अध्याय-18
वस्त्रों की कला और परंपरा
ठीक वैसे ही जैसे आप कागज और पेंसिल का उपयोग चित्र बनाने के लिए करते हैं, कलाकार कपड़े, सुई और धागे का उपयोग करके कलाकृति का निर्माण करते हैं।
भारतीय वस्त्रों में तरह-तरह के डिजाइन होते हैं। प्रत्येक का अपना प्रतीकात्मक अर्थ होता है। कला तत्व (मोटिफ) अर्थात सजावटी चित्र जो बार-बार दोहराए जाते हैं और कला तत्व का एक स्वरूप बनाते हैं। ये प्रत्येक क्षेत्र में अलग-अलग होते हैं और आज भी कई पहनने वाले कपड़ों पर देखे जाते हैं।
इस अध्याय की अन्य गतिविधियों पर आगे बढ़ने से पहले, यहाँ कुछ प्रतिरूपों और उनके अर्थों का पता लगाएँ। स्वयं की वस्त्र कला बनाने के लिए कुछ मूलभूत कौशल और तकनीक को सीखें।
इन कला रूपों (मोटिफ) में विभिन्न कला तत्वों को पहचानें
धागों की बुनी कहानियाँ
धागा और सुद्दी एक दिन आपस में बहस करने लगे। धागा चाहता था कि पर्दा खुला रहे और सुद्दी चाहती थी कि पर्दा बंद रहे। वे पर्दे को चारों तरफ से सरकाने लगे। धागे ने परदे को खींचा और वो फट गया और आखिरकार पर्दा चिल्ला पड़ा।
"तुम दोनों रुको!”
पर्दे का स्वर सुनकर धागा और सुद्दी रुक गए।
“देखो तुमने मुझे चोट पहुँचाई है और देखा मैं फट गया हूँ!” पर्दा बोला।
धागा और सुद्दी पास गए और फटे हुए परदे को देखा।
धागे को हिंदी में "धागा” कहते हैं। सुई को तेलुगू में "सुद्दी" कहते हैं। आप जिन भाषाओं को जानते हैं, उनमें इन्हें क्या कहा जाता है? जानिए इन्हें अन्य भारतीय भाषाओं में क्या कहा जाता है?
पर्दे ने बोलना जारी रखा और पर्दे के बनने की कहानी सुनाई।
"जब तुम्हारी आजी (दादी) का देहांत हुआ तो तुम्हारे माता-पिता ने उनके पहने हुए कुछ विशेष कपड़ों, जो वो पहना करती थीं उन्हें संभालकर रख लिया था। मैं वही पैबंदकारी (पैचवर्क) हूँ, जो उन्होंने उनके कपड़ों के टुकड़ों से बनाया।
देखिए मेरे शरीर पर सिलाई किए गए कपड़े आपकी आजी के कपड़ों से बने हैं। यहाँ एक टुकड़ा उस सुंदर स्वेटर का है, जिसे उन्होंने स्वयं बुना था। इसके बगल में उस पीली साड़ी का टुकड़ा, जिसमें बड़ा चाय का दाग था! इसके ऊपर के डिजाइन (मोटिफ) को स्पर्श कीजिए, आपके पिता ने उस दाग वाले हिस्से को लिया और उसके ऊपर सुंदर कढ़ाई कर डाली।"
क्या तुम मेरे बीच के चौकोर खिड़की जैसे हिस्से को देख रहे हो? इसे क्रोशे प्रक्रिया से बनाया गया है। यह टुकड़ा आपकी आजी का सबसे पसंदीदा था। पैबंदरकारी (पैच वर्क) के निचले किनारे पर देखिए। इन्हें टैसल्स धागों को सटीक और सुंदर पैटर्न में गाँठा गया है। मेरे फटे हुए हिस्से में भी कुछ ढीले धागे लटक रहे हैं... उसे देखो।
"याद रखो, मैं केवल एक पर्दा नहीं हूँ, मैं कहानियों का एक पैचवर्क हूँ। मेरे प्रत्येक टुकड़े की अपनी कहानी है। सभी कई धागों के साथ सिले हुए हैं।
जब धागे आप आपस में लड़ते हैं जैसे तुम दोनों अभी लड़ रहे थे तो आप क्या सोचते हो क्या हुआ होगा?
धागा और सुद्दी एक-दूसरे की ओर देखने लगे और मुस्कुरा दिए। “क्या हम इस फाटे हुए हिस्से को मिलकर साथ में ठीक कर सकते हैं?” सुद्दी ने धागा से कहा।
धागा ने 'हाँ' कहा और दोनों काम में व्यस्त हो गए।
अगर तुम धागा या सुद्दी होते तो आप क्या करते?
गतिविधि 18.1 – कपड़े की डायरी
चरण 1- अपने घर में विभिन्न प्रकार की वस्तुओं को देखें जो फाइबर और कपड़े से बनी है।
चरण 2- पुराने कपड़े, बैग, मैट या कपड़े के टुकड़ों के नमूनों को इकट्ठा करो। दर्जी से संपर्क करके विभिन्न मोटाई और बनावट वाले कपड़ों के छोटे-छोटे टुकड़े माँग सकते हैं।
चरण 3- कपड़ा इकट्ठा करते समय, प्रत्येक कपड़े की कहानियाँ लिखें जैसे इसे कहाँ पाया, यह किसका है, फाइबर के प्रकार और पैटर्न के बारे में कुछ पंक्तियाँ लिखें।
चरण 4– अब अपनी डायरी के पृष्ठों की योजना बनाओ। जोड़े में मिलकर काम करो - अपने टुकड़े और उनकी कहानियाँ इकट्ठा करो। इकट्ठी की गई विभिन्न सामग्रियों (सूती, रेशमी, ऊनी, जूट इत्यादि) को पहचानें और इस पर चर्चा करें।
कपड़ों को रंग, बनावट, पैटर्न या सामग्री, जैसे- सूती, रेशम, ऊन के अनुसार व्यवस्थित करें। अपनी टिप्पणियाँ (नोट्स) और कहानियाँ भी डायरी में लिखो ताकि वो रोचक बने।
गतिविधि 18.2 – कढ़ाई की परंपराओं का अन्वेषण
कढ़ाई कपड़ों पर सुई के काम की तकनीक है, जिसमें शीशे, मोती और अन्य डिजाइन सामग्री भी सम्मिलित होते हैं। भारत में कढ़ाई की परंपराएँ पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।
यहाँ भारत की कढ़ाई के कुछ क्षेत्रों के उदाहरण दिए गए हैं-
| कढ़ाई का नाम | स्थान या क्षेत्र |
|---|---|
| चिकनकारी | उत्तर प्रदेश |
| चंबा रूमाल | हिमाचल प्रदेश |
| कसूती | कर्नाटक |
| टोडा | तमिलनाडु |
| अहीर | गुजरात |
| कांथा | पश्चिम बंगाल |
| खनेंग | मेघालय |
| गोटा | राजस्थान |
| काशीदाकारी | कश्मीर |
तुमने अपने आस-पास के कपड़ों पर किस तरह की कढ़ाई देखी है? कढ़ाई करने वाले कलाकारों को खोजें और उनसे उनकी कलाओं पर चर्चा करें।
गतिविधि 18.3 – कढ़ाई के मूलभूत टाँकों का अभ्यास
कढ़ाई साधारण सामग्री और उपकरण का उपयोग करके भी की जा सकती है। अगर आपने पहले कभी कढ़ाई नहीं की है तो इस आसान सिलाई से सीखने की शुरुआत करें।
प्रक्रिया1. लगभग 50 से.मी. लंबा धागा लें।
2. सुई में धागा डालें और उसके एक सिरे को छोटा रखें।
3. लंबे सिरे पर एक गाँठ बना लें।
4. आप अपने कागज (कार्ड शीट) या कपड़े पर सीधी रेखाएँ खींचकर और सुई से छेद बनाएँ।
5. सिलाई शुरू करें और प्रत्येक टाँके के पैटर्न का पालन करें।
6. जब आपका धागा खत्म होने वाला हो या आपकी रेखा पूरी हो जाए तो अपनी कढ़ाई के पीछे एक गाँठ बना लें और धागा काट लें।
सामग्री
- कार्ड पेपर या मोटी ड्राइंग शीट (20 × 15 से.मी.)
- मध्यम आकार की सुई
- धागा या ऊन
गतिविधि 18.4 – अपनी वस्त्र कलाएँ बनाएँ
वस्त्र कला केवल सपाट सतह पर ही नहीं बनानी चाहिए, यह त्रि-आयामी (3डी) रूप में भी बनाई जा सकती है। आपने शायद कपड़े या रेशे से बने सुंदर खिलौने देखे होंगे। बहुत से प्रसिद्ध कलाकार वस्त्र कला और शिल्प परंपराओं से प्रेरित हुए हैं।
आप अपने जैसे अन्य विद्यार्थी द्वारा बनाई गई कलाओं के उदाहरण देखें। आप किस प्रकार का वस्त्र कला बनाना चाहेंगे? आपको अपनी स्थानीय वस्त्र परंपराओं से प्रेरणा मिल सकती है। यह बुनाई, बुनाई के मशीन द्वारा कार्य, क्रोशे, मैक्रमे, कपड़ों के खिलौने, पेंटिंग, छाया चित्रण (प्रिंटिंग कला), बंधेज, टाई एंड डाई आदि हो सकता है।
आकलन
| अध्याय 18 - वस्त्रों की कला और परंपरा | ||||
|---|---|---|---|---|
| सी.जी. | सी. | सीखने का प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| 1 | 1.1 | अपने आस-पास से कपड़ों के नमूने एकत्र करें और उनके बारे में लिखें। | ||
| 2 | 2.2 | अपनी संस्कृति और परिवेश में देखे जाने वाले सामान्य वस्त्र रूपांकनों को पहचानें और चित्रण करें। | ||
| 3 | 3.2 | साधारण टाँके या किसी अन्य तकनीक का उपयोग करके एक वस्त्र कलाकृति बनाएँ। | ||
शिक्षक की टिप्पणी और विद्यार्थी का अवलोकन
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