अध्याय -6
संख्याओं का खेल
6.1 संख्याएँ हमें बताती हैं
? नीचे दिए गए चित्र में विद्यमान संख्याएँ हमें क्या बताती हैं?
कक्षा 6 की गणित की पाठ्यपुस्तक को याद करें। अब वे संख्याओं को एक भिन्न नियम का उपयोग करते हुए पुकारते हैं।
? आपके विचार से इन संख्याओं का क्या तात्पर्य है?
बच्चे स्वयं को पुनर्व्यवस्थित करते हैं तथा प्रत्येक बच्चा इस नई व्यवस्था के आधार पर एक संख्या बोलता है।
? क्या आप पता लगा पाए कि ये संख्याएँ क्या बता रही हैं? देखिए और ज्ञात करने का प्रयास कीजिए।
यहाँ एक नियम है - प्रत्येक बच्चा अपने सम्मुख खड़े उन बच्चों की संख्या बोलता है जो लंबाई में उससे बड़े हैं। जाँच कीजिए कि क्या प्रत्येक बच्चे द्वारा बोली गई संख्या दोनों व्यवस्थाओं में इस नियम के साथ मेल खाती है।
? उस संख्या को लिखिए जो प्रत्येक बच्चे को इस नियम के आधार पर नीचे दर्शाई गई व्यवस्था के लिए बोलनी चाहिए।
? पता लगाइए
1. इस पुस्तक के अंत में दिए गए स्टिकर चित्रों के कटआउट को इस प्रकार व्यवस्थित कीजिए अथवा रेखा खंड खींचकर उसकी ऊँचाई के आधार पर ऐसी व्यवस्था बनाइए कि उनका अनुक्रम निम्नलिखित रूप में पढ़ा जाए -
(a) 0, 1, 1, 2, 4, 1, 5(b) 0,0,0,0,0,0,0
(c) 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6
(d) 0, 1, 0, 1, 0, 1, 0
(e) 0, 1, 1, 1, 1, 1, 1
(f) 0, 0, 0, 3, 3, 3, 3
2. नीचे दिए गए कथनों में से प्रत्येक के बारे में सोचिए तथा पहचान कीजिए कि यह कथन सदैव सत्य है या केवल कभी-कभी सत्य है या सदैव असत्य है। अपने तर्क को साझा कीजिए।
(a) यदि कोई व्यक्ति '0' बोलता है तो ऐसे व्यक्ति उस समूह में सबसे लंबे हैं।
(b) यदि कोई व्यक्ति सबसे लंबा है तो उसकी संख्या '0' है।
(c) सबसे पहले व्यक्ति की संख्या '0' है।
(d) यदि कोई व्यक्ति पंक्ति में प्रथम या अंतिम नहीं है (अर्थात ऐसे व्यक्ति जो कहीं बीच में खड़े हैं) तो वह '0' नहीं बोल सकता है।
(e) वह व्यक्ति जो सबसे बड़ी संख्या बोलता है, वह सबसे छोटा है।
(f) 8 व्यक्तियों के समूह में अधिकतम संभावित संख्या क्या है?
6.2 समानता चयन
किशोर के पास कुछ संख्या पत्रक हैं तथा वह किसी पहेली पर कार्य कर रहा है। वहाँ 5 डिब्बे हैं तथा प्रत्येक डिब्बे में केवल 1 संख्या कार्ड ही होना चाहिए। इन डिब्बों में रखे कार्डों की संख्याओं का योग 30 होना चाहिए। क्या ऐसा करने की कोई विधि ज्ञात करने में आप उसकी सहायता कर सकते हैं?
क्या आप पता कर सकते हैं कि किन 5 कार्डों के योग से योगफल 30 प्राप्त होगा? क्या ऐसा करना संभव है? इस संग्रह में से 5 कार्ड चुनने की अनेक विधियाँ हैं।
क्या सभी संभावनाओं की जाँच किए बिना एक हल ज्ञात करने की कोई विधि है? आइए, पता लगाते हैं।
? कुछ सम संख्याओं को जोड़िए। आपको किस प्रकार की संख्या प्राप्त होती है? क्या इससे कोई अंतर पड़ता है कि आप ऐसी कितनी संख्याएँ जोड़ते हैं?
किसी भी सम संख्या को बिना शेषफल वाले युग्मों में व्यवस्थित किया जा सकता है। यहाँ कुछ सम संख्याओं को युग्मों में व्यवस्थित करके दर्शाया गया है।
जैसा कि हम चित्र में देख रहे हैं कि कितनी भी सम संख्याओं को जोड़ने पर प्राप्त एक संख्या को बिना किसी शेष संख्या के युग्मों में व्यवस्थित किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि यह योग सदैव एक सम संख्या होगा।
? अब कुछ विषम संख्याओं को लेकर जोड़िए। आपको किस प्रकार की संख्या प्राप्त होती है? क्या इससे कोई अंतर पड़ता है कि आप कितनी विषम संख्याएँ जोड़ते हैं?
विषम संख्याओं को युग्मों में व्यवस्थित नहीं किया जा सकता है। एक विषम संख्या युग्मों के संग्रह से एक अधिक होती है। कुछ विषम संख्याएँ नीचे दशाई गई हैं -
क्या आप एक विषम संख्या को युग्मों के संग्रह से एक कम संख्या के रूप में भी सोच सकते हैं?
यह चित्र दर्शाता है कि दो विषम संख्याओं का योग सदैव सम होता है। यहाँ दिए गए अन्य चित्र भी इस उपपत्ति को सत्यापित करने के उदाहरण है!
हम देख सकते हैं कि दो विषम संख्याओं को जोड़ने पर प्राप्त संख्या को सदैव युग्गों में व्यवस्थित किया जा सकता है।
? तीन विषम संख्याओं को जोड़ने के बारे में आप क्या कह सकते हैं? क्या परिणामी योग को युग्मों के रूप में व्यवस्थित किया जा सकता है?
? पता लगाइए कि (a) 4 विषम संख्याओं के, (b) 5 विषम संख्याओं के तथा (c) 6 विषम संख्याओं के योग की स्थिति में क्या होता है?
अब उस पहेली पर वापस आइए, जिसे किशोर हल करने का प्रयास कर रहा था। वहाँ 5 रिक्त डिब्बे हैं। इसका अर्थ है कि उसके पास विषम संख्या में डिब्बे हैं। सभी संख्या कार्डों पर विषम संख्याएँ अंकित हैं।
इन्हें जोड़ने पर 30 प्राप्त होना चाहिए जो कि एक सम संख्या है। क्योंकि किन्हीं 5 विषम संख्याओं को जोड़ने पर कभी भी एक सम संख्या प्राप्त नहीं होगी। अतः किशोर इन कार्डों को डिब्बों में कभी भी इस प्रकार व्यवस्थित नहीं कर सकता कि इनका योग 30 प्राप्त हो।
? दो भाई-बहन मार्टिन और मारिया का जन्म ठीक एक वर्ष के अंतराल में हुआ। आज वे अपना जन्मदिन मना रहे हैं। मारिया कहती है कि उनकी आयु का योग 112 वर्ष है। क्या यह संभव है? यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
क्योंकि उनका जन्म एक वर्ष के अंतराल में हुआ है इसलिए उनकी आयु (दो) क्रमागत संख्याएँ होंगी। क्या उनकी आयु 51 और 52 वर्ष हो सकती है? 51+52 = 103 है। कुछ अन्य क्रमागत संख्याएँ लेकर प्रयास कीजिए और देखिए कि क्या उनका योग 112 है।
गणन संख्याओं 1, 2, 3, 4, 5, ... में सम और विषम संख्याएँ एकांतर रूप से (एक-एक छोड़कर) आ रही हैं। किन्हीं भी दो क्रमागत संख्याओं में एक सदैव सम संख्या होगी तथा दूसरी सदैव विषम संख्या होगी !
एक सम संख्या और एक विषम संख्या का योगफल क्या होगा? हम देख सकते हैं कि इनके योग को युग्मों में व्यवस्थित नहीं किया जा सकता है इसलिए यह एक विषम संख्या होगी।
क्योंकि 112 एक सम संख्या है तथा मार्टिन और मारिया की आयु (वर्षों में) क्रमागत संख्याएँ हैं, अतः इनका योग 112 नहीं हो सकता।
हम समानता शब्द का उपयोग सम या विषम होने के गुण को व्यक्त करने में करते हैं। उदाहरणार्थ, किन्हीं दो क्रमागत संख्याओं का योग एक विषम संख्या होना एक समानता है। इसी प्रकार किन्हीं दो विषम संख्याओं का योग एक सम संख्या होना एक समानता है।
? पता लगाइए
1. विषम और सम संख्याओं के चित्रीय निरूपणों की अपनी समझ का उपयोग करते हुए निम्नलिखित में से प्रत्येक योग की समानता ज्ञात कीजिए -
(a) 2 सम संख्याओं और 2 विषम संख्याओं का योग (सम + सम + विषम + विषम)
(b) 2 विषम संख्याओं और 3 सम संख्याओं का योग
(c) 5 सम संख्याओं का योग
(d) 8 विषम संख्याओं का योग
2. लता के पास उसके गुल्लक में ₹1 के सिक्के विषम संख्या में हैं, ₹5 के सिक्के विषम संख्या में हैं तथा ₹10 के सिक्के सम संख्या में हैं। उसे कुल धनराशि की गणना करने पर ₹205 प्राप्त हुए। क्या उसने गणना में कोई त्रुटि की? यदि कोई त्रुटि नहीं हुई तो उसके पास प्रत्येक प्रकार के कितने सिक्के हो सकते हैं? यदि उससे कोई त्रुटि हुई तो स्पष्ट कीजिए कि ऐसा क्यों हुआ होगा?
3. हम जानते हैं कि -
(a) सम + सम = सम
(b) विषम + विषम = सम
(c) सम + विषम = विषम
इसी प्रकार नीचे दी गई स्थितियों के लिए समानता ज्ञात कीजिए -
(d) सम - सम=..............
(e) विषम - विषम =..............
(f) सम - विषम =..............
(g) विषम – सम =..............
जाल (ग्रिड) में छोटे वर्ग
एक 3 * 3 ग्रिड में 9 छोटे वर्ग हैं, जो एक विषम संख्या है। वहीं,
एक 3 * 4 ग्रिड में 12 छोटे वर्ग होते हैं, जो एक सम संख्या है।
यहाँ 3 * 4 की समानता सम है।
? किसी एक ग्रिड की विमाएँ (विस्तार) दी गई होने पर क्या आप गुणनफल को परिकलित किए बिना छोटे वर्गों की संख्या की समानता बता सकते हैं?
? इन ग्रिड में छोटे वर्गों की संख्या की समानता ज्ञात कीजिए -(a) 27 * 13
(b) 42 * 78
(c) 135 * 654
व्यंजकों की समानता
बीजीय व्यंजक 3n + 4 पर विचार कीजिए। n के विभिन्न मानों के लिए इस व्यंजक की भिन्न-भिन्न समानताएँ हैं-
| n | (3n + 4) का मान | मान की समानता |
|---|---|---|
| 3 | 13 | विषम |
| 8 | 28 | सम |
| 10 | 34 | सम |
? एक ऐसा व्यंजक लिखिए जिसकी समानता सदैव एक सम है।
इसके कुछ उदाहरण हैं, जैसे- 100p और 48w - 2 इसी प्रकार के और अधिक व्यंजक ज्ञात करने का प्रयास कीजिए।? ऐसे व्यंजक लिखिए जिनकी समानता सदैव विषम है।
? 3n + 4 जैसे कुछ अन्य व्यंजक लिखिए जिनकी समानता या तो विषम हो सकती है या फिर सम हो सकती है।
? व्यंजक 6k + 2 का मान 8, 14, 20, ... प्राप्त होता है। ( k = 1, 2, 3 ,..., के लिए) इसमें अनेक सम संख्याएँ छूट गई हैं।
? क्या ऐसे व्यंजक हैं जिनके उपयोग से हम सभी सम संख्याओं की सूची बना सकते हैं? (संकेत - सभी सम संख्याओं का एक गुणनखंड 2 है।)
? क्या ऐसे व्यंजक हैं जिनके उपयोग से हम सभी विषम संख्याओं की सूची बना सकते हैं?
हम पहले देख चुके हैं कि किस प्रकार हम 4 के गुणजों के अनुक्रम में वें पद को व्यक्त कर सकते हैं, जहाँ n एक अक्षर-संख्या है और यह उस अनुक्रम में एक स्थान व्यक्त करती है (उदाहरणार्थ पहला, तेइसवाँ, एक सौ सत्रहवाँ इत्यादि)।
? 2 के गुणजों का nवाँ पद क्या होगा? अथवा nवीं सम संख्या क्या है?
आइए, इस प्रश्न के उत्तर के लिए विषम संख्याओं पर विचार करें।
? 100वीं विषम संख्या क्या है?
इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए निम्नलिखित प्रश्न पर विचार कीजिए -
? 100वीं सम संख्या क्या है?
यह 2 * 100 = 200 है।
क्या यह 100वीं विषम संख्या ज्ञात करने में हमारी सहायता करता है? आइए, सम और विषम संख्याओं वाले अनुक्रमों की पदानुसार तुलना करें।
सम संख्याएँ -2, 4, 6, 8, 10, 12,...
विषम संख्याएँ -1, 3, 5, 7, 9, 11,...
हम देखते हैं कि किसी भी स्थान पर विषम संख्या अनुक्रम की संख्या का मान, सम संख्या अनुक्रम की संख्या के मान से एक कम है। इस प्रकार 100वीं विषम संख्या 200 – 1 = 199 है।
? nवीं विषम संख्या ज्ञात करने के लिए एक सूत्र लिखिए।
आइए, सर्वप्रथम उस विधि का वर्णन करें जो हमने एक दिए हुए स्थान पर विषम संख्या ज्ञात करने के लिए सीखी थी -
(a) उस स्थान पर सम संख्या प्राप्त कीजिए। यह उस स्थान संख्या का 2 गुना होती है।
(b) फिर इस सम संख्या में से 1 घटाइए।
हम इस प्रक्रिया को व्यंजकों के रूप में लिखने पर प्राप्त करते हैं -
(a) 2n (b) 2n - 1
इस प्रकार 2n वह सूत्र है जो nवीं सम संख्या प्रदान करता है तथा 2n - 1 वह सूत्र है जो nवीं विषम संख्या प्रदान करता है।
6.3 जाल (ग्रिड) में कुछ खोज
इस 3 * 3 ग्रिड को देखिए। यह एक सरल नियम के अनुसार भरा गया है। इसमें बिना किसी पुनरावृत्ति के 1 से 9 तक की संख्याओं का उपयोग कीजिए। इस ग्रिड के बाहर लिखी संख्याओं पर घेरा लगाया गया है।
? क्या आप पता लगा पाए हैं कि घेरा लगी हुई संख्याएँ क्या निरूपित करती हैं?
पीले घेरों में लिखी संख्याएँ संगत पंक्तियों और स्तंभों का योग हैं। ऊपर बताए गए नियम के आधार पर नीचे दिए गए ग्रिड भरिए -
? इसी प्रकार के कुछ प्रश्न स्वयं बनाइए तथा अपने सहपाठियों को चुनौती दीजिए।
दी गई समस्या को हल करने का प्रयास कीजिए?
? आपने अनुभव किया होगा कि इस ग्रिड के लिए एक हल ज्ञात करना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति क्यों है?
न्यूनतम संभावित योग 6 = 1 + 2 + 3 है। अधिकतम संभावित योग 24 = 9 + 8 + 7 है। स्पष्टतः घेरे के अंदर की कोई भी संख्या 6 से कम एवं 24 से अधिक नहीं हो सकती है। इस ग्रिड में योग 5 और 26 दिए हए हैं। अतः यह असंभव है!
हमारे द्वारा पहले हल किए गए ग्रिड में किशोर ने देखा था कि घेरों में लगी सभी संख्याओं का योग सदैव 90 था। साथ ही विद्या ने देखा था कि सभी तीनों पंक्तियों या सभी तीनों स्तंभों के लिए घेरों में लिखी संख्याओं का योग सदैव 45 था। जाँच कीजिए कि क्या यह आपके द्वारा पहले हल किए गए ग्रिड के लिए भी सत्य है।
? पंक्तियों के योग अथवा स्तंभों के योग को जोड़ने पर योग सदैव 45 क्यों होना चाहिए?
3 पंक्तियों के योग को जोड़ने पर 45 प्राप्त होता है। ऐसा स्तंभों के योग को जोड़ने पर भी होता है।
इस ग्रिड से हम देख सकते हैं कि सभी पंक्तियों के योग को जोड़ने पर प्राप्त योग 1 से 9 तक की संख्याओं के योग के समान होगा। ऐसा ही स्तंभों के योग के लिए भी देखा जा सकता है। 1 से 9 तक की संख्याओं का योग
l + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 7 + 8 + 9 = 45
यदि प्रत्येक पंक्ति प्रत्येक स्तंभ तथा प्रत्येक विकर्ण में लिखी संख्याओं का योग समान संख्या हो तो उन संख्याओं का एक वर्गाकार ग्रिड जादई वर्ग (magic square) कहलाता है। यह योग जादुई योग कहलाता है। विकर्णों को चित्र में दर्शाया गया है।
संख्याओं द्वारा यादृच्छिक रूप से ग्रिड को भरकर एक जादुई वर्ग की रचना करने का प्रयास करना कठिन हो सकता है। इसका कारण यह है कि पुनरावृत्ति के बिना 1 से 9 तक की संख्याओं के उपयोग से एक 3 * 3 ग्रिड को भरने की अनेक विधियाँ हैं। वस्तुतः यह ज्ञात किया जा सकता है कि इसके लिए ऐसी ठीक 3,62,880 विधियाँ हैं। आपको आश्चर्य होगा कि इस प्रकार ग्रिड को भरने की विधियों की संख्या सभी संख्याओं को बिना लिखे ही ज्ञात की जा सकती है। हम बाद की कक्षाओं में देखेंगे कि ऐसा किस प्रकार करते हैं।
इसके स्थान पर हमें एक जादुई वर्ग बनाने के लिए क्रमबद्ध विधि से आगे बढ़ाना चाहिए। इसके लिए आइए स्वयं से कुछ प्रश्न पूछें।
1. जादुई योग क्या हो सकता है? क्या यह कोई भी संख्या हो सकती है?
आइए, एक क्षण के लिए केवल पंक्ति के योगों पर अपना ध्यान केंद्रित करें। हम देख चुके हैं कि 1 से 9 तक की संख्याओं वाली एक 3 * 3 ग्रिड में पंक्ति योग की संख्याओं का कुल योग सदैव 45 होगा। क्योंकि एक जादुई वर्ग में सभी पंक्ति योग समान होते हैं तथा इन्हें जोड़ने पर 45 प्राप्त होता है। अतः इनमें से प्रत्येक को 15 होना चाहिए। इस प्रकार हम निम्नलिखित प्रेक्षण प्राप्त करते हैं -
प्रेक्षण 1 - 1 से 9 तक की संख्याओं के उपयोग से बनाए गए एक जादुई वर्ग में जादुई योग 15 होना चाहिए।
2. किसी जादुई वर्ग के केंद्र पर संभवतः कौन-कौन सी संख्याएँ विद्यमान हो सकती हैं?
आइए, इन संभावनाओं पर एक-एक करके विचार करें। क्या केंद्रीय संख्या 9 हो सकती है? यदि ऐसा है तो 8 को किसी अन्य वर्ग में आना चाहिए। उदाहरण के लिए इस वर्ग में 8 + 9 + अन्य संख्या = 15 प्राप्त होनी चाहिए।
परंतु यह संभव नहीं है। क्योंकि हम 8 को किसी भी स्थान पर लिखें, पर यह समस्या सदैव रहेगी।
अत: 9 केंद्र के स्थान पर नहीं आ सकता। क्या केंद्रीय संख्या 1 हो सकती है?
यदि ऐसा है तो 2 को किसी अन्य वर्ग में अवश्य आना चाहिए।
यहाँ हमें 2+1 + संख्या अन्य संख्या = 15 अवश्य प्राप्त होनी चाहिए।
परंतु यह संभव नहीं है, क्योंकि हम केवल 1 से 9 तक की संख्याओं का ही उपयोग कर रहे हैं। चाहे हम 2 को किसी भी स्थान पर लिखें परंतु यह समस्या सदैव रहेगी।
अतः केंद्र पर संख्या 1 भी नहीं आ सकती है।
? ऐसे ही तर्क का उपयोग करते हुए ज्ञात कीजिए कि 1 से 9 तक की संख्याओं में से कौन-सी संख्याएँ केंद्र पर विद्यमान हो सकती हैं।
इस खोज के द्वारा हम निम्नलिखित रोचक प्रेक्षण पर पहुँच जाएँगे -
प्रेक्षण 2 - 1 से 9 तक की संख्याओं द्वारा भरे गए एक जादुई वर्ग के केंद्र पर प्रकट होने वाली संख्या 5 ही होनी चाहिए।
आइए, अब देखें कि एक जादुई वर्ग में न्यूनतम संख्या (1) और अधिकतम संख्या (9) कहाँ आनी चाहिए। हमारा दूसरा प्रेक्षण हमें बताता है कि इन्हें परिसीमा स्थानों में से किसी स्थान पर आना चाहिए। आइए, इन स्थानों का दो श्रेणियों में वर्गीकरण करें -
क्या 1 कोने के वर्ग में विद्यमान हो सकता है? उदाहरणार्थ क्या इसे संलग्न वर्ग के अनुसार रख सकते हैं?
? यदि हाँ, तो 15 प्राप्त करने के लिए दो अन्य संख्याओं के साथ 1 जोड़ने की तीन विधियाँ होनी चाहिए। हम 1 + 5 + 9 = 1 + 6 + 8 = 15 प्राप्त करते हैं। क्या कोई अन्य संयोजन संभव है?
? इसी प्रकार क्या 9 को किसी कोने के वर्ग में रखा जा सकता है?
प्रेक्षण 3 - संख्याएँ 1 और 9 किसी कोने के स्थान पर विद्यमान नहीं हो सकती हैं, अतः इन्हें मध्य-स्थानों में से किसी स्थान पर आना चाहिए।
? क्या आप 1 और 9 के लिए अन्य संभव स्थान ज्ञात कर सकते हैं?
अब हमारे पास जादुई वर्ग के लिए एक पूर्ण पंक्ति या एक पूर्ण स्तंभ है !
इसे पूरा करने का प्रयास कीजिए! (संकेत – सर्वप्रथम 1 और 9 वाली -पंक्ति को भरिए।)
? पता लगाइए
1. 1 से 9 तक की संख्याओं के उपयोग से कितने भिन्न-भिन्न जादुई वर्ग बनाए जा सकते हैं?
2. 2 से 10 तक की संख्याओं के उपयोग से एक जादुई वर्ग की रचना कीजिए। ऐसा करने के लिए आप कौन-सी युक्ति अपनाएँगे? इसकी तुलना 1 से 9 तक की संख्याओं से बनाए गए जादुई वर्गों से कीजिए।
3. एक जादुई वर्ग लीजिए तथा
(a) प्रत्येक संख्या में 1 की वृद्धि कीजिए।
(b) प्रत्येक संख्या को दुगुना कीजिए।
क्या प्रत्येक स्थिति में परिणामी ग्रिड भी एक जादुई वर्ग है? प्रत्येक स्थिति में जादुई योग में किस प्रकार का परिवर्तन होता है?
4. एक जादुई वर्ग पर अन्य कौन-कौन सी संक्रियाएँ की जा सकती हैं ताकि एक अन्य जादुई वर्ग प्राप्त हो जाए?
5. किन्हीं भी 9 क्रमागत संख्याओं के संग्रह के उपयोग से (जैसे 2 - 10, 3 - 11, 9 - 17 इत्यादि) एक जादुई वर्ग की रचना करने की विधियों पर चर्चा कीजिए।
एक 3 * 3 जादुई वर्ग का व्यापकीकरण करना
हम यह व्याख्या कर सकते हैं कि जादुई वर्ग की संख्याएँ परस्पर किस प्रकार संबंधित हैं अर्थात जादई वर्ग की संरचना किस प्रकार की जाती है।
? उन जादुई वर्गों में से किसी एक वर्ग का चयन कीजिए जिन्हें आपने क्रमागत संख्याओं का उपयोग करके बनाया है। यदि केंद्र पर स्थित संख्या की अक्षर संख्या m है तो व्यक्त कीजिए कि अन्य संख्याएँ किस प्रकार m से संबंधित हैं, अर्थात वे m से कितनी अधिक या कम हैं।
(संकेत – स्मरण कीजिए कि हमने बीजीय व्यंजकों के अध्याय में किस प्रकार एक तिथि पत्र (कैलेंडर) मास में 2 * 2 ग्रिड की व्याख्या की थी।)
? एक बार जब व्यापकीकृत रूप प्राप्त हो जाए तब अपने प्रेक्षणों को कक्षा के साथ साझा कीजिए।
? पता लगाइए
1. इस व्यापकीकृत रूप के उपयोग से वह जादुई वर्ग ज्ञात कीजिए जब केंद्रीय संख्या 25 है।
2. किसी पंक्ति, स्तंभ या विकर्ण के तीन पदों को जोड़ने पर कौन-सा व्यंजक प्राप्त होता है?
3. निम्नलिखित स्थितियों के परिणाम लिखिए -
(a) व्यापकीकृत रूप के प्रत्येक पद में 1 जोड़ने पर।
(b) व्यापकीकृत रूप के प्रत्येक पद को दुगुना करने पर।
4. एक जादुई वर्ग की रचना कीजिए जिसका जादुई योग 60 हो।
5. क्या 9 अक्रमागत संख्याओं को भरकर एक जादुई वर्ग प्राप्त करना संभव है?
सबसे पहला 4 × 4 जादुई वर्ग
सबसे पहला अभिलेखित 4 * 4 जादुई वर्ग भारत के पार्श्वनाथ जैन मंदिर खजुराहो में दसवीं शताब्दी के एक शिलालेख पाया गया है तथा इसे 'चौतीसा यंत्र' कहा जाता है।
चौतीस अर्थात 34 है। आपके विचार से उन लोगों ने इसे 'चौतीसा यंत्र' क्यों कहा?
इस जादुई वर्ग की प्रत्येक पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण की संख्याओं का योग 34 है।
क्या आप इस वर्ग में 4 संख्याओं के अन्य प्रतिरूप (पैटर्न) ज्ञात कर सकते हैं जिनमें प्रत्येक पंक्ति अथवा स्तंभ या विकर्ण की 4 संख्याओं का योग 34 हो?
इतिहास और संस्कृति में जादुई वर्ग
सर्वप्रथम अभिलेखित जादुई वर्ग की रचना 2000 से अधिक वर्षों पूर्व प्राचीन चीन में हुई थी जिसे लो शू वर्ग कहा जाता है। किवंदंती (दन्त कथा) है कि लो नदी में अ एक विपत्तिकारक बाढ़ के समय ईश्वर ने लोगों को बचाने के लिए एक कछुए को भेजा था। वह कछुआ अपनी पीठ पर एक 3 × 3 ग्रिड लाया था जिस पर 1 से 9 तक संख्याएँ एक जादुई पैटर्न में व्यवस्थित थीं।
विश्व के विभिन्न भागों में विभिन्न समय पर जादुई वर्गों का अध्ययन किया गया जिनमें भारत, जापान, मध्य एशिया और यूरोप सम्मिलित हैं।
भारतीय गणितज्ञों ने वृहत-रूप से जादुई वर्गों पर कार्य किया है। इनके द्वारा रचे गए ग्रंथों में इन जादुई वर्गों की रचना करने की व्यापक विधियों का वर्णन किया गया है, जिनकी हमने ऊपर चर्चा की है कि भारतीय गणितज्ञों का कार्य केवल 3 × 3 और 4 × 4 के ग्रिड बनाने तक ही सीमित नहीं रहा, अपितु इन्होंने इन्हें 5 × 5 तथा अन्य बड़े वर्ग के ग्रिड के लिए भी विस्तृत किया। हम इनका अध्ययन बाद की कक्षाओं में करेंगे।
जादुई वर्गों का प्रकट होना अध्ययनशील गणितीय कार्यों तक ही सीमित नहीं रहा। ये भारत के अनेक स्थानों पर पाए गए हैं। दाईं ओर संलग्न चित्र एक 3 × 3 जादुई वर्ग का है जो तमिलनाडु के पलानी नामक स्थान के एक मंदिर के एक स्तंभपर प्राप्त हुआ है। इस मंदिर का निर्माण लगभग आठवीं शताब्दी में किया गया था। 3 × 3 जादुई वर्ग भारत के घरों और दुकानों पर भी पाए जा सकते हैं। नीचे दर्शाया गया 'नवग्रह यंत्र' भी एक ऐसा ही उदाहरण है।
ध्यान दीजिए कि प्रत्येक ग्रह के साथ एक भिन्न जादुई योग संबद्ध है। नीचे 'कुबेर यंत्र' का एक चित्र दर्शाया गया है -
6.4 प्रकृति का मनपसंद अनुक्रम - विरहांक-फिबोनाची संख्याएँ!
अनुक्रम 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, अधिक प्रसिद्ध अनुक्रमों में से एक है। यह कला, विज्ञान और गणित की दुनिया प्रत्येक स्थान पर देखने को मिल जाता है। यद्यपि ये संख्याएँ अनेक बार विज्ञान के क्षेत्र में प्राप्त होती रहती हैं, यह उल्लेखनीय है कि इन संख्याओं की सर्वप्रथम खोज कला (विशिष्ट रूप से कविता) के संदर्भ में हुई थी।
इस प्रकार विरहांक-फिबोनाची संख्याएँ कला, विज्ञान और गणित के बीच निकटता के संबंधों का एक सुंदर दृष्टांत प्रदान करती हैं।
विरहांक संख्याओं की खोज
विरहांक संख्याएँ सर्वप्रथम हजारों वर्ष पूर्व संस्कृत और प्राकृत भाषाविदों के ग्रंथों में उनकी काव्यात्मक रचनाओं के अध्ययन में उद्धृत हुईं!
अनेक भारतीय भाषाओं, जैसे- प्राकृत, संस्कृत, मराठी, मलयालम, तमिल और तेलुगु की काव्यात्मक रचनाओं में प्रत्येक शब्दांश* (syllable) लघु-गुरु (दीर्घ) के रूप में वर्गीकृत हैं।
एक गुरु शब्दांश का एक लघु शब्दांश की तुलना में लंबे समय तक उच्चारण किया जाता है - वस्तुतः ठीक दुगुने समय तक। इसके गायन के समय एक लघु शब्दांश समय की एक ताल पर समाप्त होता है तथा गुरु शब्दांश समय के दो तालों (beats) पर समाप्त होता है।
श्लोक गायन की इस सरल व्यवस्था से असंख्य गणितीय प्रश्न उत्पन्न हुए जिन पर इन भाषाओं के प्राचीन कवियों ने विस्तृत रूप से विचार किया। श्लोकों से संबंधित प्रश्नों को पूछने और उनके उत्तर देने की प्रक्रिया में अनेक महत्वपूर्ण गणितीय खोजें की गईं।
- यह शब्द का वह भाग है जिसमें एक स्त्तरध्वनि होती है एवं इसे एक शब्दांश को अक्षर भी * शब्दांश कहा जाता है।
इन प्रश्नों में एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रश्न था कि लघु शब्दांशों (1 ताल) और गुरु शब्दांशों (2 ताल) को सम्मिलित करते हुए 8 तालों की कितनी लय (rhythms) बनाई जा सकती हैं? अर्थात कोई व्यक्ति ऐसी कितनी विधियों से आठ तालों को लघु एवं गुरु शब्दांशों से भर सकता है जहाँ एक लघु शब्दांश एक ताल का समय लेता है तथा एक गुरु शब्दांश दो तालों का समय लेता है?
यहाँ कुछ संभावनाएँ दी गई हैं -
गुरु गुरु गुरु गुरु
लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु
लघु गुरु गुरु लघु गुरु
गुरु गुरु लघु लघु गुरु
क्या आप अन्य संभावनाएँ भी ज्ञात कर सकते है?
अधिक गणितीय रूपों में लिखने पर 1 और 2 के योग के रूप में संख्या 8 को कितनी विधियों से लिखा जा सकता है?
उदाहरण के लिए— 8 = 2 + 2 + 2 + 2,
8 = 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1,
8 = 1 + 2 + 2 + 1 + 2,
8 = 2 + 2 + 1 + 1 + 2,
इत्यादि।
क्या आप कोई अन्य विधियाँ सोच पा रहे हैं?
यहाँ संख्याओं 1, 2, 3 और 4 में से प्रत्येक को 1 और 2 के योग के रूप में लिखने की सभी विधियाँ दी जा रही हैं-
| विभिन्न विधियाँ |
विधियों की संख्या | |
|---|---|---|
| n = 1 | 1 | 1 |
| n = 2 | 1+1 2 |
3 |
| n = 3 | 1+1+1 1+2 2+1 |
3 |
| n = 4 | 1 + 1+1 + 1 1+1+2 1+2+1 2 + 1 + 1 2+2 |
5 |
अपनी अभ्यास पुस्तिका में संख्या 5 को सभी संभावित विधियों से 1 और 2 के योग के रूप में लिखने का प्रयास कीजिए। आपने कितनी विधियाँ ज्ञात की हैं? (आपको 8 विभिन्न विधियाँ प्राप्त होनी चाहिए)। क्या आप सभी संभावनाओं को लिखे बिना इन्हें ज्ञात कर सकते हैं? क्या आप n = 8 के लिए इसका प्रयास कर सकते हैं?
यहाँ लघु एवं गुरु शब्दांशों की 5 तालों वाली सभी लय लिखने की एक क्रमबद्ध विधि दी जा रही है। 4 तालों वाली सभी लयों के सम्मुख '1+' लिखिए; फिर 3 तालों वाली सभी लयों के सम्मुख '2+' लिखिए। इससे हमें 5 तालों वाली सभी लय प्राप्त हो जाती हैं -
| n = 5 | 1 + 1 + 1 + 1 + 1 1 + 1 + 1 + 2 1 + 1 + 2 + 1 1 + 2 + 1 + 1 1 + 2 + 2 |
2 + 1 + 1 + 1 2 + 1 + 2 2 + 2 + 1 |
इस प्रकार 5 तालों वाली 8 लय हैं!
यह विधि तब ठीक से कार्यान्वित होती जब 5 तालों वाली प्रत्येक लय को या तो '1+' से या से प्रारंभ होना चाहिए। यदि यह '1+' से प्रारंभ होती है तो शेष संख्याओं को एक 4 ताल लय प्रदान करनी चाहिए तथा हम इन सभी को लिख सकते हैं। यदि यह '2+' के साथ प्रारंभ होती है तो शेष संख्याओं को एक 3 ताल लय प्रदान करनी चाहिए तथा हम इन सभी को लिख सकते हैं। इस प्रकार 5 ताल लयों की संख्या 4 ताल लयों की संख्या और 3 ताल लयों की संख्या का योग है।
6 ताल लय कितनी हैं? इसी तर्क के अनुसार यह 5 ताल लयों की संख्या और 4 ताल लयों की संख्या का योग होगा। अर्थात यह 8 + 5 = 13 है। इस प्रकार 6 तालों वाली 13 लय होंगी।
? क्रमबद्ध विधि का उपयोग करते हुए सभी 6 ताल लयों को लिखिए। अर्थात 6 को 1 और 2 के योग के रूप में सभी संभावित विधियों से लिखिए। क्या आपको 13 विधियाँ प्राप्त हुईं?
किसी भी निश्चित संख्या में दी गई ताल के लघु एवं गुरु अक्षरों की सभी लयों की गणना करने की यह सुंदर एवं उत्तम विधि एक महान प्राकृत भाषाविद और छंद शास्त्री विरहांक ने लगभग वर्ष 700 सामान्य संवत् में प्रदान की थी। उन्होंने अपनी इस विधि को कविता के प्राकृत छंद के रूप में दिया। इसी कारण अनुक्रम 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34... को विरहांक अनुक्रम कहा जाता है तथा इस अनुक्रम की संख्याएँ विरहांक संख्याएँ कहलाती हैं। विरहांक इतिहास में वे प्रथम ज्ञात व्यक्ति थे जिन्होंने स्पष्टतः इन महत्वपूर्ण संख्याओं पर विचार किया तथा इनके बनने का नियम लिखा।
भारत में अन्य भाषाविदों और छंद शास्त्रियों ने भी इन संख्याओं पर इसी काव्यात्मक संदर्भमें विचार किया। निःसंदेह, विरहांक को प्रसिद्ध भाषाविद् और छंद शास्त्री पिंगल के पूर्व कार्यों से प्रेरणा प्राप्त हुई। पिंगल का जीवन काल लगभग 300 सामान्य संवत् पूर्व था। विरहांक के बाद इन संख्याओं के बारे में गोपाल (1135 सामान्य संवत्) और फिर हेमचन्द्र (1150 सामान्य संवत्) द्वारा भी लिखा गया।
पश्चिम में इन संख्याओं को एक इटालियन गणितज्ञ फिबोनाची के नाम पर फिबोनाची संख्याएँ कहा जाता है। इन्होंने इन संख्याओं के विषय में विरहांक से 500 वर्ष बाद लगभग 1202 सामान्य संवत् में लिखा। जैसा कि हम देख सकते हैं कि फिबोनाची न तो ऐसे प्रथम व्यक्ति थे और न ही द्वितीय तथा तृतीय व्यक्ति थे जिन्होंने इन संख्याओं के विषय में लिखा। परंतु कभी-कभी "विरहांक-फिबोनाची संख्याओं" का उपयोग इसलिए किया जाता है कि सभी व्यक्ति समझ सकें कि वस्तुतः इनका संदर्भ क्या है।
अतः लघु एवं गुरु शब्दांशों वाली 8 तालों में कितनी लय होंगी? हम इसके लिए विरहांक अनुक्रम 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, ... का 8वाँ पद लेते हैं।
इस प्रकार 8 तालों वाली 34 लय हैं।
इस अनुक्रम में 55 के बाद आने वाली संख्या लिखिए।
हम देख चुके है कि इस अनुक्रम में अगली संख्या पिछली दो संख्याओं को जोड़कर प्राप्त होती है। जाँच कीजिए कि यह तथ्य ऊपर दी संख्याओं के लिए सत्य है या नहीं। अगली संख्या है -
34+55=89
? इस अनुक्रम में अगली तीन संख्याएँ लिखिए -
1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89,.....,......,......,......
यदि आपको उपरोक्त अनुक्रम की एक और संख्या लिखनी हो तो क्या आप बता सकते हैं कि (पिछली दो संख्याओं को जोड़े बिना) यह संख्या सम होगी या विषम?
? इस अनुक्रम में प्रत्येक संख्या की समानता क्या है? समानताओं के अनुक्रम में क्या आप कोई पैटर्न देख पा रहे हैं?
वर्तमान समय में विरहांक-फिबोनाची संख्याएँ काव्यात्मक रचनाओं (श्लोकों) से लेकर ढोल-नगाड़े बजाने तक, चित्रकला और वास्तुकला से लेकर विज्ञान तक अनेक गणितीय और कलात्मक सिद्धांतों का आधार बनती हैं। संभवतः इन संख्याओं की सबसे अधिक प्रकटीभूत अद्भुत घटनाएँ प्रकृति की कलाओं में होती हैं! उदाहरणार्थ एक गुलबहार के फूल में पंखुड़ियों की संख्या सामान्यतः एक विरहांक संख्या होती है।
आप निम्नलिखित फूलों में से प्रत्येक में कितनी पंखुड़ियाँ देख पा रहे हैं?
विरहांक-फिबोनाची संख्याओं के अनेक उल्लेखनीय गणितीय गुण हैं जिनका हम बाद में गणित के साथ अन्य विषयों में भी अध्ययन करेंगे।
ये संख्याएँ वस्तुतः विज्ञान, कला और गणित के बीच घनिष्ठ संबंधों का एक उत्तम उदाहरण है।
6.5 अंक पहेली
आप संख्याओं के साथ अंकगणितीय संक्रियाएँ कर चुके हैं। अक्षरों के साथ ये सक्रियाएँ करने के विषय में आपके क्या विचार हैं?
नीचे दिए परिकलनों में अंकों को अक्षरों द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया है। प्रत्येक अक्षर एक विशेष अंक (0-9) को व्यक्त करता है। आपको पता लगाना है कि प्रत्येक अक्षर किस अंक को व्यक्त करता है।
TT
+T
———
UT
यहाँ हमें 1-अंकीय संख्या T प्राप्त है। इसे स्वयं में दो बार जोड़ने पर एक 2-अंकीय योग प्राप्त हो रहा है। इस योग की इकाई का अंक वही एकल अंक है जिसे जोड़ा गया है।
? U और T क्या हो सकते हैं? क्या T अंक 2 हो सकता है? क्या यह 3 हो सकता है?
k2+k2
———
HMM
जब आप खोज करेंगे तब देखेंगे कि है तथा UT = 15 है। T = 5 आइए, दाईं ओर दिए गए एक और उदाहरण पर दृष्टि डालें। यहाँ K2 का अर्थ है कि यह संख्या एक 2-अंकीय संख्या है जिसमें इकाई का अंक 2 है तथा दहाई का अंक K है। K2 को स्वयं से जोड़ने पर एक 3-अंकीय संख्या HMM प्राप्त होती है। अक्षर M को किस अंक के संगत होना चाहिए?
इस योग के दहाई और इकाई के स्थान में प्रत्येक पर समान अंक है।
? H के विषय में क्या विचार हैं? क्या यह 2 हो सकता है? क्या यह 3 हो सकता है?
इस प्रकार के प्रश्न हल करने में रोचक और मनोरंजक हो सकते हैं! यहाँ आपको हल करने का प्रयास करने के लिए ऐसे ही कुछ और प्रश्न दिए जा रहे हैं। पता लगाइए कि प्रत्येक अक्षर किस अंक को व्यक्त करता है।
अपनी कक्षा के सहपाठियों के साथ उन विचारों को साझा कीजिए जो आपने इन प्रश्नों के विषय में सोचा था। आप कुछ नई विधियों (अभिगमों) को भी ज्ञात कर सकते हैं।
YY+Z
———
ZOO
B5
+3D
———
ED5
KP
+KP
———
PRR
CI
+C
———
IFF
इस प्रकार के प्रश्न क्रिप्टारिथमेटिक प्रश्न या अल्फामेटिक प्रश्न (अक्षर विज्ञान पहेली) कहलाते हैं।
? पता लगाइए
1. एक विद्युत बल्ब जला हुआ (On) है। दिनेश इसके बटन को 77 बार दबाता है। क्या यह बल्ब अब जला हुआ (On) होगा या बंद (Off) होगा? ऐसा क्यों?
2. ललिता के पास एक बड़ा प्राचीन विश्वकोश है। जब वह इसे खोलती है तब इसके अनेक खुले पृष्ठ गिर जाते हैं। वह कुल 50 पृष्ठ गिनती है जो दोनों ओर छपे हुए हैं। क्या इन खुले पृष्ठों की संख्याओं का योग 6000 हो सकता है? यदि हाँ, तो क्यों अथवा नहीं, तो क्यों नहीं?
3. यहाँ चित्र में एक 2*3 का ग्रिड दिया गया है। प्रत्येक पंक्ति और स्तंभ के लिए योग की समानता घेरे में लिखी हुई है। 'e' सम संख्या के लिए है तथा विषम संख्या के लिए है। इन बक्सों को 3 विषम संख्याओं (०) तथा 3 सम संख्याओं (e) से इस प्रकार भरिए कि पंक्ति और स्तंभों के योग की समानता संतुष्ट हो जाए।
4. जादुई योग 0 वाला एक 3 * 3 जादुई वर्ग बनाइए। सभी संख्याएँ शून्य नहीं हो सकती हैं। आवश्यकतानुसार ऋणात्मक संख्याओं का उपयोग कीजिए।
5. निम्नलिखित रिक्त स्थानों को 'विषम' या 'सम' से भरिए -
(a) विषम संख्या में सम संख्याओं का योग ...............होता है।
(b) सम संख्या में विषम संख्याओं का योग ..............होता है।
(c) सम संख्या में सम संख्याओं का योग .............. होता है।
(d) विषम संख्या में विषम संख्याओं का योग .............. होता है।
6. 1 से 100 तक की संख्याओं के योग की समानता क्या है?
7. विरहांक अनुक्रम में दो क्रमागत संख्याएँ 987 और 1597 हैं। इस अनुक्रम की अगली दो संख्याएँ तथा पिछली दो संख्याएँ क्या हैं?
8. अंगद एक 8 पगों वाली सीढ़ी पर चढ़ना चाहता है। उसके खेल का एक नियम है कि एक समय पर वह 1 पग या 2 पग ही ले सकता है। उदाहरणार्थ, उसके पथों में से एक पथ 1, 2, 2, 1, 2 है। तो बताइए कि वह शीर्ष पर कितनी भिन्न विधियों से पहुँच सकता है?
9. विरहांक अनुक्रम के 20वें पद की समानता क्या है?
10. सत्य कथनों की पहचान कीजिए -
(a) व्यंजक 4m - 1 से सदैव विषम संख्याएँ प्राप्त होती हैं।
(b) सभी सम संख्याओं को 6j- 4 के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
( c) दोनों व्यंजक 2p + 1 और 2q - 1 सभी विषम संख्याओं का वर्णन करते हैं।
(d) व्यंजक 2f + 3 सम और विषम दोनों संख्याओं को व्यक्त करता है।
11. निम्नलिखित क्रिप्टारिथम को हल कीजिए -
UT
+TA
TAT
सारांश
इस अध्याय में हमने सीखा --
प्रथम क्रियाकलाप में हमने देखा कि संख्याओं के एक अनुक्रम के विषय में सूचना (उदाहरणार्थ मापनों) को किस प्रकार निरूपित किया जाता है तथा किस प्रकार वास्तविक संख्याओं के विषय में बिना किसी जानकारी के उन्हें व्यवस्थित किया जाता है।
हमने संख्या समानता की धारणा के विषय में अध्ययन किया, जिनमें ऐसी संख्याओं के विषय में जाना, जो युग्मों में व्यवस्थित की जा सकती हैं (सम संख्याएँ) तथा ऐसी संख्याएँ, जो युग्मों में व्यवस्थित नहीं की जा सकती हैं (विषम संख्याएँ)।
हमने सीखा कि योग और गुणनफलों की समानता कैसे निर्धारित की जाए।
ग्रिड में योग की खोज करते समय हम निर्धारित कर सके कि किस ग्रिड को पंक्तियों और स्तंभों के योग को देखकर भरना असंभव है। हमने इस तथ्य को जादुई वर्ग की रचना करने के लिए विस्तृत किया है।
हमने देखा कि किस प्रकार विरहांक संख्याएँ ऐतिहासिक रूप से कलाओं के माध्यम से खोजी गईं। विरहांक अनुक्रम 1, 2, 3, 5, 8, 13, 34, 55... है।
हम क्रिप्टारिथम के माध्यम से गणित जासूस बन गए हैं जहाँ अंकों को अक्षरों से प्रतिस्थापित किया जाता है।
मैंने अभी-अभी सुना कि पिछले वर्ष 14,70,369 व्यक्तियों ने विवाह किया।
ठहरिए ! क्या इसे एक सम संख्या में नहीं होना चाहिए?
!
