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राग और ताल
पञ्चमो धैवतश्चैव सप्तमोऽथ निषादवान् ॥
नाट्यशास्त्र, 28/23
नाट्यशास्त्र के समय से प्रचलित सात स्वर इस प्रकार हैं-षडज्, ऋषभ, गंधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद।
प्रत्येक वर्ष हम भारतीय शास्त्रीय संगीत की दोनों शैलियों हिंदुस्तानी और कर्नाटक के बारे में अपनी समझ बढ़ाते हैं। इस वर्ष हम और अधिक बंदिशों, रागों और तालों का पता लगाएँगे। यह देखें कि आप दो शैलियों के शास्त्रीय संगीत के बीच कैसे संबंध स्थापित कर सकते हैं और शास्त्रीय संगीत एवं अन्य संगीत शैलियों, जिन्हें आप सुनते हैं बीच कैसे संबंध बना सकते हैं।
क्या आप जानते हैं?
भारतीय शास्त्रीय संगीत के स्वरों की उत्पत्ति प्रारंभ में सामवेद की अनुष्ठानिक ऋचाओं (गान) से हुई थी। प्रारंभ में वेदों का उच्चारण तीन स्वरों में किया जाता था उनके नाम हैं, उदात्त (साधारण या माध्यम स्वर), अनुदात्त (कम तीव्रता वाला नीचा स्वर) और स्वरित (उठते और ऊँचे स्वर)। बाद में यही तीन स्वर धीरे-धीरे विकसित होकर सात स्वरों (सप्त स्वर) में परिवर्तित हो गए, जो आगे चलकर संगीत की आधारशिला बनें, जिसे हम संगीत में प्रयोग करते हैं।कर्नाटक संगीत
सप्त ताल अलंकार
स्वर क्षमता को विकसित करने और तालों की समझ को बढ़ाने के लिए स्वर अभ्यास का एक लोकप्रिय संग्रह है- सप्त ताल अलंकार। ध्रुव तालकर्नाटक तालें
सांनिधप धनि कर्नाटक संगीत में सात मुख्य तालें हैं। ये हैं-- ध्रुव
- मत्त
- रूपक
- झम्प
- त्रिपुट
- अठ
- एक
- अणुद्रुत (खाली) - इसे (U) संकेत से लिखा जाता है।
- द्रुत (ताली और हाथ हिलाना)- इसे (O) संकेत से लिखा जाता है।
- लघु (ताली अथवा उंगली की गिनती)- इसे (1) संकेत से लिखा जाता है।
नोट - एक 'लघु' में मात्राओं की संख्या अलग-अलग हो सकती है जिसे जाति कहा जाता है। इस स्तर पर, प्रत्येक लघु में चार मात्राएँ हैं। इस पाठ में, हम पहले तीन अलंकार गाएँगे और ये ताल रखेंगे -

आप देख सकते हैं कि ये सभी अलंकार कुछ विशेष ढाँचों (पैटर्न) पर आधारित होते हैं। क्या आप गायन के अभ्यास रूप में अपने स्वर या सरगम के पैटर्न बनाने का प्रयास कर सकते हैं?
अब हम एक स्वरजाति गाते हैं।इस रचना को गाने से पहले, आरोह और अवरोह गाएँ। रचना को गाते समय ताल में रहने का प्रयास करें। आदिताल 8 मात्राओं की आवृत्ति वाली लय संरचना (ताल) है।
क्या आप जानते हैं?
स्वरजाति कर्नाटक संगीत की अति प्राचीन विधा है जो स्वर और कभी-कभी शब्दों से मिलकर बनी होती है। सामान्यतः इसके तीन भाग होते हैं- पल्लवी (स्थायी अथवा कोरस), अनुपल्लवी (पल्लवी के बाद छोटा-सा भाग) तथा एक अथवा ज्यादा चरणं (छंद)।रा रा वेणु
राग - बिलाहारी
ताल - आदि
भाषा - तेलुगु
रचनाकार- पटनम सुब्रमण्यम अय्यर
आरोह - सा रे2 ग 3प ध2 सां
अवरोह- सां नि3 ध 2प म1 ग3 रे2 सा
हिंदुस्तानी संगीत
ताल
यहाँ हिंदुस्तानी संगीत के कुछ आधारभूत तालों के बारे जानकारी दी जा रही है। इनकी ताली/गिनती सीखिए और शिक्षक की सहायता से इन्हें गिनना और बोलों को बोलने का अभ्यास कीजिए।
ताल-झपताल - इस ताल में 10 मात्राएँ होती हैं।
ताल-रूपक - इस ताल में 7 मात्राएँ होती हैं।
ताल-एकताल - इस ताल में 12 मात्राएँ होती हैं।
राग
क्या आप जानते हैं कि हिंदुस्तानी संगीत पद्धति में 12 स्वर हैं।
सात सुर - सा रे ग म प ध नि
चार कोमल - रे ग ध नि (नीचे की ओर रेखांकित स्वर कोमल स्वर दर्शाते हैं)
एक तीव्र – म (तीव्र म को इस तरह दर्शाते हैं)
समय चक्र (हिंदुस्तानी रागों का समय चक्र)
शास्त्रीय संगीत हमारी धरोहर, हमारा खजाना है, जो एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी में हस्तांतरित होता है। संगीत में राग विभिन्न भावनाओं को व्यक्त करते हैं तथा मनोदशा बनाते हैं। हिंदुस्तानी संगीत में अलग-अलग राग को दिन के अलग-अलग समय में गाया जाता है। स्वरों की एक विशेष संरचना यानी राग दिन के एक विशेष समय में प्रभावशाली होते हैं। उदाहरण के लिए, राग भैरव प्रातः समय का राग है, जबकि राग यमन साधारणतया शाम में गाया जाता है।
राग भैरवी
थाट - भैरवी
आरोह - सा, रे, ग, म, प, ध नि, सां
अवरोह - सां नि ध प म ग रे सा
पकड़ - म ग सा रे सा थ नि सा (ध और नि मंद्र सप्तक के हैं)
वर्जित स्वर - कोई स्वर नहीं
जाति - संपूर्ण-संपूर्ण
कोमल स्वर - रे ग ध नि
वादी स्वर - मध्यम (म)
संवादी स्वर - षडज (सा)
गायन समय - प्रातः काल
राग भैरवी - छोटा ख्याल (तीनताल)
स्थायी - कैसी ये भलाई रे कन्हाई पनिया भरत मोरी गगरी गिराई करा के लराई..
अन्तरा - सनद कहे ऐसो ढीट भयो कन्हाई का करू माने नाही मानत कन्हाई करत लराई
राग भैरवी - तीनताल
राग भैरवी - तराना (तीनताल)
स्थायी - दिर दिर तन देरे न तन दीम तन
तन देरे तन नन त दीम त देरे न
अन्तरा - अलली अलली तोम तन देरे न त दीम त देरे न त दीम त देरे न
धा किट धुम किट ता का धे तट
उस्ताद जाकिर हुसैन (1951-2024)
जाकिर हुसैन भारत के महान तबला वादक थे। वह जाने-माने तबला वादक उस्ताद अल्ला रक्खा खाँ के पुत्र थे। जाकिर हुसैन ने बचपन से ही तबला बजाना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने पिता से उच्च कोटि की तालीम प्राप्त की। उनके पिता कहते थे, "आप एक संगीतमय वातावरण में बड़े हो रहे हैं और आपको कुछ और करने की जरूरत नहीं है।" उन्होंने सात वर्ष की अवस्था में ही समारोहों में तबला वादन प्रारंभ कर दिया था तथा मात्र 12 वर्ष से यात्राएँ करना प्रारंभ कर दिया था।
उन्होंने पंडित रविशंकर जैसे महान हिंदुस्तानी संगीतकारों के साथ संगत करने से लेकर एकल तबला वादन तक, विभिन्न प्रारूपों में संगीत बजाया। वह अग्रणी विश्व संगीत बैंड 'शक्ति' के संस्थापक सदस्य थे। उन्होंने कई दशकों तक अपने बैंड के साथ दौरा किया। उन्होंने दुनियाभर के कई संगीतकारों के साथ समन्वय किया और संगीत के सबसे प्रतिष्ठित स्थानों पर प्रदर्शन किया। उन्हें अनगिनत पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें भारत सरकार से पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और तीन ग्रेमी अवार्ड भी सम्मिलित हैं।
यदि आपके विद्यालय में तबला के शिक्षक हैं तो उनसे कुछ साधारण लय सीखिए।(क) तीन ताल में कितने विभाग होते हैं?
- 3
- 2
- 6
- 4
(ख) रूपक ताल में कितने विभाग होते हैं?
- 6
- 2
- 3
- 4
(ग) रूपक के बोल हैं....
- ती ती नाधीधी ना
- ती ती नाधी नाधी ना
- नाधी नाधी ना
- ना तिं तिं
- अंगों के आधार पर कर्नाटक तालों को पहचानें।
(क) 1011
(ख) 101
(ग) 01
- रागों के नाम व्यवस्थित करें-
(क) र भै व
(ख) न म य
(ग) मा ख ज
(घ) ह न मो
(ङ) री ह ला बि
(च) शं र रा भ न म् क
अध्याय 7 — राग और ताल
| सी.जी. | सी. | सीखने के प्रतिफल | अध्यापक | स्वयं |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 1.1 | संगीत के बुनियादी शब्दों, जैसे — नाद, ध्वनि की समझ। | ||
| 1 | 1.1 | क्या हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत के स्वरों से परिचित हैं? | ||
| 1 | 1.1 | क्या राग के सही स्वरों और सही ताल का उपयोग करके भारतीय शास्त्रीय संगीत की चुनिंदा रचना गाने में सक्षम है? | ||
| 1 | 1.1 | क्या कुछ कर्नाटक और हिंदुस्तानी तालों की समझ है। |