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आप, नृत्य और रचनात्मकता

नृत्य में कटि-संचलन

ऊपरी धड़, निचले धड़, हस्त एवं पैरों की गतियों का अन्वेषण करने के बाद अब आप नाट्यशास्त्र में उल्लिखित अन्य अंगों- नितंबों और कटि की गतियों से परिचित होंगे।



नितंबों की गतियाँ भारतीय नृत्य परंपराओं में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये ताल, लय और गीत की भावना को व्यक्त करने में सहायक होती हैं। यद्यपि इनकी विशिष्ट उपयोगिता और शैली प्रत्येक नृत्य शैली मे भिन्न होती है, फिर भी इनकी गति में लयात्मकता, सटीकता और सहज प्रवाह होता है। नीचे भारतीय नृत्य परंपराओं में समाहित विभिन्न प्रकार की नितंबों की गतियाँ दी गई हैं-

नितंबों का घुमाव

गरबा नृत्य में नितंबों के घुमाव की गति का प्रयोग होता है, जिसमें शरीर को घुमाने की एक विशिष्ट शैली ग्रहण की जाती है। Screenshot 2025-10-07 095300

एक ओर से दूसरी ओर

हमारे देश के कई लोक नृत्यों में नितंबों की एक ओर से दूसरी ओर की गति देखी जा सकती है। उदाहरण के लिए, कालबेलिया नृत्य में यह स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। Screenshot 2025-10-07 095325

आगे और पीछे

कुछ भारतीय नृत्य परंपराओं में नितंबों की आगे और पीछे की गति देखने को मिलती है। आप इस तरह की गति को बीहू और छऊ जैसे नृत्यों में देख सकते हैं। Screenshot 2025-10-07 095426



परिपत्र

आप हुला हूप को कैसे घुमाते हैं? क्या आपने इसे उपयोग करते समय नितंबों की घूर्णन गति को देखा है? उदाहरण के लिए, क्या सर्प नृत्य में नितंबों की गोल घूमने वाली गति हो सकती है?

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गतिविधि 12.1 – नितंबों की गति के साथ नृत्य

अब विभिन्न भारतीय नृत्य शैलियों में नितंबों की गतियों को ध्यान से देखें और उन्हें दोहराने का प्रयास करें। स्वयं के किसी पात्र या जानवर पर आधारित नृत्य बनाएँ और उसमें उपयुक्त नितंबों की गतियाँ जोड़ें। Screenshot 2025-10-07 101537


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शिक्षकों के लिए निर्देश


कुछ नृत्य रूपों को देखने की एक गतिविधि आयोजित करें और विद्यार्थियों को समूहों में बाँट दें। वे नृत्य में नितंबों की गतियों के विभिन्न तरीकों की पहचान कर सकते हैं। अध्याय की शुरुआत में दिए गए क्यूआर कोड में इन गतियों के वीडियो लिंक भी उपलब्ध हैं।





सीमाओं से परे परंपरा और परिवर्तन

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एकल परंपराओं में एकल नर्तक विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाता है और एक चरित्र से दूसरे चरित्र में स्थानांतरित होता है। पूरे भारत में महिला नर्तकों की एक प्रबल परंपरा रही है, जिन्होंने कथाएँ और कविताएँ अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत की हैं तथा विभिन्न भूमिकाएँ निभाई हैं। साथ ही, ऐसे पुरुष नर्तक भी रहे हैं जो कभी-कभी महिला वेश-भूषा धारण करके प्रदर्शन करते थे। इसी प्रकार के एक प्रसिद्ध 'कुचिपुड़ी नर्तक' हैं, वेदांतम सत्यनारायण शर्मा, जिन्होंने महिला वेश में नृत्य प्रस्तुत किया।

परंपरागत नृत्य - नाट्य परंपराओं में पुरुष नर्तक प्रायः महिला पात्रों की भूमिका ग्रहण करते हैं और उनके वस्त्र ही उस चरित्र की प्रस्तुति निर्धारित करते हैं। कुछ नृत्य परंपराएँ, जैसे- छऊ (जिसके बारे में हमने कृति कक्षा 6 में सीखा), पात्रों के अभिनय के लिए मुखौटे भी उपयोग करती हैं।

हम ऐसी दो और परंपरागत प्रदर्शन कलाओं के बारे में जानेंगे जिनमें पुरुष पारंपरिक रूप से महिला पात्र निभाते आए हैं, यद्यपि अब दोनों परंपराएँ अपने अभ्यास में महिलाओं का भी स्वागत कर रही हैं।

मेलत्तूर, तमिलनाडु से भगवता मेला नाटकम्

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यह दक्षिण भारत की एक नृत्य-नाट्य परंपरा है। आंध्र प्रदेश के कुचिपुड़ी गाँव में इस शैली की उत्पत्ति हुई, जहाँ मुख्य नायक तीर्थ नारायण याति और सिद्धेद्र योगी थे। विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद कुछ भगवतर आंध्र से मेलत्तूर, थंजावुर चले आए, जिन्हें नायक शासकों ने संरक्षण दिया और इस प्रकार मेलत्तूर परंपरा आरंभ हुई। प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान गोपाल कृष्ण शास्त्री और उनके पुत्र वेंकटरामा शास्त्री, संत नारायण तीर्थ याति के शिष्य बने। संरक्षक आच्युतप्पा नायक और सेवप्पा नायक ने इन ब्राह्मणों को मेलत्तूर गाँव भेंट किया और यह कलाओं का एक केंद्र बन गया। बीसवीं शताब्दी की आरंभिक अवधि में सबसे प्रसिद्ध भगवतर नटेश अय्यर थे और उनकी मृत्यु के पश्चात इस मंडली का संचालन जी. स्वामीनाथन ने किया। अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तित्व बालू भगवतर और टी.वी. नटेश भगवतर थे। ई. कृष्ण अय्यर ने 1950 में मद्रास म्यूजिक अकादमी के साथ इस परंपरा के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्य प्रस्तुति मई या जून में नरसिंह जयंती के अवसर पर वरदराजा परुमल मंदिर में 'प्रह्लाद चरितम्' के नाम से होती थी। पारंपरिक रूप से पुरुष नर्तक ही स्त्रियों की भूमिका निभाते हैं।

असम का अंकिया भाव

Screenshot 2025-10-07 103925 अंकिया नाट्य एक नृत्य-नाटक परंपरा है जो असम से उत्पन्न हुई। यह पंद्रहवीं शताब्दी ईस्वी में विकसित हुई। वैष्णववाद के गायन और नृत्य की परंपरा के बाद, नामघर और सतत्र स्थापित किए गए, जहाँ भक्तों ने भागवत पुराण के माध्यम से संगीत और नृत्य के माध्यम से कहानियाँ सुनाई। अंकिया नाट की प्रस्तुति का एक विशेष रूप 'भोना' कहलाता है, जो जीवंत वाद्ययंत्रों, गायकों, नृत्य और विस्तृत वेशभूषा को मिलाकर प्रस्तुत किया जाता है। मुखौटा इस नाट परंपरा में महत्वपूर्ण रंगमंच सामग्री है। 'भोना' संस्कृत मंत्रोच्चार के साथ आरंभ होता है और गीत ब्रजभाषा में होते हैं। सबसे महत्वपूर्ण नामघर कमलाबारी सतारा माजुली, असम में है।


गतिविधि 12.2


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मेरा चरित्र मेरी वेशभूषा और हाव-भाव को निर्धारित करता है-सीमाओं से परे

एक चरित्र चुनें। उदाहरण के लिए, एक महिला की चाल या मास्क, जिसमें साइड-टू-साइड नितंबों की गतियाँ या एक मयूर की वेशभूषा या फिर मुखौटे सम्मिलित हो सकते हैं। इसमें सामने और पीछे के नितंबों की गतियाँ सम्मिलित हो सकती हैं। पहले आपने रंगमंच में मुखौटा बनाना सीखा था।

क्या आप उसे स्मरण कर सकते हैं कि मुखौटा कैसे बनाया जाता है?

अब, अपने नितंबों की गतियाँ और/या मुखौटा को चुनें ताकि आप अपने पसंद के चरित्र को प्रदर्शित कर सकें।



नृत्य परंपराओं में संपर्क एवं रूपांतरण

सांस्कृतिक पुनर्निर्माण के दौरान, पारंपरिक गतिविधियों का पुनर्जीवन हुआ और समकालीन नृत्य के नए शब्द-भंडार का उदय हुआ।

रवींद्रनाथ टैगोर

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रवींद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1921 में भारत के प्रथम कला विश्वविद्यालयों में से एक 'विश्वभारती' की स्थापना की जो शांति निकेतन में स्थित है। यह संस्थान पारंपरिक नृत्य-शैलियों से एक नवीन नृत्य-शब्दावली विकसित करने में सहायक बना। उन्होंने रवींद्र नृत्य नामक एक नवीन शैली का निर्माण किया, जिसने महिलाओं के लिए व्यावसायिक नृत्य के अवसर खोलें।

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अब, आप रवींद्र नृत्य में किसी नृत्य की दो पंक्तियों को प्रस्तुत करने का प्रयास करें।

उदय शंकर

उदय शंकर संभवतः आधुनिक भारतीय नृत्य के प्रथम अग्रदूत थे उन्होंने 1920 के दशक में अन्न पावलोवा के साथ नृत्य करना आरंभकिया। कोई औपचारिक प्रशिक्षण न होते हुए भी उन्होंने भारतीय नृत् की विभिन्न परंपराओं- शास्त्रीय लोक, और आदिवासी शैलियों को एक साथ मिलाकर एक नई नृत्य-शैली प्रस्तुत की, जिसे अब उदय शंकर शैली कहा जाता है। 1948 में बनी उनकी फिल्म, कल्पना आज भी चर्चित है।

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उदय शंकर और रेखा शंकर की कुछ प्रस्तुति क्लिप्स को क्यू.आर. कोड की सहायता से देखें और कुछ चरणों को नृत्य में प्रस्तुत करने का प्रयास करें।



नृत्यसंयोजन – मंच से परदे तक

अब तक आपने 'नृत्य संयोजन' शब्द का अभ्यास किया है। अब आप इसे परदे पर भी होते हुए देख सकते हैं।

भारतीय सिनेमा में प्रारंभ से ही नृत्य का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। कई प्रसिद्ध भारतीय फिल्में अद्भुत नृत्य संयोजन के लिए जानी जाती हैं, जैसे- मुग़ल-ए-आज़म, जिसका नृत्य संयोजन लच्छू महाराज ने किया था और 'झनक झनक पायल बाजे' का नृत्य संयोजन गोपी कृष्ण ने किया था।

कई दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियाँ निपुण नृत्यांगनाएँ थीं, जिन्होंने फिल्मों में खूबसूरती से नृत्य प्रस्तुत किए। भारत रत्न से सम्मानित एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी में अभिनय की विशेष प्रतिभा थी और उन्होंने अपनी कई फिल्मों में ऐसे दृश्य निभाए।

हाल के दिनों में बीरजू महाराज द्वारा कोरियोग्राफ किया गया नृत्य 'काहे छेड़-छेड़ मोहे' बहुत लोकप्रिय हुआ है। आज भी देश के हर हिस्से में खूबसूरत गरबा नृत्य और अन्य लोकरूप कई फिल्मों में देखने को मिलते हैं।

गतिविधि 12.3 - मेरा रचनात्मक नृत्य

अपना रचनात्मक नृत्य उन गतियों के आधार पर तैयार करें, जिनका आपने पहले अभ्यास किया है। विद्यार्थियों को 2, 3 और 4 के समूह में बाँटें। अपने समूह के लिए एक विषय चुनें। अब संगीत, लय और संयोजन के साथ अपनी रचना का प्रारंभ करें।

आप अपनी पसंद से कोई भाव-स्थिति भी चुन सकते हैं और पहले से सीखे हुए नृत्य के अंशों को जोड़कर एक पूरा नृत्य बनाएँ। इस गतिविधि से आप नृत्य निर्माण और नृत्य संयोजन की प्रक्रिया को समझ पाएँगे।

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शिक्षकों के लिए निर्देश

- बच्चों को ऊपर दी गई फिल्मों या शिक्षक द्वारा चयनित फिल्मों, जैसे- अप्पू राजा, अप्पालम चप्पलम, थिलाना मोहानाम्बाल, बाजे संतूर, शंकराभरणम के कुछ नृत्य अंश दिखाएँ।



आकलन
अध्याय 12 — आप, नृत्य और रचनात्मकता
सी.जी. सी. सीखने के प्रतिफल शिक्षक स्वयं
2 2.2 कक्षा में भागीदारी।
3 3.1 अपने चरित्र के अभिनय प्रदर्शन में मुखौटे या अन्य किसी सामग्री का उपयोग करके उसे और समृद्ध बनाना।
3 3.2 अपने नृत्य में नितंबों की गति का रचनात्मक रूप से उपयोग करना।
3 3.2 नितंबों और गतियों का उपयोग करते हुए विभिन्न चरित्र और मुद्राओं का उपयोग करने में रुचि रखना।
3 3.2 सभी सीखी गई तकनीकों का रचनात्मकता से प्रयोग कर नृत्य करना।
4 4.1 पारंपरिक और लोकप्रिय नृत्य के समकालीन विकास की संस्कृति को समझने में रुचि रखना।

शिक्षक की टिप्पणी और विद्यार्थी का अवलोकन

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