अध्याय-19

सुलेखन की कला
लिपियों में लोगों की भाषाओं और अभिव्यक्तियों को संजोकर रखने अर्थात अभिलेखन की शक्ति होती है।
भारत की लेखन परंपरा लगभग 5000 वर्ष पुरानी सिंधु-सरस्वती सभ्यता से पाई जाती है, किंतु सम्राट अशोक के शिलालेखों में पाई गई सबसे प्रारंभिक पढ़ी या समझी जा सकी लिपि लगभग 2300 वर्ष पुरानी है। भारत का मूल संविधान प्रसिद्ध लेखकों द्वारा हस्तलिखित किया गया था। प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अंग्रेजी संस्करण लिखा और वसंत कृष्ण वैद्य ने हिंदी में लिखा। यह 26 जनवरी 1950 हस्ताक्षरित किया गया था जिसे आज हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। आज भारतीय संविधान आधिकारिक रूप में 22 भाषाओं को मान्यता देता है। इसकी सुंदर रूपात्मक विविधताएँ और भारतीय लिपियों को अभिव्यक्त करने की क्षमताओं को बाईं और के वृक्ष में देखें।
भारत का संविधान
भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों कोः
सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,
- प्रतिष्ठा और अवसर की समता
प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में
- व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता
दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में तारीख 26 नवम्बर, 1949 ई. (मिति मार्गशीर्ष शुक्ला सप्तमी, संवत् दो हजार छह विक्रमी) को एतद्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
इस अध्याय में आप लेखन कैलीग्राफी की कलाओं के बारे में अधिक जानेंगे और खोज करेंगे।
अक्षर किसी भी लिपि की सबसे छोटी इकाई है और कोई अज्ञात लिपि अक्षरों की एक श्रृंखला की तरह दिखती है। आज हम जिन अक्षरों का उपयोग करते हैं वे पहले चित्र होते थे जो चित्र लिपि में विकसित हुए और फिर लेखन की संगठित प्रणालियों में बदल गए।
सुलेखन (कैलीग्राफी) केवल शब्दों को लिखने की कला नहीं अपितु प्रत्येक कलाकार इसमें अपनी भावनाएँ डालते हैं ताकि प्रत्येक अक्षर अलग-अलग अभिव्यक्तियाँ पा सके। वे हस्तलिपि से लिखने, गढ़ने और अंकन में अधिक समय और परिश्रम लगाते हैं। प्रत्येक अक्षर की शैली का एक उद्देश्य होता है। प्राचीन पांडुलिपियों में अक्षर सजावटी होते थे और उसमें जीवंतता होती थी। कुछ अक्षरों को रचनात्मक ढंग से ढाँचा या चित्र जैसा दिखाने के लिए इस प्रकार लिखा था। आजकल समाचार पत्र हमारा ध्यान आकर्षित करने और पाठकों को शीघ्र जानकारी पहुँचाने में मदद करने के लिए मोटे और स्पष्ट अक्षरों का उपयोग करते हैं। सुलेखन (कैलीग्राफी) के लिए उपयोग की जाने वाले सामग्री और उपकरण, जैसे- पंख, कलम, कूंची, निब, स्याही तथा रंग आदि होते थे जिनसे ताड़पत्र, कपड़ा, कागज आदि पर लिखा जाता था।
गतिविधि 19.1 – सुलेखन (कैलीग्राफी) में अक्षरों पर ध्यान दें
भारतीय रुपये के प्रतीक में आप कौन-सा अक्षर ढूँढ़ सकते हैं?
भारतीय रुपये का प्रतीक देवनागरी लिपि के 'र' अक्षर से लिया गया है। इसकी शीर्ष क्षैतिज रेखा, जिसे देवनागरी में शिरो-रेखा कहा जाता है, प्रतीक को भारतीय पहचान देती है। इसके साथ ही दूसरी क्षैतिज रेखा हमारे राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों का प्रतिनिधित्व करती है।
आप केवल अक्षरों के आकार और रेखाओं से खेलते हुए विचारों से समृद्ध हो जाते हैं। 'अतुल्य भारत' के लोगो (प्रतीक) को ध्यान से देखें। 'विस्मयाधिबोधक चिह्न' को अलग तरीके से रखना इसे अधिक प्रभावी बनता है। अन्य प्रतीकों में आप किस तरह का अक्षर प्रयोग देखते हैं? चर्चा करें और अपने अवलोकनों को लिखें।
गतिविधि 19.2 – अक्षर को ढूँढ़ना -?
डिजिटल तकनीक से पहले, छपाई की लंबी प्रक्रिया होती थी। छपाई प्रक्रियाओं के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी समाचार पत्र कार्यालय या प्रिंट स्टूडियो में जाकर इसकी जानकारी प्राप्त करें।
आइए हम अपने आस-पास पाई जाने वाली छपाई सामग्री का उपयोग करके "छपाई सामग्री का खजाना" खोजें। गतिविधि शुरू करते हैं।
चरण 1- कुछ समाचार पत्र और छपाई सामग्री एकत्र करें। जैसे कि निमंत्रण कार्ड, खाद्य पैकेजिंग सामग्री और पुरानी पत्र-पत्रिकाएँ इकट्ठा करें।चरण 2 - चर्चा करें और इस बारे में अपने विचारों को लिखें-
- शब्द और अक्षर कैसे व्यवस्थित है?
- आपको क्यों लगता है कि अक्षर विभिन्न रंग और आकार में छापे जाते हैं?
- अक्षरों और शब्दों की शैली में आपको क्या आकर्षक लगता है?
- छपाई सामग्री पर कौन-से शब्द सबसे महत्वपूर्ण हैं और क्यों?
चरण 3- विभिन्न आकारों और शैलियों के शब्दों और अक्षरों को काटें।
चरण 4– समान अक्षर शैलियों को खोजने के लिए समूहों में कार्य करें। उदाहरण के लिए सजावटी, मोटा, तिरछा, पतला, संकीर्ण आदि।
चरण 5– समान अक्षर शैलियों का समूहीकरण करके उन्हें A3 आकार के कागज पर चिपकाएँ।
गतिविधि 19.3 - समानता लेकिन भिन्नता
नीचे दी गई तालिका को ध्यान से देखिए। इसमें एक ही अक्षर के विभिन्न संस्करण का अलग-अलग तरीकों में रूपांतर होता दिखाया गया हैं।
क्या आप एक ही अक्षर को इतने लिखे गए तरीकों से पढ़ पाते हैं? यह मानव या पशु शरीर जैसा है। हमारे शरीर के अंग एक जैसे होते हुए भी हम अलग दिखते हैं। मानव शरीर रचना विज्ञान हड्डियों, मांसपेशियों, जोड़ों की संख्या का पता लगाता है। इसी तरह, अक्षरों की संरचना एक वर्ण के विभिन्न भागों को प्रकट होती है।
चरण 1– किसी भी लिपि से एक अक्षर चुनें जिससे आप परिचित हों।
चरण 2 - कागज की एक शीट लें और उस पर वह अक्षर विभिन्न तरीकों से लिखें जिसे आपने चुना है।
चरण 3– अक्षरों को स्वतंत्र रूप से लिखना शुरू करें। अपने दूसरे हाथ का उपयोग करें और देखें कि कौन-सी रेखाएँ और आकृतियाँ बनती हैं। विभिन्न प्रकार के पेन, तूलिका, पेंसिल और अन्य लेखन उपकरणों का उपयोग करें। अक्षरों का बड़ा और छोटा चित्रण करें।
चरण 4- उसी अक्षर की संरचना के लिए एक और कागज लें, एक आधार रेखा, एक शीर्ष रेखा और एक मध्य रेखा चित्रित करें।चरण 5- ढाँचा बनाने के लिए ऊर्ध्वाधर रेखाएँ चिह्नित करें। इससे आपको प्रत्येक अक्षर की चौड़ाई का अनुमान लगाने में सहायता मिलेगी, साथ ही प्रत्येक अक्षर के बीच की जगह का भी अनुमान लगाने में सहायता मिलेगी।
चरण 6- एक ही अक्षर के पाँच रूप बनाएँ। अलग-अलग शैलियाँ प्राप्त करने के लिए अक्षरों की ऊँचाई, चौड़ाई, कोण और रेखा की मोटाई बदलने के लिए दिशा-निर्देशों का उपयोग करें। अक्षर को लिखते समय उसकी संरचना को ध्यान में रखें।
चरण 7- अपने कार्य को अपने साथियों के साथ साझा करें। चर्चा करें कि आपने एक अक्षर को अलग-अलग तरीकों से कैसे लिखा है?
गतिविधि 19.4 - बोलने जैसा लिखना
जब आप लोगों से बात करते हैं तो आप अपने स्वर में बदलाव करते हैं, जिससे स्वर प्रसार में विविधता आती है। ऐसा करना विभिन्न भावनाओं को व्यक्त करता है। उदाहरण के लिए, जब आप अपने मित्र को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हैं तो आप उत्साह और आनंद के साथ बोलते हैं, जबकि जब आप कहते हैं कि आप शीघ्र ठीक हो जाओगे तो आप इसे धीरज और चिंता के साथ कहते हैं।
अगर हम इसे लेखन से जोड़कर देखें तो ऐसा हो सकता है कि बलपूर्वक बोले गए शब्दों के स्वर को बड़े मोटे अक्षरों में जबकि धीमे या नरम शब्दों के स्वर को छोटे अक्षरों में लिखा जाए।
अब क्यों न आप अक्षरों को विभिन्न तरीकों से आकर देने की कोशिश करें, ताकि शब्दों के अर्थ और भावनाओं को व्यक्त किया जा सके।
दाईं ओर दिए गए उदाहरण को देखें और अपनी ऐसी भाषा या लिपि में स्वयं के अक्षर बनाएँ जिसमें आप सहज अनुभव करें।
शिक्षकों के लिए निर्देश- कैलीग्राफी कौशल का उपयोग
विभिन्न व्यवसायों और पेशों में किया जाता है, जैसे- टैटू बनाना, लेखन-चित्रण कला (ग्राफिक आर्ट), कला चित्रण एनीमेशन इत्यादि।
गतिविधि 19.5 पोस्टर में कैलीग्राफी
एक नाम में सब कुछ
जिस प्रकार नवजात शिशु का नाम रखने में बहुत सोच-विचार किया जाता है। ठीक उसी प्रकार पुस्तकों, नाटकों, फिल्मों और जागरूकता अभियानों के शीर्षकों को तय करने में भी काफी सोच-विचार किया है। उन विभिन्न पोस्टरों को याद करें जिन्हें आपने देखा है। उनकी विभिन्न प्रकार की जानकारी और पोस्टर पर चर्चा करें। अपने कैलीग्राफी कौशल का उपयोग नाटक या पोस्टर का चित्रण या स्कूल के लिए अन्य कार्यक्रम के लिए करें।
चरण 1 - अपने नाटक या कार्यक्रम के लिए कोई नाम या शीर्षक चुनें।चरण 2- शीर्षक के लिए अक्षरों की शैली, रंग और आकार तय करें। आपके अक्षरों की शैली से पाठकों को घटना की प्रकृति के बारे में जानकारी मिल सकती है। उदाहरण के लिए यह एक नाटक है तो आप यह संकेत दे सकते हैं कि नाटक हास्य है, दुःखद है या इसमें रहस्य है।
चरण 3- लिखते समय दिशा-निर्देशों और मार्जिन (सीमा) को चिह्नित करें।
पोस्टर में दी गई जानकारी शीर्षक की अक्षर शैली को अंतिम रूप देने के बाद, पोस्टर पर अन्य जानकारी लिखें जैसे-
- 1. दिनांक, समय एवं स्थान;
- 2. संपर्क जानकारी, और
- 3. लोगों, संगठनों, संस्थाओं, प्रदर्शन करने वाले समूहों आदि के नाम।
इसके लिए, आपकी अक्षर शैलियाँ स्पष्ट और आसानी से पढ़ने योग्य होनी चाहिए। उसके महत्व को दर्शाने के लिए उपयुक्त आकार चुनें और लिखते समय दिशा- निर्देशों का पालन करें।
दृश्य जोड़ें और अपना पोस्टर प्रदर्शित करें।
आकलन
| अध्याय 19 - सुलेखन (कैलीग्राफी) की कला | ||||
|---|---|---|---|---|
| सी.जी. | सी | सीखने के प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| 1 | 1.1 | अक्षरों और शब्दों को विभिन्न शैलियों में लिखता है, ताकि भावनाएँ और संवेदनाएँ व्यक्त कर सकें। | ||
| 2. | 2.2 | शैलियों को व्यक्तिगत विचारों और भावनाओं से जोड़ता है। | ||
| 3 | 3.1 | लेखन चित्रण (कैलीग्राफी) करते समय विभिन्न माध्यमों और साधनों के साथ प्रयोग करता है। | ||
| 3 | 3.2 | अपनी कलाकृति बनाते समय परिचित अक्षर शैलियों की पहचान कराता है और इनका अपनी कलाकृति में उपयोग करता है। | ||
| 3.2 | लेखन चित्रण (कैलीग्राफी) परियोजनाओं में अंतराल (मार्जिन), संरेखन आदि के प्रति सतर्कता दिखाता है। | |||
शिक्षक की टिप्पणी और विद्यार्थी का अवलोकन
.....................................................
.....................................................
.....................................................
.....................................................
.....................................................
संकलनात्मक आकलन
| आकलन के लिए गतिविधि (उदाहरण) | आकलन के लिए मानदंड | |
|---|---|---|
| व्यक्तिगत |
|
ध्यान दें-
|
| समूह | * किसी कपड़े के अवांछित टुकड़ों या रेशे का उपयोग करके गुड़िया या कपड़े का खिलौना बनाएँ। |
|
शिक्षक की टिप्पणी और विद्यार्थी का अवलोकन
.....................................................
.....................................................
.....................................................
.....................................................
.....................................................