अध्याय-17
आप कैसा अनुभव करते हैं
इस अध्याय में आप मानव शरीर और चेहरे के हाव-भाव के कई पहलुओं को समझेंगे।
आप चेहरे को बनाना और भावनाओं को व्यक्त करना सीखते समय उसमें छिपे हुए अनुपातों और संतुलनों की खोज करेंगे।
तमिलनाडु के महाबलीपुरम में बने शैल चित्र को देखते हुए आप उस समय की यात्रा करेंगे।
आप मिट्टी से ऐसे उभरे हुए चित्र (रिलीफ) बनाना सीखेंगे, जो चेहरे के भाव को दर्शाते हैं।
अंततः, आप लोकप्रिय संस्कृति की विभिन्न रूढ़ियों को समझेंगे और उनको नई दृष्टि से कलाकृति में दर्शाएँगे।
गतिविधि 17.1 - अभिनय करिए और पहचानिए
आपने रंगमंच और नृत्य में 'नवरसों' के बारे में सीखा होगा। अब हम इन पर आधारित चेहरों के विभिन्न भावों का खेल खेलते हैं।
चरण 2- प्रत्येक समूह से एक व्यक्ति एक आशु अभिनय करेगा।
चरण 3-अन्य व्यक्ति उसके शरीर की गतिविधियों और चेहरे के भावों को ध्यान से देखेंगे।
क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि वे कौन-सा भाव दिखा रहे हैं?
गतिविधि 17.2 - मानव सिर के अनुपात
क्या कारण है कि एक बच्चे का चेहरा एक व्यस्क के चहरे से भिन्न दिखता है। इसका कारण चेहरे का अनुपात है।
चित्र को देखिए और विश्लेषण करें कि जैसे-जैसे कोई व्यक्ति बढ़ता है तो उसके चहरे का अनुपात कैसे बदलता है?
कला में गणित
चित्रों को देखें और उनके चेहरे के अनुपातों को गणितीय अभिव्यक्ति के रूप में लिखें! अपने गणित शिक्षक की सहायता लें।अनुपातों के अनुसार चेहरा बनाएँ और अलग-अलग कोणों से सिर का चित्र बनाएँ।
आप अपनी तर्जनी उंगली का उपयोग करके अपने चेहरे के विभिन्न हिस्सों को माप सकते हैं।
अपनी नाक के लंबाई नापें और उसी का उपयोग करते हुए अपने कानों, आँखों, माथे आदि को भी नापें।
आप ये रोचक बातें जानेंगे-
* दो आँखों के बीच की जगह, एक आँख के बराबर होती है।
* आपके कान आपकी भौंहों से लेकर नाक की नोक तक के बीच में स्थित होते हैं।
गतिविधि 17.3 - चेहरे के हाव-भाव का चित्रण
चरण 1- अपने दोस्तों से कुछ समय के लिए विभिन्न चेहरे के भाव दर्शाने को कहे, जैसे- मजेदार, उदास, हँसते हुए और चिंतित आदि हैं। प्रत्येक हाव-भाव के साथ आँखों, भौहों, मुख, जबड़े में जो परिवर्तन होता है उसका अवलोकन करें।
चरण 2- अनुपातों पर ध्यान केंद्रित करते हुए चार से पाँच चेहरों का चित्रण करें।
चरण 3- आँखें, भौहें और मुँह में परिवर्तन करते हुए चेहरे के विभिन्न भाव चित्रित करें।
चरण 4- अब अपने स्वयं के इमोजी चित्रित करने का आनंद लें।
आकलन
1. मानव सिर के अनुपात का अध्ययन और चित्रण करें।
2. भावनाओं को व्यक्त करने के लिए चेहरे के विभिन्न भावों को चित्रित करें।
गतिविधि 17.4 - चलिए, अतीत की यात्रा पर चलें!
कल्पना कीजिए कि आप समय यंत्र में बैठकर 8वीं शताब्दी में पहुँच गए हैं। आप तमिलनाडु के महाबलीपुरम में इस पत्थर से तराशी गई विशाल मंदिर के सामने हैं।
आप देख रहे हैं कि मूर्तिकार कार्य कर रहे हैं, वे 'गंगा का अवतरण' गढ़ रहे हैं कुछ अन्य आपको 'अर्जुन की तपस्या' की कहानी बताते हैं।
उन्हें कार्य करते देख आप कल्पना करते हैं कि नदी दो गोल शिलाखंडों के बीच से बह रही है। संपूर्ण जीवन नदी के आस-पास जमा हो गया है। यह मूर्तिकला पवित्र जल को समर्पित कहानियों और मिथकों को जीवंत करती है। कुछ विवरण स्पष्ट दिखाई देते हैं जबकि कुछ अधूरे लगते हैं। प्रत्येक दृश्य आपको उत्साहित करता है और आपको गहराई से सोचने के लिए प्रेरित करता है।
मिट्टी से चेहरे उकेरना (रिलीफ)
स्विश्श्श ! ... समय यंत्र आपको वापस 21वीं सदी में ले आया और अब आपके हाथ में यह पुस्तक है।
महाबलीपुरम की तटीय मंदिर की मूर्तियाँ समय के साथ घिस गई हैं। आपको पत्थर काटकर उकेरी गई। इन मूर्तियों का अंग संचालन और उनके हाथों में रंगमंच सामग्री दिखाई देगी। इन लोगों की पहचाना जा सकता है यद्यपि उनके हाव-भाव स्पष्ट नहीं है। मूर्तियाँ भारतीय कला और पौराणिक कथाओं के गहरे ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है।
चित्रों को ध्यान से देखिए और उनमें दिखाए गए पात्रों को पिछले पृष्ठ पर दिए बड़े चित्र में खोजिए।
चूँकि अब आप चेहरे के भाव बनाना सीख चुके हैं तो उन पुनः पात्रों के चेहरों की कल्पना करें।
प्रत्येक चेहरे को 15 × 15 से.मी. के कागज पर हाव-भाव सहित बनाएँ।
अपने चित्र को पूरा करने के पश्चात फिर एक चित्र चुनें, उसे काटें और इसे मिट्टी के रिलीफ़ के लिए तैयार रखें।
शैक्षणिक भ्रमण
किसी ऐतिहासिक धरोहर स्थल पर जाएँ, जहाँ मूर्तियाँ हों उनके शरीर की मुद्राओं, हाव-भाव और भावनाओं का अवलोकन करें, अध्ययन करने के पश्चात चित्रित करें।मिट्टी से मूर्ति बनाने की प्रक्रिया
① कुछ प्राकृतिक मिट्टी लें। यदि सूखी है तो इसे एक दिन के लिए पानी में भिगोने की आवश्यकता है। ताकि यह मुलायम या नरम हो जाए।
② मिट्टी गूंथने की प्रक्रिया में उसमें से पत्थर और कंकड़ को हटा दें।
③ आपकी मिट्टी काम करने के लिए उपयुक्त स्थिरता की होनी चाहिए। बहुत अधिक पानी इसे चिपचिपा बना देगा और बहुत कम पानी इसमें दरार उत्पन्न करेगा।
④ मिट्टी की लोई बनाकर इसे अपनी हथेली से समतल करें।
⑤ इसे बेलन की सहायता से धीरे-धीरे बेले ताकि इसका आकार लगभग 15 सेंटीमीटर लंबा, 15 सेंटीमीटर चौड़ा और 3 सेंटीमीटर ऊँचाई का एक पट्टी बनाई जा सके।
⑦ एक नुकीले उपकरण से धीरे-धीरे अपने कागज की कटिंग को पट्टी पर ट्रेस करें।
⑧ पृष्ठभूमि से मिट्टी की एक पतली परत को हटाना शुरू करें ताकि सामने की सतह उभरी हुई लगे।
⑨ जो मिट्टी आपने हटाई है, उसे फेंकिए नहीं। उसे इकट्ठा करके एक गेंद बनाकर गीला करके रखें ताकि उसे फिर से उपयोग किया जा सके।
⑩ इस मिट्टी का उपयोग करके भौहें, पलकें, आँखें, गाल, नाक, मुँह, ठुड्डी आदि जैसे चेहरे के अंगों को आकार दें।
⑪ प्रक्रिया के दौरान अपनी पट्टी को समय-समय पर हल्के से पानी छिड़ककर नरम करके रखें।
⑫ अपने उपकरणों का उपयोग करके चेहरे के अंगों को परिष्कृत करें और मनचाहे भावों को उकेरें।
⑬ अपना काम पूरा करने के बाद और पट्टी के ऊपर की ओर पेंसिल से एक छेद करें। यह आपके रिलीफ को टांगने में मदद करेगा।
⑭ कुछ दिनों के लिए इसे सूखने दें।
वैकल्पिक - आप अपनी कलाकृति को पूरी तरह से सूखने पर रंग सकते हैं।
तकनीकी सुझाव
मिट्टी के विभिन्न हिस्सों को आपस में जोड़ने के लिए मिट्टी को एक चिकने लेप में बदल दिया जाता है, जो चिकना पेस्ट (स्लिप) कहलाता है।
जिस स्थान पर भागों को जोड़ना है, वहाँ पहले निशान बनाकर सतह को खुरदरा किया जाता है। फिर उस पर स्लिप लगाई जाती है (जो गोंद की तरह काम करती है) और दूसरा भाग उसमें जोड़ा जाता है।
अब अपनी कार्य-प्रक्रिया पर विचार करें और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें-
1. क्या आपकी कलाकृति में कार्य करने के दौरान दरारें आईं?
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2. इसके क्या कारण हो सकते हैं? ...........................
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गतिविधि 17.5 - प्रत्येक की एक सुंदर कहानी होती है।
'गंगा का अवतरण' में विभिन्न शारीरिक बनावट वाले लोगों को दर्शाया गया है। ध्यान दें कि लोगों को अलग-अलग पेंटिंग शैलियों में कैसे चित्रित किया गया है।
अपने आस-पास विभिन्न शारीरिक प्रकारों का अवलोकन करें, जैसे- छोटे, लंबे, पतले, मोटे, गहरे रंग के, हल्के रंग के, गंजे, बालों वाले, झुके हुए आदि। अपने शरीर का भी अवलोकन करें। आपके मस्तिष्क में क्या विचार आते हैं उनका निरीक्षण करें।
रूढ़िबद्ध धारणाओं का अर्थ है- ऐसी आम धारणाएँ जो किसी व्यक्ति, स्थान या समुदाय के बारे में बनाई जाती हैं जबकि वे तथ्यों पर आधारित नहीं होती। आप शरीर की बनावट को लेकर ऐसी आम धारणाओं पर चर्चा करें।
उदाहरण के लिए- क्या यह मान लिया जाता है कि किसी का शरीर भारी है तो वह तेज नहीं दौड़ सकता? क्या यह समझा जाता है कि पतले लोग कमजोर होते हैं? क्या यह माना जाता है कि त्वचा का एक रंग दूसरे से अधिक सुंदर होता है?
जो चित्र हम पत्रिकाओं, विज्ञापनों, फिल्मों, वीडियो और सामाजिक माध्यमों पर देखते हैं, वे शरीर के बारे में हमारे सोचने के तरीके को प्रभावित करते हैं। शारीरिक रूढ़ियों के अधिक उदाहरण एकत्र करें। आप इन्हें विज्ञापनों, कहानियों के चित्रों, वीडियो, फिल्मों आदि में देख सकते हैं।
अपने स्वयं के ऐसे रचनात्मक चित्र बनाएँ, जो इन रूढ़िबद्ध को चुनौती दें और दर्शाएँ कि प्रत्येक शरीर सुंदर और विशेष होता है।
आकलन
| अध्याय 17 आप क्या अनुभव करते हैं | ||||
|---|---|---|---|---|
| सी.जी. | सी. | सीखने के प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| 1 | 1.1 | मानव सिर के अनुपात को देखकर उन्हें पहचानें और चित्रित करें। | ||
| 1 | 1.1 | अपनी भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने के लिए चेहरे के विभिन्न प्रकार की हाव-भाव को चित्रित करें। | ||
| 2 | 2.1 | शरीर की रूढ़ियों को पहचानें और कलाकृतियों में विकल्प चित्रित करना। | ||
| 2 | 2.2 | भारतीय मूर्तियों में देखे जाने वाले नवरस और भावनाओं को पहचानें। | ||
| 3 | 3.2 | उपयुक्त उपकरणों और तकनीकों का उपयोग कर मिट्टी का रिलीफ बेलना, कुंडलित करना, पिंच करना, थपथपाना, स्कूप करना, स्लिप, पट्टी बनाना। | ||
शिक्षक की टिप्पणी और विद्यार्थी का अवलोकन
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