अध्याय -8
भिन्नों के साथ कार्य करना
8.1 भिन्नों का गुणन
आरोन एक घंटे में 3 किलोमीटर चलता है। वह 5 घंटे में कितना चल सकता है?
यह एक साधारण प्रश्न है। हम जानते हैं कि दूरी को ज्ञात करने के लिए हमें 5 और 3 के गुणनफल की आवश्यकता होगी, अर्थात हम 5 और 3 का गणा करेंगे।
गुणा करेंगे।
1 घंटे में तय की गई दूरी = 3 कि.मी. इसलिए
5 घंटे में तय की जाने वाली दूरी = 5 * 3 कि.मी.
= 3 + 3 + 3 + 3 + 3 कि.मी.
= 15 कि.मी.
? आरोन का पालतू कछुआ बहुत ही धीमी गति से चलता है। वह एक घंटे में केवल 1/4 किलोमीटर ही चलता है। वह 3 घंटे में कितना चल सकता है?
यहाँ एक घंटे में तय की गई दूरी एक भिन्न है। इससे कोई अंतर नहीं पड़ता। कुल तय की गई दूरी की गणना उसी प्रकार की जाती है जैसे गुणन किया जाता है।
अतः 3 घंटो में तय की गई दूरी = 3 * 1/4 कि.मी. कि.मी. कि.मी.
= 1/4 + 1/4 + 1/4 कि.मी
= 3/4 कि.मी.
कछुआ 3 घंटे में 3/4 कि.मी. चल सकता है।
आइए, हम एक ऐसी स्थिति पर विचार करें जिसमें पैदल चलने में बिताया गया समय एक घंटे का एक भिन्न हो।
? हमने देखा कि आरोन एक घंटे में 3 किलोमीटर चल सकता है। वह 1/5 घंटे में कितनी दूर तक चल सकता है?
हम गुणन द्वारा तय की गई कुल दूरी की गणना को आगे बढ़ाएँगे।
1/5 घंटे में तय की गई दूरी =1/5* 3 कि.मी.
गुणनफल ज्ञात करना
1घंटे में तय की गई दूरी, =3 कि.मी
1/5 घंटे में तय की गई दूरी, 3 घंटे को 5 समान भागों में विभाजित करने पर प्राप्त लंबाई के समान है जो कि 3/5कि.मी. है।
यह हमें बताती है कि 1/5 * 3 = 3/5
? आरोन 2/5 घंटों में कितनी दूर तक चल सकता है?
एक बार पुनः हमारे पास है -
तय की गई दूरी = कि.मी. = 2/5 * 3 कि.मी.
गुणनफल ज्ञात करना
1. हम सबसे पहले 1/5घंटे में तय की गई दूरी ज्ञात कर सकते हैं।
2. क्योंकि अवधि 2/5, 1/5 की दोगुनी है। कुल तय की गई दूरी जानने के लिए हम इस दूरी को 2 से गुणा करते हैं।
यह गणना इस प्रकार है -
1 घंटे में तय की गई दूरी = 3 कि.मी.
1. 1/5 घंटे में तय की गई दूरी
= 3 कि.मी.को 5 समान भागों में विभाजित करने पर प्राप्त एक भाग की लंबाई
=3/5कि.मी.2. इस दूरी को 2 से गुणन करने पर हमें प्राप्त होता है
2 * 3/5 = 6/5कि.मी.उपरोक्त से हम देख सकते हैं कि
2/5 * 3 = 6/5चर्चा
हमने यह गुणन इस प्रकार किया -
- सबसे पहले हमने गुण्य 3 को गुणक के हर 5 से विभाजित किया जिससे हमें 3/5 प्राप्त हुआ।
फिर हमने परिणाम को गुणक के अंश द्वारा गुणा किया जो कि 2 है। इससे हमें 6/5 प्राप्त होता है।
इस प्रकार जब हमें एक पूर्ण संख्या को एक भिन्न से गुणा करने की आवश्यकता हो तो हम ऊपर दिए गए चरणों का अनुसरण करते हैं।
? उदाहरण 1 - एक किसान के 5 पोते-पोतियाँ हैं। वह अपने प्रत्येक पोता-पोती को 2/3 एकड़ भूमि वितरित करता है। उसने अपने सभी पोते-पोतियों को कुल कितनी भूमि दी?
5 * 2/3 = 2/3 + 2/3 + 2/3 + 2/3 + 2/3 = 10/3
? उदाहरण 2 - एक घंटे इंटरनेट समय की लागत ₹8 है। 1(1/4) घंटे इंटरनेट समय की लागत क्या होगी?
1(1/4) घंटे अर्थात घंटे हैं (मिश्रित भिन्न को बदलने पर)।
5/4घंटे इंटरनेट समय की लागत =5/4 * 8
= 5 * 8/4
= 5 * 2
= 10
अतः 1(1/4) घंटे इंटरनेट समय की लागत ₹10 है।
? पता लगाइए
1. तेनजिन प्रतिदिन (1/2) गिलास दूध पीता है। वह एक सप्ताह में कितने गिलास दूध पीता है? उसने जनवरी माह में कितने गिलास दूध पिया?
2. श्रमिकों का एक समूह 1 कि.मी. लंबी एक पानी की नहर को 8 दिनों में बना सकता है। अतः यह समूह एक दिन में ...............कि.मी. पानी की नहर बना सकता है। यदि वे एक सप्ताह में 5 दिन कार्य करते हैं तो वे एक सप्ताह में, ..............कि.मी. पानी की नहर बना सकते हैं।
3. मंजू और उसकी दो पड़ोसन मिलकर प्रत्येक सप्ताह 5 लीटर तेल खरीदती हैं और उसे समान मात्रा में 3 परिवारों के बीच साझा करती हैं? प्रत्येक परिवार को एक सप्ताह में कितना तेल मिलता है? एक परिवार को 4 सप्ताह में कितना तेल प्राप्त होगा?
4. साफिया ने सोमवार को रात 10 बजे चंद्रमा को अस्त होते देखा। उसकी माताजी एक वैज्ञानिक हैं। उन्होंने बताया कि चंद्रमा प्रत्येक दिन पिछले दिन की तुलना में 5/6 घंटे देर से अस्त होता है। चंद्रमा बृहस्पतिवार को रात 10 बजे के कितने घंटे बाद अस्त होगा
5. गुणा कीजिए और उसे मिश्रित भिन्न में बदलिए।
(a) 7 * 3/5(b) 4 * 1/3
(c) 9/7 * 6
(d) 13/11 * 6
अभी तक हमने एक पूर्ण संख्या का भिन्न के साथ और एक भिन्न का एक पूर्ण संख्या के साथ गुणन करना सीखा। क्या होगा जब गुणन में दोनों संख्याएँ भिन्न हों?
दो भिन्नों को गुणा करना
? हम जानते हैं कि आरोन का पालतू कछुआ 1 घंटे में केवल 1/4 कि. मी. चल सकता है। वह आधे घंटे में कितनी दूर चल सकता है?
ऐसी समस्याओं को हल करने के लिए गुणन विधि का उपयोग करने से हमें प्राप्त होता है -
1/2 घंटे में तय की गई दूरी कि.मी. = 1/2 * 1/4 कि.मी.
गुणनफल ज्ञात करना
1 घंटे में तय की गई दूरी = 1/4 कि.मी
अतः 1/2 घंटे में तय दूरी, को 2 समान भागों में विभाजित करने पर प्राप्त लंबाई होगी।
यह ज्ञात करने के लिए कि 'पूर्ण' के लिए इकाई वर्ग का उपयोग करके भिन्नों को दर्शाना उपयोगी होता है।
पूर्ण के रूप में इकाई वर्ग
1/4 * qof plus/minus 1
अब हम इस को 2 समान भागों में बाँटते हैं। हमें क्या प्राप्त होता है? 1/4
177
1/2
अब हम इस को 2 समान भागों में बाँटते हैं। हमें क्या प्राप्त होता है? 1/4
पूर्ण का कितना भिन्न छायांकित है?
क्योंकि पूर्ण को 8 समान भागों में विभाजित किया गया है और एक भाग छायांकित किया गया है। अतः हम कह सकते हैं कि पूर्ण का 1/8 भाग छायांकित है। इसलिए कछुए द्वारा 1/2 घंटे में तय दूरी 1/8 कि.मी. है।
इससे पता चलता है कि 1/2 * 1/4 = 1/8
? यदि कछुआ तेज चलता है और वह 1 घंटे में 2/5 कि.मी की दूरी तय कर सकता है तो वह 3/5 घंटे में कितनी दूर चलेगा?
तय की गई दूरी = 3/4 * 2/5 कि.मी.
गुणनफल ज्ञात करना
(i) सबसे पहले 1/4 घंटे में तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।
(ii) प्राप्त परिणाम को 3 से गुणा करके 3/4 घंटे में तय की गई दूरी ज्ञात करते हैं।
(i) 1/4 घंटे में तय की गई दूरी (कि.मी. में) = 2/5 को 4 समान भागों में विभाजित करने पर प्राप्त प्रत्येक भाग।
इकाई वर्ग को पूर्ण के रूप में लेने पर चित्र 8.1 में छायांकित भाग वह क्षेत्र है जो हमें 2/ 5 को 4 समान भागों में विभाजित करने पर प्राप्त होता है।
यह पूर्ण का कितना भाग है?
पूर्ण को 5 पंक्तियों और 4 स्तंभों में विभाजित किया गया है,
जिससे 5 × 4 = 20 समान भाग मिलते हैं।
छायांकित भागों की संख्या = 2
अतः 1/4 घंटे में तय की गई दूरी = 2/20
1/4 5 * 4 = 20
(ii) अब हमें 2/20 को 3 से गुणा करने की आवश्यकता है।
3/4 घंटे में तय दूरी = 3 * 2/20
= 6/20
अतः 3/4 * 2/5 = 6/20 =3/10
चर्चा
एक भिन्न को दूसरे भिन्न द्वारा गुणा करने की स्थिति में हम उसी विधि का अनुसरण करते हैं जिसका हमने तब उपयोग किया था जब हम एक भिन्न को एक पूर्ण द्वारा गुणा करते थे। हमने निम्नानुसार गुणा किया था -
? इस समझ का उपयोग करके 5/4 * 3/2 गुणा कीजिए।
आइए, इकाई वर्ग को पूर्ण के रूप में लेते हुए पहले 3/2 को प्रदर्शित करें। क्योंकि 3/2 भिन्न एक पूर्ण और एक आधा भिन्न है। निम्नानुसार देखा जा सकता है
गुणा के चरणों का अनुसरण करते हुए हमें पहले भिन्न 3/2 को 4 समान भागों में विभाजित करना है। ऐसा चित्र 8.2 में पीले रंग वाले क्षेत्र द्वारा दर्शाए अनुसार किया जा सकता है। यह 3/2 को 4 समान भागों में बाँटने पर प्राप्त भिन्न को दर्शाता है। इसका क्या मान है?
हम देखते हैं कि पूर्ण को 2 पंक्तियों और 4 स्तंभों में बाँटा गया है
जिससे 2 * 4 = 8 समान भाग मिलते हैं।
कुल छायांकित भागों की संख्या = 3
अतः छायांकित पीला भाग = 3/8
अब अगले चरण में प्राप्त परिणाम को 5 से गुणा किया जाता है। यह 5/4 और 3/2 का गुणनफल देता है।
5/4 * 3/2 = 5 * 3/8 = 15/8
एक आयत के क्षेत्रफल और भिन्न गुणन के बीच संबंध
चित्र 8.3 में छायांकित आयत की लंबाई और चौड़ाई क्या है? क्योंकि हमने एक इकाई वर्ग (1 इकाई भुजा वाला) के साथ आरंभ किया है, अतः लंबाई और चौड़ाई 1/2 इकाई और 1/4 इकाई है।
इस आयत का क्षेत्रफल क्या है? हम देखते हैं कि ऐसे 8 आयत मिलकर एक वर्ग इकाई क्षेत्रफल वाला वर्ग बनाते हैं। इसलिए प्रत्येक आयत का क्षेत्रफल वर्ग इकाई है। 1/8
? क्या आपको क्षेत्रफल और लंबाई व चौड़ाई के गुणनफल के बीच कोई संबंध दिखाई दे रहा है?
भिन्नात्मक भुजाओं वाले आयत का क्षेत्रफल इसकी भुजाओं के गुणनफल के समान है।
सामान्यतः यदि हम दो भिन्नों का गुणनफल ज्ञात करना चाहते हैं तो हम दो भिन्नों को भुजा मानकर बने आयत का क्षेत्रफल ज्ञात कर सकते हैं।
? पता लगाइए
1. निम्नलिखित गुणनफलों को ज्ञात कीजिए। भिन्न को प्रदर्शित करने के लिए एक इकाई वर्ग को एक पूर्ण के रूप में उपयोग कीजिए।
(a) 1/3× 1/5(b) 1/4× 1/3
(c) 1/5× 1/2
(d) 1/6 × 1/5
अब 1/12 * 1/18 ज्ञात कीजिए।
ऐसा करने के लिए भिन्नों को एक इकाई वर्ग का प्रयोग करके प्रदर्शित करना बड़ा जटिल कार्य है। आइए, उपरोक्त स्थितियों में हमने जो किया उसका अवलोकन करके गुणनफल ज्ञात करें।
प्रत्येक स्थिति में पूर्ण को पंक्तियों और स्तंभों में विभाजित किया गया है।
पंक्तियों की संख्या गुण्य का हर होती है जो कि इस स्थिति में 18 है। स्तंभों की संख्या गुणक का हर होती है जो कि इस स्थिति में 12 है। इस प्रकार पूर्ण को समान भागों में विभाजित किया गया है।
अत: 1/18 * 1/12 = 1/(18 * 12) = 1/216
इस प्रकार जब दो भिन्नात्मक इकाइयों को गुणा किया जाता है तो उनका गुणनफल 1/ (हरों का गुणनफल) होता है।
हम इसे इस प्रकार व्यक्त कर सकते हैं-
1/b * 1/d = 1/(b*d)
2. निम्नलिखित गुणनफलों को ज्ञात कीजिए। भिन्नों को प्रदर्शित करने के लिए एक इकाई वर्ग को एक पूर्ण के रूप में उपयोग कीजिए और संक्रियाओं को करके दिखाइए।
(a) 2/3 * 4/5(b) 1/4 * 2/3
(c) 3/5 * 1/2
(d) 4/6 * 3/5
अंशों और हरों को गुणा करना
अब 5/12 * 7/18 ज्ञात करें।
आइए, पूर्व की भाँति ही चरणबद्ध गुणन करके गुणनफल ज्ञात करें। पहले पूर्ण को 18 पंक्तियों एवं 12 स्तंभों में विभाजित करके 12 x 18 समान भाग बनाए जाते हैं।
7/18को 12 समान भागों में विभाजित करने पर हमें 7/(12 * 18) प्राप्त होता है।
तब हम इस प्राप्त परिणाम को 5 से गुणा करके गुणनफल प्राप्त करते हैं।
यह (5 * 7)/(12 * 18) है।
अतः 5/12 * 7/8 = (5 * 7)/(12 * 18) = 35/216
इससे हम देख सकते हैं कि सामान्यतः
a/b * c/d = (ac)/(bd)
इस सूत्र को पहली बार इस सामान्य रूप में ब्रह्मगुप्त ने 628 सामान्य संवत् में अपने ब्रह्मस्फुट-सिद्धांत नामक ग्रंथ में बताया था।
ऊपर दिया गया सूत्र तब भी कार्य करता है जब गुणक या गुण्य एक पूर्ण संख्या हो। हम पूर्ण संख्या को हर 1 वाले भिन्न के रूप में लिख सकते हैं। उदाहरण के लिए -
3 * 3/4 को 3/1 * 3/4 लिखा जा सकता है।
= (3 * 3)/(1 * 4) = 9/4
और3/5 * 4 को 3/5 * 4/1 लिखा जा सकता है।
= (3 * 4)/(5 * 1) = 12/5
भिन्नों का गुणनफल – न्यूनतम रूप में सरलीकरण
? निम्नलिखित भिन्नों का गुणा कीजिए और गुणनफल को न्यूनतम रूप में व्यक्त कीजिए।
12/7 * 5/24
पहले अंशों (12 और 5) और हरों (7 और 24) को गुणा करने और फिर सरल करने की अपेक्षा हम यह कर सकते हैं-
<12/7 * 5/24 =12*5/7*24
हम देखते हैं कि गोले में लिखी संख्याओं का उभयनिष्ठ गुणनखंड 12 है। हम जानते हैं कि जब अंश और हर को उभयनिष्ठ गुणनखंड द्वारा विभाजित किया जाता है तो भिन्न सदैव वही रहता है। इस स्थिति में हम उन्हें 12 से विभाजित कर सकते हैं।
आइए, इस विधि का उपयोग करते हुए हम एक और गुणन करें।
14/15 * 25/42
जब भिन्नों को गुणा करते हैं तो हम अंशों और हरों को गुणा करने से पहले उनके उभयनिष्ठ गुणनखंड द्वारा अंश व हर को विभाजित कर सकते हैं। इसे उभयनिष्ठ गुणनखंडों को निरस्त करना (काटना) कहते हैं।
इतिहास की एक झलक
भारत में किसी भिन्न को उसके न्यूनतम रूप में सरलीकृत करने की प्रक्रिया को अपवर्तन कहते हैं। यह प्रक्रिया इतनी प्रसिद्ध है कि इसका उल्लेख एक गैर-गणितीय ग्रंथ में भी मिलता है। एक जैन विद्वान उमास्वाति (150 सामान्य संवत्) ने एक दार्शनिक ग्रंथ में इसे उपमा के रूप में प्रयोग किया था !
? पता लगाइए
1. एक पानी की टंकी एक नल से भरी जाती है। यदि नल 1 घंटा खुला रहता है तो टंकी 7/10 का भाग भर जाता है। टंकी का कितना भाग भरेगा यदि नल को निम्नलिखित समय के लिए खुला छोड़ा जाए-
(a) 1/3घंटा................(b) 2/3घंटा................
(c) 3/4घंटा................
(d) 7/10घंटा................
(e) टंकी को पूरा भरने के लिए नल को कितने समय तक चलते रहने देना चाहिए? 2. सरकार ने एक सड़क बनाने के लिए सोमू की भूमि का 1/6
भाग ले लिया। अब सोमू के पास भूमि का कितना भाग शेष बचा है? वह शेष भाग भाग की आधी भूमि अपनी पुत्री कृष्णा को और 1/3 भाग अपने पुत्र बोरा को दे देता है। उनके हिस्सों को देने के बाद वह शेष भूमि अपने पास रखता है।
(a) मूल भूमि का कितना भाग कृष्णा को प्राप्त हुआ?
(b) मूल भूमि का कितना भाग बोरा को प्राप्त हुआ?
(c) मूल भूमि का कितना भाग सोमू ने अपने लिए रखा?
3. एक ऐसे आयत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए जिसकी भुजाएँ 3 (3/4) फीट और 9 (3/5) फीट हैं।
4. त्सेवांग ने अपने उद्यान में एक पंक्ति में चार पौध लगाई। दो पौध के बीच की दूरी 3/4 मीटर है। पहले और अंतिम पौध के बीच की दूरी को ज्ञात कीजिए।
(संकेत – चार पौध का एक कच्चा चित्र बनाइए जिसमें दो पौध के बीच की दूरी 3/4 मीटर है ।)5. कौन अधिक भारी है - 500 ग्राम का 12/15 अथवा 4 किलोग्राम का 3/20 ?
क्या गुणनफल गुणन की संख्याओं से सदैव बड़ा होता है?
जैसा कि हम जानते हैं कि जब एक संख्या को 1 से गुणा किया जाता है तो गुणनफल सदैव अपरिवर्तित रहता है। अब हम उन संख्याओं के युग्मों के गुणा को देखेंगे जहाँ दोनों में से कोई भी संख्या 1 नहीं है।
जब हम 1 से बड़ी दो गिनती संख्याओं, जैसे 3 और 5 का गुणा करते हैं तो गुणनफल गुणा की जाने वाली दोनों संख्याओं से बड़ा होता है।
3 * 5 = 15
गुणनफल 15 दोनों संख्याओं, 3 और 5 से बड़ा है।
परंतु क्या होता है जब हम 1/4 और 8 का गुणा करते हैं?
1/4× 8 = 2
उपरोक्त गुणा में गुणनफल 2,1/4 से बड़ा है, परंतु 8 से छोटा है।
क्या होता है जब हम 3/4 और 2/5 का गुणा करते हैं?
(3/4 * 2/5 =6/20)आइए, इस गुणनफल 6/20 की तुलना संख्याओं 3/4 और 2/5 के साथ करें। आइए इस हेतु 3/4 को 15/20 और 2/5 को 8/20 के रूप में व्यक्त करते हैं।
इससे हम यह देख सकते हैं कि गुणनफल दोनों संख्याओं से छोटा है।
आपको क्या लगता है कि गुणा की जाने वाली दोनों संख्याओं से गुणनफल कब बड़ा है, यह दोनों संख्याओं के बीच में है और कब यह दोनों संख्याओं से छोटा है?
(संकेत - गुणनफल और गुणा की जाने वाली संख्याओं के बीच संबंध इस बात पर निर्भर करता है कि क्या वे 0 और 1 के बीच में हैं या वे 1 से बड़ी हैं। संख्याओं के अलग-अलग युग्मों को लीजिए और उनके गुणनफल का निरीक्षण कीजिए। प्रत्येक गुणा के लिए आगे दिए गए प्रश्नों पर विचार कीजिए।)| स्थिति | गुणा | संबंध |
|---|---|---|
| स्थिति 1 | दोनों संख्याएँ 1 से बड़ी हैं। (उदाहरणार्थ 4/3 * 4 ) | गुणनफल (16/3)दोनों संख्याओं से बड़ा है। |
| स्थिति 2 | दोनों संख्याएँ 0 और 1 के बीच में हैं। (उदाहरणार्थ 3/4 * 2/5 ) | गुणनफल (3/10) दोनों संख्याओं से छोटा है। |
| स्थिति 3 | एक संख्या 0 और 1 के बीच की है तथा एक संख्या 1 से बड़ी है। (उदाहरणार्थ 3/4 * 5 ) | गुणनफल (15/4) * 1 से बड़ी संख्या से छोटा है और 0 और 1 के बीच की संख्या से बड़ा है। |
प्रत्येक स्थिति के लिए और अधिक उदाहरणों का निर्माण कीजिए तथा गुणनफल एवं गुणा की जाने वाली संख्याओं के बीच के संबंध को ध्यान से देखिए।
? आप गुणा की जाने वाली संख्याओं और गुणनफल के बीच संबंध के विषय में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं? रिक्त स्थान भरिए -
- जब गुणा की जाने वाली संख्याओं में से एक संख्या 0 और 1 के बीच की हो तो गुणनफल दूसरी संख्या से .................. (बड़ा/छोटा) होता है।
- जब गुणा की जाने वाली संख्याओं में से एक संख्या 1 से बड़ी हो तो गुणनफल दूसरी संख्या से ................ (बड़ा/छोटा) होता है।
गुणन का क्रम
हम जानते हैैं कि 1/2 × 1/4 =1/8
सामान्य रूप से ध्यान दें कि आयत का क्षेत्रफल सदैव समान रहता है चाहे हम उसकी लंबाई व चौड़ाई को परस्पर बदल दें।
गुणन के क्रम से कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इस प्रकार
a/b × c/d= c/d × a/b यह भिन्नों को गुणा करने के ब्रह्मगुप्त के सूत्र से भी देखा जा सकता है।8.2 भिन्नों का विभाजन (भाग)
12/4 क्या है? यह आप पहले से ही जानते हैं। परंतु क्या इस समस्या को गुणन समस्या के रूप में पुनः व्यक्त किया जा सकता है?
4 को किससे गुणा किया जाए कि 12 प्राप्त हो? अर्थात
4 *?=12
हम भिन्नों को विभाजित करने के लिए भाग को गुणन समस्या में परिवर्तित करने की इस तकनीक का उपयोग कर सकते हैं।
1 / (2/3)क्या है?
आइए, इसे गुणन समस्या के रूप में पुनः लिखें
2/3 *?=1
गुणनफल 1 प्राप्त करने के लिए 2/3 को किससे गुणा किया जाए?
यदि हम किसी तरह 2 और 3 को निरस्त कर दें तो हमारे पास 1 बचता है।
अतः 1 / (2/3) = 3/2
आइए, एक अन्य समस्या हल करें -
3 / (2/3)
यह 2/3 *?=3 के समान है।
क्या आप उत्तर ज्ञात कर सकते हैं?
हम जानते हैं 2/3 कि को किससे गुणा किया जाए कि 1 प्राप्त हो। 3 प्राप्त करने के लिए हमें बस इसे 3 से गुणा करने की आवश्यकता है।
अतः
3 ÷ 2/3= 3 × 3/2= 9/2
1/5 / (1/2) क्या है?
इसे गुणन समस्या के रूप में पुनः लिखने पर हमें प्राप्त होता है
1/2 *?= 1/ 5
इसे हम कैसे हल करते हैं?
1/5÷ 1/2 क्या है?
इसे गुणन के रूप में पुनः लिखने पर हमें यह प्राप्त होता है
3/5 *?= 2 /3
हम इसे कैसे हल करेंगे?
अतः 2/3 / (3/5) = 2/3 * 5/3 = 10/9
चर्चा
उपरोक्त विभाजन की प्रत्येक समस्या में हमने उत्तर कैसे पाया इसका अवलोकन कीजिए। दो भिन्नों का विभाजन कैसे किया जाता है क्या इसके लिए हम एक नियम बना सकते हैं?
आइए, हम पिछली समस्या पर विचार करें।
प्रत्येक विभाजन समस्या में हमारे पास भाज्य, भाजक और भागफल होता है। भागफल प्राप्त करने के लिए हम जिस तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं, वह है -
1. पहले हम वह संख्या ज्ञात करते हैं जिसे भाजक से गुणा करने पर 1 प्राप्त हो। हम देखते हैं कि प्राप्त संख्या एक भिन्न है जिसका अंश भाजक का हर है और जिसका हर भाजक का अंश है।
भाजक 3/5 के लिए यह भिन्न 5/3 है। 5/3 को 3/5 का व्युत्क्रम कहते हैं।
जब हम किसी भिन्न को उसके व्युत्क्रम से गुणा करते हैं तो हमें 1 प्राप्त होता है। अतः हमारी तकनीक में पहला चरण है- भाजक का व्युत्क्रम ज्ञात करना।
2. तब हम भागफल प्राप्त करने के लिए भाज्य को इस व्युत्क्रम के साथ गुणा करते हैं। सारांशतः,
दो भिन्नों को विभाजित करना -
- भाजक का व्युत्क्रम ज्ञात कीजिए
- भागफल प्राप्त करने के लिए इसे भाज्य से गुणा कीजिए।
अतः
a/b / (c/d) = d/c × a/b = (d×a)/(c×b)
इसे पुनः इस प्रकार लिखा जा सकता है-
a/b / (c/d) = a/b * d/c = (a×d)/(b×c)भिन्नों के योग, घटाने और गुणन की जिन विधियों और सूत्रों को आपने पहले सीखा था, वस्तुतः भिन्नों के विभाजन की इन विधियों और सूत्रों को सामान्य रूप से सर्वप्रथम ब्रह्मगुप्त ने अपने ग्रंथ ब्रह्मस्फुट-सिद्धांत (628 सामान्य संवत्) में ही स्पष्ट रूप से बता दिया था।
अतः उपरोक्त ब्रह्मगुप्त सूत्र का प्रयोग करते हुए उदाहरणार्थ 2/3 / (3/5) का मान ज्ञात करने के लिए हम लिखते हैं
2/3 / (3/5) = 2/3 * 5/3 = (2 * 5)/(3 * 3) = 10/9
भाज्य, भाजक और भागफल
जब हम दो पूर्ण संख्याओं को विभाजित करते हैं तो हमें भागफल प्राप्त होता है, जैसे 6/3 का भागफल 2 है। यहाँ भागफल भाज्य से छोटा है।
6/3 = 2, 2 < 6
परंतु क्या होगा जब हम 6 को से 1/4 भाग करते हैं?
6 / (1/4) = 24
यहाँ भागफल भाज्य से बड़ा है।
क्या होगा जब हम 1/8 को 1/4 से भाग करते हैं?
1/8 / (1/4) = 1/2
यहाँ भी भागफल भाज्य से बड़ा है।
आपको क्या लगता है कि भागफल कब भाज्य से कम और कब भाज्य से अधिक है?
क्या भाजक और भागफल के बीच भी ऐसा ही एक संबंध है?
गुणन में ऐसे संबंधों की अपनी समझ का प्रयोग करके ऊपर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
8.3 भिन्नों से संबंधित कुछ समस्याएँ
? उदाहरण 3 - लीना 5 कप चाय बनाती है। इसके लिए वह 1/4 लीटर दूध उपयोग करती है। चाय के प्रत्येक कप में कितना दूध है?
लीना 5 कप चाय में 1/4 लीटर दूध उपयोग करती है। इसलिए 1 कप चाय में दूध की मात्रा होनी चाहिए -
1/4 / 5
इसे गुणन में लिखने पर हमें प्राप्त होता है
5 × (प्रति कप दूध) = 1/4
हम ब्रह्मगुप्त विधि के अनुसार निम्न प्रकार से विभाजन करते हैं -
5 (भाजक) का व्युत्क्रम । 1/5
इस व्युत्क्रम को भाज्य (1/4) से गुणा करने पर हमें प्राप्त होता है –
1/5 * 1/4 = 1/20
इसलिए चाय के प्रत्येक कप में 1/20 लीटर दूध है।
? उदाहरण 4 - ऐसे भिन्न जो इकाई भिन्न नहीं हैं इनके साथ कार्य करने के कुछ सबसे पुरातन उदाहरण सबसे प्राचीन ज्यामिति ग्रंथ शुल्बसूत्र में पाए जाते हैं। यहाँ बौधायन के शुल्बसूत्र (लगभग 800 सामान्य संवत् पूर्व) से एक उदाहरण लिया गया है।
7 (1/2) वर्ग इकाई क्षेत्र को वर्गाकार ईंटों से ढकिए जिनकी प्रत्येक भुजा 1/5 इकाई की है।
ऐसी कितनी वर्गाकार ईंटों की आवश्यकता है?
प्रत्येक वर्गाकार ईंट का क्षेत्रफल 1/5 * 1/5 = 1/25 वर्ग इकाई है।
ढके जाने वाला कुल क्षेत्रफल है 7 (1/2) वर्ग इकाई = 15/2 वर्ग इकाई
जैसा कि (ईंटों की संख्या) × (एक ईंट का क्षेत्रफल) = कुल क्षेत्रफल
ईंटों की संख्या = 15/2 / (1/25)
भाजक का व्युत्क्रम 25 है।
प्राप्त व्युत्क्रम को भाज्य से गुणा करने पर हमें प्राप्त होता है
25 × 15/2 =(25 × 15)/2 =375/2
? उदाहरण 5 - इस समस्या की चतुर्वेद पृथूदक स्वामी (लगभग 860 सामान्य संवत्) ने ब्रह्मगुप्त के ग्रंथ ब्रह्मस्फुट-सिद्धांत पर अपने टीकाग्रंथ में भी चर्चा की है।
चार फव्वारे एक कुण्ड को भरते हैं। पहला फव्वारा कुण्ड को एक दिन में भर सकता है। दूसरा उसे आधे दिन में भर सकता है। तीसरा उसे एक चौथाई दिन में भर सकता है। चौथा फव्वारा उस कुण्ड को 1/5 दिन में भर सकता है। यदि उन सभी को एक साथ खोल दिया जाए तो वे सभी कुण्ड को कितने समय में भर देंगे?
आइए, इस समस्या को चरणबद्ध तरीके से हल करें।
एक दिन में कितनी बार -
1/5 7 1/2 25 * 15/2 = (25 * 15)/2 = 375/2- पहला फव्वारा कुण्ड को भर देगा = 1/1 = 1
- दूसरा फव्वारा कुण्ड को भर देगा = 1 / (1/2) =.........
- तीसरा फव्वारा कुण्ड को भर देगा = 1 / (1/4) =.........
- चौथा फव्वारा कुण्ड को भर देगा = 1 / (1/5) =.........
1 दिन में चारों फव्वारे मिलकर कुण्ड को ...+.....+.....+........ = 12 बार भरेंगे।
इस प्रकार चारों फव्वारों को एक साथ कुण्ड भरने में कुल दिन का समय लगेगा। 1/12
भिन्नात्मक संबंध
यहाँ एक वर्ग है जिसके अंदर कुछ रेखाएँ खींची गईं हैं।
छायांकित क्षेत्र पूरे वर्ग के क्षेत्रफल का कितना भाग घेरता है?
इस समस्या को हल करने की विभिन्न विधियाँ हैं। उनमें से एक यह है-
माना पूरे वर्ग का क्षेत्रफल 1 वर्ग इकाई है।
हम देख सकते हैं कि दायाँ शीर्ष वर्ग पूरे वर्ग (चित्र 8.5 में) के क्षेत्रफल का 1/4 भाग घेरता है।
लाल वर्ग का क्षेत्रफल = 1/ 4 वर्ग इकाई है।
आइए, इस लाल वर्ग को देखें। इसके अंदर बने त्रिभुज (पीले रंग में) का क्षेत्रफल लाल वर्ग के क्षेत्रफल का आधा है। अतः
पीले त्रिभुज का क्षेत्रफल = 1/2 * 1/4 = 1/8 वर्ग इकाई
इस पीले त्रिभुज का कितना भाग छायांकित है?
छायांकित क्षेत्र पीले त्रिभुज के क्षेत्रफल का भाग 3/4 भाग घेरता है। क्या आप पता कर सकते हैं कि ऐसा क्यों है?
छायांकित भाग का क्षेत्रफल 3/4 * 1/8 = 3/32वर्ग इकाई
इस प्रकार छायांकित क्षेत्र पूरे वर्ग के क्षेत्रफल का 3/32 भाग घेरता है।
? नीचे दिए गए प्रत्येक चित्र में बड़े वर्ग का वह भाग ज्ञात कीजिए जिसे छायांकित क्षेत्र घेरता है।
अगले अध्याय में हम इस प्रकार की और भी रोचक समस्याओं को हल करेंगे।
एक द्रम्म संबंधी दान
निम्नलिखित समस्या भास्कराचार्य (भास्कर द्वितीय) द्वारा 1150 सामान्य संवत् में रचित ग्रंथ लीलावती से अनुवादित है।
“हे बुद्धिमान ! एक कृपण (कंजूस) ने एक भिखारी को एक द्रम्म का 1/5 का 1/16 का 1/4 का 1/2 का 2 /3 का 3/4 भाग दिया।
यदि आप भिन्नों का गणित अच्छे प्रकार जानते हैं तो आप मुझे बताओ कि कृपण ने भिखारी को कितनी कौड़ियाँ दीं?”
द्रम्म उन दिनों में उपयोग किए जाने वाले चाँदी के सिक्के को संदर्भित करता है। कहानी कहती है कि 1 द्रम्म 1280 कौड़ियों के समतुल्य था। आइए, देखें कि व्यक्ति ने द्रम्म का कितना भाग दिया -
एक द्रम्म का (1/2 * 2/3 * 3/4 * 1/5 * 1/16 * 1/4)वाँ भाग
हल करने पर हमें प्राप्त होता है 6/7680
इसे न्यूनतम पदों में सरल करने पर हमें प्राप्त होता है-
6/7680 = 1/1280
अतः भिखारी को 1 कौड़ी दी गई।
आप उत्तर में भास्कराचार्य का विनोद देख सकते हैं। कृपण ने भिखारी को सबसे कम मूल्य का केवल एक सिक्का दिया अर्थात मात्र एक कौड़ी दी।
बारहवीं शताब्दी के आस-पास भारतीय महाद्वीप के विभिन्न साम्राज्यों में अनेक प्रकार के सिक्के प्रचलन में थे। अधिकांशतः सोने के सिक्के जिन्हें 'दीनार' (गद्यन और हूण) कहा जाता था; चाँदी के सिक्के जिन्हें 'द्रम्म' या 'टंका' कहा जाता था; ताँबे के सिक्के जिन्हें 'कासु' या 'पण' और 'मशक' कहा जाता था; और 'कौड़ियों' का उपयोग किया जाता था। इन सिक्कों की सटीक विनिमय (रूपांतरण) दर क्षेत्र, समय अवधि, आर्थिक स्थितियों, सिक्कों के वजन और उनकी शुद्धता के आधार पर निर्भर होती थी।
सोने के सिक्कों का मूल्य अधिक होता था और इनका उपयोग बड़े लेन-देन और धन संचय के लिए किया जाता था। चाँदी के सिक्कों का उपयोग अधिकांशतः प्रतिदिन के लेन-देन में किया जाता था। ताँबे के सिक्कों का मूल्य कम होता था और इनका उपयोग छोटे लेन-देन में किया जाता था। कौड़ी सबसे कम मूल्य वर्ग की मुद्रा थी और इनका उपयोग बहुत छोटे लेन-देन में अथवा धनराशि वापस करने के रूप में किया जाता था।
यदि हम मानें कि 1 सोने का दीनार = 12 चाँदी के द्रम्म, 1 चाँदी का द्रम्म = 4 ताँबे के पण, 1 ताँबे का पण = 6 मशक और 1 पण = 30 कौड़ियाँ,
1 ताँबे का पण = 1/48 सोने की दीनार (1/12 * 1/4)
1 कौड़ी = ताँबे के पण
1 कौड़ी =सोने की दीनार
एक ऐतिहासिक झलकजैसा आपने देखा कि भिन्न एक महत्वपूर्ण संख्या है यह विभिन्न प्रकार की दैनिक जीवन की समस्याओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिसमें मात्राओं या परिमाणों को समान रूप में विभाजित करना और साझा करना सम्मिलित है। जोड़ने, घटाने, गुणन और विभाजन की अंकगणितीय संक्रियाओं से युक्त जिन गैर-इकाई भिन्नों का आज हम उपयोग करते हैं, उनकी सामान्य अवधारणा बड़े पैमाने पर भारत में विकसित हुई। प्राचीन भारतीय ज्यामिति ग्रंथों को शुल्बसूत्र कहा जाता था। ये 800 सामान्य संवत् पूर्व रचे गए थे। ये ग्रंथ अनुष्ठानों के लिए अग्नि-वेदियों के निर्माण से संबंधित थे। इनमें सामान्य गैर-इकाई भिन्नों का व्यापक रूप से उपयोग किया गया था। इनमें ऐसे भिन्नों का विभाजन करना भी सम्मिलित था जैसा कि हमने उदाहरण 3 में देखा है।
भिन्नों ने भारत की लोकप्रिय संस्कृति में 150 सामान्य संवत् पूर्व से ही अपना स्थान बना लिया था जैसा कि प्रतिष्ठित जैन विद्वान उमास्वाति के दार्शनिक कार्य में भिन्नों को न्यूनतम पदों में व्यक्त करने के एक अनौपचारिक संदर्भ से प्रमाणित होता है।
हम भिन्नों पर जिन अंकगणितीय संक्रियाओं के सामान्य नियमों का वर्तमान समय में उपयोग करते हैं, वस्तुतः वे नियम सर्वप्रथम 628 सामान्य संवत् में ब्रह्मगुप्त द्वारा अपने ग्रंथ ब्रह्मस्फुट-सिद्धांत में संहिताबद्ध किए गए थे। हम सामान्य भिन्नों को जोड़ने और घटाने के लिए उनकी विधियों को पहले ही देख चुके हैं। सामान्य भिन्नों को गुणा करने के लिए ब्रह्मगुप्त ने लिखा है -
“दो या दो से अधिक भिन्नों का गुणनफल अंशों के गुणनफल को हरों के गुणनफल से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।" (ब्रह्मस्फुटसिद्धांत, श्लोक 12.1.3)
सूत्र है -(a/b)×(c/d) =(a × c)/(b × d)
सामान्य भिन्नों के विभाजन के लिए ब्रह्मगुप्त ने लिखा है -
"भाजक के अंश को और हर को आपस में बदलकर भिन्नों का विभाजन किया जाता है; फिर भाज्य के अंश को नए अंश से और हर को नए हर से गुणा किया जाता है।"
भास्कर द्वितीय ने 1150 सामान्य संवत् में अपनी पुस्तक लीलावती में ब्रह्मगुप्त के कथन को व्युत्क्रम की धारणा के संदर्भ में और अधिक स्पष्ट किया है।
“एक भिन्न का दूसरे भिन्न द्वारा विभाजन, पहले भिन्न का दूसरे भिन्न के व्युत्क्रम के साथ गुणनफल के बराबर होता है।" (लीलावती, श्लोक 2.3.40)
दोनों श्लोक इस सूत्र के समकक्ष हैं।
a/b ÷c/d = a/b ×d/c = (a × d)/(b ×c)
भास्कर प्रथम ने आर्यभट्ट के 499 सामान्य संवत् के कार्य पर 629 सामान्य संवत् में अपने टीकाग्रंथ आर्यभटीय भाष्य में भिन्नों के गुणन की ज्यामितीय व्याख्या निरूपण (जिसे हमने पहले देखा था) में एक वर्ग को लंबाई और चौड़ाई के अनुरूप समान भागों में विभाजित करके आयतों में विभाजित करने के रूप में वर्णित किया था।
अनेक अन्य भारतीय गणितज्ञों, जैसे- श्रीधराचार्य (लगभग 750 सामान्य संवत्), महावीराचार्य (लगभग 850 सामान्य संवत्), चतुर्वेद पृथूदकस्वामी (लगभग 860 सामान्य संवत्) और भास्कर द्वितीय (लगभग 1150 सामान्य संवत्) ने भिन्नों के अंकगणित के उपयोग को और अधिक विकसित किया।
भिन्नों और उन पर अंकगणितीय संक्रियाओं का भारतीय सिद्धांत प्रसारित किया गया और इसका प्रयोग मोरक्को के अल-हस्सर (लगभग 1192 सामान्य संवत्) जैसे अरब और अफ्रीकी गणितज्ञों द्वारा आगे विकसित किया गया। यह सिद्धांत अगली कुछ शताब्दियों में अरबों के माध्यम से यूरोप में प्रसारित हुआ और केवल सत्रहवीं शताब्दी के आस-पास यूरोप में सामान्य उपयोग में आया। इसके बाद यह विश्वभर में फैल गया। यह सिद्धांत आज आधुनिक गणित में वास्तव में अपरिहार्य है।
? पता लगाइए
1. निम्नलिखित का मूल्यांकन कीजिए।
| 3 ÷ 7/9 | 14/4 ÷ 2 | 2/3÷ 2/3 | 14/6 ÷ 7/3 |
| 4/3 ÷ 3/4 | 7/4 ÷ 1/7 | 8/2÷ 4/15 | |
| 1/5÷ 1/9 | 1/6÷ 11/12 | 3 (2/3)÷ 1 (3/8) |
2. नीचे दिए गए प्रत्येक प्रश्न के लिए उस व्यंजक को चुनिए जो हल का वर्णन करता हो। फिर उसे सरल कीजिए।
(a) मारिया ने विद्यालय के लिए बनाए गए थैलों को सजाने के लिए 8 मीटर फीता (रिबन) खरीदा। उसने प्रत्येक थैले के लिए 1/4 मीटर फीते का उपयोग किया और सारा फीता खत्म कर दिया। उसने कितने थैलों को सजाया?
(i) 8 * 1/4
(ii) 1/8 * 1/4
(iii) 8 / (1/4)
(iv) 1/4 / 8
(b) 8 बिल्ले (Badges) बनाने के लिए 1/2 मीटर फीते (रिबन) उपयोग किया जाता है। प्रत्येक बिल्ला बनाने के लिए उपयोग किए गए फीते की लंबाई क्या है?
(i) 8 * 1/2
(ii) 1/2 / (1/8)
(iii) 8 / (1/2)
(iv) 1/2 / 8
(c) एक रोटी बनाने वाले (Baker) को बड़ी रोटी बनाने के लिए 1/6 किलोग्राम आटे की आवश्यकता है। उसके पास 5 कि.ग्रा. आटा है। उससे वह कितनी रोटियाँ बना सकता है?
(i) 5 * 1/6
(ii) 1/6 / 5
(iii) 5 / (1/6)
(iv) 5 * 6
3. यदि 12 रोटियाँ बनाने के लिए कि.ग्रा. आटे का उपयोग किया जाता है तो 6 रोटियाँ बनाने के लिए कितना आटा उपयोग होता है? 1/4
4. नौवीं शताब्दी ई. में श्रीधराचार्य द्वारा लिखित पुस्तक पाटीगणित में इस समस्या का उल्लेख है, “मित्र! सोचकर बताइए कि 1 / (1/6) 1 / (1/10) 1 / (1/13) को को एक साथ जोड़ने पर क्या प्राप्त होगा?" मित्र का क्या उत्तर होगा? और 1 / (1/9) 1 / (1/2)
5. मीरा एक उपन्यास पढ़ रही है, जिसमें 400 पृष्ठ हैं। उसने कुल पृष्ठों का 1/5 भाग कल पढ़ा और आज कुल पृष्ठों का 3/10 भाग पढ़ा। उपन्यास को पूरा पढ़ने के लिए उसे अभी और कितने पृष्ठों को पढ़ने की आवश्यकता है?
6. एक कार 1 लीटर पेट्रोल का उपयोग करके 16 कि.मी. चलती है। 2( 3/4) लीटर पेट्रोल का उपयोग करके यह कितनी दूर तक जाएगी?
7. अमृतपाल अपनी छुट्टियों के लिए एक गंतव्य का चयन करता है। यदि वह एक रेलगाड़ी से जाता है तो वहाँ पहुँचने में उसे 5( 1/6) घंटे लगेंगे। यदि वह हवाई जहाज से जाता है तो वहाँ पहुँचने में उसे 1/2 घंटा लगेगा? हवाई जहाज द्वारा जाने से कितना समय बचेगा?
8. मरियम की दादी माँ एक केक बनाती हैं। मरियम और उसके चचेरे भाई केक का 4/5 भाग खा लेते हैं। शेष केक को मरियम की तीन सहेलियों द्वारा बराबर-बराबर बाँट लिया जाता है। प्रत्येक सहेली को केक का कितना भाग मिला?
9. (565/465 * 707/676) के गुणनफल का वर्णन करने के लिए एक अथवा अधिक विकल्पों को चुनिए -
(a) > 565/465
(b) < 565/465
(c) > 707/676
(d) < 707/676
(e) > 1
(f) <1
10. पूरे वर्ग का कितना भाग छायांकित है?
11. चींटियों का एक समूह भोजन की खोज में निकला। जैसे-जैसे वे खोजते हैं, वे प्रत्येक बिंदु पर समान रूप से विभाजित होते रहते हैं (जैसा कि चित्र 8.7 में दिखाया गया है) और दो भोजन के स्रोतों पर पहुँचते हैं- एक समूह आम के पेड़ के पास और दूसरा समूह गन्ने के खेत के पास। मूल समूह का कितना भाग प्रत्येक खाद्य स्रोत तक पहुँचा ?
12. 1 – 1/2क्या है?
(1 – 1/2) × (1 – 1/3) ?
(1 – 1/2) × (1 – 1/3) × (1 – 1/4) × (1– 1/5) ?
(1 – 1/2) × (1 – 1/3) × (1-1/4)×(1-/1/5)×(1 – 1/6) × (1 – 1/7) × (1 – 1/8) × (1 – 1/9) × (1 – 1/10) ?
एक सामान्य कथन बनाइए और व्याख्या कीजिए।
सारांश
- भिन्नों के गुणन के लिए ब्रह्मगुप्त का सूत्र -
- भिन्नों को गुणा करते समय यदि अंश और हर में कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड हो तो हम अंश और हर को गुणा करने से पहले उन्हें काट सकते हैं।
- गुणन में जब गुणा की जाने वाली संख्याओं में से एक संख्या 0 और 1 के बीच होती है तो गुणनफल दूसरी संख्या से छोटा होता है। यदि गुणा की जाने वाली संख्याओं में से एक संख्या 1 से बड़ी होती है तो गुणनफल दूसरी संख्या से बड़ा होता है।
- भिन्न a/b का व्युत्क्रम b/a होता है। जब हम भिन्न को उसके व्युत्क्रम से गुणा करते हैं तो गुणनफल 1 प्राप्त होता है।
- भिन्नों के विभाजन के लिए ब्रह्मगुप्त का सूत्र
- विभाजन में जब, भाजक 0 और 1 के बीच होता है तो भागफल भाज्य से बड़ा या अधिक होता है। जब भाजक 1 से बड़ा होता है तो भागफल भाज्य से छोटा या कम होता है।
a/b * c/d = (a*c)/(b*d)
-a/b / (c/d) = a/b * d/c = (ad)/(bc
)
पहेली का समय !
शतरंज की पहेलियाँगैर-आक्रमणकारी रानियाँ
शतरंज दो खिलाड़ियों का एक लोकप्रिय रणनीतिक खेल है। इस खेल की उत्पत्ति भारत में हुई है। यह 8 × 8 के वर्गाकार जाल (ग्रिड) पर खेला जाता है। यहाँ सफेद और काले रंग के मोहरों के दो सेट होते हैं, प्रत्येक खिलाड़ी के लिए 1 सेट। पता लगाइए कि प्रत्येक मोहरे को कैसे चला जाता है और इस खेल के नियम क्या हैं?
यहाँ शतरंज पर आधारित एक प्रसिद्ध पहेली है। अपनी वर्तमान स्थिति से रानी का मोहरा क्षैतिज, ऊर्ध्वाधर या विकर्ण की दिशा में आगे बढ़ सकता है। 4 रानियों को इस प्रकार रखें कि कोई भी 2 रानियाँ एक-दूसरे पर आक्रमण न करें। उदाहरण के लिए नीचे दी गई व्यवस्था मान्य नहीं है, क्योंकि रानियाँ एक-दूसरे पर आक्रमण की रेखा में हैं।
अब 8 रानियों को इस 8 × 8 ग्रिड पर इस प्रकार रखिए कि कोई भी 2 रानियाँ एक-दूसरे पर आक्रमण न करें।
