अध्याय -2
मौसम को समझना
मौसम में परिवर्तन ही स्वयं एवं विश्व के नवीनीकरण के लिए पर्याप्त है।
– मार्सेल प्रूस्ट, फ्रांसीसी उपन्यासकार

महत्वपूर्ण प्रश्न ?
- 1. हम अपने आस-पास के मौसम का आकलन एवं निरीक्षण किस प्रकार कर सकते हैं?
- भारी वर्षा, तूफान, सूखा और ताप लहर (हीट वेव) जैसी घटनाओं के लिए तैयार रहने में मौसम की भविष्यवाणियाँ किस प्रकार हमारी सहायता करती हैं?
मौसम और इसके तत्व
आप सर्दी की एक सुबह उठते हैं और ठंड से काँपने लगते हैं। ठंड से बचने के लिए आप भारी कपड़े पहनते हैं। गर्मियों में आप ऐसे कपड़ों का चयन करते हैं, जो आपको ठंडा रखने में सहायक होते हैं और आरामदायक लगते हैं। आपका शरीर मौसम का अनुभव करता है और आप अपने शरीर के संकेतों के अनुसार प्रतिक्रिया करते हैं।
मौसम क्या है?
किसी समय और स्थान विशेष पर पृथ्वी की वायुमंडलीय दशाओं को मौसम कहते हैं। किंतु वायुमंडल क्या है? सरल शब्दों में कहें तो यह एक गैसीय परत है, जो कुछ ग्रहों को घेरे रहती है। पृथ्वी के संदर्भमें इन गैसों को हम 'वायु' कहते हैं। पृथ्वी के वायुमंडल की तुलना अनेक परतों वाले केक से की जा सकती हैं। पृथ्वी की सतह के सबसे निकट वाली परत को क्षोभमंडल (ट्रोपोस्फीयर) कहते हैं और यही वह क्षेत्र है, जहाँ सभी स्थलीय वनस्पतियाँ एवं प्राणी (मानव सहित) निवास करते है और श्वास लेते हैं। इसी परत में लगभग सभी प्रकार की मौसम संबंधी घटनाएँ घटित होती हैं, जिनका अध्ययन हम इस अध्याय में करेंगे। क्षोभमंडल पृथ्वी की सतह से 6 से 18 किमी तक विस्तृत है। ध्रुवों (जहाँ ठंडी वायु सिकुड़ती है) पर यह परत पतली होती है और उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) क्षेत्र पर (जहाँ गर्म वायु फैलती है) यह परत मोटी होती है। अन्य परतों के बारे में आप अपनी विज्ञान की कक्षाओं में अध्ययन करेंगे।

मौसम का वर्णन करने के लिए हम अनेक शब्दों का उपयोग करते हैं, जैसे – गर्म, ठंडा, वर्षा, मेघाच्छादित, आर्द्र, बर्फीला, तूफानी इत्यादि। इनके माध्यम से हम मौसम के विभिन्न तत्वों को परिभाषित एवं अनुभव कर सकते हैं।
आइए पता लगाएँ
आप अपनी स्थानीय भाषा में मौसम का वर्णन करने के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग करते हैं? हॉट, कोल्ड, वॉर्म, चिली, क्रिस्प, प्लेजेंट आदि सामान्यतः अंग्रेजी भाषा में उपयोग किए जाने वाले शब्द हैं।
मौसम के तत्व
- तापमान (टेंप्रेचर) – वायुमंडल कितना गर्म अथवा ठंडा है।
- वर्षण (प्रेसिपिटेशन) – जल के वे सभी रूप, जैसे- वर्षा, हिम, सहिमवृष्टि या ओले, जो आकाश से पृथ्वी पर गिरते हैं।
- वायुमंडलीय दबाव (एट्मॉस्फेरिक प्रेशर) – वायु का वह दबाव जिसे हम पृथ्वी की सतह पर अनुभव करते हैं।
- पवन (विंड) – वायु का संचलन जिसमें इसकी गति और दिशा सम्मिलित हैं।
- आर्द्रता (ह्यूमीडिटी) – वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा।
आइए विचार करें
कल्पना कीजिए कि चेन्नई का कृष्णन कश्मीर में रहने वाले आमिर से वार्तालाप कर रहा है। कृष्णन कह रहा है कि पिछली रात की वर्षा के बाद चेन्नई में ठिठुरन हो गई है। आमिर पूछता है कि वहाँ कितनी ठंड है। कृष्णन आमिर को कैसे बताएगा कि चेन्नई में कितनी ठंड है? आखिरकार, कृष्णन के लिए जो मौसम ठंडा है, वह आमिर के लिए बहुत सुहावना हो सकता है!
जैसा कि आप देख सकते हैं, कृष्णन के लिए अपनी ठंडक की अनुभूति आमिर को समझाना तब तक कठिन है, जब तक तापमान को मापने का कोई सर्वमान्य साधन न हो। यह बात मौसम के अन्य तत्वों पर भी लागू होती है। इस अध्याय में हम सामान्य मानकों का उपयोग करते हुए मौसम को मापने और समझने का प्रयास करेंगे।
आइए पता लगाएँ
आपके अनुसार मौसम के अधिक सटीक आकलन के क्या लाभ हो सकते हैं? (संकेत -कुछ घंटे अथवा कुछ दिन पहले मौसम के विषय में पूर्व जानकारी आपको कुछ गतिविधियों की योजना बनाने में किस प्रकार सहायता करेगी?)
- प्राचीनकाल से ही मनुष्य ने प्रकृति का ध्यानपूर्वक अवलोकन किया है और मौसम के पूर्वानुमान हेतु इसके संकेतों को पढ़ना सीखा है। पक्षियों को कम ऊँचाई पर उड़ते हुए देखना, अंडे ले जाती हुई चींटियाँ, काष्ठफल या मेवें एकत्रित करती हुई गिलहरियाँ, मेढ़कों की तेज टरटराहट अथवा यहाँ तक कि चीड़ के शंकुओं का खुलना और बंद होना आदि भी आने वाली वर्षा या तूफान के बारे में संकेत प्रदान करते हैं। यह ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता गया है। आज भी भारत के अनेक भागों में लोग मौसम का पूर्वानुमान, विशेषकर मानसून के आगमन के लिए, पांरपरिक तरीकों का उपयोग करके लगाते हैं।
प्रकृति के संकेतों का अवलोकन


आइए पता लगाएँ
पिछली कुछ शताब्दियों में वैज्ञानिकों ने मौसम के तत्वों को बहुत ही सटीकता के साथ मापने और निरीक्षण करने के तरीकों पर कार्य किया है। विभिन्न जानकारियों के आधार पर मौसम विज्ञानी यह अनुमान लगाने का प्रयास करते हैं कि मौसम किसी प्रदेश विशेष में कुछ घंटों, कुछ दिन अथवा यहाँ तक कि कुछ सप्ताह बाद कैसा होगा? वे यह कैसे करते हैं? क्या वे केवल आकाश को देखकर अनुमान लगाते हैं? नहीं, उनके पास कुछ आधुनिक उपकरण होते हैं। अब हम उनमें से कुछ का अध्ययन करेंगे।
मौसम मापन के उपकरण
क) तापमान
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तापमापी कई प्रकार के होते हैं, कुछ सामान्य रूप से हमारे आस-पास के परिवेश के तापमान को मापते हैं, जबकि अन्य तापमापी दिन के अधिकतम और न्यूनतम तापमान को मापते हैं। तापमापी प्रायः रंगीन द्रव का उपयोग करते हैं, जो तापमान बढ़ने पर फैलता है। हालाँकि, अंकीय (डिजिटल) तापमापी को अधिक पसंद किया जाता है, क्योंकि वे ज्यादा सटीक होते हैं और अधिक आँकड़े दर्ज कर सकते हैं।
वास्तव में तापमान के रिकॉर्ड का उपयोग कुछ अन्य महत्वपूर्ण सांख्यिकीय आँकड़ों का संग्रह करने में भी किया जा सकता है, जिसमें सम्मिलित हैं -
- ताप सीमा अथवा एक विशेष अवधि (सामान्यतः 24 घंटे) के दौरान अधिकतम तापमान से न्यूनतम तापमान को घटाना।
- औसत दैनिक तापमान अथवा दिन के अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान को जोड़कर प्राप्त संख्या को दो से विभाजित करने पर प्राप्त मान।
इसे अनदेखा न करें
- भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना 1875 में की गई थी। इसका आदर्श वाक्य 'आदित्यात् जायते वृष्टि' है, जिसका अर्थ 'सूर्य से वर्षा होती है'। यह वाक्यांश प्राचीन ग्रंथ मनुस्मृति से लिया गया है और इस पूर्ण वाक्य का अर्थ है- 'सूर्य से वर्षा होती है, वर्षा से भोजन या अन्न प्राप्त होता है और भोजन या अन्न से जीव उत्पन्न होते हैं'।
- सूर्य से वर्षा क्यों होती है? क्या आप इसका कारण सोच सकते हैं?

आइए पता लगाएँ
- यहाँ मध्य प्रदेश में एक नगर के तापमान को एक तालिका द्वारा प्रस्तुत किया गया है। सप्ताह में अधिकतम और न्यूनतम तापमान कितना है? ताप सीमा (रेंज) का आकलन कीजिए।
- कृष्णन और आमिर के बीच हुए वार्तालाप को याद करें। अगर कृष्णन कहता है कि चेन्नई में तापमान 20 डिग्री सेल्सियस है और उसे थोड़ी ठंड लग रही है, तो उसके और आमिर के पास कोई साधन होगा जिससे वे दोनों इसे समझ सकते हों। आमिर द्वारा कृष्णन के कथन पर दी गई प्रतिक्रिया के बारे में आप क्या सोचते हैं?
| दिनांक | अधिकतम तापमान (सेल्सियस) | न्यूनतम तापमान (सेल्सियस) |
|---|---|---|
| 28.02.2025 | 29 | 16 |
| 01.03.2025 | 30 | 15 |
| 02.03.2025 | 31 | 17 |
| 03.03.2025 | 32 | 18 |
| 04.03.2025 | 30 | 17 |
| 05.04.2025 | 28 | 14 |
| 06.03.2025 | 29 | 15 |
ख) वर्षण
यदि यह समाचार मिलता है कि किसी स्थान विशेष पर 30 मि.मी. वर्षा हुई, तो इसका क्या तात्पर्य है? वर्षा को कैसे मापा जाता है?
वर्षा की मात्रा को मापने के लिए एक यंत्र का उपयोग किया जाता है, जिसे वर्षामापी (रेन गेज) कहते हैं (चित्र 2.6)। जब वर्षा होती है, तब जल संग्राहक कीप में गिरता है और उसे बेलनाकार नली (सिलेंडर) में एकत्रित कर लिया जाता है। एकत्रित किए गए वर्षा जल की गहराई को मापने के लिए नली पर एक मापक अंकित रहता है। जब एकत्रित किए गए जल की ऊँचाई 5 मि.मी. होती हैं, तो हम कहते है कि क्षेत्र में 5 मि.मी. वर्षा हुई है।
आइए पता लगाएँ
ऊपर दर्शाए गए चित्रानुसार एक वर्षामापी बनाइए। वर्षामापी को खुले स्थान में रखिए और ऐसी वस्तुओं से दूर रखिए, जो वर्षा के जल संग्रहण में बाधक हो सकती हैं। यह भी सुनिश्चित कीजिए कि वर्षामापी समतल सतह पर हो और हवा से झुके अथवा गिरे नहीं। मापक की सहायता से वर्षा की मात्रा को प्रतिदिन एक ही समय पर एक महीने तक अभिलेखित कीजिए (यदि हिमपात होता है, तो उसे मापने से पहले पिघलने दीजिए)। उस महीने के प्रत्येक सप्ताह में होने वाली औसत वर्षा की गणना कीजिए तथा सप्ताह दर सप्ताह में होने वाली वर्षा के अंतर पर टिप्पणी कीजिए।
ग) वायमंडलीय दाब
हमारा शरीर तापमान और वर्षा से भली-भाँति परिचित है। किंतु आपने यह भी अनुभव किया होगा कि आँधी-तूफान से पहले मौसम 'भारी' सा लगता है। यह वायुमंडलीय दबाव से संबंधित है, जो वायु के भार के द्वारा, हमारे ऊपर और आस-पास लगाया जाता है।
वायुमंडलीय दबाव समुद्र तट के पास अधिक होता है और जैसे-जैसे हम पहाड़ों की ओर ऊँचाई पर जाते हैं, यह कम होता जाता है। जब आप पहाड़ों पर चढ़ाई करते हैं, तो नीचे के मैदानों की तुलना में पहाड़ों पर वायु हल्की हो जाती है। परिणामस्वरूप, वायु का दबाव कम हो जाता है और हमारे फेफड़ों के लिए उपलब्ध ऑक्सीजन की मात्रा भी घट जाती है। रक्त में कम ऑक्सीजन जाने के कारण, आपका शरीर आपको गतिशील रखने के लिए अधिक परिश्रम करता है। यही कारण है कि लोग कभी-कभी उच्च स्थानों पर साँस फूलना, चक्कर आना अथवा थकावट आदि का अनुभव करते हैं।

इसका तात्पर्य यह नहीं है कि वायुमंडलीय दाब नीचे के मैदानों में अथवा तटों पर हमेशा अधिक होता है। यह कभी-कभी नाटकीय रूप से गिर जाता है और इसे मौसम-विज्ञानी गर्त (डीप्रेशन) अथवा निम्न दबाव तंत्र (लो प्रेशर सिस्टम) कहते हैं, जो कभी-कभी तूफान अथवा चक्रवात का रूप भी ले सकता हैं।
आइए विचार करें
कल्पना कीजिए कि चेन्नई का कृष्णन कश्मीर में रहने वाले आमिर से वार्तालाप कर रहा है। कृष्णन कह रहा है कि पिछली रात की वर्षा के बाद चेन्नई में ठिठुरन हो गई है। आमिर पूछता है कि वहाँ कितनी ठंड है। कृष्णन आमिर को कैसे बताएगा कि चेन्नई में कितनी ठंड है? आखिरकार, कृष्णन के लिए जो मौसम ठंडा है, वह आमिर के लिए बहुत सुहावना हो सकता है!
आपके अनुसार वायुमंडलीय दाब को मापना क्यों महत्वपूर्ण है? वे कौन हैं जिन्हें इस प्रकार के मापनों की सर्वाधिक आवश्यकता होती है?
आइए विचार करें
अधिक ऊँचाई वाले स्थानों की यात्रा करने वाले व्यक्तियों को यह सलाह दी जाती है कि वे शरीर के पर्यानुकूलन के लिए मार्ग में विश्राम करें। हमारे सैन्यकर्मी ऊँचाई वाले स्थानों पर सेवाएँ देते हैं, जैसे- लद्दाख में खार्दुग-ला। यह स्थान समुद्रतल से 5600 मीटर से भी अधिक ऊँचाई पर है। यह कल्पना करना कठिन है कि वे ऐसे स्थानों पर कैसे रहते हैं और अनवरत सुरक्षा करते हैं। वहाँ ऑक्सीजन का स्तर इतना कम है कि वायुमंडलीय दाब लगभग 650 मिलीबार होता है!

घ) पवन
उच्च दबाव वाले क्षेत्र से निम्न दबाव वाले क्षेत्र की ओर वायु का प्रवाह ही पवन कहलाता है। जब हम पवन का वर्णन करते हैं, तब गति और दिशा पवन के दो महत्वपूर्ण कारक होते हैं।
आइए विचार करें
क्या आपने बीजों को इस प्रकार से पवन में उड़ते देखा है? अगर पवन न होती तो इन बीजों का क्या होता?

पवन मौसम का एक महत्वपूर्ण तत्व है। मौसम का पूर्वानुमान लगाने में इसकी गति और दिशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके अतिरिक्त, वायुयान चालकों और नाविकों को पवन संबधी आँकड़ों की जानकारी की आवश्यकता होती है, क्योंकि पवन उड़ानों और नौकायन को बहुत प्रभावित करती है। कृषक भी पवन की दिशा का प्रयोग आने वाली वर्षा की दिशा का अनुमान लगाने के लिए करते हैं। साथ ही, तीव्र गति वाली पवन मिट्टी के जल्दी सूखने का कारण बनती है।
हम पवन की दिशा और गति को कैसे मापते हैं? वात दिक्सूचक यंत्र (विंड वेन) में एक घूमने वाला फलक होता है, जिसके एक छोर पर एक सूचक या पॉइंटर और दूसरे छोर पर पूँछ होती है। जब पवन बहती है, तो पूँछ पर धक्का मारती है और तब सूचक पवन की दिशा में मुड़ जाता है। यह यंत्र मंद पवन में भी प्रतिक्रिया देता है।
हवाई अड्डों पर वात दिक्सूचक यंत्र को वात शंकु (विंड सॉक) कहा जाता है। वायुयान चालकों को यह उड़ान भरते (टेक ऑफ) और उतरते (लैंडिंग) समय पवन की दिशा का संकेत देता है। इसी तरह वात शंकुओं का उपयोग राख अथवा गैस निस्तारित करने वाले उद्योगों में भी किया जाता है।

पवन की गति और दिशा को मापने के लिए सबसे सरल उपकरण पवन वेगमापी (एनीमोमीटर) है। इसमें तीन अथवा चार धातु के प्याले होते हैं, जो एक उर्ध्वाधर स्तंभ पर घूमते हैं। पवन जितनी तेज बहती है, घूर्णन उतना ही अधिक होता है। तल पर लगा हुआ मीटर यह गिनता है कि पवन वेगमापी एक निश्चित समय में कितनी बार घूमता है और पवन की गति किलोमीटर प्रति घंटा में मापता है।
ङ) आर्द्रता
हमारी सूची में मौसम का अंतिम तत्व आर्द्रता है जो वायु में जलवाष्प की मात्रा को प्रदर्शित करती है। यह तापमान, पवन, वायुदाब और स्थान जैसे कारकों पर निर्भर करती है।
आइए पता लगाएँ
कोच्चि और जयपुर में कहाँ अधिक आर्द्रता होने की संभावना है? इसके बारे में आप क्या सोचते हैं? आप अनुमान लगा सकते हैं कि समुद्र के निकट होने के कारण कोच्चि में जयपुर की तुलना में अधिक आर्द्रता होगी। किंतु हम निश्चित रूप से इसे कैसे जान सकते हैं? यदि हमे कोच्चि और मंगलुरू के बीच आर्द्रता की तुलना करनी हो, तो हम यह कैसे करेंगे? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
आर्द्रता को मापने के तरीकों को सीखकर हम इन प्रश्नों के उत्तर अधिक सटीकता से दे सकते है।
आगे बढ़ने से पहले, हमें कक्षा 6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में दिए गए 'जल की अवस्था' वाले पाठ का स्मरण करना चाहिए। यह हमें 'आर्द्रता को कैसे मापते हैं' को समझने में सहायता करेगा।
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- जब जल वाष्पित होता है, तो यह शीतलन प्रभाव उत्पन्न करता है।
- यदि वायु में जल की मात्रा पहले से ही अधिक (उच्च आर्द्रता) है, तो जल धीरे-धीरे वाष्पित होगा। ऐसा सामान्यतया वर्षा के दिनों में होता है।
वायु की आर्द्रता को सापेक्षिक आर्द्रता के रूप में मापा जाता है। यदि वायु में बिल्कुल भी जलवाष्प नहीं होगी (जो प्राकृतिक परिस्थितियों में असंभव है) तो उसमें शून्य प्रतिशत आर्द्रता होगी। जबकि जलवाष्प से संतृप्त वायु में सापेक्षिक आर्द्रता 100 प्रतिशत होती है। व्यावहारिक रूप में शुष्क मौसम में आर्द्रता 20 प्रतिशत से 40 प्रतिशत के बीच होती है। जबकि आर्द्र मौसम में सापेक्षिक आर्द्रता 60 प्रतिशत से 80 प्रतिशत के बीच होती है।
लेकिन हम ऐसी संख्याओं को कैसे मापते हैं? यह आर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर) नामक उपकरण की सहायता से किया जाता है। पुनः आर्द्रतामापी भी कई प्रकार के होते हैं, जो उनके सिद्धांत पर निर्भर करते हैं। खाद्य प्रसंस्करण जैसी अनेक औद्योगिक प्रक्रियाओं में आर्द्रता का मापन बहुत महत्वपूर्ण है। संग्रहालयों में भी आर्द्रता की निगरानी की जाती है, क्योंकि उन्हें अपनी प्रदर्शित की जाने वाली वस्तुओं को बचाने के लिए शुष्क वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता होती है।
मौसम केंद्र (वेदर स्टेशन)
जैसा कि आप जानते हैं, हमें किसी विशेष स्थान और समय पर मौसम को मापने के लिए अनेक उपकरणों की आवश्यकता होती है। मौसम केंद्र में सभी उपकरण लगे हुए होते हैं, जिससे मौसम का आकलन और निगरानी (ट्रैक) करना सरल हो जाता है। सभी उपकरणों की मापों का अध्ययन नियमित अंतराल पर होता है, जो मौसम के मानचित्रण और पूर्वानुमान में सहायता करता है।

स्वचालित मौसम केंद्र (आटोमेटिक वेदर स्टेशन)
स्वचालित मौसम केंद्र एक ऐसा स्वचालित तंत्र है, जो मौसम के आँकड़ों, जैसे-तापमान, आर्द्रता, वायु की गति और दिशा, वर्षा, वायुमंडलीय दाब आदि को मापने और दर्ज करने के लिए विभिन्न संवेदकों (सेंसरों) का उपयोग करता है। इन केंद्रों का उपयोग कृषि, विमानन, नौकायन, पर्यावरणीय निगरानी आदि में व्यापक रूप से किया जाता है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप के बिना सटीक और समयबद्ध मौसम की जानकारी प्राप्त होती है।
इसे अनदेखा न करें

मौसम का पूर्वानुमान
मौसम-विज्ञानी लंबे समय तक इन उपकरणों का उपयोग करके आँकड़े एकत्रित करते हैं। वे आँकड़ों का अध्ययन करते हैं और मौसम संबंधी पूर्वानुमान लगाने के लिए वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करते हैं। आजकल इस तरह की भविष्यवाणियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई हैं, क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा, बाढ़, चक्रवात आदि जैसी गंभीर मौसमी घटनाएँ अधिक होती जा रही हैं।

मौसम का सटीक पूर्वानुमान हमें ऐसी घटनाओं के लिए तैयार रहने में सहायता करता है। पूर्वानुमान स्थानीय सरकारों को संसाधन जुटाने और किसी भी आपदा के लिए तैयार रहने में सक्षम बनाता है। उदाहरण के लिए, यदि समुद्र में तूफानी मौसम की आशंका है तो मछुआरों को अपनी नावों को बाहर निकालने के बारे में चेतावनी दी जाती है या चक्रवात की आशंका है तो पूरे तटीय क्षेत्र को खाली कराना पड़ सकता है।
आइए पता लगाएँ
विभिन्न परिस्थितियों में मौसम का पूर्वानुमान किस प्रकार सहायक हैं, इसकी चर्चा समूह में कीजिए। एक सूची बनाइए और बनाने के बाद अपने निकट बैठे समूह के साथ इसे साझा कर चर्चा कीजिए। आप अलग-अलग परिस्थितियों की कितनी श्रेणियों की पहचान कर सकते हैं?
चित्र 2.13 में दिए गए भारत के मानचित्र को ध्यान से देखिए। यह मानचित्र भारत के मौसम विज्ञान विभाग द्वारा 19 मई 2024 को जारी किया गया था। प्रतीकों का अध्ययन कीजिए और मानचित्र पर दर्शाई गई परिस्थितियों के साथ मिलान कीजिए।
आइए पता लगाएँ
- आप उस दिन क्या-क्या घटित होते हुए देखते हैं? वे कौन-कौन सी परिस्थितियाँ हैं, जिनके बारे में भारतीय मौसम विभाग लोगों को सचेत कर रहा है?
- किन राज्यों में चेतावनी के संकेत हैं?
- भारत के कौन-से भाग भीषण मौसमी घटनाओं से मुक्त हैं?
- किन राज्यों में ताप लहर की संभावना है?
- त्रिपुरा और लक्षद्वीप में चेतावनी के क्या कारण हैं?
आगे बढ़ने से पहले...
- तापमान, आर्द्रता, वर्षण, पवन और वायुमंडलीय दाब मिलकर किसी स्थान विशेष पर मौसम को परिभाषित करते हैं।
- इन तत्वों की स्थिति को विशेष उपकरणों का उपयोग करके मापा जाता है। इनसे एकत्रित आँकड़े हमें मौसम की निगरानी और भविष्यवाणी करने में सहायता करते हैं।
- अलग-अलग समय या परिस्थितियों में मौसम का कोई एक तत्व प्रमुख होता है, उदाहरण के लिए, जुलाई में वर्षा, मई और दिसंबर में तापमान, चक्रवात के
- गतिशील होने पर वायुमंडलीय दाब, लू (गर्मियों में उत्तर भारत में चलने वाली तेज गर्म और धूल भरी हवाएँ) के चलते समय अथवा जंगल में आग के फैलते समय पवन।
- मौसम का जलवायु से गहरा संबंध है। इसका अध्ययन हम अगले अध्याय में करेंगे।
प्रश्न और क्रियाकलाप
- मौसम के तत्वों का उनको मापने वाले उपकरणों के साथ मिलान कीजिए।
- ज्योत्सना यह सोच रही है कि जून में मुंबई में अपनी विद्यालय यात्रा के समय कौन-से कपड़े साथ ले जाए। वह मौसम के पूर्वानुमान को देखती है, जो 29 डिग्री सेल्सियस और 84 प्रतिशत आर्द्रता की भविष्यवाणी करता है। आप उसको क्या सलाह देंगे?
- - कल्पना कीजिए कि आपका एक छोटा समूह वर्षामापी यंत्र स्थापित कर रहा है। यहाँ उसे स्थापित करने के स्थान के कुछ विकल्प दिए गए हैं -
1. विद्यालय का सब्जी उद्यान ।
2. विद्यालय भवन की छत ।
3. ऊँचे चबूतरे के साथ खुला मैदान ।
4. विद्यालय परिसर की दीवार।
5. विद्यालय प्रयोगशाला का बरामदा ।अपने समूह के साथ चर्चा कीजिए और सर्वाधिक उपयुक्त स्थान का निर्धारण कीजिए। अपने निर्णय के कारणों को लिखिए।
- नीचे भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, जम्मू और कश्मीर से ली गई एक सारणी है। उपलब्ध आँकड़ों को देखते हुए, दिखाए गए दिन को, जम्मू और कश्मीर के विभिन्न भागों में मौसम की स्थिति को दर्ज करने हेतु एक लघु आलेख लिखिए। (संकेत – ताप सीमा, अधिकतम और न्यूनतम तापमान, आर्द्रता, वर्षा आदि को सम्मिलित करें।)
दैनिक मौसम मापदंड
जम्मू और कश्मीर (सायंकाल)
दिनांक - 01-02-2024
ध्यान दें - ACT (एक्चुअल अर्थात वास्तविक), NOR (नॉर्मल अर्थात सामान्य), DEP (डिपार्चर अर्थात सामान्य से हटकर), R/F (रेनफॉल अर्थात वृष्टि), S/N (स्नोफॉल अर्थात हिमपात), TR (ट्रेस अमाउंट अर्थात वर्षण की माप)।