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बिन बोले सब कहें -
मूकाभिनय
"माइम एक ऐसी कला है जो मौन की सार्वभौमिक भाषा बोलती है। यह अदृश्य को दृश्यमान बना सकती है तथा मौन को संचार का सबसे शक्तिशाली और उच्च स्वर वाला रूप दे सकती है।"
- मार्सेल मार्सी, एक प्रसिद्ध फ्रांसीसी माइम कलाकार
एक स्थिति की कल्पना करें कि आप एक महत्वपूर्ण आयोजन में हैं, जहाँ किसी को बोलने की अनुमति नहीं है। अचानक आपको याद आता है कि आयोजन आरंभ होने से पहले आपने अपने मित्र की प्रतीक्षा करते हुए अपनी छतरी बाहर छोड़ दी थी, लेकिन आप उसे अंदर लाना भूल गए। आप हॉल के बीच में हैं और बाहर नहीं जा सकते। आपको अपने मित्र को, जो प्रवेश द्वार के पास बैठा है, यह बताना है कि वह बाहर जाए और आपके लिए छतरी लेकर आए। आप यह कैसे बताएँगे?
कक्षा में जोड़ों में बैठें और एक-दूसरे को यह बताओ। आप बारी-बारी से ऐसा कर सकते हैं। यदि संभव हो तो आप बातचीत को आगे बढ़ा सकते हैं, उदाहरण के लिए, मित्र यह उत्तर देता है कि बाहर जाना संभव नहीं है और आप यह कहते हुए पुनः अनुरोध करते हैं कि यह महत्वपूर्ण है और इसी तरह कुछ अन्य। लेकिन सब कुछ मौन में!आपने अभी क्या किया? क्रियाओं और भावों के माध्यम से संवाद किया। वास्तव में, आपने अभी एक माइम किया, यही माइम था।
- मूकाभिनय क्या है?
- मूकाभिनय की मूल विशेषताएँ
- मूकाभिनय के लाभ
- मूकाभिनय प्रदर्शन की तैयारी
भारत में इसे मूकाभिनय कहा जाता है। आइए, पहले इस प्रदर्शन रूप में प्रयुक्त शब्दों से परिचित हों।
यहाँ कुछ मूल शब्द दिए गए हैं जिनसे आप परिचित हो सकते हैं। तकनीक आधारित शर्तेंचेहरे पर दिखाए गए भाव एवं प्रतिक्रिया
अभिनय का एक रूप जिसमें कोई शब्द या ध्वनि नहीं है। यह संवाद वाले किसी बड़े नाटक का हिस्सा हो सकता है। इसे करने वाले व्यक्ति को 'मूकाभिनय' भी कहा जाता है।
एक नाटकीय प्रदर्शन जिसमें कई कलाकार और संगीत सम्मिलित होता है। इसमें सामान्यतः हास्य प्रधान और अतिरंजित अभिनय होता है।
हस्त-संकेत, शारीरिक मुद्राएँ एवं क्रियाएँ।
अधिक प्रभाव डालने के लिए दर्शकों की भागीदारी को सम्मिलित करके उन्हें 'भूम का हिस्सा' बनाना।
प्रत्येक कार्य के पीछे की तीव्रता एवं एकाग्रता।
आइए, अब शुरू करें और कुछ मूकाभिनय करने का प्रयास करते हैं।
अब, इससे पहले कि हम वास्तव में मूकाभिनय आरंभ करें, यहाँ कुछ मूल सुझाव दिए गए हैं जो आपकी मदद करेंगे-
1. वस्तु मत बनो, वस्तु का उपयोग करो
यह एक सामान्य गलती है जो वस्तु दिखाते समय की जाती है। आपको यह दिखाना है कि आप वस्तु को कैसे पकड़ते हैं, न कि अपने हाथों से उस वस्तु के आकार की संरचना करनी है। यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं-
2. वस्तु का स्थान (आकार) और वजन निर्धारित कीजिए
काल्पनिक वस्तुओं को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए, मूकाभिनय को यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्य उस वस्तु की गुणवत्ता के अनुरूप हों जिसे वे संभाल रहे हैं। क्रिकेट बॉल, बास्केटबॉल, गुब्बारा - प्रत्येक का आकार, वजन और अनुभव एक-दूसरे से बहुत भिन्न है।
अब इसे ध्यान में रखकर प्रत्येक को अलग-अलग पकड़ने का अभिनय कीजिए। आइए, इसे और सरलता से समझने के लिए एक मनोरंजक खेल खेलते हैं।
यदि आपने केवल दो उँगलियों का संकेत किया और उन्हें कैंची की तरह हिलाया तो यह गलत है। यदि हम अपनी उँगलियों को बदलकर बंदूक बना सकते हैं तो हम बड़ी वस्तु को कैसे दिखाएँगे? जैसे ट्रेन या कार या फ्रिज? इसलिए, मूकाभिनय का पहला नियम है- वस्तु का उपयोग करना।
आरंभिक स्तर - दैनिक जीवन की वस्तुएँ जैसे पेन, कैंची या घड़ी दिखाई जा सकती हैं। जब वस्तु प्राप्त होती है तो आप में से प्रत्येक अनोखी क्रिया करता है जो पहले नहीं की गई और फिर इसे आगे बढ़ाता है।
उच्च स्तर - इसमें भी सभी वस्तु को पास करते हैं। लेकिन समय के साथ वस्तु थोड़ी बदल जाती है। इसलिए, पहले व्यक्ति द्वारा की गई क्रिया अंतिम व्यक्ति के लिए समान नहीं होगी। उदाहरण के लिए, एक बड़ा बर्फ का टुकड़ा (समय के साथ पिघलता है) या मुट्ठीभर रेत (उँगलियों से फिसलने के कारण मात्रा कम होती जाती है)।
आइए, घेरा बनाएँ
- बिना भाषण या सामग्री के प्रदर्शन करने का सबसे आनंददायक पहलू क्या है?
- मूकाभिनय करते समय सबसे कठिन क्या है? बिना बोले अभिनय करना या सामग्री का उपयोग नहीं करना?

मूकाभिनय प्रदर्शन के तीन आधारभूत स्तंभ
कोई भी सफल मूकाभिनय प्रदर्शन में निम्नलिखित तीन पहलू होने चाहिए। याद रखें, इन सभी का अभ्यास व्यक्तिगत रूप से एवं समूह में, दोनों तरह से किया जाना चाहिए।1. कल्पना
मूकाभिनय प्रदर्शन के लिए, अपनी शारीरिक भाषा और अभिव्यक्तियों पर काम करने के साथ-साथ सबसे महत्वपूर्ण है, कल्पनाशीलता। जहाँ पहले दो पूरी तरह से कलाकार और उनके प्रयासों के बारे में हैं, वहीं कल्पना में कलाकार और दर्शक दोनों सम्मिलित होते हैं। जब तक दर्शक वस्तुओं, परिस्थितियों और कहानी के वातावरण की कल्पना में सहभागी नहीं बनते, तब तक एक सफल प्रदर्शन संभव नहीं हो सकता। दर्शकों और कलाकार के मध्य यह आदान-प्रदान, प्रदर्शन को अनोखा और आनंददायक बनाता है, जिसे कल्पना के माध्यम से सुगम बनाया जाता है।
अतिरंजना
यह गतिविधियों, कार्यों और अभिव्यक्तियों को यथार्थ जीवन से कुछ अधिक करने की तकनीक है। चूँकि मूकाभिनय में संवाद नहीं है और बिना कुछ कहे अभिव्यक्ति करनी है, अतः सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो जाता है कि सूक्ष्मतम विवरण दिखाई दें और समझ में आए। यह विशेष रूप से तब और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है जब प्रदर्शन विशाल जनसमूह के लिए आयोजित किए जाते हैं। यह अध्याय एक में वर्णित नाट्यधर्मी शैली के समान है, जिसमें नाटकीय एवं शैलीबद्ध तकनीकों, जैसे- धीमी गति, पुनरावृत्ति और अतिरंजित भावाभिव्यक्ति का उपयोग कर प्रभावी बनाया जाता है।
वेशभूषा एवं रूप-सज्जा
नाटक या नृत्य के विपरीत, मूकाभिनय में पोशाक और रूप-सज्जा सीधे पात्र को नहीं दर्शाते हैं। यह मुख्य रूप से तटस्थ होता है, जिसमें पात्रों में भिन्नता दिखाने के लिए सूक्ष्म अंतर होते हैं।वेशभूषा - पूरी तरह से काली शर्ट और पैंट (यदि पृष्ठभूमि सफेद हो) या काले और सफेद का मिश्रण, जैसे- शर्ट पर धारियाँ या सहायक सामग्री, जैसे- दस्ताने, मोजे अथवा फीता (सस्पेंडर)।
रूप-सज्जा - सफेद, काले और लाल रंगों के पूरक रंगों की सहायता से चेहरे की विशेषताओं को उभारा जाता है, यह रूप-सज्जा की मुख्य विशेषता है। इसका प्रयोग भावों की स्पष्ट दृश्यता और अतिरंजकता को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।
पात्र - रूप-सज्जा में ही पात्रों की पहचान के संकेत सूक्ष्मता से समाहित कर दिए जाते हैं। एक ऐसा शुद्ध माध्यम है जो किसी भी समाज या दुनिया के किसी भी हिस्से के लोगों द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है। यह जेंडर रूढ़ियों को भी तोड़ सकता है, उदाहरण के लिए, खनन या भवन निर्माण का दृश्य जिसमें महिलाएँ भारी भार उठा रही हों, क्योंकि मूकाभिनय में पहनी जाने वाली पोशाक समान होती है।
मूकाभिनय का उपयोग एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में भी किया जाता है, ताकि लोग अपने आघात से बाहर आ सकें या बुरी यादों को भूल सकें, क्योंकि यह उन्हें बिना आलोचना के डर को अभिव्यक्त करने और साझा करने की स्वतंत्रता देता है।मूकाभिनय - समानता की सार्वभौमिक भाषा
मूकाभिनय की सबसे उल्लेखनीय विशेषता है- भाषा का अभाव। यह दुनियाभर में भाषा की सभी बाधाओं को तोड़ देता है। भावनाएँ सार्वभौमिक होती हैं। इसलिए देश के किसी भी राज्य या दुनिया के किसी भी देश में मूकाभिनय में दिखाई गई परिस्थितियाँ दुनिया के किसी भी कोने के व्यक्ति द्वारा समझी जाती हैं। क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है? मूकाभिनय की अगली विशेषता जो सामने आती है- काले एवं सफेद रंग की वेशभूषा और सभी के लिए सामान्य सफेद रूप-सज्जा। लोगों के कपड़ों के आधार पर होने वाले पक्षपात जैसी रूढ़ियों को समाप्त करने की शक्ति जैसी विशेषता इसमें समाहित है। यह कहानी कहने का
अब आपकी टीम को दृश्य-सज्जा की स्थिति को अपने मस्तिष्क में चिह्नित करना होगा और कुर्सियों, मेज आदि हटाने होंगे। अब आप बिना किसी दृश्य-सज्जा के पूरे दृश्य को अभिनीत करें। हस्त सामग्री (जो आपके हाथ में हों, जैसे- चलने की छड़ी, धनुष और तीर आदि) का उपयोग कर सकते हैं। एक बार जब आप दृश्य-सज्जा से परिचित हो जाएँ तो हस्त सामग्री को भी हटा दें। बिना किसी दृश्य-सज्जा या हस्त सामग्री के पूरे दृश्य को अभिनीत करें।
अभ्यास - मूकाभिनय में अपनी दैनिक दिनचर्या को, जब आप सुबह उठते हैं से लेकर रात को सोने तक को अभिनीत करें। छोटी-छोटी जानकारी को याद करने और उसे अपनी गतिविधियों में दर्शाने का प्रयास करें।
संगीत - आप अपने प्रदर्शन की स्थिति के अनुरूप पार्श्व संगीत का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन सुनिश्चित करें कि यह केवल वाद्य संगीत हो, इसमें कोई गीत या भाषण न हो।
बद्धि के खेल
क्रियात्मक जादुई माइम (मकाभिनय) बनाएँ
- दो-दो के समूह बनाएँ।
- इन परिस्थितियों के लिए भाव दिखाने का प्रयास करें।
- अपने मित्र के चेहरे को देखें और दी गई जगह में उनकी अभिव्यक्ति बनाएँ। भौहें, माथा, गाल और आँखों के विवरण को ध्यान से देखें और नोट करें।
- चर्चा करें कि आप अभिव्यक्ति को और अधिक अतिरंजित कैसे बना सकते हैं और इसमें सुधार कर सकते हैं।
- पूरे शरीर के साथ स्थिति का अभिनय करने का प्रयास करें। आपके कार्य आपके संप्रेषण को सुधारने में कैसे सहायता करते हैं?
- इसके इर्द-गिर्द एक छोटी कहानी बनाएँ और इसे अपने मित्रों के साथ अभिनीत करें।

अध्याय 2 — बिन बोले सब कहें — मूकाभिनय
दक्षताएँ
- सी.-2.1 — अपने आस-पास देखी गई रूढ़ियों को चुनौती देने वाली परिस्थितियों या कहानियों पर आधारित नाटक बनाता और प्रदर्शन करता है।
- सी.-2.2 — नाटक के तत्वों, विषयों और प्रतीकों को व्यक्तिगत अनुभवों, भावनाओं और कल्पनाओं से जोड़ता है।
| सी.जी. | सी. | सीखने के प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
|---|---|---|---|---|
| 2 | 2.1 | मूकाभिनय की विशेषता और नाटक के साथ इसकी समानताओं एवं अंतर को समझता है। | ||
| 2 | 2.2 | वस्तुओं के आकार, आकृति और भार में परिवर्तन रूप से कल्पना कर सकता है और प्रदर्शन में इसका उपयोग कर सकता है। | ||
| 2 | 2.3 | व्यक्तिगत अनुभवों से कहानियाँ बनाकर मूकाभिनय में उनकी अभिव्यंजना कर सकता है। | ||
| 2 | 2.4 | मूकाभिनय के लाभ और इसकी सार्वभौमिकता का उपयोग समावेशिता या जेंडर रूढ़ियों को तोड़ने वाले विषयों के प्रदर्शन करने के लिए करता है। | ||
| 2 | 2.5 | संगीत और हास्य को एकीकृत करते हुए सामूहिक प्रदर्शन को एक साथ प्रस्तुत कर सकता है। |