भाग 3
मानव सेवाओं में कार्य करना
मानव सेवा से तात्पर्य मनुष्यों की सहायता करना और उनके साथ विभिन्न विधियों से संवाद स्थापित करना है। मानव सेवाओं में कार्यों पर आधारित परियोजनाएँ आपको यह सीखने में सहायता करेंगी कि सामाजिक मनुष्यों के साथ कैसे कार्य करना है? आप अपने परिवार और अन्य लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल से संबंधित परियोजनाओं का चयन कर सकते हैं और इनसे संबंधित रोचक वीडियो और ऑडियो क्लिप विकसित कर सकते हैं। जैसे- अपने परिवार के लिए वित्तीय योजना बनाना, हाथों पर मेहंदी लगाना या एक हास्य-पुस्तिका (कॉमिक बुक) तैयार करना। यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने सहपाठियों के साथ क्या कल्पना करते हैं?
इस भाग में परियोजना के दो उदाहरण दिए गए हैं-पुतलियों के साथ कथा सुनाना और परिवार स्वास्थ्य पुस्तिका। आपको इनमें से केवल एक ही परियोजना का चयन करना है अथवा अपने शिक्षक की सहायता से अपनी रुचि की कोई अन्य परियोजना भी तैयार कर सकते हैं।
परियोजना 5
पुतलियों के साथ कहानियाँ सुनाना
यह परियोजना पुतलियों के माध्यम से कथाएँ सुनाने में आपकी सहायता करेगी। इस परियोजना द्वारा आप पटकथा लेखन, पुतलियाँ बनाना और पृष्ठभूमि निर्माण, साज-सज्जा, ध्वनि एवं प्रकाश प्रबंधन के साथ पुतली-प्रदर्शन प्रस्तुत करना सीख सकेंगे।
परियोजना के अंतर्गत आप निम्नलिखित कार्यों को करने में सक्षम होंगे -
छोटे-बड़े सभी लोगों को कथाएँ सुनना रुचिकर लगता है। कथा सुनाना प्राचीनकाल से प्रचलित है और समय के साथ कथा सुनाने के विभिन्न रूप भी प्रचलन में आए हैं। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में अजंता की गुफाओं में दूसरी शताब्दी सामान्य संवत् पूर्व और पाँचवीं शताब्दी सामान्य संवत् के मध्य बनाई गई चित्रकलाएँ कथा सुनाने का एक रूप है- वे जातक कथाओं को चित्रों के माध्यम से दर्शाती हैं।
भारत में मौखिक रूप से कथा सुनाने की परंपरा रही है जो अब तक बांग्ला में 'बाउल गीत', उर्दू में 'दास्तानगोई', विभिन्न भाषाओं में कथा, राजस्थान में 'कावड़', केरल व कर्नाटक में 'यक्षगान' एवं देशभर में रामलीला के माध्यम से जीवित है। 'कावड़' को लकड़ी के मंदिर का उपयोग करते हुए सुनाया जाता है जो कथा के साथ धीरे-धीरे खुलता है। यक्षगान और रामलीला में संवादों के साथ-साथ संगीत, मुखौटे एवं वेशभूषा का भी उपयोग किया जाता है। परंपरागत रूप से ये प्रस्तुतियाँ बिना किसी लिखित पटकथा के की जाती थीं।
समय के साथ-साथ कथाएँ सुनाने की पद्धतियाँ परिवर्तित होती रहती हैं, उदाहरण के लिए, आधुनिक समय में लेखन कथा कहने की एक लोकप्रिय विधि है। लेखन के साथ छायाचित्र, चलचित्र (सिनेमा), एनिमेशन जैसी अनेक विधियों का उपयोग कथा सुनाने के लिए किया जाता है।
दुर्भाग्यवश कुछ पारंपरिक पद्धतियाँ वर्तमान में उतनी प्रचलन में नहीं हैं जितनी कुछ दशक पूर्व हुआ करती थीं। कुछ व्यक्तियों को कथा सुनाने से अधिक इसकी आधुनिक पद्धतियाँ रुचिकर लगती हैं परंतु कथा सुनाने के लिए पुतलियों का उपयोग करने की पद्धति वर्तमान में भी प्रचलित हैं (चित्र 5.1 और 5.2)|
पुतलियाँ मानवों या जीवों की आकृतियाँ होती हैं जिन्हें पुतली कलाकार चलायमान बना सकता है। अतः स्वचालित गुड़िया को पुतली नहीं माना जाएगा। इसके साथ ही एक साधारण मोजा जिस पर आँख, नाक और मुँह बना हुआ हो तो उसे पुतली माना जाएगा यदि उसे पुतली कलाकार की सहायता से चलाया जाए तो।
पुतली-कला एक ऐसी कला है जिसमें हाथों, डंडियों एवं डोरियों से पुतलियों को नचा-नचाकर कथा सुनाई जाती है। संभवतः आपने कला शिक्षा में पुतलियों के संबंध में पूर्व में ही जानकारी प्राप्त कर ली होगी और भारत में उपयोग की जाने वाली विभिन्न प्रकार की पुतलियों के संबंध में भी सीखा होगा।
पुतली-कला का लाभ यह है कि आप एक या दो लोगों के साथ और कुछ पुतलियों के साथ भी प्रदर्शन कर सकते हैं। इन्हें सुगमतापूर्वक एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है और अनेक प्रकार की कथाएँ सुनाने के लिए इनका उपयोग किया जा सकता है।
पुतली-प्रदर्शन का उपयोग उन संवेदनशील सामाजिक संदेशों को साझा करने के लिए भी किया जाता है जिन पर व्यक्ति खुलकर चर्चा करने में संकोच करते हैं या यह ऐसे मनुष्यों को समाहित करने के लिए भी किया जाता है जिन्हें प्रायः एकाकी रहना रुचिकर लगता है। चूँकि इस विधा में पुतली के माध्यम से बातें कही जाती हैं न कि प्रत्यक्ष रूप से लोगों द्वारा अतः दर्शक उन विषयों को सहजता से सुनते हैं और हँसते हैं जिनसे वे सामान्य रूप से क्रोधित या व्यथित हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, पुतलियों का उपयोग नशे की लत पर, अंधविश्वास पर एवं समाज में प्रचलित अन्य बुराइयों पर चर्चा करने के लिए किया जाता है। इनका उपयोग अन्याय के विरोध में मनुष्यों को जागरूक और प्रेरित करने के लिए किया जाता है।

क्या आप जानते हैं?
वर्ष 2012 और 2014 के बीच पुरातत्वविदों ने राजस्थान के करणपुरा में स्थित सिंधु-सरस्वती सभ्यता से संबंधित एक स्थल की खुदाई की जो चौटांग नदी के तट पर स्थित है।
इस खुदाई में अनेक महत्त्वपूर्ण वस्तुएँ प्राप्त हुईं। इनमें से एक कलाकृति ऐसी भी है जो बैल के सिर वाली पुतली (चित्र 5.3) के समान प्रतीत होती है। यद्यपि इस मूर्ति का सिर अनुपस्थित है। पुरातत्वविदों ने यह देखा कि इसकी बनावट ऐसी है कि उस पर एक अलग से सिर जोड़ा जा सकता है। मूर्ति में दो उथले खाँचे भी बने हैं जिनके माध्यम से एक डोरी डालकर सिर को हिलाया जा सकता है।
मैं क्या कर पाऊँगा/पाऊँगी?
परियोजना कार्य करने के पश्चात आप निम्नलिखित कार्यों को करने में सक्षम हो सकेंगे-
- 1. किसी कथा पर आधारित पटकथा लिखने में।
- 2. विभिन्न प्रकार की सामग्रियों का उपयोग करते हुए पुतलियाँ बनाने में।
- 3. कथा के अनुसार संगीत, ध्वनि, प्रकाश एवं ध्वनि के आरोह-अवरोह (मॉड्यूलेशन) का उपयोग करने में।
- 4. पुतली-प्रदर्शन के माध्यम से कथा सुनाने में।
मुझे किन वस्तुओं की आवश्यकता होगी?
आपको निम्नलिखित वस्तुओं की आवश्यकता होगी-
- 1. पुतलियाँ बनाने के लिए- चप्पल, चम्मच, टहनियाँ, पत्ते, भूसा, बाँस, पुराने वस्त्र,सज्जा पट्टी (रिबन), सुईनुमा तार (फोक), टेनिस गेंद या कोई अन्य गेंद, रंग, ब्रश, पैलेट, कटर, कैंची, धागा, सुई, गोंद, टेप, लेखन योग्य सतहयुक्त कागज पट्टी या कोई अन्य संबंधित उपलब्ध सामग्री।
- 2. पुतलियों को चलाने के लिए - डोरी, झाडू की डंडी, चॉपस्टिक अथवा कोई अन्य सामग्री।
- 3. मंच तैयार करने के लिए- रजताभ धातु (एल्युमीनियम), गत्ता (कार्डबोर्ड), चित्रफलक (चार्ट) या कोई अन्य संबंधित उपलब्ध सामग्री।
- 4.प्रस्तुति के लिए- गत्ता, लकड़ी, कुल्हाड़ी (हैमर), कील (नेल्स), चित्रफलक, वस्त्रपट (बेडशीट), रंगलेप, आवरणवस्त्र (टेबल क्लॉथ), प्रकाशदीप, दीया, स्थापनीय दीपक (टेबल लैंप), संगीत वाद्ययंत्र, ध्वनि प्रणाली (साउंड सिस्टम) या कोई अन्य संबंधित उपलब्ध सामग्री।
मैं स्वयं और दूसरों को कैसे सुरक्षित रखूँ?
पुतली-प्रदर्शन को तैयार करने और प्रस्तुत करने के समय आपको अग्रलिखित सावधानियों को ध्यान में रखना चाहिए-
- 1. कृपया निर्देशों के अनुसार उपकरणों का उपयोग करें और आवश्यक सुरक्षात्मक सावधानियों का अनुसरण करें।
- 2. यह संभव है कि आपके कार्यस्थल पर बहुत सारी कच्ची सामग्रियाँ और अधूरे कार्य होंगे। कभी-कभी अधूरे कार्य संवेदनशील हो सकते हैं। आपको आकस्मिक या अनपेक्षित क्षति से बचने के लिए इसे सुरक्षित रूप से संग्रहित करना चाहिए।
- 3. उचित रूप से वायुप्रवाह-युक्त और परिपूर्ण प्रकाश वाले कक्ष में कार्य करें।
- 4. पटकथा लिखते समय और प्रस्तुति के समय दूसरों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील रहें। ध्यान रखें कि सकारात्मक संदेशों का ही प्रचार-प्रसार करें। यदि आप अपनी कथा के लिए किसी के वास्तविक जीवन से प्रेरणा ले रहे हैं तो उस व्यक्तित्व से अनुमति अवश्य प्राप्त करें।
अंतर्जाल (इंटरनेट) सुरक्षा-
अंतर्जाल का उपयोग करते समय अपने शिक्षक से सहायता लें। बिना परीक्षण किए कुछ भी अपलोड या डाउनलोड न करें। अपनी अथवा किसी अन्य की व्यक्तिगत सूचना कहीं भी साझा न करें।
आरंभ करने से पहले मुझे क्या जानने की आवश्यकता है?
कहानी सुनाने से पूर्व और पुतलियों के संबंध में जानने से पूर्व यह सोचना आवश्यक है कि आपके पुतली-प्रदर्शन में क्या व्यक्तियों की रुचि होगी?
गतिविधि 1- कथाएँ कैसे प्रभावी बनती हैं?
उन कथाओं के संबंध में विचार करें जो आपने अनेक व्यक्तियों से सुनी हैं या किसी मंच पर या किसी चलचित्र (फिल्म) में देखी हैं।
उस कथा का स्मरण करें जिसे सुनकर आपको सबसे अधिक आनंद आया और जिसे आप बार-बार सुनना चाहते थे। इसके साथ ही यह भी विचार करें कि आपको उस कथा में क्या रुचिकर लगा।
1.वह कथा आपको किसने सुनाई?
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2. उन्होंने कथा कैसे सुनाई? क्या उन्होंने इसे काव्यात्मक ढंग से सुनाया या वे अपनी ध्वनि परिवर्तित करते रहे? क्या उन्होंने कथा सुनाते समय ध्वनि में आरोह-अवरोह किए या अपने हाव-भाव एवं चेहरे के भाव बदले?
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3. आपको उनकी कथा सुनाने की विधि कैसी लगी?
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कथा के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण बात है, श्रोताओं का ध्यान कथा के प्रति बनाए रखना। अपने सहपाठियों के साथ अपनी प्रतिक्रियाओं पर चर्चा करें इसके साथ ही यह देखें कि क्या आपने कुछ सामान्य तत्वों की पहचान की हैं जो कथा सुनाने को रुचिकर बनाते हैं।
इस चर्चा के आधार पर आप श्रोताओं के लिए कथा को रुचिकर बनाने के लिए क्या करेंगे?
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गतिविधि 2- पुतली-प्रदर्शन देखना
आप देखिए कि क्या आपके समीपवर्ती स्थान पर पुतली-प्रदर्शन हो रहा है। यदि नहीं, तो आप प्रदर्शन करने के लिए किसी पुतली-संचालक को विद्यालय में आमंत्रित कर सकते हैं।
पुतलियों के प्रकारों के संबंध में पुतली-संचालकों से चर्चा करें। इसके साथ ही पुतलियों की क्रियाविधि का भी निरीक्षण करें। यह भी समझें कि पुतली-संचालक इसे कैसे चलाते हैं? वे किसकी ओर देखते हैं? उनकी वेशभूषा, पुतलियों को पकड़ने की विधि और सबसे महत्त्वपूर्ण है। उनकी ध्वनि का आरोह-अवरोह क्या है? यदि यह प्रत्यक्ष प्रसारण है या अभिनेताओं के साथ नाटक या पुतली-प्रदर्शन है तो मंच की व्यवस्था, पृष्ठभूमि, ध्वनि व प्रकाश प्रबंधन का भी निरीक्षण करें। पुतली-प्रदर्शन देखने के पश्चात कृपया निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें-
1. पुतली-प्रदर्शन का नाम क्या था? आपने इसे कहाँ देखा?
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2. प्रदर्शन में किस प्रकार की पुतलियों का उपयोग किया गया था (जैसे- राजा, शेर, पक्षी)? आपको क्या लगता है कि पुतलियाँ किन वस्तुओं से बनी थीं?.......................
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3. पुतली-संचालक क्या कर रहे थे? वे पुतलियों को कैसे चला रहे थे? क्या पुतली संचालक ने दर्शकों या पुतली के साथ वार्तालाप किया? यदि हाँ, तो कैसे?
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4. पुतली-प्रदर्शन में सबसे रोचक दृश्य कौन-सा था? आपको यह क्यों रोचक लगा?
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5. क्या प्रदर्शन को रोचक बनाने के लिए ध्वनि, प्रकाश, पृष्ठभूमि या किन्हीं अन्य तत्वों का उपयोग किया गया था?
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मुझे क्या करना है?
पुतली-प्रदर्शन आयोजित करने की दिशा में पहला चरण कथा की पहचान करना और उसकी पटकथा लिखना है। एक बार जब यह कार्य हो जाए तो आपको कथा के पात्रों के अनुसार पुतलियाँ बनानी होंगी और फिर पुतली-प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार करनी होगी। अंत में आपको मंच तैयार करते हुए प्रस्तुति देनी होगी।
गतिविधि 3- कथा-चयन या लेखन
पुतलियाँ बनाने से पूर्व आपको यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि आप कौन-सी कथा प्रस्तुत करना चाहते हैं? आपको किस विषय पर पुतली बनानी है इसके लिए आप विद्यालीय पुस्तकालय में जाकर पुस्तकें पढ़ सकते हैं या किसी अन्य विषय में सीखी जानकारी का उपयोग कर सकते हैं, जैसे - भाषा से संबंधित कोई कथा-कविता; विज्ञान या सामाजिक विज्ञान की कोई ऐतिहासिक घटना। आप अपने दादाजी-दादीजी द्वारा सुनाई गई कथा का भी चयन कर सकते हैं। वैकल्पिक रूप से आप सामाजिक मुद्दों, जैसे- स्वच्छ भारत, पोलियो टीकाकरण या नागरिकों के अधिकारों व कर्तव्यों पर आधारित पुतली-प्रदर्शन तैयार करने के संबंध में भी विचार कर सकते हैं।
याद रखें कि आपको पुतलियाँ बनानी हैं, पटकथा लिखनी है और प्रस्तुति भी देनी है। अतः आपकी कथा संक्षिप्त और सरल होनी चाहिए परंतु उसमें कुछ नाटकीयता या क्रियाएँ समावेशित होनी चाहिए।
आपने कौन-सी कथा का चयन किया है और क्यों?
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अब आपको कथा के मुख्य तत्वों की पहचान करनी होगी। इसमें तालिका 5.1 आपकी सहायता करेगी।
तालिका 5.1- चयनित कथा के मुख्य तत्व| प्रश्न | कथा पर आधारित उत्तर |
|---|---|
| यह कथा किस संबंध में है? | |
| इसका शीर्षक क्या है? | |
| कथा में कौन-कौन से पात्र हैं? संक्षिप्त में वर्णन करें। | |
| कथा की पृष्ठभूमि क्या है? | |
| क्या कथा की पृष्ठभूमि समय के साथ परिवर्तित होती रहती है? | |
| कथानक (प्लॉट) क्या है? | |
| कथा की मुख्य घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण लिखें। | |
| इस कथा का संदेश किस विषय पर केंद्रित है? |
गतिविधि 4– पुतली-प्रदर्शन के लिए पटकथा लेखन कार्य
जब आप सीधा प्रसारण देखते हैं या कोई चलचित्र देखते हैं तो उसमें संवाद, दृश्यों में परिवर्तन, संगीत, अभिनय एवं अनेक अन्य बातें सम्मिलित होती हैं। यह केवल कथा सुनाने से कहीं अधिक है। किसी कथा को प्रस्तुति में बदलने के लिए पटकथा का उपयोग किया जाता है।
पटकथा में दृश्यों का क्रम, संवादों एवं पात्रों की भावनाओं को चरणबद्ध प्रक्रिया से लिखा जाता है। इसमें प्रत्येक दृश्य के समय पुतली की स्थिति व गति जैसे सूक्ष्म पहलू भी समाहित होते हैं। पटकथा में संक्षिप्त गीत या कविताएँ, प्रकाश व ध्वनि का प्रभाव आदि जैसे तत्वों का उल्लेख किया जाना चाहिए। बोलने की शैली भी स्पष्ट होनी चाहिए, जैसे- सहज, अनौपचारिक, औपचारिक, आधिकारिक, विनम्र आदि जो पात्र के अनुसार परिवर्तित की जा सकती है।
ऐसी कथा का चयन करने का प्रयास करें जिसमें कम से कम 2 से 3 पात्र हों। कथा के अनुसार पात्र, जैसे- जीव, व्यक्ति, ऐलियन आदि हो सकते हैं।
पटकथा लिखने की विधि को समझने में आपकी सहायता करने के लिए तालिका 5.2 में 'गोपाल और हिल्सा मछली' नामक कथा का उदाहरण दिया गया है। यह कथा एक राजा के संबंध में है जिसे सभा में हिल्सा मछली के संबंध में बात करना अच्छा नहीं लगता है। वह अपने सभासद गोपाल को चुनौती देता है कि एक बड़ी हिल्सा मछली खरीद कर लाओ और सुनिश्चित करो कि जब तुम उसे महल में लेकर आओ तो कोई उसके विषय में बात न करे। गोपाल चुनौती स्वीकार करता है। वह अपनी आधी दाढ़ी मुंडवा लेता है और अपने शरीर पर राख लगा लेता है। लोग उसके रूप को देखकर इतने चकित हो जाते हैं कि वे उनके हाथ में रखी गई हिल्सा मछली के संबंध में कोई बात ही नहीं करता।
तालिका 5.2- गोपाल और हिल्सा मछली की पटकथा| क्र. सं. | पात्र | संवाद और शैली | आवश्यक रंगमंच की सामग्री | विशेष प्रभाव (प्रकाश और ध्वनि) |
|---|---|---|---|---|
| दृश्य 1- सभा का दृश्य राजा सिंहासन पर बैठा है और गोपाल उसके समक्ष खड़ा है। पृष्ठभूमि में एक सुंदर सभाकक्ष दिख रहा है जिसमें भित्तिचित्र (कलाचित्र) लगे हुए हैं। |
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| 1. | राजा | (शिकायत करते हुए) मैं लोगों द्वारा सदैव हिल्सा मछली की बातें सुनकर तंग आ चुका हूँ। | सिंहासन (गत्ते से बना और सुनहरे रंग से रंगा हुआ) | |
| 2. | गोपाल | (धैर्यपूर्वक) वे स्वयं ही थककर चुप हो जाएँगे। | ||
| 3. | राजा | (अधीर होकर) कब ! | ||
| 4. | गोपाल | (शांत स्वर में) जब कोई और अन्य बात समक्ष आएगी। | ||
| 5. | राजा | (क्रोध में) गोपाल ! मुझसे बहस मत करो। मैं तुम्हें चुनौती देता हूँ कि तुम एक बड़ी हिल्सा मछली सभा में लाओ और कोई भी उसके संबंध में बात न करें। | लकड़ी की सतह पर हाथ मारने की ध्वनि | |
| 6. | गोपाल | (झुककर) मैं आपकी यह चुनौती स्वीकार करता हूँ, महाराज। | तुरही की ध्वनि (खिलौना तुरही या किसी भी व्यक्ति द्वारा बनाई गई ध्वनि) | |
|
दृश्य 2- विक्रय स्थल का दृश्य पृष्ठभूमि में एक व्यस्त विक्रय स्थल (बाजार) दर्शाया गया है जिसमें बहुत सारे लोग मंच की ओर देख रहे हैं। |
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|
गोपाल ने अपनी आधी दाढ़ी मुंडवा ली है और शरीर पर राख मल ली है और उसके हाथ में एक बड़ी हिल्सा मछली है। शहर का एक अन्य व्यक्ति खड़ा है और उसे आश्चर्य से देख रहा है। |
||||
कृपया ध्यान दें कि पुतलियों के अतिरिक्त अन्य वस्तुएँ भी हैं जिनका उपयोग मंच पर किया जाता है (चित्र 5.4)। इनका उपयोग मंच की पृष्ठभूमि को स्पष्ट रूप से दर्शाने के लिए किया जाता है, (जैसे- राजा का सिंहासन) और इन्हें सुगमतापूर्वक सभी ओर ले जाया जा सकता है (जैसे - हिल्सा मछली, तलवार, गेंद, कार, समाचार-पत्र)। इनमें से कुछ वस्तुएँ मंच पर स्थिर रूप से रखी जाती हैं जबकि अन्य को डोरी या लकड़ी से जोड़कर सभी ओर घुमाया जा सकता है।
अब, अपनी कथा हेतु विस्तृत पटकथा लिखने के लिए तालिका 5.3 का उपयोग करें।
तालिका 5.3- अपनी स्वयं की पटकथा लिखने के लिए खाका| क्र.सं. | पात्र | संवाद और शैली | आवश्यक सामग्री /वस्तु | विशेष प्रभाव (जैसे प्रकाश और ध्वनि) |
|---|---|---|---|---|
| दृश्य 1 | ||||
| 1. | ||||
| 2. | ||||
| 3. | ||||
| दृश्य 2 | ||||
| 1. | ||||
| 2. | ||||
गतिविधि 5- चरित्र रेखाचित्र बनाना
अपनी पुतलियों को बनाने से पूर्व आपको कल्पना करनी होगी कि वह मनुष्य के रूप में कैसी होंगी। क्या वह लंबी होंगी या छोटी? क्या वह आनंदित होंगी या चिड़चिड़ी? क्या वह मिलनसार होंगी या संकोची? इन गुणों को विशेषताएँ कहा जाता है। अपनी पुतली की विशेषताओं को सुनिश्चित करना, चरित्र वर्णन कहलाता है। इसके लिए आवश्यक है पुतली के चेहरे व शरीर, उसकी अभिव्यक्ति, उसकी ध्वनि एवं हाव-भाव, उदाहरण के लिए, उत्साहित होने पर उछलना-कूदना, दुखी होने पर झुकना (चित्र 5.5) सुनिश्चित करना आवश्यक है।
आपको पुतली को पूर्ण रूप से पशु या मनुष्य जैसे बनाने की आवश्यकता नहीं है। प्रायः पुतलियों के शरीर, हाथ एवं पैर लंबे होते हैं। यद्यपि पुतली की पूरी छवि बनाने के लिए आपको उसके शरीर और व्यक्तित्व दोनों की कल्पना करनी होगी।
मान लीजिए आपकी कथा में एक शशक (खरगोश) है। आप कागज पर शशक बना सकते हैं और उसे गत्ते पर चिपका सकते हैं। इसके पश्चात आप अपने शशक की पुतली को घुमाने के लिए गत्ते पर एक छड़ी लगा सकते हैं।
शशक बनाने के लिए शशक की छवि, रेखानुकरण-पत्रक (ट्रेसिंग पेपर) एवं रेखांकन-पत्रक की आवश्यकता होगी।
रेखानुकरण-पत्रक पर शशक का चित्र बनाएँ और उसे रेखांकन-पत्रक पर चिपकाएँ।
इसके पश्चात जिस चित्रफलक (चार्ट) पर आप शशक को बनाना चाहते हैं, उस पर रेखांकन के अनुपात में रेखाएँ खींचें। इससे आपको एक बड़ा शशक बनाने में सहायता मिलेगी। अब आप शशक के प्रत्येक भाग की चित्रफलक पर छायाप्रति बना सकते हैं। सभी रेखाओं को मिटाकर अपने शशक को रंग दें (चित्र 5.6)। जब छड़ी को शशक के शरीर से चिपका दिया जाएगा तो पुतला तैयार हो जाएगा।
निम्नलिखित प्रश्न आपको पुतलियाँ बनाने की योजना तैयार करने में सहायता करेंगे।
1. आप कौन-सी पुतलियाँ बनाएँगे? नीचे दिए गए स्थान में उनका चित्र बनाएँ।
2. उनकी मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
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गतिविधि 6- पुतलियाँ बनाना
आप अपने परिसर में उपलब्ध सामग्रियाँ, जैसे- मिट्टी, कोमल लकड़ी, घास, अनुपयोगी पत्र, पुरानी बोतलें, ताप-रोधक (थरमाकोल) पत्र, गत्ता या कोई अन्य उपयुक्त सामग्री आदि का प्रयोग करके पुतलियाँ बना सकते हैं, उदाहरण के लिए आप चित्रफलक पर मछली का चित्र बनाकर उसे काट सकते हैं और झाडू की लकड़ी के चारों ओर चिपका कर समुद्र से संबंधित कोई सरल कथा सुना सकते हैं। आप झाडू की लकड़ी के चारों ओर चित्रफलक का एक टुकड़ा चिपका सकते हैं और फिर चित्रफलक या ऊन जैसी सामग्री से बनी नाक, आँखें, कान चिपका सकते हैं।
पुतलियाँ बनाने के लिए आप जिन सामग्रियों और वस्तुओं का उपयोग कर सकते हैं, उनके कुछ उदाहरण अग्रलिखित हैं (चित्र 5.9 से 5.13 देखें)। अन्य सामग्रियों का इनसे आप क्या बना सकते हैं।
1. मोजे की पुतलियाँआप पुराने मोजे लेकर उन पर आँखें, नाक एवं मुँह सिलकर पुतली बना सकते हैं। आप मोजे पर कुछ पुराने ऊन के टुकड़े लगाकर बाल भी बना सकते हैं। इसके पश्चात आप मोजे की पुतली को अपने हाथ पर पहनकर घुमा सकते हैं (चित्र 5.7)1
2. चम्मच और काँटे की पुतलियाँ
चित्र 5.7 - मोजे से बनी पुतली, जिसके बाल ऊन से सिले हैं।
आप स्टील या लकड़ी के चम्मच और काँटे (आइसक्रीम के चम्मच और एक बार प्रयोग किए गए काँटे) का उपयोग करते हुए पुतलियाँ बना सकते हैं। आप केवल चम्मच पर चेहरा बना सकते हैं और काँटे पर कुछ भूसा लपेटकर भी चेहरा बना सकते हैं (चित्र 5.8)।
आप इन पुतलियों को कागज से बने वस्त्रों से भी सजा सकते हैं और पेन या पेंसिल का उपयोग करते हुए उन्हें रंग सकते हैं।
आप चम्मच और काँटे को नीचे से पकड़कर इन पुतलियों को चला भी सकते हैं।
3. चप्पल-जूते की पुतलियाँआप चप्पल-जूते के तले को रंग सकते हैं या बालों और मूँछों के लिए ऊन को बाँध या चिपका सकते हैं। आप आँखों के लिए बटन चिपका सकते हैं या केवल उन्हें रंग सकते हैं (चित्र 5.9)।
आप चप्पल को छोर से पकड़कर या उसे अपने हाथ पर पहनकर इन पुतलियों को चला सकते हैं।
4. गेंद की पुतली
आप गेंदों से चेहरे बना सकते हैं। झाडू की एक लकड़ी को गेंद के निचले भाग में डालें जिससे आप उसे हिला सकें। आप गेंद पर पुतली का चेहरा बना सकते हैं या नाक और कान के समान दिखने वाले कागज के टुकड़े काट कर गेंद के छोरों पर चिपका सकते हैं (चित्र 5.10)।
5. सब्जियों की पुतली
आप आलू और दंत-छड़ (टूथपिक) जैसी सब्जियों का उपयोग करते हुए भी पुतली बना सकते हैं। आप नाक, मुँह एवं आँखें बनाने के लिए मूली और गाजर जैसी अन्य सब्जियों का उपयोग कर सकते हैं (चित्र 5.11)1
आप इन पुतलियों को डंडियों का उपयोग करते हुए घुमा सकते हैं।
6. पत्तों की पुतलियाँ
आप पत्तों से भी पुतलियाँ बना सकते हैं। ये सूखे पत्ते हो सकते हैं या हरे पत्ते जो सहजता से नहीं टूटते। यदि आप हरे पत्तों का उपयोग कर रहे हैं तो आप हाथों और बाँहों को बनाने के लिए जुड़ी हुई टहनियों का उपयोग कर सकते हैं (चित्र 5.12)।
आप इन पुतलियों को पकड़कर जहाँ चाहें वहाँ ले जा सकते हैं।
7. गत्ते की पुतलियाँआप अनुपयोगी गत्ते से भी पुतलियाँ बना सकते हैं (चित्र 5.13)। शरीर के अतिरिक्त आप आँखें, नाक, मुँह एवं मूछों जैसी आकृतियाँ काटकर और चिपकाकर बना सकते हैं।
8. पुतली का सिर बनाना आप सिर और वेशभूषा वाली पुतली बनाने का प्रयास कर सकते हैं। चित्र 5.14 दर्शाता है कि आप सिर कैसे बना सकते हैं। चित्र में दर्शाए गए अनुसार सामग्री एकत्रित करें और प्रारंभ करें।

ऑनलाइन संसाधनों से सीखना
आप पेपियर-मैशे से सिर भी बना सकते हैं। आप 'हाउ टू मेक पेपियर-मैशे' (How to make papier-mâché) की-वर्ड का उपयोग करते हुए पेपियर-मैशे बनाना ऑनलाइन भी सीख सकते हैं (चित्र 5.15)।
ऐसी अनेक विधियाँ हैं जिनसे आप अपने पुतली के सिर को अंतिम रूप से तैयार कर सकते हैं। आपको ऐसी आँखों, नाक, होठों एवं कानों को बनाने की कल्पना करनी चाहिए जो भावना को व्यक्त करते हैं (चित्र 5.16)। उदाहरण के लिए, प्रसन्न मुख, चिंतित चेहरा, हँसता हुआ चेहरा आदि।
एक बार जब आप अभिव्यक्ति सुनिश्चित कर लें तो सिर पर कागज चिपकाएँ। ऐसा करने के लिए आप कागज की पट्टी का उपयोग कर सकते हैं। कागज की पट्टी पर पुतलियों के भाव बनाएँ। निम्न स्थान पर पुतली के सिर की छवि बनाएँ या चिपकाएँ।
त्वचा का रंग यथावत वैसा ही होना आवश्यक नहीं है जैसा कि हमारी त्वचा का रंग होता है। यद्यपि पुतली एक काल्पनिक पात्र है इसलिए रंग भी काल्पनिक हो सकते हैं। आप मुख को रंगने के लिए भिन्न-भिन्न रंगों का उपयोग कर सकते हैं।
शरीर बनाएँपुतली का शरीर बनाने की अनेक विधियाँ हैं। चित्र 5.17 में मानव पुतली बनाने की एक विधि दर्शाई गई।
चरण 1
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एक पुराना वस्त्र लें और उसे एक लंबी वेशभूषा के आकार में काटें। माप ऐसा होना चाहिए कि पुतली के सिर से संयोजित छड़ी को ढक सके। |
चरण 2![]() |
धागे और सुई का उपयोग करके वस्त्र को सिलें। |
चरण 3 ![]() |
यदि आप चाहें तो पुतली के लिए शर्ट और लंबी स्कर्ट या पैंट भी बना सकते हैं और इसे जोड़ सकते हैं। |
चरण 4
आप कागज पर गत्ते के एक टुकड़े पर हाथ बना सकते हैं। इसके पश्चात आप गत्ते को सही आकार में काट लें। अब इन हाथों को पुतली की वेशभूषा की बाँहों से जोड़ दें। अब अपनी पुतलियों के साथ खेलें और आनंद लें।
चित्र 5.17- पुतली को पूर्ण करना |
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आप भिन्न-भिन्न प्रकार के वस्त्रों से जितनी चाहें उतनी पुतलियाँ बना सकते हैं (चित्र 5.18)।
संचालन
प्रस्तुति करते समय पुतलियों की गतिविधि कथा को जीवंत बना देगी। आपको पुतली को गतिमान बनाने के लिए रचनात्मक बनाना होगा। उदाहरण के लिए, आप पुतली की गर्दन के पीछे या उसके हाथों में डोरी बाँध सकते हैं। आप अपने हाथों से उसका जबड़ा खोलकर उसे हँसा सकते हैं। आप उसके शरीर से संयोजित छड़ी का उपयोग करते हुए उसे उड़ा सकते हैं तथा पुतली को अपने हाथ पर 'पहन' सकते हैं (चित्र 5.19 और 5.20)।
आप अपनी पुतली को कैसे चलाएँगे?
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अपनी पुतलियों को अंतिम रूप देना
आपने विभिन्न प्रकार की पुतलियों का प्रदर्शन किया। अब प्रदर्शन के लिए पुतलियाँ बनाने की दिशा में कार्य करना प्रारंभ करें।
कृपया तालिका 5.4 भरें जिससे आपको अपनी पुतलियों को बनाने की योजना में सहायता मिलेगी। अपनी पुतलियों के संबंध में विवरण संयोजित करने हेतु आपकी सहायता करने के लिए तालिका में एक उदाहरण दिया गया है।
तालिका 5.4- अपनी पुतलियों की योजना बनाना| पुतलियों के प्रकार (जैसे-मानव या जीव) और उनके नाम | आपने कौन-सी सामग्रियों का उपयोग किया? | आपने क्या किया? | पुतली कैसे हिलेगी? | आप इन पुतलियों का उपयोग कैसे करेंगे? |
|---|---|---|---|---|
| गेंद से बने दो मानव सिर जिनके नाम राजेश और गीता हैं। | गेंद, झाडू की डंडी, स्केच पेन। | गेंद को सिर के आकार का रूप दिया। स्केच पेन से आँखें और मुँह बनाया इससे मुस्कुराता हुआ चेहरा इमोजी जैसा दिखता है। | गेंद से पेड़ के आकार की लकड़ी जोड़ी गई है जिससे सिर को सभी ओर घुमाया जा सके। | इन पुतलियों का उपयोग दो मनुष्यों के बीच संवाद की कथा प्रस्तुत करने के लिए किया जा सकता है। संवाद हास्यपूर्ण और आनंदपूर्ण हो सकते हैं। |
क्या आपको पहली बार में ही पुतलियाँ सही से मिल गईं या आपको पुतलियों में कोई सुधार करने और किसी पुतली को पुनः बनाने की आवश्यकता थी? यदि हाँ, तो बताएँ कि ऐसा क्यों हुआ और आपने क्या किया?
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अब आप प्रदर्शन की तैयारी करने के लिए तैयार हैं।
गतिविधि 7- पुतली-प्रदर्शन
अब आप पुतलियों के साथ अभ्यास प्रारंभ कर सकते हैं। सुनिश्चित करें कि उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रत्येक को अपने उत्तरदायित्व के संबंध में स्पष्ट रूप से ज्ञात होना चाहिए। आप में से कुछ पुतली संचालक भी हो सकते हैं, कुछ अन्य प्रकाश और ध्वनि प्रभाव (लाइट एंड साउंड इफेक्ट) दे सकते हैं और कुछ दृश्यों के परिवर्तन के अनुसार पृष्ठभूमि को परिवर्तित करने का कार्य कर सकते हैं।
आपकी कथा के आधार पर कुछ अन्य कार्य भी आवश्यक हो सकते हैं। उत्कृष्ट पुतली-प्रदर्शन के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना बहुत महत्त्वपूर्ण है-
क. मंचवह स्थान जहाँ प्रदर्शन किया जाता है, बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। सर्वप्रथम एक 'मंच' बनाने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए जिससे दर्शक पुतलियों को स्पष्ट रूप से देख सकें और दूसरा दर्शकों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान होना चाहिए। इसके साथ-साथ मंच को व्यवस्थित करने हेतु भिन्न-भिन्न विधियाँ दर्शाई गईं हैं (चित्र 5.21 से 5.23)।
याद रखें आपको प्रदर्शन के लिए उपयोग की जाने वाली पुतलियों को मंच के आस-पास ही रखना होगा, जहाँ दर्शक उन्हें देख न सकें। उदाहरण के लिए, आप पुतलियों को मेज ढकने के लिए उपयोग किए जाने वाले चादर के पीछे रख सकते हैं।
1. आप पुतली-प्रदर्शन कहाँ करेंगे?
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2. प्रदर्शन के समय आप पुतलियों को कहाँ रख सकेंगे?
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ख. पृष्ठभूमि
किसी भी मंच पर पृष्ठभूमि (बैकड्रॉप) भी बहुत महत्त्वपूर्ण होती है क्योंकि यह कथा की परिस्थितियों को दर्शाती है। कथा के एक दृश्य से दूसरे दृश्य में आगे बढ़ने पर परिवर्तन होता है और इसी कारण पृष्ठभूमि भी परिवर्तित होती
रहती है। आप इन विभिन्न दृश्यों या वातावरण को चित्रफलक या पुरानी चादर पर चित्रित कर सकते हैं या रंग सकते हैं (चित्र 5.24)। जैसे-जैसे दृश्यों में परिवर्तन होता है
पृष्ठभूमि भी परिवर्तित होती है। आप पृष्ठभूमि को पर्दे पर भी बना सकते हैं और उन्हें
हक या छल्लों का उपयोग करते हुए खिसका सकते हैं।
1. आपने जो पृष्ठभूमि तैयार की है, उसका संक्षेप में वर्णन कीजिए।
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ग. रंगमंच की सामग्री रंगमंच की सामग्री के प्रकार इस बात पर निर्भर करेंगे कि उनका उपयोग कैसे किया जाना है। उदाहरण के लिए, कुर्सी, पलंग या सिंहासन आदि बनाने के लिए मोटे गत्ते का उपयोग कर सकते हैं।
यद्यपि किसी रंगमंच की सामग्री को पुतली संचालक द्वारा उपयोग किया जा रहा है या पकड़ा जा रहा है तो यह बहुत हल्का होना चाहिए। रंगमंच की सामग्री को कागज (समाचार-पत्र, चपाती), एल्युमीनियम धातु (तलवार, चाकू), गत्ता या एक बार प्रयोज्य (डिस्पोजेबल) पात्र (जैसे- गैस-चूल्हा, प्लेट्स आदि) का उपयोग करते हुए बनाया जा सकता है (चित्र 5.25)।
1.आपने जो रंगमंच की सामग्री तैयार की है, उसका संक्षेप में वर्णन करें।
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घ. ध्वनिपुतली कला में ध्वनि का आरोह-अवरोह बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पुतली संचालक अपनी ध्वनि के माध्यम से अभिनय करता है। इसमें पात्रों को भिन्न-भिन्न रूपों में दर्शाने के लिए प्रत्येक पुतली को भिन्न ध्वनि देनी चाहिए। उदाहरण के लिए, शेर की पुतली की ध्वनि गहरी और आज्ञाकारी हो सकती है जबकि शशक (खरगोश) की ध्वनि ऊँची और चंचल हो सकती है।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि दर्शक आपकी बात स्पष्ट रूप से समझ सके, स्पष्ट और ऊँची ध्वनि में बोलें। ध्वनि में आरोह-अवरोह का उपयोग करते हुए आनंद, डर या उत्साह जैसी भावनाएँ व्यक्त करने का अभ्यास करें। उदाहरण के लिए, पीछा करने वाले दृश्य के समय भयभीत ध्वनि में बात करें या रहस्यपूर्ण दृश्य के समय फुसफुसा कर बात करें।
आपने जो पटकथा लिखी है उसे पढ़ें और पुतलियों के साथ अभिनय करने का प्रयास करें। जहाँ भी आवश्यकता हो वहाँ ध्वनि प्रभाव जोड़ने या साथ में गाने का अभ्यास करें। सफलता के लिए अभ्यास ही सबसे महत्त्वपूर्ण कुंजी है।
ङ. ध्वनि और संगीत पटकथा के आधार पर आपको पुतली-प्रदर्शन में भिन्न-भिन्न प्रकार की ध्वनियाँ रखनी चाहिए, जैसे- पृष्ठभूमि संगीत या ध्वनि प्रभाव (जैसे- वर्षा से पूर्व बादलों का गरजना)। आप संगीत वाद्ययंत्रों का उपयोग कर सकते हैं या पेंसिल, मापक या अपनी अँगुलियों का उपयोग करते हुए सतह या मेज पर थपथपाकर ध्वनियाँ बना सकते हैं। आप अपने प्रदर्शन हेतु संगीत बनाने के लिए जल के विभिन्न स्तरों वाले गिलास या काँचपात्र पर थपथपाकर ध्वनियाँ बना सकते हैं। आप ध्वनि प्रणाली का उपयोग करते हुए विभिन्न ध्वनि प्रभावों के साथ उपयोग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, ध्वनि-संवेदक (माइक्रोफोन) में सीटी बजाने से वायु की ध्वनि उत्पन्न होती है (चित्र 5.26)।
अपनी पटकथा (तालिका 5.3) को देखें जिससे यह तय किया जा सके कि संगीत और ध्वनि प्रभाव क्या हो सकेंगे और आप उन्हें कैसे उत्पन्न करेंगे?
च. प्रकाश
पुतली कला में प्रकाश की आवश्यकता होती है जिससे दर्शक पुतलियों को देख सकें और दृश्यों में प्रभाव भी उत्पन्न किए जा सकें। यदि प्रदर्शन दिन के समय बाहर हो तो प्रकाश की कोई विशेष भूमिका नहीं होती। यदि प्रदर्शन शाम के समय या बंद स्थान पर हो तो आपको प्रकाश व्यवस्था की योजना बनानी होगी। उदाहरण के लिए, आप चाँद, सूरज या जादुई चिराग दर्शाने के लिए पर्दे के पीछे से टॉर्च का उपयोग कर सकते हैं। आप झिलमिल रोशनी, टेबल लैंप, मिट्टी का दीया आदि का भी उपयोग कर सकते हैं।
दृश्यों में प्रकाश प्रभाव को कैसे बनाया जा सकता है इसके लिए आप अपनी पटकथा का संदर्भ लें (तालिका 5.3)।
छ. पुतली संचालकपुतली संचालक को संवादों (डायलॉग्स) का अच्छे से अभ्यास करने की आवश्यकता है। याद रखें पुतली बोल रही है, आप नहीं। आपको यह भी पता होना चाहिए कि पुतली कब मंच पर 'अंदर' प्रवेश करेगी और कब मंच से 'बाहर' निकलेगी। इसके साथ ही जब पुतली संचालक को पुतली की ओर देखना चाहिए तब पुतली संचालक के रूप में आपके चेहरे पर कोई भाव नहीं होने चाहिए ताकि दर्शक पुतली को देखें न कि आपको।
गतिविधि 8– पुतली-प्रदर्शन प्रस्तुत करना
अब प्रदर्शन का समय है। प्रदर्शन से पूर्व तालिका 5.5 में दिए गए जाँच सूची को देखना न भूलें।
तालिका 5.5- प्रदर्शन से पूर्व की जाँच सूची| क्र. सं. | प्रश्न | हाँ/नहीं |
|---|---|---|
| 1. | क्या आपकी पटकथा तैयार है? | |
| 2. | क्या आपने प्रत्येक पात्र के लिए पुतलियाँ बना ली हैं? | |
| 3. | क्या पुतलियों की पोशाक तैयार हैं? | |
| 4. | क्या आप पुतलियों को चला सकते हैं? | |
| 5. | क्या आपने संवाद और क्रम को अंतिम रूप दे दिया है? | |
| 6. | क्या मंच तैयार है? | |
| 7. | क्या रंगमच की सहायक सामग्री तैयार हैं? | |
| 8. | क्या आपने पृष्ठभूमि संगीत, ध्वनि एवं प्रकाश प्रभाव पूर्णतः सुनिश्चित कर लिए हैं? | |
| 9. | क्या आपने पूर्वाभ्यास कर लिया है? | |
| 10. | क्या आपने सुनिश्चित कर लिया है कि प्रदर्शन के प्रारंभ होते ही प्रदर्शन के संबंध में जानकारी कौन देगा और प्रदर्शन के पश्चात पात्रों का परिचय कौन देगा? |
नीचे दिए गए मंच और दर्शकों के बैठने के स्थान का रेखाचित्र बनाएँ।
सभी सुनिश्चित हो जाने के पश्चात आप कौशल मेले के समय एक प्रदर्शन आयोजित कर सकते हैं।
प्रदर्शन समाप्त होने के पश्चात कलाकारों को झुककर अभिवादन करना चाहिए और समूह के किसी सदस्य को कलाकारों का परिचय देना चाहिए। इस समय कथा के लेखक को धन्यवाद देना न भूलें और उन सभी व्यक्तियों के नाम की चर्चा अवश्य करें जिन्होंने प्रदर्शन को आयोजित करने में आपकी सहायता की है।
आप कलाकारों को तालिका 5.6 में सूचीबद्ध कर सकते हैं। उनकी भूमिकाएँ- पुतली संचालक, पटकथा लेखक, संगीत, कलाकृति, पुतली निर्माण, प्रकाश व्यवस्था इत्यादि हो सकती हैं।
तालिका 5.6- पुतली-प्रदर्शन के कलाकार| क्र. सं. | कलाकार का नाम | भूमिका |
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प्रदर्शन के पश्चात दर्शकों से प्रस्तुति के विषय में प्रतिपुष्टि प्राप्त करें। आप दर्शकों से निम्नलिखित प्रश्न पूछ सकते हैं-
1. प्रदर्शन का कौन-सा भाग उन्हें सबसे अधिक अच्छा लगा?
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2. इसे उत्कृष्ट बनाने के लिए उन्होंने क्या सुझाव दिए हैं?
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मैंने दूसरों से क्या सीखा?
आपने अपने समुदाय या सहपाठियों से सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त किया होगा। यह पुतली निर्माण, ध्वनि और प्रकाश प्रदर्शन, वेशभूषा या मंच की सजावट के लिए हो सकता है। कृपया वे तीन सबसे महत्त्वपूर्ण बातें लिखें जो आपने सीखीं।
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मैंने क्या किया और इसमें कितना समय लगा?
यह समझना महत्त्वपूर्ण है कि किसी गतिविधि को पूर्ण करने में कितना समय लगता है।
प्रत्येक गतिविधि को क्रियान्वित करने में आपने कितना समय व्यतीत किया इसका आकलन अवश्य कीजिए। इसे नीचे दी गई समयरेखा पर चिह्नित कीजिए। यदि आपने पुस्तिका में सुझाई गई गतिविधियों से अधिक गतिविधियाँ की हैं तो कृपया उनकी संख्या और उसमें व्यतीत समय भी बताएँ।
मैं और क्या कर सकता/सकती हूँ?
- 1.अपनी पुतलियों में अधिक गतिशीलता समाहित करें। आप प्रदर्शन की आवश्यकताओं के अनुसार हाथों, पैरों या गर्दन को हिला-डुला सकते हैं।
- 2.प्रकाश दर्पण और परावर्तन (रिफलेक्शन) का उपयोग करते हुए प्रभाव देने का प्रयास करें।
- 3.क्या आप एनिमेशन बनाने के लिए पुतलियों और संगणक सॉफ्टवेयर का उपयोग कर सकते हैं?
- संकेत - आप पत्र-छेदन (पेपर-कटआउटस) आकृतियाँ तैयार करते हुए अवरुद्ध गति अनुप्रयोग (स्टॉप मोशन एप्लीकेशन) की सहायता से उनमें गति उत्पन्न कर सकते हैं।
सोचिए और उत्तर दीजिए
- 1.दी गई गतिविधियों को करने में आपको क्या आनंद आया?
- 2.आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
- 3.अगली बार आप क्या भिन्न करेंगे?
- 4.अपनी पटकथा और पुतली-प्रदर्शन की तुलना किसी चलचित्र, टीवी प्रदर्शन, कार्टून एनीमेशन या कोई अन्य प्रस्तुति से करें। इनमें क्या समानताएँ और भिन्नताएँ हैं?
- 5. आपके द्वारा किए गए कार्य से संबंधित रोजगार अवसर के कुछ उदाहरण बताएँ। यथा - पटकथा लेखन, पुतली निर्माता, वेशभूषा अभिकल्पक (कॉस्ट्यूम डिजाइनर), ध्वनि आरोह-अवरोह, प्रकाश और ध्वनि तकनीशियन आदि। अपने आस-पास देखें, व्यक्तियों से बात करें और अपना उत्तर लिखें।



आप कागज पर गत्ते के एक टुकड़े पर हाथ बना सकते हैं। इसके पश्चात आप गत्ते को सही आकार में काट लें। अब इन हाथों को पुतली की वेशभूषा की बाँहों से जोड़ दें। अब अपनी पुतलियों के साथ खेलें और आनंद लें।