अध्याय-16
प्राकृतिक रंगपट्टिका
प्रकृति हम पर हर दिन रंगों की वर्षा करती है। इंद्रधनुष रंगों की श्रृंखला को प्रदर्शित करता है जिन्हें मानव आँखों से देखा जा सकता है।
रंग प्रकाश के कारण दिखाई देते हैं। जब प्रकाश बदलता है तो रंगों का स्वरूप भी बदल जाता है। उदाहरण के लिए, एक चमकीला लाल टमाटर मंद रोशनी वाले कमरे में फीका और गहरा दिखाई दे सकता है। जब बहुत अधिक प्रकाश होता है तो सब कुछ सफेद दिखाई देता
है। जब प्रकाश नहीं होता तो सब कुछ काला दिखाई देता है। दृश्य कला में, प्रकाश प्रभाव को रंगों की टिंट (रंगों का हल्कापन) छायाएँ और टोन बनाकर दर्शाया जाता है।
रंग दृश्य कला का एक महत्वपूर्ण तत्व है। नियमित अभ्यास से आप रंगों को बनाने, मिलाने और उनके साथ काम करने की अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करेंगे। आप न केवल अपने काम के लिए, अपितु अन्य कलाकृतियों की सराहना करने के लिए रंग चक्र का उपयोग करना सीखेंगे।
सभी लोग रंगों को एक जैसा नहीं देखते हैं यह महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक व्यक्ति रंगों को कैसे देखता है, इसके प्रति संवेदनशील होना महत्वपूर्ण है। जिन लोगों में रंग दृष्टि में कमी होती है, जिसे सामान्यतः पर रंग दृष्टि दोष कहा जाता है, वे कुछ रंगों को अलग तरह से देख सकते हैं। लाल रंग भूरा दिखाई दे सकता है या नीले और हरे रंग के बीच अंतर करने में कठिनाई अनुभव हो सकती है। कई दृश्य कलाकार और वास्तुविद हैं जो विभिन्न प्रकार की दृष्टि दोष से पीड़ित हैं, जिन्होंने अपने वातावरण के साथ काम करने के लिए रचनात्मक निष्कर्ष ढूंढ़ निकाले हैं।
गतिविधि 16.1 - रंग चक्र (कलर व्हील) का विस्तार करें
यहाँ रंग चक्र (कलर व्हील) को देखें। बीच में आपको तीन प्राथमिक रंग मिलेंगे - पीला, लाल और नीला। इन रंगों को किसी अन्य रंग को मिलाकर नहीं बनाया जा सकता।
हरे रंग से बने तृतीयक रंग हैं-
प्रत्येक प्राथमिक रंगों के जोड़े को मिलाने से एक द्वितीयक रंग उत्पन्न होता है। अब आप तृतीयक रंग बनाना सीखेंगे ये रंग किसी द्वितीयक रंग को किसी प्राथमिक रंग के साथ मिलाकर बनाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, हरा (द्वितीयक रंग) जो पीले और नीले (प्राथमिक रंगों) को मिलकर बनाया जाता है।
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एक रंग चक्र का चित्र बनाएँ
सामग्री- इस गतिविधि के लिए जल रंग या पोस्टर रंग अधिक उपयुक्त हैं यद्यपि आप इस गतिविधि के लिए उपयुक्त अन्य रंगों, जैसे-मोम के रंग, पेंसिल के रंग, पाउडर रंग आदि जैसे अन्य सूखे माध्यमों के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं।
चरण 1- प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक रंगों को प्रदर्शित करने के लिए अपने रंग चक्र का चित्रण करें।
चरण 2- केवल लाल, नीले और पीले रंग का उपयोग करके अपने रंग मिलाएँ ताकि सभी रंगों को बनाया जा सकें। यह सबसे महत्वपूर्ण चरण हैं।
चरण 3- संदर्भ के लिए पिछले पृष्ठ पर दिए गए चित्रों को देखें। समुचित भागों में रंग भरें। विभिन्न प्रकार की रेखाएँ (स्ट्रोक), रंगीन धब्बे (पैच), बिंदु (डॉट्स) या कोई अन्य माध्यमों का उपयोग करें।
चरण 4– अपना पूरा रंग चक्र प्रदर्शित करें और इसे अन्य गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखें, जिन्हें आप शीघ्र ही करने वाले हैं।
गतिविधि 16.2 - रंगों की रंगत बनाएँ
आपने प्रकाश और छाया बनाने के लिए, एक-दूसरे को आपस में काटती रेखाएँ और बिंदु चित्रण का उपयोग करना सीखा है। आइए, अब रंगों से छाया चित्रण करने का अभ्यास करते हैं।
तकनीकी सुझाव
रंगों का उपयोग करते समय अपने कटोरे का पानी बदलना और रंगों का मिश्रण करने के बाद अपनी तूलिका को अच्छी तरह से धोना महत्वपूर्ण है! यह आपको अपनी पसंद के सही रंग, शेड और टोन पाने में मदद करेगा।किन्हीं भी दो रंगों की रंगत और छाया बनाएँ
* रंगों और छाया (शेड्स) के कम-से-कम चार रूप बनाएँ।
*रंग में थोड़ी मात्रा में काला या सफेद रंग मिलाकर शुरुआत करें।
*प्रत्येक स्तर के लिए काले या सफेद रंग की मात्रा बढ़ाएँ।
चुने गए दो रंगों से टोन बनाएँ
ग्रे रंग को किसी रंग के साथ मिलाकर टोन तैयार किया जाता है। किंतु आप ये ग्रे रंग कैसे बनाते हैं?
* काला और सफेद रंगों को मिलाकर ग्रे रंग बनाएँ।* अन्य रंगों को बनाने के लिए ग्रे रंग को अन्य रंगों के साथ मिलाएँ।
* चार स्तर के रंगों के शेड बनाने का प्रयास करें।
गतिविधि 16.3 - रंगों के माध्यम से पौधे का अध्ययन
पौधे अलग-अलग मौसमों में बढ़ने के साथ-साथ अपना रूप और रंग बदलते हैं। फल और सब्जियाँ प्रायः कच्चे होने पर हरे रंग के होते हैं और पकने पर रंग बदलते है। आइए, हम रंगों को बेहतर ढंग से समझने के लिए पौधों का कलात्मक अध्ययन करें।
चित्रांकन के माध्यम से पौधे का अध्ययन
चरण 1- ऐसी टहनी का चयन करें जिसमें कुछ पत्तियाँ या एक पुष्प हो (ये अपने जीवन की किसी भी अवस्था के हो सकते हैं)।
चरण 2- इसे अपने सामने रखें और इसकी स्थिति को न बदलें।
चरण 3– कम-से-कम दो फुट की दूरी पर बैठकर उसके आकार और आस-पास के स्थान का निरीक्षण करें।
चरण 4– हल्की रेखाओं का उपयोग करते हुए, दो अलग-अलग कोणों से चित्र बनाएँ।
चरण 5– इसके बाद, उन कोणों में से एक को चुनें और दूसरा चित्र शुरू करें।
चरण 6- अपने कागज पर अधिकतम स्थान का प्रयोग करें और धीरे-धीरे चित्रित करें, ताकि विवरणों को चित्र के रूपों में चित्रित किया जा सके।
चरण 7- चित्र को पूरा करें और उसे रंग भरने के लिए तैयार रखें।
अपने पौधे के अध्ययन में रंगों को भरें
चरण 1– रंग भरने के लिए कोई भी माध्यम चुनें, जैसे- मोम के रंग, रंगीन पेंसिल, पेस्टल, जल रंग और पोस्टर रंग इत्यादि।
चरण 2- पौधे के रंगों का निरीक्षण करें और रंग चक्र से सही छाया (शेड), हल्का रंग (टिंट) या टोन प्राप्त करें।
चरण 3- अपनी कलाकृति में प्रकाश, छाया और अँधेरे को चित्रित करें।
चरण 4- अपनी कलाकृति को पूरा करें और कक्षा में प्रदर्शित करें।
स्वयं मूल्यांकन करें
1. आपने कितने रेखाचित्र (कंटूर) बनाए?
2. आप क्या अच्छे से करने में सक्षम थे?
3. आपने जिन चुनौतियों का सामना किया अपने कार्य में जिन सुधारों की आवश्यकता अनुभव की उनके बारे में लिखिए।
यह वनस्पति चित्रण हॉर्टस मालाबारिकस पुस्तक से है कहा जाता है। इसका अर्थ है 'मालाबार का बगीचा।' इस पुस्तक में 17वीं शताब्दी के दौरान भारत के मालाबार तट पर पाए जाने वाले हजारों औषधीय पौधों का विवरण है।
लघुचित्र कला (मिनिएचर) में रंग
आपको यह ज्ञात होगा कि चित्रकला विभिन्न प्रकार की सतहों पर बनाई जा सकती है, जैसे- चट्टानें, दीवारें, मिट्टी, ताड़ के पत्ते, कागज, कपड़ा, लकड़ी, धातु, काँच, रबड़ एवं अन्य सिंथेटिक प्लास्टिक जो आज उपलब्ध हैं।
कलाकृति के लिए प्राकृतिक रंग और रंगद्रव्य, मिट्टी, खनिजों और पौधों से प्राप्त किए जाते हैं। जिन्हें विभिन्न विधियों से निकाला जाता है।
यदि इन रंगों को अत्यधिक प्रकाश, नमी या विभिन्न जीवित प्राणियों के संपर्क लाया जाए तो ये रंग समय के साथ फीके पड़ जाते हैं और अंततः गायब हो सकते हैं।
यह समयरेखा भारतीय चित्रकला के महत्वपूर्ण चरणों और समय के साथ रंग की विकास यात्रा को दर्शाती है।
लघुचित्र (मिनिएचर) कई शैलियों में होते हैं और सामान्यतः आकार में छोटे होते हैं। भारत में, इन्हें आरंभ में ताड़ के पत्तों पर बनाया जाता था। 12वीं शताब्दी से, कलाकारों ने लघुचित्रों को कागज पर बनाना आरंभकर दिया था। उनके विषयों में धार्मिक ग्रंथ, पौराणिक कथाएँ, प्रकृति, चित्रांकन और दरबार जीवन सम्मिलित थे।
नीचे दी गई तालिका तुम्हें लघुचित्रों में प्रयोग किए गए कुछ रंगों के स्रोत के बारे में बताती है, जिसे बबूल के पेड़ से निकाले गए गोंद के साथ मिलाया जाता था, जो रंगों को बांधने का कार्य करता है।
| रंग | स्रोत |
|---|---|
| चमकदार लाल | सिंदूरी रंग |
| मिट्टी जैसा लाल रंग | गेरू या लाल मिट्टी |
| पीला | पीला पत्थर या गौमूत्र |
| हरा | पत्तियाँ, ताम्र कार्बोनेट |
| नीला | लाजवर्दी रंग या गाढ़ा नीला |
| काला | कोयला |
| सफेद | खड़िया या सफेद चिकनी मिट्टी |
लघुचित्र कला (मिनिएचर) के लिए उपयोग की जाने वाली तूलिका (ब्रश) सामान्यतः जानवर, जैसे- ऊँट, बकरी, गाय, चूहे, गिलहरी और नेवले की पूँछ के बालों से बनाई जाती थी।
कला सामग्री और उपकरणों की देखभाल या रखरखाव करना
यह महत्वपूर्ण है कि हम जिस स्थान पर काम करते हैं और जिन सामग्रियों एवं उपकरणों का उपयोग करते हैं उनकी भी देखभाल करें।
- प्रत्येक बार उपयोग करने के पश्चात तूलिका (ब्रश), रंगपट्टिका (पैलेट) और अपने अन्य उपकरणों को अच्छी तरह से साबुन से साफ करें।
- रंग को सूखने से बचाने के लिए रंग की ट्यूब, बोतलें, स्केच पेन और मार्कर को उनके ढक्कन से बंद करके रखें।
- सभी सामग्रियों को व्यवस्थित ढंग से रखें ताकि उन्हें आसानी से ढूँढ़ा जा सकें और अन्य लोग भी उनका उपयोग कर सकें।
गतिविधि 16.4 – लघुचित्र (मिनिएचर) रंगपट्टिका का विश्लेषण
18वीं शताब्दी की इस राजस्थानी लघुचित्र कला (मिनिएचर) को ध्यान से देखें। हरे-भरे परिदृश्य में लोग दिखाई दे रहे हैं, वे प्रसिद्ध संगीतकार तानसेन, उनके गुरु स्वामी हरिदास और मुगल सम्राट अकबर हैं। नीचे दिए गए इन बिंदुओं पर चर्चा करें-
1. इस चित्रांकन (पेंटिंग) में क्या प्रदर्शित किया जा रहा है?
2. क्या आप मौसम और समय का अनुमान लगा सकते हैं?
3. आपने इनमें कौन-कौन-सी मनोदशा या भावना का अनुभव किया है।
4. हरे रंग की विभिन्न छायाएं (शेड्स) जो आपको दिखाई दे रही है उनका रंग चक्र (कलर व्हील) के माध्यम से विश्लेषण करें।
5. इस चित्र में सबसे बड़ा पेड़ कहाँ लगा है? आपको क्या लगता है कि कलाकार ने ऐसा क्यों किया?
6. पत्तियों के पैटर्न से बने स्वरूपों और बादलों की महीन रेखाओं को देखें। साथ ही चित्रांकन (पेंटिंग) में आपको क्या-क्या विवरण दिखाई देते हैं?
लघुचित्रों (मिनिएचर) के बारे में जो कुछ आपने सीखा है, उस पर एक संक्षिप्त अनुच्छेद लेखन करें।आकलन
किसी भी कला कार्य में रंगों के माध्यम से व्यक्त की गई मनोदशा, भावना और ऋतुओं का अवलोकन करें।
आकलन
| अध्याय 16 – प्राकृतिक रंगपट्टिका (पैलेट) | ||||
|---|---|---|---|---|
| सी.जी. | सी. | सीखने के प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| 1. | 1.1 | पौधे के किसी चुने हुए हिस्से का अवलोकन करें और उसमें रंग भरें। | ||
| 2 | 2.2 | कलाकृति में रंगों के माध्यम से व्यक्त मनोदशा, भावना और ऋतुओं को पहचानें। | ||
| 3 | 3.1 | रंग चक्र, रंगों के शेड हल्केपन या गहरेपन और छाया बनाने का अभ्यास करें। | ||
शिक्षक की टिप्पणी और विद्यार्थी का अवलोकन
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