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अध्याय-15

Screenshot 2025-10-08 112225 दृश्य कला

वस्तुओं में चिह्न और प्रतीक



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दृश्य कला

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  1. कलाना प्रवरं चित्र धर्मकामार्थमोक्षदम्।
  2. मङ्‌गल्यं प्रथम चैव गृह्यते यत्र प्रतिष्ठितम् ॥

सभी कलाओं में चित्रकला सर्वश्रेष्ठ है, जो धर्म, अर्थ और मुक्ति देने वाली कला है। यह जहाँ भी स्थापित की जाती है, वहाँ सब कुछ मंगलमय होता है।

– विष्णुधर्मोत्तर पुराण से चित्रसूत्र का अध्याय 43 श्लोक 38


शिक्षकों के लिए

प्रिय शिक्षकगण,

आइए, हम अपने विद्यार्थियों को दृश्य कला, विचारों और संचार की आकर्षक दुनिया की गहराई में ले जाएँ। इस कक्षा में उनके कौशल और तकनीकों को निखारते हुए दृश्य कला प्रक्रियाओं और परंपराओं के बारे में उनके ज्ञान को व्यापक विस्तार देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यहाँ यह महत्वपूर्ण है कि आप प्रत्येक अध्याय को ध्यान से पढ़ें। आप अपने स्थानीय संदर्भ और विद्यार्थियों की विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप गतिविधियों को संशोधित कर तैयार कर सकते हैं।

प्रत्येक विद्यार्थी के लिए सर्वोत्तम शिक्षण अनुभव प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करें।

दृश्य कला वर्ग कक्षा की आवश्यकता

  1. 1. विद्यार्थियों के सरलता से कार्य करने के लिए पर्याप्त स्थान की उपलब्धता।

  2. 2. पर्याप्त प्रकाश और वायु संचार का होना।

  3. 3. कला सामग्री, उपकरण, मूलभूत स्टेशनरी और दृश्य-श्रव्य सुविधाओं तक सरल पहुँच और सुव्यवस्थित भंडारण।

  4. 4. समय-समय पर कला कार्य प्रदर्शित करने और प्रदर्शन के लिए स्थान की उपलब्धता।



दृश्य कला शिक्षणशास्त्र की आवश्यकता


  1. 1. अवधारणाओं और प्रक्रियाओं को प्रस्तुत करने के लिए कहानी कहने और प्रतिदिन के उदाहरणों का उपयोग करें।

  2. 2. विद्यार्थियों को अपने कलात्मक कार्यों में मौलिक विचारों, कल्पनाओं, भावनाओं और जिज्ञासाओं को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करें।

  3. 3. विद्यार्थियों को अन्य स्रोतों से छवियों का अनुकरण करने की बजाय उनके दैनिक जीवन के अनुभवों के अवलोकन से प्रेरित मौलिक कला कार्य बनाने के लिए प्रोत्साहित करें।

  4. 4. विद्यार्थियों को कक्षा में अन्वेषण, जाँच, प्रयोग, सहयोग और संवाद करने की अनुमति दें।

  5. 5. उनके आस-पास के जीवन और संस्कृति का अन्वेषण और अवलोकन करने के लिए बाहरी गतिविधियों और अध्ययन यात्रा (फील्ड ट्रिप) को सम्मिलित करें।

  6. 6. संग्रहालयों, विरासत स्मारकों और मेलों का भ्रमण आयोजित करें।

  7. 7. स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों के साथ सहभागिता सत्रों और व्यावहारिक अनुभवों के लिए कार्यशालाएँ आयोजित करें।

  8. 8. कार्य करने के बाद सफाई की आदतों को अपनाएँ। उपयोग की गई सामग्रियों को वापस रखें और कला उपकरण सामग्रियों की देखभाल करें।

  9. 9. विद्यार्थियों को कक्षा प्रदर्शन या प्रदर्शनी के लिए कलाकृति के चयन में विद्यार्थियों की भागीदारी और निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करें।

दृश्य कला आकलन मध्य स्तर के लिए निम्नलिखित दक्षताओं पर आधारित होना चाहिए।

  1. सी.-1.1 दृश्य कला विभिन्न रूपों के माध्यम से अपने व्यक्तिगत और दैनिक जीवन के अनुभवों को आत्मविश्वास से व्यक्त करना है।

  2. सी.-1.2 दृश्य कला अभ्यास में सामूहिक रूप से दृश्य कला निर्माण की प्रक्रिया में लचीलेपन के गुण को प्रदर्शित करना है।

  3. सी.-2.1 ऐसी स्थितियों, व्यक्तिगत अनुभव, भावनाओं और कल्पनाओं या कहानियों पर आधारित दृश्य चित्रण बनाना जो उनके आस-पास देखी जाने वाली रूढ़ियों को चुनौती देती हों (जैसे जेंडर असमानताएँ)।

  4. सी.-2.2 सी.-2.2 दृश्य कला, प्रतीकों और दृश्य रूपकों को व्यक्तिगत अनुभवों, भावनाओं और कल्पनाओं से जोड़ना है।

  5. सी.-3.1 सी.-3.1 दृश्य कला में विभिन्न सामग्रियों, उपकरणों और तकनीकों का उपयोग करते समय सावधानी बरतें और सही विकल्प चुनें।

  6. सी.-3.2 योजना के प्रथम चरण से लेकर अंतिम प्रस्तुति तक, दृश्य अभिव्यक्ति के विचारों और तकनीकों को परिष्कृत और पूरी रचना प्रक्रिया की समीक्षा करें।

  7. सी.-4.1 स्थानीय और क्षेत्रीय कला रूपों की समझ प्रदर्शित करना।

  8. सी.-4.2 क्षेत्रीय कलाकारों के जीवन और उनके कार्यों का वर्णन करता है।

सीखने के प्रतिफल जिनका आकलन विभिन्न अध्यायों में किया जा सकता है
सीखने के प्रतिफल जिनका आकलन विभिन्न अध्यायों में किया जा सकता है
सी.जी. सी सीखने के प्रतिफल शिक्षक स्वयं
1 1.1 कलाकृतियों का प्रदर्शन और विश्वासपूर्वक विचारों, भावनाओं और प्रक्रियाओं को साझा करना।
1 1.2 एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हुए नए विचारों की जाँच करना और सुझाव देना।
3 3.1 कला सामग्री का सावधानीपूर्वक उपयोग, सफाई और व्यवस्थित तरीकों से भंडारण करना।
4 4.1 कलाकृति में देखे गए पैमाने, उपस्थिति, सामग्री और विषयों पर चर्चा कर स्थानीय कला रूपों और विरासत स्मारकों में देखी गई मूर्तियाँ या चित्रकला, पैमाने, रूप सामग्री और विषयों पर चर्चा करना।।
4 4.2 कलाकृति पर चर्चा या उसके विषय में लिखते समय कला शब्दावली का उपयोग करना।
4 4.2 स्थानीय कलाकारों के काम और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के बारे में जानकारी प्राप्त करना।




वस्तुओं में चिह्न और प्रतीक

दृश्य हमें एक-दूसरे के साथ संवाद करने में सहायता करते हैं। इस पृष्ठ पर दिए गए दृश्यों को जाँचें। प्रत्येक दृश्य आपको शीघ्र और सीधे सूचना प्रदान करता है। ऐसे दृश्यों को चिह्न कहा जाता है।

चिह्न (आइकन) किसी वस्तु, स्थान या विचार का एक सरल दृश्य प्रतिनिधित्व होता है। चिह्न के अधिक विवरण नहीं दिखते हैं। उदाहरण के लिए, मोबाइल फोन स्क्रीन पर घड़ी, शेष बैटरी चार्ज, नेटवर्क कनेक्शन और अनुप्रयोग आदि को दर्शाने वाले चिह्न ही होते हैं। नीचे कुछ अन्य चिह्न दिए गए हैं जो आपको नियमित रूप से देखने को मिलते हैं।

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इस अध्याय में, आप सीखेंगे कि वस्तुओं की जानकारी प्रदान करने के लिए चिह्नों और प्रतीकों के रूप में कैसे प्रस्तुतीकरण दर्शाया जा सकता है। आप यह जानेंगे कि इन दृश्य तत्वों का उपयोग प्रतीक चिह्न, संकेत बोर्ड और यहाँ तक कि लिखित संदेश भेजने के दौरान 'इमोजी' के रूप में कैसे किया जाता है। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से, आप वस्तुओं को 'द्वि-आयामी या त्रि-आयामी' आकृति में दिखाने के लिए उन्हें चित्रित करने का अभ्यास करेंगे और उन्हें प्रतिरूपों में बदलना भी सीखेंगे।

आप यह भी जानेंगे कि वस्तुएँ प्रतीकों के रूप में उपयोग किए जाने पर अन्य अर्थ कैसे ग्रहण करती हैं।

ध्यान दें कि इन वस्तुओं को चिह्न के रूप में परिवर्तित करने पर इनके विवरण कैसे बदलते हैं।

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गतिविधि 15.1 – सरल चिह्नों को समझना

काँटा और चम्मच दो चिह्न को देखें।

  1. सकारात्मक स्थान वस्तुओं को दर्शाता है।
  2. नकारात्मक स्थान रिक्त स्थान को दर्शाता है।

इस प्रकार, एक छवि में काला रंग सकारात्मक है और दूसरी में नकारात्मक। अन्य चिह्नों में सकारात्मक और नकारात्मक स्थान अवलोकन करें। चिह्नों में सामान्यतः बहुत अधिक नकारात्मक स्थान होते हैं।

यह मुख्य वस्तु को बहुत छोटे आकार में स्पष्ट रूप से दिखाई देने में सहायता करता है।

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वस्तुओं से आकृतियों के स्टेंसिल बनाएँ

सामग्री - पुराने समाचार पत्र या पत्रिकाएँ, कैंची, सादा A4 कागज, पेंसिल और रबड़ इत्यादि।

Screenshot 2025-10-08 145027 चरण 1- पुराने समाचार पत्रों या पत्रिकाओं को देखें और दो या तीन वस्तुओं की पहचान करें जो पूर्ण रूप से और स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हों।

Screenshot 2025-10-08 145342 चरण 2- अब, ध्यान से इस वस्तु की रूपरेखा को उभारें।






Screenshot 2025-10-08 145609 चरण 3- एक वस्तु चुनें और उसके भाग को काट लें।






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चरण 4– वस्तु को रूपरेखा के अनुरूप काटें। यह स्टेंसिल कहलाता है।



Screenshot 2025-10-08 150023 चरण 5- कागज़ की एक शीट पर, इस स्टेंसिल का उपयोग करके वस्तु को बनाएँ





Screenshot 2025-10-08 150115 चरण 6- रूपरेखा के भीतर रंग भरें और इस प्रकार निर्मित सकारात्मक और नकारात्मक स्थान पर ध्यान दें।

इसे अपने मित्रों को दिखाएँ और उनसे वस्तु की पहचान करने के लिए कहें। अन्य वस्तुओं के साथ स्टेंसिलिंग को दोहराएँ। क्या आपके मित्र स्टेंसिल प्रक्रिया द्वारा बनाई गई आकृति से वस्तु की पहचान कर सकते हैं?





गतिविधि 15.2 • एक वस्तु को विभिन्न विधियों से चित्रित करना
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विद्यार्थी द्वारा बनाया गया एक संगीत वाद्ययंत्र

किसी वस्तु को द्वि-आयामी या त्रि-आयामी रूप बनाने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग करके चित्रित किया जा सकता है। नीचे दिया गया उदाहरण देखें।

वस्तु की रूपरेखा
  1. * यह एक रूपरेखा है।
  2. * पारदर्शी दिखता है।
  3. * वस्तु द्वि-आयामी दिखती है।
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वस्तु का छाया चित्र
  1. * यह एक रंगीन सपाट आकार है।
  2. * अपारदर्शी दिखता है।
  3. * वस्तु द्वि-आयामी दिखती है।
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वस्तु को छायांकित करना
  1. *आपस में काटती रेखाएँ (क्रॉस-हैचिंग) और बिंदु चित्रण (स्टिपलिंग) जैसी तकनीकों का उपयोग करके टोनल विविधताओं के माध्यम से प्रकाश और छाया को दर्शाता है।
  2. * वस्तु त्रि-आयामी दिखती है।
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वस्तु का चिह्न
  1. * आवश्यक विवरण के साथ सरलीकृत चित्र।
  2. * वस्तु द्वि-आयामी दिखती है।
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कोई वस्तु चुनें और उसका चित्र बनाने के लिए तैयार हो जाएँ।

सामग्री - A5 आकार की पाँच शीट कागज (A4 कागज का आधा हिस्सा), नुकीली पेंसिल, रबड़, रंग और पेन इत्यादि।




अपनी पसंद की वस्तु की रूपरेखा बनाएँ

एक A5 कागज और एक पेंसिल लें।

चरण 1- निरीक्षण करें और मापें
  1. * वस्तु को 2-3 फीट से अधिक दूरी पर रखें।

  2. * वस्तु की आकृति और आकार का ध्यान से निरीक्षण करें।

  3. * जैसा कि दिखाया गया है, अपनी पेंसिल को मापने के उपकरण के रूप में प्रयोग करें।

  4. * अपने अंगूठे को पेंसिल पर रखें, इसे वस्तु के साथ सरेखित करके उसके भागों को मापें।

  5. * वस्तु के अनुपातों को मापें और उन्हें कागज पर चित्रित करें।

शिक्षकों के लिए निर्देश-

*प्रत्येक विद्यार्थी चित्रण के लिए वस्तु का चयन स्वयं करें।

यह सुनिश्चित करें कि वे इस गतिविधि में प्रत्येक कलाकार्य के लिए उसी वस्तु का उपयोग करें।

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चरण 2- रेखाचित्र (कंटूर) बनाइए

*प्रत्येक भाग को तब तक देखते रहें जब तक कि आप उसके प्रत्येक भागों का रेखाचित्र (कंटूर) पूरा न कर लें।

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अपनी वस्तु का एक छायाचित्र (सिल्हूट) बनाएँ

Screenshot 2025-10-08 162043 एक A5 कागज और एक पेंसिल लें।
  1. 1. उसी वस्तु की रूपरेखा पुनः बनाएँ या पहले बनाए गए रूप रेखाचित्र (कंटूर) से उसका रेखांकन करें।

  2. 2. रेखाचित्र (कंटूर) के अंदर रंग भरें ताकि वह समतल दिखाई दे।

  3. 3. वस्तु के चारों ओर नकारात्मक स्थान को भरने के लिए अलग रंग का उपयोग करें।

वैकल्पिक - किसी अन्य A5 शीट या कागज पर, सकारात्मक और नकारात्मक स्थानों के रंगों को बदलकर छायाचित्र के विपरीत प्रतिबिंब का चित्रण करें।

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अपनी वस्तु का छायांकित (शेडिंग) चित्रण करना

इन दोनों छायांकन माध्यमों का उपयोग करके अपनी वस्तु को तीन आयामों में चित्रित करें।

1. क्रॉस-हैचिंग अर्थात एक-दूसरे को आपस में काटती रेखाएँ एक छायांकन तकनीक है, जिसमें क्रिस क्रॉस रेखाओं का उपयोग किया जाता है। गहरे टोन बनाने के लिए रेखाओं को निकट से एक-दूसरे के साथ ऊपर नीचे करें और हल्के टोन बनाने के लिए रेखाओं को एक-दूसरे के साथ दूरी रखकर ऊपर-नीचे करें।

Screenshot 2025-10-08 162140 2. स्टिपलिंग अर्थात बिंदु चित्रण एक छायांकन तकनीक है, जिसमें बिंदुओं का उपयोग किया जाता है। गहरी छाया (टोन) बनाने के लिए बिंदुओं को एक-दूसरे के निकट रखें। हल्के टोन बनाने के लिए बिंदुओं के बीच की दूरी को बढ़ाएँ।



प्रत्येक तकनीक के लिए A5 कागज एक अलग शीट का उपयोग करें।

चरण 1– वही वस्तु लें जिसे आपने 'छायाचित्र' (सिल्हूट) बनाने के लिए चुना था और उसे अपने सामने रखें।

चरण 2- इसका अवलोकन करें और इसकी रूपरेखा का चित्रण करें।

चरण 3– ध्यान से देखें कि प्रकाश वस्तु पर किस प्रकार गिरता है।

चरण 4- गहरी और हल्के छाया के चित्रण हेतु “एक-दूसरे को आपस में काटती रेखाएँ" (क्रॉस-हैचिंग) माध्यमों का उपयोग करें।

चरण 5– अपना कार्य पूरा करें और उसे अलग या एक तरफ रख दें।

चरण 6– दूसरा कागज A5 माप का लें और वस्तु की रूपरेखा का चित्रण करें।

चरण 7– बिंदु चित्रण (स्टिपलिंग) का उपयोग करके हल्के और गहरे टोन बनाएँ।

अपनी वस्तुओं का चिह्न (आइकन) बनाएँ

अपने चित्रों को एकत्रित करें, जिसमें 'रेखाचित्र, छायाचित्र (सिल्हूट), एक-दूसरे को आपस में काटती रेखाएँ (क्रॉस-हैचिंग) और बिंदु चित्रण (स्टिपलिंग)" सम्मिलित हैं। इनमें से आप किसका उपयोग चिह्न बनाने के लिए करेंगे?

याद रखें कि चिह्न एक सरलीकृत छवि है, लेकिन इसे जल्दी से पहचानने की भी आवश्यकता होती है। इसलिए, इसमें स्पष्ट आकृतियाँ होनी चाहिए और केवल महत्वपूर्ण विवरण होने चाहिए। कभी-कभी वस्तु का छायाचित्र (सिल्हूट) ही चिह्न भी हो सकता है।

A5 कागज शीट पर अपना चिह्न बनाएँ और उसे रंगों से पूरा करें।

अच्छे चिह्न बनाने के लिए अभ्यास और गहन अवलोकन की आवश्यकता होती है। अगर आपको अपने चिह्न का उपयोग, सूचना संप्रेषण करने के लिए करना हो तो वह कौन-सा होगा?

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गतिविधि 15.3 - संकेतों या चिह्नों (साइनेज) के प्रतीक
संकेत या चिह्न (साइनेज) हमें बताते हैं कि कोई स्थान कहाँ है और उसका उपयोग किसके लिए किया जाता है? इस गतिविधि में, आप अपने विद्यालय के लिए वस्तुओं के चिह्नों, संकेतों के प्रतीकों (साइनेज) बनाएँगे।

चरण 1- अपने विद्यालय में एक स्थान चुनें, जैसे- प्रवेश द्वार, शौचालय, खेल का मैदान, भोजन करने का स्थान, पुस्तकालय, अपना थैला, जूते रखने का स्थान आदि।

चरण 2- जब आप इस स्थान के बारे में सोचते हैं तो आपके दिमाग में आने वाली वस्तुओं की एक सूची बनाएँ।

चरण 3- इस स्थान में सबसे महत्वपूर्ण वस्तु को चुनें। उदाहरण के लिए, एक दरवाजा एक निकास चिह्न का प्रतीक (साइनेज) है, प्रवेश द्वार और उसके महत्ता को दर्शाता है। यदि आपने दो वस्तुएँ चुनी हैं तो उन्हें मिलाने का प्रयास करें ताकि एक प्रतीक बनाया जा सके। उदाहरण के लिए, भोजन क्षेत्र के लिए संकेत चिह्न (साइनेज) में एक चम्मच और एक काँटा हो सकता है, कला कक्ष के लिए संकेत चिह्न (साइनेज) में एक प्लेट, एक रंगपट्टी और एक ब्रश हो सकता है।

चरण 4– याद रखें कि चिह्न (आइकन) किसी वस्तु का एक सरल चित्रण है।

* छाया चित्रण (सिल्हूट) और रूपरेखा का प्रयोग एक साथ करें।

* केवल विवरणों का उपयोग करें जो वस्तु की विशेषता को दर्शाते हों। साथ में केवल एक ही रंग का प्रयोग करें।

चरण 5- चिह्न को दो या अधिक विधियों से बनाएँ।

चरण 6– वह चिह्न चुनें जो आपके उद्देश्य को भली प्रकार व्यक्त करता हो और जिसे चुने गए स्थान के लिए प्रतीक (साइनेज) के रूप में प्रयोग किया जा सके। इस चिह्न का A5 कागज शीट पर चित्रण करें।

अपने मित्रों को यह साइनबोर्ड दिखाएँ और उनसे पूछें कि वे इसके बारे में क्या सोचते हैं? Screenshot 2025-10-08 170351 सूचना - जिस वस्तु को आप नियमित रूप से चुनते हैं उस पर ध्यान दें। उदाहरण के लिए, आप भोजन करते समय काँटा और चम्मच का उपयोग नहीं कर सकते, ऐसे में आप अपने भोजन को दर्शाने के लिए वैकल्पिक चिह्न के बारे में क्या सोच सकते हैं?


गतिविधि 15.4 – वस्तुओं के रूप में प्रतीक

आपने देखा होगा कि वस्तुओं की छवियाँ विभिन्न उद्देश्यों के लिए बनाई जाती हैं। ये आपके आस-पास के स्थानों या चिह्नों के लिए संकेत हो सकते हैं। वस्तुएँ प्रतीक भी बन जाती हैं।

प्रतीकों का गहरा अर्थ होता है और वे विचारों या भावनाओं का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। हो सकता है कि वे सीधे उस दृश्य से संबंधित न हों, जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं। धर्म चक्र हमारे राष्ट्रीय ध्वज का केंद्र है। इस नीले चक्र (पहिया) में 24 तीलियाँ हैं। यह सारनाथ के सिंह स्तंभ से लिया गया धर्म की अवधारणा का चित्रण है, जिसे तीसरी शताब्दी में मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाया गया था।

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  • नीला रंग आकाश और महासागर का प्रतीक है।
  • पहिया प्रगति को दर्शाता है।
  • 24 तीलियाँ दिन के 24 घंटों का प्रतीक हैं।
  1. 'स्वच्छता अभियान' के प्रतीक चिह्न में गोलाकार चश्मा
  2. महात्मा गांधी का प्रतीक है। चश्मे के पुल में राष्ट्रीय ध्वज
  3. तिरंगा है। यह महात्मा गांधी के 'स्वच्छ
  4. भारत' के विजन के लिए पूरे देश के
  5. एकजुटता के महत्व को दर्शाता है।
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चश्मा और पहिया जैसी प्रतिदिन की वस्तुएँ शक्तिशाली प्रतीक बन जाती हैं जब उनके अर्थ को स्वीकार करके वे बड़े विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

क्या आप ऐसी अन्य वस्तुओं के बारे में सोच सकते हैं जिसका उपयोग प्रतीकों के रूप में किया जाता है।

अभियानों, संस्थाओं और राजनीतिक पार्टियों के प्रतीक चिह्नों को देखें जहाँ हम वस्तुओं को प्रतीकों के रूप में उपयोग करते हुए देखते हैं उनके अर्थ क्या दर्शाते हैं?

क्या चिह्नों और प्रतीकों में कोई अंतर है?

याद रखें कि प्रतीकों का एक गहरा अर्थ होता है।

चिह्न भी प्रतीक हो सकते हैं यदि उन्हें और अधिक अर्थ दिए जाएँ। प्रतीक वहाँ दर्शाए जाते हैं जहाँ वे प्रतिनिधित्व करते हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय गोलाकार चश्मे को महात्मा गांधी जी के मूल्यों और कार्यों से जोड़ सकते हैं। जबकि लोग उस संबंध को नहीं बना सकते, वे इसे केवल चश्मे की जोड़ी के रूप में देख सकते हैं।




चित्रांकनों का शब्दावलियों से मिलान करें -

सिल्हूट Screenshot 2025-10-08 172544
स्टेंसिल Screenshot 2025-10-09 093824
एक-दूसरे को आपस में काटती रेखाएँ (क्रॉस-हैचिंग Screenshot 2025-10-09 093848
बिंदु चित्रण Screenshot 2025-10-09 093910
चिह्न (आइकन) Screenshot 2025-10-09 093929
संकेत या निर्देश या चित्रण (साइनेज) Screenshot 2025-10-09 094024
प्रतीक चित्रण (सिंबल) Screenshot 2025-10-09 094059




सहकर्मी आकलन

अपने सहपाठियों द्वारा बनाए गए संकेतों को देखकर कुछ पंक्तियाँ लिखें, निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करें।

1. क्या यहाँ संकेत (साइनेज) में कोई प्रतीक है? उनका वर्णन करें।


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2. क्या संकेत (साइनेज) पर दी गई जानकारी स्पष्ट और समझने में आसान है? ........................................

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3. संकेतों (साइनेज) के बारे में आपको कौन-सी दो विशेषताएँ पसंद आई? ........................................

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4. आपको इसके डिजाइन में क्या सुधार करने की आवश्यकता लगती है? ........................................

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आकलन

अध्याय 15 – वस्तुओं में चिह्न और प्रतीक
सी.जी. सी. सीखने के प्रतिफल शिक्षक स्वयं
11.1वस्तुओं को ध्यानपूर्वक और उन्हें ठीक वैसे ही चित्रित करने का प्रयास करना जैसी वे दिखाई देती हैं।
22.2चिह्न बनाना और परिचित वस्तुओं को चित्रित करना।
22.2 परिचित चिह्नों, प्रतीकों और लोगो द्वारा व्यक्त किए गए अर्थों का वर्णन करना।
3 3.1चिह्नों और प्रतीकों में सकारात्मक और नकारात्मक स्थानों की पहचान करना।
33.1 किसी कलाकृति में प्रकाश, छाया और परछाई दिखाने के लिए विभिन्न छायांकन तकनीकों (रेंडरिंग तकनीकों) को प्रयोग में लाना।
3 3.2 संकेतों (साइनेज) को डिजाइन करना, बनाना और प्रदर्शित करना।


शिक्षक की टिप्पणी और विद्यार्थी का अवलोकन


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