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आइए, डिजाइन करें -
मंच तकनीक-2
1. नेपथ्य कार्य – रंगमंच का अदृश्य स्तंभ
फूलों और फलों से लदा एक वृक्ष देखने में कितना सुंदर लगता है! किंतु इसकी सुंदरता का स्रोत क्या है? इसकी मजबूत और स्वस्थ जड़ें।एक सुंदर ढंग से निर्मित प्राचीन मंदिर, जो हमें अतीत की अनेक कहानियाँ बताता है, गर्व की बात है। इसका सामर्थ्य क्या है?
इसकी प्रबल और गहरी भूमिगत नींव।
इन उदाहरणों से आप क्या समझते हैं?
जो वस्तु लोगों के लिए सुहावनी, सार्थक और सफल हो, उसके लिए प्रबल सहायक प्रणाली की आवश्यकता होती है।
किसी भी प्रदर्शन के लिए यह कार्य नेपथ्य गण का है। यह लोगों का एक समूह है जो अलग-अलग उत्तरदायित्वों को निभाते हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए कठिन परिश्रम करते हैं कि प्रदर्शन बिना किसी गड़बड़ी के सुचारू रूप से चले। जबकि अधिकांश लोग सोचते हैं कि रंगमंच मुख्य रूप से मंच पर अभिनय करने के संदर्भ में है, किंतु यह एक अल्प ज्ञात तथ्य है कि नेपथ्य कार्य करने वाले व्यक्ति भी समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।
नेपथ्य कार्य को अधिक महत्व दिए जाने के कारण, आप सोच रहे होंगे कि नेपथ्य क्या है? क्या यह वह भौतिक स्थान है जो प्रदर्शन क्षेत्र के पीछे फैला हुआ है? यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
- नेपथ्य और उसका महत्व
- रंगमंच से जीवन कौशल- समस्या समाधान, अनुशासन एवं सत्यनिष्ठा
- पटकथा लेखन-चरित्र रचना एवं दृश्य विभाजन
यह भौतिक स्थान के कारण नहीं, बल्कि किए जाने वाले कार्यों और इसमें जुड़े व्यक्तियों के कारण महत्वपूर्ण है। जब अभिनेता मंच पर प्रदर्शन करते हैं तो नेपथ्य समूह के सभी प्रयासों एवं कठोर परिश्रम को ध्यान से देखें।
नेपथ्य कार्य में निम्नलिखित पहलू सम्मिलित हैं-
1. रंगमंच शिल्प एवं रंगमंच सामग्री
- प्रदर्शन किए जाने वाले दृश्यों के अनुसार मंच का विन्यास बदलना। अभिनेताओं द्वारा उपयोग में ली जाने वाली सभी सहायक अभिनय सामग्री तैयार रखना।
- यह सुनिश्चित करना कि मंच पर ऐसी कोई वस्तु न हो जो कलाकारों के कार्य में बाधा उत्पन्न कर सकती हो।
- प्रदर्शन के समय यदि कोई आकस्मिक घटना घटे या अभिनेता कुछ भूल जाए तो सहायता के लिए तत्पर रहना।
2. वेशभूषा और रूप सज्जा
- कलाकारों को पात्र से संबंधित वेशभूषा एवं रूप सज्जा के साथ तैयार करना।
- दृश्यों के बीच शीघ्रता से वेशभूषा परिवर्तन में सहायता करना।
- वेशभूषा में मामूली टूट-फूट और क्षति में सहायता करना।
3. संगीत
- साउंड ट्रैक के लिए सही संकेत पाने के लिए अभिनेताओं और तकनीकी टीम के साथ काम करना।
- प्रदर्शन के अनुकूल संगीत एवं ध्वनि प्रभावों पर काम करना। कभी-कभी मंच पर होने वाली गड़बड़ियों को उचित ध्वनि या संगीत से ढक देना।
4. प्रकाश व्यवस्था
- प्रकाश की योजना बनाएँ और अपने संकेतों को अच्छी तरह से जानें।
- प्रकाश का समय निर्धारित करना तथा अप्रत्याशित परिस्थितियों में अभिनेताओं को सहायता प्रदान करना।
अगर आपने ध्यान दिया होगा, तो ऊपर बताई गई सभी बातें प्रदर्शन के दौरान की जाने वाली चीजों के बारे में हैं। यद्यपि नेपथ्य का मुख्य उत्तरदायित्व प्रदर्शन के समय होता है, लेकिन प्रदर्शन से पहले और बाद में भी बहुत-सी योजनाएँ एवं तैयारियाँ होती हैं। प्रदर्शन के बाद की योजना? हाँ! आगे पढ़ें...
प्रदर्शन से पहले / प्रदर्शन के बाद
| प्रदर्शन से पहले | मंच शिल्प (सेट) एवं मंच सामग्री (प्रॉप्स) | प्रदर्शन के बाद |
|---|---|---|
मंच शिल्प (सेट) एवं मंच सामग्री (प्रॉप्स)
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वेशभूषा और रूप सज्जा
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संगीत
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प्रकाश
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मंच के पीछे होने वाले कार्य की उपरोक्त समझ के अनुसार, आपको क्या लगता है कि प्रत्येक विभाग के लिए कितने लोगों की आवश्यकता होगी? और एक नाटक के लिए मंच के पीछे कितने लोग काम करेंगे जिसमें लगभग 8-10 कलाकार हो सकते हैं? कम से कम 15-18 लोग (कभी-कभी इससे भी अधिक)।
योजना, प्रबंधन और अनुशासन
रंगमंच और विशेषकर नेपथ्य के कार्य करने से कई जीवन कौशल प्राप्त किए जा सकते हैं।समूह कार्य और नेतृत्व
सभी विभागों को एक-दूसरे के साथ समन्वय तथा आपसी समझ के साथ काम करना होगा। इनमें से किसी एक में समस्या आने से पूरे प्रदर्शन पर प्रभाव पड़ सकता है।मानव संसाधन
अलग-अलग उत्तरदायित्वों को उठाने के लिए सही तरह के लोगों का होना सबसे महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करना कि सभी लोग अपने काम में सहज हों, काम की उच्च गुणवत्ता बनाए रखने में भी सहायता करता है।समय प्रबंध
समय का प्रबंधन प्रत्येक सदस्य के लिए आवश्यक है चाहे वह अभिनेता हो या नेपथ्य गण। आगे इसके बारे में विस्तार से बताया गया है। एक प्रदर्शन के लिए इतने अधिक लोग और समूह एक साथ काम कर रहे हैं, यह सुनिश्चित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण पक्ष क्या होगा कि यह सब सुव्यवस्थित ढंग से काम करें?
संचार
समूह के बीच विचारों और मुद्दों का निरंतर आदान-प्रदान एक प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण है। अगर एक समूह को पता ही नहीं है कि दूसरा समूह किस समस्या से जूझ रहा है तो समन्वय प्रभावित होगा, जिसका प्रभाव प्रदर्शन पर भी पड़ेगा।संसाधन प्रबंधन
यह सुनिश्चित करना कि मंच शिल्प (सेट), मंच सामग्री (प्रॉप्स) एवं वस्त्र बनाने के लिए सामग्री समय पर प्राप्त हो जाए। यह भी सुनिश्चित करना कि उन्हें सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया जाए एवं वित्त तथा बजट पर ध्यान दिया जाए।बिक्री तथा विपणन
समूहों द्वारा किए जा रहे कठिन परिश्रम को देखते हुए, क्या यह महत्वपूर्ण नहीं है कि इसे देखने के लिए अच्छे दर्शक हों?अनुशासन एवं प्रतिबद्धता
यह एक ऐसा गुण है जिसे एक समूह के रूप में सफलतापूर्वक प्रदर्शन करने में सक्षम होने के लिए प्रत्येक सदस्य को विकसित करना होगा। उदाहरण के लिए-- बिना कोई बहाना बनाए सभी पूर्वाभ्यासों और तैयारी सत्रों में भाग लेना।
- निर्देशक के निर्देशानुसार अपना कार्य और तैयारी करना।
- समय पर पहुँचना और समूह को प्रतीक्षा नहीं कराना।
- यह सुनिश्चित करना कि आप सभी पुनः प्रदर्शनों और उनके पूर्वाभ्यासों के लिए उपस्थित रहें।
- खाली समय में अतिरिक्त सहायता के लिए स्वयंसेवा करना, वेशभूषा और प्रॉप्स जैसे संसाधनों को साझा करना।

आइए, हम उन गतिविधियों की एक सूची बनाएँ जो आपको लगता है कि आप रंगमंच के बाहर भी उपयोग कर सकते हैं। पहले दो उदाहरण दिए गए हैं-
मेरे जीवन में रंगमंच कौशल
- अपने सामान, यूनिफॉर्म, लेखन-सामग्री, पुस्तकों आदि का भली प्रकार ध्यान रखें।
- नियमित रूप से अभ्यास (अध्ययन) करें जिससे आप प्रदर्शन के समय आश्वस्त रहें। सब कुछ अंतिम क्षण के लिए बचाकर रखने से कोई लाभ नहीं होगा।
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नेपथ्य का इतिहास
नाटकों के लिए नेपथ्य का काम रंगमंच जितना ही पुराना है, क्योंकि जैसा कि हमने अब तक चर्चा की है, इतिहास के किसी भी बिंदु पर किसी भी प्रदर्शन के लिए एक ठोस सहायक प्रणाली की आवश्यकता होती है। वास्तव में, प्रदर्शन कला का सर्वाधिक प्राचीन ग्रंथ नाट्यशास्त्र, 2500 वर्ष से भी पूर्व लिखा गया था, जिसमें प्रदर्शन की तैयारी के लिए पालन किए जाने वाले सभी निर्देशों का एक अत्यंत विस्तृत विवरण और चरणबद्ध निर्देश सम्मिलित हैं। पूर्वरंग विधि भी नेपथ्य के इतिहास का भाग है, इसमें संगीत वाद्ययंत्र, मंच शिल्प और सामग्री की स्थापना से लेकर निर्बाध प्रदर्शन के लिए देवताओं के आशीर्वाद का आह्वान करने तक सब कुछ विस्तार से बताया गया है
नाट्यशास्त्र में नाट्य गृह की संरचना का भी विस्तृत विवरण है। इसमें प्रदर्शन आयोजित किए जाते थे और नेपथ्य, मंच के पीछे या दर्शक दीर्घा सहित मंच के चारों ओर का पूरा स्थान इसमें सम्मिलित है। यहाँ अपनाए जाने वाले अनुशासन और प्रक्रियाओं को 'नेपथ्य विधि' कहा जाता है, इसमें मंच के अग्र भाग के कोनों पर मत्तवारिणी (हाथी के आकार के बड़े खंभे) होती थी, जहाँ से कलाकार प्रवेश और निकास के लिए मंच और हस्त सामग्री तैयार रखते थे। आज हमारे पास पार्श्व खंड (विंग्स) की अवधारणा है जो इसी तरह का काम करती है। सामान्यतः थिएटर में तीन पार्श्व खंड होते हैं जो मंच के दोनों ओर प्रवेश और निकास के लिए तीन रास्ते बनाते हैं।नाट्यशास्त्र अध्याय 5 पूर्वरंग से नीचे दिए गए श्लोक में नेपथ्य कार्य के महत्व का सारांश दिया गया है।
तीव्र हवा से फैलने वाली आग भी मंच को उतनी हानि नहीं पहुँचाती जितनी कि त्रुटिपूर्ण नियोजित प्रयोग से होती है।
रंगमंच में तीन घंटियाँ
किसी भी व्यावसायिक रंगमंच प्रदर्शन में अलग-अलग अंतराल पर तीन घंटियाँ बजाई जाती हैं। प्रत्येक का भिन्न अर्थ होता है। यह केवल कलाकारों और नाट्य-समूह के लिए ही नहीं, अपितु दर्शकों के लिए भी होता है। इसका क्या अर्थ है, आइए जानते हैं-पहली घंटी- दर्शकों को शांत रहने का संकेत, क्योंकि नाटक शीघ्र ही आरंभ होने वाला है। इस समय तक, पहले दृश्य से संबंधित मंच शिल्प और मंच सामग्री मंच पर रख दिए जाते हैं।
दूसरी घंटी-अब, अभिनेता मंच पर हैं और अपनी जगह पर हैं। मंच पर सभी लोग अपनी जगह पर आ जाते हैं। यह इस बात का संकेत है कि मंच के माइक अब उपयोग के लिए तैयार हैं। घोषणा की जाती है (नाटक का नाम, नाटककार, निर्देशक और अन्य विशेष सूचना)। नाटक के समय फ्लैश फोटोग्राफी और मोबाइल फोन के प्रयोग पर कड़े प्रतिबंध की भी घोषणा की जाती है।
तीसरी घंटी -शो आरंभ होता है! इतने सारे अभ्यास के बाद यह प्रदर्शन समूह के लिए अंतिम परीक्षा की तरह है। क्या आप उन तीन चरणों की पहचान कर सकते हैं जिनका पालन करके आप परीक्षा से पहले तनाव से बच सकते हैं और उत्तम प्रदर्शन कर सकते हैं?
क्या आप जानते हैं?
ग्रीक रंगमंच में चूंकि प्रदर्शन स्थल खुला था, किंतु वहाँ भी ऐसी ही व्यवस्था थी। प्रदर्शन क्षेत्र के पीछे का वह स्थान जहाँ अभिनेता वेशभूषा और मुखौटे पहनकर तैयार होते थे, वह हरे अंगूर के बागों, पेड़ों और झाड़ियों से ढका हुआ था। यही कारण है कि इसे 'ग्रीन-रूम' कहा जाता था। इसका उपयोग आज भी दुनियाभर के कलाकार करते हैं! वह स्थान जहाँ श्रृंगार एवं वेशभूषा बदलने का काम होता है, उसे अभी भी ग्रीन रूम कहा जाता है, यद्यपि अब वहाँ कुछ भी हरा नहीं होता है।
बद्धि के खेल
यहाँ कुछ परिदृश्य दिए गए हैं जो किसी भी समय रंगमंच पदर्शन में हो सकते हैं। स्वयं को उस स्थिति में रखें और उसका समाधान लिखें। आप एक से अधिक समाधान भी सोच सकते हैं। किंतु योजना बनाने में लगने वाले समय और उपलब्ध वास्तविक समय को ध्यान में रखें। इसमें सम्मिलित धन भी महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, हो सकता है आप पूरा नया सेट नहीं खरीद पाएँ, क्योंकि यह बहुत महंगा हो सकता है।परिदृश्य 1
सुबह के 11 बज रहे हैं और शो आज शाम को होना है। समूह अभी-अभी अभ्यास के लिए कार्यक्रम स्थल पर पहुँचा है। उसके बाद वे नाटक के लिए तैयार होने लगते हैं। रिहर्सल के दौरान मुख्य अभिनेता भूलवश गिर जाता है और उसके पैर में चोट लग जाती है। डॉक्टर के अनुसार चोट काफी गंभीर है और अभिनेता सहजता से चल नहीं पाएगा। आप यह भी देखते हैं कि अभिनेता द्वारा पहनी गई वेशभूषा भी फटी हुई है, अलग वेशभूषा मिलना संभव नहीं है, क्योंकि उसे विशेष रंग और शैली के अनुरूप बनाया गया था। नाटक में इसका एक महत्वपूर्ण संदर्भ है। प्रचार के लिए पोस्टर में भी यही पोशाक उपयोग की गई है।प्रस्तुति 5 घंटे में आरंभ होने वाली है। आप क्या करेंगे?
परिदृश्य 2
आप एक जादुई कंगन पर आधारित प्रस्तुति की तैयारी कर रहे हैं। पूरी कहानी इसके इर्द-गिर्द घूमती है। यह एक विशेष रूप से बनाया गया कंगन है, जो दुकानों में उपलब्ध नहीं है। यह प्रस्तुति का दिन है हर कोई तैयार और उत्साहित है, जब मंच सामग्री प्रभारी दौड़ता हुआ आता है और कहता है कि कंगन चोरी हो गया! तब आप क्या करेंगे?चोरी हुए कंगन जैसा कुछ बनाएँगे (मूल कंगन बनाने में 5 दिन लगे थे), पटकथा बदलेंगे या स्थिति के अनुरूप प्रकाश और संवाद के साथ प्रयोग करेंगे? चोर को ढूँढ़ेंगे? व्यक्तिगत रूप से या समूह में चर्चा करके कोई हल निकालिए।
आइए, घेरा बनाएँ
नेपथ्य
- नेपथ्य के किस विभाग में आपकी सबसे अधिक रुचि है? क्यों?
- आप अपने दैनिक जीवन में कौन-सा नेपथ्य कौशल उपयोग करना चाहेंगे?
- परीक्षा के दौरान कौन-सा कौशल आपकी उत्तम सहायता करेगा?

।।. नाट्य-आलेख लेखन ' सही लिखें'
"नाट्य-आलेख के बिना नाटक बिना दिक्सूचक (कम्पास) के जहाज की तरह है। नाट्य-आलेख कहानी को दृष्टि से जोड़ता है।"इतनी महत्वपूर्ण भूमिका के साथ, विवरणों को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि आपके पास अपने नाटक पर काम करने के लिए सही कथानक है। अब तक आपने निम्नलिखित बातें सीखी हैं -
- कहानी तथा कथानक के बीच अंतर
- आरंभ मध्य- अंत * एक कहानी के तीन भाग
- द्वंद्व का महत्व
- सरल वार्तालाप लिखना
अब हम कथानक लिखने के अगले चरणों की ओर बढ़ते हैं।
1. संरचना
कहानी की घटनाओं को व्यवस्थित करने का क्रम ही संरचना है। मूलभूत संरचना का पालन करते हुए आपको सुनिश्चित करना है कि निम्नलिखित तत्वों को समाहित कर लिया जाए-नायक - वह चरित्र जिसके बारे में कहानी है।
लक्ष्य - वह क्या चाहता या चाहती है?
द्वंद्व - उसके लक्ष्य तक पहुँचने के मार्ग की बाधाएँ।
संकल्प - क्या वह लक्ष्य प्राप्त करता या करती है? कैसे?
उदाहरण के लिए, आइए हम रामायण को देखें जिससे हम सभी परिचित हैं। संरचना से परिचित होने पर हमारे पास है-नायक - राम
लक्ष्य - राजा के रूप में अयोध्या की देखभाल करना, धर्म के मार्ग पर चलना।
द्वंद्व - 14 वर्षों के लिए वन में निर्वासित, रावण द्वारा उनकी पत्नी सीता का हरण कर लिया जाता है।
समाधान - सीता को वापस लाने के लिए हनुमान का सहयोग, 14 वर्ष पूरे करना, अयोध्या पर राज करने के लिए वापस लौटना।
अब, इन मुख्य बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए, आपके लिए इन बिंदुओं को जोड़कर एक अच्छी तरह से संरचित कहानी बनाना सरल है।आप इस संरचना को किसी भी कहानी में प्रयोग कर सकते हैं। आइए, हम आपकी सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक की कहानियों के साथ प्रयास करें।
बहुत अच्छा! कहानियों को समझने और याद रखने का यह एक बढ़िया उपाय है। आप अपनी पुस्तक में विक्रमादित्य और पृथ्वीराज चौहान जैसी और भी कहानियों पर काम कर सकते हैं।
2. पात्र
एक नाट्य आलेख में कई चरित्र होते हैं जो कहानी को संप्रेषित करने में सहायता करते हैं। किंतु जब आप लिख रहे होते हैं तो आपके पास इस बात पर पूरा नियंत्रण होता है कि आपको कितने चरित्र चाहिए और कहानी में प्रत्येक चरित्र क्या करता है। एक लेखक के रूप में आपको जब भी आप चाहें, किसी भी चरित्र को सम्मिलित करने और किसी भी चरित्र को हटाने का अधिकार है। किंतु कोई भी अधिकार उत्तरदायित्व के साथ आता है। इसलिए उत्तरदायित्व का भान रखते हुए लिखिए।अपने मुख्य पात्रों को अच्छी तरह जानें
वे कहानी में क्या चाहते हैं? एक व्यक्ति के रूप में उनके सामने क्या मुद्दे या समस्याएँ हैं? (कहानी के द्वंद्व से भ्रमित न हों)उदाहरण- हर्ष अपने घर के पीछे से आने वाली ध्वनि का रहस्य सुलझाना चाहता है। उसकी समस्या यह है कि उसे अंधेरे से डर लगता है।
- नाम, उम्र, पृष्ठभूमि की जानकारी।
- व्यक्तिगत समस्या और विशेष विशेषताएँ, यदि कोई हो।
कहानी के माध्यम से पात्रों में आए बदलावों को समझें
प्रत्येक अनुभव और परिस्थिति जिसका हम सामना करते हैं, वह हमारे भीतर परिवर्तन लाती है। यह हमारे भीतर शक्ति पैदा कर सकती है या हमें किसी व्यक्ति के बारे में नया दृष्टिकोण दे सकती है या फिर किसी गतिविधि के बारे में हमारा विचार बदल सकती है। जैसा कि हमारे साथ होता है, वैसा ही चरित्रों के साथ भी हो सकता है।उदाहरण - हर्ष रहस्य को सुलझाने का प्रयास करता है, परंतु अंधेरे के बाद बाहर जाने से बचने के कारण वह असफल हो जाता है। एक दिन उसकी अज्जी उससे मिलने आती है और उसे बताती है कि कैसे उसे बस में चढ़ने से डर लगता था, किंतु उसने स्वयं पर वश पाने के लिए काम किया। इससे हर्ष को अंधेरे के डर पर वश पाने की प्रेरणा मिलती है। इसलिए इस बिंदु से आगे की कहानी में हर्ष अंधेरे के बाद पीछे जाने पर अलग तरह से प्रतिक्रिया करेगा। इसे चरित्र में परिवर्तन (करेक्टर आर्क) के रूप में जाना जाता है।
सहायक पात्र
यद्यपि कहानी उनके बारे में नहीं है, किंतु ये चरित्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। मुख्य चरित्र इन पात्रों के बिना कुछ खास नहीं कर पाएँगे। इसलिए कहानी में सहायता करने वाले नए पात्रों को जोड़ने में संकोच न करें। किंतु उत्तरदायित्व निभाना याद रखें। प्रत्येक नए चरित्र का कथानक के लक्ष्य के प्रति एक अर्थ एवं उद्देश्य होना चाहिए।
उदाहरण - अज्जी, जो हर्ष को उसके डर पर काबू पाने में सहायता करती है, एक अच्छा सहायक चरित्र है। एक वैज्ञानिक जो ध्वनि और हवा के बारे में जानकारी देता है, एक अच्छा सहायक चरित्र है। लेकिन एक दूधवाला जो घर में प्रतिदिन आता है, वास्तविक रहस्य में उसका योगदान नहीं है, नाट्य आलेख में उसका होना बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है।
- विचार एवं व्यवहार के संदर्भ में पात्रों पर ध्यान दें।
- कहानी आरंभ होने पर वे कैसे हैं?
- वे कहानी के मध्य में कैसे हैं?
- वे कहानी के अंत में कैसे हैं?
- मुख्य चरित्र या लक्ष्य में कोई अंतर लाना?
- किसी स्थिति का संदर्भ प्रदान करना।
- यदि ऐसा नहीं होता है तो उन्हें हटाने पर विचार करें।
3. दृश्य
आपने देखा होगा कि पुस्तक को अध्यायों में बाँटा जाता है। इसी तरह, नाटक या फिल्म के हिस्सों को दृश्यों में बाँटा जाता है। इसकी क्या आवश्यकता है? सब कुछ लगातार क्यों नहीं चल सकता?दृश्य वे विभाजन हैं जो समय, स्थान या क्रिया में परिवर्तन को चिह्नित करते हैं
आपको यह चुनने का अधिकार है कि आप कितने दृश्य चाहते हैं। किंतु याद रखें, अधिकारों के साथ, उत्तरदायित्व भी आते हैं! अपने प्रत्येक दृश्य के लिए इन बिंदुओं की जाँच करें। यदि यह इन बिंदुओं को संतुष्ट नहीं करता है तो आपको दृश्यों के विभाजन पर पुनः कार्य करना होगा।दृश्य का उद्देश्य
क्या यह कहानी को आगे बढ़ाता है या किसी नए पात्र का परिचय देता है या फिर किसी स्थिति पर स्पष्टता लाता है?वैध दृश्य परिवर्तन
दृश्य परिवर्तन अचानक नहीं होना चाहिए, यह दर्शकों के विचार प्रवाह के अनुरूप होना चाहिए। प्रत्येक दृश्य का जुड़ाव तार्किक रूप से पिछले और अगले दृश्य से होना चाहिए।प्रत्येक दृश्य के लिए आरंभ-मध्य-अंत
प्रारंभ में परिचय, मध्य में मूल उद्देश्य को प्राप्त करना तथा अंत में अगले दृश्य की ओर ले जाने के साथ समापन।पहला दृश्य और अंतिम दृश्य
पहले दृश्य में ही दर्शकों का ध्यान आकर्षित करें ताकि रोचकता अंत तक बनी रहे। अंत प्रभावशाली हो, सभी प्रश्नों को सुलझाएँ और कोई उत्तर न छोड़ें।आइए, घेरा बनाएँ
नाट्य आलेख लेखन- आपने जो नाटक या फिल्म देखी, उसमें कौन-सा पात्र आपका मनपसंद है? उसके चरित्र में परिवर्तन (करेक्टर आर्क) और दोष पहचानें।
- चूँकि आपको अपना नाट्य आलेख लिखना है तो यह किस शैली और विषय पर होगा?
- क्या कोई ऐसी फिल्म या नाटक है जिसके बारे में आपको लगा कि उसका कथानक बिल्कुल भी अच्छा नहीं था और क्यों?

बद्धि के खेल
अपनी स्वयं की पटकथा लिखें !
हाँ, अब तक आपने जो कुछ भी सीखा है, उसे एक साथ रखकर आप निश्चित रूप से स्वयं का नाट्य आलेख लिखने में सक्षम हैं। इस प्रक्रिया में आपकी सहायता के लिए यहाँ एक त्वरित चरणबद्ध जाँच-प्रक्रिया की सूची दी गई है-- मैं पटकथा लिखूँगा _स्वयं_ एक समूह में (अपने 3-4 मित्रों का समूह तैयार कर लें)
- एक ऐसी अवधारणा या विचार चुनें जो आपको प्रेरित करता हो (यदि वह आपकी रुचि का नहीं है तो वह आपके पाठकों को भी रुचिकर नहीं लगेगा)।
या
- दाईं ओर दिए गए चित्रों में से एक चुनें, उसका अवलोकन करें और एक कहानी बनाएँ
- एक समग्र रचना जिसमें प्रारंभ मध्य अंत की संरचना हो और द्वंद को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हुए तैयार करें।
- इसे नायक-लक्ष्य बाधा समाधान की संरचना में रखें। पात्र बनाएँ, दृश्यों में विभाजित करें और संवाद लिखें।

मुख्य बातें – जीवन के लिए सीख
मंच के पीछे जादू करना
रंगमंच केवल वेशभूषा धारण कर मंच पर अभिनय करने वाले अभिनेताओं के बारे में नहीं है। यह एक सामूहिक प्रयास है। एक अभिनेता के प्रत्येक सफल प्रदर्शन के लिए, इसे सफल बनाने के लिए मंच के पीछे कई लोग कार्य करते हैं। इससे आपसी सम्मान और कार्य के लिए मूल्य की भावना का निर्माण होता है। मंच के पीछे का कार्य हमेशा मौन में होता है। सारा काम तब होता है जब नाटक चल रहा होता है। इसलिए समन्वय से लेकर समस्या निवारण तक, यह सब मौन में किया जाता है (आप संभवतः यहाँ अपने मूकाभिनय कौशल का उपयोग कर सकते हैं!) बधाई संदेश भी मौन होते हैं। जबकि अधिकांश तालियाँ अभिनेताओं द्वारा ली जाती हैं, मंच के पीछे का दल तालियों और बधाई को चुपचाप स्वीकार करता है।नेपथ्य कार्य करने की सबसे सुंदर अनुभूति 'जादू को सच करने' की अनुभूति है। एक सफल प्रदर्शन के बाद, आपको पता चलता है कि उस सफलता में आपके समय और प्रयास का बहुत बड़ा योगदान रहा है।
| अध्याय 3 — आइए, डिजाइन करें— मंच तकनीक-2 | ||||
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| दक्षताएँ | ||||
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सी.-3.1 — विभिन्न सामग्रियों का उपयोग करते समय सावधानी और बुनियादी मंच शिष्टाचार का प्रदर्शन करना तथा नाटक के उपकरण एवं तकनीक का प्रयोग करते समय सूचित विकल्प बनाना। सी.-3.2 — बाहरी दर्शकों के लिए नाटक में योजना चरण से लेकर अंतिम प्रस्तुति तक विचारों एवं तकनीकों को परिष्कृत करना है और पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करना। |
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| सी.जी. | सी. | सीखने के प्रतिफल | अध्यापक | स्वयं |
| 3 | 3.1 | क्या नेपथ्य के कार्य में सम्मिलित अनुशासन और कठिन परिश्रम को समझने में सक्षम हैं। | ||
| 3 | 3.1 | संरचना के आधार पर कहानियों को वर्गीकृत कर सकता या सकती हैं और इसे अपने नाट्य आलेख में उपयोग कर सकता या सकती है। | ||
| 3 | 3.2 | रंगमंच के कौशल को जीवन में प्रतिदिन के अनुशासन को उत्तम बनाने से जोड़ सकता या सकती है। | ||
| 3 | 3.2 | ऐतिहासिक नेपथ्य कार्य की तुलना वर्तमान कार्य से करता या करती है। | ||
| 3 | 3.2 | दृश्यों की योजना बना सकता या सकती है और स्वतंत्र रूप से नाट्य-आलेख लिखने का प्रयास कर सकता या सकती है। | ||