भरकर उसमें कुछ बूँद दूध मिलाइए। अब एक लेसर किरण पुंज को इसमें से होकर पार जाने दीजिए। आप क्या अवलोकन करते हैं? क्या आप देखते हैं कि जल के भीतर लेसर प्रकाश पुंज एक सरल पथ का अनुगमन करता है?

img तथापि प्रकाश कभी-कभी एक वस्तु के किनारों के परितः मुड़ भी सकता है। इस प्रक्रम के विषय में आप उच्च कक्षाओं में सीखेंगे।

11.3 पारदर्शी, पारभासी और अपारदर्शी पदार्थों से प्रकाश का संचरण

क्या होता है जब कोई वस्तु प्रकाश के पथ में रखी जाती है?img

आइए, भिन्न-भिन्न पदार्थों से बनी वस्तुओं को प्रकाश के पथ में रखते हैं और ज्ञात करते हैं।

क्रियाकलाप 11.3 -आइए, प्रयोग करें
  • विभिन्न पदार्थों से बनी हुई वस्तुओं को एकत्रित कीजिए तथा साथ ही एक टॉर्चलाइट भी लीजिए।
    तालिका 11.1- विभिन्न पदार्थों से प्रकाश का संचरण

    पदार्थ पारदर्शी/पारभासी/अपारदर्शी प्रकाश का संचरण
    पूर्णतः/आंशिक रूप से/लेशमात्र भी नहीं, होगा
    मेरा पूर्वानुमान मेरा अवलोकन
    गत्ता
    कागज
    काँच
    अन्सुखण पत्र
    मोटा कपड़ा
    ---
    ---
  • तालिका 11.1 में दिए गए पदार्थों को पारदर्शी, पारभासी और अपारदर्शी पदार्थों के रूप में वर्गीकृत कीजिए। (कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय 'हमारे आस-पास की सामग्री' में आपने पदार्थों को इस आधार पर पारदर्शी, पारभासी और अपारदर्शी पदार्थों में वर्गीकृत करना सीखा था कि आप उनके आर-पार कितनी स्पष्टता से देख पाते हैं)।
  • किसी अँधेरे कक्ष में जाइए और टॉर्च को चालू करके ऐसी स्थिति में रखिए कि टॉर्च से निकलने वाला प्रकाश कमरे की किसी दीवार पर पड़े। (अथवा आप चित्र 11.6 में दर्शाए अनुसार गत्ते का पर्दा इस प्रकार रख सकते हैं कि प्रकाश गत्ते पर पड़े)।
  • अब हम इस क्रियाकलाप को दो चरणों में करेंगे - पूर्वानुमान लगाना एवं प्रेक्षण लेना। img
    चित्र 11.6- विभिन्न पदार्थों से प्रकाश का गुजरना
    यदि आप टॉर्च से आने वाले प्रकाश के सामने किसी वस्तु को पकड़ते हैं तो पूर्वानुमान लगाइए कि क्या होगा? क्या आपको अभी भी पर्दे पर प्रकाश का वृत्त दिखाई देगा? तालिका 11.1 में अपना पूर्वानुमान लिखिए। अब वास्तव में टॉर्च और पर्दे के मध्य कोई एक वस्तु रखिए। क्या प्रकाश वस्तु से होकर गुजरता है? तालिका 11.1 में अपना प्रेक्षण लिखिए।
  • उपरोक्त चरणों को सभी वस्तुओं के लिए दोहराइए। क्या आपका पूर्वानुमान तथा प्रेक्षण समान है? इससे आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? पारदर्शी पदार्थों से प्रकाश लगभग पूर्णतः पार हो जाता है। पारभासी पदार्थों से प्रकाश आंशिक रूप से पार होता है। अपारदर्शी पदार्थों से प्रकाश पार ही नहीं होता है।
img क्या होता है जब कोई अपारदर्शी वस्तु प्रकाश-पथ को अवरुद्ध कर देती है?

11.4 छाया बनना

क्रियाकलाप 11.3 में प्रकाश के मार्ग में किसी अपारदर्शी वस्तु को रखने पर पर्दे पर आपको क्या दिखाई दिया? क्या आपने दीवार पर काली आकृति देखी? यह काली आकृति क्यों बनी है?

हम अब जानते हैं कि प्रकाश सरल रेखा मे गमन करता है। जब कोई अपारदर्शी वस्तु इसके मार्ग में रखी जाती है तो प्रकाश अवरुद्ध हो जाता है। पर्दे पर जहाँ प्रकाश नहीं पहुँचता है वहाँ बनी काली आकृति को छाया कहते हैं।

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चित्र 11.7 - हमारे चारों ओर छायाएँ
जब हम धूप में अथवा किसी प्रकाश स्रोत के नीचे होते हैं तब हमने अपनी और अपने चारों ओर की अन्य वस्तुओं की छायाओं को देखा है (चित्र 11.7)। इसके अतिरिक्त आपने कभी छायाओं से विभिन्न आकृतियाँ बनाने का आनंद भी लिया होगा।

क्या पारदर्शी और पारभासी वस्तुएँ भी छाया बनाती हैं? क्या आपने क्रियाकलाप 11.3 में ऐसा देखा है? अपारदर्शी वस्तुएँ गहरी काली छाया बनाती है जबकि पारभासी वस्तुएँ हल्की छाया बनाती हैं। कुछ पारदर्शी वस्तुएँ भी धुंधली छाया बना सकती हैं। आइए, छायाओं के विषय में और अधिक सीखें।

क्रियाकलाप 11.4 - आइए, अन्वेषण करें
  • विभिन्न आमापों और आकृतियों की कुछ अपारदर्शी वस्तुएँ एकत्रित कीजिए।
  • क्रियाकलाप 11.3 को दोहराइए परंतु इस बार तालिका 11.2 के प्रथम स्तंभ में उल्लिखित क्रियाओं को कीजिए।
  • प्रत्येक क्रिया में पर्दे पर बनी छाया की आकृति और आमाप का अवलोकन कीजिए। क्या सभी स्थितियों में छाया बनीं? क्या छाया की आकृति और आमाप संगत वस्तु के समान थी? * तालिका 11.2 के द्वितीय स्तंभ में अपने प्रेक्षण अंकित कीजिए।
  • तालिका 11.2 के द्वितीय स्तंभ में अपने प्रेक्षण अंकित कीजिए।
तालिका 11.2 - छायाओं का अवलोकन

क्रिया छाया के विषय में अवलोकन
पर्दा हटा दिया जाता है।
वस्तु को हटा दिया जाता है।
टॉर्च को स्विच ऑफ कर दिया जाता है।
टॉर्च और पर्दे की स्थिति को नियत रखते हुए वस्तु को पर्दे की ओर खिसकाया जाता है।
टॉर्च और पर्दे की स्थिति को नियत रखते हुए वस्तु को टॉर्च की ओर खिसकाया जाता है।
टॉर्च और पर्दे की स्थिति नियत रखते हुए वस्तु को झुकाया जाता है।
वस्तु का रंग परिवर्तित किया जाता है।

इस क्रियाकलाप से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? किसी वस्तु की छाया के अवलोकन के लिए हमें क्या-क्या चाहिए? वस्तु का रंग परिवर्तन करने से क्या छाया का रंग परिवर्तित होता है?

जब कोई वस्तु पर्दे पर पड़ने वाले प्रकाश को अवरुद्ध करती है तब इस वस्तु की छाया बनती है। किसी छाया के अवलोकनार्थ हमें एक प्रकाश स्रोत, एक अपारदर्शी वस्तु और पर्दे की आवश्यकता होती है। हमारे दैनिक जीवन में छाया के अवलोकन हेतु दीवारें, फर्श, धरातल अथवा कोई अन्य सतह पर्दे की भाँति कार्य करते हैं।

किसी छाया की आकृति, आमाप एवं स्पष्टता प्रकाश स्रोत और पर्दे के सापेक्ष वस्तु की स्थिति पर निर्भर करती है। वस्तु की छाया से उस वस्तु के विषय में जाना भी जा सकता है और नहीं भी। कभी-कभी छाया देख कर वस्तु के विषय में कोई भी अनुमान नहीं लगाया जा सकता। अपारदर्शी वस्तुओं का रंग परिवर्तित करने से उनकी छायाओं का रंग नहीं बदलता।

रोचक तथ्य

imgछाया नाटक अथवा छाया कठपुतली नृत्य कला अनेक शताब्दियों से हमारी सांस्कृतिक धरोहर का भाग रही हैं। कला के इस रूप में सपाट कटी हुई आकृतियों को प्रकाश स्रोत और पर्दे के मध्य रखा जाता है। इन्हें छाया कठपुतलियाँ कहते हैं, कठपुतलियों और प्रकाश स्रोत को हिला-डुला कर कठपुतली कलाकार छायाओं में सजीवों जैसी गति उत्पन्न कर सकते हैं जिससे पात्र जीवंत हो उठते हैं। भिन्न-भिन्न क्षेत्रों की अपनी एक विशिष्ट शैली होती है, जैसे महाराष्ट्र में 'चरम बाहुली नाट्य', आंध्र प्रदेश में 'कीलु बोम्मा' और 'तोलु बोम्मलाटा', कर्नाटक में 'तोगलु गोम्बेयाटा', ओडिशा में 'रावण छाया', केरल में 'थोलपावकूथु' और तमिल नाडु में 'बोम्मालट्टम'। इन प्रदर्शनों का उपयोग न केवल मनोरंजन के लिए अपितु समाज को महत्वपूर्ण संदेश संप्रेषित करने के लिए भी किया जाता है।

11.5 प्रकाश का परावर्तन

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जब अपारदर्शी वस्तु एक चमकदार वस्तु, जैसे स्टील की प्लेट ली गई तो मुझे पर्दे पर एक छाया प्राप्त हुई साथ ही पर्दे के सामने की दीवार पर एक चमकदार चकता भी दिखा। ऐसा क्यों हुआ?

क्रियाकलाप 11.5 - आइए, जाँच करें
  • एक चमकीली सपाट स्टील की पट्टिका अथवा कोई समतल दर्पण लीजिए अर्थात एक ऐसा दर्पण जो सपाट हो, वक्रित नहीं।
  • इसे बाहर ले जाइए और इसकी चमकीली सतह पर धूप पड़ने दीजिए। जिस दीवार पर सूर्य का प्रकाश सीधा नहीं पड़ रहा है उस पर आप प्रकाश कैसे पहुँचा सकते हैं?
  • प्रकाश को किसी दीवार अथवा समीप की सतह पर प्राप्त करने के लिए चमकीली पट्टिका अथवा दर्पण को भिन्न-भिन्न दिशाओं में घुमाइए (चित्र 11.8)। क्या आप दीवार पर प्रकाश का एक चकता देखते हैं? क्या इसका तात्पर्य यह है कि चमकदार प्लेट या दर्पण ने प्रकाश की दिशा बदल दी है?
  • अब चमकीली पट्टिका अथवा दर्पण को भिन्न-भिन्न प्रकार से घुमाइए और दीवार पर प्रकाश के चकते का अवलोकन करें। क्या इसकी स्थिति परिवर्तित होती है? ध्यान दें कि प्रकाश सदैव सीधी रेखा में गमन करता है और जब यह किसी चमकीली पट्टिका अथवा दर्पण पर पड़ता है तो इसकी दिशा परिवर्तित हो जाती है।
अपने अवलोकनों से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? इस क्रियाकलाप से पता चलता है कि कोई चमकीली पट्टिका img
चित्र 11.8 -दर्पण द्वारा सूर्य के प्रकाश की दिशा परिवर्तित करके उसे किसी दीवार पर प्राप्त करना
अथवा दर्पण, इन पर पड़ने वाले प्रकाश की दिशा को परिवर्तित कर देते हैं। किसी दर्पण द्वारा प्रकाश की दिशा में परिवर्तन का यह प्रकम प्रकाश का परावर्तन कहलाता है। आइए, किसी दर्पण द्वारा प्रकाश के परावर्तन को समझने का प्रयास करें।
क्रियाकलाप 11.6 - आइए, प्रयोग करें
  • स्टैंड में लगा एक समतल दर्पण, एक टॉर्च, एक कंघा, एक सफेद कागज की शीट और एक काले कागज की पट्टी लीजिए। पतली झिरी
  • काले कागज की सहायता से कंघे के एक रंध्र को छोड़कर शेष सभी रंध्रों को बंद कर दीजिए। खुला हुआ रंध्र एक पतले झिरी की भाँति कार्य करेगा।
  • किसी मेज पर श्वेत कागज को फैला दीजिए। कंघे को कागज की शीट के लंबवत पकड़िए और झिरी पर टॉर्च का प्रकाश डालिए। कंघे और टॉर्च को इस प्रकार समायोजित कीजिए कि आप कागज के अनुदिश संकीर्ण प्रकाश पुंज देख सकें जो झिरी से होकर गुजरा है [चित्र 11.9 (क)]। img
    चित्र 11.9 (क)- एक प्रकाश पुंज
  • कंघे को स्थिर रखते हुए प्रकाश पुंज के पथ में एक दर्पण रखिए [चित्र 11.9 (ख)]। आप क्या अवलोकित करते हैं? दर्पण पर पड़ने के पश्चात प्रकाश पुंज का पथ परिवर्तित हो जाता है। दर्पण से प्रकाश का परावर्तन होता है। img
    चित्र 11.9 (ख)- किसी समतल दर्पण से प्रकाश का परावर्तन
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    किसी दर्पण में मैं अपना चेहरा भी देख सकती हूँ। क्या यह भी प्रकाश के परावर्तन के कारण होता है?

    11.6 समतल दर्पण से प्रतिबिंब का बनना

    दर्पण में देखिए। क्या आप इसमें अपना चेहरा देख पाते हैं? दर्पण में आप जो देखते हैं, वह आपके चेहरे का प्रतिबिंब है। इसी प्रकार हम दर्पण के सामने रखी अन्य वस्तुओं का भी प्रतिबिंब देखते हैं। आइए, इस विषय में और अधिक जानने का प्रयास करें।

    क्रियाकलाप 11. 11.7- आइए, प्रयोग करें
    • एक समतल दर्पण और एक पेन (अथवा कोई अन्य वस्तु) लीजिए।
    • चित्र 11.10 में दर्शाए अनुसार दर्पण के सामने उस पेन को रखिए।
    आप दर्पण में क्या देखते हैं? ऐसा प्रतीत होता है कि एक वैसा ही पेन दर्पण के पीछे भी रखा है। दर्पण के पीछे दिखाई देने वाली पेन दर्पण द्वारा बने पेन का प्रतिबिंब है। पेन स्वयं एक वस्तु है। img
    चित्र 11.10- समतल दर्पण में एक पेन का प्रतिबिंब
    • अब दर्पण के सामने पेन को भिन्न-भिन्न स्थितियों में रखिए और प्रत्येक स्थिति में दर्पण में बने प्रतिबिंबों के आमापों की तुलना कीजिए।
    क्या वस्तु तथा इसके प्रतिबिंब दोनों के आमाप समान हैं? समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब वस्तु के समान आमाप का होता है।
    • पुनः पेन को दर्पण के सामने भिन्न-भिन्न स्थितियों में रखिए और ध्यान से देखिए कि क्या प्रत्येक स्थिति में प्रतिबिंब सीधा बनता है?
    क्या पेन की नोक प्रत्येक स्थिति में ऊपर की ओर इंगित करती हुई दिखाई देती है? यदि प्रतिबिंब के ऊपरी व निचले सिरे वस्तु के सिरों के समान ही हों तो यह सीधा प्रतिबिंब कहलाता है। किसी समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब सीधा होता है।
    • अब दर्पण के पीछे पर्दे को ऊर्ध्वाधर दिशा में रखिए। इसे सभी ओर घुमाइए। क्या आपको पर्दे पर प्रतिबिंब मिल पाता है? अब दर्पण के सामने पर्दे को रखकर इसे दोहराइए।
    किसी समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता है।
    क्रियाकलाप 11.8 - आइए, प्रयोग करें
    • किसी समतल दर्पण के सामने खड़े हो जाइए और अपना प्रतिबिंब देखिए (चित्र 11.11)। ध्यान से देखिए कि दर्पण के पीछे प्रतिबिंब कितनी दूरी पर बनता है? * अब दर्पण के समीप खड़े हो जाइए। क्या प्रतिबिंब भी दर्पण के अधिक समीप बनता है?
    • दर्पण के सामने भिन्न-भिन्न दूरियों पर खड़े हो जाइए और ध्यान दीजिए कि प्रत्येक स्थिति में प्रतिबिंब दर्पण से कितनी दूरी पर बनता है। क्या आप दर्पण से आपकी दूरी और दर्पण से आपके प्रतिबिंब की दूरी में कोई संबंध पाते हैं?
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    चित्र 11.11 - समतल दर्पण में स्वयं का प्रतिबिंब देखना
    आपने ध्यान दिया होगा कि जब आप समतल दर्पण के समीप खड़े होते हैं तो प्रतिबिंब भी दर्पण के समीप बनता है। जब आप समतल दर्पण से दूर खड़े होते हैं तो प्रतिबिंब भी दर्पण से दूर बनता है।
    • अपना बायाँ हाथ उठाइए और देखिए कि दर्पण में बना प्रतिबिंब कौन-सा हाथ उठाता है?
    • अपना दायाँ कान स्पर्श कीजिए और देखिए कि दर्पण में बना प्रतिबिंब कौन-से कान को स्पर्श करता है?

    आप देखते हैं कि आपका वाम पक्ष प्रतिबिंब में उसका दक्षिण पक्ष और आपका दक्षिण पक्ष प्रतिबिंब में उसका वाम पक्ष दिखाई पड़ता है। इस प्रकार हुआ वाम-दक्षिण उत्क्रमण पार्श्व उत्क्रमण कहलाता है। समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंबों में पार्श्विक परिवर्तन होता है।

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    अच्छा! अब मैं समझ गया हूँ कि रोगी वाहनों पर 'TOMAJUMA क्यों लिखा जाता है। जब रोगी वाहन के आगे चलने वाले वाहनों के चालक अपने वाहन में लगे पश्चदर्शी दर्पण में इसे देखते हैं तो यह 'AMBULANCE' पढ़ा जाता है।

    रोचक तथ्य

    दर्पण का आविष्कार कब हुआ यह ज्ञात नहीं है। पहले पत्थर अथवा धातु को पॉलिश करके दर्पण बनाए जाते थे। जब काँच के दर्पणों का निर्माण आरंभ हुआ तो धात्वीय दर्पण बनने की कला धीरे-धीरे लुप्त हो गई। तथापि यह कला आज भी जीवित है जैसा कि केरल में एक अद्वितीय धातु सतह वाले दर्पण 'अरनमुला कन्नाड़ी' शताब्दियों से बनाए जा रहे हैं।
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    क्या किसी वस्तु का प्रतिबिंब हम केवल दर्पण में ही देख सकते हैं अथवा इन्हें देखने की कोई अन्य विधि भी है?

    11.7 सूचीछिद्र कैमरा

    सूचीछिद्र कैमरा एक ऐसी युक्ति है जिसमें किसी वस्तु से आने वाली प्रकाश किरणें एक छोटे से छिद्र (सूचीछिद्र) से होकर गुजरती हैं और पर्दे पर इसका प्रतिबिंब बनाती हैं।

    क्रियाकलाप 11.9 - आइए, अन्वेषण करें

    सावधानी- जलती हुई मोमबत्ती का प्रयोग किसी वयस्क के निर्देशन में ही कीजिए।

    • एक मोमबत्ती और एक गत्ते का टुकड़ा लीजिए। गत्ते के टुकड़े में एक छोटा छिद्र बनाइए।
    • किसी कम प्रकाशित कमरे में इस गत्ते के टुकड़े से कुछ दूरी पर एक पर्दा रखिए।
    • चित्र 11.12 (क) में दर्शाए अनुसार इसके सामने एक जलती हुई मोमबत्ती रखिए।
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    चित्र 11.12- (क) एक सरल सूचीछिद्र कैमरा
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    चित्र 11.12- (ख) पर्दे पर बना मोमबत्ती की लौ का प्रतिबिंब

    आप पर्दे पर क्या देखते हैं? लौ से निकलने वाला प्रकाश गत्ते के छिद्र से गुजरता है और मोमबती की लौ का प्रतिबिंब पर्दे पर बनता है। क्या आप कुछ आश्चर्यजनक देखते हैं? मोमबत्ती की लौ का प्रतिबिंब उल्टा अर्थात व्युत्क्रमित बनता है।

    आइए, अब हम एक सूचीछिद्र कैमरा बनाते हैं जिसका आप घर के बाहर भी उपयोग कर सकते हैं।

    क्रियाकलाप 11.10 - आइए, निर्माण करें
    • गत्ते के ऐसे दो बॉक्स लीजिए जिनमें एक बॉक्स दूसरे बॉक्स के भीतर खिसक सके और उनके बीच स्थान बहुत कम हो। प्रत्येक बॉक्स का एक-एक फलक काट दीजिए।
    • बड़े बॉक्स के बंद फलक के मध्य एक छोटा-सा छिद्र बनाइए [चित्र 11.13 (क)]।
    • छोटे बॉक्स के बंद फलक के मध्य में एक वर्गाकार आकृति (जिसकी भुजा लगभग 5 cm से 6 cm हो) काटिए। इस कटे भाग को एक पतले पारभासी पेपर (जैसे - अनुरेखण पत्र) से ढक दीजिए जो एक पर्दे की तरह काम करे [चित्र 11.13 (ख)]।
    • छोटे बॉक्स को बड़े बॉक्स में इस प्रकार खिसकाइए कि अनुरेखण पत्र वाला फलक बड़े बॉक्स के भीतर हो [चित्र 11.13 (ग)]।

    सूचीछिद्र को वस्तु की ओर रखते हुए अपने सूचीछिद्र कैमरे को पकड़िए और अब छोटे बॉक्स के खुले सिरे से देखिए। अपने सिर तथा सूचीछिद्र कैमरे को काले रंग के कपड़े से ढक लीजिए। अब सूचीछिद्र कैमरे से दूर की वस्तु जैसे किसी पेड़ अथवा किसी भवन को सूर्य के चमकदार प्रकाश में देखिए और छोटे बॉक्स को आगे या पीछे खिसकाकर अनुरेखण पत्र पर बना इसका स्पष्ट प्रतिबिंब देखिए।

    क्या कैमरे में दिखाई दे रहा प्रतिबिंब दूसरी ओर की वस्तु के रंगों को दर्शाता है? क्या प्रतिबिंब सीधा है अथवा उल्टा?

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    चित्र 11.13- खिसकने योग्य पर्दे वाला सूचीछिद्र कैमरा

    एक सूचीछिद्र कैमरा उर्ध्वाधरतः उत्क्रमित (उल्टा) प्रतिबिंब बनाता है। जबकि दर्पण से प्राप्त प्रतिबिंब पार्श्वतः उत्क्रमित होता है न कि उर्ध्वाधरतः उत्क्रमित। हम इसके विषय में उच्च कक्षाओं में और अधिक सीखेंगे।

    11.8 कुछ उपयोगी उपकरण बनाना

    यह जानने के पश्चात कि प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है और दर्पणों द्वारा परावर्तित होता है, अब इस अधिगम पर आधारित कुछ उपयोगी उपकरणों को बनाने का समय है।

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    चित्र 11.14 - परिदर्शी

    11.8.1 परिदर्शी (पेरिस्कोप)

    एक सरल परिदर्शी बनाने के लिए चित्र 11.14 में दर्शाए अनुसार हम एक Z आकृति के बॉक्स में दो समतल दर्पण लगाते हैं।

    इन दोनों दर्पणों से क्रमिक परावर्तन के पश्चात हमारी आँखों तक पहुँचने वाला प्रकाश हमें उन वस्तुओं को देखने में सक्षम बनाता है जो हमें सीधे दृश्यमान नहीं होती है। परिदर्शियों का उपयोग पनडुब्बियों में, टैंकों में या सैनिकों द्वारा अपने बंकरों से बाहर देखने के लिए किया जाता है। आप इसे अपने सामने खड़े लंबे मित्रों के आगे की वस्तुओं को देखने हेतु उपयोग में ला सकते हैं।

    11.8.2 बहुमूर्तिदर्शी (कैलाइडोस्कोप)

    तीन समान चौड़ाई की आयताकार समतल दर्पण की पट्टियाँ लीजिए और उन्हें चित्र 11.15 (क) में दर्शाए अनुसार त्रिभुजाकार आकृति में जोड़ लीजिए। दर्पण के स्थान पर आप मोटे परावर्तक पेपर की तीन पट्टियाँ भी ले सकते हैं। अपनी इस संरचना को एक मोटे चार्ट पेपर की बेलनाकार नली में स्थायी कीजिए [चित्र 11.15 (ख)]। नली के एक सिरे पर एक पारदर्शक प्लास्टिक शीट रबड़ बैंड की सहायता से अथवा आसंजक टेप से चिपका दीजिए। इस शीट पर रंगबिरंगी चूड़ियों के टुकड़े अथवा मनके रखिए [चित्र 11.15 (ग)] और इसे ट्रेसिंग पेपर से ढक दीजिए। ट्रेसिंग पेपर का स्थायीकरण रबड़ बैंड से अथवा आसंजक टेप से कीजिए।

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    चित्र 11.15 - बहुमूर्तिदर्शी

    खुले सिरे की ओर से नली में देखने पर आपको एक सुंदर प्रतिरूप (पैटर्न) दिखाई पड़ता है (चित्र 11.15 घ)। यदि आप बहुमूर्तिदर्शी के दोनों सिरे खुले रखते हुए इसे किसी पेड़ अथवा अन्य वस्तु की ओर सरेखित करते हैं तब भी आप को सुंदर प्रतिरूप दिखते हैं। बहुमूर्तिदर्शी की एक रोचक विशेषता यह है कि इसको घुमाने पर आप को प्रत्येक बार भिन्न-भिन्न प्रतिरूप ) दिखाई देते हैं। इसके अनेक प्रतिबिंब बनने का कारण यह है कि बहुमूर्तिदर्शी में लगे तीनों दर्पणों पर बार-बार परावर्तन होने से एक वस्तु के अनेक प्रतिबिंब बनते हैं जो मिलकर सुंदर प्रतिरूप बनाते हैं। अभिकल्पक और कलाकार नए प्रतिरूपों के विचार प्राप्त करने हेतु सामान्यतः बहुमूर्तिदर्शी का उपयोग करते हैं।

    संक्षेप में

    • जो वस्तुएँ स्वयं का प्रकाश उत्सर्जित करती हैं वे दीप्त वस्तुएँ कहलाती हैं।
    • प्रकाश एक सरल रेखा में गमन करता है।
    • पारदर्शी पदार्थों से प्रकाश लगभग पूर्णतः संचारित होता है। पारभासी पदार्थों से प्रकाश आंशिक रूप से संचारित होता है। अपारदर्शी पदार्थों से प्रकाश का संचरण नहीं होता है।
    • जब प्रकाश किसी वस्तु द्वारा अवरुद्ध होता है तो छाया बनती है। अपारदर्शी वस्तुएँ गहरी काली छाया बनाती हैं। पारभासी वस्तुएँ धुंधली छाया बनाती हैं। इसके साथ ही कुछ पारदर्शी वस्तुएँ भी धुंधली छाया बना सकती हैं।
    • किसी दर्पण द्वारा प्रकाश की दिशा को परिवर्तित करना प्रकाश का परावर्तन कहलाता है।
    • समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब का आमाप वस्तु के आमाप के समान होता है यह सीधा बनता है तथा इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता है और यह पार्श्वतः व्युत्क्रमित होता है।
    • सूचीछिद्र कैमरा किसी वस्तु का पर्दे पर ऊर्ध्वाधरतः व्युत्क्रमित प्रतिबिंब बनाता है।

    आइए, और अधिक सीखें

    1. निम्नलिखित पिंडों में से कौन-से पिंड दीप्त पिंड हैं?

      मंगल ग्रह, चंद्रमा, ध्रुव तारा, सूर्य, शुक्र ग्रह तथा दर्पण

    2. स्तंभ 'I' में दिए गए पदों का मिलान स्तंभ 'II' में दिए गए सही वाक्यांशों से कीजिए।
      स्तम्भ I स्तम्भ II
      सूचीच्छिद्र कैमरा प्रकाश पूर्णतः अवरुद्ध करती है।
      अपारदर्शी वस्तु वस्तु के पीछे बना गहरा काला क्षेत्र।
      पारदर्शी वस्तु व्यक्तिमित प्रतिबिंब बनता है।
      छाया प्रकाश लगभग पूर्णतः संचरित होता है।
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      चित्र - 11.16
    3. साहिल, रेखा, पैट्रिक और कासिमा चित्र 11.16 में दर्शाए गए पाइप से मोमबत्ती की लौ को देखने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें से कौन लौ देख पाएगा?
    4. चित्र 11.17 में दर्शाए गए प्रतिबिंबों को देखिए और बालक की छाया को दर्शाने वाले सही चित्र का चयन कीजिए। img
      चित्र - 11.17
    5. चित्र 11.18 में दर्शाया गया है कि एक स्थिर टॉर्च के सामने रखी गेंद की छाया दीवार पर बनी है। परिदृश्य (i) में गेंद टॉर्च के समीप है जबकि प्ररिदश्य (ii) में गेंद दीवार के समीप है। दिए गए विकल्पों (क) और (ख) में से दोनों परिदृश्यों का सबसे उपयुक्त प्रदर्शन करने वाले चित्र का चयन कीजिए।
    6. चित्र 11.18 के आधार पर स्तंभ 'I' में टॉर्च की स्थिति का स्तंभ 'II' में गेंद की छाया के अभिलक्षणों के आधार पर मिलान कीजिए।
      स्तम्भ I स्तम्भ II
      यदि टॉर्च गेंद के समीप है छाया बहुत छोटी बनेगी
      यदि टॉर्च गेंद से बहुत दूर है छाया बहुत बड़ी बनेगी
      यदि गेंद को इस व्यवस्था से हटा दिया जाए पर्दे पर दो छाया दिखाई देगी
      यदि इस व्यवस्था में गेंद के बाईं ओर दो टॉर्च लिए जाएँ पर्दे पर एक चमकदार चकत्ता दिखाई देगा
      img
      चित्र - 11.18
    7. माना कि आप चित्र 11.19 में दर्शाए गए वृक्ष को सूचीछिद्र कैमरे की सहायता से देखते हैं। वृक्ष के प्रतिबिंब की पर्दे पर प्राप्त आकृति की रूपरेखा बनाइए।
    8. कागज के किसी टुकड़े पर अपना नाम लिखिए और इसे समतल दर्पण के सामने इस प्रकार पकड़िए कि कागज दर्पण के समांतर रहे। इसके प्रतिबिंब का आरेख बनाइए। कागज पर लिखे नाम और दर्पण में बने इसके प्रतिबिंब के मध्य आप क्या अंतर देखते हैं? इस अंतर के कारण की व्याख्या कीजिए। img
      चित्र - 11.19
    9. अपने मित्र की सहायता से एक समान स्थान पर अपनी छाया की लंबाई सुबह 9 बजे, दोपहर 12 बजे और दोपहर पश्चात 4 बजे मापिए। अपने प्रेक्षणों को लिखिए - (i) आपकी छाया किस समय सबसे छोटी होती है? (ii) आपके विचार से ऐसा क्यों होता है?
    10. निम्नलिखित कथनों के आधार पर सही विकल्प चुनिए - कथन (क) – किसी समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब पाश्र्वतः व्युत्क्रमित होता है। कथन (ख) - अंग्रेजी वर्णमाला के वर्ण T और O के समतल दर्पण में बने प्रतिबिंब वैसे ही दिखते हैं जैसे ये वर्ण हैं।
      1. दोनों कथन सत्य हैं।
      2. दोनों कथन असत्य हैं।
      3. कथन (क) सत्य है किंतु कथन (ख) असत्य है।
      4. कथन (क) असत्य है किंतु कथन (ख) सत्य है।
    11. मान लीजिए कि आपको चित्र 11.20 में दर्शाई गई आकृति की एक नलिका और दो ऐसे समतल दर्पण दिए गए हैं जिनका व्यास नलिका के किया जा सकता है? यदि आपका उत्तर हाँ है तो नलिका पर वह स्थान व्यास से कम है। क्या इस नलिका का उपयोग परिदर्शी बनाने के लिए अंकित कीजिए जहाँ आप समतल दर्पण लगाएँगे। img img
      चित्र - 11.20
    12. बहुत अधिक ऊँचाई पर उड़ते हुए पक्षियों की छाया हमें धरती पर दिखाई नहीं देती है। परंतु जब कोई पक्षी धरती के निकट उड़ता है तो उसकी छाया धरती पर दिखाई देती है। विचार कीजिए और बताइए कि ऐसा क्यों होता है?

    अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ

    • जहाँ आप रहते हैं, क्या वहाँ आपने कभी कोई जुगनू देखा है? यदि नहीं, तो अपने बड़े-बजर्गों से पछिए कि क्या उस क्षेत्र में कभी जगन दिखाई पड़ते थे। यदि हाँ, तो उन कारणों का पता लगाइए जिनके कारण अब वे दिखाई देने बंद हो गए हैं। इसके विषय में एक कहानी बनाइए।
    • क्रियाकलाप 11.4 को दोहराइए परंतु इस बार टॉर्च के प्रकाश उत्सर्जक सिरे को रंगीन पारदर्शी कागज से ढक दीजिए और छाया का रंग देखिए। यह क्रिया विभिन्न रंगों के पारदर्शी कागजों का उपयोग करके दोहराइए।
    • एक समतल दर्पण किसी वस्तु का केवल एक प्रतिबिंब बनाता है। किंतु यदि दो या दो से अधिक समतल दर्पण एक दूसरे से कोई कोण बनाते हुए या एक दूसरे के समांतर रखे हों तो क्या होगा? चित्र 11.21 में दर्शाए अनुसार दो दर्पण रख कर पता लगाइए कि इनसे कितने प्रतिबिंब बनते हैं। img img
      चित्र 11.21- दो दर्पणों में बने प्रतिबिंबों का अवलोकन
    • आपको एक छोटा समतल दर्पण दिया गया है। क्या इस दर्पण में इसके आमाप से बड़ी वस्तु जैसे कि किसी विशाल वृक्ष का प्रतिबिंब बन सकता है? विचार कीजिए और पूर्वानुमान लगाइए। इसके पश्चात क्रियाकलाप कीजिए।

    रोचक तथ्य

    सूर्य से उत्सर्जित प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग 8 मिनट 20 सेकंड लगते हैं। अतः यदि सूर्य अचानक प्रकाश उत्सर्जित करना बंद कर दे तो उसके बाद 8 मिनट 20 सेकंड तक हमें इस बात का पता नहीं चलेगा।
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