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लोक संगीत

हमारे देश का संगीत अविश्वसनीय रूप से विविधतापूर्ण है, जो प्रत्येक राज्य की अनूठी सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है एवं वहाँ के लोगों की रचनात्मकता से आकार लेता है। यह विविधता दृश्य कला, नृत्य एवं रंगमंच जैसे अन्य कला रूपों में भी दिखाई देती है।

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आपने हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित संगीत सुना होगा। दिए गए स्तंभ में बस सही (√) या गलत (x) का चिह्न लगाइए।

1. प्रत्येक गाने की धुन प्रायः एक जैसी होती है। ( )

2. प्रत्येक रचना की लयबद्ध संरचना भिन्न-भिन्न होती है। ( )

3. गीतों का कोई विषय नहीं होता है। ( )

4. गीत हमें क्षेत्रीय जीवन तथा प्रकृति के बारे में बताते हैं। ( )

लोक का मतलब है- लोग। इसलिए लोक संगीत हमारे देश के लोगों का एवं उनके द्वारा गाया जाने वाला संगीत है। लोक संगीत विभिन्न भावों या रसों को व्यक्त करता है और आपको गीतों के माध्यम से त्योहारों, अनुष्ठानों, परंपराओं, रोजगारों, आस्थाओं और विश्वासों आदि के बारे में बताता है।

लोकगीत एवं समुदाय

आइए, नीचे दिए गए इस गीत को सुनें। यह एक असमिया गीत है और इसकी विधा बिहू है। विधा क्या है? हमने पिछली कक्षाओं में इस पर चर्चा की है। एक विधा संगीत को गायन अथवा सांगितीक वाद्ययंत्र बजाने की शैली को संदर्भित करती है।img

गीत गाएँ, परंतु सबसे पहले पढ़ने का प्रयास कीजिए। सभी शब्दों को ठीक से गाएँ। गाते समय ताली बजाएँ, इससे आपको गीत की लय समझने में मदद मिलेगी। आप सभी खड़े होकर बिहू शैली में नृत्य कर सकते हैं।

गाना - बिहू बिहू लगिसे गात

भूपेन हज़ारिका द्वारा असमिया गीत

बिहू बिहू लागे गत बिहू मारो अहाना

उरु उरु कोरिसे मोन एपाक नासो अहाना

सिनु सिनु लागे तोमर नाम की तोमर कुआना

बिहू मारो अहाना एपाक नासो अहाना

नाम की तोमर कुआना जान

ओ... नसानी ये नासी जा

बिहू गीत एपाकी गा बिहू एपाकी गा

चियुरी म्हारे पेपाकी गतेलो

अहतोर तलाटे रॉय उखल मखल लोहलो

नसनिये नासी जाय बिहू गीत एपाकी गाय

ओ... बोहागरे आखोटे नासे

कोरेकोये बिजुरी उलाहेरे

मेघोरे आरे आरे

ओ... दाओरे जेन ढोल बोजाये ताले ताले

बोटाजोके बिहुरे गीत गारे

ओहोल पारे पारे

हुर्र रुनझुन मोइना गुन गुन मोइना

गुरी गुरी जा नासना

बिहू नर्तक

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गीत का भाव
यह बिहू गीत, एक लोकप्रिय त्योहार बोहाग बिहू के भाव को दर्शाता है। गीत के बोल प्रसन्नता, उत्सव, प्रकृति, लय एवं परंपरा के माध्यम से गहरा जुड़ाव व्यक्त करते हैं। बिहू तथा इससे जुड़े उत्सवों के बारे में आप अधिक जानकारी के लिए अपनी कक्षा 6 की हिंदी पाठ्यपुस्तक मल्हार देख सकते हैं।
गतिविधि 8.1
जैसे आपने पहले असमिया लोकगीत सीखा, वैसे ही अलग-अलग क्षेत्रों के लोग विभिन्न लोकगीत गाते हैं। क्या आप अपने क्षेत्र का कोई लोकगीत जानते हैं?
  • अपने क्षेत्र का कोई लोकगीत या उत्सव का गीत सीखिए।
  • गीत की पृष्ठभूमि के बारे में सोचिए तथा यह समझिए कि यह गीत समुदाय में किस उद्देश्य से गाया जाता है।
  • इस क्षेत्रीय गीत के साथ कौन-कौन से सांगितिक वाद्ययंत्र प्रयोग किए जाते हैं। इन्हें नाम और ध्वनि के साथ पहचानिए।
  • इस गीत को कक्षा में गाइए एवं विद्यालय की सभा में प्रस्तुत कीजिए।
  • गीत के विशेष तत्वों, इसे गाने वाले लोगों एवं समुदायों की विशेषताओं पर एक प्रस्तुति भी तैयार कीजिए।
  • इस गीत को मोबाइल फोन से रिकॉर्ड कीजिए एवं अपने दोस्तों के साथ साझा कीजिए।
  • भारत के किसी अन्य क्षेत्र का ऐसा ही कोई गीत सुनिए।
  • गीत के साथ उपयुक्त शारीरिक हाव-भाव (movements) का प्रयोग कीजिए।
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शिक्षकों के लिए निर्देश- ऐसी परियोजना को अपने समूह के विद्यालयों के साथ साझा कीजिए। बस्तारहित दिनों में विद्यार्थियों के साथ चर्चा एवं प्रस्तुति दोनों कराइए। विद्यार्थियों को भूपेन ह‌ज़ारिका के अन्य गीत सुनने के लिए प्रेरित कीजिए, जिन्हें उनके संगीत के लिए 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया है।

विशिष्ट स्वर

  • अपनी कक्षा में अपने दोस्तों के स्वर को ध्यान से सुनिए, क्या ये सभी स्वर विशिष्ट हैं या फिर कुछ स्वर समान हैं? शायद नहीं। आप कई तरह की स्वर सुनेंगे-तीखे और स्पष्ट, गूँजदार और गहरे, कोमल और मीठे। हमारे चेहरों की तरह ही प्रत्येक स्वर भी विशिष्ट तथा भिन्न होता है। जिस प्रकार दो लोग बिल्कुल एक जैसे नहीं दिखते, उसी तरह दो स्वर बिल्कुल एक जैसे नहीं होते।
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  • क्या आपने कभी यह सोचा है कि पुरुष एवं महिला स्वर में क्या अंतर होता है? हम प्रायः मानते हैं कि पुरुषों का स्वर भारी एवं महिला का स्वर ऊँचा होता है। जबकि ऐसा सदैव नहीं होता। जब आप अपने सहपाठियों के स्वर सुनेंगे तो आपको अलग-अलग तरह के स्वरों का अच्छा अनुभव मिलेगा।
गतिविधि 8.2 विशिष्ट गायक
यहाँ कुछ पुरुष एवं महिला गायकों के उदाहरण दिए गए हैं, जिनके स्वर आम या परंपरागत नहीं हैं। कई प्रसिद्ध कलाकारों के स्वर अलग और अनोखे होते हैं- यही बात उन्हें अद्वितीय तथा विशेष बनाती है। इनके स्वर ऑनलाइन सुनिए- img

रूढ़िवादिता को तोड़ना

अब आइए, एक अन्य प्रकार का गीत, लोरी गाएँ।

लोरी एक ऐसा गीत होता है जिसे बच्चों को सुलाने के लिए गाया जाता है। सामान्यतः यह माँ द्वारा गाया जाता है, परंतु क्या आप परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में सोच सकते हैं जो एक बच्चे को लोरी सुना सकते हैं?

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गतिविधि 8.3
  • अपने परिवार के सदस्यों से कोई एक लोरी सीखिए।
  • अपने माता-पिता या दादा-दादी या फिर नाना-नानी से पूछिए कि जब आप छोटे थे तो उन्हें कौन-सी लोरी पसंद थी।
  • लोरी के बोल और उसकी विशेष धुन को नोट कीजिए।
  • फिल्मों की एक लोरी है जिसे प्रसिद्ध गायिका गीता दत्त ने गाया था। इस गीत के बोल हैं- नन्ही कली सोने चली, हवा धीरे आना, नींद भरे पंख लिए झूला झुला जाना। इस गीत को ऑनलाइन सुनिए।
गतिविधि 8.4
  • चलिए अब कव्वाली सुनते हैं। कव्वाली एक भक्ति संगीत की विधा है जो सूफी इस्लामी परंपरा से संबंधित है। पारंपरिक रूप से कव्वाली को पुरुष संगीतकारों के समूह द्वारा गाया जाता है, परंतु अब कई महिला संगीतकार भी कव्वाली प्रस्तुत कर रही हैं, जिससे यह समझ आता है कि संगीत की विधाएँ समय के साथ और विकसित और अनुकूलित होती हैं।
  • कुछ प्रसिद्ध महिला कव्वाल गायिकाओं में रोशनआरा बेगम का नाम प्रमुख है, जिनका जन्म कोलकाता में हुआ था।
  • किसी महिला कव्वाल गायिका की प्रस्तुति ऑनलाइन खोजकर सुनिए।
  • कव्वाली सीखिए। किसी रिकॉर्डिंग से या अपने आस-पास के किसी कलाकार से सीखिए।
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संगीत में महिलाएँ

भारत की कई महिलाओं ने अपने काव्य और रचनाओं के माध्यम से संगीत में अमिट छाप छोड़ी है।

मीराबाई

पन्द्रहवीं शताब्दी में मीराबाई एक कवयित्री और श्रीकृष्ण की भक्त थीं, वह राजस्थान के एक राजघराने में जन्मीं थीं और मेवाड़ के राजकुमार भोजराज से उनका विवाह हुआ था। छोटी आयु से ही वह भगवान श्रीकृष्ण की भक्त थीं और बाद में उन्होंने द्वारका तथा वृंदावन जैसे श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों की यात्रा की। वह एक प्रसिद्ध कवयित्री थीं और उन्होंने श्रीकृष्ण की स्तुति में सैकड़ों भजन (भक्ति गीत) रचे। आज भी उन्हें भक्ति आंदोलन की महान संत के रूप में याद किया जाता है और उनके भजन शास्त्रीय और भक्ति, दोनों ही शैलियों में गाए जाते हैं। आइए, एक प्रसिद्ध मीरा भजन सीखते हैं- img

पायो जी मैंने राम रत्न धन पायो (2)

वस्तु अमोलक दी मेरे सद्‌गुरु, कृपा कर अपनायो

(पायोजी)

जनम

जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवयो

(पायोजी)

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरष-हरष जस गायो

(पायोजी)

गीत का भाव
इस गीत में मीरा अपने प्रभु श्रीकृष्ण के प्रति अपनी भक्ति को व्यक्त करती हैं। वह कहती हैं कि उन्होंने सबसे अनमोल वस्तु गुरु कृपा को पा लिया है। वह यह भी कहती हैं कि भले ही उन्होंने सांसारिक वस्तुएँ खो दी हों, यह भक्ति उन्हें जन्म-जन्मांतर का फल दे चुकी है। अंत में, वह कहती हैं कि श्रीकृष्ण उनके प्रभु हैं और वह आनंद से उनका गुणगान करती रहेंगी।
गतिविधि 8.5
आइए, लालदेढ़ को जानिए।

लल्लेश्वरी, जिन्हें सामान्यतः 'लालदेड़' कहा जाता है, कश्मीर की एक रहस्यवादी कवयित्री थीं। उन्होंने कई वाख (छोटी कविताएँ) रचीं, जो दार्शनिक अर्थों में भरपूर हैं।

लालदेढ़ के बारे में ऑनलाइन या अपने पुस्तकालय से अधिक जानकारी प्राप्त कीजिए।
  • वह किस शताब्दी से थीं?
  • उनकी कविताओं के विषय क्या थे?
  • उन्होंने संगीत और काव्य में क्या योगदान दिया?
  • उनकी किसी एक कविता का हिंदी अनुवाद पढ़िए और उस पर अपने विचार साझा कीजिए।
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संगीत और सामाजिक सुधार

संगीत का उपयोग किसी दृष्टिकोण को व्यक्त करने और समाज में परिवर्तन लाने के लिए किया जा सकता है। कई संगीतकारों और कवियों ने सामाजिक परिस्थितियों का विरोध करने और समानता एवं एकता जैसे संदेशों को फैलाने के लिए गीतों का उपयोग किया है।

अन्नमाचार्य

img अन्नमाचार्य पन्द्रहवीं शताब्दी के एक तेलुगू संगीतकार, रचनाकार और संत थे। कहा जाता है कि उन्होंने 32,000 संकीर्तन (भक्ति गीत) की रचना की, जो तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर की स्तुति में लिखे गए थे। वह अछूतों के विरुद्ध सामाजिक भेदभाव का विरोध करने वाले पहले लोगों में से एक माने जाते हैं। उनके गीत भाईचारे और नैतिकता का संदेश देते हैं। 'ब्रहमम ओकट' उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है।

गीत - ब्रहमम ओकट

तंदनन अही तंदनन पुरे
तंदनन अही तंदनन पुरे
तंदनन भला तंदनन

ब्रहमम ओकट, परब्रह्म ओकट पर
ब्रहमम ओकट, परब्रह्म ओकट ...
कंदुवगु हीनाधिकमुलिंदु लेवु

अंदरिकी श्री हरे अंतरात्मा
इंदुलो जन्तुकुलमिंत नोकेटे
अंदरिकी श्री हरे अंतरात्मा
हरे अंतरात्मा,

श्री हरे अंतरात्मा...
कडगी एनुगु मीदा कायु एंदोकाटे
पुदमि शुनकमु पीडा पोलायु एंदोकाटे
कडु पुण्यालु, पापा कर्मुलनु सरिगावा

जडियु श्री वेंकटेश्वरु नाममोकाटे
वेंकटेश्वरु नाममु ओकाटे...

गीत का भाव
यह गीत बताता है कि ईश्वर एक ही है। समाज में कोई ऊँच-नीच या भेदभाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि सभी प्राणियों में ईश्वर का वास होता है।

चरणकवि मुकुंद दास

उन्नीसवीं या बीसवीं शताब्दी के बंगाल में चरणकवि मुकुंद दास को जोगेश्वर दत्त के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने गाँवों में गीतों और नाटकों के माध्यम से स्वदेशी आंदोलन के उद्देश्यों का प्रचार किया। यहाँ उनके द्वारा लिखा एक गीत दिया गया है-img

गीत - बान एशेचे

बान एशेचे मौरा, गांगे खुलते
हबे नाओ तोमरा एकोनो घुमाओ

कौतो जुग गैछे केटे, देखेछो कतो
शप्नो, एबार बादर बोले धाओ बैठा
जीबौन मौरोन पावन, दौमका हावार काल
काल गीचे फागुन, बोइचे पाल खाटाओ

कांदते हौबे शारा जीबौन, जुग युगांतर
तपश्शते एशेचेई ई लौगन पारेर
माझी हाल धोरेचे, मिशे पौरर मुख ताकाओ।

गीत का भाव
"लहरें उठ चुकी हैं, नदी में बाढ़ आ चुकी है"- यह जीवन के प्रवाह का प्रतीक है। गीत हमें जागने और कुछ करने की प्रेरणा देता है "सो मत जाओ उठो !" बहुत समय पहले ही बीत चुका है। अगर तुमने अब भी अपने जीवन की नाव की पतवार स्वयं नहीं संभाली तो सभी अवसर विलुप्त हो जाएँगे और फिर तुम्हारे पास अपनी निष्क्रियता के लिए केवल पछतावा रह जाएगा।
गतिविधि 8.6 - परिवर्तन के लिए आवाज
तुम समाज में परिवर्तन लाने के लिए संगीत और कविता का उपयोग कैसे कर सकते हो?

तुम अपने विद्यालय या समुदाय में क्या परिवर्तन लाना चाहते हो?

एक आठ पंक्तियों की कविता या रैप लिखिए, जिसमें वर्णन हो की यह परिवर्तन क्यों महत्वपूर्ण है? और दूसरों को भी प्रेरित कीजिए।img

वाद्ययंत्र और क्षेत्र

"देशे देशे जनानां यद्रुच्या हृदयरञ्जकम्। गीतं च वादनं नृत्तं तद्देशीत्यभिधीयते।" - संगीत रत्नाकर
अर्थ
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों की विभिन्न रुचियाँ और पसंद देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं। यह विविधता कई प्रकार की कलाओं को प्रेरित करती है, जैसे- संगीत, सांगीतिक वाद्ययंत्र और नृत्य । ये कलाएँ स्थानीय परंपराओं, विश्वासों और जीवनशैली के साथ जुड़ी होती हैं और एक गहरी अभिव्यक्ति प्रदान करती हैं।
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न वाद्ययंत्र हैं जो उस क्षेत्र की विशेषता बताते हैं। img

नोट - कुछ वाद्ययंत्र एक से अधिक राज्यों में भी बजाए जाते हैं और कभी-कभी एक ही वाद्ययंत्र को विभिन्न नामों से जाना जाता है।

गतिविधि 8.7 - वाद्ययंत्रों को श्रेणियों में बाँटें
1. कक्षा 6 में वाद्ययंत्रों की श्रेणियाँ बताई गई थीं। इन वाद्ययंत्रों के चित्र ऑनलाइन खोजिए। नीचे दिए गए वाद्ययंत्र किस श्रेणी में आते हैं-
वाद्ययंत्र श्रेणी
मोहूरी
नूट
दामामातू
चिमटा
तरपो
गतिविधि 8.8
भारत का एक बड़ा मानचित्र प्रिंट कीजिए या लाइए। वाद्ययंत्र के चित्रों को देश के उन क्षेत्रों पर चिपकाएँ, जिनसे वे संबंधित हैं।img
गतिविधि 8.9 -अपने संगीतकार को जानिए
अपने क्षेत्र में किसी संगीतज्ञ को खोजिए और उसका साक्षात्कार लीजिए। नीचे उदाहरण स्वरूप कुछ प्रश्न दिए गए हैं, आप चाहें तो इनमें अपने प्रश्न जोड़ सकते हैं या इनमें परिवर्तन भी कर सकते हैं-
  1. आपका नाम क्या है?
  2. आपके संगीत की शैली क्या कहलाती है और यह कहाँ की है?
  3. यदि आप कोई वाद्ययंत्र बजाते हैं तो क्या आप अपने वाद्ययंत्र के बारे में थोड़ा बता सकते हैं? यह कैसे बनाया जाता है और इसकी ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है?
  4. आपने संगीत सीखना कब शुरू किया और किससे सीखा?
  5. आपने जब सीखना प्रारंभ किया तब आप कितना अभ्यास करते थे और अब कितना करते हैं?
  6. आपकी संगीत शैली सामान्यतः कैसे प्रस्तुत की जाती है?
  7. आपकी सबसे अविस्मरणीय प्रस्तुतियों में से कौन-सी सबसे अविस्मरणीय रही और क्यों?
  8. आप युवा संगीतज्ञों को क्या परामर्श देना चाहेंगे?
  9. यदि कोई इस संगीत शैली को सीखना चाहे तो वह कैसे सीख सकता है?
  10. क्या आप कुछ और भी साझा करना चाहेंगे?
अपने क्षेत्र के संगीतज्ञों का एक कोलाज बनाइए और उसे अपने सूचना-पट पर लगाइए। img

अध्याय 8 — लोक संगीत

सी.जी. सी. सीखने के प्रतिफल अध्यापक स्वयं
2 2.1 क्या संगीत में विविधता के महत्व को सराहने में सक्षम हैं?
2 2.2 क्या सामाजिक सुधार में संगीत की भूमिका के बारे में बोलने में सक्षम हैं?
2 2.2 कविता या रैप के रूप में अपने विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त करते हैं।
4 4.1 क्या स्थानीय लोक गीत गाने में सक्षम हैं?
4 4.2 क्या एक संगीतज्ञ के बारे में जानकारी प्रस्तुत करने में सक्षम हैं?

शिक्षक की टिप्पणी और विद्यार्थी के अवलोकन