अध्याय - 12
बाजारों की समझ
बाजार से समृद्धि तभी उत्पन्न होती है, जब व्यक्तियों को उन वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता होती है, जिन्हें वे स्वयं निर्मित नहीं कर सकते हैं।
- एडम स्मिथ, 18वीं शताब्दी के अर्थशास्त्री
महत्वपूर्ण प्रश्न ?
- बाजार क्या होते हैं और वे कैसे कार्य करते हैं?
- व्यक्तियों के जीवन में बाजारों की क्या भूमिका है?
- सरकार बाजारों में क्या भूमिका निभाती है?
- उपभोक्ता अपनी क्रय की गई वस्तुओं तथा सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन किस प्रकार कर सकते हैं?



बाजार क्या है?
वह स्थान जहाँ लोगों द्वारा विभिन्न वस्तुओं का क्रय और विक्रय किया जाता है, उसे बाजार कहते हैं। इसे हिंदी में हाट और कन्नड़ में 'मारुकट्टे' कहा जाता है। आपके क्षेत्र में इसे क्या कहा जाता है? बाजार कहीं भी हो सकता है और वर्तमान में ऑनलाइन बाजार बहुत ही ज्यादा प्रचलित हो रहा है। वस्तुएँ और सेवाएँ बाजार के माध्यम से व्यक्तियों, परिवारों और व्यापारियों के लिए उपलब्ध हो रही हैं। लंबे समय से व्यक्ति वस्तुओं और सेवाओं की मूलभूत आवश्यकताओं एवं अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बाजारों पर निर्भर रहे हैं। इसके अलावा बाजार लोगों, परंपराओं और विचारों को जोड़ते हैं।
आइए, 16वीं शताब्दी के भारत से एक बाजार का उदाहरण देखते हैं।
गौरवशाली हंपी बाजार, कर्नाटक

कर्नाटक में हंपी बाजार समृद्ध व्यापार का केंद्र और विजयनगर साम्राज्य के समृद्ध बाजारों में से एक था। यह बाजार विरूपाक्ष मंदिर के सामने स्थित था। अनेक विदेशी लेखों में इस शहर की अपार समृद्धि और संपन्नता का वर्णन किया गया है।
प्रसिद्ध पुर्तगाली यात्री डोमिन्गोस पेस ने हंपी बाजार में विभिन्न प्रकार के उत्पादों का कारोबार होने के कारण इसे 'विश्व में उत्कृष्ट उपलब्धता वाला शहर' कहा था। यहाँ पर विभिन्न प्रकार के उत्पाद, जैसे- अनाज, बीज, दूध, तेल, रेशम तथा पशुओं में गाय, खरगोश, घोड़े और यहाँ तक कि बटेर और तीतर जैसे पक्षियों का भी व्यापार होता था। एक और पुर्तगाली यात्री फर्नाओ नुनिज ने हंपी बाजार के बारे में लिखा, "वहाँ शिल्पकार भी थे, जो अपनी गलियों में काम करते थे और जिन्हें आप सोने के जवाहरात और कृत्रिम आभूषण बनाते हुए और हर प्रकार के माणिक्य, हीरे-मोतियों के साथ बेचते हुए देख सकते थे। कपड़ों के विक्रेताओं के लिए कपास और प्रचुर मात्रा में घास और भूसे की भी उपलब्धता थी। मुझे नहीं मालूम कि यह कौन कह सकता है कि यह देश बंजर है। यह एक रहस्य है कि एक नगर में हर चीज की प्रचुरता कैसे हो सकती होगी।"
आइए पता लगाएँ
- क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि यह बाजार अपनी समृद्धि की चरम सीमा पर कैसा रहा होगा?
- क्या आप अपने राज्य में किन्हीं पुराने बाजारों के बारे में जानते हैं? वे वर्तमान बाजारों से किस तरह समान या भिन्न होंगे? अपने परिवार और समुदाय के वरिष्ठजनों के साथ चर्चा कीजिए।
आइए, बाजारों और उनकी कार्यप्रणाली के विषय में और जानें!
आइए पता लगाएँ

जिन स्थानों को हम बाजार कहते हैं, उसके लिए कुछ विशेषताओं की आवश्यकता होती है। जैसा कि आपने चित्र 12.2 में देखा, हर बाजार में एक क्रेता और विक्रेता होता है। दोनों को एक कीमत पर सहमत होने की आवश्यकता होती है, जिस पर लेन-देन हो सके। किसी भी लेन-देन को पूर्ण करने के लिए कीमत एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
प्रायः क्रेता और विक्रेता किसी स्वीकार्य कीमत पर लेन-देन करने के लिए मोल-तोल करते हैं। आपके नाटक में किस तरह का मोल-तोल हुआ था?
आइए विचार करें
क्या आप किसी ऐसे बाजार के बारे में सोच सकते हैं, जहाँ मोल-तोल कम प्रचलित है और क्यों?
कीमत और बाजार
जब बाजार में अधिक क्रेता और विक्रेता होते हैं, तो क्या होता है? बाजार में क्रेताओं और विक्रेताओं की आपसी बातचीत से कीमतें किस प्रकार बदलती हैं?
नीचे दिए गए चित्र में विक्रेता अमरूदों को ₹80/- प्रति किलोग्राम पर बेचना चाहता है, जबकि क्रेता इस कीमत पर खरीदने के लिए तैयार नहीं भी हो सकता है। यदि खरीददार को कीमत बहुत अधिक लगती है तो वह उस कीमत की माँग करेगा जिस पर वह खरीदना चाहता है। विक्रेता, खरीददार द्वारा दी गई कीमत पर बेचने को तैयार नहीं भी हो सकता है, क्योंकि उसके लिए वह लाभदायक नहीं होगा। खरीददार और बेचनेवाला तब तक मोल-तोल करते हैं, जब तक कि वे कीमत पर परस्पर सहमत नहीं हो जाते। तभी लेन-देन पूरा किया जा सकता है। वह स्थिति जहाँ क्रेता और विक्रेता एक कीमत पर सहमत नहीं होते, उस स्थिति में लेन-देन नहीं हो सकता।
आइए, इसे समझने के लिए नीचे कुछ दृश्य देखें -
1. क्या होगा यदि विक्रेता बहुत अधिक मूल्य तय कर दे?

2. क्या होगा यदि विक्रेता बहुत कम मूल्य तय कर दे?

3. समय के साथ अमरूद की एक सही कीमत तय हो जाती है, जो न तो क्रेता के लिए बहुत अधिक होती है और न ही विक्रेता के लिए बहुत कम।

इन तीनों परिदृश्यों से विक्रेता यह आकलन कर सकता है कि क्रेता को लगभग कितनी मात्रा में अमरूद की आवश्यकता है और भविष्य में वह बाजार में उतनी ही मात्रा उपलब्ध कराता है।
समय के साथ, विक्रेता द्वारा उपलब्ध कराई गई वस्तुओं की मात्रा तथा क्रेता द्वारा अपेक्षित मूल्य से वस्तुओं की उस कीमत के निर्धारण में सहायता मिलती है, जो उचित हो, अर्थात- जो विक्रेता के लिए पर्याप्त रूप से अधिक और क्रेता के लिए पर्याप्त रूप से कम हो।
आइए विचार करें
साप्ताहिक बाजार में देर रात को सब्जियाँ दिन की तुलना में सस्ती हो जाती हैं। आपके विचार में ऐसा क्यों होता है? शीत ऋतु के अंत में कपड़े की दुकानों में ऊनी वस्त्रों पर भारी छूट दी जाती है। ऐसा क्यों होता है?
हमारे आस-पास के बाजार
बाजार हर स्थान पर और विभिन्न रूपों में विद्यमान हैं।प्रत्यक्ष (फिजिकल) और ऑनलाइन बाजार
प्रत्यक्ष बाजार (फिजिकल मार्केट) वह होता है, जहाँ क्रेता-विक्रेता प्रत्यक्ष रूप से मिल सकते हैं और मुद्रा के बदले वस्तुएँ या सेवाएँ क्रय कर सकते हैं। यह सबसे सामान्य प्रकार का बाजार है। साप्ताहिक बाजार और हाट इसके अंतर्गत आते हैं, जहाँ विक्रेता सब्जियाँ, अन्य आवश्यक वस्तुएँ और हस्तशिल्प की वस्तुएँ ठेलों पर सजाकर बेचते हैं। स्थानीय बाजार की दुकानें और सड़क के किनारे खाद्य पदार्थ, कृत्रिम आभूषण आदि बेचने वाले विक्रेताओं से गुंजायमान रहने वाले बाजार भी प्रत्यक्ष बाजार हैं। इनमें कई बहुमंजिला भवन भी सम्मिलित हैं, जैसे- नगरों और कस्बों के बड़े क्षेत्रों में बने मॉल, जिनमें कई तरह की दुकानें होती हैं।
आज क्रेता और विक्रेता को लेन-देन के लिए व्यक्तिगत रूप से मिलने की आवश्यकता नहीं है। वे एक-दूसरे से हजारों किलोमीटर दूर होते हुए भी सुविधाजनक स्थानों से लेन-देन कर सकते हैं। वे फोन या कंप्यूटर पर शॉपिंग एप्लिकेशन (ऐप) या वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं। ये ऐप या वेबसाइट उन व्यवसायों द्वारा संचालित होते हैं, जो अनेक प्रकार की वस्तुएँ और सेवाएँ प्रदान करते हैं। हम नीचे दिए गए अनुभाग में इसकी कार्यप्रणाली के बारे में पढ़ेंगे।
कोई भी व्यक्ति पुस्तक, वस्त्र, फर्नीचर और किराने की वस्तुओं से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान, जैसे- टी.वी., मोबाइल फोन और लैपटॉप तक खरीदकर अपने घर मँगा सकते हैं। विनिर्माता वस्तुओं के उत्पादन के आगत घटकों को भी ऑनलाइन खरीद सकते हैं। वस्तुओं के अतिरिक्त, कोई भी घर से बाहर निकले बिना ऑनलाइन कक्षाओं जैसी सेवाओं का लाभ भी उठा सकता है। ऐसी सेवाओं के लिए भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है।

आइए विचार करें
- आपके विचार में ऑनलाइन और प्रत्यक्ष क्रय के क्या लाभ और हानि हैं? इसका उत्तर विक्रेता और क्रेता दोनों के दृष्टिकोण से पता कीजिए।
- कुछ सेवाओं के लिए व्यक्तिगत संपर्क की आवश्यकता होती है, जैसे कि कपड़ों की सिलाई, जिसकी सेवा ऑनलाइन प्रदान नहीं की जा सकती है। क्या आप ऐसी अन्य सेवाओं का सुझाव दे सकते हैं, जिनके लिए प्रत्यक्ष बाजार की आवश्यकता होती है?
ऐसे अन्य प्रकार के बाजार भी होते हैं, जो वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन नहीं करते। उनमें से एक है- शेयर बाजार या स्टॉक मार्केट।
अपने परिवार, शिक्षकों या समुदाय के सदस्यों से इसके बारे में पूछिए। इस वर्ष हम इन अवधारणाओं को और अधिक विस्तार से समझेंगे।

घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार
वह बाजार जहाँ वस्तुओं और सेवाओं का क्रय-विक्रय देश की भौगोलिक सीमा के भीतर होता है, उसे घरेलू बाजार कहते हैं। उदाहरण के लिए, इस पुस्तक को प्रकाशित करने के लिए पूरे भारत में स्थित बड़ी कागज मिलों से कागज प्राप्त किया गया था। क्रेता और विक्रेता के बीच यह लेन-देन देश की सीमा के अंदर ही किया गया।
वह बाजार जहाँ वस्तुओं और सेवाओं का क्रय-विक्रय देश की भौगोलिक सीमा के बाहर होता है, उसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार कहते हैं। एक देश के विक्रेता अपने उत्पादों को दूसरे देश में निर्यात करते हैं या एक देश के क्रेता दूसरे देश में उत्पादित उत्पादों का आयात करते हैं। इस प्रकार व्यापार देश की सीमा के पार से भी होता है।


इसे अनदेखा न करें
2024 में भारत वनस्पति तेलों, जैसे- ताड़ के तेल, सूरजमुखी के तेल और सोयाबीन के तेल का विश्व में सबसे बड़ा आयातक था। ताड़ का तेल अधिकांशतः मलेशिया, इंडोनेशिया और थाइलैंड से आयात किया जाता है।
थोक और खुदरा बाजार
बाजार के सुचारु संचालन में अनेक प्रतिभागी अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं।

आइए पता लगाएँ
प्रवाह चित्र 12.11 को ध्यान से देखिए और विनिर्माता या उत्पादक से उपभोक्ता तक वस्तुओं के प्रवाह का वर्णन कीजिए। इस प्रवाह में थोक विक्रेता और खुदरा विक्रेता की क्या भूमिका होती है?
प्रत्यक्ष बाजारों के संदर्भ में थोक व्यापारी उत्पादक या विनिर्माता से अधिक मात्रा में वस्तुएँ क्रय करते हैं। उदाहरण के लिए, अनाज, सब्जियाँ और फलों के थोक व्यापारी खेतों से सीधा क्रय करते हैं। उत्पाद को जहाँ संगृहीत किया जाता है, उस स्थान को गोदाम कहते हैं। इन गोदामों में शीघ्र सड़ने वाली वस्तुओं के लिए शीतागार (कोल्ड स्टोरेज) की सुविधा भी हो सकती है। इसके बाद इन्हें जिस बाजार में लाया जाता है, उसे 'मंडी' कहते हैं।

इसी प्रकार अन्य वस्तुओं के लिए थोक बाजार विद्यमान हैं, जैसे- रसायन, विद्युत वस्तुएँ और उनके घटक, निर्माण सामग्री, स्वचालित पुर्जे इत्यादि।


इसी प्रकार अन्य वस्तुओं के लिए थोक बाजार विद्यमान हैं, जैसे- रसायन, विद्युत वस्तुएँ और उनके घटक, निर्माण सामग्री, स्वचालित पुर्जे इत्यादि।


थोक विक्रेता घरों के पास स्थित दुकानों और स्टोरों को वस्तुओं की आपूर्ति करते हैं। इन दुकानदारों को खुदरा विक्रेता कहा जाता है। वे हमारे जैसे अंतिम उपभोक्ताओं को वस्तुएँ बेचते हैं। थोक विक्रेताओं के विपरीत, खुदरा विक्रेता कम मात्रा में वस्तुएँ बेचते हैं और यहाँ उत्पाद पुनर्विक्रय के स्थान पर उपभोग के लिए होते हैं। खुदरा स्टोर सेवाओं के लिए भी होते हैं, जैसे – सैलून, फिल्म थिएटर और रेस्तराँ। खुदरा विक्रेता घरों में वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने में सहायक हैं।

कुछ मामलों में दूरी और क्षेत्र के कारण थोक विक्रेताओं के लिए बड़ी संख्या में खुदरा विक्रेताओं तक पहुँचना कठिन होता है। वितरक इस अंतर को कम करने में सहायक होते हैं। क्या आपको कक्षा 6 में 'अमूल की कहानी' में दूध के लिए मध्यस्थ याद है?
हालाँकि, ऑनलाइन बाजार के मामले में वितरण माध्यम अलग है। यहाँ विनिर्माता अपने उत्पाद को थोक व्यवसाय के गोदामों में भेजते हैं, जो ऑनलाइन एप्लिकेशन के माध्यम से विक्रय करते हैं। उपभोक्ता ऑनलाइन विकल्प (वेबसाइट या मोबाइल एप्लिकेशन) से उत्पाद क्रय करते हैं। इन व्यवसायियों को संग्राहक कहा जाता है। संग्राहक उत्पादों को पैक करता है और फिर उन्हें ऑनलाइन क्रेता तक पहुँचाता है।




सूरत में वस्त्र उत्पादन के हजारों कारखाने हैं, जो सूती और सिंथेटिक वस्त्र बनाते हैं। सूती वस्त्र बनाने के लिए कपास महाराष्ट्र जैसे निकटवर्ती राज्यों और गुजरात के अन्य भागों की कपास मंडियों से यहाँ पहुँचती है। विभिन्न चरणों की प्रक्रिया से होते हुए इसे परिधान योग्य कपड़े और वस्त्र में बदल दिया जाता है, जैसे – पावरलूम से बुनाई, प्रसंस्करण इकाइयों से रंगाई आदि। उत्पाद एक चरण से दूसरे चरण में बाजारों के माध्यम से जाता है, उदाहरण के लिए बुने वस्त्र, रंगे वस्त्र और तैयार उत्पाद, जैसे-साड़ी।

कपड़े से तैयार उत्पाद का थोक बाजार में उत्पादक इकाइयों द्वारा व्यापार किया जाता है। थोक विक्रेता आपूर्ति की एक महत्वपूर्ण श्रृंखला हैं, क्योंकि वे देश और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छोटे दुकानदारों और बड़ी खुदरा दुकानों को उत्पादों के वितरण की देख-रेख करते हैं। वे यह भी आकलन करते हैं कि खुदरा विक्रेताओं को कितनी मात्रा में उत्पाद की आवश्यकता है। इससे उत्पादकों को उत्पाद का संग्रह करने में सहायता मिलती है और अंतिम उपभोक्ताओं को उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी आसानी होती है।



आइए पता लगाएँ
अपने समीप स्थित खुदरा विक्रेता से किसी उत्पाद, उसके मूल स्थान और दुकान तक पहुँचने की प्रक्रिया में आपूर्तिकर्ताओं की श्रृंखला के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए। चित्र 12.11 में प्रवाह चित्र (फ्लो चार्ट) का उपयोग करके इसका पता लगाइए और इसे कक्षा में साझा कीजिए।
इसे अनदेखा न करें
- वस्त्र उद्योग के अतिरिक्त सूरत विश्व में हीरा उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र है। लगभग 15 लाख कारीगर हीरों को काटने और चमकाने जैसे कार्यों में बड़े स्तर पर लगे हुए हैं। 16वीं शताब्दी के बाद से यहाँ व्यापार अत्यधिक विकसित हुआ। पश्चिमी तट पर नगर के स्थित होने के कारण अनेक बंदरगाह और सड़कों के जाल बिछे, जो आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञ कारीगरों और कुशल व्यक्तियों के समुदाय सदियों से यहाँ रहते आए हैं। उनके कौशल पीढ़ियों से हस्तांतरित होते रहे हैं, जिससे यह एक समृद्ध नगर बन गया है।
- क्या आप चित्र 12.24 में दिए गए मानचित्र पर बंदरगाह, राजमार्ग और रेलवे के जाल को देख सकते हैं? आपके विचार से इन्होंने सूरत को व्यापारिक केंद्र बनाने में किस प्रकार सहायता प्रदान की?
लोगों के जीवन में बाजार की भमिका
जैसा कि आपने पहले पढ़ा बाजार लोगों के आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच लेन-देन को सुगम बनाते हैं। यह व्यक्तियों, परिवारों और व्यवसायों को उन वस्तुओं और सेवाओं तक पहुँचने में सहायता करते हैं, जिनकी उन्हें आवश्यकता होती है परंतु जिन्हें वह स्वयं नहीं बना सकते।
आइए विचार करें
हमने बाजारों के अलग-अलग आयामों पर चर्चा की। क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि हमारा जीवन बाजारों के बिना कैसा होगा? यदि किसान चावल, गेहूँ, दाल, सब्जियाँ और फल बाजार में न लाएँ तो क्या होगा? अगर सूरत में वस्त्र बनाने वाले उत्पादक बाजार से कपास जैसी आवश्यक सामग्री न खरीद पाएँ तो क्या होगा?
इस अनुभाग में हम बाजारों की भूमिका के कुछ अन्य आयामों का पता लगाएँगे। आकृति एक पेशेवर चित्रकार है, जो कैनवास पर तैल-चित्र बनाती है। उसके चित्रों की सराहना की जाती है, लेकिन उसे क्रेता मिल पाना कठिन लगता है। वह इस बात से चिंतित है कि अपने चित्र कहाँ और किस मूल्य पर विक्रय करे? अमरूद वाली स्थिति के विपरीत कलाकृति के लिए स्थानीय क्रेता और विक्रेता बहुत कम होते हैं।
क्या आप ऐसे अन्य उत्पादों के बारे में सोच सकते हैं, जिनके लिए तैयार बाजार नहीं है? यह स्थिति क्रय-विक्रय करने वाले लोगों को कैसे प्रभावित करता है? वर्तमान समय में चित्रकार को अपने चित्रों के लिए किन-किन तरीकों से क्रेता मिल सकते हैं?
बाजार समाज को कैसे लाभान्वित करते हैं?
आइए पता लगाएँ
उत्पादकों को इस बात का संकेत मिल जाता है कि उपभोक्ता क्या क्रय करना चाहेंगे। अत: वे ऐसे रेफ्रिजरेटर बनाते हैं, जिनमें विद्युत खपत कम होती है। कम ऊर्जा खपत वाले रेफ्रिजरेटर के उत्पादन से समाज को लाभ होता है।
यद्यपि क्रय-विक्रय एक आर्थिक गतिविधि है, जिसमें मौद्रिक विनिमय सम्मिलित है, तथापि बाजारों में होने वाली अंत: क्रियाएँ प्रायः उत्पाद या सेवा या दो पक्षों के बीच परस्पर बातचीत के माध्यम से बढ़ती हैं।
प्रायः क्रेता और विक्रेता के बीच एक संबंध विकसित होता है, जो कई पीढ़ियों तक भी चलता है। कुछ परिवारों का अपने दर्जी, स्वर्णकार और चिकित्सक के साथ दशकों पुराना भरोसेमंद संबंध बना रहता है। भारत में कई परिवार स्थानीय किराना दुकानदार के साथ एक खाता रखते हैं, जिसका महीने के अंत में भुगतान किया जाता है।
इसलिए, जहाँ बाजार की प्रमुख भूमिका आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है, वहीं यह अनेक लोगों के जीवन में गैर-आर्थिक महत्व भी रखता है।
मणिपुर की मैतेई भाषा में 'इमा कैथल' (मदर्स मार्केट) के नाम से जाना जाने वाला इंफाल का एक अनूठा बाजार है। इस बाजार में लगभग 3,000 महिलाओं की अपनी दुकानें हैं, जिन्हें वे ही चलाती हैं। वे सब्जियाँ, पारंपरिक मणिपुरी परिधान सहित अन्य वस्त्र, हथकरघा व हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और नगर एवं आस-पास के स्थान के लोगों की दैनिक आवश्यकता के सामान विक्रय करती हैं। एक तरफ यह बाजार रोजगार प्रदान करता है, जो हजारों परिवारों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। दूसरी तरफ, यह बाजार विभिन्न संस्कृतियों का संगम स्थल भी है। विभिन्न समुदायों के लोग यहाँ विचारों का आदान-प्रदान करने और साझा परंपराओं का आनंद लेने के लिए एक साथ आते हैं।


इसे अनदेखा न करें
2024 में भारत वनस्पति तेलों, जैसे- ताड़ के तेल, सूरजमुखी के तेल और सोयाबीन के तेल का विश्व में सबसे बड़ा आयातक था। ताड़ का तेल अधिकांशतः मलेशिया, इंडोनेशिया और थाइलैंड से आयात किया जाता है।
आइए पता लगाएँ
क्या आपने अपने समुदाय या पड़ोस में ऐसी कोई प्रथा देखी है? उस प्रथा का वर्णन चित्र या लघु अनुच्छेद द्वारा कीजिए।
बाजार में सरकार की भूमिका
बाजार क्रेताओं की माँग और विक्रेताओं द्वारा आपूर्ति के बीच अंतः क्रिया से संचालित होता है। हालाँकि, कुछ ऐसी परिस्थितियाँ होती हैं, जिनमें यह बहुत सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पाता है। ऐसी स्थितियों में सरकार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वह उपभोक्ताओं और उत्पादकों के बीच अंतःक्रिया और मूल्य के उचित निर्धारण की निगरानी करती है।क्रेताओं और विक्रेताओं की सुरक्षा के लिए मूल्यों पर नियंत्रण
सरकार कुछ वस्तुओं के मूल्यों को नियंत्रित करती है। उदाहरण के लिए, वह विक्रेता द्वारा वसूले जाने वाले अधिकतम मूल्य को निर्धारित करती है। कई आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं, जैसे कि जीवन-रक्षक दवाओं के मूल्यों की ऊपरी सीमा निर्धारित करती है। इसी प्रकार सरकार न्यूनतम मूल्य भी निर्धारित करती है, जिस पर गेहूँ, धान और मक्का जैसे कृषि उत्पाद विक्रय किए जा सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि किसानों को किसी प्रकार की हानि न हो। सरकार कर्मचारियों द्वारा किए गए कार्य के लिए न्यूनतम मजदूरी भी निर्धारित करती है, ताकि नियोक्ता उन्हें उचित भुगतान कर सकें।हालाँकि, सरकार को ऐसी मूल्य सीमाओं को सावधानीपूर्वक लागू करने की आवश्यकता हैं। यदि मूल्य बहुत कम हों, तो उत्पादकों को उत्पादन करने की कोई प्रेरणा नहीं मिलेगी और यदि मूल्य अत्यधिक होंगे, तो उपभोक्ताओं को हानि होगी।
आइए पता लगाएँ
- प्याज भारत के अधिकांश भागों में भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुछ ऋतुओं में इसकी आपूर्ति बाजार में कम हो जाती है। आपके विचार में ऐसा होने पर प्याज के मूल्यों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- अगर प्याज के आपूर्तिकर्ता आवश्यक मात्रा में प्याज बाजार में नहीं लाएँगे, तो क्या होगा? आपके विचार से सरकार को इस स्थिति में क्या करना चाहिए?
गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना
उपभोक्ता के कल्याण को सुनिश्चित करने और उन्हें बाजार में अनुचित मनमानी से बचाने में सरकार की भूमिका होती है। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि विनिर्माता वस्तुओं का उत्पादन और सेवाएँ प्रदान करते समय आवश्यक गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करें। उदाहरण के लिए, औषधीय कंपनियाँ रोगों के इलाज के लिए औषधियों का निर्माण करती हैं। सरकार औषधियों के अनुमोदन के लिए प्रक्रिया निर्धारित करती है और यह जाँचने के लिए नमूना परीक्षण करती है कि उत्पादित औषधियाँ गुणवत्ता के मानकों को पूरा करती हैं या नहीं। ये नियम औषधियों की गुणवत्ता और सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं, ताकि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को किसी भी प्रकार का संकट न हो।
बाजारों के बाह्य प्रभावों को कम करना
क्रय-विक्रय के अतिरिक्त, बाजार का कभी-कभी जीवन की अन्य गतिविधियों पर भी बहुत प्रभाव होता है। उदाहरण के लिए, बाजारों में उपलब्ध कुछ वस्तुओं का उत्पादन कारखानों में करना आवश्यक होता है, जो पर्यावरण को प्रदूषित कर सकता है। सरकार बाजारों के ऐसे प्रभावों को समझने और नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उदाहरण के लिए, क्या होता है जब ऐसी वस्तुओं का भी उत्पादन किया जाता है, जैसे कि एक बार उपयोग में आने वाला प्लास्टिक, जिसका कुप्रभाव न केवल पर्यावरण पर पड़ता है बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को भी संकट में डालता है? ऐसी स्थिति में सरकार इन नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए कठोर नियम लागू करके हस्तक्षेप करती है। इसी प्रकार, सरकार डिब्बाबंद वस्तुओं की शुद्धता की जाँच करने तथा उनके भार और माप की निगरानी के लिए पद्धति स्थापित करती है।
आइए विचार करें
शासकों द्वारा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना आधुनिक भारत की प्रथा नहीं है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में घी का व्यापार करने वाले व्यापारियों के लिए निर्देश सम्मिलित हैं। इसमें उल्लेख किया गया है कि विक्रेता घी की मात्रा की कमी, जो मापने वाले डिब्बे में चिपकी रह जाती है, की क्षति-पूर्ति हेतु क्रेताओं को 1/50 वाँ भाग अधिक मानस्राव के रूप में देगा।
सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाती है कि बाजार निष्पक्ष रूप से कार्य करे और उपभोक्ताओं का शोषण न हो। हालाँकि, नियमों की बहुलता बाजारों के सुचारु रूप से कार्य करने में कठिनाई पैदा कर सकती है।
सार्वजनिक सुविधा और सेवाएँ उपलब्ध कराना
उत्पादक, वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन एवं विक्रय लाभ के लिए करते हैं। हालाँकि, उत्पादक कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं में लाभ की अपेक्षा नहीं रखते हैं। उदाहरण के लिए, सार्वजनिक उद्यान, सड़कें, सुरक्षा व्यवस्था आदि। इसके अतिरिक्त पिछले अध्याय में आपने नागरिकों के अधिकारों के संदर्भ में कुछ निश्चित कल्याणकारी प्रावधानों के बारे में पढ़ा होगा। इसलिए, यह सार्वजनिक वस्तुएँ और सेवाएँ सरकार द्वारा प्रदान की जाती हैं।
आइए विचार करें
- वे कौन-से अन्य क्षेत्र हैं, जहाँ आप सरकार को बाजार के कार्यकलापों में भाग लेते हुए देखते हैं?
- क्या ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहाँ सरकार को हस्तक्षेप कम करने की आवश्यकता है? परिवार या संबंधियों से चर्चा कीजिए।
उपभोक्ता वस्तु और सेवा की गुणवत्ता का आकलन कैसे करते हैं?
बाजार उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ और सेवाएँ उपलब्ध कराता है। उपभोक्ता जिस वस्तु को क्रय करना चाहते हैं, उसके विषय में निर्णय कैसे लेंगे?
आइए विचार करें
आपके और आपके पड़ोस में अगली गली के बच्चों की टोली के मध्य कंचे खेलने की प्रतियोगिता है। आप प्रतियोगिता के लिए नए कंचे खरीदना चाहते हैं। आपने ₹150 बचा रखे हैं। आप कंचे खरीदने हेतु दुकान जाते हैं। आप कंचों में कौन-से गुणों को देखेंगे ताकि आप प्रतियोगिता जीत सकें?

क्या आपने कंचों के आकार, मजबूती, मूल्य तथा आकर्षक रंगों के बारे में सोचा था? जैसा कि आपने देखा, हर उपभोक्ता जो वस्तु खरीद रहा है, उसे उस वस्तु की गुणवत्ता को परखने की आवश्यकता होती है।
निम्नलिखित अनुभागों में हम इसके विभिन्न तरीकों को समझेंगे।
मान लीजिए कि आपके माता-पिता आपको पास की एक किराने की दुकान से एक किलो बेसन लाने को कहते हैं। दुकान में विभिन्न प्रकार के बेसन के पैकेट उपलब्ध हैं, जैसे कि एक नीचे भी दर्शाया गया है। इसे ध्यानपूर्वक देखें। आप ये कैसे सुनिश्चित करेंगे कि बेसन की गुणवत्ता उपयुक्त मानकों पर सही है?

क्या आपने एफ.एस.एस.ए.आई. के प्रतीक चिह्न पर ध्यान दिया था?

एफ.एस.एस.ए.आई. अर्थात 'भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण' का खाद्य पैकेटों और गत्ते के डिब्बों पर अंकित चिह्न यह दर्शाता है कि खाद्य पदार्थ की जाँच सरकार द्वारा की गई है और यह उपयोग के लिए सुरक्षित है। सरकारी एजेंसी का यह प्रमाणन क्रेताओं को वस्तुओं की गुणवत्ता पहचानने में सहायता प्रदान करता है। उत्पाद या उसके पैकेज पर ये चिह्न सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद न्यूनतम गुणवत्ता मानकों पर खरा है।
आइए प्रत्येक चिह्न का अर्थ समझते हैं -
- एफ.एस.एस.ए.आई की तरह 'भारतीय मानक ब्यूरो' भारतीय मानक संस्थान (आई.एस.आई.) चिह्न जारी करता है। यह चिह्न सामान्यतः विद्युत उपकरणों, निर्माण सामग्रियों, मोटर वाहन के पहियों, कागज इत्यादि पर दिए जाते हैं। यह चिह्न उत्पाद की गुणवत्ता तथा इसके सुरक्षित होने का सूचक है।
- इसी तरह कृषि उत्पादों, जैसे- सब्जियों, फलों, अनाजों, दालों, मसालों, शहद इत्यादि के लिए 'एगमार्क' एक प्रमाणन चिह्न है।
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे- टी.वी., लैपटॉप, वातानुकूलित उपकरणों आदि पर 'बी.ई.ई.' स्टार रेटिंग अंकित होती हैं। बी.ई.ई. का तात्पर्य 'ऊर्जा दक्षता ब्यूरो' है। यह रेटिंग उत्पाद के पैकेट पर तारों के रूप में छपी होती है। अधिक तारे दर्शाते हैं कि उपकरण कम ऊर्जा एवं विद्युत का उपयोग कर रहा है। यह उपभोक्ताओं के लिए लाभदायक है, क्योंकि इससे विद्युत का व्यय कम होता है और साथ ही यह पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है।


आइए पता लगाएँ
अपने घर में सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर बी.ई.ई. स्टार रेटिंग को जाँचें और उनकी विद्युत दक्षता के बढ़ते हुए क्रम में सारे उपकरणों का एक चार्ट तैयार करें।
उत्पाद की प्रसिद्धि क्रेता के निर्णय को प्रभावित करती है। यह प्रसिद्धि निजी संवाद द्वारा संभव होती है। क्या आपके परिवार के सदस्यों ने कुछ ऐसे उत्पाद खरीदे होंगे, जो उन्हें उनके साथियों या संबंधियों ने सुझाएँ होंगे?
वस्तुओं और सेवाओं की अन्य उपभोक्ताओं द्वारा की गई ऑनलाइन समीक्षा एवं प्रतिक्रिया भी हमें ऑनलाइन क्रय करते समय निर्णय लेने में सहायता करती है।
आगे बढ़ने से पहले...
- बाजार उस मूल्य पर क्रेता और विक्रेता के मध्य विनिमय सुगम बनाता है जिस पर दोनों की सहमति हो और जो क्रेता की माँग तथा विक्रेता की आपूर्ति द्वारा निर्धारित होता है।
- बाजार में उत्पादक, थोक विक्रेता, वितरक और खुदरा विक्रेता जैसे भागीदारों की श्रृंखला अंतिम उपभोक्ता तक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
- बाजार आदान-प्रदान के स्थान भी हैं क्योंकि वह व्यक्तियों को एक साथ लाते हैं और विचारों एवं परंपराओं के आदान-प्रदान को संभव बनाते हैं।
- सरकार वस्तुओं एवं सेवाओं के गुणवत्ता मानकों को बढ़ावा देने तथा बाजार में उचित मोल-तोल के लिए नियामक भूमिका निभाती है। हालाँकि, उपभोक्ता सरकारी संस्थाओं के द्वारा उत्पाद पर दिए गए प्रमाणन चिह्नों तथा ऑनलाइन समीक्षाओं के माध्यम से वस्तुओं एवं सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन भी कर सकते हैं।
प्रश्न और क्रियाकलाप
- बाजार की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? हाल में जब आप बाजार गए थे, तब आपने वहाँ कौन-कौन सी विशेषताएँ देखीं?
- इस अध्याय के आरंभ में दिए गए एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री के उद्धरण को देखिए। इस अध्याय के संदर्भ में उस उद्धरण की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।
- अमरूद के क्रय-विक्रय के दिए गए उदाहरण में यदि विक्रेता को अच्छा मूल्य मिल रहा है, तब वह किसानों से और अधिक अमरूद क्रय करने का प्रयास करेगा, ताकि वह उन्हें उसी मूल्य पर बेचकर अपनी आमदनी बढ़ा सके। ऐसी स्थिति में किसान क्या करेगा? क्या आपको लगता है कि वह अगली ऋतु में अमरूदों की माँग के बारे में सोचना शुरू करेगा? उसकी संभावित प्रतिक्रिया क्या होगी?
- निम्नलिखित प्रकार के बाजारों का उनकी विशेषताओं से मिलान कीजिए -
- सामान्यतया मूल्य क्रेताओं की माँग और विक्रेताओं की आपूर्ति की अंतः क्रिया द्वारा निर्धारित होता है। क्या आप ऐसे उत्पादों के बारे मे सोच सकते हैं, जहाँ किसी उत्पाद की माँग के लिए क्रेताओं की संख्या कम होने के बावजूद उसका मूल्य अधिक होता है? इसके क्या कारण हो सकते हैं?
- सब्जियों के एक खुदरा विक्रेता की वास्तविक जीवन-स्थिति पर विचार कीजिए -एक परिवार सब्जियाँ खरीदने के लिए दुकान पर आया। विक्रेता, जो फलियाँ ठेले पर बेच रहा था, उसकी कीमत ₹30/- प्रति किलोग्राम थी। महिला ने कीमत को ₹25/-प्रति किलोग्राम के नीचे लाने के लिए विक्रेता के साथ मोल-भाव करना शुरू कर दिया। विक्रेता ने उस मूल्य पर विक्रय करने से मना कर दिया और कहा कि उसे उस मूल्य पर घाटा होगा। महिला वहाँ से चली गई। फिर परिवार समीप के सुपरमार्केट में गया और वहाँ से सब्जियाँ क्रय कीं। सुपरमार्केट में अच्छे ढंग से पैक की गई फलियों के लिए उन्होंने ₹40/- प्रति किलोग्राम का भुगतान किया। क्या कारण है कि परिवार ने ऐसा किया? क्या कीमतों के अतिरिक्त ऐसे कोई कारक हैं, जो क्रय-विक्रय को प्रभावित करते हैं?
- भारत के कुछ जिले टमाटर उगाने के लिए प्रसिद्ध हैं। हालाँकि, कुछ मौसमों में किसानों के लिए स्थिति अच्छी नहीं होती। अधिक उपज होने पर कृषकों द्वारा अपनी उपज को फेंकने और उनका सारा श्रम नष्ट होने के समाचार आते हैं। आपके विचार में किसान ऐसा क्यों करते हैं? ऐसी स्थिति में थोक विक्रेता क्या भूमिका निभा सकते हैं? यह सुनिश्चित करने के संभावित उपाय क्या हो सकते हैं जिससे टमाटर बर्बाद न हों और किसानों को नुकसान भी न पहुँचे?
- क्या आपने अपने या किसी अन्य विद्यालय द्वारा आयोजित किसी मेले के बारे में सुना है या उसमें गए हैं? अपने मित्रों और शिक्षकों से ऐसे मेलों के बारे में चर्चा कीजिए कि इन मेलों में किस तरह से क्रय-विक्रय और मोल-भाव होता है?
- कोई भी पाँच उत्पाद चुनें और अध्याय में चर्चा किए गए प्रमाणन चिह्नों के साथ उनके लेबल की जाँच करें। क्या आपको ऐसे उत्पाद मिले, जिन पर मानक चिह्न नहीं था? यह किस बात का सूचक है?
- आपने और आपके सहपाठियों ने एक साबुन बनाया है। इसकी पैकेजिंग के लिए एक लेबल डिजाइन कीजिए। आपके विचार से लेबल पर क्या लिखा होना चाहिए, ताकि उपभोक्ता उत्पाद को बेहतर तरीके से जाँच सकें?
| क्र.सं. | बाजार | मानदंड |
|---|---|---|
| (क) | प्रत्यक्ष बाजार | वस्तुएँ और सेवाएँ जो राष्ट्र की सीमा के बाहर भेजी जाती हैं। |
| (ख) | ऑनलाइन बाजार | बड़ी मात्रा में सौदे |
| (ग) | घरेलू बाजार | अंतिम उपभोक्ताओं तक वस्तुएँ एवं सेवाएँ पहुँचाना। |
| (घ) | अंतर्राष्ट्रीय बाजार | क्रेता और विक्रेता की प्रत्यक्ष उपस्थिति आवश्यक है। |
| (ङ) | थोक बाजार | क्रेता और विक्रेता आभासी रूप से मिलते हैं और किसी भी समय लेन-देन कर सकते हैं। |
| (च) | खुदरा बाजार | किसी राष्ट्र की सीमा के भीतर स्थित |